आज इस एक छत के नीचे शहरी भारत इकठ्ठा हुआ है। Urban India. एक प्रकार से इस विज्ञान भवन में वे लोग बैठे हैं जिनके जिम्मे देश के करीब-करीब 40 प्रतिशत नागरिकों की सुख-सुविधा की जिम्मेवारी है। इस देश की 40 प्रतिशत जनसंख्या करीब-करीब 40 प्रतिशत जो या तो शहरों में जीवन गुजारा करती है या शहरों पर आधारित अपना जीवन गुजारा करती है। उनको क्वालिटी ऑफ लाइफ कैसे मिले, एक सामान्य मानव की जो प्राथमिक आवश्यकता है उसकी पूर्ति कैसे हो और जब पूरे विश्व का ध्यान भारत की तरफ है तो हम.. दुनिया जिन ऊंचाइयों पर पहुंची है उसे बराबरी करने की दिशा में और उसे आगे बढ़ने की दिशा में पहल कैसे करें, प्रारम्भ कैसे करें और किस दिशा में आगे बढ़ें।
इन दोनों लक्ष्यों की पूर्ति को ध्यान में रखते हुए एक तरफ झुग्गी-झोपड़ी में जिन्दगी गुजारा करने वाला वो परिवार, एक तरफ रोजी-रोटी की तलाश में शहर की ओर आया हुआ मजबूर नागरिक और दूसरी तरफ बदलता हुआ वैश्विक परिवेश.. दो छोर की स्थिति में से हमें गुजरना है। हम इसलिए निराश हो करके नहीं बैठ सकते कि दुनिया तो बहुत आगे बढ़ चुकी, पता नहीं हम ये हो सकते हैं कि नहीं हो सकते हैं। हम उदास हो करके नहीं बैठ सकते कि ठीक है भई वो अपनी रोजी-रोटी के लिए आए हैं वो अपना गुजारा कर लेंगे। जी नहीं! हमारे देश के गरीबों को हम उनके नसीब पर नहीं छोड़ सकते। हमारा दायित्व होता है, हमारी जिम्मेवारी होती है और उन जिम्मेवारियों को निभाने के लिए अगर योजनापूर्वक अगर हम आगे बढ़ते है तो परिस्थितियां पलटी जा सकती है, परिस्थितियां सुधारी जा सकती है और लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
इन बातों को ध्यान में रखते हुए इस शहरी जीवन में बदलाव लाने के लिए आप सबके साथ दो दिन विस्तार से विचार-विमर्श होने वाला है। यहां पर चुने हुए जन-प्रतिनिधि भी हैं और यहां पर शहरी क्षेत्रों का दायित्व संभालने वाले चाहे नगर पालिका हों, या महा-नगर पालिका हों उसके सरकारी अधिकारी भी हैं। हम सब मिल करके आगे बढ़ने का संकल्प करने के लिए आज इकट्ट्ठे हुए हैं।
हिन्दुस्तान के इतिहास में 25-26 जून कोई भूल नहीं सकता है। 40 साल पहले सत्ता सुख के खातिर देश को आपातकाल के बंधनों में बाध करके जेलखाना बना दिया गया था। देश में सम्पूर्ण क्रांति का सपना ले करके चल रहे जय प्रकाश जी नारायण के नेतृत्व में लाखों देशभक्तों को लोकतंत्र प्रेमियों को जेलों में बंद कर दिया गया था, अखबार पर ताले लग गए थे रेडियो वही बोलता था जो सरकार बोलती थी। ऐसे दिन थे 40 साल पहले! आज 25 जून को और 26 जून को हम मिल करके उन सपनों को संजोना चाहते हैं कि जहां पर हर नागरिक इस लोकतांत्रिक व्यवस्था के बीच फूले-फले, प्रगति करे, उसको अवसर मिले, उसको सुविधा मिले। उस दिशा में हम काम करने के लिए संकल्पबद्ध हो रहे हैं।
आज मुझे खुशी है कि कल ही हमने कैबिनेट में लोकनायक जय प्रकाश नारायण जी के स्मृति में एक राष्ट्रीय स्मारक बनाने का निर्णय किया है। जो लोकतंत्र प्रेमी नागरिकों के लिए हमेशा-हमेशा वो दिशा-दर्शक बनता रहेगा और विकास की सारी योजनाएं, यात्राएं जन-सामान्य के सहयोग से, जन-सामान्य की भागीदारी से कैसे आगे बढ़ें उस दिशा में हम निरंतर प्रयत्नरत रहना चाहते हैं। हमारे देश में करीब 500 शहर हैं। ज्यादातर गांव से रोजी-रोटी कमाने के लिए लोग आते ही चले जा रहे हैं। बहुत तेजी से हमारा urbanization हो रहा है। अच्छा होता आज से 25-30 साल पहले हमने urbanization को एक opportunity समझा होता, urbanization को एक अवसर माना होता। छोटी जगह में thickly populated लोग एक प्रकार से देश की economic के driving source होते है। उस शक्ति को हमने पहचाना होता और हमारे urban growth engine के रूप में हमारी विकास यात्रा में उसकी भूमिका को हमने जाना होता और इस प्रकार से उसको ताकत दी होती तो हम भी आज दुनिया के उन समृद्ध और प्रगतिशील शहरों की बराबरी कर पाए होते। लेकिन.. देर आए दुरुस्त आए। पहले क्या नहीं हुआ उसका रोना-धोना गाते रहेंगे तो बात बननी नहीं है। पुराने अनुभव बहुत बुरे हैं, मैं जानता हूं और उसी के आधार पर निराश बैठने की भी आवश्यकता नहीं है। अगर स्पष्ट vision के साथ लक्ष्य को प्राप्त करने के इरादे के साथ और नागरिक को केंद्र में रखते हुए अगर हम योजनाएं करते हैं, तो मैं नहीं मानता हूं कोई रुकावट आ सकती है|
यहां दो दिन में हमारे सामने कई शहरों के best practices के प्रत्यक्ष किए हुए कामों को प्रस्तुत किया जाएगा। अगर हैदराबाद taxation system में unprecedented growth कर सकता है, किसी भी प्रकार के नए taxes के बजाए भी collection में इतना improvement कर सकता है तो और शहर भी कर सकते हैं। अगर कर्नाटक solid waste management में, उसमें compost की प्रक्रिया के संबंध में अगर आगे बढ़ सकता है तो और शहर भी बढ़ सकते हैं। ऐसा नहीं है कि कोई ऐसी चीजों की यहां चर्चा यहां होने वाली है कि जो हमने कभी सुना भी नहीं सोचा भी नहीं, नहीं! हम उन्हीं चीजों को करना चाहते हैं जो ये देश कर सकता है और किसी ने करके दिखाया है। अब उसको हमने सब मिल करके आगे बढ़ाना है, आप देखिए देश का रुतबा बदल सकता है। अब छत्तीसगढ़ जैसा प्रदेश, माओवाद के कारण परेशानियों से जूझ रहा प्रदेश, जंगलों की रक्षा करने वाला एक बहुत बड़ा दायित्व वाला प्रदेश, उसने open defecation के खिलाफ एक बहुत बड़ा आंदोलन खड़ा किया है और उनकी कोशिश है कि हम छत्तीसगढ़ को open defecation से मुक्त कर देगें। एक लक्ष्य ले करके अगर नेतृत्व चल पढ़ता है तो स्थितियां बदली जा सकती है। बहुत कुछ हो रहा है। इस योजना के तहत उन सारे अनुभवों के आधार पर.. यानी कोई हवाई बातें नहीं हैं, उन अनुभवों के आधार पर एक कदम और कैसे आगे बढ़ाया जाए, पहले से कुछ अच्छा कैसे किया जाए, एक जगह पर होता है तो सब जगह पर कैसे हो | कुछ लोग करते हैं हम मिल करके सब लोग क्यों न करें उस भाव को पैदा करने का प्रयास। भारत जिस तेजी से urbanize हो रहा है, एक प्रकार से यूरोप का कोई छोटा देश देखें तो हिन्दुस्तान में हर वर्ष एक नया देश जन्म लेता है शहरों में, मतलब हमारे सामने कितनी बड़ी चुनौती है! उस चुनौती को पार करने के लिए हमें निश्चित योजनाओं के साथ आगे बढ़ना पड़ेगा। कुछ कानूनी बाधाएं होगी तो उसके रास्ते खोजने पड़ेगें, आर्थिक व्यवस्थाओं की भी व्यवस्था होगी उसके संबंध में स्थानीय इकाई राज्य सरकार, केंद्र सरकार सबने मिल करके एक मॉडल खड़ा करना होगा ताकि हम पैसों के कारण अटके नहीं।
आज पीपीपी मॉडल पब्लिक partnership का मॉडल करीब-करीब स्वीकृत हो चुका है उसको कैसे हम बल दें। हम ज्यादा से ज्यादा urban infrastructure के लिए foreign direct investment को कैसे लाएं। हम आर्थिक संसाधनों को विश्व में जहां से भी प्राप्त कर सकते हैं, कैसे प्राप्त करें, लेकिन निर्धारित समय में हम इन स्थितियों को कैसे बदलें।
किसी भी इंसान, गरीब से गरीब इंसान का एक सपना होता है उसका अपना घर हो और एक बार अगर खुद का घर हो जाता है तो फिर वो सपने संजोने लग जाता है। जब मकान मिलता है तो सिर्फ छत नहीं मिलती चार दीवारें नहीं मिलती है जब गरीब को घर मिलता है तो धीरे-धीरे उसके इरादें भी बदलने लग जाते हैं। घर मिलते ही मन करता है कि यार एक-आध दरी ले आयें तो अच्छा होगा। फिर मन करता है कि यार दो कुर्सी लाए तो अच्छा होगा। फिर करता है कि यार नहीं-नहीं टीवी मिल जाए तो अच्छा होगा, फिर लगता है ये सब करना है तो थोड़ी ज्यादा मेहनत करें तो अच्छा होगा फिर लगता है फालतू खर्चा करता था अब उसको थोड़ा पैसा बचाऊंगा, अगले महीने ये लाऊंगा। जीवन में बदलाव शुरू हो जाता है। और वही, self-motivation इन कारणों से आता है। हमारी कोशिश यह है सिर्फ मकान देना, यानी एक परिवार को जो कि बेघर है घर वाला बने इतना नहीं, उसको जीवन जीने की हैसियत देना, उसके मन में जीवन जीने की उमंग भरना, उसके जीवन में जीवन को साकार होने का आनंद देखने को मिले और आने वाले पीढि़यों को देने का सपना पूरा हो, ऐसा एक माहौल बनाने का इरादा है। शहरों में करीब-करीब दो करोड़ से ज्यादा परिवार, उनके लिए घर बनाने हैं। अब हमारा देश ऐसा है कि अगर नहीं बना तो जवाब मुझसे मांगा जाएगा। कोई उनसे जवाब नहीं मांगेगा कि ये दो करोड़ बेघर रहे क्यों। कोई नहीं मांगेगा, है देश का स्वभाव है, क्या करेंगे। हमें उसी से गुजारा करना है। लेकिन कोई कुछ कह देगा इस डर के कारण हम काम करना छोड़ दें तो देश का भला नहीं होगा। और इसलिए हमारा दायित्व बनता है कि हमारे गरीब परिवारों को घर मिले।
आजादी के 75 साल हो रहे वर्ष 2022 में। उन आजादी के दीवानों का नाम लेते हुए हमें रोमांच होता है। भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू को याद करते हैं तो लगता है, कैसा बलिदान था! गांधी सरदार उनकी विरासत को देखते हैं तो लगता है कितना कष्ट झेला था। उन्होंने जो सपने देखें थे उन सपनों में क्या ये भी एक सपना नहीं था कि आजाद कि हिन्दुस्तान में हर परिवार के पास अपना घर हो? मैं मानता हूं आजादी के जब 75 साल मना रहे हैं तब, हमारे भीतर एक आवाज उठनी चाहिए कि मेरे देश में कोई गरीब ऐसा न हो कि जिसको फुटपाथ पर या झुग्गी-झोपड़ी पर जिन्दगी गुजारने के लिए मजबूर रहना पड़े ये हम बदलेंगे। यह हमारा दायित्व है और एक बार इस मिजाज को लेकर यहां से निकलेंगे तो रास्ते आप मिल जाएंगे। आज शहरों का विकास कैसे हो रहा है? आप किसी भी शहर में जाकर पूछिए बहुत कम शहर ऐसे मिलेंगे कि जहां पर पांच साल के बाद शहर कैसा होगा उसका कोई खाका कागज पर मिलेगा। दस साल के बाद कैसा शहर होगा उसका खाका कागज पर नहीं मिलेगा। जो Private property developer हैं, उनको तो पता होता है कि शहर इतना बढ़ेगा, इस दिशा में बढ़ेगा फिर वो वहां जमीन ले लेगा, योजनाएं डाल देगा। मकान तो खड़े कर देगा लेकिन जिंदगी जीने योग्य व्यवस्था पहुंचती नहीं है। न रोड बनता है, न बिजली पहुंचती है, न drainage की व्यवस्था होती है। लोग आते हैं, पैसे देकर मकान भी लेते हैं। बाकी व्यवस्था होती नहीं क्यों? क्योंकि शहर के नेतृत्व ने शहर नहीं बनाया कुछ property dealer ने शहर को बढ़ाया है। ये जो mismatch है उस mismatch को बदलना है। शहर कैसा बढ़ेगा, कब जाएगा कहां, किस रास्ते आगे बढ़ेगा, west में बढ़ेगा आगे East में बढ़ेगा, समाज के छोटे से छोटे व्यक्ति के लिए भी उसमें क्या जगह होगी, ये Plan, जब तक शहर का नेतृत्व दीर्घ दृष्टि के साथ नहीं करता है ये स्थिति बनी रहेगी।
