प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में पेपरलेस वाणिज्य भवन का शिलान्यास किया
सरकार आपसी समन्वय के साथ समाधान निकालने की दिशा में कार्य कर रही है: पीएम मोदी
हमारे युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करना हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी है: प्रधानमंत्री
भारत अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है: प्रधानमंत्री मोदी
आयात को कम करने के लिए घरेलू विनिर्माण उत्पादन बढ़ाने के प्रयास जरूरी: पीएम मोदी

मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री सुरेश प्रभु जी, आवास और शहरी कार्य मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी जी, वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री श्री सी. आर. चौधरी जी, वाणिज्य मंत्रालय और संबंधित विभागों के अधिकारीगण और यहां उपस्थित अन्य महानुभाव

सबसे पहले मैं आप सभी को वाणिज्य भवन का शिलान्यास होने पर बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आज इसका कार्य शुरू हो गया है और जैसा कि मंच पर ही बताया गया है कि अगले वर्ष दिसंबर तक निर्माण का काम पूरा हो जाएगा। मुझे उम्मीद है कि समय की सीमाओं में ही वाणिज्य भवन बनेगा और जल्द से जल्द इसका लाभ लोगों को मिलने लगेगा।

साथियों, समय की बात सबसे पहले मैं इसलिए कर रहा हूं क्योंकि इस सरकार के दौरान जितने भी भवनों का शिलान्यास या उद्घाटन करने का अवसर मुझे मिला, उसमें ज्यादातर में एक बात कॉमन थी। कॉमन ये की इमारतों का निर्माण भी सरकारों के काम करने के तरीकों का प्रतिबिम्ब होता है। न्यू इंडिया की ओर बढ़ते देश और पुरानी व्यवस्थाओं के बीच का फर्क भी इसी से पता चलता है।

साथियों, मैं आपको कुछ उदाहरण देना चाहता हूं। मुझे याद है जब वर्ष 2016 में प्रवासी भारतीय केंद्र का लोकार्पण हुआ, तो उस समय ये बात भी सामने आई थी कि उस केंद्र का ऐलान अटल बिहारी वाजपायी जी के समय हुआ था। बाद में उसे मूर्त रूप में आते-आते 12 साल लग गए।

 

पिछले साल दिसंबर में जिस डॉक्टर आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर का लोकार्पण हुआ, उसे बनाने का निर्णय भी 1992 में लिया गया था। लेकिन इसका शिलान्यास हुआ वर्ष 2015 में  मैंने कहा , कहाँ 1992 कहाँ 2015, इसका  लोकार्पण 2017 में हुआ। यानि निर्णय होने के बाद 23-24 साल लग गए, सिर्फ एक सेंटर बनने में।

साथियों, इसी साल मार्च में मैंने Central Information Commission के नए भवन को भी देश को समर्पित किया था। CIC के लिए नए भवन की मांग भी 12 साल से हो रही थी लेकिन इसके लिए भी काम NDA की अभी की सरकार ने ही शुरू करवाया और तय समय में उसे पूरा भी किया।

एक और उदाहरण है अलीपुर रोड में बनी आंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक का। दो महीना पहले इसका भी लोकार्पण किया गया है। इस स्मारक के लिए भी बरसों तक चर्चा हुई, अटल जी के समय काम में तेजी भी आई , लेकिन बाद में  दस बारह साल सब ठप पड़ गया।

दिल्ली की ये चार अलग-अलग इमारतें, प्रतीक हैं कि जब सरकार silos में काम नहीं होता, जब सारे विभाग, मंत्रालय, silos से निकलकर solution के लिए, एक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करते हैं, तो कितना अच्छा और कितना जल्दी  परिणाम निकलता है। हर काम को अटकाने-भटकाने-लटकाने की प्रवत्ति से देश अब आगे निकल चुका है।

मुझे खुशी है कि आज इसमें पाँचवाँ प्रतीक जुड़ने की शुरुआत हो गई है। इस वाणिज्य भवन में, एक छत के नीचे, commerce sector के हर क्षेत्र से silos को खत्म करने का कार्य और बेहतर तरीके से किया जाएगा, मेरी यही कामना है। मुझे विश्वास है की यह परिपूर्ण भी होगा| 

साथियों, आज भारत समय के बहुत महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। हमारा Demographic Dividendकिसी भी देश के लिए ईर्ष्या का विषय हो सकता है। हमारी democracy को हमारे नौजवान नई ऊर्जा देते हैं। ये नौजवान 21वीं सदी के भारत का आधार हैं। उनकी आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति, सिर्फ कुछ मंत्रालयों की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

