अर्चना: प्रधानमंत्री जी नमस्ते।

पीएम मोदी: नमस्कार जी।

अर्चना: We are from NTV Bhakti TV and Vanitha TV from the Telugu States, thank you so much for taking your time out and during this busy election schedule.

पीएम मोदी: आपके दर्शकों को भी मेरा नमस्कार।

अर्चना: दिस इज अर्चना

राजशेखर: दिस इज राजशेखर एनटीवी चीफ एडिटर एंड सीईओ।

 

अर्चना: Today it is my honor to interact with the significant leader His position India on a global stage Prime Minister Shri Narendra Modi ji has been significant in transforming India's digital landscape and crucial in shaping its external affairs His leadership embraces technology Enhance his governance with massive digital Initiative, deeply rooted in reviving and preserving the rich heritage of Indian culture, he is a visionary with modern outlook and a global leader powering excellence in economic development, he is a rare blend of technology, innovation and tradition in his governance.

पीएम मोदी: मेरा ये सौभाग्य है मुझे पहली बार आपके यहां इंटरव्यू करने का मौका आ रहा है।

अर्चना: थैंक्यू सर

राजशेखर: थैंक्यू सर

पीएम मोदी: आपके लिए हैदराबाद से यहां तक आए तेलंगाना से, तो ये मेरे लिए बहुत खुशी की बात है।

 

अर्चना: Diving into the first question Prime Minister sir, what is your assessment? Till now there have been three faces, so what do you have to say about that?

पीएम मोदी: देखिए, तीन चरण का चुनाव, कुछ लोग मतदान के आंकड़ों पर अटके हुए हैं, लेकिन मैं इस चुनाव में अर्थमेटिक से ज्यादा केमिस्ट्री देख रहा हूं। और ये केमिस्ट्री इतनी पावरफुल है ये नतीजे बताएंगे। पहले चरण में मैंने कहा था कि विपक्ष पस्त हो चुका है, दूसरे चरण के बाद मैंने कहा था अब ये ध्वस्त हो चुका है और तीसरे चरण में मैं कहता हूं कि अस्त हो चुका है और जनता- जनार्दन भारतीय जनता पार्टी के प्रति आश्वस्त है। ये मैं इन तीनों में देख रहा हूं। तीन चरणों के प्रचार में मुझे कई रैली करने का मौका मिला, कई रोड शो करने का मौका मिला, मीडिया के मित्रों से भी छिट-फुट बात होती रही। मैं 14 का चुनाव भी देखा है, 19 का भी देखा है। सामान्य नागरिक जिसको कहें जो राजनीति की गतिविधियों से दूर रहता है। मैं उन लोगों को इस बार मेरे कार्यक्रमों में देख रहा हूं। ये एक बहुत बड़ी निशानी है कि इस प्रकार का समाज जीवन का तबका चुनाव में आपका समर्थन करने के लिए आ जाए। और मैं उसमें एक भक्ति भाव का वातावरण देखता हूं, उसमें भारत भक्ति नजर आती है, समाज भक्ति नजर आती है। यानी एक प्रकार से पॉलिटिकल अवेयरनेस ग्रासरूट लेवल पर ये चुनाव में नजर आ रही है। मैं मानता हूं कि 2019 के भी रिकॉर्ड ये चुनाव तोड़ेगा, हर प्रकार से रिकॉर्ड टूटेंगे। मतदान कम होने के बाद भी मेरा मत है कि विजय का जो एक प्रकार से मार्जिन का लेवल है वो भी काफी बढ़ेगा ऐसा मुझे लगता है। और जहां तक विपक्ष का सवाल है शायद एक तो उनका इंडी अलायंस चला ही नहीं, वो दो चार रैली कर पाए और पहले दिन उन्होंने केरल में इंडी अलायंस के खिलाफ अपने लेफ्ट के खिलाफ खुद चुनाव में खड़े हो गए कांग्रेस के नेता, तो अविश्वास बड़ा जबरदस्त है। सीट आखिर तक वो तय नहीं कर पाते हैं, अभी तक उनका कोई कैंपेन का कोई थीम नजर नहीं आता है, मोदी को गाली- गलौज करना वो तो ठीक है, होता रहता है। और मैं मानता हूं कि इस बार कांग्रेस पार्टी की स्थिति बहुत खराब होगी। ओवरऑल इंडी अलायंस एक प्रकार से पूरी तरह बहुत ही हालत खराब हो जाएगी।

और उन्होंने भी मान लिया है कि, आपने देखा होगा वो कभी वो इलेक्शन कमीशन पर बवाल खड़ा कर देते हैं, कभी ईवीएम पर बवाल खड़ा कर देते हैं, कभी मतदान के आंकड़ों को लेकर के रोना- धोना शुरू कर देते हैं और मुझे लगता है कि उनकी शक्ति इलेक्शन कैंपेन में जनता के पास मुद्दे लेकर के जाने के बजाय उनकी पूरी रिसर्च टीम इस बात में लगी है कि हारने के बाद ठीकरा किसके सिर पर फोड़ें, ईवीएम पर फोड़ें, EC पर फोड़ें या अपने साथियों पर फोड़े तो वो अभी उस व्यूह रचना में लगे हुए हैं।

 

अर्चना: सर, अयोध्या राम मंदिर फुलफिल अ फाइव हंड्रेड योर ओल्ड ड्रीम एंड उस दिन प्राण प्रतिष्ठा के दिन आपका फीलिंग क्या था?

पीएम मोदी: ये आपने बहुत मुझे भावुक कर देने वाला सवाल पूछा है, जिस दिन मुझे ट्रस्टी सब मिलकर के आए थे निमंत्रण देने के लिए राम जन्मभूमि का जो लोग संभालते हैं तो मैं खुद बहुत ऑनर फील करता था कि मेरा सौभाग्य है कि इतने बड़े महत्त्वपूर्ण अवसर में मुझे साक्षी बनने के लिए अवसर मिलेगा, फिर मैंने अपने कुछ परिचित लोग थे जिनसे मैंने पूछा कि अगर इतना बड़ा काम है 500 साल के बाद हो रहा है अनेक पीढ़ियों के सपने इसमें समाहित हैं तो ऐसी स्थिति में मैं अपने आप में एक बहुत जिम्मेवारी अनुभव करता हूं और मैं एक पीएम के नाते या एक पॉलिटिकल वर्कर के रूप में जाने के बजाय साफ अर्थ में इस देश के सामान्य नागरिक के तरह इस देश की महान परंपरा संस्कृति के प्रति समर्पित व्यक्ति के रूप में जाना चाहता हूं तो मैं मन से बाकी चीजों से कट ऑफ होना चाहता हूं और मैं मन से उससे जुड़ना चाहता हूं। कुछ साथियों ने मुझे सुझाव दिया अनुष्ठान वगैरह के लिए फिर मैंने अपने आप तय के लिया कि उन्होंने जो गाइडलाइन दी लेकिन मैंने उससे भी कुछ ज्यादा ही करना तय कर लिया वो जो 11 दिन मेरे अनुष्ठान के थे वो एक अलग ही भक्ति भावना में मैं डूबा हुआ था एक आध्यात्मिक चेतना का मैं अनुभव कर रहा था जब साउथ में गया अलग- अलग मंदिरों में तो मैं कुछ अलग ही फील करता था और मैं बहुत भक्ति भाव से पूरी तरह रम गया था। मैं कह सकता हूं राम में रम गया था। जिस दिन ये अवसर आया मैं अयोध्या पहुंचा और पल- पल मेरे मन में एक अलग ही भाव जगता था और प्रत्यक्ष में जब रामलला की मूर्ति के सामने खड़ा रहा आंखों की चमक एक निर्दोष चेहरा हल्की सी मुस्कान यानी ऐसा लग रहा था कि सचमुच में 500 साल का सपना इसमें मुझे प्रतिबिंब हो रहा। मैं बड़ा भावुक था मेरे पास उस परिस्थिति का वर्णन करने के लिए शब्द तो नहीं है लेकिन उनकी आंखें उसपर व्यक्तित्व है मुझे जीवंत लग रहा था, जैसे हम बात कर रहे हैं, जैसे हम कुछ उनकी तरफ से कोई संदेश आ रहा है हम उस संदेश को स्वीकार करने के लिए जैसे तड़प रहे हैं एक ऐसा नाता था और बीच में कोई कर्टेन नहीं था हम एक बहुत बड़े लोग हैं जो शायद इसको मैं समझा नहीं पाऊंगा कभी भी नहीं समझा पाऊंगा जो मैं फील करता था मैं अभी भी दोबारा एक बार गया था तो जो एक ट्रस्ट के नियम है तो उस प्रकार से मैं गर्भगृह में तो नहीं जा सकता था वहीं से बाहर रहकर के मुझे पूजा करनी थी लेकिन इस बार भी गया तो मुझे वो ही दृश्य याद आया जो पहले दिन मेरे मन में था मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि मैं आज ये दिन बदल चुका है मैं कई महीनों के बाद आया हूं मैं उसी में फिर से एक बार खो गया। बड़ी भक्ति भाव से जो कुछ भी कर सकता हूं कर करके मैं और जब मैं इस प्रकार की स्थिति में होता हूं तो मैं कोई मांगता- मांगता नहीं हूं जी। मेरे मन में 140 करोड़ देशवासी होते हैं उनका कल्याण होता है, मेरे देश का कल्याण होता है और मुझे लगता है कि जब मुझे वहां ट्रस्टियों ने बताया कि साहब यहां लाखों लोग आते हैं यात्री बहुत बड़ी मात्रा में आते हैं लेकिन 20- 30 परसेंट ऐसे यात्री होते हैं जो एक- एक खंभा पकड़ करके रोते हैं बोले हम उनको खंभे से छुड़वा करके दूर करना हमारे लिए मुश्किल हो जाता है शायद ही कोई होगा जिसके आंख में आंसू ना आते हो यानी एक बहुत बड़ी भावुकता का वहां वातावरण होता है तो वहां जो वालंटियर्स है उनके लिए भी सबको संभालना बड़ा मुश्किल हो रहा है, एक अलग ही अलग ही वातावरण है।

 

राजशेखर: You have constructed the magnificent Kashi Vishwanath Corridor in Varanasi and revitalized the city. Is this model you intend to adopt for the development of other religious sites in the country?

