विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए 'पीएम विश्वकर्मा' लॉन्च किया
पीएम विश्वकर्मा लोगो, टैगलाइन 'सम्मान सामर्थ्य समृद्धि' और पोर्टल लॉन्च किया
कस्टमाइज्ड स्टाम्प शीट और टूलकिट पुस्तिका का विमोचन किया
18 लाभार्थियों को विश्वकर्मा प्रमाण-पत्र वितरित
“मैं यशोभूमि देश के हर श्रमिक को, हर विश्वकर्मा को समर्पित करता हूं”
"यह समय की मांग है कि विश्वकर्मा को मान्यता और सहायता दी जाए"
"आउटसोर्स का काम हमारे विश्वकर्मा मित्रों को मिलना चाहिए और उन्हें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनना चाहिए"
"इस बदलते समय में, विश्वकर्मा मित्रों के लिए प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी और उपकरण महत्वपूर्ण हैं"
"मोदी उन लोगों के साथ खड़ा है, जिनकी परवाह करने के लिए कोई उनके साथ नहीं है"
"वोकल फॉर लोकल पूरे देश की जिम्मेदारी है"
"आज का विकसित भारत हर सेक्टर में अपनी एक नई पहचान बना रहा है"
'यशोभूमि का संदेश जोरदार और स्पष्ट है, यहां आयोजित होने वाला कोई भी कार्यक्रम सफलता और प्रसिद्धि प्राप्त करेगा
"भारत मंडपम और यशोभूमि सेंटर दिल्ली को सम्मेलन पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र बनाएंगे"
"भारत मंडपम और यशोभूमि दोनों भारतीय संस्कृति और अत्याधुनिक सुविधाओं का संगम हैं, और ये भव्य प्रतिष्ठान विश्व के सामने भारत की गाथा व्यक्त करते हैं"
"हमारे विश्वकर्मा साथी मेक इन इंडिया के गौरव हैं और यह अंतराष्ट्रीय सम्मेलन केन्द्र विश्व के समक्ष इस गौरव को प्रदर्शित करने का एक माध्यम बनेगा"


भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सभी साथीगण, देश के कोने-कोने से यहां इस भव्य भवन में पधारे मेरे प्यारे भाई-बहन, देश के 70 से ज्यादा शहरों से जुड़े मेरे सभी साथी, अन्य महानुभाव, और मेरे परिवारजनों।

आज भगवान विश्वकर्मा की जयंती है। ये दिन हमारे पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को समर्पित है। मैं समस्त देशवासियों को विश्वकर्मा जयंती की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। मुझे खुशी है कि आज के दिन मुझे देशभर के लाखों विश्वकर्मा साथियों से जुड़ने का अवसर मिला है। अब से कुछ देर पहले मेरी अनेकों विश्वकर्मा भाई-बहनों से बात भी हुई है। और मुझे यहां आने में विलंब भी इसलिए हुआ कि मैं उनसे जरा बातें करने में लग गया और नीचे जो एक्जीबिशन बना है वह भी इतना शानदार है कि निकलने का मन नहीं करता था और मेरा आप सबसे भी आग्रह है कि आप जरूर इसको देखें। और मुझे बताया गया है कि अभी 2-3 दिन और चलने वाला है, तो खासकर के दिल्लीवासियों से मैं जरूर कहूंगा कि वो जरूर देखें।

साथियों,

भगवान विश्वकर्मा के आशीर्वाद से, आज प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का आरंभ हो रहा है। हाथ के हुनर से, औज़ारों से, परंपरागत रूप से काम करने वाले लाखों परिवारों के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना, उम्मीद की एक नई किरण बनकर आ रही है।

मेरे परिवारजनों,

इस योजना के साथ ही आज देश को इंटरनेशनल एक्जीबिशन सेंटर-यशोभूमि भी मिला है। जिस प्रकार का काम यहां हुआ है, उसमें मेरे श्रमिक भाइयों और बहनों का, मेरे विश्वकर्मा भाइयों-बहनों का तप नजर आता है, तपस्या नजर आती है। मैं आज यशोभूमि को देश के हर श्रमिक को समर्पित करता हूं, हर विश्वकर्मा साथी को समर्पित करता हूं। बड़ी संख्या में हमारे विश्वकर्मा साथी भी यशोभूमि के लाभार्थी होने वाले हैं। आज इस कार्यक्रम में जो हजारों विश्वकर्मा साथी हमारे साथ वीडियो के माध्यम से जुड़े हुए हैं, उन्हें मैं विशेष तौर पर ये बताना चाहता हूं। गांव-गांव में आप जो सामान बनाते हैं, जो शिल्प, जिस आर्ट का सृजन करते हैं, उसको दुनिया तक पहुंचाने का ये बहुत बड़ा Vibrant Center, सशक्त माध्यम बनने वाला है। ये आपकी कला, आपके कौशल, आपकी आर्ट को दुनिया के सामने शोकेस करेगा। ये भारत के लोकल प्रॉडक्ट को ग्लोबल बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा।