भारत पिछली शताब्दी में औद्योगिक क्रांति का लाभ उठाने से चूक गया था। तब उसकी अनेक वजहें थीं। लेकिन अब उतनी ही वजहें हैं जिनकी वजह से भारत अब इस शताब्दी की औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व करने वालों में से एक बन सकता है।चौथी औद्योगिक क्रांति, जिसे 4th Industrial Revolution भी कहते हैं, उसका मुख्य आधार डिजिटल टेक्नोलॉजी है और निश्चित तौर पर भारत इसमें दुनिया के कई देशों से कहीं आगे है।

आज आप वाणिज्य मंत्रालयों के भी जितने लक्ष्यों को देखेंगे, जितने भी कार्यों को देखेंगे, तो उसमें डिजिटल टेक्नोलॉजी की प्रमुखता ही आपको नजर आएगी।

ये वाणिज्य भवन ही देखिए। जिस जमीन पर ये इमारत बनेगी, वो पहले Directorate General of Supplies and Disposal के अधिकार में थी। सौ वर्ष से भी ज्यादा पुराना ये विभाग अब बंद हो चुका है और इसकी जगह ली है डिजिटल तकनीक पर आधारित Government-e-Marketplace- GeMने। सरकार किस तरह से अपनी जरूरत के सामान की खरीद करती है, उस व्यवस्था को GeM ने पूरी तरह से बदल दिया है।

आज की तारीख में1 लाख 17 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े विक्रेता, कंपनियां इससे जुड़ी चुकी हैं। इन Sellers को 5 लाख से ज्यादा Orders GeM के माध्यम से दिए जा चुके हैं। बहुत कम समय में GeM पर 8700 करोड़ रुपए के सामान को खरीदा गया है।

जिस तरह GeM ने देश के सुदूर कोने में बैठे छोटे-छोटे उद्मियों को अपने Products सीधे सरकार को बेचने का अवसर मुहैया कराया है, उसके लिए Commerce Ministry प्रशंसा की पात्र है। लेकिन आप लोगों के लिए, मैं इसे एक लंबी यात्रा की शुरुआत मानता हूं।

GeM का विस्तार और कैसे बढ़ाया जाए, कैसे ये देश के MSME सेक्टर, छोटे उद्यमियों को International Commerce की तरफ ले जाए, इस बारे में बहुत कुछ किया जाना बाकी है। आज देश में 40 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन, इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की बढ़ती हुई संख्या, सस्ता डेटा, आपके कार्यों को और आसान कर रहा है।

साथियों, हमारे यहां कहा गया है- को हि भार: समर्थानाम् किम् दूर व्यवसायिनाम्। यानि जो व्यक्ति शक्तिशाली होता है, उसके लिए कोई चीज भारी नहीं होती। इसी तरह व्यवसायियों के लिए कोई जगह दूर नहीं होती। आज टेक्नोलॉजी ने व्यापार को इतना सुगम बना दिया है कि दूरी दिनोंदिन कम होती जा रही है। ये टेक्नोलॉजी देश के बिजनेस कल्चर में जितनी बढ़ेगी, उतना ही फायदा पहुंचाएगी।

हम देख रहे हैं कि किस तरह एक वर्ष से भी कम समय ने GST देश में बिजनेस का तरीका बदल दिया है। अगर टेक्नोलॉजी नहीं होती, तो क्या ये संभव होता? नहीं। आज GST की वजह से ही देश में Indirect Tax औऱ उससे जुड़ने वाले लोगों का विस्तार बहुत तेजी से  हो रहा है।

स्वतंत्रता के बाद से हमारे देश में Indirect Tax सिस्टम से जहां सिर्फ 60 लाख जुड़े हुए थे, वहीं GST के बाद के 11 महीनों में ही अब तक 54  लाख से ज्यादा लोगों ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन दिया है और इनमें से 47 लाख से ज्यादा रजिस्टर हो चुके हैं। इस तरह रजिस्टर्ड लोगों की संख्या अब एक करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।

ये इस बात को दर्शाता है कि प्रक्रियाओं को सरल करने पर, Minimum Government, Maximum Governance की राह पर चलने पर नतीजे भी आते हैं, और ज्यादा से ज्यादा लोग भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए कदम बढ़ाते हैं।

साथियों, आप भली-भांति जानते हैं कि पिछले 4 वर्षों में सरकार ने People friendly, Development friendly और Investment friendly माहौल बनाने का निरंतर प्रयास किया है। तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत के Macro-Economic Indicators stable बने हुए हैं। Inflation हो, Fiscal Deficit हो, या फिर Current Account Balance, इनमें पहले की सरकारों की तुलना में सुधार हुआ है।

भारत आज दुनिया की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अभी पिछले ही क्वार्टर में देश की विकास दर ने 7.7 प्रतिशत के आंकड़े को Touch किया है। पिछले 4 वर्षों में हुआ विदेशी निवेश, विदेशी मुद्रा का भंडार अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

