स्‍वाधीनता का 75वां उत्‍सव मनाने के साथ, आज़ादी का महोत्‍सव भारत के भविष्‍य के लिए स्‍पष्‍ट दृष्टि और योजना का निर्माण करने का अवसर : प्रधानमंत्री
भौतिक, प्रौद्योगिकीय और वित्‍तीय संपर्क के कारण सिकुड़ते विश्‍व में हमारे निर्यातों के विस्‍तार के लिए दुनिया भर में नई संभावनाओं का सृजन किया जा रहा है : प्रधानमंत्री
हमारी अर्थव्‍यवस्‍था के आकार और सामर्थ्‍य, हमारे विनिर्माण और सेवा उद्योग आधार पर विचार करते हुए निर्यात में वृद्धि के लिए अपार संभावनाएं मौजूद है : प्रधानमंत्री
उत्‍पादन से संबंधित प्रोत्‍साहन योजना से केवल विनिर्माण के पैमाने को बढ़ाने में ही मदद नहीं मिलेगी, बल्कि वैश्विक गुणवत्‍ता और दक्षता का स्‍तर भी बढ़ेगा : प्रधानमंत्री
केंद्र सरकार विनियामक बोझ को कम करने के लिए राज्‍यों के साथ मिल-जुलकर कार्य कर रही है : प्रधानमंत्री
राज्‍यों में निर्यात केंद्र बनाने के लिए राज्‍यों के बीच स्‍वस्‍थ प्रतिस्‍पर्धा को बढ़ावा दिया जा रहा है : प्रधानमंत्री
हमने नए गंतव्‍यों की तलाश की है और नए उत्‍पादों पर बल दिया है। क्‍या हमारे पास नए क्षेत्रों के लिए उन्‍नत रणनीतियां हैं ?

नमस्कार,

केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सभी सहयोगी गण। दुनियाभर में सेवा दे रहे Ambassadors, High Commissioners, केंद्र और राज्य सरकार के सभी अधिकारीगण।अलग-अलग Export Councils और Chambers of Commerce & Industry के सारे नेतागण। देवियों और सज्जनों !ये समय आज़ादी के अमृत महोत्सव का है। ये समय आजादी के 75वें वर्ष में अपनी स्वतंत्रता को सेलिब्रेट करने का करने का तो है ही, करने का तो है ही भविष्य के भारत के लिए एक क्लीयर विजन और रोडमैप के निर्माण का अवसर भी है।इसमें हमारे Export के Ambitions का और उसमें आप सभी साथियों का Involvement, Initiatives, आपका रोल बहुत बड़ा है। आज जो ग्लोबल लेवल पर हो रहा है।मैं समझता हूं हम सब और यहां जो मेरे सामने सब लोग हैं।वो इन सब चीजों से ज्यादा परिचित हैं। आज फिजिकल, टेक्नोलॉजीकल और फाइनेंसियल कनेक्टिविटी की वजह से दुनिया हर रोज और छोटी होती जा रही है। ऐसे में हमारे Exports के Expansion के लिए दुनिया भर में नई संभावनाएं बन रही हैं। और मैं समझता हूं कि मुझसे भी ज्यादा आप सभी इसके ज्यादा अनुभवी बहुत बड़े पारखी हैं। मैं आप सभी को आज के इस Initiative के लिए और इस प्रकार के दोनो पक्ष की बातों को रखने का जो अवसर मिला मैं इसके लिए बधाई देता हूं। आप सभी ने Exports को लेकर हमारे Ambitious Targets को अचीव करने के लिए जो enthusiasm, optimism और commitment दिखाया है, वो भी प्रशंसनीय है।

Friends,

जब ग्लोबल इकॉनोमी में हमारी हिस्सेदारी सबसे अधिक थी और वो समय था हमारे देश का उसका एक बड़ा कारण भारत का ताकतवर Trade और Export था। हमारे दुनिया के लगभग हर हिस्से के साथ Trade Links रहे हैं और Trade Routes भीरहे हैं। आज जब हम Global Economy में अपनी उस पुरानी हिस्सेदारी को वापस पाने का प्रयास कर रहे हैं, तब भी हमारे Exports का रोल बहुत अहम है। Post कोविड Global World में जब Global Supply Chain को लेकर आज एक एक व्यापक डिबेट है तब हमें नए अवसरों का लाभ उठाने के लिए पूरी ताकत लगा देनी है। आप सभी जानते हैं कि इस वक्त हमारा एक्सपोर्ट GDP का लगभग 20 प्रतिशत है। हमारी अर्थव्यवस्था के साइज़, हमारे Potential, हमारी मैन्युफेक्चरिंग और सर्विस इंडस्ट्री के बेस को देखते हुए इसमें बहुत वृद्धि की संभावना है। ऐसे में आज जब देश आत्मनिर्भर भारत के मिशन पर चल रहा है, तो इसका एक लक्ष्य Exports में Global Supply Chain में भारत की हिस्सेदारी को कई गुणा बढ़ाने का भी है। और इसलिए आज हमें ये सुनिश्चित करना है कि International demand के अनुसार हमें Access मिले ताकि हमारे बिजनेस खुद को Scale Up कर सकें Grow कर सकें। हमारी इंडस्ट्री को भी बेस्ट टेक्नॉलॉजी की तरफ जाना होगा, इनोवेशन पर फोकस करना होगा और R&D में हिस्सेदारी बढ़ानी ही पड़ेगी। Global Value Chain में हमारा Share इसी रास्ते पर चलकर ही बढ़ेगा। Competition और excellence को प्रोत्साहित करते हुए ही हमें हर सेक्टर में global champions तैयार करने हैं।