पीएम मोदी: पहली बात है कि ये मैंने नहीं किया है। मैं कौन होता हूं करने वाला? ये परमात्मा की कृपा से होता है।

 

राजशेखऱ: आपका नेतृत्व में..

पीएम मोदी: और जनता- जनार्दन भी ईश्वर का रूप है जब उनकी इच्छाएं तीव्र हो जाती हैं, उनकी आकांक्षाएं तीव्र हो जाती हैं तो एक नई ऊर्जा, नया सामर्थ्य पैदा होता है तो मैं शायद निमित्त बना हूं, शायद मां गंगा ने मुझे इसलिए काशी बुलाया होगा और मैं वहां गया। मेरा गुजरात का अनुभव रहा है लंबा अरसे का, हमें टूरिज्म को डेवलप करने के लिए बाहर के किसी मॉडल की तरफ देखने की जरूरत नहीं है। दुनिया को देने के लिए, दिखाने के लिए हमारे पास बहुत कुछ है। अब जैसे जी-20 समिट हुई 200 से ज्यादा मीटिंग हुई और दुनिया के जी-20 से जुड़े हुए टॉप जो नीति निर्धारक टीम होती है ऐसे कम से कम हर देश से 300-300 लोग भारत आए होंगे। उन्होंने भारत के अलग- अलग भाग में, उनको पता ही नहीं हिंदुस्तान इतना विविधताओं से भरा हुआ है, इतनी खुशबू है, इतनी महक है, इतनी चमक है पता ही नहीं था तो उसी प्रकार से भारत में 140 करोड़ देशवासी वो भी अपने आप में एक बहुत बड़ा आपके लिए अगर मार्केट की भाषा में बोले तो वो भी एक बहुत बड़ी अपॉर्चुनिटी है लेकिन हम लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया और उसमें से हमने कई रिफॉर्म किए हैं अब जैसे हमने यात्री सर्किट बनाए हैं, ट्रेनें चल रही हैं जैसे राम प्रभु राम की ही सर्किट की ट्रेन चलती है। एक बार उस ट्रेन में आप बैठ जाइए फिक्स टिकट है आपका अंदर रहना, नहाना, खाना सब उसी में होता है तो बड़ी उम्र के लोगों के लिए बड़ी सुविधा रहती है जहां उतरकर के डेस्टिनेशन पर जाना है तो व्हीकल की व्यवस्था भी उसी में आ जाता है। बुद्ध सर्किट बना हुआ है, जैन सर्किट बना हुआ है तो भारत का जो यात्रा नाम का जो एक पूरा क्षेत्र है उसके लिए बहुत बड़ी और मैं तो चाहूंगा कि कभी आपकी पूरी टीम एक- एक सर्किट की टूर करें कैमरा के साथ मैं सरकार को जरूर बताऊंगा मेरे तीसरे टर्म में तो आप भी देखेंगे क्या भक्ति और अंतर पूरा वातावरण भक्ति का होता है। दूसरा अब काशी विश्वनाथ धाम काशी विश्वनाथ धाम की बात अगर करें मैं काशी का सांसद हूं तो वहां पर मैं समझता हूं कि करोड़ों की तादाद में वहां लोग आए, महात्मा गांधी जी का मैंने पढ़ा था वो काशी आए थे और महात्मा गांधी जी ने बड़ा नाराजगी व्यक्त की थी गंदगी है, अव्यवस्था है इंफ्रास्ट्रक्चर का नाम नहीं है तो मेरे मन में था कि गांधी जी के समय की वेदना अभी तक किसी ने पूरी नहीं की। फिर मेरे मन में आया भाई एक एमपी हूं उस नाते तो करूंगा लेकिन गांधी जी ने जो कहा है मुझे उसका कोई गांधी जी की इच्छा मुझे पूरी करनी चाहिए उस भाव भी मेरे मन में था इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी कुछ किया है हमने वहां सुविधाएं भी बढ़ाई हैं। मैंने अब जैसे वहां पर एक परंपरा है काफी लोग अंतिम संस्कार के लिए वहां आते हैं तो मैंने जल शव वाहिनी बनाई ताकि डेडबॉडी को आने में सुविधा हो तुरंत आएं ले जाएं तो ऐसे कई नई- नई चीजें वहां जोड़ी हैं वहां उसके कारण यात्रियों की संख्या इतनी बढ़ी है और जो विश्वनाथ कोरिडोर बना उसमें काशी वासियों ने बहुत सहयोग किया ना इतनी बड़ी जगह बन नहीं सकते इतने मकान एक्वायर करने थे। ये सारा काम किया, करीब 15 करोड़ से भी ज्यादा लोग वहां आ चुके हैं और जब 15 करोड़ लोग आते हैं तो आप कल्पना करें काशी जैसे स्थान का इकोनॉमी कहां से कहां पहुंच जाएगी? आज वहां पर इकोनॉमी इतनी बूम है और वो ही तो लोगों को रोजगार मिल जाता है, नाविकों को भी काम मिल जाता है, फूल बेचने वाले को काम मिल जाता है, गेस्ट हाउस वालों को काम मिल जाता है, सामान बेचने वालों को मिला, खिलौने बेचने यानी एक प्रकार से हर प्रकार से लाभ हुआ है। 2023 में करीब 20 लाख यात्री बाबा केदारनाथ आये थे। अब उत्तराखंड जैसा राज्य जिसकी इकोनॉमी इस पर डिपेंड है वहां पर इतनी, मतलब पूरे राज्य की इकोनॉमी को वो पूरी ताकत देते हैं यानी अगर पूरी चारधाम यात्रा मैं कहूं तो चारधाम यात्रा में करीब 55 लाख श्रद्धालु उससे ज्यादा श्रद्धालु वहां आते हैं ये पूरा का पूरा वहां की इकोनॉमी है और ये उज्जैन में आप जाएंगे जो महाकाल महालोक बना हुआ है वो पिछले साल मुझे जो बताया गया था अभी जब मैं मध्य प्रदेश गया पांच करोड़ श्रद्धालु आए थे ये अपने आप में श्रद्धा भाव तो है ही है लेकिन उसके साथ- साथ उसके साथ इकोनॉमी भी है और भारत ऐसा देश है कि जिसमें आप जैसे हेमकुंड साहिब है, हेमकुंड साहिब जाने की हमारे सभी सिख भाइयों- बहनों की इच्छा रहती है लेकिन कठिन है सब नहीं जा पाते, अब हम एक रोपवे बना रहे हैं रोपवे बनाएंगे तो अन्य जो श्रद्धालु हैं बड़ी आसानी से जाएंगे बर्फ रहता है लंबा समय तक बर्फ रहता है। उसी प्रकार से हमने करतारपुर कॉरिडोर बनाया हकीकत तो जब भारत- पाकिस्तान की लड़ाई हुई थी 93000 सैनिक भारत के सामने सरेंडर कर दिया, भारत की कैद में थे उस समय जब बातचीत हुई पाकिस्तान के साथ तो उस समय हमें एक शर्त करनी चाहिए थी कि गुरु नानक देव जी के लिए हमारा पवित्र स्थान है करतारपुर साहिब वो हमें मिलना चाहिए लेकिन ये उनको सूझा ही नहीं तो क्या होता था आपको जानकर हैरानी होगी हिंदुस्तान की सीमा के उस पार करतारपुर साहिब है तो यहां पर एक टावर जैसा बनाया है टावर से लोग दूरबीन से करतारपुर साहिब के दर्शन करते थे और कतार लगती थी लोग आते थे ये मैं जब पंजाब में पहले काम करता था मैं सब परिचित था मुझे एक दर्द होता था कि ऐसा अपमान कैसे हम सह सकते हैं, ऐसी हमारी मजबूरियों की जिंदगी क्या होती है? मैंने आकर के यहां कोशिश की और आखिरकार रास्ता निकला आज वहां हमारे लोग आराम से जा सकते हैं, दर्शन करके वापिस आ सकते हैं और बहुत ही सुंदर वहां व्यवस्था खड़ी कर दी हमने तो करतारपुर साहिब कॉरिडोर जो बना है वो भी ऐसा ही है। उसी प्रकार से मेरा मत है कुछ ऐतिहासिक स्थानों का महत्व होता है जैसा तीर्थ स्थान का है वैसा ही है। अब बाबा साहेब अंबेडकर के साथ जुड़े हुए पंच तीर्थ की तरफ मैंने काम किया है जहां बाबा साहेब अंबेडकर का जन्म हुआ, यूके में जहां बाबा साहेब अंबेडकर रहते थे, बाबा साहेब अंबेडकर जहां पर दीक्षा ली, बाबा साहेब अंबेडकर जहां काम करते थे, बाबा साहेब अंबेडकर की जहां अंत्येष्टि हुई इन पांचों स्थानों को मैंने बहुत अच्छी तरह डेवलप किया है एक का काम चल रहा है तो पंच तीर्थ एक प्रकार से बहुत ही लोगों के लिए जो लोग देश में आजादी के बाद जो बदलाव आया उसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बाबा साहेब अंबेडकर उसके जीवन को समझने के लिए पंचतीर्थ की यात्रा बन गई है। दांडी हिंदुस्तान के स्वतंत्र आंदोलन की महत्त्वपूर्ण घटना लेकिन दांडी को भुला दिया गया मैंने पूरा दांडी का पुनर्निर्माण किया, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी मेरे मन में था कि भारत को दुनिया बड़ी ताकत से देखें स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी उससे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी डबल साइज का है ये दुनिया का सबसे बड़ा स्टैच्यू है और पूरी वहां व्यवस्था बनी है तो टूरिज्म को डेवलप करना, सत्ता स्थानों को डेवलप करना हमने इस क्षेत्र का सब भरपूर और ये देश की इकोनॉमी को बल देने वाला है, देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला है और उसके लिए हम काफी कोशिश कर रहे हैं।

 

अर्चना: Sir, Do You Believe Your Continued Electoral Success Is Largely Supported by Women Voters?