आज भारत FDI Confidence Index में top two emerging market performers में से एक है। Ease of doing Business की रैंकिंग में 142 से 100 नंबर पर पहुंचना, Logistics Performance Index में 19 अंकों का सुधार, Global Competitiveness Index में रैंकिंग 71 से सुधकर 39 पर पहुंचना, Global Innovation Index में 21 अंक का उछाल आना, ये इसी विजन का नतीजा है।

आपकी जानकारी में अवश्य होगा कि हाल ही में भारत ने दुनिया के top 5 Fin Tech countries में भी जगह बना ली है।

लेकिन इन Positive Indicators के साथ ही आगे बहुत बड़ा सवाल ये भी है कि अब आगे क्या? साथियों, सात प्रतिशत, आठ प्रतिशत की विकास दर से आगे बढ़कर हमें डबल डिजिट की विकास दर प्राप्त करने के लक्ष्य पर काम करना है। दुनिया की नजरें आज भारत को इस दृष्टि से भी देख रही हैं कि भारत कितने वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर के क्लब में शामिल होता है?

मैं मानता हूं कि Commerce Ministry को, आप सभी जिम्मेदार अधिकारीगणों को इन लक्ष्यों को एक चैलेंज की तरह लेना चाहिए। आर्थिक मोर्चे पर की गई ये प्रगति सीधे-सीधे देश के सामान्य नागरिक के जीवन से जुड़ी हुई है।

इसलिए आपने ये भी देखा होगा कि जब भी मैं Ease of Trading, Ease of Doing Businessकी बात करता हूं, वो साथ ही Ease of Livingका विषय भी हमेशा  उठाता हूं। आज की Interconnected दुनिया में ये सभी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

जब बिजली कनेक्शन लेना आसान होता है, कंस्ट्रक्शन को लेकर मंजूरी जल्दी मिलती है, जब उद्योगों को, कंपनियों को प्रक्रियाओं से उलझना नहीं होता, तो इसका लाभ जन सामान्य तक भी पहुंचता है। इसलिए आप लोगों के लिए भी ये एक चैलेंज है कि अब भी जो अलग-अलग सेक्टरों में जो bottleneck बचे हुए हैं, जहां पर silos में काम हो रहा है, उन्हें जितना जल्दी हो सके  दूर किया जाए।

विशेषकर Infrasector में जो दिक्कतें आती हैं, high Transaction cost होता है, Manufacturing को बढ़ाने में जो बातें गतिरोध पैदा करती हैं, services का inadequate diversification करती हैं, उन्हें रोका जाना, सुधारा जाना बहुत आवश्यक है।

मुझे खुशी है कि अभी हाल ही में Department of Commerce ने देश के logistics sector के integrated development का बीड़ा उठाया है। ये initiative देश में trade के environment को सुधारने में बहुत बड़ी भूमिका निभाने वाला है।

साथियों, Integrated logistics action plan आज समय की मांग है और New India की जरूरत भी है।Policy में बदलाव करके, जो वर्तमान में Procedures हैं, उन्हें सुधार करके,आज की आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाकर इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

मुझे बताया गया है कि Department of Commerce इस दिशा में एक Online Portal पर भी काम कर रहा है। Global Trade में भारत की उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए, नई ऊँचाई पर पहुंचाने के लिए सभी मंत्रालयों और सभी राज्यों का एकसाथ मिलकर काम करना भी आवश्यक है। जिसको हम कहते हैं, ‘Whole of Government’ Approach,उसे अपनाए जाने की जरूरत है।

ये भी एक अच्छा कदम है कि Council for Trade Development and Promotion राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों में International Trade को बढ़ावा देने वाला वातावरण बनाने के लिए काम कर रही है। भारत के Exports को बढ़ाना है तो राज्यों को Active Partner बनाकर ही आगे बढ़ना होगा।

मैं समझता हूं कि राज्यों में State level export strategy का निर्माण करके, उन्हें National Trade Policy के साथ तालमेल करते हुए, आर्थिक सहायता करते हुए, जितने भी stakeholders हैं, उन्हें साथ लेते हुए, इस दिशा में जितनी तेजी से आगे बढ़ेंगे, उतना ही देश का लाभ होगा।

साथियों, International मार्केट में भारत की उपस्थिति को बढ़ाने के लिए जो हमारे Traditional Products और Markets हैं, उन्हें बनाए रखते हुए नए Products और नए Markets पर ध्यान दिया जाना भी बहुत आवश्यक है।हमें देश के भीतर की चुनौतियों के साथ ही देश के बाहर की परिस्थितियों के लिए भी खुद को और मजबूत करना होगा।

जब हम short-term developmental gains और long-term sustainability के बीच एक संतुलन बनाकर चलेंगे तो उसके नतीजे भी दिखाई देंगे।