साथियों एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए चार फैक्टर्स बहुत महत्वपूर्ण हैं। पहला-देश में मैन्यूफैक्चरिंग कई गुना बढ़े। और Qualitatively competitive होना चाहिए। और जिस तरह साथयों ने कहा कि आज दुनिया में एक ऐसा वर्ग तैयार हुआ है। जो कीमत से ज्यादा Quality पर फोकस करता है। और हमे इस चीज को address करना ही पड़ेगा। दूसरा-ट्रांसपोर्ट की लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें दूर हों। इसमें राज्य सरकारों को भी, केंद्र सरकार को भी और जो भी private उसमे players होते हैं। इन सबने अपनी भूमिका निभानी होगी। तीसरा-एक्सपोर्टर्स के साथ सरकार कंधे से कंधा मिलाकर चले। ये कोई राज्य सरकारें इसमे अगर involve नहीं हैं। राज्य में जिस प्रकार की एक्सपोर्टर्स कॉन्सिल्स हैं वो अगर involve नहीं हैं। और कोई एक व्यापारी अपने तरीके से एक्सपोर्ट करता रहता है। आइसोलेटेड वर्ल्ड में। तो हमे जो परिणाम चाहिए वो नहीं मिलेंगें। हमे मिलकर के ही प्रयास करना होगा। और चौथा फैक्टर है, जो आज के इस आयोजन से जुड़ा है वो है- भारतीय प्रॉडक्ट्स के लिए इंटरनेशनल मार्कट। ये चारो फैक्टर्स एकजुट होंगे तभी भारत का लोकल ग्लोबल होगा तभी Make in India for the World के लक्ष्य को हम बेहतर तरीके से हासिल कर पाएंगे।

Friends,

आज देश में जो सरकार है, राज्यों में जो सरकार है वो बिजनेस वर्ल्ड की आवश्यकताओं को समझते हुए आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है।आत्मनिर्भर भारत, इस अभियान के तहत compliances में अनेक relaxations दिए गए हैं। इससे economic activities को सुचारु रूप से चलाना आसान हुआ है। 3 लाख करोड़ रुपए की Emergency Credit Line Guarantee स्कीम से MSMEs और दूसरे प्रभावित सेक्टर्स को राहत मिली है। रिकवरी और ग्रोथ को प्रोत्साहित करने के लिए हाल में डेढ़ लाख करोड़ रुपए और अप्रूव किए गए हैं।

Friends

Production Linked Incentive स्कीम से हमारी मैन्युफेक्चरिंग की Scale ही नहीं बल्कि Global quality और efficiency का स्तर बढ़ाने में बहुत मदद मिलेगी। इससे आत्मनिर्भर भारत का मेड इन इंडिया का नया इकोसिस्टम विकसितकरने में बहुत सुविधा होगी। और विकसित हो सकता है। देश को मैन्युफेक्चरिंग और एक्सपोर्ट के नए Global Champions मिलेंगे। मोबाइल फोन सेक्टर में तो हम इसका असर अनुभव भी कर रहे हैं। 7 साल पहले हम लगभग 8 बिलियन डॉलर के मोबाइल फोन इम्पोर्ट करते थे बाहर से मंगाते थे। अब ये घटकर 2 बिलियन डॉलर हो गया है। 8 बिलियन से 2 बिलियन पर आ गये हैं। 7 साल पहले भारत सिर्फ 0.3 बिलियन डॉलर के मोबाइल फोन एक्सपोर्ट करता था। अब ये बढ़कर 3 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा हो गया है।

साथियों

मैन्यूफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट से जुड़ी एक और समस्या को सुलझाने के लिए भी सरकार का फोकस है। देश में Logistics का Time और Cost कम करना येकेंद्र और राज्य दोनो सरकारकी प्राथमिकता रही और रहनी चाहिए। इसके लिए चाहे पॉलिसी डिसिजन हों या फिर इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण हर स्तर पर हमे काम और तेजी से आगे बढ़ाना होगा। आज हम मल्टीमोडल कनेक्टिविटी की तरफ तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

Friends,

अभी हमने सुना बांग्लादेश ने अनुभव बताया कि अब रेलवे मार्ग से चीजें जाने लगी हैं। तो एक दम से बढोत्तरी होने लगी है। Friends, सरकार की तरफ से निरंतर प्रयास किया जा रहा है। Pandemic के Impact को कम से कम उसका impact कैसे हो।हमारी ये पूरी कोशिश है कि वायरस संक्रमण नियंत्रण में रहे। देश में आज वैक्सीनेशन का काम तेज़ गति से चल रहा है। देशवासियों और इंडस्ट्री की हर ज़रूरत हर परेशानी को दूर करने के लिए हर संभव कदम उठाए गए हैं। बीते समय में किए गए प्रयासों का रिजल्ट आज आप भी अनुभव कर रहे हैं। हमारी इंडस्ट्री ने हमारे बिजनेस ने भी इस दौरान इनोवेट किया है नई Challenges के हिसाब से खुद को ढालाहै। इंडस्ट्री ने देश को मेडिकल इमरजेंसी से निपटने में भी मदद की और ग्रोथ को रिवाइव करने में भी भूमिका निभाई। यही कारण है कि आज Drugs और Pharmaceuticals के साथ-साथ Agriculture जैसे सेक्टर में भी हमारे एक्सपोर्ट्स नए स्तर पर पहुंचे हैं। आज हम अर्थव्यवस्था में रिकवरी के ही नहीं बल्कि high growth को लेकर भी Positive Signs देख रहे हैं। दुनिया की अनेक बड़ी Economies भी तेज़ी से रिकवर होने के संकेत आ रहे हैं। इसलिए Export को लेकर बड़े टारगेट्स रखने व उनको हासिल करने कामैं समझता हूं यह बेहतर समय है। इसके लिए भी सरकार हर स्तर पर ज़रूरी कदम उठा रही है। हाल ही में सरकार ने Exporters को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले से हमारे Exporters को Insurance Cover के रूप में लगभग 88 हज़ार करोड़ रुपए का Boost मिलेगा। इसी प्रकार export incentives को rationalize करने से WTO कंप्लायेंट इसको बनाने से भी हमारे एक्सपोर्ट को बल मिलेगा।

साथियों

दुनिया के अलग-अलग देशों में बिजनेस करने वाले हमारे एक्सपोर्टर्स बहुत बेहतर तरीके से जानते हैं कि Stability का कितना बड़ा प्रभाव होता है। भारत ने retrospective taxation से मुक्ति का जो फैसला लिया हैवो हमारा कमिटमेंट दिखाता है पॉलीसीज में consistency दिखाता है।ये सभी निवेशकों को स्पष्ट संदेश देता है कि आगे बढ़ता हुआ भारत ना सिर्फ नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है बल्कि भारत की निर्णायक सरकार अपने वायदे भी पूरे करने की इच्छाशक्ति रखती है।