मेरे परिवारजनों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है- 'यो विश्वं जगतं करोत्येसे स विश्वकर्मा' अर्थात जो समस्त संसार की रचना या उससे जुड़े निर्माण कार्य को करता है, उसे "विश्वकर्मा" कहते हैं। हज़ारों वर्षों से जो साथी भारत की समृद्धि के मूल में रहे हैं, वो हमारे विश्वकर्मा ही हैं। जैसे हमारे शरीर में रीढ़ की हड्डी की भूमिका होती है, वैसे ही समाज जीवन में इन विश्वकर्मा साथियों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हमारे ये विश्वकर्मा साथी उस काम, उस हुनर से जुड़े हैं, जिनके बिना रोज़मर्रा की, जिंदगी की कल्पना भी मुश्किल है। आप देखिए, हमारी कृषि व्यवस्था में लोहार के बिना कुछ क्या संभव है? नहीं है। गांव-देहात में जूते बनाने वाले हों, बाल काटने वाले हों, कपड़े सिलने वाले दर्जी हों, इनकी अहमियत कभी खत्म नहीं हो सकती। फ्रिज के दौर में भी लोग आज मटके और सुराही का पानी पीना पसंद करते हैं। दुनिया कितनी भी आगे बढ़ जाए, टेक्नॉलॉजी कहीं भी पहुंच जाए, लेकिन इनकी भूमिका, इनका महत्व हमेशा रहेगा। और इसलिए आज समय की मांग है कि इन विश्वकर्मा साथियों को पहचाना जाए, उन्हें हर तरह से सपोर्ट किया जाए।

साथियों,

हमारी सरकार अपने विश्वकर्मा भाई-बहनों को और उनका सम्मान बढ़ाने का, उनका सामर्थ्य बढ़ाने और उनकी समृद्धि बढ़ाने के लिए आज सरकार एक सहयोगी बनकर के आपके पास आई है। अभी इस योजना में 18 अलग-अलग तरह का काम करने वाले विश्वकर्मा साथियों पर फोकस किया गया है। और शायद ही कोई गांव ऐसा होगा कि जहां इस 18 प्रकार के काम करने वाले लोग न हों। इनमें लकड़ी का काम करने वाले कारपेंटर, लकड़ी के खिलौने बनाने वाले कारीगर, लोहे का काम करने वाले लोहार, सोने के आभूषण बनाने वाले सुनार, मिट्टी का काम करने वाले कुम्हार, मूर्तियां बनाने वाले मूर्तिकार, जूते बनाने वाले भाई, राजमिस्त्री का काम करने वाले लोग, हेयर कटिंग करने वाले लोग, कपड़े धुलने वाले लोग, कपड़े सिलने वाले लोग, माला बनाने वाले, फिशिंग नेट बनाने वाले, नाव बनाने वाले, ऐसे अलग-अलग, तरह-तरह के काम करने वाले साथियों को शामिल किया गया है। पीएम विश्वकर्मा योजना पर सरकार अभी 13 हज़ार करोड़ रुपए खर्च करने वाली है।

