आपने 5 साल तक डबल इंजन की सरकार का काम देखा है। गरीब का विकास हो, मूलभूत सुविधाएं मिलें, इसे हमने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है : पीएम मोदी
वंशवादी अब जान गए हैं कि उनकी नाव डूब गई है, इसलिए वे अब ईवीएम और चुनाव आयोग को दोष दे रहे हैं: यूपी की रैली में पीएम मोदी
पिछली सरकार में माफिया और जबरन वसूली करने वालों के कारण क्षेत्र का विकास रुका हुआ था: यूपी के कासगंज में पीएम मोदी

भारत माता की, भारत माता की

यहां अनेक जिलों से आप डबल इंजन की सरकार को आशीर्वाद देने के लिए आए हैं। मेरी नजर जहां पहुंचती है उससे भी आगे मुझे लोग ही लोग नजर आते हैं। मैं सबसे पहले तो आपकी क्षमा चाहता हूं कि मुझे आने में विलंब हो गया। आज उत्तराखंड में मेरा सुबह कार्यक्रम था, और इतनी जबरदस्त भीड़ थी इतना बड़ा उत्साह का वातावरण था कि मैं बोलता ही गया और मुझे समय का ध्यान ही नहीं रहा और उसके कारण मैं लेट हो गया, तो मैं आप सब की क्षमा चाहता हूं। लेकिन इसके बावजूद भी आप जिस प्यार के साथ आशीर्वाद देने के लिए आए हैं मेरे लिए बहुत बड़ा सौभाग्य है, मैं फिर से एक बार आभार व्यक्त करना चाहता हूं। मैं श्रीमान योगी जी को भी अभिनंदन देता हूं कि अभी जो उन्होंने की वो वाकई, आप कल्पना कर सकते हैं कि भारत की एकता क्या है? लता मंगेशकर जी गोवा की बेटी, उनका पैतृक विस्तार गोवा, राम की भक्त, राम से जुड़े भजनों को अमर कर दिया, वो लता मंगेशकर जी अयोध्या में एक चौराहे का नाम उनपर करना मैं समझता हूं, जो भी राम मंदिर के दर्शन के लिए आएगा वो यहीं से निकलेगा तो लता मंगेशकर जी के भजन भी याद आएंगे और भारत रत्न लता मंगेशकर जी के लिए गर्व भी होगा। और दूसरा योगी जी का फिल्म सिटी बनाने का सपना है, युवाओं को फिल्म जगत में अवसर मिले इसके लिए लता मंगेशकर एकेडमी बनाकर के फरफॉरमेंस के लिए गीत संगीत के लिए नई पीढ़ी को तैयार करने का काम जो किया है उसके लिए योगी जी आपको, आपकी सरकार को और उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी को मैं बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं। आपके इस निर्णय के लिए। एटा, फर्रुखाबाद, हाथरस, फिरोज़ाबाद और बरेली के अनेक स्थानों से भी तकनीक के माध्यम से वर्चुअली जुड़े हमारे सभी भाइयों बहनों को भी आज मैं यहां से प्रणाम करता नमस्कार करता हूं। यहां मेरे नवजवानों से भी विनती है, मैं आपकी तरफ देखकर के बोलूंगा आप चिंता मत कीजिए, लेकिन आगे आने की कोशिश मत कीजिए, जगह ही नहीं है, बिना कारण किसी को नुकसान हो जाएगा भइया। प्लीज, आपलोग खड़े रहिए मेरा भरपूर प्यार आपकी तरफ है, चिंता मत कीजिए। बहुत-बहुत इतना प्यार, इतना आशीर्वाद, कासगंज के आप सभी भाइयों और बहनों का भी मैं आदरपूर्वक अभिनंदन करता हूं। मैं तुलसीदास जी को भी नमन करता हूं।

साथियों,

आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्य तिथि है। इसी उत्तर प्रदेश की धरती का रत्न, आज हम उनका पुण्य स्मरण कर रहे हैं। पंडित जी ने
पूरा जीवन अंत्योदय के लिए समर्पित किया, दीनहीन के जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास किया। मैं उन्हें आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। कासगंज का, और मुझे जब कासगंज आया हूं तो बाबू जी की याद आना बहुत स्वाभाविक है। कल्याण सिंह जी मेरे जीवन में उनका बहुत बड़ा संबंध रहा, मुझे उनकी उंगली पकड़ कर चलने का सौभाग्य मिला और जब कासगंज में आया हूं तो बाबू जी के प्रति कासगंज का प्यार कितना रहा है वो आप भी जानते हैं और मैं भी जानता हूं। उनकी प्रेरणा से भाजपा, निरंतर गरीबों की, दलितों की, पिछड़ों की, जनता जनार्दन की सेवा में दिन रात जुटी हुई है।

