प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वेदों के शाश्वत ज्ञान को दर्शाने वाले संस्कृत सुभाषितम के एक श्लोक को साझा किया।
“ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्यम्।”
छंदंसि यस्य पूर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्।।"
सुभाषितम् का तात्पर्य है, "ज्ञानी कहते हैं कि यह संसार एक शाश्वत पीपल वृक्ष के समान है, जिसकी जड़ें ऊपर और शाखाएं नीचे हैं। इसके पत्ते वेद हैं और जो इस सांसारिक वृक्ष को समझ लेता है, उसे वेदों का ज्ञाता कहा जाता है।"
श्री मोदी ने कहा कि ज्ञान का दीपक न केवल अज्ञानता के अंधकार को मिटाता है, बल्कि पूरे विश्व को प्रकाशित करता है और महर्षि दयानंद सरस्वती जी इसका जीता-जागता उदाहरण हैं।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;
"ज्ञान का दीपक केवल अज्ञानता का अंधकार मिटाता है, बल्कि समस्त जगत को भी आलोकित करता है। महर्षि दयानंद सरस्वती जी का दिव्य व्यक्तित्व साक्षात उदाहरण है।"
ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्।
छंदंसि यस्य पूर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्।।"
ज्ञान का दीपक ना केवल अज्ञानता के अंधकार को मिटाता है, बल्कि समस्त जगत को आलोकित भी करता है। महर्षि दयानंद सरस्वती जी का दिव्य व्यक्तित्व इसका साक्षात उदाहरण है।
— Narendra Modi (@narendramodi) February 12, 2026
ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्।
छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्।। pic.twitter.com/GdH2fKj1xf