पीएम मोदी: मैं पूरी तरह कन्विंस हूं मैं व्यक्तिगत जीवन में फील करता हूं कि मुझ पर देश की मातृ शक्ति का बहुत आशीर्वाद रहा है। मैं तो मेरा सुरक्षा कवच भी मेरी माताओं- बहनों को मानता हूं और जो भाव भक्ति से मातायें- बहनें मुझे आशीर्वाद देती हैं वो उससे बड़ी क्या शक्ति हो सकती है? और मैं भी इस मत का हूं कि समाज की समृद्धि का मूल मानदंड है वहां की नारी शक्ति का सशक्तिकरण, वो ही उसका रास्ता है और इसलिए मैंने आर्थिक दृष्टि से भी इसका महत्व है। अब आपको एंपावरमेंट ऑफ विमेन करना है तो आपको पहले उनकी जो छोटी-छोटी जरूरतों के लिए वो डिपेंडेंट है उसमें से उनको मुक्त करना चाहिए। आप हैरान थे हमारी मातायें- बहनों के पास शौचालय नहीं था, चूल्हा गैस के लिए बड़े-बड़े सिफारिश लानी पड़ती थी, गरीब के पास घर नहीं था, इन सारी चीजों को अब मैंने एक कदम आगे उठाया एक साइकोलॉजी चेंज लाना है कि भाई ये महिलायें सिर्फ पापड़ बनाएगी या आचार बनाएगी क्या इससे बाहर नहीं है मैंने अभी उनको ड्रोन पायलट बनाने शुरू किया इतना एक्सपीरियंस मेरा पॉजिटिव है और इतनी बहुत अच्छे तरीके से वो किसानी की मदद कर रहे हैं और कमाई भी कर रहे हैं। मेरा एक मिशन है लखपति दीदी बनाने का, पहले मैंने ट्रायल किया एक करोड़ तक पहुंचा लेकिन वो तो छिटपुट छिटपुट था अब मैं ऑर्गेनाइज वे में उस पर काम करने वाला हूं और इस बार हमने मेनिफेस्टो में कहा है कि मैं तीन करोड़ लखपति दीदी बनाऊंगा यानी लखपति दीदी वो गांव में छोटे- मोटे काम करते हैं उन लोगों में से है यानी एक प्रकार से भारत की इकोनॉमी को बड़ी ताकत मिलेगी। मुद्रा योजना, मुद्रा योजना में 70 परसेंट उसके जो बेनिफिशियरी हैं वो विमेन हैं जो एंटरप्रेन्योरशिप में आये, सेल्फ हेल्प ग्रुप की अपनी एक ताकत बढ़ी है, सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को मैंने पैसा ज्यादा देना तय कर दिया बिना गारंटी देते हैं और मेरा आनंद ये है कि कोई एनपीए नहीं होता है जितना लोन लेते हैं समय के पहले देते जाते हैं। पार्लियामेंट के अंदर नई पार्लियामेंट बनी तो मेरे मन में था नई पार्लियामेंट में पहला काम कौन सा करुं तो मेरे मन में स्वाभाविक मेरे देश की मातायें- बहनें आईं और भारत की संसद ने सर्वसम्मति से पहला कानून पास किया वो नारी शक्ति बंधन अधिनियम महिलाओं के लिए आरक्षण का काम किया तो मैंने नए संसद के भवन को भी देश की नारी शक्ति को समर्पित करते हुए प्रारंभ किया तो मैं बाकी तो आप देखिए सेना के अंदर आज हमारी बेटियां हैं, खेलकूद में हमारी बेटियां हैं, साइंटिफिक फील्ड में हमारी बेटियां हैं, चंद्रयान की बात हो और इसलिए मैंने वहां नाम भी क्या रखा शिव शक्ति, जहां हमारा चंद्रयान लैंड किया शिव शक्ति, तो मेरा..मेरे..मेरे जो भाव विश्व है उसका प्रकटीकरण हर क्षेत्र में अलग- अलग प्रकार से होता है उसमें मेरा मातृ शक्ति के प्रति मेरा जो श्रद्धा भाव है वो प्रकट होता है।

 

अर्चना: Sir, BJP and TDP are part of NDA, do you still? Consider YS Jagan and alliance in Andhra Pradesh?

पीएम मोदी: मैं नहीं मानता हूं कि आंध्र में वर्तमान सरकार दोबारा जीत सकती है काफी कुछ आर्थिक रूप से बहुत ही हालत खराब है वहां की और उसका प्रभाव नीचे तक है। जगन हमारे पॉलिटिकल एरा कभी नहीं रहे हैं, पार्लियामेंट में तो मुद्दों के आधार पर समर्थन वगैरह मिलता रहता है और हम पहले भी विरुद्ध में ही चुनाव लड़े हैं, हम कभी साथ में चुनाव नहीं लड़े हैं। हम आमने- सामने ही रहे हैं और हम एक प्रकार से चुनाव में हमेशा प्रतिद्वंदी हैं लेकिन अगर वो राज्य के मुख्यमंत्री हैं तो मैं संविधान के तहत बंधा हुआ हूं कि मैं फिर पार्टी नहीं देख सकता फिर मुझे किसी भी पार्टी की सरकार हो मेरा काम है उस राज्य को मजबूत बनाने में उस सरकार की जितनी क्षमता है उसमें क्या मैं एडिशन कर सकता हूं, तो मैं आंध्र के लिए भी करता रहा हूं और वो तो मेरा एक संवैधानिक दायित्व भी है और मेरे देश का जो मेरा सपना है उसमें मैं तो चाहूंगा हर एक राज्य को साथ लेकर के मैं चलूं तो वो नाता एक अलग है। जहां तक चुनाव का सवाल है टीडीपी और बीजेपी तो पहले भी एनडीए में साथ में थे, इस बार जनसेना भी हमारे साथ जुड़ी हुई है जिस प्रकार का लोगों का रिस्पांस है, जिस प्रकार का एक आकर्षण बना हुआ है मैं पक्का मानता हूं एनडीए की सरकार वहां बनेगी और लोकसभा में सर्वाधिक सीटें जीत करके एनडीए आंध्र में आएगी।

 

राजशेखर: Sir, what convinced you to form alliance with Janasena and TDP in Andhra Pradesh?

पीएम मोदी: ये बात सही है कि भारतीय जनता पार्टी का मूलभूत सिद्धांत है कि हमें अधिकतम लोगों को साथ लेकर के चलना चाहिए। ये हमारा मूलभूत सिद्धांत है हमें ये अहंकार नहीं है कि अब भारतीय जनता पार्टी बहुत बड़ी हो गई है अरे चलो भाई हमें क्या जरूरत है हम इस मिजाज के नहीं हैं। इवन पूर्ण बहुमत था हमारे पास फिर भी हमने सभी साथियों को सरकार में रखा था क्योंकि हमारा मूलभूत, भारत जो है भारत की राजनीति अब वो टू कैंप में डिवाइड है एक बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए है, दूसरी तरफ कांग्रेस के नेतृत्व में इंडी अलायंस है जो पहले यूपीए के रूप में जाना जाता था तो हम इस मत के हैं कि अधिकतम राजनीतिक दलों को अपने साथ रखना चाहिए, दूसरा नेशनल पॉलिटिकल पार्टीज उसने रीजनल एस्पिरेशन को रिस्पेक्ट करना चाहिए, रीजनल एस्पिरेशन को एड्रेस करना चाहिए और रीजनल पॉलिटिकल पार्टियां साथ होती हैं तो उसको करने में सुविधा बढ़ती है फुल फ्लेज अगर जैसे गुजरात है गुजरात में आज भारतीय जनता पार्टी पूरी लीडरशिप वैसे वहां अलग से किसी की जरूरत नहीं पड़ती लेकिन तेलंगाना हो या आंध्र हो तो हमें रीजनल एस्पिरेशन को एड्रेस करना चाहिए, ये हम हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य मानते हैं और इसलिए हम छोटे हैं कि बड़े हैं उसके बजाय हम कितने ही बड़े क्यों ना हो हम रीजनल एस्पिरेशन को साथ लेकर चलेंगे और उन मूलभूत विचार के कारण और बीजेपी- टीडीपी पुराने साझेदार रहे हैं एनटीआर समय से सरकार में भी हम एक- दूसरे को सहयोग करते थे तो एक प्रकार से मिलकर के हमने काम किया हुआ है और आपने देखा होगा हम नरसिम्हा राव जी को हमने भारत रत्न दिया वो तो बीजेपी के थे नहीं वो तो कांग्रेस के थे एक बार बीजेपी के द्वारा चुनाव भी हारे थे वो लेकिन सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठा के प्रति हमारा एक आदर का भाव रहता है।

 

अर्चना: Sir, Coming to Telangana How do you evaluate your performance in Telangana?

