नोमष्कार! खुलुम खा जोतो नोनो! भाईयों बंधुरा, बंग्लादेशेर विशिष्ट अथिति गण, आपना देर सवाईके अमार आंतरिक शुभेच्छा! 

मैं पिछले तीन दिन से North East में भ्रमण कर रहा हूं। शायद देश के किसी प्रधानमंत्री को एकसाथ इतना लंबा समय North East के लोगों के बीच बिताने का सौभाग्य नहीं मिला होगा, जो सौभाग्य मुझे मिला है। मेरी यात्रा का ये आखिरी कार्यक्रम है। North East के नागरिकों ने मुझे जो प्यार दिया, सम्मान दिया, सत्कार दिया, उसके लिए उन सभी राज्यों के नागरिकों का मैं हृदय से अभिनंदन करता हूं, आभार व्यक्त करता हूं। 

North East में मेरा पहला कार्यक्रम था जो गति से जुड़ा हुआ था और आखिरी कार्यक्रम है जो उर्जा से जुड़ा हुआ है। विकास करना है तो उर्जा भी चाहिए, गति भी चाहिए, और दिशा भी चाहिए और इसलिए हमने North East की दिशा को पकड़ा है। Look East Policy की चर्चा - अब वक्त आया है - Look East Policy से आगे Act East Policy का। उसी के तहत इस पूरे North East क्षेत्र के विकास के लिए तेज़ गति से हम आगे बढ़ना चाहते हैं। 

आज त्रिपुरा में भारत सरकार, राज्य सरकार इन सबके सहयोग से पूरे North East का सबसे ज्यादा capital investment वाला ये project 10,000 करोड़ Rs., 726 मेगावाट पॉवर - और ये भी इतने छोटे से राज्य में इतना बड़ा कार्यक्रम, इतना बड़ा पूंजी निवेश, इतना बड़ा बिजली का उत्पादन -लेकिन ये विश्व के नक्शे पर भी जगह बनाने वाला है। क्योंकि पूरा विश्व climate change की परिस्थिति का मुकाबला करने के लिए जिस दिशा में काम कर रहा है, Kyoto protocol की जो चर्चा हो रही है - उन सारे norms का पालन त्रिपुरा के इस project में हो रहा है और उस प्रकार से विश्व में Green Energy Movment के क्षेत्र में त्रिपुरा आज अपना नाम दर्ज करा रहा है। 

अभी-अभी SAARC Summit हुई थी। बंग्लादेश की प्रधानमंत्री बेगम हसीना जी भी वहां मौजूद थीं। SAARC Summit में एक महत्वपूर्ण निर्णय किया गया है कि सार्क के देश Energy के क्षेत्र में साथ मिल करके, एक दूसरे के लिए उपयोगी हो करके Energy को एक common commodity के रूप में कैसे उपयोग करें, इस पे सहमति हुई है। 

जब सार्क देशों की सहमति हुई है तो मैं आज बंग्लादेश से अनुरोध करता हूं, मैं उनको offer करता हूं कि अगर बंग्लादेश भारत से बिजली खरीदना चाहता है तो भारत बंग्लादेश को बिजली देने के लिए तैयार है। हम उस स्थिति में पहुंचे हैं। और मैं उस जगह से घोषणा कर रहा हूं, ये वो ही जगह है, ये वो ही इलाका है, जहां के लोगों ने 1971 में, बंग्लादेश का जब मुक्ति आंदोलन चलता था, तब उनके दुख के साथ दुखी, उनके सुख के साथ सुखी, ये भूमिका इस क्षेत्र के लोगों ने निभाई थी। हमारे बंग्लादेश के मंत्री श्री मुझे कह रहे थे कि “मैं 41 साल के बाद यहां आ रहा हूं। ‘71 में बंग्लादेश का जब मुक्ति आंदोलन चल रहा था, तब मैंने यहां आकर आश्रय लिया था। आज मैं दोबारा यहां आया हूं”, वो संतोष की अनुभूति कर रहे थे। 

अभी मुख्यमंत्री जी fertilizer के कारखाने के संबंध में petroleum sector की नई नई योजनाओं के संबंध में विषय रख रहे थे। हम भी चाहते हैं कि हम उर्जा के क्षेत्र में गैस पर आधारित हमारी economy को कैसे develop करें। इस बार ओएनजीसी ने गैस उत्पादन के क्षेत्र में अपने बजट को डबल कर दिया है, ताकि उसके कारण, खास करके त्रिपुरा जैसे क्षेत्र, जहां गैस के भंडार पड़े हैं, उसका सर्वाधिक उपयोग करके हम पूरे देश की economy को कैसे बदल सकें। उर्जा के माध्यम से पूरे North East के नौजवानों को रोज़गार मिलने की पूरी संभावनाएं उसमें निहित हैं, और उस पर हम बल देना चाहते हैं। 