साथियों,

कल यूपी में पहले चरण का मतदान पूरा हुआ है। लोगों ने भारी संख्या में घरों से निकलकर यूपी को सुरक्षित रखने के लिए, यूपी के विकास के लिए काफी मात्रा में कमल को वोट दिया है। विशेष रूप से हमारी बहन-बेटियों ने जमकर के मतदान किया है। भाइयों-बहनों जो रुझान आए हैं, वो ये बता रहे हैं कि पहले चरण में भाजपा का परचम लहरा रहा है। और कल से कल दोपहर के बाद उन नेताओं के जितने इंटरव्यू आए हैं उनका चेहरा ऐसा लटका हुआ है। अब वे खुलकर के परिवार की बात करने लगे हैं। योगी जी आपने क्या हाल कर दिया इन लोगों का। और आप देखिए ये बात, जो घोर परिवारवादी लोग हैं, उन्हें भी पता चल गई है कि नइय्या डूब चुकी है। इसलिए उन्होंने अभी से ही EVM पर, चुनाव आयोग पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। आपको मालूम है न जैसे क्रिकेट में क्या होता है, जब बॉलर बॉल फेंकता है, जब विकेट मिलती नहीं है तो बॉल वहां पहुंचने से पहले ही चिल्लाता है अंपायर के सामने देख के ऑउट ऑउट ऑउट और फिर नहीं होता है तो अंपायर पर गुस्सा करता है और अंपायर के सामने पैर पटकता है देखा है न आपने। इस चुनाव के पहले चरण के बाद ये लोग उसी प्रकार की भाषा, वातावरण, अभी ईवीएम को दोष दो, अरे जनता जनार्दन आपको स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है अब उत्तर प्रदेश को गुंडाराज नहीं चाहिए। लेकिन मैं इन परिवारवादियों से कहना चाहता हूं। कि भाई आपका डूबना तय है, अगर ईवीएम को ही गाली देना है, तो 10 मार्च के बहुत दिन है देते रहना।

साथियों,

मोदी और योगी जी को जो आशीर्वाद और प्यार आप दे रहे हैं, उसने परिवारवादियों की नींद उड़ा दी है। कितनी कोशिश की, इन लोगों ने आपको बांटने की, जाति के नाम पर अलग-अलग करने की, लेकिन ये लोग पूरी तरह फेल हो गए। आपने एकता के दर्शन करा दिए, आपने नव जवानों के उज्ज्वल भविष्य की चिंता की। भाइयों बहनों ये परिवारवादी, महलों में जिंदगी गुजारने वालों को जमीनी सच्चाई का पता ही नहीं है। यूपी के लोगों के हित, यूपी के लोगों के लिए, हम जानते हैं देश का हित सर्वोपरि है, यूपी का हित सर्वोपरि है, यूपी का विकास सर्वोपरि है, इसलिए वो कमल के निशान पर वोट कर रहे हैं, भारतीय जनता पार्टी को इतना भारी समर्थन दे रहे हैं।

