प्रधानमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को 1,000 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए, जिससे लगभग 16 लाख महिला सदस्यों को लाभ मिलेगा
प्रधानमंत्री ने व्यवसाय प्रतिनिधि-सखियों को पहले महीने का मानदेय हस्तांतरित किया और मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के 1 लाख से अधिक लाभार्थियों को भी धनराशि हस्तांतरित की
प्रधानमंत्री ने पूरक पोषण निर्माण की 200 से अधिक इकाइयों की आधारशिला रखी
"मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना जैसे कार्यक्रम गांव-गरीब के लिए, बेटियों के लिए भरोसे का बहुत बड़ा माध्यम बन रहे हैं"
“डबल इंजन की सरकार ने यूपी की महिलाओं को जो सुरक्षा दी है, जो सम्मान दिया है, उनकी गरिमा बढ़ाई है, वो अभूतपूर्व है; उत्तर प्रदेश की महिलाओं ने, माताओं-बहनों-बेटियों ने ठान लिया है- अब वो पहले वाला दौर, वापस नहीं आने देंगी”
“महिला स्वयं सहायता समूह की बहनों को तो मैं आत्मनिर्भर भारत अभियान की चैपिंयन मानता हूं; ये स्वयं सहायता समूह, असल में राष्ट्र सहायता समूह हैं””
“बेटियां भी चाहती थीं कि उन्हें उनकी पढ़ाई लिखाई के लिए, आगे बढ़ने के लिए समय मिले, बराबर अवसर मिलें; इसलिए, बेटियों के लिए शादी की उम्र को 21 साल करने का प्रयास किया जा रहा है; देश ये फैसला बेटियों के लिए कर रहा है”
"माफिया राज और अराजकता के ख़त्म होने का सबसे बड़ा फायदा यूपी की बहनों और बेटियों को मिला है"

भारत माता की जय,

भारत माता की जय,

कार्यक्रम में उपस्थित यूपी के ऊर्जावान और कर्मयोगी मुख्यमंत्री श्रीमान योगी आदित्यनाथ जी, प्रयागराज की धरती के जनप्रिय नेता उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जी, केंद्रीय कैबिनेट में मेरी सहयोगी साध्वी निरंजन ज्योति जी, श्रीमती अनुप्रिया पटेल जी, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री डॉ महेंद्र सिंह जी, राजेन्द्र प्रताप सिंह मोती जी, श्री सिद्धार्थनाथ सिंह जी, नन्दगोपाल गुप्ता नंदी जी, श्रीमती स्वाति सिंह जी, श्रीमती गुलाबो देवी जी, श्रीमती नीलिमा कटियार जी, संसद में मेरी सहयोगी बहन रीता बहुगुणा जी, श्रीमती हेमा मालिनी जी, श्रीमती केशरी देवी पटेल जी, डॉ संघमित्रा मौर्य जी, श्रीमती गीता शाक्य जी, श्रीमती कांता कर्दम जी, श्रीमती सीमा द्विवेदी जी, डॉ रमेश चंद बिन्द जी, प्रयागराज की मेयर श्रीमती अभिलाषा गुप्ता जी, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ वीके सिंह जी, सभी विधायकगण अन्य जनप्रतिनिधि गण, और यहां उपस्थित यूपी की सामर्थ्य को बढ़ाने वाले यहां के सामर्थ्य की प्रतीक मेरी माताओं, बहनों ! आप सभी को मेरा प्रणाम। माँ गंगा, यमुना, सरस्वती के पावन तट पे बसा प्रयागराज के धरती के, हम शीश झुकाय के प्रणाम करत हई। ई उ धरा ह, जहां धर्म, ज्ञान और न्याय की त्रिवेणी बहत ह। तीर्थन के तीर्थ, प्रयागराज में आइके, हमेशा ही एक अलगैय पवित्रता और ऊर्जा का अहसास होत है। पिछले वर्ष फरवरी में हम कुम्भ मा ई पवित्र धरती पर आवा रहेन, तब संगम में डुबकी लगायके अलौकिक आनंद के अनुभव प्राप्त किहे रहे। तीर्थराज प्रयाग की ऐसी पावन भूमि को मैं हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ। आज हिंदी साहित्य जगत के सर्वमान्य आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की पुण्य तिथि भी है। प्रयागराज से साहित्य की जो सरस्वती बही, द्विवेदी जी लंबे समय तक उसके संपादक भी रहे। मैं उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