पीएम मोदी: बीजेपी को क्लीन स्वीप मिलने वाला है पार्लियामेंट के चुनाव में क्लीन स्वीप और उसमें मुझे जरा भी दुविधा नहीं है क्योंकि मैं मैं देख रहा था मैं जब गुजरात में हमारी यहां 80-90 में मेरी पार्टी कैसे डेवलप हुई आज वो सारे एलिमेंट तेलंगाना में देख रहा हूं। वहां के जनता का मिजाज देख रहा हूं तो मैं क्लीन स्वीप देख रहा हूं। मैं.. देश के लोग को बिल्कुल मेरी बात ये याद करेंगे इसको। तेलंगाना में एक मिरेकल आप देखेंगे। कोई दल इतने कम समय में जनता को निराश कर दे इसकी मैं कल्पना नहीं कर सकता। अभी कुछ ही महीने पहले कांग्रेस पार्टी को इतना भारी बहुमत दिया लेकिन वो हर मोर्चे पर विफल होते चले गए हर मोर्चे पर विफल हुए और फिर आप कहो तो मैं राजा हूं मैं कुछ करूंगा नहीं तो मैं समझता हूं कि तेलंगाना की जनता को बीएनएस के प्रति अत्यंत गुस्सा था उसका बेनिफिट कांग्रेस को मिला मुझे नहीं लगता है कि तेलंगाना की जनता का फर्स्ट च्वाइस कांग्रेस थी उनकी मजबूरी थी कि ये तो उन्होंने तो बर्बाद कर दिया चलो जो मिले सो, उसका बेनिफिट मिला कांग्रेस को, कांग्रेस ने उसको जनता को आदर भाव के साथ सेवा भाव से जुड़ने की बजाय वो अपनी सत्ता के अहंकार में जुड़ गए और मैंने तो ‘आर आर फैक्टर’ की बात कही है, ‘डबल आर टैक्स’ की बात कही और मैं तो हैरान हूं वहां के मुख्यमंत्री जी ने बड़ा गजब का बयान दे दिया मैंने सिर्फ ‘डबल आर टैक्स’ कहा है और उन्होंने नाम को कह दिया मैंने तो बोला नहीं तो नाम वो कहां से ले आयें मतलब उनको शायद पता होगा या उनके उनको यही नाम दिखाई दिया होगा तो ऐसा क्यों करते होंगे मुझे समझ नहीं आता है।

 

राजशेखर: Andhra Pradesh and Telangana governments have incurred significant debt to fund their election promises that have proven to be a huge financial burden on state resources, do you believe that this affects developmental activity in the states?

पीएम मोदी: मैं मानता हूं कि वहां आज ऐसी स्थिति है कि सरकार के पास उन राज्यों के लिए कोई विजन ही नहीं है। देखिए, छत्तीसगढ़ भी तो नया बना राज्य था लेकिन छत्तीसगढ़ में बीजेपी को सेवा करने का मौका मिला तो हमने बीजेपी छत्तीसगढ़ को हमने शेप दे दिया, छत्तीसगढ़ एक बड़ा वाइब्रेंट इकोनॉमी वाला सेंटर बन गया वैसा ही नया राज्य बनने के बाद बहुत अवसर था और उनको बहुत मदद भी मिल रही तो आंध्र भी फायदा उठा सकता था, तेलंगाना भी उठा सकता था लेकिन दुर्भाग्य से दोनों एक स्थिति में या तो अंदर- अंदर लड़ो या तो केंद्र से लड़ो उस परिस्थिति में आ गए। उन्होंने जो नीतियां बनाई वो एक तरह से तिजोरी तो खाली कर ही देती थी लेकिन करप्शन को बल देने वाली नीतियां बनीं। उसने भी सारी व्यवस्था को अर्थव्यवस्था को चरमरा दिया, आंध्र में रेत, शराब माफिया ही जैसे आंध्र चला रहे ऐसी चर्चा है, तेलंगाना में भू-माफियाओं का बहुत बड़ा कारोबार चल रहा है उसकी चर्चा है यानी जिनके पास गवर्नर का एजेंडा नहीं है वो ऐसे फालतू चीजें करते रहते हैं अगर आपको जनता के लिए काम करने का एजेंडा हो, रोड मैप हो, इंप्लीमेंट करने के लिए आप पसीना निकाल दो तब तो आप परिणाम देते हैं और वो कमी मैं देख रहा हूं आजकल शॉर्टकट वाला जो खेल चल रहा है और लिखकर के रखो शॉर्टकट विल कट यू शॉर्ट रेलवे स्टेशन पर लिखा हुआ होता है वैसा ही हाल लोगों का।

 

अर्चना: Sir, what is your vision for Telangana? आप कैसा डेवलपमेंट करना चाहते हैं उधर?

पीएम मोदी: एक तो संपूर्ण देश का जो विजन है हम 2047- विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर के चलना चाहिए तो भारत सरकार एक डॉक्यूमेंट तैयार कर रही है। काफी मात्रा में हमने कर लिया है। मैं चाहता हूं कि राज्यों ने और केंद्र सरकार ने मिलकर के एक ही दिशा में विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर के चलना चाहिए और उसमें हमारी तेलंगाना के पास अपनी समृद्ध विरासत है, क्षमता है। पहले के जमाने में तो मुंबई, कलकत्ता, चेन्नई, दिल्ली चार शहर जाने जाते थे। बेंगलुरु, हैदराबाद अपने एक ताकत को लेकर के दुनिया में उनका नाम हुआ लेकिन राजनीतिक स्थितियों ने स्थितियां बिगाड़ दी मेरी दृष्टि से ये होलिस्टिक प्रोग्रेस है तेलंगाना में चार मैं पहलू देता हूं, एक हमने आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर में जितनी तेजी कर सकते हैं करनी चाहिए, दूसरा ग्रामीण क्षेत्र में कृषि का विकास और वैल्यू एडिशन ये दोनों चीजों पर बल देना चाहिए और मैंने देखा है कि तेलंगाना में और आंध्र में कुछ किसान नेचुरल फार्मिंग की तरफ बल दे रहे हैं उसको बढ़ावा देंगे तो और और उनका एक ग्लोबल मार्केट मिल सकता है तो उन दिशा में फिर एग्रो प्रोडक्ट का प्रोसेसिंग इस पर बल देना चाहिए हम इंडस्ट्रियल पार्क की तरफ वहां जा रहे हैं ताकि वहां कॉटन के ग्रोवर है तो उसको भी बहुत बड़ा लाभ होगा, कुछ स्थान पर गन्ना किसान हैं तो हम इथेनॉल पर जा रहे हैं उनको बहुत बड़ा लाभ की संभावना है, दूसरा अब जमाना है अर्बनाइजेशन होना ही होना है जी हम रोक नहीं सकते तो अब रोके बैठना कि अर्बनाइजेशन को अपॉर्चुनिटी मानना मैं मानता हूं कि भारत के नेतृत्व के हर राज्य के पॉलिटिकल लीडरशिप की नेतृत्व की कसौटी ये है कि वो अर्बनाइजेशन को अपॉर्चुनिटी मानें और अभी से प्लानिंग करें और इसलिए मुझे लगता है कि तेलंगाना के पांच- सात शहरों को मोस्ट मॉडर्न डेवलप करने की दिशा में जाना चाहिए। हैदराबाद को तो ग्लोबल सिटी के रूप में डेवलप करना चाहिए क्योंकि हैदराबाद का ग्लोबल वैल्यू है हैदराबाद कोई एक राजधानी ऐसा नहीं है भारत का एक शहर ऐसा नहीं है उसकी अलग अहमियत है, खेलकूद में हैदराबाद कितना बड़ा कर रहा है जी यानी इसलिए मैं मानता हूं बहुत कुछ हम वहां कर सकते हैं। चौथा है सामाजिक न्याय, मैं मानता हूं सोशल जस्टिस के बिना हम समाज में इतना बड़ा अंतर हो कुछ लोग बहुत आगे हो कुछ लोग पीछे हो तो ये नहीं चल सकता उसके लिए जो भी आवश्यक है वो कदम उठाना चाहिए तो इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास अब जैसे हमने नेशनल हाईवे छह लेन बना रहे हैं, रेलवे, एमएमटीएस नेटवर्क का विस्तार हम कर रहे हैं। हैदराबाद सहित प्रमुख शहरों में वंदे भारत मेट्रो ट्रेन उस दिशा में हम काम कर रहे हैं, उसी प्रकार से प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले हाई स्पीड कॉरिडोर का निर्माण, ये हाई स्पीड कॉरिडोर बहुत बड़ी ताकत बनने वाला है लॉजिस्टिक हब के रूप में वो एक प्रकार से कॉरिडोर काम आने वाले हैं। अब जैसे नेशनल टरमरिक बोर्ड की बात है, नेशनल टरमरिक बोर्ड हम बहुत दिनों से मांग थी हमने पूरा कर दिया है। रिसर्च इस पर हमने सरकार ने बहुत बड़ा धन दिया। हमारा देश आने वाले दिनों में एक प्रकार से फार्मेसी का हब बनेगा और जब मैं फार्मेसी का हब बनेगा कहता हूं तो हैदराबाद में पोटेंशियल बहुत है, तेलंगाना में पोटेंशियल बहुत है तो इन सारी चीजों में अगर विकास में बल देंगे तो बाकी तो डिजिटल है कई चीजें हैं जिसको हम लेकर के आगे बढ़ सकते हैं। एक जो मैं सामाजिक न्याय की बात करता हूं अब देखिए मडिगा समाज इतने लंबे समय से उनके उनको तड़पाया जा रहा है। मैंने खुलकर के कहा मडिगा समाज न्याय करने के लिए मैं पूरी तरह उनके साथ खड़ा हुआ हूं। एससी समुदाय के हितों की रक्षा वहां बंजारा समाज इतना बड़ा है उनको छोटी- छोटी चीजों के लिए लटकाया हुआ है यानी एक प्रकार से हमें इन चीजों की चिंता करनी चाहिए और इनकी रक्षा के लिए मैं हमारी मैंने हाईलेवल कमेटी भी बनाई है, मैं इस पर काम भी कर रहा हूं।

 

राजशेखर: On one hand you say there is RR tax and on other hand BRS party involved in elections scam what action will BJP take against corruption?

