भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आमंत्रण पर साइप्रस गणराज्य के राष्ट्रपति श्री निकोस क्रिस्टोडौलीडेस ने 20-23 मई 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा की। इस यात्रा का विशेष महत्व है, क्योंकि यह ऐसे समय में हो रही है, जब साइप्रस यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता कर रहा है।

यह यात्रा उस ऐतिहासिक गति को आगे बढ़ाती है, जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की जून 2025 में साइप्रस यात्रा से पैदा हुई थी और जिसने रणनीतिक साझेदारी की आधारशिला रखी थी। यह यात्रा भारत-साइप्रस संबंधों का परिणाम-उन्मुख और कार्यान्वयन-संचालित चरण में प्रवेश का संकेत देती है।

दोनों राजनेताओं ने 2025 में जारी हुए संयुक्त घोषणापत्र को लागू करने में प्राप्त महत्वपूर्ण प्रगति का स्वागत किया, जिसमें राजनीतिक संवाद को आगे बढ़ाना, व्यावसायिक सहभागिता में वृद्धि, रक्षा संपर्कों में मजबूती और नवाचार एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग की शुरुआत शामिल है। बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और भारत-साइप्रस साझेदारी के प्रगाढ़ स्तर को मान्यता देते हुए, दोनों नेताओं ने नई वास्तविकताओं और अवसरों को प्रतिबिंबित करने के लिए द्विपक्षीय व्यापक साझेदारी को रणनीतिक साझेदारी में बदलने पर सहमति व्यक्त की।

भारत की राष्ट्रपति महामहिम श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 22 मई 2026 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलीडेस का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने राजघाट पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। माननीय राष्ट्रपति ने यात्रा पर आये राष्ट्रपति के सम्मान में एक राजकीय भोज का भी आयोजन किया।

यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलीडेस ने 22 मई 2026 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों पर व्यापक चर्चा की और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संवाद में नवीनीकृत गति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और आपसी सम्मान पर आधारित भारत और साइप्रस के बीच घनिष्ठ और विश्वसनीय साझेदारी की पुष्टि की। उन्होंने भारत-ईयू संबंधों, साथ ही आपसी रुचि के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा किए।

दोनों नेताओं ने भारत-साइप्रस व्यापक साझेदारी के महत्वपूर्ण पहलू के रूप में उच्च राजनीतिक स्तर पर नियमित संपर्क का स्वागत किया। उन्होंने 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान घोषित भारत-साइप्रस संयुक्त कार्य योजना 2025-2029 के कार्यान्वयन में हुई महत्वपूर्ण प्रगति का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने विशेष कार्यक्रम आयोजित करने के जरिये 2027 में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध स्थापित होने की 65वीं वर्षगांठ मनाने पर सहमति व्यक्त की।

राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलीडेस ने प्रधानमंत्री मोदी को एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के सफल आयोजन पर बधाई दी। इसमें साइप्रस का प्रतिनिधित्व अनुसंधान, नवाचार और डिजिटल नीति के उप-मंत्री ने किया था और उन्होंने सम्मेलन घोषणा का अनुमोदन भी किया था। दोनों नेताओं ने एआई के सुरक्षित, विश्वसनीय और समावेशी विकास की दिशा में काम करने पर अपने विचार साझा किए।

साझा मूल्य और बहुपक्षीय सहयोग

दोनों राजनेताओं ने शांति, लोकतंत्र, कानून का शासन, प्रभावी बहुपक्षवाद और सतत विकास के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) पर जोर देते हुए, यूएन चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून पर आधारित नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए अपने समर्थन की पुनः पुष्टि की, जिसमें समुद्री मार्ग आवागमन और हवाई मार्ग की स्वतंत्रता, अवरोध रहित व्यापार और संप्रभु समुद्री अधिकार शामिल हैं।

दोनों नेताओं ने ज्वलंत वैश्विक चुनौतियों का सामना करने तथा सुधार किये गये और प्रभावी बहुपक्षवाद के माध्यम से उभरते घटनाक्रम के लिए दुनिया को तैयार करने की अपनी अपील दोहराई। इस संदर्भ में, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और राष्ट्रमंडल सहित अंतरराष्ट्रीय संगठनों के भीतर समन्वय को मजबूत करने की अपनी इच्छा व्यक्त की।

दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें इसे अधिक प्रभावी, कुशल और समकालीन भू-राजनीतिक चुनौतियों के अनुरूप बनाने के तरीके शामिल हैं। उन्होंने बहुपक्षीय मंचों में, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मामले भी शामिल हैं, निकट समन्वय करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ताओं को पूरा करने के प्रयासों का समर्थन जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। साइप्रस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के प्रति अपनी ठोस समर्थन की पुनः पुष्टि की। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य मंचों पर आपस में निकट सहयोग करने और एक-दूसरे की उम्मीदवारी का समर्थन करने पर भी सहमति व्यक्त की।

संप्रभुता और शांति के लिए समर्थन

साइप्रस और भारत ने साइप्रस प्रश्न के एक व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी समाधान को हासिल करने के लिए बातचीत को फिर से शुरू करने के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता व्यक्त की, जो सहमति प्राप्त संयुक्त राष्ट्र रूपरेखा और संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्तावों के अनुसार हो तथा राजनीतिक समानता के साथ द्विक्षेत्रीय, द्विसामुदायिक संघ के आधार पर हो। उन्होंने साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (यूएनएफआईसीवाईपी) की महत्वपूर्ण भूमिका और उसके कार्यादेश के प्रति अपने पूर्ण समर्थन पर जोर दिया। राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलीडेस ने यूएनएफआईसीवाईपी में भारत के अमूल्य योगदान की सराहना की।

भारत ने साइप्रस गणराज्य की स्वतंत्रता, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और एकता के लिए अपनी अडिग और स्थायी समर्थन की पुनः पुष्टि की। दोनों पक्षों ने वार्ताओं के माध्यम से शांति समाधान की दिशा में प्रयासों को कमजोर न करने से संबंधित संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों और अंतर्राष्ट्रीय कानून का पूर्ण सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया।

सुरक्षा, रक्षा और आतंकवाद-रोधी कार्रवाई

दोनों राजनेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की पूरी तरह और स्पष्ट रूप से निंदा की, जिसमें सीमा पार आतंकवाद भी शामिल है। साइप्रस ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के प्रति एकजुटता और अटूट समर्थन व्यक्त किया।

दोनों नेताओं ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम, जम्मू और कश्मीर में और 10 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकवादी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इन हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए। दोनों नेताओं ने आतंकवाद से निपटने के लिए निर्णायक और संयुक्त अंतर्राष्ट्रीय प्रयास करने का आह्वान किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार व्यापक और स्थायी तरीके से किया जाना चाहिए।

सीमा पार आतंकवाद से मुकाबले के लिए व्यापक, समन्वित और सतत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर देते हुए, उन्होंने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय प्रणाली दोनों में सहयोग के साथ काम करने के महत्व को रेखांकित किया।