भाइयों और बहनों,

आपने पांच साल तक डबल इंजन की सरकार का काम देखा है, आपने हमें परखा है। गरीब का विकास हो, गरीब को मूलभूत सुविधाएं मिलें, इसे हमने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। लेकिन इन परिवारवादियों ने अपना घर, अपनी तिजोरी तो भरी लेकिन कभी गरीब की चिंता नहीं की। गरीब का जीवन आसान बने, ये लोग ना पहले चाहते थे और ना आज चाहते हैं। ये अफवाह फैलाने वाले प्रवृत्ति वाले परिवारवादी पूरी कोशिश कर रहे थे कि कोरोना का मुफ्त टीका गरीब परिवार को ना लगे। लेकिन गरीबों की सरकार ने गरीबों की जिंदगी सुधारने के लिए, उनके जीवन में विश्वास पैदा करने के लिए, पल-पल गरीबों की चिंता करने वाली इस डबल इंजन की सरकार ने उनके इस इरादों को सफल नहीं होने दिया। ये लोग गरीबों के अस्पतालों के नाम पर, स्वास्थ्य सेवा के नाम पर घोटाले करते थे। इनका लंबा इतिहास आप जानते हैं, लेकिन योगी जी की सरकार ने अस्पताल और मेडिकल कॉलेज का जाल बिछा दिया है। मेरा सौभाग्य था एक साथ 9 मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन करने का मुझे मौका मिला था, ये हिंदुस्तान में कभी नहीं हुआ है, जो योगी जी की सरकार में हो रहा है। इनको ये भी लगता था कि 100 साल का इतना बड़ा संकट आया है, वैश्विक महामारी कोरोना आई है, यूपी में भुखमरी फैलेगी, उस पर ये अपनी राजनीतिक रोटियां सेकेंगे। लेकिन इन लोगों को ऐहसास ही नहीं था, कि मोदी-योगी ने इनके राशन माफिया, मालूम है न राशन माफिया को किनारे लगा दिया है। महामारी के इस समय में हमारी सरकार हर गरीब को पिछले कई महीनों से मुफ्त राशन दे रही है। और हमारा संकल्प रहा, कि ऐसी बड़ी वैश्विक 100 साल की भयंकर बीमारी आई है, जीवन बचाना बड़े-बड़े समृद्ध देशों के लिए मुश्किल हो गया था। हमने जीवन बचाने के लिए जी जान से मेहनत की और हमने कोशिश की कि गरीब के घर का चूल्हा जलता रहना चाहिए। आज गरीब माताएं-बहनें मोदी को आशीर्वाद दे रहे हैं योगी को आशीर्वाद दे रहे हैं क्योंकि उनको पता है कि उनके घर में बच्चों को कभी भूखा सोना नहीं पड़ा है, घर का चूल्हा कभी बंद नहीं हुआ है। भाइयों बहनों, अब दिल्ली से गरीब, दलित, पिछड़ों के लिए निकला राशन, राशन का हर दाना, उसके जो हकदार है उनके पास जाता है, राशन माफिया नहीं है इसलिए राशन गरीब के घर पहुंच जाता है। डबल इंजन की सरकार ने एक देश, एक राशनकार्ड One Nation, One Ration Card की भी व्यवस्था की है। और उसके कारण यूपी का जो भी परिवार अगर दूसरे राज्य में गया है, उसको अब वहां भी यहां के राशन कार्ड से उसको वहां भी राशन मिलेगा। उत्तर प्रदेश क व्यक्ति कहीं बाहर रोजी-रोटी के लिए गया है तो उसकी रोजी-रोटी की चिंता मोदी करता है भाइयों-बहनों।

साथियों,
ये आपके एक वोट की ताकत है जो गरीब का भला करती है। लेकिन मैं यूपी के लोगों को सावधान भी करना चाहता हूं।ये परिवारवादी लोग इस समय इतने बौखलाए हुए हैं कि ठान कर बैठे हैं कि गरीब के लिए चल रही सारी योजनाओं को सबसे पहले ताले लगा देंगे इसको बंद करा देंगे। क्योंकि उनको लगेगा कि यदि ये योजनाएं चालू रही तो योगी और मोदी के ही ये लोग गीत गाते रहेंगे और इसलिए पहला काम उसको ताला लगाने का करेंगे। इसलिए, भाइयों बहनों क्या आप चाहते हैं कि लोक कल्याण की ये योजनाएं चालू रहे, आप चाहते हैं ये योजनाएं चालू रहे, आप चाहते हैं कि गरीब को घर मिलना चाहिए, आप चाहते है गरीब का चूल्हा जलता रहना चाहिए.. आप चाहते है गरीब के बच्चों को पढ़ने की सुविधाएं मिलनी चाहिए… आप चाहते हैं गरीब को बीमारी में दवाई के लिए व्यवस्था मिलनी चाहिए… इनके लिए ये काम ही नहीं है… इसलिए ऐसे लोगों को कभी मौका मत देना।

साथियों,

इस क्षेत्र के जिन गांवों को इन लोगों ने बेसहारा छोड़ दिया था उनको डबल इंजन की सरकार ने अच्छी सड़कें दी हैं, नदी पर अच्छे पुल दिए हैं। एटा में 11 हज़ार करोड़ रुपए का बिजली प्रोजेक्ट लगा है। गन्ना, आलू, अमरूद, आम, केला जैसी अनेक फसलें उगाने वाले छोटे किसान, फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में हमारे ईमानदार प्रयासों में एक आशा का अनुभव कर रहा है, नया विश्वास पैदा हो रहा है। हजारों करोड़ रुपए का बजट कोल्ड स्टोरेज और गोदाम बनाने के लिए तय किया गया है। किसान उत्पादक संघों यानि FPO’s में छोटे किसानों को संगठित कर उनको एक्सपोर्ट के लिए, फूड प्रोसेसिंग उद्योग लगाने के लिए मदद दी जा रही है। हमारी सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के दायरे में पशुपालकों को, मछली पालकों को भी किसान क्रडिट कार्ड की सुविधा दी है, जिसके कारण कम ब्याज पर बैंक से लोन मिल सकता है वो अपने काम को विस्तार कर सकता है और ये भी सुविधा हमने दी है। यूपी में जो बायोगैस प्लांट का नेटवर्क तैयार हो रहा है, वो किसानों को आय का एक और जरिया बनेगा।