माताओं-बहनों,

प्रयागराज हजारों सालों से हमारी मातृशक्ति की प्रतीक माँ गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम की धरती रही है। आज ये तीर्थ नगरी नारी-शक्ति के इतने अद्भुत संगम की भी साक्षी बनी है। ये हम सभी का सौभाग्य है कि आप सभी हमें अपना स्नेह देने, अपना आशीर्वाद देने आई हैं। माताओं-बहनों, मैं यहां मंच पर आने से पहले मैंने बैंकिंग सखियों से, स्वयं सहायता समूह से जुड़ी बहनों से और कन्या सुमंगला योजना की लाभार्थी बेटियों से बात की। ऐसे-ऐसे भाव, ऐसी-ऐसी आत्मविश्वास से भरी बातें ! माताओं बहनों, हमारे यहाँ एक कहावत है- “प्रत्यक्षे किम् प्रमाणम्”।

यानी, जो प्रत्यक्ष है, जो सामने है, उसे साबित करने के लिए कोई प्रमाण की जरूरत नहीं पड़ती। यूपी में विकास के लिए, महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए जो काम हुआ है, वो पूरा देश देख रहा है। अभी यहाँ मुझे मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की एक लाख से ज्यादा लाभार्थी बेटियों के खातों में करोड़ों रुपए ट्रान्सफर करने का सौभाग्य मिला। ये योजना गाँव-गरीब के लिए, बेटियों के लिए भरोसे का बहुत बड़ा माध्यम बन रही है। यूपी ने बैंक सखी का भी जो अभियान शुरू किया है, वो महिलाओं को रोजगार के अवसरों के साथ ही उनके जीवन में भी बड़े बदलाव ला रहा है। सरकार से अलग अलग योजनाओं का जो पैसा सीधे डायरेक्ट बैनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए खाते में आता है, ये पैसा निकालने अब बैंक नहीं जाना पड़ता। बैंक सखी की मदद से ये पैसा गाँव में, घर पर ही मिल जाया करता है। यानी, बैंक सखी बैंक को गाँव तक लेकर आ गई हैं। और जो लोग सोच रहे होंगे कि ये तो छोटा सा काम है, उन्हें मैं ये भी बताना चाहता हूं कि बैंक सखियों का काम कितना बड़ा है। यूपी सरकार ने इन बैंक सखियों के ऊपर ऐसे करीब 75 हजार करोड़ के लेन-देन की ज़िम्मेदारी सौंपी है। 75 हजार करोड़ रुपये का कारोबार यह गाँव में रहने वाली मेरी बहने मेरी बेटियाँ कर रही हैं। जितना लेन-देन गाँव में होगा, उतनी ही उनकी आमदनी भी होगी। इनमें से ज़्यादातर बैंक सखियाँ वो बहनें हैं, कुछ साल पहले तक जिनके खुद के बैंक खाते भी नहीं थे। लेकिन आज इन महिलाओं के हाथों में बैंकिंग की, डिजिटल बैंकिंग की ताकत आ गई है। इसलिए, देश देख रहा है कि यूपी में कैसे काम हो रहा है। और तभी तो मैं कहता हूँ, “प्रत्यक्षे किम् प्रमाणम्”॥