हम इस AMRUT योजना के माध्यम से ये एक बदलाव चाहते हैं। शहर खुद अपना सोचने लगे, शहर अपनी योजनाएं बनाने लगे, और कहां जाना कैसे जाना है, उसका फैसला शहर करे। जरूरत के आधार पर वो चलता जाए, बढ़ता जाए, और बाद में व्यवस्थायें विकसित कर रिकॉर्ड के involvement आ जाता है encroachment आ जाता है, Road नहीं होती है ट्रैफिक की समस्या आती है। पानी नहीं बिजली नहीं, सारी समस्या हम झेलते रहते हैं, और ये हर शहर के अगल-बगल में आपको देखने को मिलेगा कि किसी ने उसको बना दिया और बाद में उस शहर को गोद लेना पड़ता है और वो बहुत तकलीफ वाला होता है। हमने इसकी योजना क्यों नहीं करनी चाहिए।
हमारे देश में शहरों के विकास के लिए एक तरफ हम स्वच्छ भारत की बात जब लेकर आए, मैं मानता हूं कि सरकार से लोग दो कदम आगे हैं, स्वच्छ भारत के काम में, कहीं सरकार कम नजर आती हैं, लोग ज्यादा नजर आते हैं। मैं विशेष रूप से मीडिया का आभारी हूं। मैं देख रहा हूं, वरना मुझे याद है कि 15 अगस्त को जब स्वच्छ भारत की बात कहकर निकला तो मुझे डर लगता था। ये रोज मेरे बाल नोच लेंगे। यहां कूड़ा है, यहां कचरा है, लेकिन मैं आज उन सबको सलाम करता हूं जिन्होंने ऐसा नहीं किया उन्होंने नागरिकों को train करने का काम उठाया और सभी मीडिया के लोग कर रहे हैं। अपने-अपने तरीके से कर रहे हैं, लोगों को समझा रहे हैं कि क्यों, क्यों कूड़ा यहां है तुम यहां क्यों नहीं फेंकते हो।
मैं समझता हूं जब इतिहास लिखा जाएगा मीडिया के स्वच्छ भारत के अभियान का जो नेतृत्व जो आज मीडिया कर रहा है, देश में बदलाव लाने का कारण बनेगा। मैं, मैं देख रहा हूं। बदला जा सकता है ये और आज हमारे यहां Solid waste management, waste water treatment.. हमारा विकास ऐसा नहीं हो सकता कि जो शहर और गांव के बीच संघर्ष पैदा करेगा। हमारा विकास ऐसा होना चाहिए कि जो शहर और गांव एक-दूसरे के पूरक होना चाहिए। अगर शहर को पानी चाहिए, गांव वालों को पानी मिले या नहीं मिले, शहर को तो पानी देना ही पड़ेगा और पीने के पानी की एक बात ऐसी होती है, जहां मानवता का विषय होता है तो कोई बोल भी नहीं पाता है, क्या इसके उपाय नहीं है, क्यों न हम waste water treatment करें और वो पानी गांवों को खेतों में वापिस करें तो किसान भी परेशान नहीं होगा गांव भी परेशान नहीं होगा और शहर को पीने का पानी चाहिए उसकी उपलब्धता की भी कभी तकलीफ नहीं होगी। हम ये चिंता क्यों न करें, हम Solid waste management करके Compost बनाने के पीछे हैं। organic fertilizer तैयार करने की दिशा में क्यों काम न करें। वही fertilizer हम नजदीक के गांवों को दें। हमने देखा है कि बड़े शहर, बड़े शहर के आस-पास के 30-40 किलोमीटर के जो गांव होते हैं, वो ज्यादातर सब्जी की खेती करते हैं, ज्यादातर। क्योंकि उनको तुरंत सुबह-सुबह मार्केट मिल जाता है, शहर में उनका daily आधार पर चलता है बाजार। अगर हम organic fertilizer, compost fertilizer जो शहरों के कूड़े-कचरे से हम बनाते हैं, वो अगर हम गांव में दे दें, तो जो सब्जी मिलेगी वो organic सब्जी मिलेगी। अगर हमारा ये input cost कम होगा तो सब्जी भी सस्ती आएगी। सब्जी सस्ती आएगी तो गरीब आदमी भी 100 ग्राम सब्जी खाता है, तो दो सौ ग्राम खाएगा और सब्जी ज्यादा खाएगा तो Nutrition के problem solve होंगे Health के problem solve होंगे। ultimately बजट के Burden कम होते जाएंगे सुविधाएं बढ़ती जाएंगी। लेकिन हम अगर ये सोच करके काम करें तो ये काम बढ़ सकता है और इसलिए हमारे शहरों का विकास का Model है और इसलिए जो AMRUT योजना है इसमें इन बातों पर बल दिया गया है कि हम इन बातों को कैसे करें plan way में आगे बढ़े, गरीबों को घर मिले, जन-सामान्य को जीवन जीने की सुविधा मिले।
जो स्मार्ट सिटी का concept है उन स्मार्ट सिटी जो बनेगी ये पहली बार स्मार्ट सिटी योजना ऐसी है कि जिसमें शहरों का निर्णय भारत सरकार नहीं करेगी। शहरों को स्मार्ट बनाने का राज्य सरकार नहीं करेगी। शहरों को स्मार्ट बनाने का निर्णय वो शहर का नेतृत्व, वो शहर के नगारिक, वे शहर के municipality के लोग तय करेंगे। थोपा नहीं जाएगा, आवाज नीचे से उठनी चाहिए और इसलिए पहली बार हिन्दुस्तान में challenge route के आधार पर स्मार्ट सिटी बनाने का निर्णय किया है। दुनिया के कई देशों ने ये प्रयोग किया है। कुछ पैरामीटर तय किये गए हैं और जो शहर इस पैरामीटर को पूर्ति करेगा वो entry पाएगा इस स्पर्धा में। फिर उसकी दूसरी exam देनी पड़ेगी फिर उसको पार करेगा तो select होगा, जब select होगा तो फिर भारत सरकार, राज्य सरकार मिल करके उस शहर की ताकत को जोड़ करके उसको स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी। अगर ये योजना ऊपर से आएगी तो क्या होगा? ये काम क्यों नहीं हुआ है, वो दिल्ली वालों ने नहीं किया है, ये काम क्यों नहीं किया वो हमारे राज्य सरकार वाले नहीं करते, नहीं ! ये नीचे से होना है और कहीं पर कोई कठिनाई न आए उस दिशा में आगे बढ़ना है।
मैं समझता हूं यहां पर आये हुए सभी महानुभवों के लिए ये चुनौती है उस चुनौती को स्वीकार कीजिए और जो पैरामीटर तय हो उस स्पर्धा में आइये जीत करके आगे निकलिए और एक बार जब.. जीवन में स्पर्धा हर जगह पर होती है। आप मेयर भी बनते हैं तो स्पर्धा से ही तो बनते हैं, किसी ने ऊपर से तो नहीं बैठा दिया आपको। आप कहीं नौकरी लेने जाते हैं तो वहां भी तो competition होती हैं आप competition को पार करते हैं तो select होते हैं तो हमारे शहरी विकास में भी competition आवश्यक है। उस competition को ला करके स्मार्ट सिटी बनाने का प्रयास है। कभी-कभी कुछ लोग माथापच्ची इसी में खपा रहे हैं कि स्मार्ट सिटी चीज है क्या? बहुत.. बहुत ज्यादा दिमाग खपाने की जरूरत नहीं है। हम.. मान लीजिए किसी रेलवे स्टेशन पे गये, और जो पूछताछ वाला व्यक्ति वहां बैठा है उसको दो सवाल पूछने हैं और उसने हमको चार-पांच सवालों के जवाब दे दिए जो कि हम पहले उसको पूछने के लिए सोचकर गए थे लेकिन वो समझ जाएगा कि उनको ये पूछना है, वो जवाब दे तो हम कहें यार ये बड़ा स्मार्ट आदमी है। मेरी आवश्यकता से भी वो एक कदम आगे है, मेरे हिसाब से ही यही स्मार्ट सिटी है कि जो नागरिकों की आवश्यकता है उससे दो कदम हम आगे चललें, उसकी जो आवश्यकता है, आप मांगोगे हाजिर है, आप चाहोगे, हम सोच रहे हैं, आपका सुझाव है हां हमारी योजना बन रही है- दो कदम आगे है। आप देखिए देखते-देखते smart city बन जाएगी। technology है environment friendly development है। हमने प्रकृति के साथ जीना है energy saving यह हमारी स्वाभाविक व्यवस्था है walk to work ये concept लाना पड़ेगा वरना एक जगह पर रहता है और रोज डेढ़ घंटा वो travelling करता है फिर नौकरी पर जाता है तो उसकी maximum energy travelling में जाती है बची-खुची का में लगती है, तो वो काम कैसा होगा। अगर उसकी energy saving होती है। walk to work का concept develop धीरे-धीरे हमारे यहां होता है और एक composite व्यवस्था विकसित होती है कि जहां सबकुछ available हो साइकिल पर भी जाए तो अपना काम हो जाए। हमने इस प्रकार के मॉडल को develop करना ही होगा और जब ये develop करेंगे तो अपने आप शहर के भीतर कई छोटे-छोटे शहर बन जाते हैं। वो एक प्रकार से पूर्ण शहर बन जाते है। हम उस विचार को ले करके कैसे आगे बढ़ें तो smart city के concept को हमने आगे बढ़ाना है। चाहे housing for all की बात हो, चाहे हमारे 500 नगरों को प्राणवान बनाना है, अमृतमय बनाना है चाहे दुनिया की बराबरी करने वाले हमारे smart city की दिशा में कदम उठाना है। एक composite योजना के साथ urban India का हमारा विज़न क्या है, उसको ले करके हम आएं और ये योजना सरकार में बैठ करके कागज पर बनाई हुई योजनाएं नहीं हैं। शायद हिंदुस्तान में इतनी बड़ी मात्रा में consultation पहले कभी नहीं हुआ होगा, जितना consultation इस योजना को चरितार्थ करने के लिए लगाया गया है। सभी प्रकार के stake holders को इसमें जोड़ा गया है। उनसे पूछा गया, उनसे जानकारी ली गई है। उनकी समस्याओं को समझा गया है और उसको चरितार्थ करने का प्रयास किया है। financial world को भी, उनको भी विश्वास में लिया, बताइए कैसे होगा। real estate developers है उनको भी पूछा गया कि बताइए, भई कैसे आगे बढ़ सकते है जो कानूनविद हैं.. कि जिसके कारण कानूनी समस्याएं न आएं, उनसे पूछा गया। दुनिया में जो अच्छा हुआ है जिन्होंने अच्छा किया है उनको भी साथ जोड़ा गया है। इस क्षेत्र में जिन-जिन की पहचान है दुनिया में उन सबकी सलाह ली गई है और इन सबसे विचार-विमर्श करके black and white में चीजों को प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। एक बार ये चीजें तैयार हुई हैं, अब आगे बढ़ने में देर नहीं।