पिछले साल दिसंबर में Foreign Trade policy से जुड़ा जो Mid Term review किया गया था, उसे भी मैं बहुत सकारात्मक पहल मानता हूं। Incentive बढ़ाकर, MSME सेक्टर की Hand Holding करके निर्यात को बढ़ाने के लिए किया गया हर बदलाव प्रशंसनीय है। ये सीधे-सीधे देश की रोजगार जरूरतों से भी जुड़ा हुआ है।

एक और महत्वपूर्ण विषय है-Product की Quality. यही वजह है कि साल 2014 में मैंने 15 अगस्त को लाल किले से Zero Defect, Zero Effect का आह्वान किया था। उद्योग छोटा हो या बड़ा, हर मैन्यूफैक्चरर को इस बात के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए कि वो ऐसे Products बनाए, जिसमें Zero Defect हो, कोई हमारे exported goods को वापस न भेजे। इसके साथ ही मैंने Zero Effect की बात की थी, यानि हमारे Products पर्यावरण पर कोई negative effect न डालें।

Products की Quality को लेकर ये जागरूकता Make in India की चमक बढ़ाने और New India की पहचान को मजबूत करने का काम करेगी।

आप भी जब देखते होंगे कि जहां 2014 में हमारे देश में सिर्फ 2 मोबाइल मैन्यूपैक्चरिंग कंपनियां थीं, वो अब बढ़कर 120 हो गई हैं, बहुत ही कम कीमत पर विश्व स्तर के QualityProduct का निर्माण कर रही हैं, तो खुद को गौरवांवित महसूस करते होंगे।

साथियों, ये समय संकल्प का है, चुनौतियां स्वीकारने का है।

क्या Department of Commerce ये संकल्प ले सकता है की विश्व के कुल निर्यात में भारत के योगदान को बढ़ाकर दोगुना करे, अभी के 1.6 प्रतिशत से बढ़ाकर कम से कम 3.4 प्रतिशत तक ले जाए। ये world economy मेंGDP के भारत के योगदान के बराबर होगा। इस से देश में रोज़गार के और नए अवसर बनेंगे और हमारी per capita इनकम में भी बढ़ोतरी होगी।

इसके लिए सरकार के सभी विभागों और यहाँ उपस्थित एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल्स के सभी लोगों को मिलकर प्रयास करना होगा।

इसके अलावा एक और संकल्प लिया जा सकता है इम्पोर्ट को लेकर। क्या हम कुछ चुने हुए क्षेत्रों में इम्पोर्ट पर अपनी निर्भरता को कम कर सकते हैं?  चाहेवो एनर्जी इम्पोर्ट हो, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स का इम्पोर्ट हो, डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग का क्षेत्र हो या मेडिकल devices का क्षेत्र हो। Make in india के द्वारा ये संभव है।

डोमेस्टिकमैन्यूफैक्चरिंग के द्वारा इम्पोर्ट में 10% की कमी देश में साढ़े तीन लाख करोड़रुपए कीआय बढ़ा सकती है। ये देश की GDP में वृद्धि को डबल डिजिट में ले जाने में एक Effective tool बन सकती है।

मैं आपको इलेक्ट्रॉनिक गुड्स की मैन्यूफैक्चरिंग का ही उदाहरण देना चाहता हूं। क्या ये आप सभी लोगों के लिए एक चुनौती नहीं है कि देश में इलेक्ट्रॉनिक गुड्स की कुल मांग का 65 प्रतिशत हमें बाहर से खरीदना पड़ता है?

जैसा मोबाइल फोन के क्षेत्र में हुआ है, वैसे हीक्या आप इस चुनौती को स्वीकार कर, देश को इलेक्ट्रॉनिक गुड्स की मैन्यूफैक्चरिग में आत्मनिर्भर बना सकते हैं?

साथियों, आप इससे भी परिचित हैं कि इम्पोर्ट पर निर्भरता को कम करने की दिशा में एक बहुत महत्वपूर्ण कदम पिछले वर्ष उठाया गया है। Public Procurement (Preference to Make in India)आदेश के द्वारा सरकार के तमाम विभागों और संस्थानों में खरीदी जा रही वस्तुओं और सेवाओं के Domestic Source से खरीदने पर बल दिया जा रहा है। इस आदेश को पूरी गंभीरता के साथ लागू करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

इसके लिए आप सभी लोगों को, सरकार के सभी निकायों को, अपनी मॉनीटरिंग व्यवस्था को, इस आदेश के पालन के लिए और सुदृढ़ करना होगा।

घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने कई और अहम फैसले भी लिए हैं। वो चाहे regulatory framework हों, regulatory frameworkमें सरलता लाने की बात हो, investor friendly policyहो, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजीस्टिक्स पर बल हो, ये सभी इसलिए किया जा रहा है ताकि भारत आत्मनिर्भर बने, 21वीं सदी की औद्योगिक क्रांति में एक कदम भी पीछे न रह जाए।

