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श्री नरेंद्र मोदी ने 30 मई 2019 को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली, जो उनके दूसरे कार्यकाल की शुरुआत थी। आजादी के बाद पैदा होने वाले पहले प्रधानमंत्री, श्री मोदी ने पहले 2014 से 2019 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला है। उन्होंने अक्टूबर 2001 से मई 2014 तक लंबे समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपना पद संभाला है।

2014 और 2019 के संसदीय चुनावों में श्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने दोनों अवसरों पर पूर्ण बहुमत हासिल किया। आखिरी बार 1984 के चुनावों में किसी राजनीतिक दल ने पूर्ण बहुमत हासिल किया था।

‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विकास’ के आदर्श वाक्य से प्रेरित होकर, श्री मोदी ने शासन व्यवस्था में एक ऐसे बदलाव की शुरुआत की और समावेशी, विकासोन्मुख और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन का नेतृत्व किया। प्रधानमंत्री ने अंत्योदय के उद्देश्य को साकार करने और समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को सरकार की योजनाओं और पहल का लाभ मिले यह सुनिश्चित करने के लिए स्पीड और स्केल पर काम किया है।

विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने इस बात को माना कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत रिकॉर्ड गति से गरीबी को खत्म कर रहा है। इसका श्रेय केंद्र सरकार द्वारा गरीबों के हित को ध्यान में रखते हुए लिए गए विभिन्न फैसलों को जाता है।

आज भारत दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम आयुष्मान भारत का नेतृत्व कर रहा है। 50 करोड़ से अधिक भारतीयों को कवर करते हुए आयुष्मान भारत गरीब और नव-मध्यम वर्ग को उच्च गुणवत्ता और सस्ती स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित कर रहा है।

दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित स्वास्थ्य पत्रिकाओं में से एक लांसेट ने आयुष्मान भारत की सराहना करते हुए कहा है कि यह योजना भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े असंतोष को दूर कर रही है। पत्रिका ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को प्राथमिकता देने के लिए पीएम मोदी के प्रयासों की भी सराहना की।

देश की वित्तीय धारा से दूर गरीबों को वित्तीय धारा में लाने के लिए प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री जन धन योजना शुरू की, जिसका उद्देश्य प्रत्येक भारतीय का बैंक खाते खोलना था। अब तक 35 करोड़ से अधिक जन धन खाते खोले जा चुके हैं। इन खातों ने न केवल गरीबों को बैंक से जोड़ा, बल्कि सशक्तीकरण के अन्य रास्ते भी खोले हैं।

जन-धन से एक कदम आगे बढ़ते हुए श्री मोदी ने समाज के सबसे कमजोर वर्गों को बीमा और पेंशन कवर देकर जन सुरक्षा पर जोर दिया। JAM ट्रिनिटी (जन धन- आधार- मोबाइल) ने बिचौलियों को समाप्त कर दिया है और प्रौद्योगिकी के माध्यम से पारदर्शिता और गति सुनिश्चित की है।

असंगठित क्षेत्र से जुड़े 42 करोड़ से अधिक लोगों के पास अब प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन योजना के तहत पेंशन कवरेज मिली है। 2019 के चुनाव परिणामों के बाद पहली कैबिनेट बैठक के दौरान व्यापारियों के लिए समान पेंशन योजना की घोषणा की गई है।

2016 में गरीबों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की गई थी। यह योजना 7 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को धुआं मुक्त रसोई प्रदान करने में एक बड़ा कदम साबित हुई है। इसकी अधिकांश लाभार्थी महिलाएं हैं।

आजादी के बाद से 70 वर्षों के बाद भी 18,000 गाँव बिना जहां बिजली नहीं थी वहां बिजली पहुंचाई गई है।

श्री मोदी का मानना है कि कोई भी भारतीय बेघर नहीं होना चाहिए और इस विजन को साकार करने के लिए 2014 से 2019 के बीच 1.25 करोड़ से अधिक घर बनाए गए है। 2022 तक प्रधानमंत्री के ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ के सपने को पूरा करने के लिए घर के निर्माण की गति में तेजी आई है।