इस संदर्भ में, नेताओं ने आतंकवाद से मुकाबले के लिए बहुपक्षीय प्रयासों को मजबूत करने और संयुक्त राष्ट्र ढांचे के भीतर अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन को शीघ्रता से अंतिम रूप देने और अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ द्वारा नामित सभी आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ मजबूत और संयुक्त कार्रवाई की अपील की, जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रतिबंध समिति के अधीन आने वाले 1267 समूह, उनके संबंधित छद्म समूह, सहायक, प्रायोजक, वित्तपोषक और समर्थक शामिल हैं।

उन्होंने हिंसक उग्रवाद और कट्टरवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और धन-शोधन का सामना करने तथा आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल को रोकने और आतंकवादी भर्ती का मुकाबला करने के लिए सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया। दोनों पक्षों ने आतंकवादी सुरक्षित ठिकानों और बुनियादी ढांचे को समाप्त करने तथा संयुक्त राष्ट्र और वित्तीय कार्यबल (एफएटीएफ) के तहत आतंकवादी नेटवर्क को बाधित करने और आतंकवाद के वित्तपोषण से लड़ने का भी आह्वान किया।

उन्होंने आतंकवाद के प्रति अपनी शून्य-सहनशीलता नीति को दोहराया तथा दोहरे मानदंड, राज्य प्रायोजित आतंकवाद और किसी भी परिस्थितियों में ऐसे कृत्यों के लिए किसी भी प्रकार के औचित्य को अस्वीकार किया। नेताओं ने आतंकवाद-रोधी कार्रवाई पर एक संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) स्थापित करने के लिए एमओयू पर हुए हस्ताक्षर का स्वागत किया, जो जानकारी और ज्ञान साझा करने और क्षमता निर्माण के माध्यम से आतंकवाद-रोधी कार्रवाई में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए एक ढांचा प्रदान करेगा। उन्होंने जेडब्ल्यूजी की पहली बैठक को जल्द से जल्द आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की।

दो नेताओं ने विशेष रूप से साइबरस्पेस में नए और उभरते खतरों से निपटने के लिए दोनों देशों की संबंधित एजेंसियों के बीच जारी करीबी सहयोग का उल्लेख किया। इस संदर्भ में, नेताओं ने दोनों देशों के बीच साइबरसुरक्षा संवाद की स्थापना का स्वागत किया।

उन्होंने विशेष रूप से साइबरसुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें संबंधित रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग भी शामिल है। इस संदर्भ में, नेताओं ने साइप्रस रक्षा और अंतरिक्ष उद्योग क्लस्टर (सीवाईडीएसआईसी) और भारतीय रक्षा निर्माता समिति (एसआईडीएम) के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर होने का स्वागत किया।

फरवरी 2026 में हस्ताक्षर हुए भारत-साइप्रस द्विपक्षीय रक्षा सहयोग कार्यक्रम का स्वागत करते हुए, दोनों नेताओं ने रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोग की संभावना को रेखांकित किया। उन्होंने खोज और बचाव (एसएआर) मामलों पर आधिकारिक समन्वय और सहयोग की स्थापना के लिए तकनीकी समझौते पर हुए हस्ताक्षर का भी स्वागत किया। ये रक्षा औद्योगिक सहयोग और तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए एक संस्थागत ढांचा प्रदान करेंगे, जो 27 जनवरी 2026 को हस्ताक्षरित भारत-ईयू रक्षा और सुरक्षा साझेदारी पर आधारित होगा, साथ ही विनिमय, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की सुविधा भी प्रदान करेंगे। नेताओं ने 2026-2031 की अवधि के लिए दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के रोडमैप के पूरा होने का स्वागत किया।

भारत और साइप्रस दोनों ही समुद्री राष्ट्र हैं जिनकी समुद्री परंपराओं की जड़ें गहरी हैं, दोनों नेताओं ने समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को प्रोत्साहित किया, जिसमें भारतीय नौसैनिक जहाजों के नियमित बंदरगाह दौरे और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने के लिए संयुक्त समुद्री प्रशिक्षण और अभ्यास के अवसरों का पता लगाना शामिल है।

व्यापार, निवेश और नवाचार

दोनों राजनेताओं ने जोर दिया कि द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारी का और विस्तार करने की महत्वपूर्ण संभावना मौजूद है। उन्होंने भरोसेमंद, विश्वसनीय और सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण में सहयोग बढ़ाने और अपनी आर्थिक सुरक्षा की रक्षा करने पर सहमति व्यक्त की।

नेताओं ने भारत में साइप्रस के निवेश की सतत वृद्धि का स्वागत किया, जिससे साइप्रस भारत में निवेश का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया। उन्होंने स्टार्टअप्स, डिजिटलीकरण, एआई और नवाचार-उन्मुख उद्यमों के माध्यम से अछूती आर्थिक संभावनाओं को पूरी तरह से साकार करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने दोनों देशों के व्यापारिक समुदाय को वित्तीय सेवाओं, समुद्री क्षेत्र, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, स्वच्छ और हरित ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन, अंतरिक्ष, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, और अनुसंधान एवं नवाचार सहित प्राथमिक क्षेत्रों में व्यापार और निवेश के अवसरों का सक्रिय रूप से पता लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। नेताओं ने इस वर्ष की शुरुआत में संपन्न ऐतिहासिक भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के कार्यान्वयन के माध्यम से उत्पन्न होने वाले अवसरों को भी रेखांकित किया।

फिनटेक संपर्क के माध्यम से, केवल सीमा पार लेनदेन ही नहीं बल्कि सीमा पार संबंध भी मजबूत होंगे। नेताओं ने वित्तीय क्षेत्र में आर्थिक सहभागिता की मजबूती का उल्लेख किया, जिसमें 2025 में एनआईपीएल और यूरोबैंक साइप्रस के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी शामिल है। उन्होंने भारत के एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) और यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) के लक्ष्य तत्काल भुगतान निपटान प्रणाली (टीआईपीएस प्रणाली) के बीच अंतर-संचालन योग्य ढांचे की स्थापना का स्वागत किया, जो सीमा पार निर्बाध लेनदेन की सुविधा प्रदान करेगा, जिससे दोनों देशों के पर्यटक और व्यवसाय लाभान्वित होंगे।

दोनों नेताओं ने त्रिपक्षीय और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग में बढ़ती गति का भी स्वागत किया। इस संदर्भ में, उन्होंने भारत-ग्रीस-साइप्रस (आईजीसी) व्यापार और निवेश परिषद की स्थापना की सराहना की, जो व्यवसाय-से-व्यवसाय संबंधों को मजबूत करने, निवेश प्रवाह को बढ़ावा देने और तीनों देशों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेगा।

जून 2025 में लिमासोल में आयोजित भारत-साइप्रस निवेशक गोलमेज से उत्पन्न गति को आगे बढ़ाते हुए, इस यात्रा के दौरान मुंबई में भारत-साइप्रस व्यावसायिक मंच का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय आर्थिक और व्यावसायिक साझेदारी को और मजबूत करना और सहयोग के नए अवसरों को प्रोत्साहित करना था। नेताओं ने मुंबई में व्यावसायिक संघ के दौरान बी2बी समझौतों पर हुए हस्ताक्षर का स्वागत किया।