Friends,

निर्यात से जुड़े हमारे जो भी टार्गेट हैं जो भी हमारे रिफॉर्म्स हैं उनमें देश के हर राज्य की बहुत बड़ी भागीदारी है। इन्वेस्टमेंट हो Ease of Doing Business हो Last mile infrastructure हो इसमें राज्यों का रोलबहुतअहम है। निर्यात हो या निवेश इसको बढ़ाने के लिए regulatory burden कम से कम हो इसके लिए केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है। राज्यों में export hubs बने इसके लिए एक healthy competition को promote किया जा रहा है। हर जिले में किसी एक प्रोडक्ट पर फोकस करने के लिए राज्यों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

Friends,

निर्यात को लेकर हमारा ambitious target एक holistic और detailed action plan से ही achieve हो सकता है। हमें अपने मौजूदा निर्यात को भी तेज़ करना है और नए प्रोडक्ट्स के लिए मार्केट नए destinations तैयार करने के लिए भी काम करना है। और मैं आपको कुछ सुझाव भी देना चाहुंगा। हमारे जो Missions हैं। वे ये तय कर सकते है। कि आज जिस देश में वो है बहुत छोटे देश हैं तो उनकी मैं बात नहीं कर रहा हूं। लेकिन बाकि देशों में आज मानो तीन स्थान पर ही भारत का माल जा रहा है। तीन ही डेस्टीनेशन हैं। क्या इस आजादी के 75 वर्ष के निमित हम पांच नए डेस्टीनेशन उसके साथ जोड़ सकते हैं। कि जहां पर भारत से कुछ न कुछ आता होगा। मैं समझता हूं कर सकते हैं। क्या हमारे Missions आजादी के 75 साल के निमित ये तय कर सकते हैं कि हमारे देश में भारत से कम से कम अभी जो चीजें आती हैं उसके अतिरिक्त नई 75 प्रॉडक्ट हम हमारे देश में जहां हम mission मे काम कर रहे हैं उस देश मे ले जायेंगे। उसी प्रकार से वहां जो Diaspora है Indian Diaspora हमने देखा है पिछले सात साल में बहुत proactive हुआ है। एक प्रकार से कंधे से कंधा मिलेकर के काम करने में आप लोगों के प्रयत्न से जोड़ा है। हम राज्यवार, हम Diaspora के कुछ गुट बनाएं और इस आजादी के 75 साल के वर्ष में उनके respective राज्य के साथ इसी एक विषय को लेकर के export के विषय को लेकर के virtual summit कर सकते हैं। जैसे मान लीजिए बिहार सरकार आर्गेनाइज करे। भारत सरकार भी हो। बिहार से जो चीजें export होती है उसके सारे exporters भी हों। और उस देश में रहने वाले बिहार का जो Diaspora है वो उसके साथ जुड़े। और बिहार की वो कौन सी चीजें हैं। जो उस respective country में पहुंचनी चाहिए। मैं समझता हूं Diaspora emotionally attach होगा। वो इसमें मार्केटिंग मे ब्रांडिंग में बड़ी मदद कर सकता है। और हमारी चीजें बड़ी तेजी से फैल सकती हैं। उसी प्रकार से क्या राज्य सरकारें वे भी ये तय कर सकती हैं। कि हम हमारे राज्य की पांच या दस ऐसी टॉप प्रायरटी की चीजें तय करेंगे। जो हमे export करना है। और दुनिया के कम से कम 75 देशों में मेरे राज्य से कुछ न कुछ जाना चाहिए। ये राज्यों के अंदर लक्ष्य बन सकता है। यानि हम आजादी के 75 वर्ष दुनिया मे पहुंचने के लिए नए-नए तौर-तरीके अपनाकर के हम बिल्कुल proactively हम प्रयास कर सकते हैं। हमारी कई products ऐसी होगी। दुनिया को पता तक नहीं होगा। अब जैसे हमारा LED बल्ब भारत में इतना सस्ता LED ब्लब बनाया, दुनिया ग्लोबल वार्मिंग की चिंता कर रही है। एनर्जी सेविंग की चर्चा कर रही है। इस विषय को ही लेकर के, हम दुनिया में LED ब्लब पहुंचाए। सस्ते में पहुंचाए। हम ग्लोबल वार्मिंग से दुनिया की मानवता का एक काम भी करेंगे। और भारत को बहुत बड़ा मार्किट भी मिलेगा। ऐसी कई चीजें हैं। मेने ऐसी उदाहरण के नाम कहा है। हम बहुत सी चीजों को कर सकते हैं। अभी हमारा लगभग आधा एक्सपोर्ट सिर्फ 4 बड़े destinations के लिए होता है।इसी प्रकार हमारा लगभग 60 प्रतिशत Export, Engineering Goods, Gems and Jewellery, Petroleum and chemical Products और Pharmaceuticals से जुड़ा हुआ है।मैं समझता हूं कि इतने बड़े विशाल देश, इतनी विविधताओं भरा देश, इतनी बड़ी unique product वाला देश, वे दुनिया में अगर न पहुंचे तो हमे आत्मचिंतन करना है। हमे जो कमियां है उसको दूर करना है। और मिल बैठकर रास्ते खोजने ही हैं। इस स्थिति को हमें मिलकर बदलना है। हमें नए Destination भी खोजने हैं और अपने नए Products भी दुनिया तक पहुंचाने हैं। Mining, Coal, Defence, Railways जैसे सेक्टर्स को खोलने से हमारे entrepreneurs को export बढ़ाने के लिए भी नए अवसर मिल रहे हैं। क्या इन नए सेक्टर्स के लिए हम futuristic strategies तैयार कर सकते हैं?