कृषि एक ऐसा क्षेत्र है जो श्री नरेंद्र मोदी के बहुत करीब है। 2019 के अंतरिम बजट के दौरान सरकार ने किसानों के लिए पीएम किसान सम्मान निधि के रूप में एक मौद्रिक प्रोत्साहन योजना की घोषणा की। 24 फरवरी 2019 को योजना के शुरू होने के बाद लगभग 3 सप्ताह में नियमित रूप से किश्तों का भुगतान किया गया है। पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक के दौरान इस योजना में 5 एकड़ की सीमा को हटाते हुए सभी किसानों को पीएम किसान का लाभ देने का फैसला किया गया। इसके साथ ही भारत सरकार प्रति वर्ष लगभग 87,000 करोड़ रुपये किसान कल्याण के लिए समर्पित करेगी।

श्री मोदी ने सॉयल हेल्थ कार्ड, बेहतर बाजारों के लिए ई-नाम और सिंचाई पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने जैसी किसान कल्याण की दिशा में विभिन्न पहल शुरू की। 30 मई 2019 को प्रधानमंत्री ने जल संसाधनों से संबंधित सभी पहलुओं की देखरेख करने के लिए एक नया जल शक्ति मंत्रालय बनाकर एक बड़ा वादा पूरा किया।

2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे देश में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए ‘स्वच्छ भारत मिशन’ शुरू किया। इस जन आंदोलन का बड़े पैमाने पर ऐतिहासिक प्रभाव पड़ा है। 2014 में स्वच्छता कवरेज 38% थी जो आज बढ़कर 99% हो गई है। कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया है। स्वच्छ गंगा के लिए पर्याप्त उपाय किए गए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वच्छ भारत मिशन की सराहना की और कहा कि इससे 3 लाख लोगों की जान बच सकती है।

श्री मोदी का मानना है कि परिवहन परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण साधन है। इसीलिए भारत सरकार हाई-वे, रेलवे, आई-वे और वॉटर-वे के रूप में अगली पीढ़ी के बुनियादी ढाँचे को बनाने के लिए काम कर रही है। UDAN (उड़े देश के आप नागरिक) योजना ने उड्डयन क्षेत्र को लोगों के अधिक अनुकूल बनाया है और कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया है।

पीएम मोदी ने भारत को अंतरराष्ट्रीय विनिर्माण पॉवर हाऊस में बदलने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ पहल शुरू की। इस प्रयास से परिवर्तनकारी परिणाम सामने आए हैं। उदाहरण के लिए 2014 में मोबाइल विनिर्माण इकाइयों की संख्या 2 थी जो 2019 में बढ़कर 122 हो गई है। भारत ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में महत्वपूर्ण प्रगति की है, 2014 में भारत की रैंकिंग 142 थी 2019 में यह 77 हो गई है। 2017 में संसद के एक ऐतिहासिक सत्र के दौरान भारत सरकार ने जीएसटी लागू किया, जिसने ‘वन नेशन, वन टैक्स’ के सपने को साकार किया।

उनके कार्यकाल में भारत के समृद्ध इतिहास और संस्कृति पर विशेष ध्यान दिया गया। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा स्टैच्यू ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ बनाया गया जो सरदार पटेल को एक सच्ची श्रद्धांजलि है। इस स्टैच्यू को एक विशेष जन आंदोलन के माध्यम से बनाया गया था, जिसमें भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के किसानों के औज़ार और मिट्टी का इस्तेमाल किया गया था, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री को पर्यावरण से जुड़े मुद्दों से गहरा लगाव है। उन्हेंने हमेशा से पाना है कि हमें एक साफ और हरा ग्रह बनाने के लिए काम करना चाहिए। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में श्री मोदी ने जलवायु परिवर्तन के अभिनव समाधान तैयार करने के लिए अलग जलवायु परिवर्तन विभाग बनाया। इस भावना को पेरिस में 2015 के COP21 शिखर सम्मेलन में भी देखा गया था जहां पीएम मोदी ने पर्यावरण से जुड़े मुद्दों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

जलवायु परिवर्तन से एक कदम आगे बढ़कर पीएम मोदी ने जलवायु न्याय के बारे में बात की है। 2018 में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के शुभारंभ के लिए कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष भारत आए थे। यह गठबंधन एक बेहतर ग्रह के लिए सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का एक अभिनव प्रयास है।

पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके प्रयासों को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को संयुक्त राष्ट्र के ‘चैंपियंस ऑफ अर्थ अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।

