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North east is moving towards development with Assam in the centre of it: PM Modi
Till 2016, Assam had only six medical colleges, but in the last five years we have begun development on six new medical colleges: PM
People who are conspiring to defame India have stooped so low that they are not sparing even Indian tea: PM

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

 

असम के जनप्रिय मुख्यमंत्री श्री सर्बानन्द सोनोवाल जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी श्री रामेश्वर तेली जी, असम सरकार में मंत्री श्रीमान हेमंता बिस्वा सरमा जी, श्री अतुल बोरा जी, श्री केशब महंता जी, श्री रंजीत दत्ता जी, बोडोलैंड टैरिटोरियल रीजन के चीफ श्री प्रमोद बोरो जी, अन्य सभी सांसदगण, विधायकगण, और मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

 

मौर भाई बहिन सब, तहनिदेर कि खबर, भालइ तौ? खुलुमबाय। नोंथामोंनहा माबोरै दं? पिछले महीने मैं असम में आकर के गरीब, पीड़ित शोषित, वंचित समाज के लोगों को जमीन के पट्टों के वितरण के कार्यक्रम का हिस्सा बनकर के मुझे एक सौभाग्य मिला था। तब मैंने कहा था कि असम के लोगों का स्नेह और आपका प्रेम इतना गहरा है, कि वो मुझे बार-बार असम ले आता है। अब एक बार फिर मैं आप सबको प्रणाम करने आया हूं। आप सबके दर्शन करने के लिए आया हूं। मैंने कल सोशल मीडिया पर देखा, फिर मैंने ट्वीट भी किया कि ढेक्याजुली को कितनी सुंदरता से सजाया गया है। इतने दीप आप लोगों ने प्रज्वलित किए। इस अपनेपन के लिए मैं असम की जनता के चरणों में प्रणाम करता हूँ। मैं असम के मुख्यमंत्री सर्बानन्द जी, हेमंता जी, रंजीत दत्ता जी, सरकार में और भाजपा संगठन में बैठे हुए, हर किसी की सराहना करूंगा। वो इतनी तेज गति से असम के विकास में, असम की सेवा में लगे हैं कि मुझे लगातार यहाँ विकास के कार्यक्रमों में आने का अवसर मिलता रहा है। आज का दिन तो मेरे लिए एक और वजह से बहुत ख़ास है! आज मुझे सोनितपुर- ढेक्याजुली की इस पवित्र धरती को प्रणाम करने का अवसर मिला है। ये वही धरती है जहां रुद्रपद मंदिर के पास असम का सदियों पुराना इतिहास हमारे सामने आया था। ये वही धरती है जहां असम के लोगों ने आक्रमणकारियों को हराया था, अपनी एकता, अपनी शक्ति, अपने शौर्य का परिचय दिया था। 1942 में इसी धरती पर असम के स्वाधीनता सेनानियों ने देश की आज़ादी के लिए, तिरंगे के सम्मान के लिए अपना बलिदान दिया था। हमारे इन्हीं शहीदों के पराक्रम पर भूपेन हजारिका जी कहते थे-

भारत हिंहह आजि जाग्रत हय।

प्रति रक्त बिन्दुते,

हहस्र श्वहीदर

हाहत प्रतिज्ञाओ उज्वल हय।

यानी, आज भारत के शेर जाग रहे हैं। इन शहीदों के खून की एक एक बूंद, उनका साहस हमारे संकल्पों को मजबूत करता है। इसलिए, शहीदों के शौर्य की साक्षी सोनितपुर की ये धरती, असम का ये अतीत, बार-बार मेरे मन को असमिया गौरव से भर रहे हैं।

साथियों,

हम सब हमेशा से ये सुनते आए हैं, देखते आए हैं कि देश की पहली सुबह पूर्वोत्तर से होती है। लेकिन सच्चाई ये भी है कि पूर्वोत्तर और असम में विकास की सुबह को एक लंबा इंतज़ार करना पड़ा है। हिंसा, अभाव, तनाव, भेदभाव, पक्षपात, संघर्ष, इन सारी बातों को पीछे छोड़कर अब पूरा नॉर्थ ईस्ट विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। और असम इसमें प्रमुख भूमिका निभा रहा है। ऐतिहासिक बोडो शांति समझौते के बाद हाल ही में बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल के चुनावों ने यहां विकास और विश्वास का नया अध्याय लिख दिया है। आज का दिन भी असम के भाग्य और असम के भविष्य में इस बड़े बदलाव का साक्षी है। आज एक ओर बिश्वनाथ और चरईदेव में दो मेडिकल कॉलेजों का उपहार असम को मिल रहा है, तो वहीं ‘असम माला’ के जरिए आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की नींव भी पड़ी है।