उसी प्रकार से कुछ दिन पहले मैं जापान गया था, जापान सरकार के साथ हमने एक एग्रीमेंट किया है। उस एग्रीमेंट का लाभ भी North East के लोगों को होने वाला है, त्रिपुरा के नौजवानों को होने वाला है। हमने जापान के साथ पूरे North East में म्यांमार तक एक economical corridor बनाने का संयुक्त प्रयास करने का निर्णय किया है। इसके कारण यहां पर तेज़ गति से आर्थिक विकास हो, जापान हमारे साथ उसमें सहयोग करे, उस पर हम बल दे रहे हैं। मेरी दृश्टि से अब North East भारत के दूर-सुदूर क्षेत्र का एक उपेक्षित इलाका नहीं रहने वाला है। अब North East, जिसका भविष्य उज्जवल है। 21वीं सदी एशिया की सदी कही जाती है। अगर 21वीं सदी एशिया की सदी है तो North East एशिया का प्रवेश द्वार है और एक प्रकार से समृद्धि का प्रेवश द्वार भी North East में बनने की पूरी संभावनाएं मैं देख रहा हूं। इसलिए, एक लंबी सोच के साथ, यहां infrastructure को कैसे बल मिले, रेल connectivity हो, रोड connectivity हो, digital divide खत्म हो, सामूद्रिक मार्ग का लाभ मिले, जैसा अभी मुख्यमंत्री जी कह रहे थे, इन सारी बातों का एकसूत्री कार्यक्रम ले करके। और वो एकसूत्री कार्यक्रम है - आधुनिक से आधुनिक infrastructure बना करके, पूरे North East के विकास के नए क्षितिजों को खोल देना। 

मैं आज, बंग्लादेश की प्रधानमंत्री का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं क्योंकि इस project को बनाने में, हमें जो मशीनरी यहां लानी थी - अगर बंग्लादेश का हमें जिस तरह से सहयोग मिला, वो न मिलता - तो ये काम करने में बहुत दिक्कत रहती। बंग्लोदश ने जो सहयोग किया, इसके लिए मैं उनका आभारी हूं। ये एक ऐसा project है, जिसमें, दो देश मिल करके कितना काम कर सकते हैं, इसका ये उदाहरण है। और आगे चल करके, सार्क देशों के लिए ये एक संदेश है कि दो पड़ोसी देश मिल करके काम करें तो त्रिपुरा में से कितनी बड़ी उर्जा पैदा हो सकती है, ये सार्क देशों के लिए एक सकारात्मक संदेश देती है, ये घटना। 

इतना ही नहीं, राज्यों के बीच में भी अगर coordination हो, सहयोग की भावना हो, एक दूसरे के साथ मिल करके काम करें तो कितना बड़ा फायदा हो सकता है। ये ऐसा project है, त्रिपुरा का जिसमें North East के सभी राज्यों ने मिल करके transmission काम से लिए एक संयुक्त जिम्मा लिया है। राज्य मिल करके किसी काम की जिम्मेवारी उठाएं, ये अपने आप में विकास के लिए एक नई आशा पैदा करने वाली घटना है। मैं North East के सभी मुख्यमंत्रियों को ये सहयोगपूर्ण निणर्य करने के लिए, उसको आगे बढ़ाने के लिए, मैं हृदय से बहुत बहुत अभिनंदन करता हूं, और इस प्रकार का सहयोग का वातावरण। और हमारा तो मंत्र है- सबका साथ, सबका विकास। इसी को लेकर हम आगे चलें तो हम नई नई सिद्धियों को प्राप्त कर सकते हैं। 

पूरे North East में एक ऐसा क्षेत्र है, जिस पर ध्यान देने की मुझे आवश्यकता लगती है। हमारे देश में हम तिरंगे झंडे का सम्मान करने वाले लोग हैं, तिरंगे झंडे का गौरव करने वाले लोग हैं। लेकिन, मैं तिरंगे झंडे से प्रेरणा ले करके चतुष्क्रांति की चर्चा करना चाहता हूं। चहुंमुखी क्रांति की चर्चा करना चाहता हूं। 

एक है- Green Revolution, हमारे तिरंगे झंडे का color है, green । उस तिरंगे झंडे का एक कलर green, हमें संदेश देता है green revolution का। Second Green Revolution! लेकिन Second Green Revolution में भी North East especially focus करके organic farming की ओर अगर जाएं तो पूरी दूनिया में North East का agriculture product पूरे विश्व के बाज़ार को अपना बना सकता है, इतनी संभावनाएं पड़ी हैं और उस पर हम बल देना चाहते हैं। 