पीएम मोदी: जहां तक भ्रष्टाचार का विषय आपने निकाला है देखिए मैं समाज भ्रष्टाचार का मेरा किसी राज्य से वो सीमाओं में बंधा हुआ विषय नहीं है, ना दलों से बंधा हुआ विषय है, ना समय से बंधा हुआ विषय। मेरे लिए हिंदुस्तान के उज्ज्वल भविष्य के लिए भारत को इस बीमारी से मुक्त करना बहुत जरूरी है। कुछ लोगों को लगता है कि असंभव है, असंभव नहीं है मुझे देखिए पहले हमारी यहां आज से 15 साल पहले ब्लैक मार्केट शब्द सुनने को मिलता था आज ब्लैक मार्केट शब्द करीब- करीब हट गया है, पहले तो सिनेमा- थिएटर पर भी ब्लैक में टिकट ले आइये आज वो शब्द चले गए क्यों तो समाज जीवन में टेक्नोलॉजी है एफएन सोसाइटी बनती जा रही है उत्पादन की विपुलता हो जा रही है तो फिर वो धीरे.. धीरे.. धीरे.. धीरे हटता जाता है अगर ब्लैक मार्केट जैसा इतना बड़ा भारी शब्द था वो खत्म होते.. होते.. होते कहीं पर कभी सुनने को मिलता है। मैं मानता हूं देशवासी विश्वास करें भ्रष्टाचार भी शब्द यानी एक पीढ़ी ऐसी आएगी शायद भ्रष्टाचार उनके लिए सवाल पूछेंगे भ्रष्टाचार क्या होता है? ये हो सकता है लेकिन इसके लिए कमिटमेंट चाहिए, मेरा कमिटमेंट है मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा हूं और सिस्टमैटिक गवर्नेंस की व्यवस्थाओं में बदलाव करके और दूसरा जो आदतन पाप करने के आदि लोग हैं जो भ्रष्टाचार को अपना हक मानते हैं वो कानून के दायरे में आने चाहिए। अब बीआरएस के नेता जेल में हैं, कोर्ट में उनको बेल नहीं मिल रही है पार्टी का नाम बदला लेकिन ब्लॉक लेवल तक उनकी पार्टी आज बची नहीं है अब वो अनाप- सनाप भ्रष्टाचार कर करके वो मानते थे मैं दुनिया को खरीद लूंगा देश की राजनीति को इंप्रेस करूंगा रुपयों के सहारे सिद्ध हो गया ये संभव नहीं है, हो सकता है आपके पास रुपयों के पहाड़ के पहाड़ पड़े होंगे और तेलंगाना के लोगों ने इस बीमारी पर गुस्सा व्यक्त किया और साफ कर दिया परिवारवाद इसके प्रति देश का बहुत रोष है क्योंकि परिवारवाद देश के टैलेंट को पूरी तरह नकारता है किसी भी आप हैरान हो जाएंगे उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने कुछ सीट यादव कम्युनिटी को दी है लेकिन यादव समाज में से एक भी यादव नहीं है सारे के सारे यादव उनके फैमिली मेंबर हैं तब किसी भी यादव को गुस्सा आएगा कि भाई ये क्या राजनीति है? अब देखिए हम कैसे हैं मध्य प्रदेश में हमारे मुख्यमंत्री हैं यादव कम्युनिटी से हैं हमने वोट बैंक के आधार पर तय नहीं किया उनके पास अनुभव था पहले भी सरकार में रहे थे संभाल सकेंगे हमको विश्वास था तो उनको हमने बनाया। यहां परिवार के बाहर जाने को तैयार नहीं है वैसा ही हाल हो गया है दक्षिण के राज्यों में और इसलिए और परिवारवाद के साथ डेफिशियेंट ऑफ टैलेंट तो आता ही आता है उनकी सब चीजों में कमियां- बुराइयां उजागर होती थी क्योंकि घर में ही सब छुपा देते हैं। भ्रष्टाचार उसी में पड़ा हुआ है जी। ये सारी एक एक प्रकार सी बहुत बीमारी फैल चुकी है जी और मैं उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई करता ही रहूंगा जो भी कानून की मर्यादा में होगा वही मैं करता हूं और उसके कारण मुझे मेरी आलोचना होती हो कोई कहे कि विन्डिक्टिव है या मैं किसी गांव में डॉक्टर को अरेस्ट कर दू तो मैं विन्डिक्टिव नहीं हूं लेकिन पॉलिटिकल व्यक्ति को अरेस्ट कर दू तो क्या मैं विन्डिक्टिव हूं? ये क्या तर्क है? हमने जितने केसेस किए हैं ना ओनली 3 परसेंट पॉलिटिशियन हैं, 97 परसेंट अलग लोग हैं जी।

 

अर्चना: Sir, before we conclude I would like to ask you about something I believe that is close to your heart ‘Mann Ki Baat’ which has brought you very close to the common people of India What is your inspiration behind this?

पीएम मोदी: दरअसल, इसके पीछे एक स्पार्किंग प्वाइंट है मेरे, हुआ था ऐसा की जिन दिनों अटल जी की सरकार थी और अटल जी की सरकार ने न्यूक्लियर टेस्ट किया था, मैं उस समय हिमाचल में भाजपा का काम करता था तो मैं ट्रेवल कर रहा था तो वहां रास्ते में ढाबे पर मैं चाय पीने के लिए रुका वहां थोड़ी ठंड भी होती है काफी पहाड़ों में था तो जो छोटे से ढाबे वाला था वो नाच रहा था और उसने जो भी बेचारा बेचता था उसमें से मिठाई का जो कुछ पीस भी था मेरे मुंह में नहीं साहब पहले मैंने कहा भाई जरा शांत होकर के बताओ मुझे क्या है तो बोले आज भारत ने बम फोड़ दिया, मैंने कहा क्या बोल रहे हो अरे बोले साहब देखिए रेडियो सुनिए, रेडियो पर आ रहा है मैंने उस दिन फील किया रेडियो की ताकत क्या है? मेरे मन को वो बात छू गई थी ये रेडियो ही एक बहुत बड़ा जनता से जुड़ने का साधन है जब मैं यहां आया तो मेरी टीम के लोगों ने थोड़ा इसको वर्कआउट किया उसको थोड़ा सिस्टमैटिक प्रोफेशनली कैसे किया जा सकता है? फिर मेरे कुछ उसमें बात बातें थीं मैंने कहा एक मैं ‘मन की बात’ करूंगा तो रेगुलर करूंगा ऐसा नहीं है कि मेरा मूड कर गया तो करूंगा यानी रिलीजियसली मैं उसको करूंगा दैट वाज माय वन प्वाइंट और मैंने वो किया हर महीने लास्ट रविवार को करना है, चुनाव था तो मैंने सामने से कहा कि मैं अब तीसरी टर्म में ही करूंगा मैं प्रधानमंत्री के बनने के बाद चुनाव एक बार समाप्त हो जाए उसके बाद मैं करूंगा तब तक नहीं करूंगा तो मैं डिसिप्लिन भी फॉलो करता हूं। दूसरा मेरा आग्रह था मैं इतने बड़े महत्त्वपूर्ण माध्यम का उपयोग मेरी सरकार की वाहवाही के लिए नहीं करूंगा यानी मेरा बिल्कुल ही रेड लाइन है मेरे इस सरकार के कार्यक्रम और सरकार के वाहवाही बिल्कुल नहीं करूंगा। तीसरा मैं इसको जन सामान्य की प्रेरक जो बातें होती हैं जो हमें सबको इंस्पायर करती है उस पर ध्यान केंद्रित करूंगा और लोग मुझे चिट्ठियां लिखते हैं बहुत लाखों चिट्ठियां आती हैं और मैं सच बताता हूं मेरा देश इतना समृद्ध है जो कहते हैं ना भारत बहु रत्ना वसुंधरा है, गांव- गांव में से रत्न हैं जी क्या कुछ नहीं करते मैं ‘मन की बात’ में बहुत कम बातें बता सकता हूं क्योंकि मैंने 30 मिनट का समय रखा है लेकिन जब मैं वो पढ़ता हूं या उसमें से जानकारी लेता हूं मुझे ऊर्जा से भर देती है जी मेरे लिए वो इंस्पिरेशन बन जाता है अच्छा वो गांव में वो महिला, अभी मैं महिला को मिला मेरा इलेक्शन टूर में जा रहा था तो एक फल बेचने वाली मां है नाम था मोहिनी गौड़ा वो सफाई के लिए बहुत काम करती है तो मैंने इच्छा व्यक्त की थी कि मैं जरा उनके दर्शन करना चाहूंगा तो मैं उनको प्रणाम किया माई क्या इंस्पिरेशन है आपका तो ये मेरे मन में रहता है कि जो समाज के लिए अच्छा काम करते हैं तो इसका हमारा मतलब है कि भाई ये जो छवि है कि राजनेता ही देश में काम करते हैं ऐसा नहीं है तो ऐसे बहुत लोग हैं जी जिनको मेरा मेरे मन में इनके प्रति बड़ा आदर होता है तो उनकी बात में दुनिया को बताऊं और मैं जब बताता हूं तो उसका एक मान्यता बढ़ जाती है क्योंकि मेरे पास एक पद है लेकिन सचमुच में भारत के पास ये इसने एक वातावरण बनाया है जैसे स्वच्छता, स्वच्छता के विषय को मैंने ‘मन की बात’ में कि मुझे बहुत बल मिला क्योंकि मुझे पता चलना वो तो बहुत काम कर रहे हैं तो मैं उनकी बात बताने लगा। मैंने एक बार ‘मन की बात’ में सेल्फी विद डॉटर कहा डॉटर के प्रति हर घर में गर्व होने लगा अरे मेरी बेटी के साथ सेल्फी करूं तो पूरी साइके बदल देता है ये और कुछ लोगों ने बहुत बड़ी रिसर्च की है कुछ यूनिवर्सिटीज ने रिसर्च की है जो ये ‘मन की बात’ का सोशो रिफॉर्म (45.43) की दृष्टि से क्या एक इंस्ट्रूमेंट है तो मैं इसको एक बड़ा अपना पवित्र काम मान करके करता हूं।

अर्चना: प्रधानमंत्री जी, थैक्यू।

पीएम मोदी: मुझे बहुत अच्छा लगा मेरे पास समय कम था।

अर्चना: थैंक्यू थैंक्यू, फोर योर टाइम सर

पीएम मोदी: मेरी तरफ से आपके सभी दर्शकों को मेरा प्रणाम और तिरुपति बालाजी की कृपा हम सब पर बनी रहे और हम सब देश का भी भला करें, विकसित भारत का सपना पूरा करें, सबको मेरा नमस्कार।