भाइयों और बहनों,

आपने 2017 में जिनको सबक सिखाया, उनको अचानक, पहले तो उनको लगता था कि जो खेल खेलते हैं खेलते रहेंगे, लेकिन अब उनको लगा है कि विकास की किए बिना कोई चारा नहीं है, इसलिए उनको विकास याद आने लगा है। ऐसे ही घोर परिवारवादियों के लिए काका हथरसी कह गए थे- काका हथरसी ने क्या कहा था मन मैला, तन ऊजरा, भाषण लच्छेदार, ऊपर सत्याचार है, भीतर भ्रष्टाचार। विकास करने के लिए दिन रात मेहनत करनी पड़ती है, खुद को खपाना पड़ता है। ऐसा नहीं होता कि चार-साढ़े चार साल दुनिया भर में घूमते रहो, फिरते रहो, मौज-मस्ती करते रहो, गायब हो जाओ, जनता के सुख-दुख से कोई लेना-देना नहीं। और चुनाव के छह महीने पहले आकर के टपक जाओ और लोगों को भड़काने की कोशिश करो। लेकिन देश समझ चुका है पहले का जमाना नहीं रहा है। भाइयों-बहनों, जिनका जनता से सरोकार ही नहीं हो, जिसके मन में जनता की सेवा की भावना ही नहीं हो, जो सिर्फ और सिर्फ अपने परिवार से बाहर देख ही नहीं सकते हो वो यूपी का विकास कैसे करेगा? और ये बात उनको पूछनी चाहिए। आज किस यूपी वाले को गर्व नहीं होगा कि उनके मुख्यमंत्री पर कोई भी उत्तर प्रदेश का नागरिक इस बात का गर्व करेगा कि पिछले कई दशकों से चारों तरफ से भ्रष्टाचार की बू आ रही है, सरकारों पर आरोप लगते रहे हैं, मुख्यमंत्रियों पर आरोप लगते रहे हैं, लेकिन आपके पास एक ऐसा मुख्यमंत्री है जिनपर विरोधियों ने भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाने की हिम्मत नहीं की है। यहां जो पहले मुख्यमंत्री रहे उन पर कैसे-कैसे आरोप हैं, ये यूपी के लोग अच्छी तरह जानते हैं।

साथियों,

जहां डर होता है, जहां अपराध होता है, जहां माफियाराज होता है, फिरौती-छीना झपटी होती है, वहां विकास संभव नहीं होता है। और कानून व्यवस्था स्थापित करना ये कोई छोटी बात नहीं है, दोस्तो। मैं लंबे अरसे तक मुख्यमंत्री रहकर आया हूं। कानून व्यवस्था के लिए कितनी मेहनत पड़ती है सारे तंत्र को कितना सजग रहना पड़ता है। मैंने उस दुनिया से समय निकालकर के मैं आया हूं। भाइयों- बहनों मैं आज आपको कहना चाहता हूं, मान लीजिए आपके पास बांग्ला है, घर है, गाड़ी है, खेत है खलिहाल है। सब कुछ है। पांचों उंगली घी में है। कोई दुख नहीं है। लेकिन अगर माफियाओं की चलती है। गुंडों की चलती है और जवान बेटा सुबह घर से गया है उत्साह के साथ और शाम को उसकी लाश घर पर लौट आये कोई उसकी हत्या कर दे तो उस घर का क्या उपयोग है ? उस बंग्ले का क्या उपयोग है? उस व्यापार का गाड़ी का खेत खलिहान का कोई उपयोग है क्या? कोई उपयोग है क्या? जान प्यारी है कि नहीं ? तो गुंडागर्दी जानी चाहिए कि नहीं जानी चाहिए? माफिया शाही बंद होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए ? ये काम योगी जी ने किया है भाइयों। आप सोचिए आपके पास पैसे है बच्चे को अच्छे स्कूल भेज रहे हैं लेकिन चूंकि बच्चा अच्छे स्कूल में पढ़ता है। इसलिए फिरौती लेने वाला बच्चों को उठाकर कर के ले जाये और फिर टेलिफोन कर के पैसे मांगे। मां-बाप भी सोचें कि अगर पैसे नहीं देंगे और बच्चों को कही मार देगा तो इसलिए पुलिस में भी कंपलेन ना करे। भाइयों- बहनों क्या बच्चों की सलामति होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए ? ये गुंडागर्दी बंद होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए ? अगर ये काम योगी जी ने किया तो अच्छा किया है कि नहीं किया है ? ये होना चाहिए था कि नहीं होना चाहिए था? ये उत्तर प्रदेश की सेवा है कि नहीं है ? ये आपकी सेवा है कि नहीं है ? ये आपकी सुरक्षा है कि नहीं है ? भाइयो-बहनों सुरक्षा जीवन में बहुत जरूरी होती है।

