मेरे लिए यह बड़े सौभाग्‍य की बात है कि आज महाबोधक सोसायटी के इस पवित्र स्‍थल पर आ करके सभी पूज्‍यों संतों के आशीर्वाद लेने का अवसर मिला और मैं इसके लिए विशेष रूप से महाबोधि सोसायटी के अध्‍यक्ष जी का हृदय से धन्‍यवाद देता हूं। मैं आपका विशेष रूप से आभारी हूं कि आपने मुझे सांची relics के दर्शन करने का और पुण्य पाने का अवसर दिया।

28 PM MODI VISIT at Mahabodhi Society SRILANKA (6)

बुद्धभिक्षुओं के आर्शीवाद मिले। उन्‍होंने मेरे लिए, भारत और श्रीलंका के लिए, हमारी एकता के लिए, हमारी प्रगति के लिए प्रार्थना की - यह बात अपने आप में हृदय को छूने वाली है और मैं फिर एक बार सबको प्रणाम करता हूं।

श्रीलंका में सांस्‍कृतिक और राजनैतिक पुनर्जागरण में श्रीमद Anagarika Dharmapala का की अहम भूमिका रही है। बौद्ध धर्म के पुनरूथान के लिए महाबोधि के सोसायटी के गठन में उनकी अहम भूमिका रही है। इस सोसायटी ने बौद्धगया में स्थित महादेवी वर्मा के प्राचीन मंदिर की महिमा को बहाल करने में भी अहम योगदान दिया है

कहा जाता है कि विश्‍व में सबसे पुराना बौद्ध धर्म पर चलने वाला कोई अगर देश है तो वो देश श्रीलंका है।

आज विश्‍व के कई देशों में हम अगर जाएंगे तो हमें श्रीलंका के बोधभिक्षु वहां पर इस पवित्र काम को करते हुए नजर आते हैं।

बुद्ध हम सबको जोड़ते हैं, और मेरा तो यह सौभाग्‍य रहा जैसे स्‍वामी जी ने बताया कि जब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था तो मैंने एक अंतर्राष्‍ट्रीय बुद्ध सभा का आयोजन किया था। दुनिया के 20 अधिक देशों से अधिक देशों से सभी महानुभव आये थे, आप भी पधारे थे, क्‍योंकि सामान्‍य ऐसी छवि है कि बुद्ध भारत के पूर्वी हिस्‍से में ही प्रभावित थे लेकिन मैं तो गुजरात से, भारत के पश्चिमी छोर से आता हूं, लेकिन वहां पर भी बुद्ध का उतना ही प्रभाव था।

28 PM MODI VISIT at Mahabodhi Society SRILANKA (12)

मेरा यह सौभाग्‍य रहा है कि मेरा जन्‍म जिस गांव में हुआ वर्णगढ़ Chinese Philosopher Hiuen Tsang करीब आठ सौ साल पहले हिंदुस्‍तान आए थे और उन्‍होंने आठ सौ साल पहले भारत का जो वर्णन लिखा है, उसमें वो लम्‍बे अरसे तक मेरे गांव में रहे थे। और उन्‍होंने लिखा है कि मेरे गांव में जहां मैं पैदा हुआ, वहां पर बुद्ध भिक्षुओं की Training का एक बहुत बड़ा Centre था। 10 हजार से ज्‍यादा बुद्धभिक्षु वहां रह सके, इतना बड़ा Hostel था।

28 PM MODI VISIT at Mahabodhi Society SRILANKA (1)

तो Hiuen Tsang की इस बात को लेकर के जब मैं मुख्‍यमंत्री बना, तो मैंने मेरे गांव में excavation करवाया। और आप सबको जानकार के खुशी होगी कि जब excavation किया तो सारी चीजें मिल आई - वो बड़ी-बड़ी Hostel, वो बुद्ध भिक्षुओं का Training का Centre. और इतना ही नहीं, हमारे यहां एक जगह है गुजरात में देव की मोरी, उस जगह पर excavation किया तो भगवान बुद्ध के relics हमें एक Golden Box में मिले।

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और मैं थेरो जी को ले गया था, वो सारी चीजें दिखाने के लिए, उनको दर्शन कराने के लिए ले गया था।

और मेरा एक मन का Dream रहा, जब मैं मुख्‍यमंत्री था कि जहां से हमें भगवान बुद्ध के relics मिले हैं, वहां पर मेरा सपना है एक भव्‍य भगवान बुद्ध का मंदिर बनाना। मैं हमेशा अनुभव करता हूं कि आज विश्‍व जिस संकटों से गुजर रहा है। जो आतंकवाद के साए में दुनिया भयभीत होकर के जी रही है, बुद्ध का रास्‍ता यही है जो युद्ध से मुक्ति दिलाता है।