अर्चना: थैंक्यू सर।

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भारत न केवल फास्ट- ग्रोइंग इकोनॉमी है, बल्कि एक क्रेडिबल इकोनॉमी भी है: पीएम मोदी
June 22, 2026
भारत न केवल तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है, बल्कि एक भरोसेमंद अर्थव्यवस्था भी है: प्रधानमंत्री
एक उभरती हुई ताकत होने के साथ-साथ, भारत एक विश्वसनीय ताकत भी है: प्रधानमंत्री
भारत के लिए 'राष्ट्र प्रथम' ही सबसे बड़ा मार्गदर्शक सिद्धांत है: प्रधानमंत्री
भारत में माओवादी आतंक अब अपने अंतिम चरण में है: प्रधानमंत्री
"यह कभी नहीं हो सकता" वाली सोच से बदलकर "यह होकर रहेगा" वाली सोच अपनाना भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि है: प्रधानमंत्री
सरकार गरीबों और मध्यम वर्ग को सशक्त बना रही है: प्रधानमंत्री
140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक प्रयासों से ही 'विकसित भारत' का सपना साकार होगा: प्रधानमंत्री

स्वर साधना, मनोकामना, आराधना। एक बहुत ही शुभ शुरुआत के बाद। अच्छा होता आप ही का कार्यक्रम चलता। आप सबको नमस्कार।

रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के सभी दर्शक और अब तो बहुत सारी भाषाओं में भी है, तो उन सबको भी मेरा प्रणाम! मैं इस समिट में हिस्सा लेने आए सभी साथियों का भी अभिनंदन करता हूं। 24 घंटे चलने वाले चैनलों में ब्रेकिंग न्यूज इसका बहुत बड़ा महत्व होता है। और आजकल तो दुनिया में ही, पूरी दुनिया में कहीं पर भी नजर डालो, पूरी दुनिया ब्रेकिंग न्यूज के मोड पर ही है, और इतनी भागदौड़ में आप सभी, इस समिट को होस्ट कर रहे हैं, इसका हिस्सा बने हैं। और इसलिए आप विशेष बधाई के पात्र हैं। और इस बार आपकी चर्चा का विषय भी उतना ही अहम है...Great Power India: Nation First...

साथियों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है...यतो धर्मस्ततो जयः ! यानि जय का, शक्ति का, मूल धर्म है। और धर्म यानि ड्यूटी, धर्म यानि जस्टिस, धर्म यानि समभाव, धर्म यानि संवाद, धर्म यानि संवेदना और यही तो नेशन फर्स्ट की भावना में भी समाहित है। भारत, अपनी पावर को इसी लैंस से देखता है, इसी तराज़ू पर तौलता है।

साथियों,

भारत की एक और विशेषता है और अब तो दुनिया ने भी मान लिया है। हम किसी क्षणिक घटना पर उतावले होने वाले देश नहीं है, हम वो हैं जिसने विकास और विनाश, देखा भी झेला भी है। हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमरी चिप लगी हुई है, हम युगों की मेमरी चिप वाले नेशन हैं। और इसलिए भारत आज जो कर रहा है, और ये मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ, भारत जो कर रहा है वो आने वाले एक हज़ार वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है। और यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है। भारत, Fast-Growing Economy भी है। एक Credible Economy भी है। और भारत, rising power के साथ-साथ और अभी आप तो ढेर सारी डिक्शनरी लेकर बैठ गए थे, सुपर पावर तक ले गए। लेकिन मैं इतना जरूर कहूँगा कि भारत Reliable power है। मैं अभी दो-तीन दिन पहले G7 समिट से लौटा हूं और दुनिया का हर नेता हर देश इस बात को भली-भांति समझता है कि आज के भारत के लिए नेशन फर्स्ट ही सबसे बड़ा मंत्र है, सबसे बड़ा सिद्धांत है।

साथियों,

कुछ दिन पहले ही, हमारी सरकार को 12 साल पूरे हो चुके हैं। उसके लिए भी अर्नब ने आपको तालियाँ बजाने के लिए मजबूर कर दिया। पिछले बारह वर्षों की जो भी सिद्धियां देश की रही हैं, उनके मूल में अगर आप तराजू से तौलोगे, हर निर्णय, हर कदम, हर प्रयास उनके मूल में राष्ट्र प्रथम की भावना ही केंद्र में है। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर मेक इन इंडिया खादी खरीदने पर जोर स्थानीय वस्तुएं खरीदने पर जोर ये सारे Initiative इसलिए सफल हुए क्योंकि देश की जनता ने देश को सबसे ऊपर रखते हुए अपना कर्तव्य निभाया। देश के नागरिकों को मैं सलाम करता हूँ।

साथियों,

यहां हमारे साथी श्रीधर वेंबु जी बैठे हैं। जब हमारे उद्यमी नेशन फर्स्ट की भावना के साथ चलते हैं, जब वो देश की आवश्यकताओं को समझते हुए अपने लक्ष्य बनाते हैं तो संस्थाएं भी बनती हैं और देश भी समृद्ध होता है। श्रीधर वेंबु जी ने क्या काम किया है, शायद यहाँ बातों में कितना निकला होगा मुझे मालूम नहीं, लेकिन अभी मैं फ़्रांस में vivatech में गया था, करीब डेढ़ 2 लाख नौजवान वहाँ होंगे, चलने के लिए भी मैं और फ्रांस के राष्ट्रपति अलग अलग स्टॉल पर जा रहे थे, देखने के लिए भई नौजवानों ने क्या काम किया है। तो हम जोहो के स्टॉल पर गए, मैं हैरान था जी, और गर्व होता था कि जोहो के स्टाल पर यूरोप के नौजवानों की जो भीड़ लगी थी और वो समझना चाहते है कि क्या है ये दुनिया में नई चीज, भारत में शायद उतनी चर्चा नहीं होगी, जितनी मैंने वहाँ फ्रांस में देखी, बधाई हो आपको।

साथियों,

सरकार की नीति और निर्णयों में नेशन फर्स्ट का क्या प्रभाव होता है, इसका एक उदाहरण हमारा आदिवासी क्षेत्र है। मैं आज कोई फिलोस्फी झाड़ने वाला नहीं हूँ, कुछ बातें जो हुई है वो हल्की फुल्की बता दूंगा और उससे आप अंदाज लगा लेंगे कि काम कैसे होता है। मैं आदिवासी क्षेत्र की बात करता हूँ। भारत के 10 करोड़ से अधिक आबादी की चर्चा, मतलब कि आदिवासी समाज की चर्चा और हम सबको पता है कि दशकों से माओवादी आतंक वहाँ अपने डेरा तंबू डालकर बैठ हुआ था। जहां 21वीं सदी में भी इन आतंकियों ने एक भी सुविधा पहुंचने नहीं दी, सरकारी एक वेहिकल नहीं गुजर सकता था वहाँ से। गोलियों से भून दिया जाता था। अनेक सरकारें आई-गईं, कई पीढ़ियां आई-गईं, लगता था कि हिंसा का ये दुर्भाग्य ऐसे ही रहेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, 2004 से 2014 के बीच, मैं उस दस साल का हिसाब बताता हूँ, 2004 से 2014 के बीच माओवादी आंतक के कारण, 17 हज़ार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थीं। और करीब-करीब 7 हज़ार से ज्यादा जानें गईं थी।

साथियों,

आज आपके लिए वन लाइन न्यूज होगा या टीवी पर आधे घंटे डिबेट होगी कि माओवाद आतंकवाद खत्म हो गया, चीजें ऐसी नहीं होती। उसके लिए खपना पड़ता है और इसलिए मैं बताना चाहता हूँ। और इसलिए मैं बताना चाहता हूं और आजकल जो लोग, कुछ लोग संविधान दिखाते रहते हैं, लेकिन जब ये लोग सरकार में थे और नक्सल प्रभावित इलाकों में संविधान का नाम लेने पर गोली मार दी जाती थी और तब ये लोग चुप बैठे थे, तब उनके हाथो में संविधान नहीं दिखता था, कांप रहे थे उनके हाथ। उस दर्दनाक स्थिति से कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ता था।

साथियों,

2014 के बाद, हालात को बदलने के लिए हम राष्ट्र प्रथम के भाव से आगे बढ़े, हम निकल पड़े। बोलते नहीं थे, बताते भी नहीं थे, करते जरूर थे। हमने संकल्प लिया कि नक्सलवाद-माओवाद को जड़ से उखाड़ फेकेंगे और आज पूरा देश नतीजा देख रहा है, आज देश में माओवादी आतंक, अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

और साथियों,

कई बार अंतिम परिणाम इतना बड़ा और व्यापक होता है कि उसके पीछे की मेहनत पर ध्यान नहीं जाता। रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को मैं खासतौर पर इसके बारे में बताना चाहता हूं।

साथियों,

जिन नक्सल प्रभावित इलाकों में दिन में जाने से भी, यानी सामान्य मानवी डरा रहता था, उसको लगता था कहीं अपहरण हो जाएगा तो, कभी वसूली का डर रहता था, कभी साथ में जो कुछ भी है वो लूट लेने का डर रहता था। और जहां पर विकास की बात बोल तक नहीं सकते थे आप, लेकर के जा नहीं सकते थे, सब नामुमकिन था, ऐसे क्षेत्रों में हम हम विकास का संकल्प लेकर आगे बढ़े। वहां बीते 12 वर्षों में हमारी सरकार ने 12 हज़ार किलोमीटर से अधिक की सड़कें बनाईं। और कई बार तो हमने देखा, कई बार तो हमने देखा कि सड़क बनाने के जो हमारा साजो सामान होता है उसको जला दिया जाता था। कांट्रेक्टर को भगा दिया जाता था। अगर 25 लोग रोड पर काम करते तो 200 लोग पुलिस सुरक्षा रखते थे ताकि काम चले। यह सब इसलिए करते थे- तय किया था।

साथियों,

साढ़े 9 हज़ार से अधिक मोबाइल टावर बनाए। एक टावर नहीं लगने और लगा हुआ टावर तोड़ देते थे। क्योंकि उनको हमेशा वहां आक्रोश पैदा करना था। करीब 45,000 गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई। नक्सल प्रभावित जिलों में 1800 से अधिक बैंक ब्रांच खोली गई। करीब 75,000 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और 6000 से अधिक नए पोस्ट ऑफिस बनाए गए। सिर्फ बम, बंदूक और गोली के सहारे काम नहीं किया है साथियों, हमने दिलों को जीतने के लिए, ईश्वर ने जो भी शक्ति दी थी उसको खपाया था।