माताओं बहनों,

यूपी ने टेक होम राशन, जच्चा-बच्चा को दिये जाने वाले पोषण को तैयार करने की ज़िम्मेदारी भी महिलाओं के हाथों में सौंपी है। ये पोषण वाला राशन और आहार अब सेल्फ हेल्प ग्रुप में साथ मिलकर महिलाएं खुद बनाएँगी। ये भी बहुत बड़ा काम है, सालाना हजारों करोड़ रुपए का काम है। जिन 202 पुष्टाहार उत्पादन यूनिट्स का आज शिलान्यास हुआ है, उनसे सेल्फ हेल्प ग्रुप्स की महिलाओं की आमदनी भी होगी, और गाँव के किसानों का भी बहुत बड़ा लाभ होगा। गाँव की महिलाएं अपनी फ़ैक्टरी में पुष्टाहार बनाने के लिए फसल-अनाज गाँव से ही तो खरीदने वाली हैं। यही तो सशक्तिकरण के वो प्रयास हैं जिन्होंने यूपी की महिलाओं का जीवन बदलना शुरू कर दिया है। सरकार, अलग-अलग सेक्टर्स में, स्वयं सहायता समूहों को जो साहयता दे रही है, इसकी एक किस्त के तौर पर आज मुझे एक हजार करोड़ रुपए ट्रान्सफर करने का सौभाग्य मिला है। यूपी के विकास की धारा अब किसी के रोकने से रुकने वाली नहीं है। उत्तर प्रदेश की महिलाओं ने, माताओं-बहनों-बेटियों ने ठान लिया है - अब वो पहले की सरकारों वाला दौर, वापस नहीं आने देंगी। डबल इंजन की सरकार ने यूपी की महिलाओं को जो सुरक्षा दी है, जो सम्मान दिया है, उनकी गरिमा बढ़ाई है, वो अभूतपूर्व है।

भाइयों और बहनों,

माताओं-बहनों-बेटियों का जीवन पीढ़ियों को प्रभावित करने वाला, पीढ़ियों का निर्माण करने वाला जीवन होता है। एक बेटी का सामर्थ्य, उसकी शिक्षा, उसका कौशल, सिर्फ परिवार ही नहीं समाज की, राष्ट्र की दिशा तय करती है। इसलिए, 2014 में जब हमने मां भारती के बड़े सपनों, बड़ी आकांक्षाओं को साकार करने का बीड़ा उठाया तो सबसे पहले देश की बेटी के विश्वास को नई ऊर्जा देने का प्रयास शुरू किया। इसलिए, हमने बेटी के जन्म से लेकर जीवन के चक्र में, हर अवस्था में महिलाओं को सशक्त करने के लिए योजनाएं बनाईं, अभियान चलाए।

साथियों,

बेटियां कोख में ही ना मारी जाएं, वो जन्म लें, इसके लिए हमने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के माध्यम से समाज की चेतना को जगाने का प्रयास किया। आज परिणाम ये है कि देश के अनेक राज्यों में बेटियों की संख्या में बहुत वृद्धि हुई है। प्रसव के बाद भी बिना चिंता के अपने बच्चे की शुरुआती देखरेख करते हुए, मां अपना काम जारी रख सके, इसके लिए महिलाओं की छुट्टी को 6 महीने किया गया है।

साथियों,

गर्भावस्था के दौरान गरीब परिवारों में मातृ स्वास्थ्य, चिंता का एक बहुत बड़ा कारण रहा है। इसलिए हमने गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण, अस्पतालों में डिलिवरी और गर्भावस्था के दौरान पोषण पर विशेष ध्यान दिया। प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना के तहत गर्भावस्था के दौरान 5 हज़ार रुपए महिलाओं के बैंक खाते में जमा किए जाते हैं, ताकि वो उचित खान-पान का ध्यान रख सकें। अभी तक 2 करोड़ से ज्यादा बहनों को लगभग 10 हज़ार करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं।

साथियों,

बेटियां ठीक से पढ़ाई कर सकें, उनको स्कूल बीच में ना छोड़ना पड़े, इस पर भी हमने लगातार काम किया है। स्कूलों में बेटियों के लिए अलग टॉयलेट बनाना हो, या फिर सेनिटेरी पैड्स को गरीब से गरीब बेटियों के लिए सुलभ कराना हो, हमारी सरकार किसी भी काम में पीछे नहीं रही है। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत लगभग ढाई करोड़ बच्चियों के अकाउंट खोले गए हैं। ये पैसा बड़े होने पर उनके सपनों को पूरा करे, इसके लिए इस पर ब्याज़ दर भी ऊंची रखी गई है। स्कूल-कॉलेज के बाद करियर से लेकर घर-गृहस्थी तक भी हर कदम पर महिलाओं की सुविधा और स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों शौचालय बनने से, उज्जवला योजना के तहत गरीब से गरीब बहनों को गैस कनेक्शन की सुविधा मिलने से, घर में ही नल से जल आने से, बहनों के जीवन में सुविधा भी आ रही है और उनकी गरिमा में भी वृद्धि हुई है।