Friends,

आज इस कार्यक्रम में उपस्थित हमारे ऐंबेसेडर्स, विदेश मंत्रालय के साथियों से मैं एक और बात काभी आग्रह करूंगा। आप जिस भी देश में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उस देश की जरूरतों को बहुत बेहतर तरीके से आप समझते हैं। उस देश में किस चीज की डिमांड है, भारत के कौन से क्षेत्र से वो डिमांड पूरी हो सकती है, इसका बेहतर आभास भी आप लोगों को होता ही है।और पिछले 7 साल में हमने एक नया प्रयोग किया कि जो मीशन के लोग भारत में आते हैं। तो उनको राज्यों में भेजते हैं। राज्य सरकारों के साथ उनके दो-दो तीन-तीन दिन की बातचीत करवाते हैं। ताकि उस राज्य को उस देश में कुंछ अपनी बाते ले जानी है तो सुविधा हो। ये काम already चल रहा है।ऐसे में भारत के एक्सपोर्टर्स के लिए, यहां कॉमर्स इंडस्ट्री के लिए आप सभी एकबहुत मजबूत ब्रिज की तरह भी हैं। मैं चाहता हूं कि अलग-अलग देशों में मौजूद इंडिया हाउस, भारत की मैन्यूफैक्चरिंग पावर के भी प्रतिनिधि बनें।समय-समय पर आप, भारत में यहां की व्यवस्थाओं को अलर्ट करते रहेंगे, गाइड करते रहेंगे, तो इसका लाभ एक्सपोर्ट को बढ़ाने में होगा।मैं कॉमर्स मंत्रालय को भी कहूंगा कि वो ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे हमारे एक्सपोर्टर्स और हमारे मिशन्स के बीच निरंतर संपर्क बना रहे।और मैं तो मानता हूं कि आज इस वर्चुअलकी व्यवस्था के कारण इन चीजों को बड़ी तेजी से आसानी से हम कर सकते हैं। पहले ट्रेवल करना, मीटिंग करना, ये सब करना कठिन था। लेकिन कोरोना के बाद बाई एंड लार्ज ये दुनियाभर में एक व्यवस्था स्वीकृत हो रही है। मैं मानता हूं इस वर्चुअल हैबिट को इतना बढ़ा देना चाहिए। और हमारी इस प्रकार की ऑल पार्टी, ऑल स्टेकहोल्डर्स के combined initiative वाला प्रयास ज्यादा निर्णायक बनेगा।

साथियों,

हमारे Exports से हमारी इकॉनॉमी को मैक्सिमम लाभ हो, इसके लिए हमें देश के भीतर भी सीमलेस और हाई क्वालिटी सप्लाई चेन का निर्माण करना है। इसके लिए हमें एक नए रिश्ते, नई साझेदारी बनाने की ज़रूरत है। मेरा सभी Exporters से आग्रह है कि वो हमारे MSMEs, हमारे किसानों, हमारे मछुआरों के साथ पार्टनरशिप को मज़बूत करे। हमारे Startups को प्रमोट करें, हमारे रकई exporters होंगे, शायद आज startups की दुनिया में हमारी युवा पीढ़ी कितना बड़ा दुनिया को दे सकती है। उससे परिचित नहीं होंगे। हो सके तो एक दिन हम Commerce ministry initiatives लें। हमारे startups हमारे exporters हमारे investors उनका एक ज्वाइंट वर्कशाप हो। एक दूसरे की ताकत का परिचय हो। दुनिया के मार्केट का परिचय हो। हो सकता है हम बहुत कुछ कर सकते हैं। हम उन्हें Support करें। जहां तक Quality और efficiency का सवाल है तो हमने, अपनी दवाओं, अपनी vaccines के मामले में ये दुनिया मेंहम सिद्ध कर चुके है।टेक्टनॉलॉजी के बेहतर उपयोग से हम क्वालिटी कैसे बेहतर कर सकते हैं, इसका एक और उदाहरण है हमारा Honey सेक्टर। मैं उदाहरण छोटे इसलिए दे रहा हूं कि छोटी-छोटी चीजें भी कितनी बड़ी ताकत के साथ खड़ी हो सकती हैं। ये में आपके सामने Honey का उदाहरण दे रहा हूं। Honey की क्वालिटी सुनिश्चित करना, इंटरनेशनल मार्केट में उसकी पहचान बढ़ाने के लिए अनिवार्य था। हमने Honey की टेस्टिंग के लिए टेक्नोलॉजी आधारित एक नया test इंट्रोड्यूस किया।रिजल्ट ये मिला कि पिछले साल हमने लगभग 97 मिलियन डॉलर का Honey export किया। क्या हम ऐसे ही food processing, fruits, fisheries को लेकर नए इनोवेशन नहीं कर सकते? आज दुनिया में हालिस्टिक हेल्थकेयर का वातावरण बना हुआ है। Back to Basic का वातावरण बना हुआ है। हमारे योग के कारण भारत की तरफ इस दिशा में देखने का एक कारण बना है। ऐसे मे हमारी organic agriculture product जो है उसका एक दुनिया में बहुत बड़ी मार्किट की संभावना है। हमारी आर्गेनिक चीजों को हम किस प्रकार से प्रमोट करे।

Friends,

ये समय Brand India के लिए नए लक्ष्यों के साथ नए सफर का है। ये समय हमारे लिए Quality और Reliability की नई पहचान स्थापित करने का है। हमें ये प्रयास करना है कि दुनिया के कोने-कोने में भारत के high value-added product क्योंकि अभी ये आया विषय कि value-added की तरफ हमे बल देना पड़ेगा। हमे हमारी हर चीजों में निरंतर value addition करते जाना पड़ेगा। उसको लेकर हमे एक स्वाभाविक डिमांड पैदा हो। ये हमे कोशिश करनी चाहिए। मैं इंडस्ट्री को, सभी निर्यातकों को भी आश्वस्त करता हूं कि सरकार आपको हर प्रकार से सपोर्ट देगी। आइए, हम आत्मनिर्भर भारत के, वैभवशाली भारत के संकल्प को मिलकर के सिद्ध करें !आप सभी को मेरी बहुत - बहुत शुभकामनाएं हैं। एक सप्ताह के बाद विश्वभर में हमारे मिशंस और भारत में भी हम 15 अगस्त मनाएंगे। आजादी के अमृत महौत्सव के विधिवत शुरूआत भी हो जाएगी। मैं चाहता हूं कि एक हमारे लिए प्रेरणा का कारण बनना चाहिए। दुनिया में प्रभाव पैदा करने के लिए दुनिया में पहुंचने के लिए ये आजादी के 75 साल अपने आप में हमारे लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा का अवसर है। और 2047, देश जब आजादी के सौ साल मनाएगा, ये 25 साल का समय हमारे लिए बड़ा मूल्यवान समय है। हम एक पल भी खोये बिना अभी से एक रोडमेप लेकर के आगे चलें। और मुझे विश्वास कि आज की बातों से कि हम सब इस संकल्प को परिपूर्ण करेंगे, हम संकल्प को पार कर जाएंगे। इसी पूरे विश्वास के साथ मैं आप सब को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। धन्यवाद