मेरे परिवारजनों,

कुछ साल पहले यानी करीब 30-35 साल हो गए होंगे, मैं एक बार यूरोप में ब्रसल्स गया था। तो वहां कुछ समय था तो मुझे वहां के जो मेरे होस्ट थे वो एक जूलरी का एक्जीबिशन था वो देखने के लिए ले गए। तो मैं जिज्ञासा से जरा पूछ रहा था उनको कि भई यहां इन चीजों का मार्केट कैसा होता है, क्या होता है। तो मेरे लिए बड़ा सरप्राइज था, उन्होंने कहा साहब यहां जो मशीन से बनी हुई जूलरी है उसकी डिमांड कम से कम होती है, जो हाथ से बनी हुई जूलरी है लोग महंगे से महंगे पैसे देकर भी उसको खरीदना पसंद करते हैं। आप सभी हाथ से, अपने हुनर से जो बारीक काम करते हैं, दुनिया में उसकी डिमांड बढ़ रही है। आजकल हम देखते हैं कि बड़ी-बड़ी कंपनियां भी अपने प्रॉडक्ट बनाने के लिए अपना काम दूसरी छोटी-छोटी कंपनियों को देती हैं। ये पूरी दुनिया में एक बहुत बड़ी इंडस्ट्री है। आउटसोर्सिंग का काम भी हमारे इन्हीं विश्वकर्मा साथियों के पास आए, आप बड़ी सप्लाई चेन का हिस्सा बनें, हम इसके लिए आपको तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हम दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां, आपके दरवाज़े पर आकर के खड़ी रहे, आपके दरवाज़े पर दस्तक दें, वो क्षमता आपके अंदर लाना चाहते हैं। इसलिए ये योजना विश्वकर्मा साथियों को आधुनिक युग में ले जाने का प्रयास है, उनका सामर्थ्य बढ़ाने का प्रयास है।

साथियों,

बदलते हुए इस समय में हमारे विश्वकर्मा भाई-बहनों के लिए ट्रेनिंग-टेक्नोलॉजी और टूल्स बहुत ही आवश्यक हैं। विश्वकर्मा योजना के जरिए आप सब साथियों को सरकार के द्वारा ट्रेनिंग देने पर बहुत जोर दिया गया है। ट्रेनिंग के दौरान भी क्योंकि आप रोजमर्रा की मेहनत करके कमाने-खाने वाले लोग हैं। इसलिए ट्रेनिंग दरमियान भी आपको हर रोज 500 रुपए भत्ता सरकार की तरफ से दिया जाएगा। आपको आधुनिक टूलकिट के लिए 15 हजार रुपये का टूलकिट वाउचर भी मिलेगा। आप जो सामान बनाएंगे, उसकी ब्रांडिंग और पैकेजिंग से लेकर मार्केटिंग में भी सरकार हर तरह से मदद करेगी। और बदले में सरकार आपसे ये चाहती है कि आप टूलकिट उसी दुकान से खरीदें जो GST रजिस्टर्ड है, कालाबाजारी नहीं चलेगी। और दूसरा मेरा आग्रह है ये टूल्स मेड इन इंडिया ही होने चाहिए।

मेरे परिवारजनों,

अगर आप अपना कारोबार बढ़ाना चाहतें हैं, तो शुरुआती पूंजी की दिक्कत ना आए इसका भी ध्यान सरकार ने रखा है। इस योजना के तहत विश्वकर्मा साथियों को बिना गारंटी मांगे, जब बैंक आपसे गारंटी नहीं मांगती है तो आपकी गारंटी मोदी देता है। बिना गारंटी मांगे 3 लाख रुपए तक का कर्ज मिलेगा, ऋण मिलेगा। और ये भी सुनिश्चित किया गया है कि इस ऋण का ब्याज बहुत ही कम रहे। सरकार ने प्रावधान ये किया है कि पहली बार में अगर आपकी ट्रेनिंग हो गई, आपने नए टूल ले लिए तो पहली बार आपको 1 लाख रुपए तक ऋण मिलेगा। और जब आप ये चुका देंगे ताकि पता चलेगा कि काम हो रहा है तो फिर आपको 2 लाख रुपए का ऋण और उपलब्ध होगा।

मेरे परिवारजनों,

आज देश में वो सरकार है, जो वंचितों को वरीयता देती है। ये हमारी सरकार ही है जो वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के जरिए, हर जिले के विशेष उत्पादों को बढ़ावा दे रही है। हमारी सरकार ने ही पहली बार रेहड़ी-पटरी-ठेले वालों को पीएम स्वनिधि के तहत मदद की है, बैंक के दरवाजे उनके लिए खोल दिए हैं। ये हमारी ही सरकार है जिसने आजादी के बाद पहली बार बंजारा और घुमंतू जनजातियों की परवाह की। ये हमारी ही सरकार है जिसने आजादी के बाद पहली बार दिव्यांगजनों के लिए हर स्तर, हर स्थान पर विशेष सुविधाएं विकसित की हैं। जिसे कोई नहीं पूछता, उसके लिए गरीब का ये बेटा मोदी, उसका सेवक बनकर आया है। सबको सम्मान का जीवन देना, सभी तक सुविधा पहुंचाना, ये मोदी की गारंटी है।