जलवायु परिवर्तन ने हमारे ग्रह को प्राकृतिक आपदाओं से ग्रस्त कर दिया है, इस तथ्य के प्रति पूरी तरह से संवेदनशील होते हुए श्री मोदी ने प्रौद्योगिकी की शक्ति और मानव संसाधनों की ताकत के उचित इस्तेमाल के रूप में आपदा के लिए एक नया विजन साझा किया है । मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने 26 जनवरी 2001 को विनाशकारी भूकंप से तबाह हुए गुजरात को बदल दिया। इसी तरह उन्होंने गुजरात में बाढ़ और सूखे से निपटने के लिए नई प्रणालियों की शुरुआत की जिनकी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा हुई।

प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से श्री मोदी ने नागरिकों के लिए न्याय को हमेशा प्राथमिकता दी है। गुजरात में लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए उन्होंने शाम की अदालतों की शुरुआत की। केंद्र में उन्होंने PRAGATI ((प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) शुरू किया जो विकास में देरी कर रहे लंबित परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के लिए एक कदम है।

श्री मोदी की विदेश नीति की पहल ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की वास्तविक क्षमता और भूमिका को महसूस किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सार्क देशों के सभी प्रमुखों की उपस्थिति में अपना पहला कार्यकाल शुरू किया और दूसरे की शुरुआत में बिम्सटेक नेताओं को आमंत्रित किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनके संबोधन की दुनिया भर में सराहना हुई। पीएम मोदी 17 साल की लंबी अवधि के बाद नेपाल, 28 साल के बाद ऑस्ट्रेलिया, 31 साल के बाद फिजी और 34 साल के बाद सेशेल्स और यूएई के द्विपक्षीय दौरे पर जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। पदभार संभालने के बाद से श्री मोदी ने UN, BRICS, SAARC और G-20 समिट में भाग लिया, जहाँ विभिन्न वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर भारत के विचारों को व्यापक रूप से सराहा गया।

प्रधानमंत्री को सऊदी अरब के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘किंग अब्दुलअजीज सैश’ से सम्मानित किया गया। श्री मोदी को रूस के शीर्ष सम्मान ‘द ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टले सम्मान’, फिलिस्तीन के ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन’ सम्मान, अफगानिस्तान के ‘अमीर अमानुल्ला खान अवॉर्ड’, यूएई के ‘जायेद मेडल’ और मालदीव के ‘निशान इज्जुद्दीन’ सम्मान से सम्मानित किया गया है। 2018 में प्रधानमंत्री मोदी को शांति और विकास में उनके योगदान के लिए प्रतिष्ठित सियोल शांति पुरस्कार दिया गया।

‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ मनाने के नरेंद्र मोदी के आग्रह को संयुक्त राष्ट्र में अच्छी प्रतिक्रिया मिली। पहले दुनिया भर में कुल 177 राष्ट्रों ने एक साथ मिलकर 21 जून को संयुक्त राष्ट्र में ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया।

श्री मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के एक छोटे से शहर में हुआ था। वे ‘अति पिछड़ा वर्ग’ परिवार से आते हैं, जो समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों में से है। वह बेहद गरीब, लेकिन प्यार देने वाले परिवार में पले बड़े। जीवन की शुरुआती कठिनाइयों ने न केवल कड़ी मेहनत के मूल्य को सिखाया बल्कि उन्हें आम लोगों के कष्टों से भी अवगत कराया। आम जन की गरीबी ने उन्हें बहुत कम उम्र में ही लोगों और राष्ट्र की सेवा में डूबने के लिए प्रेरित किया। अपने प्रारंभिक वर्षों में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ काम किया, जो राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित एक राष्ट्रवादी संगठन है और बाद में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर भारतीय जनता पार्टी के संगठन में काम करने के लिए खुद को राजनीति में समर्पित किया। श्री मोदी ने गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए पूरा किया है।

नरेंद्र मोदी लोगों के नेता हैं और वे आमजन की समस्याओं को हल करने और उनके जीवन स्तर में सुधार करने के लिए समर्पित हैं। लोगों के बीच रहने, उनके साथ खुशियाँ साझा करने और उनके दुखों को दूर करने से ज्यादा कुछ भी उनके लिए संतोषजनक नहीं है। जमीनी स्तर पर तो उनका लोगों के साथ एक मजबूत व्यक्तिगत जुड़ाव तो है ही साथ ही साथ सोशल मीडिया पर भी उनकी मजबूत उपस्थिति है। उन्हें भारत के सबसे ज्या टेक्नो सैवी नेता के रूप में भी जाना जाता है। वो लोगों तक पहुँचने और उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं। वह फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, साउंड क्लाउड, लिंक्डिन, वीबो और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर बहुत सक्रिय है।