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और मैं फिर एक बार इस पवित्र स्‍थल पर सब संतों का आशीर्वाद लेने का मुझे सौभाग्‍य भी मिला... मैं फिर एक बार सबको प्रणाम करता हूं। स्‍वागत सम्‍मान के लिए प्रणाम करता हूं, और आप सबका धन्‍यवाद करता हूं। 

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January 29, 2026
राष्ट्रपति का संबोधन 140 करोड़ भारतीयों के आत्मविश्वास और आकांक्षाओं को दर्शाता है: प्रधानमंत्री
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता युवाओं, किसानों और निर्माताओं के लिए व्यापक अवसर खोलता है : प्रधानमंत्री
हमारी सरकार सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन में विश्वास करती है; देश तेजी से सुधार के मार्ग पर कदम बढ़ा रहा है : प्रधानमंत्री
भारत का लोकतंत्र और जनसांख्यिकी विश्व के लिए आशा की किरण है: प्रधानमंत्री
यह समाधानों, सशक्त निर्णय और सुधारों में तेजी लाने का समय है : प्रधानमंत्री

नमस्कार साथियों!

कल राष्ट्रपति जी का उद्बोधन 140 करोड़ देशवासियों के आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति था, 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ का लेखा-जोखा था और 140 करोड़ देशवासी और उसमें भी ज्यादातर युवा, उनके एस्पिरेशन को रेखांकित करने का बहुत ही सटीक उद्बोधन, सभी सांसदों के लिए कई मार्गदर्शक बातें भी, कल आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सदन में सबके सामने रखी हैं। सत्र के प्रारंभ में ही और 2026 के प्रारंभ में ही, आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सांसदों से जो अपेक्षाएं व्यक्त की हैं, उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में राष्ट्र के मुखिया के रूप में जो भावनाएं व्यक्त की हैं, मुझे पूरा विश्वास है कि सभी माननीय सांसदों ने उसको गंभीरता से लिया ही होगा और यह सत्र अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण सत्र होता है। यह बजट सत्र है, 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है, यह दूसरी चौथाई का प्रारंभ हो रहा है, और 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह महत्वपूर्ण 25 वर्ष का दौर आरंभ हो रहा है और यह दूसरे क्वार्टर का, इस शताब्दी के दूसरे क्वार्टर का यह पहला बजट आ रहा है और वित्त मंत्री निर्मला जी, देश की पहली वित्त मंत्री ऐसी हैं, महिला वित्त मंत्री ऐसी हैं, जो लगातार 9वीं बार देश के संसद में बजट प्रस्तुत करने जा रही है। यह अपने आप में एक गौरव पल के रूप में भारत के संसदीय इतिहास में रजिस्टर हो रहा है।

साथियों,

इस वर्ष का प्रारंभ बहुत ही पॉजिटिव नोट के साथ शुरू हुआ है। आत्मविश्वास से भरा हिंदुस्तान आज विश्व के लिए आशा की किरण भी बना है, आकर्षण का केंद्र भी बना है। इस क्वार्टर के प्रारंभ में ही भारत और यूरोपीय यूनियन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आने वाली दिशाएं कितनी उज्ज्वल हैं, भारत के युवाओं का भविष्य कितना उज्ज्वल है, उसकी एक झलक है। यह फ्री ट्रेड फॉर एंबिशियस भारत है, यह फ्री ट्रेड फॉर एस्पिरेशनल यूथ है, यह फ्री ट्रेड फॉर आत्मनिर्भर भारत है और मुझे पक्का विश्वास है, खास करके जो भारत के मैन्युफैक्चरर्स हैं, वे इस अवसर को अपनी क्षमताएं बढ़ाने के लिए करेंगे। और मैं सभी प्रकार के उत्पादकों से यही कहूंगा कि जब भारत यूरोपियन यूनियन के बीच मदर ऑफ ऑल डील्स जिसको कहते हैं, वैसा समझौता हुआ है तब, मेरे देश के उद्योगकार, मेरे देश के मैन्युफैक्चरर्स, अब तो बहुत बड़ा बाजार खुल गया, अब बहुत सस्ते में हमारा माल पहुंच जाएगा, इतने भाव से वो बैठे ना रहे, यह एक अवसर है, और इस अवसर का सबसे पहले मंत्र यह होता है, कि हम क्वालिटी पर बल दें, हम अब जब बाजार खुल गया है तो उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के बाजार में जाएं और अगर उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के जाते हैं, तो हम यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के खरीदारों से पैसे ही कमाते हैं इतना ही नहीं, क्वालिटी के कारण से उनका दिल जीत लेते हैं, और वो लंबे अरसे तक प्रभाव रहता है उसका, दशकों तक उसका प्रभाव रहता है। कंपनियों का ब्रांड देश के ब्रांड के साथ नए गौरव को प्रस्थापित कर देता है और इसलिए 27 देशों के साथ हुआ यह समझौता, हमारे देश के मछुआरे, हमारे देश के किसान, हमारे देश के युवा, सर्विस सेक्टर में जो लोग विश्व में अलग-अलग जगह पर जाने के उत्सुक हैं, उनके लिए बहुत बड़े अवसर लेकर के आ रहा है। और मुझे पक्का विश्वास है, एक प्रकार से कॉन्फिडेंस कॉम्पिटेटिव और प्रोडक्टिव भारत की दिशा में यह बहुत बड़ा कदम है।