नेताओं ने दोनों देशों की स्टार्टअप्स, यूनिकॉर्न्स, नवाचार इकोसिस्टम और वेंचर कैपिटल नेटवर्क के बीच निरंतर सहयोग का स्वागत किया। इस संदर्भ में, उन्होंने नवाचार और प्रौद्योगिकी पर समझौता ज्ञापन पर हुए हस्ताक्षर का स्वागत किया, जो दोनों देशों के स्टार्टअप्स, इन्क्यूबेटर्स, गति प्रदाताओं और नवाचार एजेंसियों के बीच आदान-प्रदान के लिए एक रूपरेखा प्रदान करेगा।

राजनेताओं ने दोनों देशों के बीच व्यापार और परिवहन को मजबूत करने में समुद्री और नौवहन सहयोग तथा विश्वसनीय समुद्री साझेदारियों के माध्यम से भारत-प्रशांत को यूरोप से जोड़ने के महत्व को स्वीकार किया। उन्होंने साइप्रस की यूरोप के द्वार के रूप में भूमिका और पोतांतरण, भंडारण, वितरण, और लॉजिस्टिक्स के लिए क्षेत्रीय हब के रूप में सेवा देने की क्षमता को मान्यता दी। उन्होंने दोनों देशों के लाभ के लिए साइप्रस-आधारित और भारतीय समुद्री सेवा प्रदाताओं की संयुक्त परियोजनाओं के माध्यम से समुद्री सहयोग को सुदृढ़ करने को प्रोत्साहित किया। इसी संदर्भ में, दोनों नेताओं ने व्यापारी नौवहन पर मौजूदा द्विपक्षीय समझौते के तहत समुद्री सहयोग में प्राप्त सकारात्मक गति को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

साइप्रस का वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त समुद्री सेवा इकोसिस्टम और भारत की तेजी से बढ़ती समुद्री और बंदरगाह अवसंरचना क्षमताओं के बीच मजबूत पूरक भूमिका को देखते हुए, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय भागीदारी के एक रणनीतिक स्तंभ के रूप में समुद्री क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।

इस संदर्भ में, उन्होंने साइप्रस की क्षमता को मान्यता दी कि यह भारतीय नौवहन हितों के लिए एक यूरोपीय समुद्री प्रवेश द्वार और संचालन आधार के रूप में कार्य कर सकता है और भारतीय समुद्री हितधारकों और साइप्रस के नौवहन और जहाज प्रबंधन समुदाय के बीच निकट संबंधों का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने समुद्री सेवाओं, बंदरगाह परिवहन-संपर्क, लॉजिस्टिक्स, समुद्री प्रशिक्षण और कौशल विकास के साथ-साथ हरित नौवहन और नियामक अनुपालन में सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की, जिससे निकट भविष्य में व्यावहारिक और परस्पर लाभकारी परिणाम सामने आ सकें।

नेताओं ने उल्लेख किया कि विशेष रूप से बढ़ती जलवायु-संबंधी चुनौतियों के संदर्भ में, आपदा प्रतिरोधक क्षमता और अवसंरचना सहयोग दोनों देशों के लिए बढ़ती महत्ता वाला क्षेत्र है। इस संदर्भ में, प्रधानमंत्री मोदी ने आपदा प्रतिरोधक अवसंरचना संघ (सीडीआरआई) में शामिल होने की साइप्रस की रुचि का स्वागत किया और दोनों नेताओं ने सीडीआरआई की भूमिका को तकनीकी सहयोग, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझा करने को बढ़ावा देने के लिए एक वैश्विक मंच तथा आपदा-प्रतिरोधक अवसंरचना प्रणालियों में निवेश को बढ़ावा देने के मंच के रूप में रेखांकित किया।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी

नई और उभरती प्रौद्योगिकियों की परिवर्तनकारी क्षमता की पहचान करते हुए, नेताओं ने कहा कि नवाचार और प्रौद्योगिकी पर एमओयू, अनुसंधान केंद्रों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा, साथ ही उभरती और सतत प्रौद्योगिकियों में संयुक्त अनुसंधान और नवाचार परियोजनाओं को भी प्रोत्साहित करेगा, जिसमें नैतिक और जिम्मेदार एआई शामिल है।

अंतरिक्ष क्षेत्र को वैश्विक आर्थिक प्रगति, सुरक्षा, नवाचार और तकनीकी उन्नति के लिए एक महत्वपूर्ण अवसंरचना के रूप में मान्यता देते हुए, दोनों पक्षों ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी साझेदारी के प्रति रुचि व्यक्त की। प्रधानमंत्री मोदी ने सूचित किया कि भारत की अंतरिक्ष नीति 2023 गैर-सरकारी संस्थाओं को अंतरिक्ष क्षेत्र में शुरू से अंत तक गतिविधियाँ करने के लिए एक सक्षम और गतिशील ढांचा प्रदान करती है। दोनों पक्षों ने परस्पर लाभ के लिए सहयोग बढ़ाने के चल रहे प्रयासों का स्वागत किया। इस संदर्भ में, नेताओं ने ईराटोस्थेनेस एक्सीलेंस सेंटर (ईसीओई) और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रचार और अधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के बीच चल रहे सहयोग का स्वागत किया।

शिक्षा, आवागमन और कौशल विकास

राजनेताओं ने अकादमिक स्तर पर बढ़ते आदान-प्रदान का स्वागत किया, जिसमें छात्र और शोधकर्ता शामिल हैं। इस संदर्भ में, उन्होंने उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एमओयू पर हुए हस्ताक्षर का स्वागत किया। उन्होंने उल्लेख किया कि यह दोनों देशों में उच्च शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के लिए सशक्त आधार प्रदान करेगा ताकि जुड़ाव मजबूत हो, आदान-प्रदान बढ़े और सहयोग के अवसरों का पता लगाया जा सके, जिसमें संयुक्त अनुसंधान पहलों, संकाय और छात्र आवाजाही और संस्थागत साझेदारियां शामिल हैं।

नेताओं ने सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान (एसएसआईएफएस) और साइप्रस के एम ओ एफ ए डिप्लोमैटिक अकादमी के बीच कूटनीतिक प्रशिक्षण पर एमओयू पर हुए हस्ताक्षर का स्वागत किया, जो कूटनीतिकों के प्रशिक्षण में सहयोग के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा।

नेताओं ने प्रवास और आवागमन साझेदारी समझौते को पूरा करने के दृष्टिकोण से बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की, जो सुरक्षित, नियमित और व्यवस्थित प्रवास पर सहयोग को सुविधाजनक बनाने का एक ढांचा प्रदान करेगा, और उच्च कौशल प्राप्त कर्मियों, छात्रों और शोधकर्ताओं के सतत कार्यबल आवागमन का समर्थन करेगा। दोनों नेताओं ने सामाजिक सुरक्षा समझौते के लिए जल्द से जल्द वार्ता शुरू करने पर भी सहमति व्यक्त की।