भाइयों- बहनों

हमारी बेटियां, स्कूल कॉलेज आते-जाते समय नजर नीची किए रहें, हर कदम पर घबराहट हो, चुपचाप भागने की कोशिश करती हो। और आपने देखा होगा ऐसे लोग रोड़ के किनारे पर खड़े रहकर के बेचारी को फब्तियां सुनती रहने पड़े, बहुत कुछ हमारी बेटियां सहन करती रहें, उनके मन की बेबसी और उनका आक्रोश, भाइयों-बहनों आप कल्पना कर सकते हैं हमारे घर में जवान बहन-बेटियों के साथ ऐसा हो वो बेटी बेचारी मुर्झा जाएगी कि नहीं मुर्झा जाएगी। उन बेटियों को सम्मान मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए। उन बेटियों की रक्षा होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? कोई दुकानदार दिन-रात मेहनत करके अपनी दुकान का काम फैलाए, छोटी सी दुकान बेचारा कर्ज लेकर आया हो, मेहनत करता हो, कमाना शुरू करे। और कोई दबंग आकर के कह दे कि देखो हर दिन शाम को 50 रुपया मुझे पहुंचाना पड़ेगा। एक छोटा दुकानदार बेचारा कैसे घर चलाएगा कैसे जो कर्ज लिया है चूकता करेगा। ये रंगदारी वाले लोग मुनाफे में से हिस्सा ले जाये। अगर मुनाफे में से हिस्सा नहीं मिलता है तो पूंजी में से भी हिस्सा उठाकर ले जाये। और अगर वो ना दे पाये तो एक दिन आकर दुकान को ही उठाकर ले जाये। ऐसे लोग जब बैठे हैं तब प्रगति नहीं होती है। उसको रोकने का काम हमारे योगी जी ने किया है। भाइयों-बहनों, सूरज ढलने के बाद आप घर से निकलने से घबराएं, बहुत जरूरी होने पर ही बाहर जाएं, अपने काम टालें, ये स्थिति ठीक नहीं है। अगर ट्रेन रात को किसी स्टेशन पर पहुंचे। और लोग सुबह तक इंतजार करे प्लेटफॉर्म पर बैठे रहें ताकि सलामत घर पहुंच सके। ये स्थिति उत्तर प्रदेश ने देखी थी। उत्तर प्रदेश को उससे बाहर लाने का काम योगी जी की सरकार ने किया है भाइयों। यूपी में पांच साल पहले जो इन घोर परिवारवादियों-माफियावादियों ने जो माहौल बना दिया था, उसके खिलाफ योगी जी ने बहुत बड़ी लड़ाई लड़ी है।