साथियों,

आयुष्मान भारत योजना के तहत भी सबसे अधिक लाभ अगर किसी को हुआ है तो वो हमारी बहनें ही हैं। चाहे वो अस्पतालों में डिलिवरी हो या फिर दूसरा इलाज, पहले पैसे के अभाव में बहनों के जीवन पर संकट रहता था। अब 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलने से उनकी ये चिंता दूर हो गई है। माताओं-बहनों, भारतीय समाज में हमेशा से माताओं-बहनों को सर्वोपरि दर्जा दिया गया है। लेकिन आज एक सच्चाई की तरफ भी मैं आपका, पूरे देश का ध्यान दिलाना चाहता हूं। हमारे यहां परंपरा से सदियों तक, दशकों तक ऐसी व्यवस्था रही कि घर और घर की हर संपत्ति को केवल पुरुषों का ही अधिकार समझा जाने लगा। घर है तो किसके नाम ? पुरुषों के नाम। खेत है तो किसके नाम ? पुरुषों के नाम। नौकरी, दुकान पर किसका हक ? पुरुषों का। आज हमारी सरकार की योजनाएं, इस असमानता को दूर कर रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जो घर दिये जा रहे हैं, वो प्राथमिकता के आधार पर महिलाओं के ही नाम से बन रहे हैं। अगर मैं यूपी की ही बात करूं तो यूपी में 30 लाख से अधिक घर पीएम आवास योजना के बनाए गए हैं। इनमें से करीब 25 लाख घरों की रजिस्ट्री में महिलाओं का भी नाम है। आप अंदाजा लगा सकते हैं। पहली बार यूपी में 25 लाख महिलाओं के नाम उनका घर हुआ है। जिन घरों में पीढ़ियों से किसी महिला के नाम पर कोई संपत्ति नहीं थी, आज वो पूरे के पूरे घर, किसी महिला के ही नाम हैं। यही तो होता है महिलाओं का सशक्तिकरण, सच्चा सशक्तिकरण, यही तो होता है विकास।

माताओं-बहनों,

मैं आज आपको एक और योजना के बारे में बताना चाहता हूं। यह योजना है - केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना। स्वामित्व योजना के तहत देश भर के गांवों में घरों को, जमीनों की ड्रोन से तस्वीरें लेकर, घर के मालिकों को प्रॉपर्टी के कागज दिए जा रहे हैं, घरौनी दी जा रही है। ये घरौनी देने में घर की महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। अगले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश के गांवों में योगी जी की सरकार, हर घर की मैपिंग कराकर ऐसे ही घरौनी देने का काम पूरा कर लेगी। फिर जो बने हुए घर हैं, उनके कागज में भी घर की महिलाओं का नाम होगा, घर की माताओं का नाम होगा।

साथियों,

रोजगार के लिए, परिवार की आमदनी बढ़ाने के लिए जो योजनाएँ देश चला रहा है, उसमें भी महिलाओं को बराबर का भागीदार बनाया जा रहा है। मुद्रा योजना आज गांव-गांव में, गरीब परिवारों से भी नई-नई महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही है। इस योजना के तहत मिले कुल ऋण में से लगभग 70 प्रतिशत महिलाओं को दिए गए हैं। दीनदयाल अंत्योदय योजना के जरिए भी देश भर में महिलाओं को सेल्फ हेल्प ग्रुप्स और ग्रामीण संगठनों से जोड़ा जा रहा है। महिला स्वयं सहायता समूह की बहनों को तो मैं आत्मनिर्भर भारत अभियान की चैपिंयन मानता हूं। ये स्वयं सहायता समूह, असल में राष्ट्र सहायता समूह हैं। इसलिए, राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत 2014 से पहले के 5 वर्षों में जितनी मदद दी गई, बीते 7 साल में उसमें लगभग 13 गुणा बढ़ोतरी की गई है। हर सेल्फ हेल्प ग्रुप को पहले जहां 10 लाख रुपए तक का बिना गारंटी का ऋण मिलता था, अब ये सीमा भी दोगुनी यानि 20 लाख की गई है।