Make in India के साथ बढ़ता ये गौरव, नए बनने वाले वाणिज्य भवन का भी गौरव बढ़ाए, मेरी यही कामना है।

 

साथियों, यहां आने से पहले एक और शुभ कार्य आप लोगों ने मुझसे कराया है। इस परिसर में मौलश्री या बकुल के पौधे को लगाने का सौभाग्य मुझे मिला। मौलश्री की बहुत पौराणिक मान्यता है, कितने ही औषधीय गुणों से संपन्न है और इसका वृक्ष सालों-साल छाया देता है। मुझे बताया गया है कि इसके अलावा भी यहां करीब हजार पेड़ और लगाए जाने की योजना है।

नए बनने वाले वाणिज्य भवन का, प्रकृति के साथ ये संवाद, उसमें काम करने वाले लोगों को भी स्फूर्त रखेगा, उन्हें राहत देगा।

पर्यावरण के लिए अनुकूल, लेकिन आधुनिक तकनीक से संपन्न वातावरण में आप सभी न्यू इंडिया के लिए अपना श्रेष्ठतम दें, Best Effort करें, इसी कामना के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

एक बार फिर आप सभी को वाणिज्य भवन के निर्माण का काम शुरू होने पर बहुत-बहुत बधाई।

धन्यवाद !!!

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Lakshadweep Tourist Numbers Soar After PM Modi’s Appeal, Maldives Sees Sharp Dip In Indian Visitors

Media Coverage

Lakshadweep Tourist Numbers Soar After PM Modi’s Appeal, Maldives Sees Sharp Dip In Indian Visitors
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
भारत-इटली संयुक्त घोषणा
May 20, 2026

इटली गणराज्य की मंत्रिपरिषद की अध्यक्ष (प्रधानमंत्री) जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर, भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 19-20 मई 2026 को इटली की आधिकारिक यात्रा की। यह यात्रा जून 2024 में जी7 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मोदी की इटली यात्रा और 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी की भारत यात्रा के बाद हुई, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति प्रदान की। दोनों नेताओं ने भारत-इटली संबंधों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया।

राजनीतिक संवाद

दोनों प्रधानमंत्रियों ने उच्च स्तरीय आदान-प्रदान की शानदार प्रगति का स्वागत किया और बहुपक्षीय आयोजनों के इतर बैठकों समेत नेताओं की वार्षिक बैठकें आयोजित करने के साथ-साथ नियमित मंत्रिस्तरीय और संस्थागत-स्तरीय बैठकें करने पर सहमति जताई।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने नवंबर 2024 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान अपनी बैठक में दोनों नेताओं द्वारा अपनाई गई 'संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029' के विभिन्न स्तंभों में हासिल की गई ठोस प्रगति की सराहना की। दोनों नेताओं ने भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 की समीक्षा और विशेष रणनीतिक साझेदारी को रणनीतिक दिशा देने के लिए विदेश मंत्रियों के नेतृत्व में एक तंत्र (मैकेनिज्म) स्थापित करने पर सहमति जताई।

आर्थिक सहयोग और निवेश

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय आर्थिक और औद्योगिक सहयोग की बढ़ती गतिशीलता पर संतोष व्यक्त किया, जिसके तहत पिछले वर्ष से अब तक तीन उच्च स्तरीय व्यापार मंच (बिजनेस फोरम) आयोजित किए जा चुके हैं। भारत के तीव्र एवं सतत आर्थिक विकास से पैदा होने वाले अवसरों और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के लिए वार्ताओं के सफल समापन के आधार पर, दोनों पक्षों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने के साझा लक्ष्य की फिर से पुष्टि की।

दोनों नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय निवेश में हुई वृद्धि का स्वागत किया और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने के लिए उद्योगों को औद्योगिक और तकनीकी साझेदारियां बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विशेष रूप से वस्त्र, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों (क्लीन टेक), सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, पर्यटन, फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा प्रौद्योगिकियों, डिजिटल प्रौद्योगिकियों, महत्वपूर्ण कच्चे माल, इस्पात, बंदरगाहों और बुनियादी ढांचे में अधिक निवेश की संभावनाओं का स्वागत किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने उद्योगों को दोनों देशों में लागू नीतिगत प्रोत्साहनों और योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया, जो व्यापारिक संबंधों और उत्पादन सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास करती हैं।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने शेयर बाजारों, निवेश कोषों, वेंचर कैपिटल, बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के बीच संवाद और सहयोग को प्रोत्साहित करने पर सहमति जताई।