इस संदर्भ में, नेताओं ने भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (आईसीएआई) और साइप्रस के प्रमाणित सार्वजनिक लेखाकार संस्थान (आईसीपीएसी) के बीच एम ओ यू पर हुए हस्ताक्षर का स्वागत किया, जो युवा लेखाकारों के लिए पेशेवर और विनियामक मानकों को विकसित करने, लेखांकन और ऑडिट में सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करने, और वित्त और व्यावसायिक सेवाओं के क्षेत्र में आपसी मान्यता और रोजगार क्षमता को बढ़ाने का अच्छा अवसर प्रदान करेगा।

सांस्कृतिक सहयोग और लोगों के आपसी संबध

राजनेताओं ने भारत और साइप्रस के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने सांस्कृतिक सहयोग पर एमओयू के हस्ताक्षर का स्वागत किया, जिससे दृश्य कला, प्रदर्शन कला, कला के लिए शैक्षिक कार्यक्रम, विरासत संरक्षण और रचनात्मक उद्योग के क्षेत्रों में आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने की उम्मीद है। नेताओं ने संयुक्त पहलों, प्रदर्शनियों और क्षमता निर्माण प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए संग्रहालयों, शैक्षणिक संस्थानों और सांस्कृतिक निकायों के बीच करीबी सहयोग की अपील की, और साइप्रस में योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति के प्रति बढ़ती रुचि की सराहना की।

नेताओं ने द्विपक्षीय पर्यटन में और वृद्धि की संभावना को स्वीकार किया, जो दोनों देशों के लोगों के बीच बेहतर समझ को बढ़ावा देने में योगदान देगा। दोनों पक्षों ने पर्यटन हितधारकों के बीच सहयोग के माध्यम से दोनों देशों में पर्यटन प्रवाह को बढ़ाने के लिए काम करने पर सहमति व्यक्त की।

नेताओं ने उल्लेख किया कि लोगों की बढ़ती आवाजाही और लोगों के बीच आपसी संबंधों के विस्तार के मद्देनजर राजनयिक मामलों में सहयोग दोनों देशों के लिए लगातार रुचि का क्षेत्र बना हुआ है। इस संदर्भ में, उन्होंने राजनयिक संवाद की शुरुआत का स्वागत किया और उल्लेख किया कि यह राजनयिक मुद्दों को संबोधित करने और सहयोग को मजबूत करने के लिए एक संरचित रूपरेखा प्रदान करेगा।

भारत–ईयू संबंध

दोनों राजनेताओं ने 27 जनवरी 2026 को भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के पूरे होने का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने 2030 के लिए संयुक्त भारत-ईयू व्यापक रणनीतिक एजेंडा की भी पुष्टि की, जिसका उद्देश्य ईयू-भारत सहयोग को व्यापक, गहरा और बेहतर तरीके से समन्वित करके रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है, ताकि दोनों भागीदारों और व्यापक दुनिया के लिए समान रूप से लाभकारी, ठोस और परिवर्तनकारी परिणाम प्रदान किए जा सकें।

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को रणनीतिक साझेदारी में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानते हुए, नेताओं ने इसके शीघ्र हस्ताक्षर और समय पर क्रियान्वयन की अपील की, ताकि महत्वपूर्ण मूल्य श्रृंखलाओं को विविधता प्रदान करके और नए बाजार खोलकर व्यापार और निवेश सहयोग की वास्तविक संभावनाओं को साकार किया जा सके।

नेताओं ने प्रमुख व्यापार, प्रौद्योगिकी और आर्थिक सुरक्षा मुद्दों को संबोधित करने के लिए भारत-ईयू व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) के काम को और बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की और जुलाई में टीटीसी मंत्रिस्तरीय बैठक के परिणामों के प्रति आशा व्यक्त की।

भारत-ईयू सुरक्षा और रक्षा साझेदारी के हस्ताक्षर से साझा रुचि वाले क्षेत्रों में सहयोग गहरा होगा, जिसमें समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी, साइबर और हाइब्रिड खतरों, अंतरिक्ष और आतंकवाद-रोधी कार्रवाई शामिल हैं। दोनों नेताओं ने इस संदर्भ में भारत-ईयू सूचना सुरक्षा समझौते के शीघ्र पूरे किये जाने पर भी जोर दिया।

आवागमन पर सहयोग के व्यापक ढांचे पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) के हस्ताक्षर और भारत में पायलट यूरोपीय संघ कानूनी गेटवे कार्यालय की शुरूआत का स्वागत करते हुए, नेताओं ने उल्लेख किया कि इसका महत्व पेशेवरों, कुशल कार्यबल और छात्रों की आवाजाही के लिए कानूनी रास्ते प्रदान करने और भारत और ईयू के बीच लोगों के आपसी संबंध मजबूत से जुड़ा है।

भारत-प्रशांत, परिवहन संपर्क और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दे

राजनेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून, जिसमें यूएनसीएलओएस शामिल है, के अनुसार एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण, समृद्ध और नियम-आधारित भारत-प्रशांत को बढ़ावा देने के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने साइप्रस की भारत-प्रशांत महासागर पहल में शामिल होने की सराहना की तथा समुद्री सुरक्षा में सहयोग और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग को गहरा करने की क्षमता को रेखांकित किया।

दोनों नेताओं ने वैश्विक व्यापार, परिवहन संपर्क और समृद्धि को पुनः आकार और बढ़ावा देने में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) की परिवर्तनकारी क्षमता को मान्यता दी। उन्होंने पूर्वी भूमध्यसागर और व्यापक मध्य पूर्व में स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई और भारत से व्यापक मध्य पूर्व के माध्यम से यूरोप तक गहरे जुड़ाव और परिवहन संपर्क गलियारे को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने द्विपक्षीय परिवहन संपर्क संवाद की स्थापना पर चर्चा की।

नेताओं ने प्रमुख हितधारकों के बीच संवाद, कूटनीति और रचनात्मक भागीदारी के माध्यम से यूक्रेन में संघर्ष के शीघ्र समाधान के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया, ताकि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुसार यूक्रेन में एक व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी शांति प्राप्त की जा सके।

पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं पर, दोनों नेताओं ने शांतिपूर्वक तरीके से मौलिक मुद्दों को सुलझाने के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया, जिसमें समुद्री नौवहन का सुरक्षित और अवरुद्ध-रहित मार्ग सुनिश्चित करना शामिल है।

दोनों नेताओं ने वैश्विक अप्रसार संरचना को बनाए रखने के महत्व पर भी चर्चा की, और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत के शामिल होने के महत्त्व को मान्यता दी।

निष्कर्ष

दोनों राजनेताओं ने भारत–साइप्रस संबंधों की घनिष्टता पर संतोष व्यक्त किया और भारत-साइप्रस रणनीतिक साझेदारी के तहत सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए, उन्होंने दोनों पक्षों को भारत-साइप्रस संयुक्त कार्य योजना 2025-2029 के समय पर कार्यान्वयन के लिए काम करने का निर्देश दिया। नेताओं ने पारस्परिक सम्मान और सहयोग की साझा भावना पर आधारित नियमित संपर्क बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की।