साथियों,

हम बुलंद इरादों के साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में जनसामान्य की आशा, आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए जा रहे थे। आप हैरान हो जाएंगे एक मशहूर नक्सली, करोड़ों रुपए का इनाम थे उसके, उसकी मां के पास हम पहली बार राशन कार्ड लेकर गए। बेटा अपनी मां को राशन कार्ड लेने नहीं देता था, आतंकवाद अपना चलाने के लिए। इतनी घटनाएं हैं, मैं हैरान था। और सरकार चुप बैठी थी, उनको संविधान उस समय तो दिखता नहीं था। लेकिन इन सारे प्रयासों का परिणाम यह आया कि जन सामान्य में एक विश्वास का नया दौर आया। आज आप देखिए बस्तर जैसे इलाकों में बम बंदूक नहीं बस्तर ओलंपिक्स की धूम है। और अब तक इस ओलंपिक के दो एडिशन हो चुके हैं। पहली बार डेढ़ लाख से अधिक युवाओं ने और दूसरी बार करीब 4 लाख युवाओं ने बस्तर ओलंपिक्स में हिस्सा लिया। यानी जहां कभी टेरर था, वहां टैलेंट को अवसर मिल रहा है, वहां स्पोर्ट्स फल-फूल रहा है।

साथियों,

12 वर्षों के इस सेवाकाल की एक और बड़ी सिद्धि रही है, यह सिद्धि है, निराशा से निकलकर आशा-आकांक्षा सबसे भरे भारत का निर्माण।

साथियों,

नक्सल कहीं और होगा लेकिन घटनाओं की पीड़ा हिंदुस्तान के हर कोने में होती थी और जिस समय नक्सल खत्म होने की बातें आने लगी तो विश्वास सिर्फ नक्सली इलाके का नहीं, हिंदुस्तान के कोने-कोने में जगने लगा। 2014 से पहले के 10 वर्षों में जो कांग्रेस सरकार चली, उससे नाराजगी केवल गवर्नेंस की नहीं थी। तब देश की निराशा इससे कहीं अधिक थी, देश उम्मीद खो चुका था, लोगों को लगता था कि कुछ हो ही नहीं सकता, कुछ बदल ही नहीं सकता।

साथियों,

पिछले 12 वर्षों में भारत ने उसी निराशा को आशा में बदला है और मुझे इस बात का सबसे ज्यादा संतोष है। आज हर किसी को यह लगता है कि थोड़ी और मेहनत करेंगे, तो यह हो सकता है। वो दिन चले गए जब एक ही बात सुनाई देती थी, कतई नहीं हो सकता, कतई नहीं हो सकता, वो जमाना चला गया, आज ये होकर रहेगा। ये जो भाव आया है यही भारत की असली सिद्धि है, और यही रियल पावर है। चुनौतियां तो आज भी बहुत है और हमेशा रहेगी और चुनौतियां बहुरूपिया होती है, वो नए-नए अवतार में सामने आती रहती है, अरे आएगी, जिस रूप में आएगी, जंग उससे भी लड़ लेंगे जी और जीत भी लेंगे। लेकिन यह हो सकता है और हम यह करके रहेंगे, जब इस भाव से देश आगे बढ़ता है, तब सपने पूरे होते हैं।

साथियों,

मैं यहां भारत के 100 से ज्यादा जिलों और 500 से ज्यादा ब्लॉक्स की चर्चा करना चाहूंगा। यह विकास के हर पैरामीटर पर पीछे छूट गए थे और पहले की सरकार ने इन पर पिछड़ा होने का ठप्पा लगा दिया था, यह तो बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट है, ये तो बैकवर्ड इलाका है। हमने देश के इस बहुत बड़े क्षेत्र को पिछड़ेपन की निराशा से बाहर निकालकर डेवलपमेंट की एस्पिरेशन जगाई। सबसे पहले तो हमने पहचान ही बदल दी, हमने कहा ये एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट है, ये एस्पिरेशनल ब्लॉक है, हमने एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट का प्रोग्राम बनाया, एस्पिरेशनल ब्लॉक का प्रोग्राम बनाया और सरकार ने विकास के हर पैरामीटर पर बहुत बारीकी से काम शुरू किया। इस डिस्ट्रिक्ट में ये तीन पहलू है, पहले उसमें से बाहर निकलो। यहां छह पहलू है, पहले इसमें से बाहर निकलो। बड़ा फोकस वे में काम शुरू किया। आज यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट और ब्लॉक्स राज्य की ओवरऑल ग्रोथ को आगे बढ़ाने का काम करने लगे हैं। जो पहले ग्रोथ को पीछे खींचते थे, इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में बहुत बड़ी आबादी गरीब थी, अभाव में थी। बीते वर्षों में 25 करोड़ गरीबों ने गरीबी को परास्त किया है। तो इसमें इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट की एक बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

हम देखते हैं कि जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो सिर्फ घर का वो व्यक्ति ठीक होता है ऐसा नहीं है। जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो पूरा परिवार ठीक हो जाता है। ऐसे ही, जब घर का कोई एक बेटा-बेटी कुछ अचीव करता है, तो सिर्फ वो व्यक्ति अचीव करके नहीं आता, वो पूरा परिवार, पूरा परिवार अचीवमेंट से भर जाता है, विश्वास बदल जाता है। ऐसे ही, जब कोई गरीबी से बाहर आता है, तो सम्पूर्ण समाज का फायदा होता है, देश का फायदा होता है। 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, निओ मिडिल क्लास में आए हैं, तो इसका फायदा केवल उन परिवारों तक नहीं रहता, बल्कि मिडिल क्लास का भी इसमें फायदा होता है। क्योंकि यह नया कंज्यूमर है, जो इकोनॉमी को ड्राइव करता है, उससे अल्टीमेटली मिडिल क्लास के लिए अवसर बनते हैं। यानी गरीबी कम होना केवल वेलफेयर का ही विषय नहीं है, यह अवसरों के विस्तार की गाथा है, नई एस्पिरेशंस की प्रेरणा है।

साथियों,

पिछले 12 वर्ष में जो इतना विशाल मिडिल क्लास देश में तैयार हुआ है, वो सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। मिडिल क्लास की Ease of Living के लिए सरकार ने हर स्तर पर काम किया है। अब जैसे अपने घर का सपना है। हर मिडिल क्लास परिवार की एक इच्छा रहती है कि भई खुद का घर हो, हर किसी को पूछोगे एक मन में रहता है मेरा अपना घर हो। 2014 में अगर किसी परिवार को अपना घर खरीदना होता था, तो होम लोन डबल डिजिट के इंटरेस्ट रेट पर मिलता था। लेकिन आज किसी भी बैंक से होम लोन 7-8 परसेंट के रेट पर मिल जाता है। पहले लोन लेना भी किसी युद्ध जीतने जैसा था, युद्ध जीतने में जितनी ताकत लगती थी, उतनी लोन लेने में लगती थी। आज यह घर बैठे ही संभव हो पा रहा है। मैं यहीं की बात बताता हूं, यह दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोग जानते हैं कि कैसे शहरी मिडिल क्लास के हजारों घर अधूरे अटके हुए थे। पैसे दे दिए थे, पूरे जिंदगी भर की कमाई बिल्डर को दे दी थी। उसने भी बढ़िया-बढ़िया पम्पलेट दिखाए, सपने दिखाए। अभी किराए पर घर में रहते हैं, तो किराया भी देना है, घर जल्दी मिलेगा। उधर किराया रहता है, घर मिल नहीं रहा, घर बन नहीं रहा, यह बहुत बुरा हाल था। इन अधूरे घरों को पूरा करने के लिए हमने 25 हजार करोड़ रुपए का स्पेशल फंड बनाया। और आपको जानकर खुशी होगी कि देश में बरसों से अटके करीब 60 हजार घरों को डिलीवरी किया जा चुका है।

साथियों,

एक और चीज है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। यह जरूरत है, कनेक्टिविटी की, ट्रांसपोर्ट की। आज आप सोशल मीडिया में देखिए, दुनियाभर से जो भी टूरिस्ट आता है, भारत आता है, वो हमारे मेट्रो सिस्टम को देखकर हैरान रह जाता है।

साथियों,

वर्ष 2014 में करीब 28 लाख लोग, हर रोज मेट्रो से सफर करते थे। आज करीब एक करोड़ अठाइस लाख लोग हर रोज मेट्रो से सफर कर रहे हैं। अब वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेन्स देश को कनेक्ट कर रही हैं। अच्छी सड़कों, अच्छे हाईवे से, समय तो बच ही रहा है, गाड़ियों की मैंटेनेंस पर होने वाला खर्चा भी कम हुआ है। बीते वर्षों में एयरपोर्ट्स की संख्या डबल हुई है। इससे कई छोटे-छोटे शहरों में भी मिडिल क्लास को हवाई यात्रा की सुविधा पहली बार मिली है।

साथियों,

पिछले 12 साल, मिडिल क्लास के लिए कमाई के साथ-साथ बचत के भी रहे हैं। 2013-14 में, लगभग 2 लाख रुपए तक की आय होने पर टैक्स लगता था, आप सबको वो नसीब रहा होगा। और यह टैक्स मिडिल क्लास देता रहता था। आज 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। यानी टैक्स फ्री इनकम कई गुणा बढ़ गई है।

साथियों,

GST रिफॉर्म्स के कारण भी मिडिल क्लास को बहुत सुविधा हुई है। टैक्स फाइलिंग का समय और खर्चा भी बच गया है। क्योंकि यह बहुत ही आसान हो गया है। घर बैठे ही ITR फाइल हो रहे हैं, अगर कोई सेटलमेंट का इश्यू है, तो वो फेसलेस हो रहा है।