उन्होंने आपूर्ति श्रृंखलाओं के मजबूत एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए लघु एवं मध्यम उद्योगों के बीच औद्योगिक साझेदारी को सुगम बनाने पर सहमत व्यक्त की। दोनों नेताओं ने आने वाले महीनों में आपसी हित के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नए क्षेत्रीय मिशनों को प्रोत्साहित किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'क्रिटिकल मिनरल्स' यानि महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने सतत विकास और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं पर विशेष ध्यान देते हुए महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने चक्रीय अर्थव्यवस्था की पहलों के एक अभिन्न अंग के रूप में, ई-कचरे और खनन अवशेषों जैसे असामान्य स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति में संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा देने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कृषि और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में संबंधित मंत्रालयों और संस्थानों के बीच सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया।

कनेक्टिविटी

दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे' (IMEC) पर सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और इसे वैश्विक व्यापार, संपर्क और समृद्धि को नया स्वरूप देने वाली परिवर्तनकारी पहल बताया। परियोजना पर प्रारंभिक चर्चाओं की सराहना करते हुए दोनों नेताओं ने 2026 में आयोजित होने वाली पहली आईएमईसी मंत्रीस्तरीय बैठक में ठोस कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने नौवहन और बंदरगाहों पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया और अपने संबंधित मंत्रालयों/विभागों को जल्द से जल्द इस समझौता ज्ञापन को लागू करने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह स्थापित करने का निर्देश दिया।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्टार्टअप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता

दोनों प्रधानमंत्रियों ने पुनः पुष्टि की कि नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी भारत-इटली साझेदारी के प्रमुख प्रेरक हैं।

उन्होंने भारत में स्थित “INNOVIT India” नामक नवाचार केंद्र की स्थापना की घोषणा की जिसका उद्देश्य दोनों देशों के नवाचार तंत्रों के बीच सहयोग को मजबूत करना, स्टार्टअप कार्यक्रमों, बाजार पहुंच, संयुक्त अनुसंधान, विश्वविद्यालय सहयोग और प्रतिभा गतिशीलता को बढ़ावा देना है। यह फिनटेक, स्वास्थ्य सेवा, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स, कृषि तकनीक, ऊर्जा, क्वांटम कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में कार्य करेगा। दोनों नेताओं ने अप्रैल 2025 में दिल्ली में आयोजित भारतीय और इतालवी विश्वविद्यालयों तथा अनुसंधान केंद्रों के बीच उद्घाटन 'विज्ञान और नवाचार संवाद' का स्वागत किया और इस वर्ष के अंत में इटली में इसके अगले संस्करण के आयोजन की उम्मीद जताई।

दोनों नेताओं ने एक खुले, स्वतंत्र, सुरक्षित, स्थिर, सुलभ और शांतिपूर्ण आईसीटी वातावरण के महत्व पर जोर दिया, जो नवाचार और आर्थिक विकास के लिए एक सक्षम कारक है। प्रधानमंत्री मोदी ने 19 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' में इटली की रचनात्मक भागीदारी के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी को धन्यवाद दिया। दोनों नेताओं ने मानव-केंद्रित, सुरक्षित, भरोसेमंद और मजबूत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। वे तीसरे देशों सहित इस क्षेत्र में सहयोग करने पर सहमत हुए।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया।

2025–2027 वैज्ञानिक सहयोग कार्यकारी कार्यक्रम के आधार पर दोनों देशों ने संयुक्त परियोजनाओं के क्रियान्वयन तथा क्वांटम प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और सतत ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्रों में शोधकर्ताओं की आवाजाही को सुगम बनाने का समर्थन किया। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन के जारी क्रियान्वयन और अनुसंधान परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए संयुक्त प्रस्ताव आमंत्रण शुरू किए जाने का भी स्वागत किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारतीय शिक्षा जगत और ट्राएस्टे स्थित 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स' (आईसीटीपी) के बीच लंबे समय से चले आ रहे वैज्ञानिक सहयोग को स्वीकार किया और भारतीय वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा इटली के ट्राइएस्टे स्थित एलेट्रा सिंक्रोट्रोन केंद्र के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। यह भारतीय शोधकर्ताओं के लिए एलेट्रा की सिंक्रोट्रोन रेडिएशन सुविधा तक पहुंच से संबंधित गतिविधियों के समर्थन हेतु किया गया है।

अंतरिक्ष

इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी (एएसआई) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच चल रहे सहयोग की सराहना करते हुए, दोनों नेताओं ने पृथ्वी अवलोकन (अर्थ ऑब्जर्वेशन), हेलियोफिज़िक्स और अंतरिक्ष अन्वेषण पर साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति जताई जिसमें केंद्रित विषयगत जुड़ाव शामिल है। साथ ही अंतरिक्ष तक पहुंच और अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे के संरक्षण पर सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति बनी। उन्होंने अपने संबंधित अंतरिक्ष उद्योग प्रतिनिधिमंडलों की हालिया पारस्परिक यात्राओं पर संतोष जताया और तीसरे देशों में भी विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और संयुक्त पहलों के माध्यम से वाणिज्यिक सहयोग को बढ़ावा देने की उम्मीद जताई।