साइप्रस के राष्ट्रपति ने भारत सरकार और भारत के लोगों द्वारा अपनी राजकीय यात्रा के दौरान किए गए उत्कृष्ट व्यवस्थाओं के लिए भारत के प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।

नेताओं ने साइप्रस और भारत को रणनीतिक साझेदार तथा यूरोप, भूमध्यसागर और भारत-प्रशांत क्षेत्र के बीच जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में साझा दृष्टिकोण की पुनः पुष्टि की, और शांति, स्थिरता, परिवहन संपर्क और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की।

उन्होंने भारत-साइप्रस संयुक्त कार्य योजना 2025-2029 के तहत ठोस परिणाम हासिल करने और व्यापक भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी के गतिशील स्तंभ के रूप में भारत-साइप्रस सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि वर्तमान यात्रा ऐतिहासिक रूप से मजबूत संबंध को द्विपक्षीय संबंधों के नए चरण में बदलने में एक निर्णायक कदम को रेखांकित करती है, और इस साझेदारी को एक अधिक महत्वाकांक्षी, आधुनिक, रणनीतिक और भविष्य उन्मुख सहयोग के ढांचे स्थापित करती है।

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दुनिया भारत को ग्रोथ और उम्मीद की नई किरण के रूप में देख रही है: इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2026 में पीएम मोदी
August 21, 2026
The world sees India as a bright spot for growth and hope: PM
Today, India is implementing next-generation reforms at the policy level and undertaking reforms at governance level: PM
Increasing production was met with punishment earlier but today, our government is providing incentives for boosting production
India has political stability and continuity in its policies: PM
Earlier, the approach of regulations was, 'prohibited unless permitted’; We are changing this approach and taking it towards 'permitted unless prohibited’: PM
The relationship between the government and citizens should be based on trust, not suspicion: PM
Today, we are shaping policies that are pro-people, pro-growth and pro-development: PM

World Leaders Forum का ये प्रतिष्ठित मंच, Business और Industry की दुनिया के सभी जाने माने दिग्गज, पॉलिसी मेकर्स, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

आप सबके बीच आकर के खुश होना बहुत स्वाभाविक भी है। इस साल समिट का फोकस Shared Future पर है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। और इन अनुभवों ने एक बात बहुत स्पष्ट कर दी है, कोई चाहे या ना चाहे, हर देश का भविष्य, उसका फ्यूचर, एक-दूसरे से जुड़ा हुआ ही है, Isolation में कुछ संभव नहीं है। इसीलिए Shared Futures की ये theme, आज और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। और भारत तो हमेशा से इसी भावना को लेकर चला है। जी-20 की अध्यक्षता में इसलिए ही भारत का मंत्र रहा, One Earth, One Family, One Future. Shared Future की ये भावना और इसके साथ जुड़ा दायित्वबोध, 21वीं सदी के इस विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान देता है।

साथियों,

आज दुनिया में growth को लेकर के कई तरह की चिंताएं हैं। दुनिया ने बड़ा भयंकर एक रूप देखा है इन दिनों। Resources का वेपनाइजेशन हो रहा है। अविश्वास का वातावरण विश्व के लिए अनेक नई चुनौतियां लेकर के आ रहा है। लेकिन ऐसे समय में भी, दुनिया भारत को growth और hope के bright spot के रूप में देख रही है। भारत ने पिछले 10-12 साल में अपनी 25 करोड़ आबादी को गरीबी से बाहर निकाला है। इतना ही नहीं, अगर आने वाले दिनों की चर्चा करें, तो IMF का forecast है कि भारत दुनिया की fastest growing major economy बना रहेगा। और भारत निरंतर वो कदम उठा रहा है, जो उसके विकास को गति दे रहे हैं।

Friends,

अभी पिछले हफ्ते ही, 15 अगस्त को मैंने लाल किले से सप्त-धारा की सप्त-शक्तियों की बात की है। मैन्यूफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, फूड प्रोसेसिंग, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी समेत, मैंने ऐसे सात सेक्टर्स की बात की है, जिन पर भारत का आज बहुत ज्यादा फोकस है। और इसलिए भारत आज, Policy level पर, नेक्स्ट जनरेशन reforms कर रहा है, ताकि हमारा future सुरक्षित हो। Governance पर reforms कर रहा है, Ease of Living के लिए reforms कर रहा है। पिछली बार जब मैं इसी मंच के माध्यम से आपसे जुड़ा था, तब भी मैंने कहा था, ये Reforms हमारे लिए Compulsion नहीं है। ये हमारा commitment है, ये हमारा conviction है।

साथियों,

2014 में, जब हमारी सरकार बनी, तो उसके बाद से ही रिफॉर्म्स ने कैसे देश की दिशा और दशा बदली है, मैं इसका एक बहुत दिलचस्प उदाहरण आपको देना चाहता हूं। यहां मौजूद शायद ही किसी को PLP के बारे में पता होगा, कोई है, जिसको PLP के बारे में पता है? अपना हाथ उठाएं। यहां इतने मीडिया के दिग्गज बैठे हैं, PLP आपको पता है? और आप सुनकर के हैरान हो जाएंगे। PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट, इसके बारे में किसी को पता नहीं है। और एक दूसरा टर्म आपने जरूर सुना है PLI, ये ज्यादातर लोगों को पता होगा। PLI- यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव।

साथियों,

ये दोनों टर्म, भारत के दो अलग-अलग Time Period को डिफाइन करते हैं। आजकल Explainer का जमाना है, तो मैं आपको Explain करता हूं।

साथियों,

आज की युवा पीढ़ी को ये सुनकर हैरानी होगी, कि हमारे देश में एक समय ऐसा भी था, कि अगर कोई कंपनी तय लिमिट से ज्यादा प्रॉडक्शन कर दे, तो उसे पनिशमेंट दिया जाता था। ये पहले की लाइसेंस राज वाली सरकारों का, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल था। ऐसे भी उदाहरण रहे हैं कि अगर किसी फैक्ट्री ने ज्यादा डिमांड देखते हुए ज्यादा प्रॉडक्शन कर दिया, तो उसे नोटिस भेज दिया जाता था। मजबूरी में वो कंपनी अपना प्रॉडक्ट मार्केट में बेचने के बजाय, उसे खुद ही नष्ट कर देती थी।

साथियों,

आज जो लोग Make In India और आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजाक उड़ाते हैं, उनके पुरखों की सोच यही थी, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट। ऐसा करने के पीछे एक विशेष तरह की विकृत मानसिकता काम करती थी। ऐसी मानसिकता वाले लोग हमेशा चाहते थे कि जरूरी चीजों की किल्लत बनी रहे। देश के नागरिकों को अभाव में रखना उनकी पॉलिसी थी। वो चाहते थे कि जनता उनके सामने हाथ जोड़े, हाथ फैलाए, आप समझ गए मैं किन लोगों की बात कर रहा हूं। लोगों से हाथ जुड़वाने के बाद उपकार करना, उन सरकारों का तरीका था, इसलिए वो प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल पर चलते थे। आप कल्पना कर सकते हैं, ऐसे करके उन लोगों ने Employment Generation के बेसिक principal का गला घोंट दिया था। और हैरानी ये, इन लोगों के दरबारियों ने again I repeat, इन लोगों के दरबारियों ने, कभी इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई।