दूसरा है- सफेद रंग। आज भी North East में Milk revolution के लिए बहुत संभावनाएं पड़ी हैं, animal husbandry की बहुत संभावनाएं पड़ी हैं। हम उस दूसरे रंग पर भी बल दें और हम उस milk revolution में कैसे जाएं। 

तीसरा है- भगवा रंग। मैं Saffron Revolution की बात करना चाहता हूं। green revolution, white revolution चाहिए, saffron revolution भी चाहिए। मैं जानता हूं, कुछ लोग, जब saffron revolution की बात करूंगा तो उनके कान खड़े हो गए होंगे। उनको ज़रा परेशानी होती होगी कि मोदी क्या लाया! उर्जा का रंग है- saffron. इसलिए मैं जब saffron revolution की बात करता हूं, मैं उर्जा क्रांति की बात करता हूं। Solar radiation से हम लाभान्वित लोग हैं। हम सोलर एनर्जी को बल कैसे दें? हम renewable energy को बल कैसे दें? हम गैस पेज economy में उर्जा को कैसे ले जाएं हम एक over all solution उर्जा के क्षेत्र में कैसे करें? उसके लिए आगे बढ़ना चाहते हैं। 

और चौथा! चौथा, हमारे तिरंगे के अंदर blue रंग का अशोक चक्र है। ये blue रंग पानी की ताकत को दर्शाता है, सामुद्रिक शक्ति को दर्शाता है। हमारी सामूद्रिक शक्ति कैसे बढ़े? उसी प्रकार से पूरे North East में पानी भरपूर मात्रा में है। बह्मपुत्र से भरा हुआ इलाका है। पहाड़ों में से झरने बहते रहते हैं। हमारी economy को बदलने के लिए, ये Blue revolution हम कैसे करें? उसे एक शक्ति का स्रोत मान करके, हम उसे कैसे आगे ले जाएं? 

ये चहुंमुखी क्रांति को ले करके हम त्रिपुरा के भी भाग्य को बदलें, पूरे North East के भाग्य को बदलें, यहां के नौजवानों को रोज़गार मिले, उस दिशा में हम कैसे आगे बढ़ें। 

हिंदूस्तान में प्राकृतिक संपदा के लिए, tourism के विकास के लिए, जितनी संभावनाएं North East के पास हैं, उतनी शायद हिंदुस्तान के किसी और क्षेत्र के पास नहीं हैं। कितनी bio-diversity से भरा हुआ है! पूरे हिंदुस्तान को हमने आकर्षित करना है। और इसके लिए connectivity पर बल देना है। रेल के माध्यम से connectivity पर बल देना है। रोड के माध्यम से connectivity पर बल देना है। Waterway का उपयोग करते हुए हमें connectivity को बढ़ाना है। और इस प्रकार से, त्रिपुरा समेत ये पूरा क्षेत्र विकास कि नयी ऊँचाइयों को पार करे, उस दिशा में हम आगे बढ़ना चाहते हैं। 

आज 726 MW का ये पॉवर प्रोजेक्ट पूर्ण हो रहा है। प्रथम चरण जब हुआ तब आदरणीय राष्ट्रपति जी यहाँ आये थे, आज सम्पूर्ण होने के समय मुझे यहाँ आने का सौभाग्य मिला है। राष्ट्र की उर्जा को बढ़ाने में त्रिपुरा के योगदान का मैं गौरव से स्वागत करता हूं और राष्ट्र को ये project समर्पित करते हुए मन में बड़े संतोष के भाव के साथ आगे बढ़ रहा हूं और फिर एक बार! बंग्लादेश का आभार व्यक्त करता हूं और बंग्लादेश को offer करता हूं कि बंग्लादेश की जो उर्जा की ज़रूरत है, अब भारत उस स्थिति में है कि हम बंग्लादेश को बिजली बेच सकते हैं। बंग्लादेश को भी उजाला पहुंचाने का काम भी भारत कर सकता है। 

बहुत बहुत धन्यवाद। 

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भारत-न्यूजीलैंड संबंध स्थायी मित्रता, समान मूल्यों और साझा प्रतिबद्धता पर आधारित हैं: ऑकलैंड में पीएम मोदी
July 11, 2026

नमस्ते !
की ओरा New Zealand!