भाइयों- बहनों,

जीवन में सुरक्षा कोई छोटी चीज नहीं है। जहां हालात बिगड़े हुए हों, वहां दशकों-दशक निकल जाते हैं कानून का राज स्थापित नहीं होता है बहुत मेहनत पड़ती है, योगी जी ने ऐसी कठिन स्थिति में से उत्तर प्रदेश को बाहर लाकर के 5 साल के भीतर भीतर कानून का राज स्थापित करने में सफलता पाई है। बहुत बड़ा बदलाव लाये हैं और आगे भी इसको और पक्का करेंगे ये मुझे पूरा विश्वास है भाइयों। योगी जी ने यूपी में सुरक्षा का जो माहौल दिया है, उसने समृद्धि का नया द्वार खोल दिया है। समाज का हर वर्ग मेहनत करे, उन्नति करे, इसके लिए जो माहौल जरूरी है, वो माहौल योगी जी की सरकार ने दिया है। कासगंज, एटा, फर्रुखाबाद, हाथरस, फिरोजाबाद, एटा, कन्नौज, सहित इस पूरे क्षेत्र के लिए भी ये सबसे बड़ा संकट था। इन क्षेत्रों के छोटे, लघु, कुटीर उद्योग, हमारे व्यापारी, उद्यमी साथी भी इन अपराधियों के कारण माफियाओं के कारण परेशान रहते थे। इसलिए योगी जी की सरकार ने कानून के राज को सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाया और उन्होंने कर के दिखाया है। गुंडे-माफिया को उन्होंने खोज-खोज कर के जेल भेजा, उन पर कार्रवाई की। कभी कभी लोग पूछते हैं कि योगी जी जुल्म कर रहे हैं योगी जी जुल्म कर रहे हैं। आप मुझे बताइए भइया क्या ये माफियाओं को जेल में भेजना चाहिए कि महल में भेजना चाहिए ? ये गुंडों को जेल भेजना चाहिए कि महल में भेजना चाहिए? योगी जी ने सही किया कि नहीं किया ? सही किया कि नहीं किया? यही करना चाहिए ना ? तभी तो सज्जन व्यक्ति भी जिंदगी जी सकता है भाई। ईमानदार आदमी जो मेहनत करता है वो तभी जी सकता है। बरेली के लोग भी आज हमारे साथ जुड़े हैं। वर्चुअली वो भी हमारे साथ बात कर रहे हैं। बरेली को कैसे बार-बार दंगों की आग में झोंका गया, ये भी हमने देखा है,भाइयों। पहले ये हालत थी कि लोग अपने पर्व-त्योहार तक शांति से नहीं मना सकते थे। दबंग, दंगा और माफियाराज को अब हमें यूपी से हमेशा के लिए बाहर कर देना है। पूरी तरह आप लोग इस बात का भी ध्यान रखिए कि इस बार भी इन घोर परिवारवादियों ने ऐसे अपराधी चुनाव के मैदान में उतारे हैं, जो आप लोगों से खार खाए बैठे हैं। ऐसे लोगों को वो नेता बना रहे हैं, माफियाओं को गुंडागर्दी करने वालों को ऐसे लोगों को वो नेता बनाने के लिए निकले हैं। इन अपराधियों और गुंडों को हराने के लिए आपको एकजुट होकर भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करो। ये मैं प्रार्थना करने आया हूं भाइयो-बहनों। ये बदले के मौके की तलाश में है। इनको कभी बदला लेने का मौका मत देना भाइयो-बहनों। मैं इस क्षेत्र के नौजवानों से, जो पहली बार वोट डालने जा रहे युवाओं से खास तौर से कहूंगा कि यूपी के बेहतर भविष्य से आपका भी भविष्य जुड़ा हुआ है। बहुत महत्वपूर्ण है भाइयों, आपके पहले लोगों को गांव घर छोड़कर जाना पड़ा। शहरों में जाकर झुग्गी-झोपड़ी में जीना पड़ा। अब मैं उत्तर प्रदेश से किसी को जाना पड़े ये स्थिति नहीं चाहता हूं। उत्तर प्रदेश ऐसा बनाना है देश भर के लोगों को उत्तर प्रदेश आने का मन कर जाये ऐसा उत्तर प्रदेश बनाना है। भाजपा को दिया आपका एक-एक वोट, यूपी की तस्वीर बदल देगा।