ये सरकार consumer की सुरक्षा इस पर सजग है। Parliament में एक बिल already हमारा गया हुआ है, इस अवसर पर चर्चा होगी हमारी। वरना हमारे देश में चाहे अनचाहे ये जो builder lobby है उनकी छवि काफी गिरी हुई है और गरीब आदमी अपनी जिंदगी का पूरा पैसा उसमें लगाता है यानी उसके जीवन की वो एक ही घटना होती है और फिर जब वो लुट जाता है तो उसका तो सब लुट जाता है। ये छोटे-छोटे गरीब consumer को protect करने के लिए संसद में कानून लाया गया है ये आने वाले सत्र में पारित होगा तो हम विकास चाहते हैं, घर को जोड़ना भी चाहते है लेकिन साथ-साथ हम सामान्य नागरिकों की आवश्यकताओं की पूर्ति को ध्यान देना चाहते हैं।
मुझे विश्वास है कि आज, 25 जून, ये शहरी भारत, विज्ञान भवन में एकत्र हो करके आधुनिक भारत के निर्माण के लिए वैज्ञानिक तौर-तरीके से आगे बढ़ने का संकल्प ले करके आगे बढ़ेगा। नगर-पालिका, महानगर पालिका का जो नेतृत्व आया है मैं उनसे गुजारिश करना चाहता हूं यहां सब राजनीतिक दल के लोग होंगे, यहां सभी राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोग होंगे लेकिन एक बात निश्चित है हम जब इतिहास पढ़ते हैं तो उन बातों को गौर करते हैं कि फलाना राजा था 5 साल ही उसको कार्यकाल मिला था लेकिन उसने अपने राज्यकाल में ये दो चीजें अच्छी करके गया था | 200 साल के बाद भी लोग उसको याद करते हैं 100 साल के बाद भी अच्छा उनके कार्यकाल में ये काम हुआ था, उनके कार्यकाल में उनके कार्यकाल में ये तालाब बना और शहर की पानी की समस्या हल हुई थी। उनके कार्यकाल में डेढ़ सौ साल पहले स्कूल बना था, स्कूल में से इतने बड़े-बड़े लोग तैयार हुए। जिसको शासन का अवसर मिलता है उनकी पहचान पचासों साल के बाद भी.. कौन सा अच्छा काम करके गये उससे तो नापी जाती हैं| मैं उन नगर-पालिकाओं के अध्यक्षों से कहना चाहता हूं। मैं उन महा नगर-पालिकाओं के अध्यक्ष से कहना चाहता हूं कल्पना कीजिए कि आप 80 साल के उम्र के होंगे आपका पोता उंगली ले पकड़ कर आपके साथ चलता हो तो आपके दिल में इच्छा क्या होगी। जरा कल्पना कीजिए मैं दावे से कहता हूं कि आपके दिल में इच्छा ये होगी कि जो छोटा पोता जो ज्यादा कुछ समझता नहीं उंगली पकड़कर वहां ले जाएंगे और कहेंगे देखिए ये भवन हैं न मैं जब अध्यक्ष था न तो मैंने बनाया था। ये जो गांव में तालाब है न, मैं जब अध्यक्ष था न मैंने बनाया था। हर किसी की ख्वाहिश होनी चाहिए कि अपने कार्यकाल में अपने शहर को कुछ अच्छा नजराना दे करके जाए। आपकी जीवन की सफलता उसमें है। आपकी जीवन की सफलता उस बात में नहीं है कि आपने कितने लोगों को पराजित किया कितनी बार चुनाव जीतकर आये। कितनी बार गठजोड़ करके सत्ता को हासिल किया। ये सफलता का मानदंड नहीं होता है। सफलता का मानदंड ये होता है कि जिस जनता जनता जनार्दन की आपको अवसर दिया है उनके लिए क्या करके गये, अगर ये मन में संकल्प ले करके जाते हैं ये इरादा ले करके जाते हैं कि मुझे पांच साल का कार्यकाल मिला है मुझे तीन साल का कार्यकाल मिला है जनता जनार्दन ने मुझे अवसर दिया है। मैं मेरे नागरिकों के लिए ये करके जाऊंगा और उसका जो संतोष मिलेगा ना अद्भुत संतोष होगा। अद्भुत संतोष होगा। जीवन भर जीने के लिए वो आपके लिए एक बहुत बड़ा अवसर बना हुआ होता है। अपने पोते के पोते भी अगर आपके आंखों के सामने हैं तो आपका मन करेगा कि आप अपना achievement उसको बता कर जाएं, ये आपका सपना रहता है।
आपके दिल में भी वो सपने जगें, आप भी कुछ करने के लिए कृतसंकल्प हों। अर्थात प्रयत्न करके शहर के जीवन में बदलाव लाएं। वहां के सामान्य से सामान्य नागरिक के जीवन में बदलाव लाएं इन शुभकामनाओं के साथ मैं आज के इस अवसर पर विभाग के सभी लोगों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं ताकि देश के शहरी जीवन में बहुत ही अल्प समय में बदलाव आये और 2022 में जब देश आजादी के 75 साल मनाता हो तब हमारे शहरों में भी हर परिवार में स्वतंत्रता की आनंद की अनुभूति दें उसको हम सफलतापूर्वक पार करें इसी शुभकामनाओं के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद।
मेरे प्यारे देशवासियों,
आज हम सब 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। आज हर दिलों की धड़कन वंदे मातरम के नाद से गूंज रही है। आज हर घर तिरंगा है, हर मन तिरंगा है और देश उत्साह और उमंग के साथ नए संकल्पों को लेकर के आज आगे बढ़ रहा है। आप सबको स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। देश आज उन महान सपूतों का पुण्य स्मरण करती है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए त्याग, बलिदान की पराकाष्ठा की। अपने तप, त्याग और बलिदान से आजादी के एकमात्र लक्ष्य को लेकर के अपनी पूरी जिंदगी खपा दी। पूज्य बापू समेत सभी स्वतंत्र सेनानियों को बलिदान की महान परंपरा जगाने वाले महान क्रांतिकारियों को आज मैं श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। आज जो इस समारोह में उपस्थित हैं, उन सबके लिए आज एक ऐतिहासिक पल भी है। आजादी के बाद 15 अगस्त को लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम गूंज रहा है। आज जब हम देश के लोग वंदे मातरम के 150 वर्ष मना रहे हैं, तो इससे बड़ा उत्तम अवसर क्या हो सकता है।
मेरे प्यारे देशवासियों,
पिछले दिनों, देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ का प्रकोप रहा, भूस्खलन का प्रकोप रहा, अनेक परिवार प्रभावित हुए। उनके दुख, दर्द को हम भलिभांति अनुभव करते हैं। पीड़ित परिवारों को मैं विश्वास दिलाता हूं कि हम और पूरा देश उनके साथ खड़े हैं।
मेरे प्यारे देशवासियों,
कोई भी राष्ट्र तब महान बनता है, तब अपनी सिद्धियों को प्राप्त करता है, जब अपने सपनों, अपने संकल्पों और अपने सामर्थ्य के दम पर आगे बढ़ता है।
मेरे देशवासियों,
अब छोटे सपनों से चलने वाला नहीं है, हमें बड़े सपने क्योंकि बड़े सपने हमारी सोच को भी विस्तार देते हैं। हमारी सोच के क्षितिज को भी विस्तृत करते हैं। हमारे संकल्प दृढ़ होने चाहिए, जब संकल्प दृढ़ होता है, तो कठिनाइयों से, आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप उभरकर के आता है।
और मेरे प्यारे देशवासियों,
हमारे संकल्प भी ऊंचे होने चाहिए क्योंकि जब सपने ऊंचे होते हैं, संकल्प ऊंचे होते हैं, तो हमारे सामर्थ्य की ऊंचाई भी बढ़ती है, हमारे प्रयासों की ऊंचाई भी बढ़ती है और तब जाकर के हम सपनों को साकार कर सकते हैं।

मेरे प्यारे देशवासियों,
आज भारत ने भी एक बहुत बड़ा सपना देखा है, दृढ़ संकल्प के साथ देखा है, नई ऊंचाइयों को छूने के लिए देखा है, और वह सपना है, जब आजादी के 100 साल होंगे। 2047 में हम विकसित भारत बना के रहेंगे। 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ से, इस लक्ष्य को हमें हासिल करना है और जब दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश विकसित होने का संकल्प लेता है, तो यह दुनिया की नजरों में भी हमारे साहस का परिचायक बन जाता है। दुनिया हमारी तरफ देखने का नजरिया बदलने के लिए मजबूर हो जाती है।
प्यारे देशवासियों,
और मैं ऐसे ही नहीं कह रहा हूं। पिछले 12 वर्ष में देश के कोटि-कोटि नागरिकों ने दलित हो, पीड़ित हो, वंचित हो, आदिवासी हो, गांव में रहने वाला हो, शहर में रहने वाला हो, गरीब हो, मध्यम वर्ग का हो, युवा हो, बुजुर्ग हो, नारी हो, पुरुष हो, उत्तर हो, दक्षिण हो, पूरब हो, पश्चिम हो, हर किसी ने पिछले 12 साल में एक संकल्प के साथ, समर्पण के साथ, देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में हर प्रकार से प्रयास किया है। मैं उनके इन प्रयासों का आदरपूर्वक स्वीकार करता हूं और उसी का परिणाम है, कि इतने कितने कम समय में 25 करोड़ देशवासी, गरीबी को परास्त करके गरीबी से बाहर निकले हैं। इन्हीं देशवासियों के प्रयास का परिणाम है कि हम कभी फ्रेजाइल फाइव में गिने जाते थे। 12 साल के भीतर-भीतर हम एक मेजर इकोनॉमी में फास्टेस्ट ग्रोइंग इकोनॉमी बन गए हैं।
साथियों,
देश आजाद हुआ, बहुत सारे सपने लेकर के आजाद हुआ, लेकिन हम गति नहीं पकड़ पाए, रफ्तार नहीं पकड़ पाए। होती है, चलती है, अरे हो जाएगा, देखा जाएगा, उसी में खोए रहे। 2014 तक आते-आते तो पूरे विश्व ने हमें फ्रेजाइल फाइव के उसमें डंप कर दिया था। ऐसे समय, पिछले 12 साल में भारत ने एक नई रफ्तार पकड़ी है, तेज गति से हम आगे बढ़ रहे हैं और देशवासियों का संकल्प है कि अब 140 करोड़ देशवासियों के संकल्प को सामर्थ्य को रोकना नामुमकिन है।
प्यारे देशवासियों,