रक्षा

दोनों प्रधानमंत्रियों ने मंत्रिस्तरीय आदान-प्रदान, सेनाओं के बीच संबंधों, बंदरगाह दौरों सहित रक्षा सहयोग मजबूत होने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने संयुक्त आशय घोषणा और रक्षा औद्योगिक रोडमैप को अपनाने का स्वागत किया, जो तकनीकी सहयोग, सह-उत्पादन और सह-विकास परियोजनाओं के लिए साझेदारी को बढ़ावा देगा। इनमें हेलीकॉप्टर, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, समुद्री हथियार प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली शामिल हैं। उन्होंने औद्योगिक मजबूती के माध्यम से महत्वपूर्ण अवसंरचना और उससे जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा के महत्व को भी स्वीकार किया।

दोनों पक्ष संयुक्त रक्षा समिति और सैन्य सहयोग समूह के काम के पूरक के रूप में एक वार्षिक उच्च स्तरीय सैन्य संरचित संवाद स्थापित करने की व्यवहार्यता की जांच करने और संयुक्त अभ्यास तथा अंतर-बल पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने पर सहमत हुए।

दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा सहयोग, समन्वय और समुद्री क्षेत्र में सूचनाओं तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ाने के उद्देश्य से समुद्री सुरक्षा संवाद शुरू करने पर सहमति व्यक्त की।

सुरक्षा

दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और आतंकवादियों, आतंकवादी समूहों और उनके सहयोगियों, जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1267 प्रतिबंध व्यवस्था में सूचीबद्ध लोग शामिल हैं, के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने सभी देशों से वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के दिशानिर्देशों के अनुरूप, आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों और बुनियादी ढांचे को खत्म करने, आतंकवादी नेटवर्क को रोकने और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए काम जारी रखने का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र, एफएटीएफ और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

दोनों नेताओं ने आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने के लिए भारत और इटली के बीच स्थायी टास्क फोर्स की पहली बैठक तथा आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह की आगामी बैठक का स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने इटली की 'गार्डिया डी फिनान्ज़ा' और भारत के 'प्रवर्तन निदेशालय' (ईडी) के बीच एक समझौता ज्ञापन के संपन्न होने का स्वागत किया और वर्गीकृत सूचनाओं के आदान-प्रदान और पारस्परिक संरक्षण पर समझौते तथा पुलिस सहयोग को मजबूत करने पर समझौते के शीघ्र संपन्न होने की उम्मीद जताई। उन्होंने प्रत्यर्पण संधि और पारस्परिक कानूनी सहायता संधि समेत अन्य समझौतों पर चल रही चर्चाओं का भी स्वागत किया।

प्रवासन और गतिशीलता

दोनों नेताओं ने विशेष रूप से एसटीईएम क्षेत्रों में छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल कामगारों की आवाजाही बढ़ाने तथा श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास में सहयोग का विस्तार करने पर सहमति जताई। इसमें भारत से इटली जाने वाली नर्सों की आवाजाही को सुगम बनाने संबंधी विशेष संयुक्त आशय घोषणा भी शामिल है। इस संदर्भ में उन्होंने संबंधित एजेंसियों के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौते (एसएसए) पर जारी चर्चाओं का स्वागत किया।

उन्होंने "आईसीआई- इटली कॉल्स इंडिया: ए यूनिवर्सिटी-एंटरप्राइज टैलेंट ब्रिज" पहल की शुरुआत का स्वागत किया, जिसका उद्देश्य इतालवी विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत भारतीय छात्रों की प्रतिभा को मार्गदर्शन, उपयुक्त अवसरों से जोड़ने और इतालवी उद्यमों में योग्य एकीकरण के ठोस रास्ते उपलब्ध कराकर बढ़ावा देना है।

उन्होंने सुरक्षित और कानूनी प्रवासन सुनिश्चित करने के लिए अनियमित प्रवासन, श्रम शोषण और मानव तस्करी के खिलाफ लड़ने के लिए सहयोग को मजबूत करने की संभावना पर भी चर्चा की।

संस्कृति और शैक्षिक आदान-प्रदान

दोनों नेताओं ने संस्कृति को द्विपक्षीय संवाद के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में रेखांकित किया और लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के विकास में इटली की भागीदारी के संबंध में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने 2026 में वेनिस कला बिएनले (वेनिस आर्ट बिएनले) में भारतीय राष्ट्रीय पवेलियन की सराहना की। दोनों नेताओं ने 2027 को “भारत और इटली के बीच संस्कृति और पर्यटन वर्ष” के रूप में मनाने की मंशा व्यक्त की। इसके तहत विभिन्न पहलों का व्यापक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और भारत तथा इटली के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों पर एक बड़े प्रदर्शनी आयोजन का मार्ग प्रशस्त होगा, जिसे दोनों देशों के संस्कृति मंत्रालय संयुक्त रूप से आयोजित करेंगे।

