प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी आज दिल्ली में युवा स्कूली बच्चों के साथ स्वच्छता अभियान में शामिल हुए और स्वच्छ भारत अभियान के 10 वर्ष पूरे होने पर उनसे बातचीत की।

स्वच्छता के लाभों के बारे में प्रधानमंत्री द्वारा पूछे जाने पर, छात्र ने बीमारियों से बचाव और स्वच्छ और स्वस्थ भारत के बारे में जागरूकता पैदा करने के दृष्टिकोण का उल्लेख किया। एक छात्र ने शौचालयों की अनुपस्थिति के कारण बीमारियों के प्रसार में बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया। श्री मोदी ने बताया कि पहले अधिकांश लोग खुले में शौच करने के लिए मजबूर थे, जिसके कारण कई तरह की बीमारियाँ फैलती थीं और यह महिलाओं के लिए बेहद नुकसानदेह था। प्रधानमंत्री ने बताया कि स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत सबसे पहले कदम उठाए गए, इसके अंतर्गत स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय बनाए गए, जिससे उनके स्कूल छोड़ने की दर में भारी कमी आई।

प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी जी और लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती के अवसर पर भी चर्चा की। श्री मोदी ने योग में युवाओं की बढ़ती संख्या पर संतोष व्यक्त किया और आसन के लाभों के बारे में भी बताया। कुछ बच्चों ने प्रधानमंत्री के सामने कुछ आसन भी प्रदर्शित किए, जिस पर सभी ने खूब तालियां बजाईं। उन्होंने अच्छे पोषण की आवश्यकता पर भी बल दिया। प्रधानमंत्री द्वारा पीएम-सुकन्या योजना के बारे में पूछे जाने पर एक छात्रा ने योजना के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि इससे लड़कियों के लिए बैंक खाता खोलने में मदद मिलती है, ताकि वयस्क होने पर उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके। प्रधानमंत्री ने बताया कि लड़कियों के जन्म के तुरंत बाद पीएम सुकन्या समृद्धि खाता खोला जा सकता है और हर साल 1000 रुपये जमा करने का सुझाव दिया, जिसका उपयोग बाद में शिक्षा और शादी के लिए किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि 18 साल में यही जमा राशि 50,000 रुपये हो जाएगी और इस पर करीब 32,000 से 35,000 रुपये तक ब्याज मिलेगा। पीएम मोदी ने कहा कि लड़कियों को 8 दशमलव 2 प्रतिशत तक ब्याज मिलता है।

प्रधानमंत्री ने स्वच्छता पर केंद्रित बच्चों के कामों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने गुजरात के एक बंजर इलाके के स्कूल का अपना अनुभव साझा किया, जहां प्रत्येक छात्र को एक पेड़ दिया गया था और उन्हें हर दिन अपने रसोईघर से पानी लाने का आग्रह करके उसे पानी देने के लिए कहा गया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वे 5 साल बाद उसी स्कूल में गए तो उन्होंने हरियाली के रूप में अभूतपूर्व परिवर्तन देखा। प्रधानमंत्री ने खाद बनाने के लिए कचरे को अलग-अलग करने के लाभों के बारे में भी बताया और छात्रों को घर पर भी इस अभ्यास को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने छात्रों को अपने समुदाय में प्लास्टिक की बुराइयों के बारे में जागरूकता पैदा करने और इसकी जगह कपड़े के थैले का उपयोग करने का सुझाव भी दिया।

बच्चों से बातचीत करते हुए श्री मोदी ने एक डिस्प्ले बोर्ड पर गांधी जी के चश्मे की ओर इशारा किया और बच्चों को बताया कि गांधी जी इस बात पर नजर रखते थे कि सफाई है या नहीं। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने जीवन भर स्वच्छता के लिए काम किया। एक किस्सा साझा करते हुए श्री मोदी ने बच्चों को बताया कि जब गांधी जी को आजादी और सफाई के बीच विकल्प दिया गया तो गांधी जी ने आजादी के बजाय सफाई को चुना क्योंकि वे सफाई को हर चीज से ज्यादा महत्व देते थे। उन्होंने छात्रों से पूछा कि सफाई एक कार्यक्रम होना चाहिए या आदत, तो बच्चों ने कहा कि सफाई एक आदत होनी चाहिए। उन्होंने बच्चों को बताया कि सफाई किसी एक व्यक्ति या एक परिवार या एक बार की घटना की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह तब तक चलने वाली प्रक्रिया है जब तक व्यक्ति जीवित है। उन्होंने छात्रों को बताया कि “मैं अपने आस-पास गंदगी नहीं करूंगा” के मंत्र को देश के हर नागरिक को अपनाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने बच्चों को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई।

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प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है, जिसमें एक बुद्धिमान व्यक्ति के गुणों को बताया गया
April 08, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि ठीक 11-वर्ष पहले शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना युवाओं के स्वरोजगार में बहुत मददगार साबित हुई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस योजना की सफलता यह दर्शाती है कि जब किसी व्यक्ति को सही अवसर मिलते हैं, तो वह न सिर्फ आत्मनिर्भर बन सकता है बल्कि राष्ट्र की प्रगति में भी योगदान दे सकता है। इस संदर्भ में, श्री मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें एक बुद्धिमान व्यक्ति के गुणों पर प्रकाश डाला गया है।

प्रधानमंत्री ने एक्स(X) पर लिखा:

"आज से ठीक 11 वर्ष पहले शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना युवाओं के स्वरोजगार में बहुत मददगार साबित हुई है। इस योजना की सफलता बताती है कि सही अवसर मिलने पर व्यक्ति न सिर्फ आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि राष्ट्र की प्रगति में भी योगदान दे सकता है।

आत्मज्ञानं समारम्भस्तितिक्षा धर्मनित्यता।

यमर्था नापकर्षन्ति स वै पण्डित उच्यते॥

#11YearsOfMUDRA"

जो व्यक्ति अपनी योग्यता से भली-भांति परिचित हो, आत्मनिर्भर होकर कल्याणकारी कार्य करने में तत्पर हो, विपरीत परिस्थितियों को धैर्यपूर्वक सहन करता हो और सदा सदाचार का पालन करता हो, जिसे लोभ अपने मार्ग से विचलित नहीं कर पाता, वही वास्तव में बुद्धिमान कहलाता है।