पिछले 12 वर्षों में डिफेंस प्रोडक्शन करीब 4 गुना हुआ। खादी और ग्राम उद्योग का उत्पादन करीब 5 गुना हुआ, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग करीब 7 गुना बढ़ा, आधुनिक रेलवे कोच का निर्माण 21 गुना बढ़ा, मोबाइल फोन उत्पादन 35 गुना बढ़ा, इतना ही नहीं आधुनिक युग को देखकर के भी डिजिटल और इनोवेशन की दुनिया में भी हमने अपना परचम लहराया। इंटरनेट यूजर, इंटरनेट कंज्यूमर करीब-करीब चार गुना बढ़े, पेटेंट ग्रांट होने की संख्या 4 गुना बढ़ी, डिजिटल ट्रांजेक्शन 100 गुना बढ़े, सामान्य मानवी की सुविधाओं की तरफ भी हमने उतना ही गंभीरता से काम किया। हर साल औसतन 15 गुना ज्यादा तेजी से हमने नल से जल कनेक्शन दिए। हर साल औसतन छह गुनी ज्यादा रफ्तार से लोगों को गैस कनेक्शन दिए। हर साल चार गुनी रफ्तार से गरीबों के लिए टॉयलेट बनाने का काम किया। हर साल तीन गुना ज्यादा तेजी से गरीबों को घर देने का काम किया। देश ने गवर्नेंस में भी बहुत बदलाव लाया। हजारों की संख्या में compliances खत्म किए। सैंकड़ों की तादाद में पुराने कानून खत्म किए। पिछली शताब्दी के कानूनों से 21वीं शताब्दी की मार्च नहीं हो सकती। हमने आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मेट्रो का विस्तार किया है, हमने पब्लिक ट्रांसपोर्ट को ताकत दी। जिस स्पीड से काम, जिस स्केल पर काम किया, यह सब यह रफ्तार, यह विस्तार, यह अचीवमेंट आजादी के बाद पहली बार पिछले एक दशक ने देखा है और जब इतनी सारी सिद्धियां हमारे सामने हों, इतनी तेज गति दिखाई देती हो, देशवासियों का सामर्थ्य पल-पल प्रबल होता है, तब तो 2047 में विकसित भारत बनने का संकल्प कभी भी अधूरा नहीं रह सकता है। यह सारे आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि हम आगे बढ़ने वाले हैं।
मेरे प्यारे देशवासियों,
लेकिन उसके लिए आत्मविश्वास की जरूरत होती है, आत्म गौरव की जरूरत होती है और साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत होना भी बहुत जरूरी होता है। और इसलिए बीते वर्षों में हमारा कनविक्शन रहा है कि भारत को हमें अब दूसरे देशों पर निर्भर रहकर के नहीं जीना चाहिए, हमें आत्मनिर्भर बनना चाहिए। दुनिया में बहुत कुछ मिलता है, सस्ता मिलता है, जल्दी मिल सकता है, लेकिन उससे हमारा सामर्थ्य तैयार नहीं होता है, ना हमारे सामर्थ्य की कसौटी होती है और इसलिए हमें भी अपनी क्षमताओं को बढ़ाना है, अपने हितों की सुरक्षा हमें खुद को करनी है, और इसलिए आत्मनिर्भर भारत का संकल्प बहुत दृढ़ता के साथ हम लेकर के आगे बढ़ रहे हैं। मेक इन इंडिया, स्वदेशी, वोकल फॉर लोकल, इन सारे क्षेत्रों में आज हर भारतीय का मन जुड़ रहा है।

मेरे प्यारे देशवासियों,
मैं आपको एक उदाहरण देता हूं सेमीकंडक्टर का, देश आजाद होने के बाद विश्व में तो सेमीकंडक्टर की चर्चा हो चुकी थी। हमारे यहां भी बातें होती थी, लेकिन सेमीकंडक्टर का कोई बड़ा प्लान हम आगे नहीं बढ़ा पाए और आज स्थिति क्या है? आज की डिजिटल दुनिया में, आज की टेक्नोलॉजी में, चिप का महात्म्य हम समझते हैं। कोई भी इलेक्ट्रॉनिक गुड्स होगा, हमारे मेडिकल इक्विपमेंट होंगे, हमारा ट्रांसपोर्ट के रास्ते होंगे, हर किसी में चिप अनिवार्य है और इसे इस चिप के बिना दुनिया थम जाए, ऐसी स्थिति पैदा हो चुकी है और इसलिए भारत ने आत्मनिर्भर होने की दिशा में अपना सेमीकंडक्टर प्लांट, बड़ा सेमीकंडक्टर प्लांट, तीन सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हो चुके हैं। और मुझे बताया गया है कि वहां जो प्रोडक्शन हो रहा है, वह एक्सपोर्ट होना शुरू हो चुका है और मैं देशवासियों को कहना चाहता हूं, आने वाले सात-आठ वर्ष में और 5-7 या 8 सेमीकंडक्टर प्लांट बहुत ही जल्द शुरू होने वाले हैं। यह आत्मनिर्भर भारत हमें विकसित भारत की दिशा में जाने का महामार्ग देती है।
मेरे प्यारे देशवासियों,
वैसी ही एक चर्चा क्रिटिकल मिनरल की हो रही है। पूरी टेक्नोलॉजी क्रिटिकल मिनरल पर निर्भर है। भारत इसमें भी अपने आप को सुरक्षित करने में जुटा हुआ है। क्रिटिकल मिनरल का लक्ष्य साझा किया जाए, नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स यह हमने लॉन्च किया। बजट में क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर की हमने घोषणा की है, कई देशों के साथ एग्रीमेंट हो रहे हैं, विश्व के कई देश अब इस क्रिटिकल मिनरल्स की दिशा में भारत पर भरोसा करने लगे हैं।
मेरे प्यारे देशवासियों,
जैसे सेमीकंडक्टर की बात हो, क्रिटिकल मिनरल की बात हो, वैसे ही जिस टेक्नोलॉजी की दिशा में हम जा रहे हैं, दुनिया जा रही है, उसमें एनर्जी का महत्व और बढ़ता चला जा रहा है। अब एनर्जी के बिना भी नई दुनिया को चलाना मुश्किल है और इसलिए हमें चिप हो, AI हो, डाटा सेंटर हो, हमें बहुत बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होगी। एनर्जी सिक्योरिटी, यह हमारे समय की मांग है और इसलिए हमने पहले से ही उस दिशा में एक के बाद एक मजबूत कदम उठाए हैं। एनर्जी सिक्योरिटी का एक बड़ा माध्यम है, परमाणु ऊर्जा न्यूक्लियर एनर्जी, हमने पार्लियामेंट में शांति एक्ट पास कर करके, एक नए लक्ष्य पर जाने का रास्ता तय कर लिया है। 2047 तक हम 100 गीगावॉट न्यूक्लियर पावर का लक्ष्य लेकर के चल रहे हैं। इसी एक दशक में हम पांच नए न्यूक्लियर रिएक्टर शुरू करने का लक्ष्य लेकर के चल रहे हैं। इस वर्ष भारत ने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करके एक अहम पड़ाव पार किया है और उसके कारण परमाणु ईंधन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में हमें एक बहुत बड़ा सफलता का कदम हमने रखा है।

मेरे प्यारे देशवासियों,
कई बार संसाधनों की कमी के कारण देश रुकता नहीं है, लेकिन रुकने का कारण सोच की सीमाएं होती हैं। जब सोच बंध जाती है, सीमाओं में सड़ने लग जाती है, तब हम अपने सामर्थ्य को भी पहचान नहीं पाते हैं। देश को आज कच्चे तेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है और हमारी गलत सोच के कारण है। आप जान कर हैरान हो जाएंगे, हमने समुद्री तट पर 99% हमारा समुद्री तट का पूरा हिस्सा ऐसी सोच के कारण नो-गो एरिया घोषित करके रखा था, हमने ही समुद्र के अंदर जाकर के एक्सप्लोरेशन न करने का निर्णय कर लिया था। यह सोच का दारिद्रय था, हमने फैसला किया, यह नहीं चल सकता। हमने उस 99% को, जो कभी नो-गो एरिया हुआ करते थे, हमने उसको गो अहेड एरिया के रूप में खुला कर दिया है और अब हम समुद्र के भीतर भी एक्सप्लोरेशन करने की और नए-नए भंडार खोजने की दिशा में हम प्रवृत्त हैं, हम प्रयास कर रहे हैं। हमने पिछले वर्ष उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रखते हुए, समुद्र मंथन की घोषणा की थी और पिछले दिनों हमने 85000 करोड रुपए इस काम के लिए आवंटित करके काम को गति देने का निर्णय कर लिया है।
मेरे प्यारे देशवासियों,
एनर्जी सिक्योरिटी, इसका मैंने कहा कि हमें अल्टरनेट स्रोतों की तरफ भी पूरी शक्ति लगाना बहुत जरूरी है और इसलिए ऊर्जा का सही इस्तेमाल बढ़ाते हुए भारत इसी दिशा में आज तेजी से काम कर रहा है। 2014 से पहले मतलब आज से 12 साल पहले, हमारे देश में सिर्फ 70 शहरों में पाइप से गैस की व्यवस्था थी, पाइप से गैस डिस्ट्रीब्यूशन होता था। 12 साल में इन 70 शहरों को हमने 700 शहरों तक पहुंचा दिया है। यह होती है रफ्तार, यह होता है विस्तार। 2014 के पहले मुश्किल से 20-22 लाख घरों में पाइप से गैस पहुंचता था, आज पौने दो करोड़ घरों में पाइप से गैस पहुंचाने का काम हो रहा है। 12 वर्ष पहले देश में सोलर एनर्जी की कैपेसिटी सिर्फ 2 गीगावॉट थी, 2 गीगावॉट, आज 160 गीगावॉट हमने प्राप्त किया है लक्ष्य।
मेरे प्यारे देशवासियों,
मैं एक और जानकारी देता हूं, हमने इसका लाभ देश के मध्यम वर्ग को, सामान्य परिवार को मिले, इस तरफ भी उतना ही ध्यान केंद्रित किया है। हमने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना चालू की और आज मुझे संतोष है कि इतने कम समय में 50 लाख घरों का सोलर एनर्जी का काम, हम आंकड़ा पार कर चुके हैं, तेजी से चल रहा है और उसके कारण हजारों घरों का बिजली बिल जीरो हो गया है, हजारों घर अपनी बिजली का उपयोग करने से अतिरिक्त बिजली आज बेचकर के कमाई कर रहे हैं। हर परिवार को हम इस काम के लिए 80000 रुपया सरकार की तरफ से एक-एक परिवार को मदद दी जा रही है, तब जाकर के हम इस काम को पूरा कर रहे हैं।
मेरे प्यारे देशवासियों,
आपको जानकर के हैरानी होगी, यह जो हमारी रेलवे है, उसका इलेक्ट्रिफिकेशन का काम हमारे देश में 1925 में शुरू हुआ था। 1925 में इलेक्ट्रिफिकेशन का काम शुरू हुआ, लेकिन 90 साल में 1925 से लेकर के 90 साल में सिर्फ 30% रेल का इलेक्ट्रिफिकेशन हुआ था। यानी 90 साल में 30%, हमारी रफ्तार देखिए, लक्ष्य को पाने के लिए हमारी दौड़ देख लीजिए। हमने इन एक दशक के अंदर शत प्रतिशत काम पूरा कर दिया। 90 साल में 30%, 10 साल में 70%, यह होता है काम और इसके कारण डीजल, जो हमें बाहर से लाना पड़ता है, उसकी बचत हुई। बिजली से हमारी ट्रेनें चली, पर्यावरण को फायदा होने लगा।

मेरे प्यारे देशवासियों,
हम यहां से नहीं रुके हैं। हम दुनिया के अंदर पीछे रहना नहीं चाहते, पिछले दिनों अपने खबर सुनी होगी, भारत ने ईंधन का यह नया क्षेत्र को भी छू लिया है। देश ने पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन शुरू कर दी है और मुझे खुशी है कि ये सबसे लंबी ट्रेन है और सबसे ताकतवर ट्रेन है और दुनिया में हाइड्रोजन ट्रेन के क्षेत्र में भी भारत अपना ने झंडा गाड़ दिया है।
प्यारे देशवासियों,