साथियों,

हर reform की शुरुआत सबसे पहले, आपके सोचने के तरीके, आपके मानसिक, किस रेंज में आप काम कर रहे हैं, इस सोच के reform से ही होती है। जहां पहले production बढ़ाने पर पनिशमेंट मिलता था, वहीं आज हमारी सरकार production बढ़ाने पर incentive दे रही है। और आज PLI स्कीम की सक्सेस दुनिया देख रही है। सिर्फ इस एक योजना की वजह से, मैं सारी योजनाओं की बात नहीं करता हूं, एक की बात करता हूं, करीब ढाई लाख करोड़ रुपए का actual investment हुआ है। 22 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का production और sales हुई है। 15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का exports हुआ है, और 14 लाख से ज्यादा direct और indirect jobs बनी हैं। और मैं फिर याद दिलाउंगा, ये आंकड़े सिर्फ एक स्कीम के हैं। आप सोचिए, पहले का लाइसेंस राज वाली सरकार का पनिशमेंट मॉडल जहां बेरोजगारी बढ़ाता था, वहीं आज का हमारा incentive मॉडल लाखों नई जॉब्स क्रिएट कर रहा है।

साथियों,

आज भारत में ये तेज विकास, ये तेज रिफॉर्म इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि भारत में और जिसका अभी सत्य ने उल्लेख किया, political stability है, हमारी policy में continuity है। पहले देश में रिफॉर्म्स की बात करने वाले घोषणा तो कर देते थे, बाद में भूल जाते थे। लेकिन हमने रिफॉर्म्स को लेकर एक क्लियर रोडमैप बनाया। इस रोडमैप की प्रमुख दिशा रही है- गवर्नेंस लेवेल के रिफॉर्म्स हों! इसके लिए, आज 21वीं सदी के भारत में, हम सिर्फ regulations नहीं बदल रहे हैं, हम regulation की पूरी philosophy बदल रहे हैं। पहले regulations की अप्रोच थी- “Prohibited unless permitted.” यानी जब तक सरकार इजाजत ना दे, तब तक आप वो काम नहीं कर सकते। हम इस approach को बदलकर, “Permitted unless prohibited” की तरफ ले जा रहे हैं। यानी, जो काम कानून ने स्पष्ट रूप से मना नहीं किया है, उसके लिए हर कदम पर permission की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए। और इसके पीछे सोच बहुत सीधी है, सरकार और नागरिक के रिश्ते का आधार, Suspicion नहीं, trust होना चाहिए।

साथियों,

यही सोच आपको Jan Vishwas बिल में भी दिखाई देती है। मैं मानता हूं, हर procedural गलती को criminal offence मान लेना ठीक नहीं है। इसीलिए अनेक offences को decriminalise किया गया है। कई मामलों में जेल की जगह केवल आर्थिक penalty का प्रावधान किया गया है। Government और enterprise के रिश्ते में, हम इसी reform mindset को आगे बढ़ा रहे हैं। बीते वर्षों में 40 हजार से ज्यादा compliances हटाए गए हैं, 40 thousand. डेढ़ हजार से ज्यादा, 15 hundred, डेढ़ हजार से ज्यादा, पुराने और बेकार हो चुके कानून हमने खत्म किए, और जब इन सारे reforms को एक साथ देखते हैं, तो अंदाजा होता है, हमारी industries और businesses के कंधों से कितना बड़ा बोझ कम हुआ है।

साथियों,

गवर्नेंस रिफॉर्म्स की इस प्रक्रिया, उस पर हम निरंतर काम कर रहे है। अभी संसद के मॉनसून सत्र में हमने ‘बैंकर्स बुक एविडेंस बिल’ पारित किया है। और वो भी तब जब विपक्ष ने संसद में लगातार गतिरोध बनाया हुआ था। हमने देश की सेवा करने का काम रूकने नहीं दिया। अब इस कानून ने 19वीं सदी के अंग्रेजी कानून को रिप्लेस किया है। अब बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड्स की स्वीकार्यता को कानूनी मान्यता दी गई है। इससे कानूनी उलझनें कम होंगी, सिस्टम में पारदर्शिता होगी, Ease of Doing Business बढ़ेगा।

साथियों,

गवर्नेंस में रिफॉर्म का एक मतलब ये भी है कि सिस्टम ऐसे बनें, जिसमें एक-एक मानव जीवन और उसके समय के प्रति संवेदनशीलता हो। मैं रेलवे का उदाहरण देता हूं। हमारी रेलवेज में भी इसी अप्रोच के साथ काम हुआ है। आज साढ़े 6 हजार से ज्यादा रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था है। 10 हजार से ज्यादा लेवल क्रॉसिंग गेट्स को भी इंटरलॉकिंग से जोड़ा जा चुका है। इससे ह्यूमन एरर से होने वाले हादसों की आशंका बहुत कम हुई है।

साथियों,

जब 2014 में हमारी सरकार आई, तो करीब 9 हजार फाटक ऐसे थे जो Un-Manned थे। इन्हें हटाना कोई रॉकेट साइंस नहीं था। Un-Manned क्रॉसिंग्स की वजह से हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन पहले की सरकारों को इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता था। हमने मिशन मोड में, गत दस वर्ष में, इन Un-Manned क्रॉसिंग्स को समाप्त कर दिया। हमने रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज बनाने की गति भी कई गुना बढ़ा दी। और इसी का नतीजा है कि 2014 के पहले के मुकाबले ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या में Ninety Percent तक की कमी आई है, 90, Ninety Percent. 12 साल पहले जहां एक साल में करीब डेढ़ सौ रेल दुर्घटनाएं होती थीं, वहीं अब इनकी संख्या घटकर 15-20 रह गई है। और हम इसे और कम से कम करने का प्रयास लगातार कर रहे हैं।

साथियों,

Railways में स्वच्छता भी गवर्नेंस रिफॉर्म का एक बड़ा उदाहरण है। एक समय था, जब रेल पटरियों पर गंदगी और human waste एक बड़ी समस्या हुआ करती थी। आज स्थिति पूरी तरह बदल गई है। 2014 से पहले हमारी ट्रेनों में जहां लगभग 12 हजार बायो-टॉयलेट्स लगाए गए थे, वहीं 2014 के बाद ट्रेनों में 3 लाख 60 हजार से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स लगाए गए हैं। यानी, 97 प्रतिशत से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स पिछले 12 वर्षों में लगे हैं। ये बदलाव सिर्फ सफाई का नहीं, यात्रियों की गरिमा, स्वच्छता और आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में गवर्नेंस का एक नया मॉडल है। ये करोड़ों यात्रियों को बेहतर अनुभव देने का अभियान भी है।