राजनीति से परे नरेंद्र मोदी को लिखना पसंद है। उन्होंने कई कविता और कई किताबें लिखी हैं। वह अपने दिन की शुरुआत योग से करते हैं। योग उसके शरीर और दिमाग को मजबूत बनाता है और तेज गति चलने वाली दिनचर्या में शांति का भाव पैदा करता है।

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ट्रेड एंड बियॉन्‍ड : ईयू-इंडिया पार्टनरशिप के लिए एक नई प्रेरणा
May 08, 2021
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नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं। एंटोनियो कोस्टा पुर्तगाल के प्रधानमंत्री हैं, जो वर्तमान में यूरोपीय संघ की परिषद के प्रेसिडेंट हैं।  

यूरोपीय संघ और भारत के नेताओं की शनिवार को हो रही बैठक, महत्वपूर्ण भू-राजनैतिक महत्व का क्षण है।  दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच संवाद को मजबूत कर, यह हमारी साझेदारी को नई गति प्रदान करेगा, जिसका अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

आने वाले वर्षो में महत्वपूर्ण क्षेत्रीय एवं वैश्विक ताकत के रूप में भारत की भूमिका का विस्तार जारी रहेगा और यह मजबूत साझेदारी, यूरोप को दुनिया के सामरिक महत्व के क्षेत्र में संबंधों को विविधता प्रदान करने का अवसर प्रदान करेगी ।

यूरोपीय संघ और भारत ने समय-समय पर अपने सहयोग को विस्तार देने का वादा किया है, जो हमारे 1994 की स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप में स्थापित आर्किटेक्चर पर आधारित है, लेकिन हमारी अर्थव्यवस्थाओं द्वारा प्रदान किए गए अवसरों और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट की डाइनैमिक्स की तुलना में उस महत्वाकांक्षा को प्राप्त करना अभी भी एक चुनौती है।

पुर्तगाल ईयू-इंडिया लीडर्स की बैठक, इस संबंध में एक महत्वपूर्ण क्षण होने का वादा करती है, जिसने दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक स्थानों के बीच साझेदारी को नई गति प्रदान की, जो 1.8 बिलियन से अधिक लोगों से बना है। यह डायलॉग ईयू और इंडो-पैसिफिक के बीच संबंधों को पुनर्जीवित करने के लिए महत्वपूर्ण होगी। यह हमारे लिए लोकतंत्र, कानून के शासन, सहिष्णुता, और मानव अधिकारों की सार्वभौमिकता और अविभाज्यता में हमारे दृढ़ विश्वास की पुष्टि करने के लिए महत्वपूर्ण है।

हमें व्यापार और निवेश संबंधों को आगे बढ़ाने और प्रभावी बहुपक्षवाद और एक नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन करने के लिए अपने लोकतांत्रिक स्थानों की विशाल क्षमता का उपयोग करते हुए, अपने रिश्ते को ऊंचा करने के लिए इस अवसर का फायदा उठाना चाहिए।

यूरोपीय संघ और भारत के बीच यह बैठक समसामयिक समाज और अर्थव्यवस्थाओं के विकास के लिए डिजिटल ट्रांसजिशन, कनेक्टिविटी, मोबिलिटी, हेल्थ, द एनर्जी ट्रांजिशन और क्लाइमेट एक्शन जैसे निर्णायक महत्व के नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का एक मौका है।

यूरोपीय संघ और भारत पहले से ही अपने समाजों के विकास और स्थिरता के लिए बढ़ती प्रासंगिकता के मुद्दों में महत्वपूर्ण भागीदार हैं। कल, हम सहयोग के नए मार्ग खोलेंगे और आगे बढा़एंगे। उदाहरण के लिए यूरोपीय संघ और भारत,  ट्रांसपोर्ट, एनर्जी, डिजिटल और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाने के उद्देश्य से एक कनेक्टिविटी पार्टनरशिप का शुभारंभ करेंगे।

यह बैठक यूरोपीय संघ और भारत के बीच व्यापार और निवेश समझौता को एक नई गति देने का एक अवसर है।