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21वीं सदी के इस दशक में भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है: ET Now ग्लोबल बिजनेस समिट में पीएम मोदी
February 13, 2026
Amid numerous disruptions, this decade has been one of unprecedented development for India, marked by strong delivery and by efforts that have strengthened our democracy: PM
In this decade of the 21st century, India is riding the Reform Express: PM
We have made the Budget not only outlay-focused but also outcome-centric: PM
Over the past decade, we have regarded technology and innovation as the core drivers of growth: PM
Today, we are entering into trade deals with the world because today's India is confident and ready to compete globally: PM

आप सभी का इस ग्लोबल बिजनेस समिट में, आप सबका मैं अभिनंदन करता हूं। हम यहां A Decade Of Disruption, A Century Of Change, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। विनीत जी का भाषण सुनने के बाद मुझे लगता है कि मेरा काम बहुत सरल हो गया है। लेकिन एक छोटी request करूं, इतना सारा आपको पता है, तो कभी ET में तो दिखना चाहिए।

साथियों,

21वीं सदी का बीता दशक अभूतपूर्व डिसरप्शन का रहा है। ग्लोबल Pandemic, ग्लोब के अलग-अलग हिस्सों में तनाव, युद्ध और ग्लोब के संतुलन को हिला देने वाले Supply Chain Breakdowns, दुनिया ने एक दशक के भीतर काफी कुछ देख लिया। लेकिन साथियों, कहते हैं, संकट के समय ही किसी देश के सामर्थ्य पता चलता है और मुझे बहुत गर्व है, अनेक Disruptions के बीच भी भारत के लिए यह दशक, अभूतपूर्व डेवलपमेंट का रहा है, शानदार डिलीवरी का रहा है और डेमोक्रेसी को मजबूत करने वाला रहा है। जब पिछला दशक शुरू हुआ था, तो भारत ग्यारहवें नंबर की अर्थव्यवस्था था। इतनी उथल-पुथल में पूरी आशंका थी कि भारत और नीचे चला जाएगा, लेकिन आज भारत, बहुत तेजी के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने जा रहा है। और आप जिस Century Of Change की बात कर रहे हैं, उसका बहुत बड़ा आधार और यह मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं, इसका बहुत बड़ा आधार भारत ही होने जा रहा है। आज भारत, दुनिया की ग्रोथ में 16 परसेंट से ज्यादा योगदान दे रहा है। और मुझे विश्वास है, इस सेंचुरी के हर आने वाले साल में हमारा योगदान और भी बढ़ता रहेगा, निरंतर बढ़ता रहेगा। मैं वह मदान की तरह astrologer के रूप में नहीं आया हूं। भारत, दुनिया की ग्रोथ को ड्राइव करेगा, दुनिया की ग्रोथ का नया इंजन बनेगा।

साथियों,

दुनिया में सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद एक नई वैश्विक व्यवस्था बनी थी, एक नए वर्ल्ड ऑर्डर ने आकार लिया था। लेकिन सात दशक के बाद, वो व्यवस्था टूट रही है। दुनिया आज एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ बढ़ रही है। आखिर यह क्यों हो रहा है? ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि तब जो व्यवस्था बनी थी, उसकी नींव One Size Fits All, इसी सोच पर टिकी थी। तब ये माना गया कि World Economy Core में होगी, Supply Chains मजबूत और विश्वसनीय हो जाएगी। इस व्यवस्था में नेशन्स को केवल कंट्रीब्यूटर्स के रूप में ही देखा गया। लेकिन आज, इस मॉडल को चुनौती मिल रही है। यह अपनी प्रासंगिकता खोता जा रहा है। आज हर देश को यह पता चल रहा है कि उसे अपनी रज़ीलियन्स खुद बनानी होगी।

साथियों,

आज दुनिया जिसकी चर्चा कर रही है। उसको भारत ने 2015 में, आज से 10 साल से पहले, 2015 में ही अपनी नीति का हिस्सा बना लिया था। दस साल पहले जब नीति आयोग बना, तो उसके फाउंडिंग डॉक्यूमेंट में ही भारत ने अपना विजन क्लीयर कर दिया था और विजन यह कि भारत किसी दूसरे देश से कोई सिंगल डेवलपमेंट मॉडल इंपोर्ट नहीं करेगा। हम भारत के विकास के लिए भारतीय अप्रोच को लेकर ही चलेंगे। इस नीति ने भारत को अपने हिसाब से, अपनी रिक्वायरमेंट के हिसाब से, अपने हित में फैसले लेने का आत्मविश्वास दिया और यह एक बड़ा कारण है कि डिसरप्शन के दशक में भी भारत की इकोनॉमी कमजोर नहीं पड़ी, निरंतर मजबूत होती गई।

साथियों,

आज 21वीं सदी के इस दशक में भारत Reform Express पर सवार है और इस Reform Express की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हम इसे compulsion में नहीं, बल्कि conviction के साथ, Reform के कमिटमेंट के साथ गति दे रहे हैं। यहां तो बहुत बड़ी-बड़ी संख्या में बड़े-बड़े expert बैठे हैं, अर्थजगत के दिग्गज बैठे हैं। आपने भी 2014 से पहले का दौर देखा है। जब तक हालात मजबूर न कर दें, जब तक कोई संकट न आ जाए, जब कोई और रास्ता न बचे, तब मजबूरन रिफॉर्म्स किए जाते थे। आप याद करिए, 1991 का रिफॉर्म्स भी तब हुआ, जब देश पर दिवालिया होने का खतरा आ गया था। जब देश को सोना गिरवी रखना पड़ा था। पहले की सरकारों का यही तरीका था, वो reforms compulsion में ही किया करती थीं। जब 26/11 का आतंकी हमला हुआ, कांग्रेस सरकार की कलई खुल गई, तो NIA का गठन किया गया। जब पावर सेक्टर बर्बाद हो गया, ग्रिड फेल होने लगे, तब मजबूरी में कांग्रेस को पावर सेक्टर में याद आई।