साथियों,

मिडिल क्लास परिवारों में एक बड़ा खर्चा डायबिटीज या ऐसी लाइफस्टाइल से जुड़े इलाज का भी रहता है। जन औषधि केंद्रों पर 80 परसेंट डिस्काउंट पर ऐसी दवाएं मिल रही हैं। अगर आपका पहले हजार रुपया खर्चा होता था, तो आज 200 रुपये में काम हो जाता है, 800 रुपये बच रहा है और इससे बीते वर्षों में करीब 40 हज़ार करोड़ रुपए की बचत देश के अनेक परिवारों की हुई है। मिडिल क्लास के बजट का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्गों के इलाज पर भी जाता है। आज 70 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक के लिए 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध है।

साथियों,

एक सामान्य स्वभाव है कि जब कोई सुविधा लगातार मिलती है, तो इंसान पहले की परेशानी भूल जाता है। अब 2 लाख रुपये पर आप टैक्स देते थे, अब 12 लाख तक नहीं देना पड़ रहा, लेकिन जब मैं कहूं, तब ताली बजती है। और बस में, ट्रेन में थोड़ी देर भी अगर कुछ मुसीबत आ गई, तो ढेर सारी गालियां देना शुरू हो जाते हैं और यही क्‍लास सबसे ज्यादा बोलता है।

साथियों,

मैंने जैसा कहा ना कि भई पुरानी तकलीफे भूल जाता है आदमी। आप लोगों को आज ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियां बिल्कुल याद नहीं होंगी। पहले ड्राइविंग लाइसेंस लेना होता था, तो कितनी दिक्कत होती थीं, पासपोर्ट लेना होता था, तो क्‍या-क्‍या कुछ नहीं करना पड़ता था, कितने पापड़ बेलने पड़ते थे। आज ड्राइविंग लाइसेंस लेना भी आसान हुआ है और तत्काल पासपोर्ट भी औसतन 3 दिन में ही मिल जाता है।

साथियों,

मैं जानता हूं, हमारी सरकार जिस तरह काम कर रही है, उसने देश के लोगों की एस्पिरेशन बहुत बढ़ा दी है। एक काम हुआ, तो लोगों की डिमांड वहीं खत्म नहीं हो जाती है। वो उससे भी बेहतर काम चाहते है, उससे भी अपग्रेड सुविधा चाहते हैं। अगर पहले डिमांड नई सड़क की थी, तो सड़क बनने के बाद लोग पूछते हैं, मेट्रो कब आएगी? पहले अपेक्षा होती थी कि ट्रेन समय पर पहुंच जाए, ट्रेन में बैठने की साफ-सुथरी जगह मिल जाए। आज डिमांड है कि हमारे रूट पर वंदे भारत क्यों नहीं चल रही है?

साथियों,

कुछ लोगों को ये असंतोष लगता है, यह एस्पिरेशन है, हमारे देश में एक फौज ऐसी है, उसको लगता है कि यह सब मामला कुछ गड़बड़ है। लेकिन लोग आखिरकार यह अपेक्षाएं किसके पास करेंगे भई, जो करता है, उससे ही करेंगे ना! सामान्‍य लोग हीनहीं, पूरी कांग्रेस पार्टी कहती है कि जरा मोदी जी, यह हो जाना चाहिए, यह होना चाहिए, कहते रहते हैं ना! उनको भरोसा है, करेगा तो ये ही करेगा!

साथियों,

एस्पिरेशंस वहीं होती है, जहां लोगों को लगता है कि सपने पूरे हो सकते हैं। और भारत के युवाओं की, भारत के गरीब और मिडिल क्लास की यही एस्पिरेशन है। आज भाजपा-एनडीए सरकारों की ऊर्जा बनी हुई है।

साथियों,

एक तरफ, देश का बहुत बड़ा वर्ग एस्पिरेशनल है, तो दूसरी तरफ, राजनीति की एक टोली है, जिसका जीवन मंत्र बन गया है- ऑलवेज अगेंस्ट! यह टोली, क्रॉनिक डिससैटिस्फैक्शन यानी स्थाई असंतोष से भरी हुई है। आज मैं रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को जरा इस टोली के लक्षण बताने जा रहा हूं। Symptoms पता चलेगा, तो आपको समझ आ जाएगा कि मैं क्या कह रहा हूं। आप आसानी से पहचान लेंगे। जैसे मैं उदाहरण देता हूं, आप समझ जाएंगे। इनको आप अक्सर कहते सुनेंगे, अरे फलां जगह तो चौबीस घंटे बिजली आती है, यहां क्यों नहीं? और अगले ही दिन ये लोग डैम्स का, सोलर पार्क का, थर्मल का, न्यूक्लियर प्लांट का विरोध करने के लिए ढपली लेकर के आ जाएंगे। यानी पहले दिन बिजली क्‍यों नहीं और दूसरे दिन तुम हाइड्रो पावर का डैम क्यों बना रहे हो, यह जमात ऐसी है। यह वो लोग हैं, जो खनिजों के खनन का विरोध करते थे, लेकिन आज पूछते हैं कि भारत का रेयर अर्थ मिनरल्स भंडार कहां है, सप्लाई चेन कहां है? और भारत में फलाने देश की तरह, इलेक्ट्रिक व्हीकल का इकोसिस्टम क्यों नहीं है? यह वही लोग हैं, जो कभी डेटा या आटा, इसकी डिबेट चलाते थे। पहले डाटा कि आटा, डाटा कि आटा, बड़ा मजा आता था। आज यही लोग पूछते हैं कि बताओ मोदी जी, AI में क्या काम हुआ? हद देखिए, एक सांस में कहते हैं, एक ही सांस में कहते हैं कि AI में यह होना चाहिए था, वो होना चाहिए था, हुआ क्यों नहीं? लेकिन दूसरी सांस में वही लोग कहते मिलेंगे, अरे यह डेटा सेंटर क्यों बना रहे हो? यह सेमीकंडक्टर प्लांट क्यों लगा रहे हो? और फिर यह लोग उसके 100 नुकसान गिनाने के लिए घंटे-घंटे भर सोशल मीडिया के स्‍क्रीन पर दिखेंगे, टीवी डिबेट पर दिखेंगे, अखबारों में भरे रहेंगे।

साथियों,

यह लोग करप्शन को लेकर दुनियाभर के इंडेक्स उठाकर लाते हैं, भारत को कटघरे में खड़ा करते हैं, इनके इकोसिस्टम का मीडिया भी 24-24 घंटे उछालता रहता है, लेकिन जब करप्शन के विरुद्ध एक्शन होता है, जब कार्रवाई होती है, तो यही लोग चिल्लाते हैं, सबसे पहले हल्ला मचाने का काम कौन करते हैं, यही गलत हो रहा है, फलाना गया ढीकना गया, रेड कर दी, जांच कर दी, harass कर दिया। सवाल उठाए जाते हैं, कार्रवाई ऐसे क्यों हो रही है, वैसे क्यों नहीं, अब क्यों हो रही है, तब क्यों नहीं, A पर क्यों हो रही है, B पर क्यों नहीं हो रही है, यही उनका खेल है।

साथियों,

इन लोगों का कैरेक्टर समझना देश के लिए बहुत जरूरी है। खासतौर पर मेरे देश के युवाओं को इनको पहचानने की जरूरत है और हमारी जेन जी को तो बहुत जल्दी समझना चाहिए, जल्दी समझो वरना अब सूर्यवंशी आया है, वो तेज गति से समझाता है।

साथियों,

यह लोग एक तरफ कहेंगे कि देश की सेनाओं को छूट नहीं है, हथियार नहीं मिल रहे हैं, लेकिन जब सरकार कोई डिफेंस डील करेगी, कोई आधुनिक हथियार खरीदती है, तो सबसे पहले आकर कहते हैं कि यह क्यों खरीदा? यह दुनिया भर में भारत की कूटनीति पर सवाल करेंगे, लेकिन जब भारत कूटनीति के लिए, सुरक्षा के लिए कहीं कोई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाने लगेगा, तो यह लोग ढोल-ढपली लेकर हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं।

साथियों,

आज भारत जिस अहम कालखंड में है, इसमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा, उनके कुतर्क को समझना होगा और उनसे सतर्क रहना बहुत जरूरी होगा। और आज दुर्भाग्य से, आज देश के मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस पर, ऐसे ही लोगों का कब्जा हो गया है। कांग्रेस कभी नेशन फर्स्ट की बात करेगी, यह सोचना भी अब झूठे सपने जैसा हो गया है। कल्पना ही नहीं कर सकते क्या कभी कांग्रेस में यह फिर से आएगी बात, जो गांधी जी के जमाने में थी।

साथियों,

आज दुनिया पुरानी धाराओं को चैलेंज कर रही है, डिसरप्शन्स की स्केल बहुत बड़ी हो गई है, लेकिन इसका एक और पक्ष है। यह चुनौतियां, नए अवसर भी ला रही है। भारत के हर युवा, हर उद्यमी, हर इनोवेटर, हर स्टार्टअप को, इन्हीं अवसरों पर फोकस करना है और इसमें सरकार, नेशन फर्स्ट की भावना के साथ पूरी तरह देश के लोगों के साथ है। भारत आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है। यह गति आगे और तेज होगी, मैं रिपब्लिक टीवी के इस मंच से देशवासियों से फिर कहूंगा कि हमारा सपना जितना बड़ा है, हमारे प्रयास भी उतने ही विराट होंगे और 140 करोड़ देशवासियों का यही साझा प्रयास, विकसित भारत बनाकर रहेगा। और आप सब लोग, मैं विश्वास से कहता हूं, अपनी आंखों से विकसित भारत देखने वाले हैं। आने वाली पीढ़ियों तक इंतजार करना पड़े, इस प्रकार से मैं काम नहीं करता, आप खुद अपनी आंखों से देखकर के जाएंगे। इसी विश्वास के साथ, मैं फिर एक बार रिपब्लिक टीवी को, उसके दर्शकों को और आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं! बहुत-बहुत धन्यवाद!