यूरोपीय संघ, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भारतीय निर्यात के लिए दूसरा सबसे बड़ा डेस्टिनेशन है। यूरोपीय संघ और भारत के बीच व्यापार, पिछले दशक में 72 प्रतिशत बढ़ा है। यूरोपीय संघ भी भारत में अग्रणी विदेशी निवेशक है। विदेशी निवेश में इसकी हिस्सेदारी पिछले एक दशक में दोगुनी से अधिक हो गई है। कुछ 6,000 यूरोपीय कंपनियां भारत में मौजूद हैं, जो 1.7 मिलियन प्रत्यक्ष और 5 मिलियन अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा करती हैं। हाल के वर्षों में भारत से बढ़ते निवेश का मतलब यूरोपीय संघ में भारतीय कंपनियों की सक्रिय उपस्थिति से भी है।

यह भारत और यूरोप दोनों के लिए सस्टेनेबल ग्रोथ और जॉब्स क्रिएशन के लिए एक महत्वपूर्ण संचालक के रूप में कार्य करने में सक्षम एक महत्वाकांक्षी और संतुलित व्यापार समझौते की ओर बातचीत को फिर से शुरू करने का सही समय है। इसके अलावा यूरोपीय संघ-भारत समझौता, अंतर्राष्ट्रीय कारोबार सहयोग के फायदे के बारे में दुनिया को मजबूत संदेश देगा ।

इसी तरह का तर्क निवेश पर भी लागू होता है। यूरोपीय संघ के व्यापक इन्वेस्टमेंट प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क की बातचीत, भारत और यूरोपीय संघ की कंपनियों को एक दूसरे के बाजारों में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने के लिए अधिक स्थिरता और निश्चितता प्रदान करेगी।

यूरोपीय संघ-भारत संबंधों को हमेशा आपसी सहयोग और एकजुटता द्वारा चिह्नित किया गया है। यह कोरोना वायरस महामारी के दौरान स्पष्ट हुआ है जब दोनों ने एक-दूसरे और दुनिया के बाकी हिस्सों का सहयोग किया। भारत ने पहले यूरोप को मेडिकल सप्लाई की और अब यूरोपीय संघ ने भारत को सहायता प्रदान की, क्योंकि भारत कोविड-19 की दूसरी लहर की चपेट में है।

अतीत और हाल, दोनों में पुर्तगाल और भारत ने हमेशा दो महाद्वीपों को एक साथ लाने की भूमिका निभाई है। पुर्तगाली ईयू प्रेसीडेंसी में वर्ष 2000 में पुर्तगाल ने लिस्बन में पहली ईयू- इंडिया समिट की मेजबानी की और भारत ने 2007 में पुर्तगाली प्रेसीडेंसी में ही नई दिल्ली में आठवें ईयू-इंडिया समिट की मेजबानी की।

साहित्य में नोबल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर 160 साल पहले 9 मई को पैदा हुए थे। उन्होंने अपने जीवन के विभिन्न काल में यूरोप की व्यापक यात्रा की। महान कवि को ईस्ट और वेस्ट को एक साथ लाने के लिए भारत के मिशन में लोगों के बीच म्यूचल अंडरस्टैंडिंग के सिद्धांतों में दृढ़ विश्वास था। उन्होंने यूरोप और भारत के मिलन बारे में अक्सर लिखा, जिसमें उन्होंने गहरे सांस्कृतिक, राजनीतिक और यहां तक कि व्यक्तिगत महत्व को भी बताया: "मैंने अपने व्यक्तिगत जीवन में पूर्व और पश्चिम के मिलन को महसूस किया है।"

इसी तरह, पुर्तगाली पहचान को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने वाली महाकाव्य, भारत की यात्रा को बयान करती है। लुइस वाज़ डे कैमेस द्वारा लिखित "लुसीड्स" भी यूरोप और भारत के बीच संबंधों के बारे में बताता है।

यह हमें विशेष रूप से दो महाद्वीपों में फैले रिश्ते के गुणों बारे में जागरूक करता है और दो विशाल महासागरों को जोड़ता है, जो हमारे देशों और समाजों में विशाल परिवर्तनों के साथ विकसित हुए हैं। यह महत्वपूर्ण है कि हम इस महत्वपूर्ण पल को हमारे पास से न जाने दें।

यूरोपीय संघ और भारत के बीच यात्रा एक साथ जारी रहेगी और राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग के नए मार्गों की तलाश में आगे बढ़ेगी, जिससे आपसी लाभ की संभावनाएं बढ़ेंगी।