साथियों,

ऐसी एक लंबी सूची है, जो याद दिलाती है कि जब compulsion में, मजबूरी में reform होता है, तो न सही नतीजे मिलते हैं, न देश को सही परिणाम मिलते हैं।

साथियों,

आज मुझे गर्व है कि बीते 11 वर्षों में हमने पूरे conviction के साथ रिफॉर्म किए हैं और यह रिफॉर्म Policy में हुए हैं, Process में हुए, Delivery में हुए और इतना ही नहीं, Mindset में भी reform हुआ है। क्योंकि साथियों, अगर पॉलिसी बदले, लेकिन प्रोसेस वही रहे, माइंडसेट वही रहे, डिलीवरी ठीक से ना हो, तो रिफॉर्म्स सिर्फ और सिर्फ कागज का टुकड़ा बनकर रह जाता है। इसलिए हमने पूरे सिस्टम को बदलने के लिए ईमानदारी से कोशिश की है।

साथियों,

मैं प्रोसेस की बात करूं, तो एक साधारण लेकिन बहुत जरूरी प्रोसेस है, कैबिनेट नोट्स का। यहां कई लोगों को अंदाजा होगा कि पहले की सरकारों में एक कैबिनेट नोट बनने में ही कुछ महीने लग जाते थे, महीने। अब इस स्पीड से देश का विकास कैसे होता? इसलिए हमने इस process को बदला। हमने डिसीजन मेकिंग को time-bound और technology-driven बनाया। हमने यह तय कर दिया कि इस अफसर की टेबल पर यह कैबिनेट नोट इतने घंटे से ज्यादा रहेगा ही नहीं। या तो रिजेक्ट करो या निर्णय लो और इसका नतीजा आज देश देख रहा है।

साथियों,

मैं आपको रेलवे ओवर ब्रिज के अप्रूवल का भी उदाहरण दूंगा। पहले R.O.B का एक डिजाइन अप्रूव कराने के लिए कई वर्ष लग जाते थे, कई सारी क्लीयरेंस की ज़रूरत थीं, कई जगह चिट्ठियां लिखनी पड़ती थीं और यह मैं प्राइवेट के लिए नहीं कह रहा हूं, सरकार को। हमने इसको भी बदला और आज देखिए कितनी तेजी से रोड और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। विनीत जी ने बहुत विस्तार से इस बात को बताया।

साथियों,

एक बड़ा Interesting उदाहरण बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर का है। अब बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर देश की security से जुड़ा हुआ होता है। आप कल्पना कर सकते हैं, एक समय था, जब बॉर्डर एरियाज़ में एक साधारण सी सड़क बनाने के लिए भी कुछ परमिशन दिल्ली से लेनी पड़ती थी। जिला स्तर पर निर्णय लेने के यानी इसके सामने एक प्रकार से उसका कोई अधिकारी ही नहीं थे, दीवार ही दीवार थीं, वो निर्णय नहीं कर सकता था और इसलिए तो दशकों बाद भी हमारे देश में बॉर्डर इंफ्रा इतना बेहाल रहा। 2014 के बाद हमने इस प्रोसेस में भी रिफॉर्म किया, हमने स्थानीय प्रशासन को Empower किया और आज हम देश के बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से डेवलप होते देख रहे हैं।

साथियों,

बीते दशक में भारत के जिस Reform ने दुनिया में हलचल मचा दी है, वो है UPI, भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम। यह सिर्फ एक App नहीं है, यह policy, process और delivery के एक शानदार कन्वर्जेंस का प्रमाण है। जो लोग कभी बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़े बेनिफिट्स के बारे में सोच भी नहीं सकते थे, UPI देश के ऐसे नागरिकों को सर्व कर रहा है। यह जो डिजिटल इंडिया है, डिजिटल पेमेंट सिस्टम है, जनधन आधार मोबाइल की ट्रिनिटी है, यह रिफॉर्म किसी compulsion से नहीं हुआ, यह हमारा कन्विक्शन था। और कन्विक्शन यह था कि जिन लोगों तक पहले की सरकारें कभी नहीं पहुंची, हमें ऐसे नागरिकों का इंक्लूजन करना है। जिसे कोई नहीं पूछता, उसे मोदी पूजता है। और इसलिए यह रिफॉर्म्स किए गए हैं और आज भी हमारी सरकार इसी सोच के साथ चल रही है।

साथियों,

भारत का यह जो नया मिज़ाज है, वो हमारे बजट में भी रिफ्लेक्ट होता है। पहले जब बजट की चर्चा होती थी, तो फोकस सिर्फ Outlay पर होता था। कितना पैसा आवंटित हुआ, क्या सस्ता हुआ, क्या महंगा हुआ और उस दिन टीवी देखेंगे, तो पूरी टीवी एक ही यानी इनके लिए, बजट मतलब इंकम टैक्‍स ऊपर गया कि नीचे गया, इसके आगे उनको देश दिखता ही नहीं है। और होता क्‍या था, कितनी नई ट्रेनें घोषित हुईं, यही चलता रहता था, उन घोषणाओं का बाद में क्या हुआ, कोई पूछने वाला ही नहीं था। और इसलिए हमने बजट को Outlay के साथ-साथ Outcome सेंट्रिक बनाया।

साथियों,

बजट में एक और बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले Off-Budget Borrowing पर बहुत अधिक चर्चा होती थी। लेकिन अब Off-Budget Reforms की चर्चा होती है। बजट से बाहर, नेक्स्ट जनरेशन GST रिफॉर्म्स हुए, प्लानिंग कमीशन की जगह नीति आयोग बनाया, आर्टिकल 370 की दीवार गिरा दी, तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया, नारी शक्ति वंदन अधिनियम बनाया।