माताओं-बहनों,

शहर हो या गांव, महिलाओं के लिए हमारी सरकार, हर छोटी-बड़ी मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए फैसले ले रही है। कोरोना के इस काल में आपके घर का चूल्हा जलता रहे, इसके लिए मुफ्त राशन देने की व्यवस्था हमारी ही सरकार ने की। महिलाएं रात की पाली में भी काम कर सकें, इसके लिए नियमों को आसान बनाने का काम हमारी ही सरकार ने किया। खदानों में महिलाओं के काम करने पर जो कुछ बंदिश थी, वो हमारी ही सरकार ने हटाई है। देशभर के सैनिक स्कूलों के दरवाजे, लड़कियों के लिए खोल देने का काम हमारी ही सरकार ने किया है। रेप जैसे संगीन अपराधों की तेज़ सुनवाई के लिए हमारी सरकार देशभर में करीब 700 फास्ट ट्रैक कोर्ट्स स्थापित कर चुकी है। मुस्लिम बहनों को अत्याचारों से बचाने के लिए तीन तलाक के खिलाफ कानून हमारी ही सरकार ने बनाया।

साथियों,

बिना किसी भेदभाव, बिना किसी पक्षपात, डबल इंजन की सरकार, बेटियों के भविष्य को सशक्त करने के लिए निरंतर काम कर रही है। अभी कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार ने एक और फैसला किया है। पहले बेटों के लिए शादी की उम्र कानूनन 21 साल थी, लेकिन बेटियों के लिए ये उम्र 18 साल की ही थी। बेटियाँ भी चाहती थीं कि उन्हें उनकी पढ़ाई लिखाई के लिए, आगे बढ़ने के लिए समय मिले, बराबर अवसर मिलें। इसलिए, बेटियों के लिए शादी की उम्र को 21 साल करने का प्रयास किया जा रहा है। देश ये फैसला बेटियों के लिए कर रहा है, लेकिन किसको इससे तकलीफ हो रही है, ये सब देख रहे हैं !

भाइयों बहनों,

5 साल पहले यूपी की सड़कों पर माफियाराज था! यूपी की सत्ता में गुंडों की हनक हुआ करती थी! इसका सबसे बड़ा भुक्तभोगी कौन था? मेरे यूपी की बहन-बेटियाँ थीं। उन्हें सड़क पर निकलना मुश्किल हुआ करता था। स्कूल, कॉलेज जाना मुश्किल होता था। आप कुछ कह नहीं सकती थीं, बोल नहीं सकती थीं। क्योंकि थाने गईं तो अपराधी, बलात्कारी की सिफ़ारिश में किसी का फोन आ जाता था। योगी जी ने इन गुंडों को उनकी सही जगह पहुंचाया है। आज यूपी में सुरक्षा भी है, यूपी में अधिकार भी हैं। आज यूपी में संभावनाएं भी हैं, आज यूपी में व्यापार भी है। मुझे पूरा विश्वास है, जब हमारी माताओं बहनों का आशीर्वाद है, इस नई यूपी को कोई वापस अंधेरे में नहीं धकेल सकता। भाईयों- बहनों आइये, प्रयागराज की पुण्य भूमि से ये संकल्प लें, हमारा यूपी आगे बढ़ेगा, हमारा यूपी नई ऊँचाइयाँ छूएगा। आप सभी माताओं बहनों को आपके आशीर्वाद के लिए, आपके समर्थन के लिए और यूपी को आगे बढ़ाने में आपकी सहभागिता के लिए मैं फिर से एक बार आपको आदरपूर्वक नमन करता हूँ, आपका हदृय से बहुत- बहुत धन्यवाद करता हूँ। मेरे साथ बोलिए भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, बहुत बहुत धन्यवाद!