हम भारत के लोग सुनते आए थे, 20 साल के बाद। लेकिन आज चालीस साल बाद कोई भारतीय पीएम न्यूज़ीलैंड की धरती पर आया है। ये मेरा सौभाग्य है। मैं न्यूजीलैंड के सभी निवासियों के लिए, आप सभी लोगों के लिए, 140 करोड़ भारतीयों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं।

साथियों,

ये प्रधानमंत्री के रूप में भले ही मेरा पहला न्यूज़ीलैंड दौरा है। लेकिन 25-30 साल पहले, जब मैं किसी सरकार में भी हिस्सा नहीं था, सार्वजनिक जीवन में मुझे कोई जानता नहीं था, तब भी मुझे यहां न्यूजीलैंड आने का अवसर मिला था। और उस समय, मुझे किसी ने गिफ्ट में तीन चीजें दी थीं जो मैं वापस इंडिया लेकर के गया था। एक, यह मफ़लर। एक कैप, और एक दस्ताना। क्योंकि ठंड का मौसम था।

और उसमें से एक चीज़ मैं अभी यहां इस कार्यक्रम में भी लेकर आया हूं। यह मफ़लर जो आप देख रहे हैं, यह 25-30 साल पहले मुझे न्यूजीलैंड के एक साथी ने दिया था। इतने साल में मैंने कई बार इसका उपयोग किया, और आज भी इसे बहुत संभाल कर के रखा है। जैसे आपके प्यार को संभाल के रखता हूं।

इस बार जब मेरा यहां आने का कार्यक्रम बना, तो मैं विशेष तौर पर इसे अपने साथ लेकर के आया क्योंकि खबर थी कि ठंड ज्यादा है।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के रिश्ते में यादें भी हैं, दोस्ती भी है, वैल्यूज़ भी हैं और एक कमिटमेंट भी है। इस रिश्ते को न्यूज़ीलैंड की एक सुंदर परंपरा अच्छे से डिफाइन करती है। यहाँ सदियों से एक शब्द लोगों को जोड़ता आया है - वाका। वाका सिर्फ़ एक नाव का नाम नहीं है, वाका हमारी शेयर्ड जर्नी की प्रतीक है। और आज भारत-न्यूजीलैंड की यही वाका एक नई यात्रा पर निकलने के लिए तैयार है।

हमारे सामने अवसरों से भरा खुला समुद्र है, हवाएँ हमारे साथ हैं, समंदर की विशाल लहरें हमारे साथ हैं, इच्छाशक्ति का नीला आसमान हमारे साथ है, पाने को काफी कुछ है, और मैं जानता हूं, हम सफल होंगे।

साथियों,

मुझे इस यात्रा की सफलता पर पूरा भरोसा है, जानते हैं क्यों? मोदी नहीं, क्योंकि इसके असली नाविक आप सभी हैं। ऑकलैंड से वेलिंगटन तक, क्राइस्टचर्च से क्वीन्सटाउन तक, न्यूज़ीलैंड के कोने-कोने में फैला भारतीय समुदाय इस शेयर्ड जर्नी का एक नाविक है।

साथियों,

आगे बढ़ने से पहले, मैं अपने मित्र, प्राइम मिनिस्टर क्रिस्टोफर लक्सन, न्यूज़ीलैंड सरकार के सभी साथियों और यहां लेबर पार्टी के मंबर्स का अभिनंदन करूंगा।

ये दिखाता है कि भारत-न्यूज़ीलैंड रिश्ते को कितना बड़ा बाइ-पार्टिसन सपोर्ट है। इससे ये भी पता चलता है कीवी इंडियन कम्यूनिटी की अचीवमेंट्स आपका कंट्रीब्यूशन कितना बड़ा है। आप यहां आए किवी इंडियन कम्यूनिटी के इस उत्सव का हिस्सा बने इससे ये सेलिब्रेशन और वाइब्रेंट हो गया है।

आपने जिस गर्मजोशी से जिस स्नेह और उत्साह से, आप ने हम सभी का स्वागत किया है मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

वैसे एक्सीलेंसी, किवी इंडियन कम्यूनिटी में भी सुपरहिट हैं। भारत के इंडिपेंडेंस डे पर आपने क्रिस हिपकिंस के साथ मिलकर दमादम मस्त कलंदर गाने पर जो डांस किया वो काफी वायरल हुआ। आपके वो मूव, Kiwi Indians के दिलों में छप गए हैं।

साथियों,

न्यूज़ीलैंड वाकई एक अद्भुत देश है। यहां पीस है, प्रॉसपैरिटी है, नेचर है, कल्चर है, और न्यूज़ीलैंड की असली ताकत, यहां के स्थानीय लोग हैं। न्यूज़ीलैंड के लोगों ने दिखाया है कि कोई देश जब एक जूनून, एक जज्बे के साथ आगे बढ़ता है, तो वो दुनिया को इंस्पायर करता है।