पिछले 10-12 साल हम लगातार 2047 के लक्ष्य को पाने के लिए दौड़ रहे हैं। एक के बाद एक सोपान सिद्ध कर रहे हैं। हमने सोचा भी नहीं था कि हमें इसमें भी कुछ मुसीबतों को झेलना पड़ेगा। पिछले 10-12 वर्ष में कितने संकटों का सामना करना पड़ा। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया था, सारी व्यवस्थाएं चरमरा गई थीं, कोरोना से बाहर निकले, युद्ध की विभीषिका की खबरें आने लगीं, कहीं यूक्रेन तो कहीं पश्चिम एशिया, हर जगह पर तनाव का माहौल और पता नहीं भविष्य वेत्ताओं ने तो न जाने क्या-क्या घोषणाएं कर दी थी। देश को डराना, देश को भयभीत रखना, देश को चिंतित रखना, इसी में कुछ लोगों को आनंद आता है। वैक्सीन नहीं मिलेगी, कोविड में लोग बचेंगे नहीं, कुछ भी नहीं होने वाला। वेस्ट एशिया का क्राइसिस आया, पेट्रोल पंप पर पेट्रोल नहीं मिलेगा, गैस नहीं मिलेगा, डीजल नहीं मिलेगा, फर्टिलाइजर नहीं मिलेगा, सारी दुनिया भर की अफवाहें फैला करके, भारत के लोगों को भयभीत करने का, डराने का, चिंता के अंदर डुबो देने का, कुछ लोगों को आनंद आ रहा था। लेकिन देश ने देख लिया कि पिछले 10-12 साल की सुविचारित योजनाएं रंग ला रही हैं और हम इतने बड़े संकट के बावजूद भी नागरिक देवो भवः के मंत्र को लेकर के जीते हुए भारत ने जो तैयारियां की थी, एक के बाद एक कदम उठाया था, सोचा नहीं था कि यह संकट आएगा, लेकिन उस संकट के समय में यह सारी चीजें काम आ गई और आज देश में गैस भी है, पेट्रोल भी है, यूरिया भी है। हम अपनी ताकत के ऊपर खड़े हो रहे हैं, चल रहे हैं।
मेरे प्यारे देशवासियों,
दुनिया के इन संकटों का प्रभाव हर किसी पर हुआ, हम भी अछूते नहीं हैं। यूरिया के दाम दुनिया में 3000 रूपया पहुंच गया एक बोरी का। आज भी हम मेरे देश के किसानों को वो बोझ सहने के लिए मजबूर नहीं कर रहे, सरकार अपने कंधों पर वो बोझ उठा रहा है और दुनिया से जो 3000 रूपया में यूरिया का बोरा हमें मिलता है, वो हमारे किसानों को हम सिर्फ 300 रूपये में दे पाते हैं। इतना ही नहीं DAP, आज दुनिया में बाजार 5000 पहुँच चुका है, लेकिन मेरे देश के किसानों को दिक्कत ना हो, इसलिए 1350 रुपए में आज भी DAP देने का काम हम कर रहे हैं।
मेरे प्यारे देशवासियों,
एक समय था, जब मैं आत्मनिर्भरता की बात कर रहा था, तो कुछ लोग एयर कंडीशन चैंबर में बैठकर सोचने वाले लोग हमें बता रहे थे, ग्लोबलाइजेशन का क्या होगा। लेकिन दुनिया देख रही है कि पिछले एक दशक में ऐसा लग रहा है कि दुनिया ने ग्लोबलाइजेशन बोलना ही बंद कर दिया है। जहां से ग्लोबलाइजेशन की आवाजें आती थी, वह बंद हो गई, सुनाई नहीं देती है। दुनिया का हर देश अपनी-अपनी सवालों के मिजाज की तरफ गया है, लेकिन दुर्भाग्य से इस संकट के कालखंड में कुछ लोगों ने अपना रुतबा दिखाने के लिए संसाधनों को वेपनाइज करने का खेल खेला है। दुनिया अपने पास जो कुछ भी है, उसको वेपनाइज करने में लगी है। संसाधनों का वेपनाइज, रिसोर्स का वेपनाइज, पेट्रोल, डीजल, फर्टिलाइजर, दवाइयां, टेक्नोलॉजी की चिप्स, इतना ही नहीं भू-भाग को भी वेपनाइज किया जा रहा है। और ऐसे समय अगर हम आत्मनिर्भरता के मंत्र को लेकर 10 साल सही दिशा में न चले होते, तो हम कल्पना कर सकते हैं, कि तो ऐसी चुनौतियों का मजबूती से मुकाबला कैसे करते और हमारी तैयारियां निरंतर बढ़ती जा रही हैं।
मेरे प्यारे देशवासियों,
दूसरी तरफ आज भारत का प्रोफाइल पूरी तरह बढ़ रहा है। आज भारत दुनिया के लिए एक स्वीकृत और सम्माननीय देश के रूप में बन रहा है। भारत के पास स्थिर पॉलिटिकल मैंडेट है, स्थिर सरकार है, भारत का वाइब्रेंट लोकतंत्र है, भारत का मजबूत न्याय तंत्र है और हम सबको दिशा देने वाला भारत का संविधान है और अब दुनिया हमारे इस सामर्थ्य को पहचानने लगी है। और इसलिए 2014 के बाद, दुनिया के करीब 40 देशों के साथ हमारा एफटीए एग्रीमेंट हो रहा है। आप देखिए, कितना बड़ा अवसर आया है, लेकिन मैं यह जो ट्रेड एग्रीमेंट्स हुए हैं, यह एक बहुत बड़ा अवसर है और इसलिए खास करके मैं मेरे MSMEs को कहना चाहूंगा कि हमें इस मौके को छोड़ना नहीं है। दुनिया में हमें पहुंचना है, भारत के उत्पाद की हर चीज विश्व के बाजार में पहुंचे और चाहे हमारा टेक्सटाइल हो, हमारी मशीनरी हो, दवाइयां हो, हमने मौका छोड़ता नहीं है, लेकिन वैश्विक जो पैरामीटर्स हैं, उस पैरामीटर को हमें पार करना होगा। हमें दुनिया से जो मिलता है, उससे अच्छा देना पड़ेगा। दुनिया में जो मिलता है, उससे सस्ता देना पड़ेगा और पंजाब के लुधियाना से लेकर के तमिलनाडु के तिरुपुर तक हमारा टेक्सटाइल सेक्टर दुनिया में पहुंच सकता है। इतना ही नहीं, केरलम से लेकर के गुजरात और तमिलनाडु से लेकर के बंगाल, यह हमारा समुद्री तट, हमारे मछुआरे भाई-बहन आज इस FTA के कारण हमारे श्रिंप यानी झींगा, उसके एक्सपोर्ट की बहुत संभावना बढ़ी है। हमारे सी फूड की दुनिया में पहुंच बनने की संभावना बढ़ी हुई है और इसलिए मैं चाहूंगा कि हमें इस स्थिति का फायदा उठाते हुए, हम आगे चलते हुए, हम इन कामों को पार करने के लिए प्रयास करें।

मेरे प्यारे देशवासियों,
मैंने यह जो भूमिका आपके सामने रखी है, उसके पीछे 2047 का लक्ष्य इन मजबूत नींव पर खड़ा है। 2047 विकसित भारत का लक्ष्य हमने पिछले 10-12 साल में देशवासियों ने जो सामर्थ्य दिखाया है, उस सामर्थ्य का हिस्सा है।
और इसलिए मेरे प्यारे भाइयों बहनों,
सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है, और अगला एक चौथाई हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब हम रुक नहीं सकते हैं, हमारी गति नहीं रुक सकती है, हमारी दिशा तय हो चुकी है, हमें प्राप्त करके रहना है और इसके लिए हमें अपना वर्क कल्चर बदलना होगा, हमारे वर्क कल्चर को बदलते हुए हमें हमारी सोच को भी बदलना होगा, हमें हमारे काम की गति को भी बदलना होगा। जो काम पिछले 5-7 दशक में नहीं हुए हैं, वो काम हमें आने वाले 5-7 साल में करने हैं और मेरा भरोसा है, मेरे देश की युवा शक्ति पर, मेरे देश के नौजवानों पर, मेरे देश की माताओं-बहनों पर, मेरे देश के किसानों पर, मेरे देश के मजदूरों पर कि हम, हम इस सपने को साकार कर सकते हैं। और इसलिए हमें रिफॉर्म की गति को भी आगे बढ़ाना है और जब मैं रिफॉर्म की बात कर रहा हूं, रिफॉर्म ना ही हमारे लिए कंपल्शन है, ना ही रिफॉर्म यह हमारे लिए कोई Buzzword है, हमारी यह रिफॉर्म यह कनविक्शन है, आउट आफ कनविक्शन। हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चल पड़े हैं और हम आने वाले दिनों में भी नेक्स्ट लेवल रिफॉर्म की ओर बढ़ने वाले हैं और इसलिए सरकार, समाज, उद्योग, उत्पादक, किसान, हर किसी ने अपनी ट्रेडिशनल व्यवस्थाओं में रिफॉर्म करना पड़ेगा, सोच में रिफॉर्म करना होगा, अपने लक्ष्यों को रिफॉर्म करना होगा।
और इसलिए मेरे प्यारे देशवासियों,
हमें एक निश्चित दिशा को लेकर के चलना होगा। मैं आज उस युग को भी याद करना चाहूंगा, जब देश भारत का सामर्थ्य सप्त सिंधु के रूप में हम जानते थे, हम समझते थे, हम सुनते थे और विकसित भारत बनाने के लिए हमें नई धारा चाहिए। आज लाल किले की प्राचीर से मैं देश के सामने शक्ति की इस सप्त धारा का आह्वान करता हूं। आने वाले 5-7 साल में, जो पिछले 5-7 दशक में नहीं हुआ, वो सप्त धारा के सामर्थ्य से, शक्ति से, हम देश को नई ऊंचाई, नई गति देंगे और नए लक्ष्यों को पार करने वाला सामर्थ्य देंगे। और इसके साथ-साथ देश की युवा शक्ति के सामर्थ्य का भरपूर राष्ट्र निर्माण में उपयोग होगा, उनकी शक्ति जोड़ी जाएगी। आने वाले दिनों में जब मैं सप्त धारा की बात करता हूं, सप्त धारा की पहली शक्ति है - मैन्युफैक्चरिंग पावर।
मेरे प्यारे देशवासियों,
हमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बहुत आगे बढ़ाना होगा और प्रोडक्शन बढ़ाने के साथ-साथ हमें छोटे-छोटे पुर्जे भी बनाने हैं और बड़े-बड़े प्रोडक्ट भी बनाने हैं। पूरा वैल्यू चैन हमारा होना चाहिए और उसे लेकर के चलना, हमें कंपोनेंट भी चाहिए और हमें कंप्लीट मैन्युफैक्चरिंग भी चाहिए, कंप्लीट प्रोडक्ट भी चाहिए। डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक भारत को ग्लोबल सप्लाई चैन का भरोसेमंद केंद्र बनना होगा। इसके लिए मैं तीन चीजों पर विशेष जोर देना चाहता हूं। मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में जो मेरे भाई-बहन हैं। यह समय का यह अवसर है, इस अवसर को जाने मत दे और इसके लिए हमें कोस्ट, क्वालिटी और स्केल, इसके विषय में वैश्विक मानदंडों से खरा उतरना पड़ेगा। हमारी factories competitive हो, हमारे प्रोडक्ट्स यूजर फ्रेंडली हो, हमारा पैकेजिंग दुनिया के लोगों को लुभावने वाला हो, आकर्षित करने वाला हो। हमारा जीरो डिफेक्ट precision मैन्युफैक्चरिंग, यह हमारी पहचान बनना चाहिए। हर मैन्युफैक्चरर, हर एंटरप्रेन्योर, हर MSMEs से मैं कहना चाहता हूं, ग्लोबल मार्केट में हमारी पहचान विश्वसनीयता और गुणवत्ता के आधार पर होनी चाहिए। क्वालिटी के संबंध में नो कॉम्प्रोमाइज और इसलिए हमारा मंत्र क्वालिटी, क्वालिटी, क्वालिटी होना चाहिए। यही हमारा ग्लोबल ब्रांड वैल्यू बनेगा।
मेरे प्यारे देशवासियों,
इस सप्त धारा की दूसरी शक्ति है, कृषि और फूड प्रोडक्शन। फूड प्रोसेसिंग, हमें इस दिशा में आगे बढ़ना होगा। हमारे किसानों ने अब दुनिया के बाजार खुल चुके हैं, FTA के कारण हमें एक बहुत बड़ा मार्केट मिल रहा है, हमें वहां पहुंचना है, हमें उसे जगह को हाथ लगाना है, हमें खेत से लेकर के एक्सपोर्ट मार्केट की ओर जाना होगा। हमारे पारंपरिक खान-पान हो, हमारे मिलेटस हों, हमारे मसाले हों, हमारे फल हों, फूल हों, क्या कुछ नहीं है हमारे पास। वह ग्लोबल ब्रांड्स बनने चाहिए, हमारे किसान केमिकल फ्री खेती को बल देंगे, दुनिया में इनकी मांग और बढ़ने वाली है और जो ग्लोबल parameters के अंदर हर प्रकार से सिद्ध होने वाले हमारे एग्रो प्रोडक्ट होंगे, तो उस दुनिया में हम आसानी से पहुंच पाएंगे। मेरी सप्तधारा की तीसरी शक्ति है टेक्नोलॉजी और इनोवेशन।
मेरे प्यारे देशवासियों,