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कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में ₹24,815 करोड़ की दो रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी
April 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय आर्थिक मामलों की समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 24,815 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली दो परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

परियोजना का नाम

मार्ग की लंबाई (किमी में)

ट्रैक की लंबाई (किमी में)

पूर्ण होने की लागत (रुपये करोड़ में )

गाजियाबाद – सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन

403

859

14,926

राजमुंदरी (निदादावोलु) - विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) तीसरी और चौथी लाइन

 

198

 

458

 

9,889

कुल

601

1,317

24,815

 

इस बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। ये मल्‍टीट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करेंगे और भीड़भाड़ को कम करेंगे। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के नए भारत की परिकल्‍पना के अनुरूप हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मुख्‍य योजना के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश राज्यों के 15 जिलों को कवर करने वाली ये 02 (दो) परियोजनाएं भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 601 किलोमीटर तक बढ़ाएंगी।

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा, जिनमें दूधेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट, दरगाह शाह विलायत जामा मस्जिद (अमरोहा), नैमिषारण्य (सीतापुर), अन्नवरम, अंतर्वेदी, द्रक्षरामम आदि शामिल हैं।

प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, अनाज, सीमेंट, पीओएल, लोहा और इस्पात, कंटेनर, उर्वरक, चीनी, रासायनिक लवण, चूना पत्थर आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन का साधन होने के नाते, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की रसद लागत को कम करने में मदद करेगा, जिससे कार्बन डाइऑक्‍साइड के उत्सर्जन (180.31 करोड़ किलोग्राम) में कमी आएगी, जो 7.33 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।

गाजियाबाद – सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन (403 किमी)

  • गाजियाबाद-सीतापुर एक मौजूदा दोहरी लाइन खंड है जो दिल्ली-गुवाहाटी उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन 4) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • यह परियोजना देश के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों के बीच संपर्क सुधारने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • इस खंड की मौजूदा लाइन क्षमता का 168% तक उपयोग हो रहा है और परियोजना शुरू न होने की स्थिति में इसके 207% तक होने का अनुमान है।
  • उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, हापुड, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर जिलों से होकर गुजरती है।
  • परियोजना का मार्ग गाजियाबाद (मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स), मुरादाबाद (पीतल के बर्तन और हस्तशिल्प), बरेली (फर्नीचर, वस्त्र, इंजीनियरिंग), शाहजहांपुर (कालीन और सीमेंट से संबंधित उद्योग) और रोजा (तापीय विद्युत संयंत्र) जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से होकर गुजरता है।
  • सुगम परिवहन के लिए, परियोजना की रूपरेखा हापुड़, सिंभाओली, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर और सीतापुर के भीड़भाड़ वाले स्टेशनों को बाईपास करने के लिए बनाई गई है और तदनुसार, बाईपास खंडों पर छह नए स्टेशन प्रस्तावित हैं।
  • परियोजना खंड के पास/पास प्रमुख पर्यटक/धार्मिक स्थान दूधेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट, दरगाह शाह विलायत जामा मस्जिद (अमरोहा), और नैमिषारण्य (सीतापुर) हैं।
  • इस परियोजना से कोयला, खाद्यान्न, रासायनिक खाद, तैयार इस्पात आदि के 35.72 मीट्रिक टन प्रति वर्ष के अतिरिक्त माल परिवहन का अनुमान है।
  • अनुमानित लागत: लगभग 14,926 करोड़ रुपये।
  • रोजगार सृजन: 274 लाख मानव दिन।
  • कार्बन डाइऑक्‍साइड उत्सर्जन में लगभग 128.77 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्‍साइड की कमी। यह 5.15 करोड़ पेड़ों के बराबर है।

  • लॉजिस्टिक लागत में बचत: सड़क परिवहन की तुलना में प्रति वर्ष 2,877.46 करोड़ रुपये की बचत।

गाजियाबाद – सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन (403 किमी)

 