साथियों,

देश का ध्यान बजट की तरफ होना बहुत स्वाभाविक है, लेकिन इस सरकार की यह पहचान रही है- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म। और अब तो हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चल पड़े हैं, बहुत तेजी से चल पड़े हैं और मैं संसद के भी सभी साथियों का आभार व्यक्त करता हूं, इस रिफॉर्म एक्सप्रेसवे को गति देने में वे भी अपनी सकारात्मक शक्ति को लगा रहे हैं और उसके कारण रिफॉर्म एक्सप्रेस को भी लगातार गति मिल रही है। देश लॉन्ग टर्म पेंडिंग प्रॉब्लम अब उससे निकल करके, लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन के मार्ग पर मजबूती के साथ कदम रख रहा है। और जब लॉन्ग टर्म सॉल्यूशंस होते हैं, तब predictivity होती है, जो विश्व में एक भरोसा पैदा करती है! हमारे हर निर्णय में राष्ट्र की प्रगति यह हमारा लक्ष्य है, लेकिन हमारे सारे निर्णय ह्यूमन सेंट्रिक हैं। हमारी भूमिका, हमारी योजनाएं, ह्यूमन सेंट्रिक है। हम टेक्नोलॉजी के साथ स्पर्धा भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी को आत्मसात भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को स्वीकार भी करेंगे, लेकिन उसके साथ-साथ हम मानव केंद्रीय व्यवस्था को जरा भी कम नहीं आकेंगे, हम संवेदनशीलताओं की महत्वता को समझते हुए टेक्नोलॉजी की जुगलबंदी के साथ आगे बढ़ने के व्यू के साथ आगे सोचेंगे। जो हमारे टिकाकार रहते हैं साथी, हमारे प्रति पसंद ना पसंद का रवैया रहता है और लोकतंत्र में बहुत स्वाभाविक है, लेकिन एक बात हर कोई कहता है, कि इस सरकार ने लास्ट माइल डिलीवरी पर बल दिया है। योजनाओं को फाइलों तक नहीं, उसे लाइफ तक पहुंचाने का प्रयास रहता है। और यही हमारी जो परंपरा है, उसको हम आने वाले दिनों में रिफॉर्म एक्सप्रेस में नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म के साथ आगे बढ़ाने वाले हैं। भारत की डेमोक्रेसी और भारत की डेमोग्राफी, आज दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है, तब इस लोकतंत्र के मंदिर में हम विश्व समुदाय को भी कोई संदेश दें, हमारे सामर्थ्य का, हमारे लोकतंत्र के प्रति समर्पण का, लोकतंत्र की प्रक्रियाओं के द्वारा हुए निर्णय का सम्मान करने का यह अवसर है, और विश्व इसका जरूर स्वागत भी करता है, स्वीकार भी करता है। आज जिस प्रकार से देश आगे बढ़ रहा है आज समय व्यवधान का नहीं है, आज समय समाधान का है। आज प्राथमिकता व्यवधान नहीं है, आज प्राथमिकता समाधान है। आज भूमिका व्यवधान के माध्यम से रोते बैठने का नहीं है, आज हिम्मत के साथ समाधानकारी निर्णयों का कालखंड है। मैं सभी माननीय सांसदों से आग्रह करूंगा कि वे आएं, राष्ट्र के लिए आवश्यक समाधानों के दौर को हम गति दें, निर्णयों को हम शक्ति दें और लास्ट माइल डिलीवरी में हम सफलतापूर्वक आगे बढ़ें, साथियों आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद, बहुत-बहुत शुभकामनाएं।