दोनों नेताओं ने संस्थाओं, विशेषज्ञों और रचनात्मक उद्योगों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाने के लिए एक इटली-भारत सांस्कृतिक मंच के संगठन को प्रोत्साहित किया। दोनों नेताओं ने यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल भारतीय और इतालवी स्थलों के बीच ट्विनिंग कार्यक्रम (ट्विनिंग प्रोग्राम) की शुरुआत की सराहना की, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन में सहयोग को मजबूत करना है।

दोनों नेता दोनों देशों के बीच फिल्म और ऑडियो-विजुअल सहयोग को और विकसित करने पर सहमत हुए, जो उनके उद्योगों की ताकत और नवीन क्षमताओं तथा द्विपक्षीय सह-उत्पादन समझौते द्वारा प्रदान किए गए कानूनी ढांचे पर आधारित है।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने उच्च शिक्षा में सहयोग को मजबूत करने की अपनी मंशा दोहराई और उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान पर भारत-इटली रोडमैप को अपनाने का स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इटली के विश्वविद्यालयों और उत्कृष्ट संस्थानों को भारत की नई शिक्षा नीति के तहत भारत में अपने परिसर खोलने का निमंत्रण दिया।

भारत-यूरोपीय संघ संबंध

नेताओं ने 27 जनवरी 2026 को भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में सहमति व्यक्त किए गए नए संयुक्त भारत-यूरोपीय संघ व्यापक रणनीतिक एजेंडे और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं के सफल समापन का स्वागत किया। यह समझौता बाजार पहुंच बढ़ाने, व्यापार बाधाओं को कम करने और विविधीकृत मूल्य श्रृंखलाओं तथा नए बाजार अवसरों के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा और मजबूती को सुदृढ़ कर संबंधों को नई ऊंचाई देगा।

उन्होंने व्यापार, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आर्थिक सुरक्षा में सहयोग के प्रमुख मंच के रूप में भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद को मजबूत करने के समर्थन की पुनर्पुष्टि की। नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी का स्वागत किया और गतिशीलता सहयोग में हुई प्रगति की सराहना की, जिसमें व्यापक गतिशीलता ढांचे पर समझौता ज्ञापन भी शामिल है।

बहुपक्षीय सहयोग

दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रतिनिधिक और वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने के लिए उसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।

दोनों नेताओं ने बहुपक्षवाद की रक्षा करने और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र और जी20 सहित अन्य वैश्विक मंचों पर मिलकर काम करने के महत्व पर जोर दिया।

अफ्रीका को दोनों देशों द्वारा दी जाने वाली रणनीतिक प्राथमिकता को स्वीकार करते हुए, दोनों प्रधानमंत्रियों ने अफ्रीका में भारत की विकास साझेदारी और इटली की 'मैट्टेई योजना' के अनुरूप डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई), कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कनेक्टिविटी तथा बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अफ्रीकी भागीदारों के साथ त्रिपक्षीय पहलों में मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की।

नेताओं ने यूएनसीएलओएस सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप, एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध भारत-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुनपुष्टि की। उन्होंने भारत-प्रशांत महासागर पहल के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग स्तंभ में अपनी निरंतर साझेदारी की उम्मीद जताई।

दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व की स्थिति और उसके क्षेत्र तथा विश्व पर पड़ने वाले प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त की। नेताओं ने 8 अप्रैल 2026 को घोषित युद्धविराम का स्वागत किया और पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व में स्थायी शांति के लिए तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक आपूर्ति के सामान्य प्रवाह को फिर से शुरू करने का भी आह्वान किया।

दोनों नेताओं ने यूक्रेन में जारी युद्ध पर चिंता व्यक्त की, जो लगातार अत्यधिक मानवीय पीड़ा और नकारात्मक वैश्विक परिणामों का कारण बन रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप संवाद और कूटनीति के माध्यम से यूक्रेन में व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन जारी रखने पर सहमति जताई।

निष्कर्ष

भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी की प्रभावशाली वृद्धि और गहराते संबंधों को रेखांकित करते हुए दोनों नेताओं ने सभी क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तारित करने तथा प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर उच्चस्तरीय निकट परामर्श जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की सरकार और वहां की जनता द्वारा गर्मजोशी से भरे स्वागत करने तथा शानदार आतिथ्य के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी को धन्यवाद दिया और प्रधानमंत्री मेलोनी को पारस्परिक रूप से सुविधाजनक समय पर भारत आने का निमंत्रण दिया।