यहां जो किवी इंडियन कम्यूनिटी है, आप सभी को भी न्यूज़ीलैंड के दिलदार लोगों ने बहुत प्रेम से अपनाया है, अपनी टीम का हिस्सा बनाया है। उन्होंने आपके टैलेंट, आपके विजन पर ट्रस्ट किया है। और आज देखिए, न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी हो, यहां की सोसायटी हो, किवी इंडियन्स नए-नए रंग भर रहे हैं।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां निखिल रविशंकर Air New Zealand के CEO बन सकते हैं। जहां आनंद सत्यानंद गवर्नर जनरल बन सकते हैं जहां क्रिकेट टीम में रचिन रविंद्र, ईश सोढी और एजाज़ पटेल जैसे टैलेंट को अवसर मिल सकता है।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां की सड़कों में भी भारतीय शहरों को सम्मान दिया गया है। कहीं खंडाला है। कहीं बॉम्बे हिल्स हैं। कहीं कोरोमंडल है।

कलकत्ता स्ट्रीट, दिल्ली क्रिसेंट, अमृतसर स्ट्रीट, ऐसे कितने ही नाम हैं। यहां रहते-रहते आप भी पूरे के पूरे Kiwi हो गए हैं। जैसे मुझे बताया गया है कि किसी भी विषय पर बात शुरू कीजिए थोड़ी ही देर में बात मौसम पर पहुँच जाती है!

साथियों,

मैं न्यूज़ीलैंड की लीडरशिप से जब भी मिला हूं, वो आप सभी की बहुत प्रशंसा करते हैं। प्रशंसा आपकी होती है, और माथा मेरा ऊंचा होता है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, कि भारत, हज़ारों वर्षों पुरानी सभ्यता है जो आज अपनी प्राचीनता को सहेजते हुए आधुनिकता को स्वीकार कर रहा है। हर युग में हर दौर में भारत ने खुद को ट्रांसफॉर्म किया है और इसका कारण है, हमारी सीखने की ललक।

भारत सबसे सीखता है हमारे लिए सामने वाले देश की जनसंख्या नहीं जनकल्याण की भावना मायने रखती है और इसलिए हमने न्यूज़ीलैंड से भी बहुत कुछ सीखा है और अब भी सीख रहे हैं।

न्यूज़ीलैंड, दुनिया का वो देश है जिसने सबसे पहले महिलाओं को वोटिंग का राइट दिया था। आज हम देखते हैं कि न्यूज़ीलैंड की सोसायटी में वीमेन, बहुत बड़े पैमाने में कंट्रीब्यूट कर रही हैं। भारत भी आज Women Led Development के मंत्र के साथ महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल रहा है।

साथियों,

रूरल इकॉनॉमी, कैसे किसी देश की तकदीर बदल सकती है ये न्यूज़ीलैंड ने करके दिखाया है। न्यूज़ीलैंड की ताकत, एग्रीकल्चर के इर्द-गिर्द बनाया गया एक एफिशियंट इकोसिस्टम है। ट्रेसेबिलिटी हो, फूड सेफ्टी हो, कंप्लायंस सिस्टम हो ये बहुत बड़ी प्रेरणा है। ये भारत जैसे, छोटे किसानों वाले बड़े एग्रीकल्चर नेशन के लिए बहुत बड़ी सीख है।

न्यूज़ीलैंड ने ज़ेस्प्री मॉडल से दिखाया है कि छोटे किसान भी बाज़ार के एक बड़े ब्रैंड बन सकते हैं। न्यूज़ीलैंड की क्लाइमेट-स्मार्ट प्रिसिजन फार्मिंग टेक्नॉलॉजी में भी हमारे लिए सीखने को बहुत कुछ है।

साथियों,

यहां के मानुका हनी को लिक्विड गोल्ड कहा जाता है। जैसे यहां हनी ट्रेडिशन और टेस्ट के अलावा हेल्थ एंड वेलनेस से जुड़ा है वैसे ही भारत के आयुर्वेद में भी हनी का बहुत बड़ा महत्व है। आपको ये जानकर अच्छा लगेगा कि भारत में भी हम बी-कीपिंग को लेकर एक मिशन चला रहे हैं। इससे भारत में हनी प्रोडक्शन में काफी बढ़ोतरी हुई है।

और आजकल तो हिमालय की ऊंचाइयों से जो हनी आता है, वो गोल्ड क्या, डायमंड बनता जा रहा है। मैं समझता हूं, न्यूजीलैंड से हम हनी प्रोडक्शन और बढ़ाने के बारे में भी बहुत कुछ सीख सकते हैं।

साथियों,

इस साल इंडिया–न्यूजीलैंड स्पोर्टिंग रिलेशन्स के सौ साल पूरे हो रहे हैं। सौ साल पहले हमारी हॉकी टीम न्यूजीलैंड खेलने आई थी। उस टूर में मेजर ध्यानचंद के शानदार परफॉर्मेंस की हर तरफ चर्चा हुई थी। उनकी हॉकी ने न्यूजीलैंड के लोगों का भी दिल जीत लिया था।