मेरे परिवारजनों,

जब Technology और Tradition मिलते हैं, तो क्या कमाल होता है, ये पूरी दुनिया ने G20 क्राफ्ट बाजार में भी देखा है। G20 में हिस्सा लेने के लिए जो विदेशी मेहमान आए थे, उनको भी गिफ्ट में हमने विश्वकर्मा साथियों के बनाए सामान ही भेंट में दिए। 'लोकल के लिए वोकल' का ये समर्पण हम सभी का, पूरे देश का दायित्व है। क्यों इसमें ठंडे पड़ गए, मैं करूं तो ताली बजाते हो, आपको करने की बात आए तो रूक जाते हो। आप मुझे बताइए हमारे देश में जो चीजें हमारे कारीगर बनाते हैं, हमारे लोग बनाते हैं वो दुनिया के बाजार में पहुंचनी चाहिए कि नहीं पहुंचनी चाहिए? दुनिया के बाजार में बिकनी चाहिए कि नहीं बिकनी चाहिए? तो ये काम पहले लोकल के लिए वोकल बनना पड़ेगा और फिर लोकल को ग्लोबल करना होगा।

साथियों,

अब गणेश चतुर्थी, धनतेरस, दीपावली सहित अनेक त्योहार आने वाले हैं। मैं सभी देशवासियों से लोकल खरीदने का आग्रह करुंगा। और जब मैं लोकल खरीदने की बात करता हूं तो कुछ लोगों को इतना ही लगता है कि दिवाली के दिये ले ले बस और कुछ नहीं। हर छोटी-मोटी चीज, कोई भी बड़ा सामान खरीदें जिसमें हमारे विश्वकर्मा साथियों की छाप हो, भारत की मिट्टी और पसीने की महक हो।

मेरे परिवारजनों,

आज का विकसित होता हुआ भारत, हर क्षेत्र में अपनी नई पहचान बना रहा है। कुछ दिन पहले हमने देखा है कि कैसे भारत मंडपम को लेकर दुनिया भर में चर्चा हुई है। ये इंटरनेशनल एक्जीबिशन सेंटर-यशोभूमि इसी परंपरा को और भव्यता से आगे बढ़ाता है। और यशोभूमि का सीधा-सीधा संदेश है इस भूमि पर जो भी होगा यश ही यश प्राप्त होने वाला है। ये भविष्य के भारत को शोकेस करने का एक शानदार सेंटर बनेगा।

साथियों,

भारत के बड़े आर्थिक सामर्थ्य, बड़ी व्यापारिक शक्ति को शोकेस करने के लिए, भारत की राजधानी में जैसा सेंटर होना चाहिए, ये वो सेंटर है। इसमें मल्टीमोडल कनेक्टिविटी और पीएम गतिशक्ति के दर्शन एक साथ होते हैं। अब देखिए, ये एयरपोर्ट के पास में है। इसको एयरपोर्ट से कनेक्ट करने के लिए मेट्रो की सुविधा दी गई है। आज यहां मेट्रो स्टेशन का भी उद्घाटन हुआ है। ये मेट्रो स्टेशन सीधा इस कॉम्पलेक्स से जुड़ा हुआ है। इस मेट्रो सुविधा के चलते दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से लोगों का समय, बहुत आसानी से कम समय में ये यहां पहुंच पाएंगे। यहां जो लोग आएंगे, उनके लिए ठहरने का, मनोरंजन का, शॉपिंग का, टूरिज्म का, पूरा इंतज़ाम यहीं इस पूरे इकोसिस्टम में बनाया हुआ है, पूरी व्यवस्था में बना हुआ है।