साथियों,

गवर्नेंस की क्वालिटी का एक और पैमाना, और वो पैमाना है - समय। जो प्रोजेक्ट शुरू हो, वो समय पर पूरा हो। और जो सर्विस लोगों को मिले, वो भी समय की कसौटी पर खरी उतरे। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल सिस्टम इसका बहुत अच्छा उदाहरण है। इस कॉरिडोर पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चल रही हैं। ये हमारे देश में पहले कभी सोचा नहीं जा सकता था। अब तक 4 करोड़ से ज्यादा यात्री इसमें ट्रैवल कर चुके हैं। और इसका एक और अहम फैक्टर है, जिसकी चर्चा नहीं होती है। दिल्ली मेरठ नमो भारत रैपिड रेल की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। वरना हम तो हर चीज में कहते हैं, लेट हो तो कहते थे, ये तो इंडियन टाइम है। वक्त बदला है, ये मैं छोटी-छोटी चीजें इसलिए बताता हूं, कि हमें अंदाज आए कि कितने बड़े व्यापक स्तर पर काम हो रहा है। इसी तरह, Delhi Metro की पंक्चुअलिटी। Delhi Metro की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। और ये punctuality, New York, Hong Kong और Paris जैसे शहरों की Metro से करीब-करीब बराबर हो चुकी है। ये सिर्फ समय पर चलती हुई Metro और नमो रेपिड रेल की कहानी नहीं है, ये समय के साथ बदलते हुए भारत की पहचान है। मैं जानता हूं कि अभी भी, और र्मैं कोई इतने से संतोष मानकर बैठने वाला व्यक्ति नहीं हूं, अभी भी इस दिशा में हमें बहुत कुछ करना है, बहुत कुछ बाकी है, लेकिन हम लगातार कर रहे हैं। लेकिन एक शुरूआत तो हुई है और ये शुरुआत सराहनीय है।

साथियों,

हमारे रिफॉर्म्स रोडमैप का एक और बड़ा आयाम है- पॉलिसी लेवल पर होने वाले रिफॉर्म्स! आज हम ऐसी policies बना रहे हैं, जो pro-people हों, Pro-growth हों, pro development हों! पॉलिसीज़ देश और देश के लोगों की जरूरत के हिसाब से होनी चाहिए न कि पॉलिसीज़ बनाकर देश को उनके हिसाब से चलने को मजबूर होना पड़े! मैं आपको एक और Interesting उदाहरण देना चाहता हूं। कुछ साल पहले तक हमारे यहाँ देश का नक्शा बनाना भी गैर-कानूनी था, मैप बनाए तो गैर कानूनी था, आप जेल चले जाएंगे। बिना परमिशन के आप देश में मैपिंग का काम भी नहीं कर सकते थे। आप सोचिए, विदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए भारत के किसी भी कोने को मैप कर सकती थी, लेकिन भारत में भारतीयों पर भारत का मैप बनाने पर पाबंदी लगी हुई थी।

साथियों,

आज टेक्नोलॉजी के इस दौर में, इस एक पाबंदी से कितने स्टार्टअप्स की हत्या हो सकती थी! कितने ideas implement होने से वंचित रह सकते थे! हमने इस व्यवस्था को भी बदला। हमने Geospatial डेटा का Deregulation किया और आज Geospatial डेटा कितने ही स्टार्टअप्स का आधार बन रहा है।

साथियों,

आज आप लगातार ड्रोन्स की उपयोगिता बढ़ते हुए देख रहे हैं। एग्रीकल्चर में, डिफेंस में, डिलिवरी में, शूटिंग में, कंटेंट क्रिएशन में, ये सब संभव ही नहीं होता, अगर सरकार ने इससे जुड़े नियमों में Reform नहीं किए होते। पहले देश में ड्रोन फ्लाइंग पूरी तरह नियमों में, बंधनों में जकड़ी हुई थी। हमने उसे बंधनों से आजाद किया, और आज भारत की ड्रोन इंडस्ट्री, एक अभूतपूर्व उड़ान के साथ आगे बढ़ रही है।

साथियों,

पहले border areas को लेकर सरकारों की सोच थी कि बॉर्डर पर roads और infrastructure बढ़ेगा, तो उसका फायदा दुश्मन भी उठा सकता है। हमने इस सोच को बदला। हमने कहा, Border infrastructure कमजोरी नहीं, देश की ताकत है। और इसीलिए आज border areas में roads, bridges और tunnels का network तेजी से बढ़ रहा है। सिर्फ 2024 और 2025 में ही, BRO के 250 infrastructure projects देश को समर्पित किए गए हैं। सोच बदली, तो border infrastructure की तस्वीर भी बदल गई।

साथियों,

एक उदाहरण न्यूक्लियर रिफॉर्म्स का भी है। एक ऐसे समय में, जब विकास पूरी तरह से energy dependent है, बंदिशों और प्रतिबंधों के कारण, देश अपने न्यूक्लियर potential का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था। हमने शांति बिल के जरिए इसमें भी बड़ा रिफॉर्म किया है। आज भारत में न्यूक्लियर एनर्जी में प्राइवेट सेक्टर के लिए रास्ता खुल चुका है। इसी तरह, हमने एक बड़ा पॉलिसी रिफॉर्म डिफेंस सेक्टर में भी किया। 200 साल के पहले जो व्यवस्था चली आ रही थी, उसे बदलकर हमने 40 से ज्यादा ordnance फैक्ट्रीज़ को मर्ज करके 7 फैक्ट्रीज़ बना दी। और उसका परिणाम हमें देखने को मिल रहा है। आज भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भी आत्मनिर्भर बन रहा है, और 2014 की तुलना में, हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट 55 गुना बढ़ा है। और इसलिए, कई बार रिफॉर्म्स हमारे जीवन में इस तरह घुल-मिल जाते हैं कि हमारा उनकी तरफ ध्यान ही नहीं जाता। आप सोचिए, आपका कोई सामान्य दिन आज कैसे बीतता है। आप सुबह उठते हैं, फोन पर घर का सामान ऑर्डर कर देते हैं, और जब तक ऑफिस के लिए रेडी होते हैं, वो सारा सामान आपके घर आकर के पहुंच जाता है। आपकी गली के स्ट्रीट वेंडर से लेकर, आपकी गाड़ी के शो रूम तक, आपकी सारी पेमेंट्स, सिर्फ एक क्यूआर कोड स्कैन करके हो जाती है। अगर आपकी बेटी, किसी दूसरे शहर में पढ़ती है, तो आप फोन से उसे पैसे भेज सकते हैं, और वो पैसा, कुछ सेकंड्स में उसके पास भी पहुंच जाता है। कई बार तो बिटिया क्यूआर ही शेयर कर देती है कि ‘पापा-मां मैंने ये ड्रेस ले ली है, इसकी पेमेंट कर दीजिए, और आप उसकी शॉपिंग अपने घर बैठे-बैठे करवा देते हैं। ये चीजें Remarkable हैं, लेकिन अब ये कोई भारत के लोगों को कम से कम हैरानी नहीं होती, बाहर के लोग आते हैं, उनको आश्चर्य होता है, अच्छा ऐसे होता है। भारत के लोगों का रूटीन हो गया है। ये भारत के सामान्य मानवी के जीवन का हिस्सा बन चुका है। आप सोचिए, 2014 से पहले ऐसी कितनी ही बातें क्या पॉसिबल थीं?