साथियों,

बजट में घोषित हों, या बजट से बाहर, रिफॉर्म एक्सप्रेस लगातार गति पकड़ रही है। अगर मैं पिछले एक साल की ही बात करूं तो हमने Ports & Maritime सेक्टर में Reform किया, शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के लिए अनेक Initiative लिए, जन-विश्वास एक्ट के तहत रिफॉर्म्स को और आगे बढ़ाया, Energy Security के लिए Shanti Act बनाया, लेबर कानूनों से जुड़े रिफॉर्म्स को लागू किया, भारतीय न्याय संहिता लेकर आए, वक्फ कानून में Reform किया गया है, गांव में रोजगार के लिए नया G RAM G कानून बनाया, ऐसे अनेक Reforms साल भर होते रहे हैं।

साथियों,

इस साल के बजट ने रिफॉर्म एक्सप्रेस को और आगे बढ़ाया है। वैसे तो बजट के बहुत सारे आयाम हैं, लेकिन मैं दो Important फैक्टर्स की बात करूंगा। Capex और Technology, बीते वर्षों की भांति इस बजट में भी, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को बढ़ाकर करीब 17 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। और आप जानते हैं कि कैपेक्स का मल्टीप्लायर effect कितना बड़ा होता है। इससे देश की कैपेसिटी और प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। अनेकों सेक्टर्स में बहुत बड़ी संख्या में जॉब क्रिएशन भी होती है। पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप का निर्माण, देश के टीयर-2, टीयर-3 शहरों के लिए सिटी इकोनॉमिक रीजन्स का निर्माण और सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, ऐसे बजट अनाउंसमेंट्स, सही मायने में युवाओं पर, देश के फ्यूचर पर, यह इन्वेस्टमेंट हैं।

साथियों,

बीते दशक में हमने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को ग्रोथ का कोर ड्राइवर माना है। इसी सोच के साथ, देश में स्टार्टअप कल्चर, हैकाथॉन कल्चर, उसको हमने प्रमोट किया। आज देश में, दो लाख से अधिक स्टार्टअप, रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स हैं और यह डायवर्स सेक्टर्स में काम कर रहे हैं। हमने युवाओं को प्रोत्साहित किया, देश में रिस्क टेकिंग कल्चर को पुरस्कृत करने का भाव जगाया और परिणाम हमारे सामने है। इस साल का बजट, हमारी इसी प्राथमिकता को और मजबूत करता है। विशेष तौर पर बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर और AI जैसे सेक्टर के लिए, इस बजट में महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।

साथियों,

आज जब देश की आर्थिक ताकत बढ़ी है, तो हम राज्यों को भी उतना ही ज्यादा सशक्त कर रहे हैं। मैं एक और आंकड़ा आपको देना चाहता हूं। 2004 से 2014, 10 साल, इस दरमियान राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के तौर पर 18 लाख करोड़ रुपए के आसपास ही मिले थे, 2004 से 2014 तक। जबकि 2014 से लेकर 2025 तक, राज्यों को 84 लाख करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। अगर मैं इस साल बजट में प्रस्तावित लगभग 14 लाख करोड़ का आंकड़ा और जोड़ दूं, तो हमारी सरकार में राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के करीब-करीब 100 लाख करोड़ रुपए मिलने तय हुए हैं। यह राशि केंद्र सरकार की तरफ से अलग-अलग राज्य सरकारों को मिली है, ताकि वो अपने यहां विकास के कार्यों को आगे बढ़ा सकें।

साथियों,

आजकल आप लोग भारत के FTA’s यानि फ्री ट्रेड डील्स पर काफी चर्चा कर रहे हैं और मैं यहां enter हुआ, वहीं से शुरू हो गए लोग। दुनियाभर में इसका एनालिसिस हो रहा है। लेकिन मैं आज इसका एक और इंटरेस्टिंग एंगल आपको बताता हूं, मीडिया को जो चाहिए, वो तो इसमें नहीं होगा शायद, लेकिन हो सकता है कि कुछ काम में आ जाए। और मैं पक्का मानता हूं, जो बात मैं कहने जा रहा हूं, आपने भी इसके बारे में विचार नहीं किया होगा। क्या आपने कभी सोचा है कि आज इतने सारे विकसित देशों के साथ फ्री-फ्री ट्रेड डील्स हो रहे हैं, क्या यही काम 2014 से पहले क्यों नहीं हो पाए? देश वही, युवा शक्ति वही, सरकारी सिस्टम वही, तो बदला क्या? बदलाव, सरकार के विजन में आया है, नीति और नीयत में बदलाव आया है, भारत के सामर्थ्य में बदलाव आया है।

साथियों,

आप ज़रा सोचिए, फ्रेजाइल फाइव इकोनॉमी जब थी, तब कौन हमारे साथ डील करता? गांव में भी गरीब की बेटी को कोई रईस के परिवार वाला शादी करता है क्या? वो उसको छोटा मानता है, हमारा भी यही हाल था भाई दुनिया में। जब देश पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा था, चारों तरफ घोटाले और घपले थे, तब कौन भारत पर भरोसा कर पाता? 2014 से पहले भारत में मैन्युफैक्चरिंग का बेस बहुत कमजोर था और जिसके कारण, पहले की सरकारें भी डरती थी, एक तो कोई आता नहीं था और जरा सा भी कोई कोशिश करें, तो यह लोग भी डरते थे और डर यह था कि अगर विकसित देशों के साथ डील हो गई, तो वो हमारे बाजार पर कब्जा कर लेंगे, वो यहां अपने प्रोडक्ट डंप करने लगेंगे, हताशा-निराशा के उस माहौल में 2014 से पहले यूपीए सरकार सिर्फ चार देशों के साथ ही कॉम्प्रिहेंसिव ट्रेड एग्रीमेंट कर पाई थी। जबकि, बीते दशक में भारत ने जो ट्रेड डील्स की हैं, उनमें दुनिया के 38 कंट्री कवर होते हैं, 38 कंट्री। और यह दुनिया के अलग-अलग रीजन्स में हैं। आज हम इसलिए दुनिया के साथ ट्रेड डील्स कर रहे हैं क्योंकि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। आज का भारत, दुनिया के साथ कंपीट करने के लिए तैयार है। बीते 11 वर्षों में भारत ने मैन्युफैक्चरिंग का एक मजबूत इकोसिस्टम देश में विकसित किया है। इसलिए, आज भारत समर्थ है, सशक्त है और इसलिए दुनिया भी हम पर भरोसा करती है। यही बदलाव हमारी Trade Policy में आए Paradigm Shift का आधार बने और यही Paradigm Shift विकसित भारत की हमारी यात्रा का अनिवार्य स्तंभ बना है।