अखमर बिकाखर जात्रात आजि एक उल्लेखजोग्य़ दिन। एइ बिखेख दिनटोत मइ अखमबाखीक आन्तरिक अभिनन्दन जनाइछोँ।

साथियों,

एकजुट प्रयासों से, एकजुट संकल्पों से कैसे परिणाम आते हैं, असम इसका एक बड़ा उदाहरण है। आपको पाँच साल पहले का वो समय याद होगा, जब असम के ज़्यादातर दूरदराज इलाकों में अच्छे हॉस्पिटल केवल सपना होते थे। अच्छे हॉस्पिटल, अच्छे इलाज का मतलब होता था घंटों की यात्रा, घंटों का इंतज़ार और लगातार अनगिनत कठिनाईयां! मुझे असम के लोगों ने बताया है कि, उन्हें हमेशा यही चिंता रहती थी कि कोई मेडिकल इमरजेंसी न आ जाए! लेकिन ये समस्याएँ अब तेजी से समाधान की ओर आगे बढ़ रही हैं। आप इस फर्क को आसानी से देख सकते हैं, महसूस कर सकते हैं। आज़ादी के बाद से 7 दशकों में, यानी 2016 तक असम में केवल 6 मेडिकल कॉलेज होते थे। लेकिन इन 5 सालों में ही असम में 6 और मेडिकल कॉलेज बनाने का काम शुरू किया जा चुका है। आज उत्तरी असम और अपर असम की जरूरतों को देखते हुए बिस्वनाथ और चरईदेव में दो और मेडिकल कॉलेजों का शिलान्यास हो गया है। ये मेडिकल कॉलेज अपने आप में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के केंद्र तो बनेंगे ही, साथ ही अगले कुछ सालों में यहाँ से ही मेरे हजारों नौजवान डॉक्टर बनकर के निकलेंगे। आप देखिए, 2016 तक असम में कुल MBBS सीट्स करीब सवा सात सौ ही थीं। लेकिन ये नए मेडिकल कॉलेज जैसे ही शुरू होंगे, असम को हर साल 16 सौ नए MBBS डॉक्टर्स मिलने लगेंगे। और मेरा तो एक ओर सपना है। बड़ा साहसपूर्ण सपना लगता होगा लेकिन मेरे देश के गावं में, मेरे देश के गरीब के घर में टैलेंट की कोई कमी नही होती है। उन्हें अवसर नहीं मिला होता है। आजाद भारत जब अब 75 में प्रवेश कर रहा है। तो मेरा एक सपना है। हर राज्य में कम से कम एक मैडिकल कॉलेज, कम से कम एक टैक्निकल कॉलेज, वो मातृ भाषा में पढ़ाना शुरू करें। क्या असमिया भाषा में पढ़कर के कोई अच्छा डॉक्टर नहीं बन सकता है क्या? आजादी के 75 साल होने आए और इसलिए चुनाव के बाद जब नई सरकार बनेगी असम में, मैं यहा असम के लागों की तरफ से आपको वादा करता हूं। कि असम में भी एक मैडिकल कॉलेज स्थानीय भाषा में हम शुरू करेंगे। एक टैक्निकल कॉलेज स्थानीय भाषा में शुरू करेंगे। और धीरे - धीरे ये बढ़ेगा। कोई रोक नहीं पाएगा उसको। ये डॉक्टर्स असम के अलग अलग क्षेत्रों में, दूर दराज इलाकों में अपनी सेवाएँ देंगे। इससे भी इलाज में सुविधा होगी, लोगों को इलाज के लिए बहुत दूर नहीं जाना होगा।

साथियों,

आज गुवाहाटी में एम्स का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसका काम अगले डेढ़ दो सालों में पूरा भी हो जाएगा। एम्स के वर्तमान कैम्पस में इसी अकैडमिक सत्र से MBBS का पहला बैच शुरू भी हो गया है। जैसे ही अगले कुछ सालों में इसका नया कैम्पस तैयार होगा, आप देखेंगे गुवाहाटी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के केंद्र के तौर पर उभरकर के सामने आयेगा। एम्स गुवाहाटी केवल असम ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर के जीवन में एक बड़ा परिवर्तन करने वाला है। आज जब मैं एम्स की बात कर रहा हूं, तो एक सवाल आपके बीच पूछना चाहता हूं। देश की पिछली सरकारें ये क्यों नहीं समझ पाईं कि गुवाहाटी में ही एम्स होगा तो आप लोगों को कितना लाभ होगा। वो लोग पूर्वोत्तर से इतना दूर थे कि आपकी तकलीफें कभी समझ ही नहीं पाए।