साथियों,

कंटेंट क्रिएटर्स की भाषा में कहूं, तो ये कोलैब का जमाना है। न्यूज़ीलैंड और भारत स्पोर्ट्स में भी बहुत ही शानदार कोलैब कर सकते हैं। जैसे एक उदाहरण रग्बी का है। मुझे अभी-अभी बताया गया है कि कुछ देर पहले ही ऑल ब्लैक ने रग्बी के मैच में शानदार जीत दर्ज की है। भारत रग्बी में न्यूजीलैंड से सीखना चाहता है। भारत भी रग्बी में आगे आए, इसके लिए हमें हमें कोच चाहिए, एक्सपर्ट्स चाहिए, इसमें न्यूज़ीलैंड इसमें हमारी बहुत help कर सकता है। हाल ही में भुवनेश्वर में “न्यूज़ीलैंड रग्बी” और “रग्बी इंडिया” के coaching program को मैं एक अच्छी शुरुआत मानता हूं।

साथियों,

आज यहां आने से पहले, मैं यहाँ न्यूज़ीलैंड के एक स्पोर्ट्स स्टार्टअप event में गया था। स्पोर्ट्स टेक में हो रहे इनोवेशन्स ने नए ideas ने वाकई मुझे प्रभावित किया। मुझे विश्वास है कि हम स्पोर्ट्स टेक में साथ मिलकर काफी कुछ कर सकते हैं।

भारत और न्यूज़ीलैंड का फ्यूचर, आपस में जुड़ा हुआ है। इसका एक उदाहरण, स्पेस सेक्टर भी है। भारत का चंद्रयान जब मून के साउथ पोल पर लैंड किया, पूरा न्यूजीलैंड नाच रहा था उस दिन। और उस दिन हम सबको गर्व हुआ।

अब आपको मैं गर्व की एक और बात बताता हूं। आपको गर्व दिलाने में इस सक्सेस में न्यूजीलैंड की टेक्नॉलजी का भी योगदान रहा है। न्यूजीलैंड की स्पेस कंपनी ने कई अवसरों पर हमारे साथ मिलकर काम किया है। हम इस सहयोग को और आगे ले जाने के लिए काम कर रहे हैं।

साथियों,

स्पेस सेक्टर ये बताने के लिए काफी है कि भारत और न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी, एक-दूसरे को कितना कुछ दे सकती हैं। यही हमारे ट्रेड अग्रीमेंट की भी स्पिरिट है। ये ट्रेड अग्रीमेंट विकसित भारत की तरफ हमारी यात्रा को गति देगा। और भारत और न्यूज़ीलैंड दोनों के बिजनेस को नए अवसर देगा।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच एक और बहुत बड़ी सम्मानता है। ये समानता, हमारे इंडिजनेस कल्चर की है, इंडिजनेस कल्चर को सेलिब्रेट करने, उसको संरक्षण देने की है। और आज मैं माओरी समाज को विशेष रूप से याद करना चाहता हूं।

मैंने हाका को केवल एक performance के रूप में ही नहीं देखा। मैंने हाका में, एक समाज की आत्मा देखी है। उसमें साहस है, आत्मसम्मान है, अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा है, और पूरे समुदाय की सामूहिक शक्ति का एहसास है।

साथियों,

माओरी संस्कृति में एक बहुत सुंदर शब्द है- मना-कितांगा। इसका मतलब है, सम्मान देना, अपनापन देना, और पूरे मन से उसकी देखभाल करना। भारत में भी हम कहते हैं 'अतिथि देवो भवः।'

शब्द अलग हैं, परिवेश अलग हैं, पहनावा अलग हैं, भाषाएं अलग हैं, लेकिन भावना बिल्कुल एक ही है।

ऐसे ही माओरी संस्कृति में परिवार के लिए एक सुंदर शब्द है—फानो यानि परिवार। इसमें कई पीढ़ियाँ होती हैं। रिश्ते होते हैं। पूरा समुदाय होता है। भारत भी, परिवार को केवल एक सामाजिक व्यवस्था नहीं मानता, हमारे लिए फैमिली, एक इंस्टीट्यूशन है।

साथियों,

माओरी परंपरा का एक और सुंदर विचार है— काईत्या कितांगा। ये हमें सिखाती है कि हम प्रकृति के मालिक नहीं हैं। हम उसके संरक्षक हैं। भारत में भी कहा गया है— 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।' पृथ्वी हमारी माता है। इसी सोच को आधार बनाते हुए हम भारत में धरती मां के संरक्षण के लिए, एक पेड़ मां के नाम, प्राकृतिक खेती मिशन, जैसे अनेकों अभियान चला रहे हैं।