साथियों,

भारत ने बीते 10-12 सालों में Ease of Living से जुड़े जो रिफॉर्म्स किए हैं, उसकी वजह से लोगों का, खासतौर पर हमारे मिडिल क्लास का जो जीवन बदला है, वो दुनिया के कई विकसित देशों में आज भी एक सपना ही है।

साथियों,

आज दुनिया का सबसे सस्ता डेटा भारत में है, हम सस्ते और अच्छे स्मार्टफोन्स बना रहे हैं। अभी सत्या ने उसका वर्णन किया। भारत दुनिया के fastest 5G rollouts करने वाले देशों में से एक है। हमने आधार को बैंकिंग, मोबाइल कनेक्टिविटी और सर्विसेज से जोड़कर, ई-के.वाई.सी और Digital Authentication जैसी सर्विसेज को पॉसिबल किया है। आज आपको अगर बैंक अकाउंट खोलना है, तो उसके लिए बैंक जाने तक की जरूरत नहीं है। सरकार ने बैंक को ही, आपके पास पहुंचा दिया है। आज चाहे कोई बिल जमा करना हो, कोई टिकट करानी हो, किसी सरकारी दफ्तर में जाने की जरूरत नहीं पड़ती, ये सारा काम ऑनलाइन हो जाता है। इनकम टैक्स की फाइलिंग का काम आसान हुआ है। ऐसी व्यवस्था बनी है कि फॉर्म में मैक्सिमम जानकारियां पहले से भरी होती हैं। आप ये इन्फॉर्मेशन वेरिफाई करते हैं, कुछ जोड़ना है तो जोड़ देते हैं, और सबमिट करते हैं, आपका काम पूरा हो जाता है। पहले जो रिफंड आने में महीनों लगते थे, अब वो भी कुछ ही दिनों में आ जाता है।

साथियों,

आज ई-संजीवनी की मदद से, शायद इसकी चर्चा अभी बहुत कम होती है, ई-संजीवनी की मदद से, गांव के दूर दराज के लोग भी, कहीं से भी डॉक्टर्स के साथ सीधी अपनी चर्चा करके अपने उपचार का रास्ता लेते हैं। और इससे जिन लोगों को अस्पताल जाने के लिए कई किलोमीटर का सफर करना पड़ता था, आज डॉक्टर उनके घर पर, उनकी स्क्रीन पर उपलब्ध है। अब तक ये आंकड़ा भी आपको जरूर आश्चर्य करेगा। यानी भारत ने टेक्नोलॉजी को किस प्रकार से अडाप्ट किया है, सामान्य मानवीय के जीवन को कैसे सरल किया है। अब तक ईं-संजीवनी के तहत करीब-करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशंस हो चुकी हैं।

साथियों,

आज भारत में Travel Experience बदल रहा है, भारत के नागरिकों की यात्राएं पूरी तरह बदल गई हैं। यहां इस हॉल में ऐसा व्यक्ति खोजना मुश्किल होगा, जिसने एयरपोर्ट पर डिजी यात्रा का इस्तेमाल ना किया हो। ऐसे ही आजकल बहुत सारा काम Seamless तरीके से हो रहा है। हाइवे पर फास्ट टैग चल रहे हैं, ताकि आप बिना रुके टोल देकर आगे बढ़ सकें। Ease of Living का सही अर्थ यही है। समय की बचत हो रही है, जीवन आसान हो रहा है, और करोड़ों लोग अपनी प्रगति पर फोकस कर पा रहे हैं।

साथियों,

Politics में अक्सर वही फैसले headlines बनते हैं, जिनका असर आज दिखाई दे, यानी उसकी उमर 24 घंटे हो। पहले की सरकारों ने इलेक्शन सामने देख कर भी घोषणाएं करने का फॉर्मूला अपनाया। लेकिन ऐसी घोषणाओं से देश नहीं बदला। देश बदलने वाले फैसले वो होते हैं, जिनका प्रभाव जमीन पर दिखे, जो वर्तमान और भविष्य, दोनों को ध्यान में रखकर के लिए गए होने चाहिए।

साथियों,

पीएम कुसुम योजना और पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना इसका बहुत बड़ा यूनीक Example है। कुसुम योजना से किसानों को बिजली की चिंता से मुक्ति मिली है। और सूर्यघर योजना से मिडिल क्लास को बहुत फायदा हुआ है।

साथियों,

मैं ये जानता हूं कि अगर मैंने ये अनाउंस कर दिया होता कि आज से लाखों-लाख परिवारों के लिए बिजली मुफ्त है, तो सारा मीडिया, सारी स्क्रीन्स, सारे न्यूजपेपर्स, बड़ी-बड़ी हेडलाइन बनाकर के खबर दे देते कि मोदी जी ने आज अनाउंस कर दिया है। लेकिन हमने कुछ दूसरे अप्रोच से काम शुरू किया। हमने हर घर की छत पर एक सूरज उगाने की ठान ली, और आज देश के 50 लाख से ज्यादा परिवार, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े हैं। सरकार ने 22 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा इन परिवारों को दिए हैं, ये सोलर सिस्टम लगाने के लिए, ताकि उनकी छत पर सोलर प्लांट लगाकर सोलर पावर पैदा की जा सके। अब ये परिवार, एक्स्ट्रा बिजली को, बिजली ग्रिड में बेचकर, पैसे भी कमा रहे हैं। खुद का बिल तो जीरो हुआ, कमाई भी होने लगी। इस योजना से लोगों के सपनों को भी विस्तार मिल रहा है। बिजली बिल कम हुआ है, तो अब घर में फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन, टीवी जैसी चीजें लोग खरीदकर रखने लगे हैं। अब ये डर नहीं होता कि बिजली कटौती की वजह से दूध फट जाएगा, अब चिंता नहीं रहती है। अब स्कूल जाने वाले बच्चे रातभर चैन से सो पाते हैं। मैं फिर कहता हूं- इलेक्शन हो या ना हो, लेकिन ये सूर्यघर और उसकी रोशनी बनी रहेगी, इस प्लांट का फायदा, सालों तक देश के परिवारों को होता रहेगा।

साथियों,

आने वाले समय में Ease of Living और Ease of Doing Business का और विस्तार होगा। देश के Youth के लिए, नारीशक्ति के लिए, Farmers के लिए, गरीब और Middle Class के लिए, हमारी सरकार लगातार काम करती रहेगी, हमारी Reform Express और अधिक गति से आगे बढ़ने वाली है। विकसित भारत का लक्ष्य पूरा करने के लिए, हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहेंगे। और मैं, मेरे लिए भारत का future अगर सुनिश्चित हो गया ना, तो दुनिया के future में भी स्थिरता लाने का बहुत बड़ा काम इसी धरती से होने वाला है। इस आत्मविश्वास के साथ भारत जितना स्टेबल होगा, भारत का future जितना सुरक्षित होगा, विश्व को सुरक्षत्व का एहसास देने की ताकत यहीं से पैदा होने वाली है। इस सामर्थ्य के साथ, इसी संकल्प के साथ, मैं एक बार फिर, आज के इस कार्यक्रम में मुझे आमंत्रित करने के लिए, Economic Times की पूरी टीम का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। वन्दे मातरम् !