भाइयों और बहनों,

खेती और छोटे उद्योग आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी ताकत है। कोरोना के इस संकटकाल में डबल इंजन की सरकार ने खेती और छोटे उद्योगों के लिए ईमानदार प्रयास किए हैं, हमने नई-नई योजनाएं लाए कोशिशें की है। दुनियाभर में हाहाकार मचाने की वजह से भाइयों बहनों खाद की ये जो कोरोना के कारण जो सप्लाइ चेन सब खत्म हो गई, डिस्टर्ब हो गई, इसके कारण खाद की कीटनाशकों की सप्लाई भी बहुत प्रभावित हुई। कीमत भी कल्पना नहीं कर सकते कि कितनी बढ़ गई, अनेक गुना कीमत बढ़ गई है दुनिया के मार्केट में। लेकिन ये संवेदनशील सरकार है, छोटे किसानों पर बोझ न आए इसकी चिंता करने वाली सरकार है, इसलिए पूरी दुनिया में इतना बड़ा दाम बढ़ गया, हमें महंगी चीजें बाहर से लानी पड़ी, हमने किसानों के लिए चीजें लाए, फर्टिलाइजर लाए, खाद लाए, दवाइयां लाए और किसान को बोझ नहीं पड़ने दिया। सारा बोझ सरकार ने झेला किसानों को कम पैसों में वो दिया हमने। सब्सिडी बढ़ा दी, हमने हजारों करोड़ की सब्सिडी ज्यादा कर दी। इस बजट में भी एक लाख करोड़ रुपया, मेरे छोटे किसान भाइयों बहनों सुनिए एक लाख करोड़ से ज्यादा खाद सब्सिडी के लिए रखा है कि ताकि आगे अगर कोई आफत आ जाए तो भी मेरे किसानों को कोई मूसीबत न आ जाए इसका प्रबंध आज हमने अभी से किया है। छोटे किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि से जो हजारों रुपये इस दौरान मिले हैं उससे भी उनकी बहुत बड़ी मदद हुई है। छोटे किसान के लिए हर समय जब भी उसको खेती की जरूरत है तुरंत उनके खाते में 2 हजार रुपये जमा हो जाते हैं। और साल में बार-बार ये काम होता रहता है। इसी का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश के किसानों ने रिकार्ड उत्पादन करके दिखाया है भाइयों-बहनों। और सरकार ने भी किसानों से एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद की है। भाइयो-बहनों खेती की तरह ही डबल इंजन की सरकार ने लघु उद्योगों को एमएसएमई को बचाने के लिए भी निरंतर प्रयास किया है कोशिश की है। कोरोना काल में करीब-करीब ढाई लाख करोड़ रुपये छोटे उद्योग को दिए गए हैं, छोटे-छोटे स्थानों पर काम करने वाले लोगों को उसके काम में बहुत बड़ी मदद मिली है और उसके कारण हर कारखाने में दो, पांच, सात, दस, पंद्रह लोगों को जो रोजी-रोटी कमाते हैं उनकी रोजी-रोटी को सुरक्षित किया है। एक रिपोर्ट में यह बात बहुत उभरकर के आई है कि सरकार के इस प्रयास की वजह से लघु उद्योगों में काम करने वाले कम से कम डेढ़ करोड़ लोगों का रोजगार जाने से बच गया। डेढ़ करोड़ लोग यानि डेढ़ करोड़ परिवार यानि करीब छह-आठ करोड़ नागरिकों को मदद मिली है। 13 लाख से ज्यादा लघु उद्योगों को हमारी सरकार ने बंद होने से बचाया है। इस संकट के काल में इतना बड़ा काम हुआ है। केंद्र सरकार की योजना की वजह से यूपी के लघु उद्योमियों को भी करीब 19 हजार करोड़ रुपया मिला है ताकि हमारे गरीब की रोजी रोटी चालू रहे, हमारे देश में उत्पादन का काम चलता रहे।

साथियों,

आज यूपी के लोगों के पास डबल इंजन की ऐसी सरकार है जो लोकल के लिए वोकल है। योगी जी ने जो वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना शुरू की है आज चारों तरफ उसकी वाहवाही हो रही है। इससे हींग, चूड़ियां, कपड़े, फर्निचर, ऐसे उत्पादों को भी बहुत बढ़ावा दिया जा रहा है। इसलिए कासगंज, ऐटा फर्रुखाबाद, हाथरस और फिरोजाबाद के लोग डबल इंजन की सरकार चाहते हैं क्योंकि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट ने एक ग्लोबल लेवल के मार्केट की संभावना पैदा की है।