साथियों,

मैं जानता हूं, हजारों किलोमीटर दूर रहते हुए भी आपके दिल के किसी न किसी कोने में, दिनभर की प्रक्रिया में कहीं न कहीं हिंदुस्तान झलकता ही रहता है, हिंदुस्तान बसता ही है। सही है कि नहीं है? शरीर यहां होगा, मन? और इसीलिए, आप भारत की हर उपलब्धि पर भी नज़र रखते हैं।

और जब क्रिकेट स्टेडियम में बैठकर के देखते हैं, तो बहुत सी चीज़ें देखने की छूट जाती हैं। लेकिन घर में टी.वी. पर बैठकर के जब देखते हैं, तो हर बारीकी का पता चलता है। वैसा ही, आपको भी भारत की हर बारीकी का पता चलता है। और यही बात हमें सबसे खास बनाती है।

भारतीय देश से बाहर जिस देश में रहते हैं, वहां उस देश की प्रगति में मदद करते हैं, और अपने देश के विकास की भी जानकारी रखते हैं।

साथियों,

हम जितना प्यार जन्मभूमि को करते हैं, उतना ही समर्पण कर्मभूमि को भी करते हैं।

साथियों,

वैश्विक चुनौतियों के बीच, आज भारत जिस तेजी से विकास कर रहा है वो अभूतपूर्व है। मैं आपके सामने देश की उपलब्धियों का भारत के सामर्थ्य का एक गुलदस्ता प्रस्तुत करुंगा। यह गुलदस्ता मैं आपके लिए लेकर के आया हूँ। और मैं पक्का मानता हूँ इस गुलदस्ते में आपकी पसंद का कोई न कोई फूल ज़रूर होगा, जो आपको सुंदर भी लगेगा और गर्व से भर भी देगा।

तो आप तैयार हैं? गुलदस्ता पेश करूँ? अब आपको ढूँढना है आपका फूल कहाँ है उसमें, या तो सारे के सारे फूल आपके हैं।

साथियों,

भारत आज दुनिया की fastest growing major economy है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा Vaccine Producer है। भारत Mobile Data Consumption में दुनिया के अग्रणी देशों में है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Mobile Manufacturer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Telecom Market है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Wheat Producer है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा Milk Producer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Fish Producer है।

साथियों,

इतना ही नहीं, आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Automobile Market है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Startup Ecosystem बन चुका है। भारत बहुत जल्द दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Renewable Energy Producer बनने जा रहा है। Solar Energy Capacity में भी भारत दुनिया के बड़े देशों में शामिल हो चुका है।

साथियों,

आज का भारत, दुनिया को विकास के नए मॉडल भी दे रहा है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े Digital Identity Platform का सफल संचालन कर रहा है। आज भारत में UPI के माध्यम से हर महीने अरबों Digital Transactions हो रहे हैं। भारत के Digital Public Infrastructure में आज दुनिया के दर्जनों देश दिलचस्पी दिखा रहे हैं। Drone Technology और Space Economy में भारत नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

ये उस नए भारत की तस्वीर हैं, जो दिखाती हैं कि कैसे भारत न्यूजीलैंड की तरह की इकॉलॉजी और इकॉनॉमी दोनों में बैलेंस बनाकर चल रहा है।

साथियों,

भारत की इस ग्रोथ का एक और पहलू भी है, ये पहलू हमारी विरासत है, हमारी हैरिटेज है। भारत, जितना महत्व अपनी इकॉनॉमी और इकॉलॉजी को देता है, उतना ही फोकस, अपनी हैरिटेज पर भी करता है।

साथियों,

भारत कैसे काम करता है, इसका उदाहरण श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूप हैं। जब अफगानिस्तान में संकट आया, तो हम गुरू ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को पूरे मान के साथ भारत लेकर आए।

साथियों,

हमारे महान सिख गुरुओं ने पूरी मानवता को सेवा, साहस, समानता और करुणा का संदेश दिया है। दुनिया के हर हिस्से में गुरुद्वारे, सेवा के सेंटर हैं। कोई भूखा आए, उसे भोजन मिलता है। कोई संकट में हो, उसे सहारा मिलता है।

इसी माहौल में सिख कम्युनिटी के कुछ भाइयों और बहनों ने हमें बताया था कि श्री हरमंदिर साहिब में सेवा के लिए FCRA से जुड़ी कुछ परेशानियां आ रही हैं। हमने उस समस्या का तुरंत समाधान किया।

साथियों,

आप सभी श्री हेमकुंड साहिब जी के बारे में भी जानते हैं। हैं। हिमालय की ऊंचाइयों पर है। साल का लंबा समय बर्फ की चोटियों से घिरा रहता है। वहाँ अगर कोई दर्शन करने के लिए जाना चाहे तो बड़ा कठिन मार्ग है, बहुत कम लोग जा पाते हैं। खास करके हमारे सिख भाई-बहन वहाँ यात्रा के लिए जाते हैं।