आज जमाना AI का है, क्वांटम का है, स्पेस का है, रोबोटिक्स का है, डाटा सेंटर्स का है, पूरी तरह एक नया क्षेत्र खुल चुका है। और इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज यह भी हर पल हमें चुनौती दे रही हैं और इसलिए देश को दुनिया के लिए मार्केट नहीं बना देना, हमें इनोवेशन का हब बनना है। हमने यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में लोहा मनवा लिया है, हमारी ताकत का परिचय करवा दिया है। अब भारत को डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजीज़, उसको भी दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाना है। भारत को नेक्स्ट जनरेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में लीड करना है। मेड इन इंडिया 6G हर कोने में पहुंचे यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए और हमें इसमें तेजी करनी चाहिए और इसके लिए हमारा प्रयास कम नहीं होना चाहिए। सप्त धारा की चौथी शक्ति है, गति शक्ति। यह गति शक्ति, देश के अंदर सीमलेस फास्ट कनेक्टिविटी पर हमें बल देना होगा। शहरों को हाई स्पीड रेल से हमें जोड़ना होगा। मॉडर्न हाईवेज़ चाहिए, इनलैंड वाटरवेज़ चाहिए, एयरपोर्ट्स चाहिए, multimodel लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था चाहिए। हमें पोर्ट्स को सिर्फ सामान उतारने चढ़ाने की जगह नहीं, दुनिया के शिप्स आकर के लंगर हो जाए इतना नहीं, हमें हमारे पोर्ट्स को पोर्ट लेड डेवलपमेंट ग्रोथ की दिशा में हमें आगे बढ़ना होगा। हमारी पांचवी शक्ति है सप्त धारा की वो है रक्षा शक्ति। और यह रक्षा शक्ति का महत्व हर प्रकार से है।

मेरे प्यारे देशवासियों,
डिफेंस में आत्मनिर्भर होना, अब भारत ने अनुभव कर लिया है, दुनिया ने अनुभव कर लिया है, इसके बिना कोई चारा नहीं है। विश्व जब अपनी-अपनी ही सोच रहा है, तब भारत विश्व के लिए बाजार बनकर के नहीं रह सकता है। हमें डिफेंस के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना होगा। नेक्स्ट जनरेशन डिफेंस टेक्नोलॉजी डेवलप करके हमें ग्लोबल सप्लायर बनने की दिशा में हमें लक्ष्य लेकर के चलना है। हमें ड्रोन, काउंटर ड्रोन सिस्टम को विकसित करना होगा और हायपरसोनिक डिफेंस टेक्नोलॉजीज़, उस पर हमें लीडरशिप लेनी होगी।
साथियों,
साइबर सुरक्षा भी आज हर घर के लिए एक समस्या बन रही है। वह भी एक रक्षा का क्षेत्र है, जिसमें हमारे युवाओं के जो सामर्थ्य है, उस सामर्थ्य का उपयोग हम देश के और दुनिया के लिए कर सकते हैं। हमारी सप्त धारा की छठी शक्ति है- ग्रीन इकोनॉमी, ब्लू इकोनामी, जो ग्रीन जॉब्स को भी जन्म देती है। हमें ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन मोबिलिटी, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग इन ग्लोबल स्केल, हमें पाकर के रहना है। हमें दुनिया में, दुनिया जब ग्लोबल वार्मिंग की चर्चा करते रहती है, हम रास्ते खोजते रहते हैं, हम समस्याओं का समाधान दे रहे हैं और भारत यह ग्रीन मूवमेंट का बहुत बड़ा सामर्थ्य लेकर के चली है। भारत के पास ब्लू इकोनॉमी के लिए भी बहुत बड़ा अवसर है, बहुत बड़ा लंबा हमारा कोस्ट लाइन है, ब्लू इकोनॉमी के लिए बहुत बड़े अवसर हैं, फिशरीज हैं, कोस्टल टूरिज्म है, ओसियन टेक्नोलॉजी है, ऐसे कितने ही क्षेत्र हैं, जिसमें हम आगे बढ़ सकते हैं।
मेरे प्यारे देशवासियों,
भारत सप्त धारा की जब बात लेकर के चला है, तब हमारी सातवी धारा है और दुनिया के लिए इसका अपना भी एक महत्व है और वह है- भारत का सॉफ्ट पावर। भारत के सॉफ्ट पावर की ताकत है। आज योग ने पूरी दुनिया को भारत के साथ जोड़कर रखा हुआ है। योग दुनिया के लिए एक ऊर्जा बनता जा रहा है। भारत के लिए विश्वास का बड़ा कारण बनता जा रहा है। जिस भारत के पास आस्था के केंद्र हो, जिस भारत के पास आयुर्वेद हो, जिस प्रकार से भारत के पास होलिस्टिक हेल्थ केयर की व्यवस्था हो, हील इन इंडिया का मूवमेंट हो, हम दुनिया के अंदर हमारे सामर्थ्य को लेकर के जा सकते हैं। हैंडीक्राफ्ट हो, संस्कृति हो, हमारी फिल्में हो, हमारा क्रिएटिव वर्ल्ड हो, वीएफएक्स हो, हमारा एनीमेशन हो, हमारे गेमिंग हो, डिजिटल कंटेंट हो, क्रिएटिव वर्ल्ड के अंदर भारत अपना रुतबा दिखा सकता है। हमने उसको एक वैश्विक सामर्थ्य के रूप में विकसित करना होगा। आज भारत ने WAVES समिट को एक बहुत बड़ी ताकत दी है। दुनिया धीरे-धीरे भारत का यह जो वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट है, उसकी राह देखता रहता है और वह भारत के सॉफ्ट पावर को, भारत के क्रिएटिव दुनिया को दुनिया से परिचित कराएगा।
मेरे प्यारे देशवासियों,
भारत के पास विशाल वन्य संपदाएं हैं। हमारे पास 100 से ज्यादा नेशनल पार्क हैं। क्षमता बहुत है, लेकिन विदेशी टूरिस्टों को आकर्षित करने में हम कम पड़े हैं। हमें मौका है हमारे सॉफ्ट पावर के माध्यम से दुनिया के टूरिस्टों को भारत के लिए आकर्षित करने का, हमारा सामर्थ्य हमें दुनिया को दिखाना है। हम यह काम करें और हम जल्दी जल्द से जल्द हम इन लोगों को आज दुनिया में स्पोर्ट्स जो है, वो भी एक बहुत बड़ा भारत के प्रति आकर्षण का केंद्र, दुनिया के स्पोर्ट्स इवेंट भारत में क्यों ना हो। कॉन्सर्ट इकॉनमी बहुत बढ़ रही है, देश के नौजवानों का आकर्षण है। विश्व का हर कोई कलाकार चाहता है, कभी न कभी भारत की धरती पर अपना कॉन्सर्ट करे। यह बहुत बड़ा अवसर है, हमें इसको मोबिलाइज करने के लिए व्यवस्थाएं खड़ी करनी होंगी।
साथियों,
सप्तधारा की इस सात शक्तियां, सप्त शक्तियां उद्देश्य सिर्फ एक सेक्टर में प्रगति करने का नहीं है। एक होलिस्टिक एप्रोच के साथ हमें राष्ट्र को जो लक्ष्य लेकर के हम चल रहे हैं, जो एंबिशन लेकर के चल रहे हैं, उस स्केल को हमें पार करने की दिशा में काम करना है।

मेरे प्यारे देशवासियों,
कुछ चीजें मैंने बताई हैं, लेकिन मैं इससे भी आगे सोचता हूं। मैं जरा देश को झकझोरना चाहता हूं। मैं देश की शक्ति को भी झकझोरना चाहता हूं। देश यानी सिर्फ सरकार नहीं होती है, देश यानी हर नागरिक जुड़ता है। क्या हम सोच नहीं सकते कि Fortune 500 की चर्चा तो बहुत सुनते हैं। आने वाले एक दशक में इन Fortune 500 में 50 कंपनियां भारत की क्यों ना हो, यह लक्ष्य हमारा क्यों ना होना चाहिए। आज बैंकिंग सेक्टर फल फूल रहा है। दुनिया की टॉप बैंक के अंदर भारत की बैंक का झंडा भी क्यों ना फहरता हो। भारत की बैंक भी टॉप बैंक, पांच बैंक में भारत की भी एक बैंक होनी चाहिए। भारत की फार्मा, फार्मा की दिशा में हमने बहुत काम किया है। लेकिन समय की मांग है कि दुनिया की पांच बड़ी फार्मा कंपनियों में भारत की भी एक-दो फार्मा कंपनियों का नाम गूंजना चाहिए। भारत का उसमें अपना स्थान बनना चाहिए। लॉ फर्म्स होते हैं, रेटिंग एजेंसीज़ होती हैं। क्या समय की मांग नहीं है कि ग्लोबल लीडरशिप अब हमारे हाथ में होनी चाहिए। टैलेंट है, सामर्थ्य है, हमारा लंबा इतिहास भी है, भाषाओं पर हमारा प्रभुत्व है। हमें विश्व में पहुंचना चाहिए। हमारी कोई कंसल्टिंग फर्म, अकाउंटिंग फर्म, दुनिया के टॉप फर्म्स के अंदर क्यों नहीं होनी चाहिए। भारत की टेक्नोलॉजी कंपनियां दुनिया के अंदर सिरमौर हो, यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए। हमारे ऐसे ब्रांड हो, जिससे दुनिया आकर्षित होती हो। हमारे ब्रांड हमारे देश की पहचान हो और विश्व के लिए एक डेस्टिनेशन बन जाए, उस दिशा में हमें काम करना है। और इसके लिए मैं राज्य सरकारों को कहना चाहता हूं, मैं स्थानिक स्वराज की संस्थाओं को कहना चाहता हूं, भारत सरकार का भी यह दायित्व है कि हमें हमारे रिफॉर्म की गति बढ़ानी होगी। हमें 2047 के लक्ष्य के अनुरूप हमारी व्यवस्थाओं को विकसित करना होगा। हम बीते हुए काल के नीति नियमों से नहीं चल सकते। हमें आने वाले सपनों के हिसाब से नीति नियमों को गढ़ना होगा और इसको अगर हम गढ़ेगे, तो मुझे पूरा विश्वास है और मैं देशवासियों को भरोसा देता हूं। इसी रास्ते मेहनत में कोई कमी ना रखते हुए हम विकसित भारत का सपना पार करके रहेंगे। हम सबको मिलकर के चलना है। केंद्र सरकार हो, राज्य सरकार हो, इंडस्ट्री हो, हम सब ने मिलकर के आगे बढ़ना है। हमें रिफॉर्म्स करते रहना है। रिफॉर्म्स को आगे बढ़ाते रहना है। और मैंने पहले भी कहा था, हम रिफॉर्म कंपलशन से नहीं, कन्विक्शन से कर रहे हैं। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कर रहे हैं।
मेरे प्यारे देशवासियों,
जब मैं यह विकसित भारत की बात कर रहा हूं, देश को तेज गति से आगे बढ़ाने की बात कर रहा हूं, उसका सबसे बड़ा लाभार्थी कौन है, इन सारे प्रयासों का सबसे बड़ा साधक कौन है, अगर साधक है तो मेरे देश का युवा है, मेरे देश की युवा शक्ति है। विकसित भारत की यात्रा में युवाओं की बहुत बड़ी भूमिका है। इतना ही नहीं, विकसित भारत का सबसे बड़ा लाभार्थी भी मेरे देश का युवा है और इसलिए हमें विकसित भारत के लक्ष्य को युवाओं के साथ जोड़कर के आगे बढ़ाना है। युवाओं हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ हमें आगे बढ़ना है।
साथियों,
पिछले 10-12 साल में उस दिशा में बहुत कुछ हुआ है। स्टार्टअप इंडिया अभियान आज पूरे देश में ढाई लाख से ज्यादा registered स्टार्टअप्स बन गए हैं। देश के नौजवान, खुद तो काम कर रहे हैं, अनेकों को रोजगार दे रहे हैं। 1 लाख करोड़ रुपया, इनोवेशन फंड भारत सरकार ने घोषित किया है। मैं देश के नौजवानों को कहना चाहता हूं, आप अपने सपनों को लेकर के आइए, संसाधनों की कमी नहीं रहने देंगे। 1 लाख करोड़ रुपया, आपके दिल दिमाग को सामर्थ्य देने का एक व्यवस्था हमने कर दी है। रिसर्च के नए अवसर मिले, डिजिटल इंडिया के नए सस्ते डाटा, यह युवाओं को सशक्त किया है। दुनिया में सस्ता डाटा कहीं है, तो भारत की धरती पर है और देश के नौजवानों को उसने नई ताकत दी है। स्किल इंडिया हमने नेशनल प्रोग्राम बनाया है। स्पेस सेक्टर को हमने ओपन कर दिया। नेशनल ड्रोन पॉलिसी हमने बनाई है। खेलो इंडिया पॉलिसी बनाई है। 35 वर्षों तक एजुकेशन पॉलिसी नहीं थी, नई एजुकेशन पॉलिसी लेकर के आए हैं और इसका फायदा मिडिल क्लास के परिवारों को हुआ है।