मेरे परिवारजनों,

बदलते हुए समय के साथ विकास के, रोजगार के नए-नए सेक्टर्स भी बनते हैं। आज से 50-60 साल पहले कोई इतनी बड़ी IT इंडस्ट्री के बारे में सोच भी नहीं सकता था। आज से 30-35 साल पहले सोशल मीडिया भी एक कल्पना भर ही था। अब दुनिया में एक और बड़ा सेक्टर बन रहा है, जिसमें भारत के लिए असीम संभावनाए हैं। ये सेक्टर है- कॉन्फ्रेंस टूरिज्म का। पूरी दुनिया में कॉन्फ्रेंस टूरिज्म इंडस्ट्री 25 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। हर साल दुनिया में 32 हजार से भी ज्यादा बड़ी एक्जीबिशन लगती हैं, एक्सपो होते हैं। आप कल्पना कर सकते हैं जिस देश की आबादी दो-पांच करोड़ होगी लोग वहां भी कर देते हैं, यहां तो 140 करोड़ की आबादी है, जो आएगा वो मालामाल हो जाएगा। बहुत बड़ा मार्केट है। Conference Tourism के लिए आने वाले लोग एक सामान्य टूरिस्ट की अपेक्षा, कई गुना ज्यादा पैसा खर्च करते हैं। इतनी बड़ी इंडस्ट्री में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ एक परसेंट है, सिर्फ एक परसेंट। भारत की ही अनेकों बड़ी कंपनियां हर साल अपने इवेंट्स बाहर कराने के लिए मजबूर हो जाती हैं। आप कल्पना कर सकते हैं कि देश और दुनिया का इतना बड़ा मार्केट हमारे सामने है। अब आज का नया भारत, खुद को Conference Tourism के लिए भी तैयार कर रहा है।

और साथियों आप सब जानते हैं, Adventure Tourism वहीं होगा जहां एडवेंचर के साधन-संसाधन हों। Medical Tourism वहीं होगा जहां आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं हों। Spirititual Tourism वहीं होगा, जहां ऐतिहासिक, धार्मिक, स्पीरिचुअल एक्टिविटी हों। Heritage Tourism भी वहीं होगा, जहां हिस्ट्री और हेरिटेज का बाहुल्य हो। इसी तरह, Conference Tourism भी वहीं होगा, जहां Events के लिए, Meetings के लिए, Exhibition के लिए, जरूरी साधन-संसाधन हों। इसलिए भारत मंडपम और यशोभूमि ये ऐसे सेंटर हैं, वो अब दिल्ली को कॉन्फ्रेंस टूरिज्म का सबसे बड़ा हब बनाने जा रहे हैं। अकेले यशोभूमि सेंटर से ही लाखों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। यशोभूमि भविष्य में एक ऐसा स्थान बनेगा जहां दुनिया भर के देशों से लोग International Conference, Meeting, Exhibition इन सबके लिए queue लगने वाली है।

आज मैं दुनिया भर के देशों में Exhibition और Event Industry से जुड़े लोगों को हिन्दुस्तान में, दिल्ली में, यशोभूमि में विशेष रूप से आमंत्रित करता हूं। मैं देश की, पूरब-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण, हर क्षेत्र की Film Industry, Tv Industry को आमंत्रित करूंगा। आप अपने Award समारोह, Film Festival यहां आयोजित करिए, Film के पहले Show यहां आयोजित करिए। मैं International Event Companies, Exhibition Sector से जुड़े लोगों को भी भारत मंडपम और यशोभूमि से जुड़ने को आमंत्रित करता हूं।

मेरे परिवारजनों,

मुझे विश्वास है, भारत मंडपम हो या यशोभूमि, ये भारत के आतिथ्य, भारत की श्रेष्ठता और भारत की भव्यता के प्रतीक बनेंगे। भारत मंडपम और ये यशोभूमि, दोनों में ही भारतीय संस्कृति और अत्याधुनिक सुविधाओ, इन दोनों का संगम है। आज ये दोनों भव्य प्रतिष्ठान, नए भारत की यशगाथा, देश और दुनिया के सामने गा रहे हैं। इनमें नए भारत की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब भी है, जो अपने लिए सबसे बेहतरीन सुविधाएं चाहता है।

साथियों मेरे शब्द लिखकर रखिए भारत अब रुकने वाला नहीं है। हमें चलते रहना है, नए लक्ष्य बनाते रहना है और उन नए लक्ष्यों को पाकर के ही चैन से बैठना है। और ये हम सभी के परिश्रम और परिश्रम की पराकाष्ठा देश को 2047 में दुनिया के सामने डंके की चोट पर विकसित भारत के रूप में खड़ा कर देंगे ये संकल्प लेकर के चलना है। ये समय हम सभी के लिए जुट जाने का समय है। हमारे विश्वकर्मा साथी, 'मेक इन इंडिया' की शान हैं और ये इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर की इस शान को दुनिया के सामने शोकेस करने का माध्यम बनेगा। एक बार फिर सभी विश्वकर्मा साथियों को ये बहुत बड़ी आशावादी योजनाओं के लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं। ये नया सेंटर, यशोभूमि, भारत के यश का प्रतीक बने, दिल्ली की शान को और बढ़ाए इसी मंगलकामना के साथ आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।

नमस्कार।

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आज दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही है: G7 समिट में पीएम मोदी
June 16, 2026

राष्ट्रपति मैक्रों,
Your Excellencies,

नमस्कार!