साथियों,

आज केंद्र सरकार द्वारा असम के विकास के लिए पूरी निष्ठा से काम किया जा रहा है। असम भी देश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रहा है। आयुष्मान भारत योजना हो, जनऔषधि केंद्र हों, प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस प्रोग्राम हो, या हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स हों, सामान्य मानवी के जीवन में जो बदलाव आज पूरा देश देख रहा है, वही बदलाव, वही सुधार असम में भी दिख रहे हैं। आज असम में आयुष्मान भारत योजना का लाभ करीब सवा करोड़ गरीबों को मिल रहा है। मुझे बताया गया है कि असम के साढ़े 3 सौ से ज्यादा अस्पताल इस योजना से जुड़ चुके हैं। इतने कम समय में असम के डेढ़ लाख गरीब आयुष्मान भारत के तहत अपना मुफ्त इलाज करवा चुके हैं। इन सभी योजनाओं से असम के गरीबों के सैकड़ों करोड़ रुपए इलाज पर खर्च होने से बचे हैं। गरीब का पैसा बचा है। आयुष्मान भारत योजना के साथ ही लोगों को असम सरकार के ‘अटल अमृत अभियान’ से भी फायदा हो रहा है। इस योजना में गरीबों के साथ ही सामान्य वर्ग के नागरिकों को भी बेहद कम किस्त पर स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जा रहा है। इसके साथ ही असम के कोने कोने में हैल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स भी खोले जा रहे हैं, जो गाँव गरीब के प्राथमिक स्वास्थ्य की चिंता कर रहे हैं। मुझे बताया गया है कि इन सेंटर्स पर अब तक 55 लाख से ज्यादा असम के भाई - बहनों ने अपना शुरुआती इलाज कराया है।

साथियों,

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर संवेदनशीलता और आधुनिक सुविधाओं के महत्व को कोरोनाकाल में देश ने बखूबी महसूस किया है। देश ने कोरोना से जिस तरह से लड़ाई लड़ी है, जितने प्रभावी तरीके से भारत अपना वैक्सीन प्रोग्राम चला रहा है, उसकी तारीफ आज पूरी दुनिया कर रही है। कोरोना से सबक लेते हुए देश ने हर देशवासी के जीवन को सुरक्षित और आसान बनाने के लिए और तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। इसकी झलक आपने इस बार के बजट में भी देखी है। बजट में इस बार स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी की गई है। सरकार ने ये भी तय किया है कि अब देश के 6 सौ से ज्यादा जिलों में इंटीग्रटेड लैब्स बनाई जाएंगी। इसका बहुत बड़ा फायदा छोटे कस्बों और गांवों के लोगों को होगा जिन्हें मेडिकल टेस्ट के लिए दूर जाना पड़ता है।

साथियों,

असम की खुशहाली, यहाँ की प्रगति का एक बहुत बड़ा केंद्र असम के चाय बागान भी हैं। सोनितपुर की लाल चाय तो वैसे भी अपने अलग फ्लेवर के लिए जानी जाती है। सोनितपुर और असम की चाय का स्वाद कितना खास होता है, ये मुझसे बेहतर भला कौन जानेगा? इसलिए मैं हमेशा से चाय वर्कर्स की प्रगति को पूरे असम की प्रगति से जोड़कर के ही देखता हूँ। मुझे खुशी है कि इस दिशा में असम सरकार कई सकारात्मक प्रयास कर रही है। अभी कल ही असम चाह बगीचा धन पुरस्कार मेला स्कीम के तहत असम के साढ़े सात लाख टी गार्डेन वर्कर्स के बैंक खातों में करोड़ों रुपए सीधे ट्रांसफर किए गए हैं। टी गार्डेन्स में काम करने वाली गर्भवती महिलाओं को एक विशेष योजना के तहत सीधे मदद दी जा रही है, टी वर्कर्स और उनके परिवार के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए, जांच और इलाज के लिए टी गार्डेन्स में ही मोबाइल मेडिकल यूनिट भी भेजी जाती हैं, मुफ्त दवाओं का भी इंतजाम किया जाता है। असम सरकार के इन्हीं प्रयासों से जुड़कर इस बार देश के बजट में भी चाय बागान में काम करने वाले हमारे भाइयों और बहनों के लिए एक हजार करोड़ रुपए की विशेष योजना की घोषणा की गई है। टी वर्कर के लिए एक हजार करोड़ रुपये। ये पैसा आपको मिलने वाली सुविधाओं को बढ़ाएगा, हमारे टी वर्कर्स का जीवन और आसान बनाएगा।

 

साथियों,

 