साथियों,
2004 से 2014, आंकड़े मुझे देना चाहिए आपको। 2004 से 2014, हमारे देश में 350 से भी कम यूनिवर्सिटीज थी और आज 10-12 साल के भीतर-भीतर, करीब 650 नई यूनिवर्सिटीज जुड़ चुकी है। करीब 1000 का आंकड़ा हम पहुंच रहे हैं। 2014 के पहले मेडिकल की सिर्फ 400 सीटें हुआ करती थी, आज करीब-करीब 850 सीटें मेडिकल की हो रही है। इतना ही नहीं, अब विदेशी यूनिवर्सिटीज भी भारत की धरती पर आ रही है। भारत के अंदर विदेशी यूनिवर्सिटी की डिग्री मेरे नौजवान को मिले इसका प्रबंध भी हो चुका है। हमारे देश के युवा मन बचपन से ही टेक्नोलॉजी की तरफ आकर्षित हो, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं और इसलिए हमने करीब 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब छोटे-छोटे बच्चों के हवाले कर दी है, ताकि उनका इनोवेशन और टेक्नोलॉजी के अंदर उनका मन बने। हमने अनेक रास्ते खोले, हमने स्टार्टअप ओपन कर दिया। आपने देखा होगा, भारत के प्राइवेट स्टार्टअप 28 साल के एवरेज उम्र के बच्चों ने, नौजवानों ने, दुनिया में पहला, पहले ही ट्रायल में अपना सेटेलाइट लॉन्च कर दिया और रॉकेट लॉन्च कर दिया उन्होंने, बहुत बड़ा काम कर दिया।
साथियों,
आज करीब ढाई लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड स्टार्टअप हैं। हमने पिछले दिनों एआई इंपैक्ट समिट किया था। एआई का विस्तार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। लाल किले से मैं देश के नौजवानों के लिए घोषणा करना चाहता हूं। हमने तय किया है कि आने वाले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को एआई स्किल के लिए ट्रेनिंग देने का हम काम करेंगे ताकि हमारा देश का नौजवान एआई की दुनिया में भी नेतृत्व करने का सामर्थ्य हो।
मेरे साथियों,
बायोइकोनॉमी एक नया क्षेत्र है। एक समय था 2014 के पहले, सिर्फ 60,000 करोड़ रुपये का बायोइकोनमी का काम होता था। मेरे देश के नौजवान, आपने क्या कमाल कर दिया है। देखिए, नीतियां जब सही होती है, लक्ष्य जब साफ होता है, तो मेरे देश के नौजवान कैसा करके देते हैं। बायोइकोनॉमी में देश की युवा शक्ति ने सामर्थ्य दिखाया। 2014 के पहले जो 60 हजार करोड़ का कारोबार था, आज वो बायोइकोनॉमी 20 लाख करोड़ पहुंच चुकी है दोस्तों। 2009-10 का कालखंड था, सिर्फ 1.5 लाख डेढ़ लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल बिके थे, 2009-10 में डेढ़ लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल। इस 25-26 में 25 लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल बिके हैं।
मेरे प्यारे देशवासियों,
एविएशन सेक्टर भी मेरे नौजवानों के लिए बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। नए एयरपोर्ट, नए रूट, नए-नए रोजगार के अवसर बना रहे हैं। मेंटेनेंस, ओवरहालिंग, इसके भी कारण देश में बहुत बड़ी मात्रा में skilled मैन पावर को काम मिल रहा है। मेड इन इंडिया हवाई जहाज बनाने की दिशा में हमने सफलता पाई है। मेड इन इंडिया डिफेंस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट C295 ऑलरेडी अपनी उड़ान भर चुका है, सफल उड़ान भर चुका है। यह देश के नौजवानों के लिए, मेरे साथियों ड्रोन ने भी बहुत बड़ा काम किया है। स्वामित्व योजना गांव में ड्रोन से स्वामित्व योजना सफल हो रही है। करीब सवा तीन करोड़ परिवारों को स्वामित्व योजना का लाभ मिला है और इसके कारण 140 लाख करोड़ रुपये जैसी संपत्ति अनलॉक हुई है, जिसके कारण बैंक से लोन मिल सकता है, लोग अपना कारोबार कर सकते हैं।

मेरे प्यारे देशवासियों,
हमारे मध्यम वर्गीय परिवारों के सामने एक बहुत बड़ा बोझ बन चुका है कोचिंग क्लासिस की स्पर्धा, हर मां-बाप को लग रहा है कि कोचिंग क्लास में बच्चे को नहीं भेजा, तो हम प्रतिष्ठित परिवार नहीं हैं। इन गरीब और मिडिल क्लास परिवारों की हम चिंता करते हुए हजारों-करोड़ रुपए का उनका खर्च है, वो भी बचे, बेटे भी अपने आस पास रह सके, उनकी देखभाल हो सके, परिवार पर आर्थिक बोझ न आए और इसलिए हमने युवाओं के लिए विभिन्न परीक्षाओं की फ्री ऑनलाइन कोचिंग हमने करने का निर्णय किया है, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है, हमारे पास उत्तम टैलेंट है, टीचर्स हैं, उन संसाधनों को जोड़ करके हम देश के नौजवानों को फ्री कोचिंग देने का एक पूरा नेटवर्क हम खड़ा करने वाले हैं।
मेरे प्यारे देशवासियों,
मैं हमेशा कहता आया हूं, जो खेले, वह खिले। जब मैं खेले, वो खिले की बात कर रहा हूं, तब मेरे प्यारे देशवासियों, आज भारत खेल की दुनिया में अपनी जगह बना रहा है। अब खेल के पोडियम में भारत का राष्ट्रीय गीत सुनाई देता है, भारत का राष्ट्रगान सुनाई देता है, भारत का तिरंगा झंडा लहराता नजर आ रहा है। टॉप्स योजना ने बहुत बड़ी सफलता पाई है। खेलो इंडिया गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, विंटर गेम्स, बीच गेम्स, स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पोर्ट्स के लिए कोचिंग, स्पोर्ट्स मेडिसिन, स्पोर्ट्स के लिए न्यूट्रिशन, इन सारे विषयों में भारत अब महारत हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नौजवानों के लिए पूरा नया क्षेत्र खिलाड़ी ना बन सके, तो उसकी सपोर्ट सिस्टम में भी बहुत बड़ा क्षेत्र खुल रहा है। स्पोर्ट्स की दुनिया में भारत का प्रदर्शन बेहतर होता जा रहा है और हम 2036 में ओलंपिक के मजबूत दावेदार बनकर के आगे बढ़ रहे हैं, और 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स को भारत अब होस्ट करने वाला है।
और मेरे साथियों,
दुनिया में जो ओलंपिक के खेल होते हैं, करीब 40 प्रकार के गेम होते हैं और करीब 325-350 स्पर्धाएं होती हैं ओलंपिक में और आपको जानकर के दुख होगा मेरे देशवासियों। मेरे नौजवानों, मैं आपको चुनौती देता हूं, मैं आह्वान करता हूं, मैं आपकी मदद चाहता हूं, 325 जितने स्पर्धाओं में भारत दो तिहाई खेलों में कहीं होता ही नहीं है। हमारी मौजूदगी नहीं होती, हम क्वालीफाई नहीं होते हैं, हमने तय किया है कि 2036 में जो ओलंपिक होगा, हम चाहते हैं कि वो भारत में हो, लेकिन 2036 में जिन विधाओं में आज भारत खेलता नहीं है, जिन विधाओं में भारत क्वालीफाई नहीं करता है, जिन स्पर्धाओं में भारत ने छोड़ के रखा है, तीन चौथाई हिस्सा हमारे इंतजार कर रहा है, भारत उस पर बल देगा और इसके लिए हम टैलेंट हंट का एक अभियान भी चलाना चाहते हैं। हमें अगर 2036 के लिए खिलाड़ी चाहिए, तो आज जो 5 साल, 10 साल, 15 साल, की उम्र के यह नौजवान हैं, बेटे हैं, उनकी तरफ ध्यान देना होगा, उन बेटियों पर ध्यान देना होगा। और इसलिए 5 से 15 उम्र के बच्चों में खेल प्रतिभा ढूंढने के लिए गांव-गांव, शहर-शहर, स्कूल-स्कूल एक टैलेंट हंट का अभियान चलाया जाएगा, बच्चों की प्रतिभा को देखा जाएगा और फिर उनको स्पेशल ट्रेनिंग देकर के देश के लिए खेलने वाले अच्छे खिलाड़ी बनाए जाएंगे।
मेरे प्यारे युवा,
देश के सामने, देश के नौजवानों के सामने, नशा एक बहुत बड़ा संकट बनता जा रहा है। नशा मुक्त भारत, यह हम सबका सामूहिक दायित्व होना चाहिए। हमारे उज्ज्वल भविष्य के लिए हमारी युवा पीढ़ी मजबूत हो, हमारा युवा सामर्थ्य हमारे देश के लिए काम आए, इसलिए नशा मुक्त भारत, पिछले दिनों माय भारत के वालंटियर्स ने, देश के एनजीओस ने, देश के सामाजिक सांस्कृतिक संगठनों ने, देश के आध्यात्मिक पुरुषों ने मिलकर के नशा मुक्त भारत का 100 सप्ताह का एक कार्यक्रम तय किया है। 100 सप्ताह तक एक अभियान चलने वाला है। मैं हर परिवार को कहना चाहता हूं कि आप भी इस इस अभियान का हिस्सा बने, आप इसके साथ जुड़िए और देश के नशा मुक्त भारत के सपने को पूरा करने के लिए आप आगे आइए।
मेरे प्यारे देशवासियों,
21वीं सदी में दशकों पुरानी जो चुनौतियां है, उन चुनौतियों को खत्म करना बहुत अनिवार्य है। नक्सलवाद, माओवाद ने लाखों युवाओं के भविष्य को तबाह कर दिया। अनेक माताओं के दूधमल नौजवानों को छीन लिया, बर्बाद कर दिया, हर मां-बाप के सपनों को चूर-चूर कर दिया। इस नक्सलवाद ने चार-चार दशक तक हिंदुस्तान के बहुत बड़े हिस्से को, बहुत बड़ी आबादी को दबोच करके रखा था, बंदूक के नोक पर दबोच करके रखा था, संविधान की धज्जियां उड़ा दी थी और देश के सामान्य नागरिकों की रक्षा में 3500 से ज्यादा हमारी पुलिस के सुरक्षा बल के जवान शहीद हो गए। युद्ध के अंदर जितने सैनिक मरते हैं, उससे ज्यादा हमारे पुलिस जवानों को जान की बाजी लगानी पड़ी, ताकि देश के सामान्य मानवी को सुरक्षा मिले। इस नक्सलवाद ने धरती को लहूलुहान कर दिया था। 2014 में आपने जब हमें मौका दिया, उसी दिन हमने संकल्प लिया था कि हम देश को नक्सलवाद से मुक्त करेंगे और आज मुझे खुशी है कि नक्सली माओवादी हिंसा आखिरी सांस भी शायद रहने की अब तो ताकत नहीं रही है, पूरी तरह उसे खत्म करने की दिशा में, जहां पर कभी नक्सलवादियों की गोलियां चलती थी, जहां पर कभी धरती रक्त रंजित रहा करती थी, आज उसी नक्सल क्षेत्रों में, उसी इलाकों में, नक्सल मुक्त होने के कारण विकास, विश्वास और प्रयास का तिरंगा लहरा रहा है।