साथियों,

आज हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ देश के हर नागरिक को विकास में सहभागी बनाते हुए कार्य कर रही है। जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गया, हम उसके विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। पहले की सरकारों ने दिव्यांग जनों के लिए सिर्फ घोषणाएं कीं, हम भी उसी रास्ते को जारी रख सकते थे, लेकिन ये सरकार की संवेदनशीलता का उदाहरण है। आप में से शायद जो बातें मैं बता रहा हूं, आप जिस लेवल के लोग हैं, शायद उसमें फिट नहीं बैठती होगी। हमारे दिव्यांग जनों के लिए जैसे हमारे यहां Language में बिखराव है ना, Sign Language का भी वही हाल था जी। तमिलनाडु में जाओ तो एक Sign Language, उत्तर प्रदेश में जाओ तो दूसरी, गुजरात में जाओ तो तीसरी, असम में जाओ तो चौथी, अगर यहां का दिव्‍यांग असम गया, तो बेचारा समझ ही नहीं पाता था। अब यह कोई बड़ा काम तो नहीं था। अगर संवेदनशील सरकार होती है ना, तो उसको यह काम छोटा नहीं लगता है। और देश ने पहली बार Indian Sign Language को institutionalise किया, common किया, व्यवस्था बनाई है। ऐसे ही, देश की Transgender community कब से अपने अधिकारों के लिए लड़ रही थी। हमने उनके लिए भी कानून बनाकर उन्हें सम्मान से जीने का कवच दिया है। बीते दशक में ही देश की करोड़ों बहनों को तीन-तलाक की कुरीति से मुक्ति मिली, लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण पक्का हुआ।

साथियों,

आज सरकारी मशीनरी की सोच भी बदली है, उसमें संवेदनशीलता आई है। सोच का अंतर क्या होता है, यह हम जरूरतमंदों को मुफ्त अनाज देने वाली स्कीम में भी देखते हैं। विपक्ष के कुछ लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं और कुछ अखबारों में जरा छपता भी ज्यादा है। कोई मजाक उड़ाता है कि जब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल ही गए हैं, तो उनको मुफ्त राशन क्यों मिलता है? अजीबोगरीब सवाल है। अगर आप बीमार हैं, अस्पताल में गए और अस्पताल से आपको छुट्टी मिली, तो भी डॉक्टर कहता है कि सात दिन तक यह-यह संभालना, पंद्रह दिन तक यह-यह संभालना, कहता है कि नहीं कहता है? गरीबी से बाहर निकले हैं, लेकिन यह सवाल पूछ रहे हैं कि निकले हैं, तो फिर अनाज क्यों देते हो? ऐसी संकीर्ण मानसिकता वाले लोग, यह नहीं सोचते कि सिर्फ गरीबी से बाहर निकालना काफी नहीं होता, बल्कि जो व्यक्ति नियो मिडिल क्लास में आया है, वो फिर गरीबी के चंगुल में न फंस जाए, यह भी सुनिश्चित करना पड़ता है। इसलिए उसे आज अनाज मुफ्त की सुविधा मिल रही है, यह आवश्यक है। बीते वर्षों में केंद्र सरकार ने इस योजना पर लाखों करोड़ रुपए खर्च किए हैं, इससे गरीब और नियो मिडिल क्लास को बहुत बड़ा संबल मिला है।

साथियों,

सोच का एक और फर्क हम अपने आसपास भी देखते हैं। कुछ लोग हैं, जो कहते हैं कि ये मोदी 2047 की बात क्यों करता है? 2047 में विकसित भारत बनेगा, नहीं बनेगा, किसने देखा? हम रहें या ना रहें, उससे हमारा लेना देना क्या है? अब देखिए, यह सोच है और यह बड़े-बड़े लोगों की सोच है, यह कोई मैं अपने शब्द नहीं बता रहा हूं।

साथियों,

जिन लोगों ने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, लाठियां खाईं, कालापानी की सज़ाएं पड़ी, फांसी के तख्त पर चढ़ गए, अगर वो भी यही सोचते कि आजादी पता नहीं कब मिले, हम क्यों आज आजादी के लिए लाठी खाएं, तो सोचिए, क्या उस सोच के साथ देश कभी आजाद हो पाता क्या? जब राष्ट्र प्रथम का भाव हो, जब देश हित सर्वोपरि हो, तो हर निर्णय देश के लिए होता है, हर नीति देश के लिए बनती है। हमारी सोच स्पष्ट है, विजन साफ है, हमें देश को विकसित बनाने के लिए निरंतर काम करना है। 2047 तक हम रहें न रहें, लेकिन यह देश रहेगा, इस देश की संतानें रहेंगी। इसलिए हमें और इसलिए हमें अपना आज खपाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों का कल सुरक्षित रहे, उज्ज्वल रहे। मैं आज अपनी आज बो रहा हूं क्योंकि कल की पीढ़ी को फल खाने को मौका मिले।

साथियों,

दुनिया को अब डिसरप्शन के साथ जीने के लिए तैयार रहना होगा। समय के साथ इनके नेचर में बदलाव आएगा, लेकिन यह तय है कि अब व्यवस्थाएं बहुत तेजी से बदलेंगी। AI से जो Disruption हो रहे हैं, वो तो आप देख ही रहे हैं। आने वाले समय में AI और भी क्रांतिकारी बदलाव लेकर आने वाली है, भारत इसके लिए भी तैयार है। कुछ ही दिनों में भारत में ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट होने जा रही है। दुनिया के अनेक देश, दुनियाभर के टेक लीडर्स, इस समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। सभी के साथ मिलकर, हम एक बेहतर विश्व बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। इसी भरोसे के साथ, एक बार फिर इस Summit के लिए आप सभी को बहुत सारी मेरी शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

वंदे मातरम!