G-7 समिट में हमारे गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए मैं राष्ट्रपति मैक्रों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।

Friends,

आज का विश्व पहले से कहीं अधिक inter-connected और inter-dependent है। किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती। Mobility, data, capital, technology, ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं।

ऐसे समय में Partnerships का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। लेकिन साझेदारियाँ तभी सफल होती हैं जब उनके केंद्र में विश्वास हो। आज सबसे महत्वपूर्ण Strategic Asset कोई mineral, technology या market नहीं, बल्कि आपसी विश्वास है।

विश्वास कि टेक्नॉलजी और supply chains को हथियार के रूप में नहीं, global good के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। विश्वास कि विकास के अवसर कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे। विश्वास कि वैश्विक संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे।

Friends,

पिछली सदी में मानवता को दो विश्व युद्धों से गुज़रना पड़ा। अनेक बलिदानों के बाद विश्व समुदाय ने शांति, स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए व्यवस्थाएं विकसित की। इन व्यवस्थाओं का आधार भी trust ही था।

किन्तु अनेक दशकों से, अनेक पीढ़ियों के योगदान से बनाए गए विश्वास को आज चोट पहुँच रही है। कोविड ने हमें आईना दिखाया कि trust और solidarity के दावे कितने खोखले थे।

Today the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust. And the future of our partnerships depends on building this trust.

अमेरिका के राष्ट्रपति रोनल्ड रेगन ने कहा था: Trust but Verify. यह आज के समय में भी प्रासंगिक है। भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप trusted rules based order का निर्माण करें।

Friends,

भारत ने सदैव विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है। हमारे सभी प्रयास “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” यानि, welfare and happiness for all के मूल सिद्धांत पर आधारित रहे हैं।

भारत का अनुभव दिखाता है कि विकास सबसे अधिक प्रभावी तब होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा हो। यही सिद्धांत हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का भी आधार है। इसी सोच के साथ भारत ने International Solar Alliance, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस, Mission LiFE, और “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी वैश्विक पहलों को आगे बढ़ाया है।

संकट के समय भारत ने First Responder के रूप में सभी देशों की सहायता करना अपना दायित्व समझा है। कोविड महामारी के दौरान भारत ने डेढ़ सौ से अधिक देशों को दवाइयाँ और vaccines उपलब्ध कराईं।

श्रीलंका में cyclone हो, अफगानिस्तान में भूकंप हो, मोज़ाम्बिक में floods हों, या क्यूबा और जमैका में hurricane, भारत ने सदैव "Humanity First" के सिद्धांत पर कार्य किया है। हमारी विकास साझेदारियाँ भी इसी भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। हमारे प्रयास पार्टनर देशों में capacity building और कौशल विकास पर केन्द्रित रहे हैं।

भारत का मानना है: The true test of partnership is not what we build for others, but what we enable others to build for themselves.

Friends,

आज ग्लोबल साउथ की विश्व समुदाय से बहुत उम्मीदें हैं। किन्तु उनकी अपेक्षा सहारे की नहीं, साथ की है। वे वैश्विक विकास के लाभार्थी नहीं, उसके भागीदार बनना चाहते हैं।

हमें donor–recipient की सोच से आगे बढ़कर, equal पार्टनर्स के रूप में काम करना होगा। उनके पास-पास नहीं, साथ-साथ चलना होगा। साझेदारी को dependency के बजाय, dignity से जोड़ना होगा। इन प्रयासों से हम भावी पीढ़ियों के सतत विकास की मजबूत नींव रख सकेंगे।

Friends,

अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक बन सकती हैं, जब हम साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करें। भारत का दृढ विश्वास है कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे तनावों और युद्धों का स्थायी समाधान dialogue, diplomacy और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्ग से ही संभव है।

हम west asia में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष से west asia में हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। होर्मुज़ स्ट्रेट में maritime ट्रेड में आई बाधा के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। भारत के कई civilians को जान गंवानी पड़ी। Global maritime ट्रेड के माध्यम से सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, और Seafarers बिना भय के अपना कार्य कर सकें।

Friends,

भारत इन विषयों पर सभी पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

बहुत-बहुत धन्यवाद।