राजमुंदरी (निदादावोलु) - विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) तीसरी और चौथी लाइन (198 किमी)

 

  • राजमुंदरी (निदादावोलु) - विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) खंड हावड़ा - चेन्नई उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन) का हिस्सा है।
  • प्रस्तावित परियोजना हावड़ा-चेन्नई उच्‍च घनत्‍व नेटवर्क (एचडीएन) मार्ग के चौगुने विस्तार की पहल का हिस्सा है।
  • यह परियोजना आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी, कोनासीमा, काकीनाडा, अनाकापल्ले और विशाखापत्तनम जिलों से होकर गुजरती है।
  • विशाखापत्तनम को आकांक्षी जिला कार्यक्रम में एक आकांक्षी जिला माना गया है।
  • यह पूर्वी तट पर स्थित विशाखापत्तनम, गंगावरम, मछलीपटनम और काकीनाडा जैसे प्रमुख पत्तनों को जोड़ती है।
  • परियोजना का मार्ग पूर्वी तटरेखा के साथ-साथ चलता है और यह पूर्वी तटीय रेल गलियारे के सबसे व्यस्त, मुख्य रूप से माल ढुलाई के खंडों में से एक है।
  • इस खंड की लाइन क्षमता का उपयोग पहले ही 130% तक पहुंच चुका है, जिसके कारण बार-बार जाम और परिचालन में देरी हो रही है। क्षेत्र में पत्तनों और उद्योगों के प्रस्तावित विस्तार के कारण लाइन की क्षमता में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
  • परियोजना के इस खंड में गोदावरी नदी पर 4.3 किमी लंबा रेल पुल, 2.67 किमी लंबा वायडक्ट, 3 बाईपास शामिल हैं और नया मार्ग मौजूदा मार्ग से लगभग 8 किमी छोटा है, जिससे संपर्क और परिचालन दक्षता में सुधार होगा।
  • प्रस्तावित खंड अन्नवरम, अंतर्वेदी और द्रक्षरामम आदि जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुंच में सुधार करके पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
  • कोयला, सीमेंट, रासायनिक खाद, लोहा और इस्पात, खाद्यान्न, कंटेनर, बॉक्साइट, जिप्सम, चूना पत्थर आदि सहित 29.04 मीट्रिक टन प्रति वर्ष के अतिरिक्त माल परिवहन का अनुमान है।
  • अनुमानित लागत: लगभग 9,889 करोड़ रुपये।
  • रोजगार सृजन: 135 लाख मानव दिन।
  • कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 51.49 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड की कमी। यह 2.06 करोड़ पेड़ों के बराबर है।

  • लॉजिस्टिक लागत में बचत: सड़क परिवहन की तुलना में प्रति वर्ष 1,150.56 करोड़ रुपये की बचत।

 

आर्थिक सशक्तिकरण:

आकांक्षी जिले - विशाखापत्तनम जिले को बेहतर संपर्क मिलेगा।

पर्यटन और उद्योगों के माध्यम से इस क्षेत्र में अतिरिक्त आर्थिक अवसर उपलब्ध होंगे।

रेल संपर्क में सुधार के कारण नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा प्राप्त होगी।

राजमुंदरी (निदादावोलु) - विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) तीसरी और चौथी लाइन (198 किलोमीटर)

 

प्रधानमंत्री का ध्यान रेलवे पर:

  • वित्त वर्ष 26-27 के लिए रिकॉर्ड 2,65,000 करोड़ रुपये का बजट आबंटन।
  • 1600 से अधिक लोकोमोटिव का निर्माण करके, इसने लोकोमोटिव उत्पादन में अमेरिका और यूरोप को पीछे छोड़ दिया।
  • वित्त वर्ष 2026 में, भारतीय रेल के वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन मालवाहकों में शामिल होने की उम्मीद है, जो 1.6 बिलियन टन माल का परिवहन करेगा।

  • भारत ने ऑस्ट्रेलिया को मेट्रो कोच और यूनाइटेड किंगडम, सऊदी अरब, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया को बोगियां निर्यात करना शुरू कर दिया है।