वहाँ दर्शन के लिए जाने में, खास करके हमारे बुज़ुर्गों को, हमारे सिख भाई-बहनों को सहूलियत हो, इसलिए सरकार हेमकुंड साहिब तक रोपवे भी बनवा रही है।

साथियों,

हमारी ही सरकार ने साहिबजादों के शौर्य और बलिदान की अमर स्मृति में प्रति वर्ष 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ मनाना प्रारंभ किया है। आज यह दिवस पूरे देश के लिए, प्रेरणा का पर्व बन चुका है। आज केरलम से लेकर असम तक का बच्चा भी चारो साहिबजादों और माता गुजरी के बलिदान के बारे में जानने लगा है।

‘वीर बाल दिवस’ ने भारत के अनगिनत बच्चों के मन में युवाओं के हृदय में अटूट साहस का संचार किया है।

साथियों,

मैं आपसे पवित्र जोड़े साहब की भी बात करूंगा। मेरी सरकार में मेरे एक साथी हैं, श्रीमान हरदीप पुरी जी। पुरी परिवार के पूर्वज श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सेवादार थे। हरदीप पुरी जी ने मुझे यह बताया था की उनके परिवार ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और माता साहिब कौर जी के “जोड़े साहब” 300 साल से संजो के रखे हैं।

बंटवारे के समय पुरी साहब के पूर्वज इन्हें सुरक्षित दिल्ली ले आए थे। पवित्र “जोड़े साहब” को उनका परिवार सिख संगत को सौंपना चाहता था जिससे की ज़्यादा से ज़्यादा लोग इनके दर्शन कर सकें।

फिर हमने एक समिति बनाई, जो सिख परंपराओं को जानते हैं, जानकारों की हमने advice ली और हमने निर्णय लिया कि इन पवित्र जोड़े साहब को वहां ले जाया जाए जहां श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चरण पहली बार पावन भूमि पर आए, जहां उनका जन्म हुआ, यानी हमारे श्री पटना साहिब।

मुझे बहुत खुशी है कि अब यह पवित्र जोड़े साहब पटना साहिब की पावन भूमि पर है और यह मेरा सौभाग्य है कि उस पवित्र अवसर का मुझे साक्षी बनने का, वहां मौजूद रहने का सौभाग्य मिला था। मैं आपसे भी आग्रह करूंगा कि जब भी भारत जाएं, पटना साहिब में उनके दर्शन जरूर करें।

साथियों,

आज मैं यहां से बहुत सारा विश्वास, बहुत सारा प्यार, और बहुत सारी स्मृतियां लेकर जा रहा हूं। और मैं आपसे ये भी कहूंगा, इस बार भारतीय पीएम को न्यूज़ीलैंड आने में 40 साल लगे हैं, लेकिन अब इतना लंबा इंतज़ार आपको नहीं करना पड़ेगा। अब 40 साल नहीं लगेंगे, ये मोदी की गारंटी है।

और मोदी की गारंटी मतलब, गारंटी पूरा होने की गारंटी।

साथियों,

मैं आपसे एक आग्रह भी करना चाहता हूं। हमने कुछ समय पहले, हमारी इंडियन डायस्पोरा के बच्चों के लिए एक नया प्रयोग किया है। हमारे बच्चे भारत को समझें और भारत की विविधता की बात दुनिया तक पहुँचे, इसके लिए हमने भारत को जानो क्विज की शुरुआत की है। अभी इसका कर्टेन रेजर ही हुआ है, और हमारे साथियों ने इसमें ही जिस एनर्जी से पार्टिसिपेट किया है, मैं वही देखकर बहुत प्रभावित हूं।

अब हम इस इवेंट के सिक्स्थ एडिशन को और हाईटेक बना रहे हैं। बहुत सारे इवेंट्स इस बार ऐप के माध्यम से होने वाले हैं। मेरा आग्रह है कि यहाँ जितने भी युवा साथी हैं, वो इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें। भारत को जाने और भारत की विरासत को न्यूजीलैंड के लोगों से जोड़ें।

साथियों,

मैं एक शानदार फ्यूचर सामने देख रहा हूं, जिसमें विकसित भारत की रोशनी भी है, और न्यूज़ीलैंड की प्रॉसपैरिटी भी है। इसी विश्वास के साथ, आप सभी का फिर से बहुत-बहुत धन्यवाद।

प्राइम मिनिस्टर लक्सन और उनकी टीम का आभार! न्यूज़ीलैंड की जनता का धन्यवाद!

एक बार फिर मेरे साथ बोलिए, भारत माता की जय! वंदे मातरम्!

थैंक यू !
की ओरा !