आज जब मैं असम के टी वर्कर्स की बात कर रहा हूँ, तो मैं इन दिनों देश के खिलाफ चल रहे षड्यंत्रों की भी बात करना चाहता हूँ। आज देश को बदनाम करने के लिए साजिश रचने वाले इस स्तर तक पहुँच गए हैं कि, भारत की चाय को भी नहीं छोड़ रहे। आपने खबरों में सुना होगा, ये साज़िश करने वाले कह रहे हैं कि भारत की चाय की छवि को बदनाम करना है। योजनाबद्ध तरीके से। भारत की चाय की छवि को दुनियाभर में बदनाम करना है। कुछ दस्तावेज सामने आए हैं जिनसे खुलासा होता है कि विदेश में बैठी कुछ ताकतें, चाय के साथ भारत की जो पहचान जुड़ी है, उस पर हमला करने की फिराक में हैं। क्या आपको ये हमला मंजूर है? इस हमले के बाद चुप रहने वाले लोग मंजूर हैं आपको? हमले करने वाले की तारीफ करने वाले मंजूर हैं क्या आपको? हर किसी को जवाब देना पड़ेगा। जिन्होनें हिन्दुस्तान की चाय को बदनाम करने का बीड़ा उठाया है। और उनके लिए यहां जो चुप बैठे हैं, ये सभी राजनीतिक दलों को हर चाय बागान जवाब मांगेगा। हिन्दुस्तान की चाय पीने वाला हर इंसान जवाब मांगेगा। मैं असम की धरती से इन षड्यंत्रकारियों से कहना चाहता हूँ, ये जितने मर्जी षड्यंत्र कर लें, देश इनके नापाक मंसूबों को कामयाब नहीं होने देगा। मेरा टी वर्कर इस लड़ाई का जीतकर रहेगा। भारत की चाय पर किए जा रहे इन हमलों में इतनी ताकत नहीं है कि वो हमारे टी गार्डेन वर्कर्स के परिश्रम का मुक़ाबला कर सकें। देश इसी तरह विकास और प्रगति के रास्ते पर बढ़ता रहेगा। असम इसी तरह विकास की नई नई ऊंचाइयों को छूता रहेगा। असम के विकास का ये पहिया इसी तेज गति से घूमता रहेगा।

साथियों,

आज जब असम में हर क्षेत्र में इतना काम हो रहा है, हर वर्ग और हर क्षेत्र का विकास हो रहा है, तो ये भी जरूरी है कि असम का सामर्थ्य और बढ़े। असम के सामर्थ्य को बढ़ाने में यहां की आधुनिक सड़कों और इन्फ्रास्ट्रक्चर की बड़ी भूमिका है। इसी को ध्यान में रखते हुये आज ‘भारत माला प्रोजेक्ट’ की तर्ज पर असम के लिए ‘असम माला’ की शुरुआत की गई है। अगले 15 सालों में असम में चौड़े हाइवेज का जाल हो, यहाँ के सभी गाँव मुख्य सड़कों से जुड़ें, यहाँ की सड़कें देश के बड़े शहरों की तरह आधुनिक हों, असम माला प्रोजेक्ट आपके सपनों को पूरा करेगा, आपका सामर्थ्य बढ़ाएगा। पिछले कुछ सालों में ही असम में हजारों किमी सड़कें बनाई गई हैं, नए - नए पुल बनाए गए हैं। आज भूपेन हजारिका ब्रिज और सरायघाट ब्रिज असम की आधुनिक पहचान का हिस्सा बन रहे हैं। आने वाले दिनों में ये काम और भी तेज होने वाला है। विकास और प्रगति की गति को बढ़ाने के लिए इस बार बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अभूतपूर्व ज़ोर दिया गया है। एक तरफ आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर पर काम तो दूसरी तरफ ‘असम माला’ जैसे प्रोजेक्ट्स से कनेक्टिविटी बढ़ाने के काम, आप कल्पना करिए, आने वाले दिनों में असम में कितना काम होने वाला है, और इस काम में कितने युवाओं को रोजगार मिलने वाला है। जब हाइवेज़ बेहतर होंगे, कनेक्टिविटी बेहतर होगी, तो व्यापार और उद्योग भी बढ़ेंगे, पर्यटन भी बढ़ेगा। इससे भी हमारे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे, असम के विकास को नई गति मिलेगी।

 

साथियों,

 

असम के प्रसिद्ध कवि रूपकुंवर ज्योति प्रसाद अग्रवाल की पंक्तियाँ हैं-

मेरी नया भारत की,

नया छवि,

जागा रे,

जागा रे,

आज इन्हीं पंक्तियों को साकार करके हमें नए भारत को जगाना है। ये नया भारत आत्मनिर्भर भारत होगा, ये नया भारत, असम को विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचाएगा। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, आप सबको बहुत बहुत धन्यवाद! बहुत – बहुत शुभकामनाएं। मेरे साथ दोनों मुटठी बंद करके पूरी ताकत से बोलिए, भारत माता की – जय। भारत माता की – जय। भारत माता की – जय। भारत माता की – जय। बहुत - बहुत धन्यवाद।

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