मेरे प्यारे देशवासियों,
लेकिन इस चुनौती को हमने कम नहीं आंकना है। इस चुनौती से हमें और भी सावधान रहने की जरूरत है। वर्षों तक देश की सत्ता में माओवादी सोच के लोग गलियारों में अपनी जगह बनाकर के बैठे थे। सरकारी कमेटियों में सलाहकार के रूप में भी ये माओवादी सोच ने नीतियों को प्रभावित किया था।
मेरे प्यारे देशवासियों,
जंगलों में हमें हथियारी नक्सलों का खात्मा बुलाने में उस संकट से देश को मुक्त कराने में सफलता मिली है। लेकिन हथियारी नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल, यह दिमागी नक्सल मौके की तलाश में है। हिंसा अराजकता के वो रास्ते खोज रहे हैं। समाज को गलत राह पर घसीटने के लिए भांति-भांति के दांव कर रहे हैं। इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा। इन दिमागी नक्सलियों को आइसोलेट करना होगा और राष्ट्र को विकसित राष्ट्र बनाने की मुख्यधारा की ओर देश की युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा।
मेरे प्यारे देशवासियों,
सुरक्षित भारत बनाना हम सबका दायित्व है। चुनौती सीमा के भीतर हो या सरहद से बाहर भारत हर परिस्थिति के लिए तैयार है। आज युद्ध का नेचर बदल रहा है। अब युद्ध सीमा पर ही होता है यह गारंटी नहीं है। आज युद्ध सीमा के अंदर कहीं रिफाइनरी में जा करके, कहीं बैंकिंग सेक्टर को जाकर के, कहीं डाटा सेंटर को जाकर के, एक प्रकार से लड़ाई का नया रूप इंफ्रास्ट्रक्चर तोड़े जा रहे हैं, फैक्ट्रियां तोड़ी जा रही हैं। हमने मिशन सुदर्शन चक्र की पिछले सालों घोषणा की थी। बहुत तेजी से उस पर काम चल रहा है। आज डिफेंस एक्सपोर्ट हमारा करीब 50 गुना बढ़ा है। करीब 100 देशों में हमारे अस्त्र-शस्त्र पहुंच रहे हैं। वैश्विक पटल पर भारत की प्रतिष्ठा धीरे-धीरे बढ़ रही है। बदलते हुए समय में अस्त्र-शस्त्र की तरफ काम करना है, सैन्य बलों का सामर्थ्य बढ़ाना है। लेकिन साथ-साथ नागरिकों को भी तैयार करना होगा। पिछली शताब्दी के युद्धों के अनुरूप जो सिविल डिफेंस की व्यवस्थाएं हमारे देश में विकसित हुई है, वो कालबाह्य हो चुकी है और इसलिए मैं आज लाल किले से घोषणा कर रहा हूं कि, हम आने वाले दिनों में सिविल डिफेंस का एक वाइब्रेंट नेटवर्क खड़ा करेंगे। आधुनिक व्यवस्थाओं से उनको परिचित कराएंगे। आधुनिक संकटों से नागरिकों को रक्षा करने की क्या व्यवस्था हो सकती है, एक बहुत बड़ा वॉलंटरी फोर्स सिविल डिफेंस का आधुनिक चुनौतियों को पार करने वाला हम बनाने वाले हैं।
मेरे प्यारे देशवासियों,
राष्ट्र के निर्माण में आज हमारी बहनों बेटियों का योगदान हम सबके लिए बहुत बड़ा प्रेरणा का कारण बना हुआ है। फाइटर जेट हो या सिविल एविएशन, हमारी बेटियां सबसे आगे दिखाई दे रही हैं। खेल कूद का मैदान हो, हमारी बेटियां आगे दिखाई दे रहीं हैं। स्टेम एजुकेशन में भर्ती होने की प्रक्रिया हो सबसे ज्यादा हमारी बेटियां आगे दिख रही हैं। आज सेना में भी एनडीए से जो बेटियां निकली हैं वो बड़े रौब के साथ देश की सेना का नेतृत्व करने का सामर्थ्य दिखाने लगी है। मेरी बेटियों की ताकत कैसी है, मैं पिछले दिनों सानंद में एक सेमीकंडक्टर प्लांट में गया था, वहां आदिवासी बेटियां देश के अलग-अलग कोने से आई हुई बेटियां काम कर रही थी। वो उस गांव से आई थी जिन्होंने पासपोर्ट क्या होता है पता तक नहीं था। वो बेटियां विदेशों में गईं, ट्रेनिंग लेकर के आईं और आज चीप निर्माण का काम कर रही हैं और बड़े कॉन्फिडेंस, मैंने जो उनका कॉन्फिडेंस देखा, मैं सचमुच में बहुत प्रभावित हुआ था। आज तीन 3 करोड़ बहनों को हमने लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य तय किया था, उसको पार कर लिया। अब हम 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य को लेकर के आगे बढ़ रहे हैं। 3 करोड़ नई लखपति दीदी बनना मतलब ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा बदलाव मातृशक्ति के द्वारा आने वाला है।
मेरे प्यारे देशवासियों,
आज पंचायतों में, नगर पालिका में, महानगर पालिका में, बहुत बड़ी मात्रा में हमारी महिलाएं जनप्रतिनिधि बनकर के देश का मार्गदर्शन कर रही हैं, समस्याओं का समाधान कर रही हैं, बहुत ही सक्षम नेतृत्व दे रही हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए हमने पार्लियामेंट में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। लेकिन किसी न किसी कारण से राजनीति के अखाड़े में पिछले 40 साल से यह सपना हमेशा राजनीतिक अखाड़े का शिकार हो गया है। मैं देश के सभी राजनीतिक दलों से आज लाल किले की प्राचीर से तिरंगे झंडे की छाया में खड़े होकर के प्रार्थना करता हूं, आग्रह करता हूं। आइए, उन महिलाओं के सामर्थ्य के पुजारी बनिए। उन महिलाओं के सम्मान में आगे आइए और जल्द से जल्द हमारी माताओं-बहनों को 33% विधानसभा और लोकसभा में उनको प्रतिनिधित्व मिले, वह भारत की नीति गढ़ करके अंदर अपना योगदान दें। समय की मांग है और मैं सभी राजनीतिक दलों से फिर से आग्रह करता हूं, आइए महिला आरक्षण लागू करके महिला सम्मान में आप भी जुड़िए, आप भी यश लीजिए, आप भी क्रेडिट लीजिए, लेकिन मेरी माताओं-बहनों को हक दीजिए।

मेरे प्यारे देशवासियों,
विकसित भारत का संकल्प तभी पूरा होगा, जब विकास अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। 2014 से पहले सिर्फ 25 करोड़ लोगों के पास सोशल सिक्योरिटी का कवर था, सिर्फ 25 करोड़ के पास।
साथियों,
पिछले 5-7 दशक में सिर्फ 25 करोड़, हमने एक दशक के भीतर-भीतर 100 करोड़ देशवासियों को सोशल सिक्योरिटी का कवच दिया है। आयुष्मान भारत योजना से 70 साल की उम्र के बुजुर्गों से भी आज 5 लाख रुपये तक मुफ्त दवाई की व्यवस्था हो रही है। करोड़ों-करोड़ों परिवारों को इसके कारण बहुत बड़ी सुविधा मिली है और इस आयुष्मान कार्ड के कारण 2 लाख करोड़ रुपया जो दवाई और ऑपरेशन के पीछे खर्च होना था, वो मेरे परिवारों के बचे हैं, वो गरीब परिवार हैं, वो मध्यम वर्ग के परिवार हैं, उनको इतनी बड़ी मदद मिली है!
मेरे प्यारे देशवासियों,
आज मुझे एक काम के लिए आपकी मदद चाहिए। मैं आप सबसे एक मदद मांग रहा हूं। सभी नौजवानों से मैं चाहता हूं कि आप इसका नेतृत्व करिए। आपका एक या दो घंटे देश को बहुत बड़ी शक्ति देने वाले हैं। आपको लगेगा एक दो घंटे में मैं देश की क्या शक्ति, मैं बताता हूं। आप बहुत बड़ी शक्ति बनने वाले हैं और इसलिए हर घर में वातावरण बने। इन दिनों देश में जनगणना का काम हो रहा है। Census का काम हो रहा है, गिनती चल रही है और गिनती सिर्फ आंकड़ों से बात बनती नहीं है। उसकी बारीकियों से नीतियां बनती हैं, योजनाएं बनती हैं, देश आगे बढ़ने की अपनी रूपरेखा तैयार करता है और इसलिए सटीक जानकारियां होना बहुत जरूरी है। कभी-कभी जो सरकार की तरफ से प्रतिनिधि आते हैं, वो इतनी जल्दी में होते हैं, कभी स्पेलिंग एक लिख देते हैं, कभी अलग लिख देते हैं और इसके कारण अल्टीमेटली परिणाम हमें सही मिलने में दिक्कतें आती है। अब जब टेक्नोलॉजी अवेलेबल है और इस बार निर्णय किया है आप स्वयं भी जनगणना में अपनी जानकारियां अपने मोबाइल फोन से भरकर के दे सकते हैं। बाद में कोई बाबू आएंगे, कोई प्रतिनिधि आएंगे, आपसे चर्चा करेंगे, लेकिन आप परिवार के सब बैठकर के अगर डिजिटली अपना रजिस्ट्री करवा दें, सारी बारीकियां स्पेलिंग में भी गलती ना हो, कोई भी जानकारियों में गलती ना हो, आप जितनी परफेक्ट जानकारी देंगे, देश को आगे बढ़ने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी और इसलिए मैं देश के नौजवानों को कहता हूं कि आप अपने परिवार के लोगों को बिठा करके पूरे फॉर्म को समझिए। पहले कागज पर फॉर्म को भर दीजिए, कोई गलती है, तो करेक्ट कर लीजिए और फिर टेक्नोलॉजिकली उसको डिजिटली, इसको अपलोड कर दीजिए। आप देखिए, इतना बड़ा काम देश कर लेगा और देश का समय और शक्ति सही काम के लिए उपयोग आएगा और इसलिए मेरे देश के नौजवानों को जनगणना के इस काम में सक्रियता से जुड़ने के लिए मैं आग्रह करता हूं।
मेरे प्यारे देश सेवक,
मैंने लाल किले से पंचप्रण की बात कही थी। इस पंच प्रण ने देश को अपने आत्म गौरव की ओर लेकर के आगे बढ़ने का, लक्ष्यों को पार करने के सामर्थ्य के साथ आगे बढ़ने का एक बहुत बड़ा संबल दिया है। हमें गुलामी की मानसिकता हर पल मिटाते ही रहना है। जिस भारत का सपना नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देखा था, बाबा साहब आंबेडकर ने देखा था, पंडित नेहरू ने देखा था, सरदार पटेल, भगत सिंह, सुखदेव राजगुरु ने देखा था, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देखा था, भगवान बिरसा मुंडा ने देखा था, ज्योतिबा फुले ने देखा था, उन सब से प्रेरणा लेकर के हम आगे बढ़े। आइए इस संकल्प को हम दोहराए। स्वयं से ऊपर राष्ट्र का हित हो। स्वयं से ऊपर राष्ट्र का हित हो और कर्तव्य ही हमारी पहचान हो। मैं सभी देशवासियों से कहूंगा समय हमारा है, मैं सभी देशवासियों से कहूंगा समय हमारा है, अवसर हमारा है, संकल्प हमारा है, आइए सपनों को संकल्प बनाएं, संकल्प को सामर्थ्य बनाएं और सामर्थ्य को सफलता में बदल के रहें। आइए हर कदम को विकास का कदम बनाएं, कदम से कदम मिलाएं, मन से मन मिलाए, लक्ष्य से जुड़े रहे, एक दीप से जले दीप हजारों, आओ मिलकर विकसित भारत बनाएं। इसी एक भावना के साथ इस मंगल पर्व पर आप सबको अनेक-अनेक शुभकामनाएं।
मेरे साथ बोलिए
भारत माता की जय!
भारत माता की जय!
भारत माता की जय!
वंदे मातरम!
वंदे मातरम!
वंदे मातरम!
बहुत-बहुत धन्यवाद!