भाइयों बहनों,

भाजपा सरकार ने गरीब, किसान, मदजूर, दलित, पिछड़ों के लिए जो सुरक्षा कवच दिया है वो पहले कभी नहीं था। हमारी सरकार ने देश के करोड़ों गरीबों को चार लाख रुपये तक के जीवन और दुर्घटना बीमा की सुविधा भी दी है। चार लाख, भाइयों-बहनों 60 वर्ष होने के बाद गरीब को पेंशन का सहारा मिले इसके लिए भी हमारी सरकार ने बहुत बड़ी पेंशन योजना भी लागू की है। भाइयों-बहनों इस योजना के तहत गरीबों को तीन हजार रुपये मासिक पेंशन की सुविधा है। बुढ़ापे में रजी-रोटी की तकलीफ न हो इसकी व्यवस्था है। आज करोड़ों किसान, हमारे खेत मजदूर, घर में काम करने वाले, हमारे खेत में काम करने वाले साथी, रिक्शा चलाने वाले हमारे गरीब भाई-बहन, टैक्सी के ड्राइवर के रूप में काम करने वाले हमारे भाई-बहन, रेड़ी-पटरी-ठेले चलाने वाले हमारे छोटे भाई बहन, ये सारे लोग इस योजना से जुड़े हैं और हमारा गरीब और सशक्त होगा तो वो भी गरीबी को परास्त कर के रहेगा। ये मेरा पक्का विश्वास है। पहली बार देश के असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को हमने श्रम कार्ड दिया है, पहली बार देश में रेड़ी-पटरी-ठेले वाले साथी को भी बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है स्वनिधि योजना के माध्यम से उन्हें मदद दी जा रही है। इसका बहुत बड़ा लाभ कोरोना के इस समय में यूपी के गरीबों, दलितों, पिछड़ों को भी मिला है। भाइयों-बहनों गरीबों की सरकार जब होती है तो वो इसी प्रकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास इसी मंत्र को काम करते हुए इसी रास्ते पर काम करती है लेकिन जब घोर परिवारवादी घोर परिवारवादी, जब घोर परिवारवादी सरकार में रहते हैं, तो वो अपने परिवार से बाहर सोचते भी नहीं हैं, उनको कोई लेना-देना ही नहीं होता। जब घोर परिवारवादी सत्ता में थे तो सड़क वहीं बनती थी, जहां एक परिवार का हित होता था। बिजली वहीं आती थी जहां एक परिवार के लोगों का चुनावी हित सधता था, नौकरियां उनको ही मिलती थी जो घोर परिवारवादियों के गुणगान करते थे। लेकिन योगी जी सरकार के लिए पूरा उत्तर प्रदेश अपना परिवार है, पूरा उत्तर प्रदेश। इसलिए बीते 5 साल में जो काम हुआ, जो विकास हुआ पूरे यूपी में समानभाव से हुआ, सामाजिक न्याय की प्रतिबद्धता से हुआ। भाइयों -बहनों घोर परिवारवादी देश के संविधान के लिए, देश के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं, सबसे बड़ा संकट है। देश को संविधान देने वाले बाबा साहेब भी अगर चाहते, उनका तो कद भी बहुत ऊंचा था नाम भी बड़ा था और समाज में उनके प्रति भक्तिभाव भी आद्भुत था, वे अगर चाहते तो वे भी अपने परिवार की एक पार्टी बना सकते थे और अपना राजनीतिक खेल खेल सकते थे। लेकिन बाबा साहेब आंबेडकर ने अपना अपने परिवार का नहीं हमारे देश के कोटि-कोटि दलित, पीड़ित शोषित, वंचितों को ही अपना परिवार माना और उनके लिए ही पूरा जीवन समर्पित कर दिया। वो जानते थे कि जब कोई पार्टी, किसी परिवार के हाथों बंधक बन जाती है, तो सबसे ज्यादा नुकसान, युवाओं का होता है, देश के टैलेंट का होता है। यूपी के लोगों ने तो देखा है कि कैसे पार्टी पर, उसके साधनों, संसाधनों पर कब्ज़ा करने के लिए क्या-क्या किया गया। परिवारवादी कभी नहीं चाहते कि ज्यादा प्रतिभाशाली लोग खड़े हों और उन्हीं के लिए चुनौती बन जाएं। और इसलिए भाइयों-बहनों इस चुनाव में आपको तय करना है कि परिवारवादी चाहिए की प्रतिभाशील चाहिए। हमें परिवारवादी नहीं हमें प्रतिभाशील लोगों को आगे लाना है और हमारे देश में हर घर में प्रतिभाशाली लोगों की कमी नहीं है। जब ये लोग अपनी पार्टी में युवाओं को आगे नहीं आने देते तो फिर अन्य क्षेत्रों में युवाओं को कैसे आगे बढ़ा पाएंगे? इसलिए मैं कहता हूं, परिवारवादी लोग, हमारे युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के सबसे बड़े दुश्मन हैं। घोर परिवारवाद की जो ये मानसिकता आज़ादी के बाद देश और उत्तर प्रदेश में पनपी, उसने यूपी के युवाओं की ताकत को रोक दिया बढ़ने नहीं दिया, अरे बर्बाद कर दिया। इसलिए यूपी का विकास सीमित रहा, विकास धीमा रहा। भाजपा सरकार युवाओं की इसी ताकत को आज देश की ताकत बना रही है।

साथियों,

विकास का ये सिलसिला है विकास के इस सिलसिले को हमें मज़बूत बनाना है मजबूत करना है। यूपी को दंगों और दबंगों से हमें दूर रखना है। दंगे भी नहीं चाहिए दबंग भी नहीं चाहिए इसके लिए कमल के फूल पर भारी संख्या में मतदान करना भी है, आपको तो करना है मतदान करवाना भी है। हर यूथ को बूथ की ज़िम्मेदारी लेनी है। और इसलिए भाइयों-बहनों आप भारी संख्या में मतदान करवाएंगे। और मैं आज प्रथम चरण में अद्भुत भाजपा को समर्थन दिया है, उन सभी मतदाताओं का अभिनंदन करते हुए आपको यही कहूंगा पहले मतदान, फिर जलपान। ये उत्साह बना रहे, इसी विश्वास के साथ मेरे साथ दोनों हाथ ऊपर करके पूरी ताकत से बोलिए..
भारत माता की जय !

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भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर आज दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है: राइजिंग भारत समिट में पीएम मोदी
February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।