पश्चिम बंगाल आज एक ऐसे शासन के लिए लालायित है, जहां सरकार का हर विभाग, अपना काम करे, अपना दायित्व निभाए : प्रधानमंत्री मोदी
भारत में रिकॉर्ड निवेश आ रहा है। हम चाहते हैं कि इसका एक बड़ा हिस्सा उद्योग और रोजगार के हर रूप को बढ़ावा देने के लिए बंगाल में इस्तेमाल किया जाए: पीएम मोदी
रेशम और जूट उद्योग आत्मनिर्भर भारत के महत्वपूर्ण पहलू हैं। उन्हें बढ़ावा देना हमारी जिम्मेदारी है: प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार आने पर पीएम-किसान योजना के तहत किसानों के बैंक खातों में 18,000 रुपए देने का वादा किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज बीरभूम, कोलकाता, मालदा और मुर्शिदाबाद के मतदाताओं को वर्चुअली संबोधित किया। उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल के ये चुनाव सिर्फ सत्ता बदलने के लिए नहीं हैं, बल्कि इन चुनावों में, मैं एक आकांक्षी, एक आशावादी पश्चिम बंगाल को उभरते देख रहा हूं। गांव हो या शहर, हर जगह बेहतर जीवन, बेहतर शिक्षा, बेहतर रोज़गार, बेहतर विकल्प के लिए एक तड़प देख रहा हूं।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "पश्चिम बंगाल पक्षपात से मुक्त शासन के लिए मतदान कर रहा है। लोगों को रोजगार के अवसरों, ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की तलाश है। बीजेपी ने ऐसी सभी जरूरतों को पूरा करने का संकल्प लिया है।"

बंगाल के लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा," शांति, सुरक्षा और विकास की एक ललक बंगाल में देखने को मिल रही है। पश्चिम बंगाल आज एक ऐसे शासन के लिए लालायित है, जहां सरकार का हर विभाग अपना काम करे, अपना दायित्व निभाए। भेदभाव से मुक्त, सद्भाव से युक्त, व्यवस्था के लिए पश्चिम बंगाल वोट दे रहा है।"

केंद्र सरकार के विकास कार्यों के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत में निवेश करने के लिए दुनिया संभावनाएं तलाश कर रही हैं। लगातार रिकॉर्ड निवेश भारत में हो रहा है। इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल में लगे, यहां हर प्रकार के शिल्प को, हर प्रकार के रोज़गार को बल मिले, इसके लिए बीजेपी सरकार भरपूर प्रयास करेगी। रेशम और जूट उद्योग आत्मनिर्भर भारत के महत्वपूर्ण पहलू हैं। इन्हें बढ़ावा देना हमारी जिम्मेदारी है। इसी तरह, हम फलों और सब्जियों की बर्बादी को भी कम करेंगे और किसानों की हरसंभव मदद करेंगे।"


प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार के विभिन्न विकास कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "स्टूडेंट्स को स्कूल के दिनों से ही उद्योग से जुड़ने की जरूरत है, उन्हें उनकी प्राथमिकताओं और उनकी भाषा के अनुसार शिक्षा दी जानी चाहिए- नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मूल में ये सभी सिद्धांत हैं। गरीब का, आदिवासी का, दलित, वंचित, शोषित का बच्चा भी अपनी भाषा में मेडिकल, इंजीनियरिंग, टेक्नॉलॉजी की पढ़ाई कर पाए, इसके लिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को यहां तेज़ी से लागू किया जाएगा।"

प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार आने पर पीएम-किसान योजना के तहत किसानों के बैंक खातों में 18,000 रुपए देने का वादा किया। उन्होंने कहा, "पीएम आवास योजना के तहत देशभर में हमारी सरकार द्वारा गरीबों के लिए दो करोड़ से अधिक घर बनाए गए हैं। बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद गरीबों के लिए मकान निर्माण की गति बहुत तेजी से बढ़ेगी।"


अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "अब तक बंगाल की जनता ने उत्तम मतदान किया है। मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि आगे भी आप ऐसा ही करिएगा। भले ही दो चरण बाकी हों, लेकिन आपको एक ही बार मतदान के लिए निकलना है। मतदान के लिए जो दिशा-निर्देश बनाए गए हैं, उनका पालन हो, ये सुनिश्चित करते हुए ही आप मतदान करिएगा।" प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "टीके के दौरान भी, टीके के बाद भी, मास्क ज़रूरी है, पूरे चेहरे को मास्क से ढंकना जरूरी है। दवाई भी, कड़ाई भी, इस मंत्र को हमें याद रखना है।"

 

पूरा भाषण पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India's pace of economic growth shows that its Viksit Bharat dream is not out of reach

Media Coverage

India's pace of economic growth shows that its Viksit Bharat dream is not out of reach
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
प्रधानमंत्री ने जल सुरक्षा पर नेशनल डिपार्टमेंटल समिट के समापन सत्र की अध्यक्षता की
September 02, 2026
यह टीम इंडिया की भावना को मजबूत करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री की सोच के अनुरूप आयोजित शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला सम्मेलन
प्रधानमंत्री ने ठोस और समयबद्ध नतीजों पर अमल करने के लिए लगातार समीक्षा और फॉलो-अप की प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया
जन भागीदार पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए जल उत्सव को बढ़ावा देने का आह्वान किया
प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण की तकनीकों को अधिक से अधिक अपनाने और दुनिया भर के बेहतरीन तौर-तरीकों से सीखने पर जोर दिया
प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी इस्तेमाल के जरिए पानी से जुड़े डेटा का बेहतर प्रबंधन करने की अपील की
प्रधानमंत्री ने पानी से जुड़े मुद्दों पर जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों की भागीदारी वाले राज्यों के बीच व्यवस्थित अध्ययन-दौरों का सुझाव दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज जल शक्ति मंत्रालय द्वारा पानी पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की। यह शिखर सम्मेलन टीम इंडिया की भावना को मजबूत करने, सहकारी संघवाद को गहरा करने और केंद्र तथा राज्यों के बीच बेहतर सहयोग के ज़रिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री की सोच के अनुरुप विभागीय शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला सम्मेलन है। इसमें भारत की जल सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित चर्चा के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी एक साथ एक मंच पर थे।

प्रधानमंत्री ने दो दिनों तक चली गहन चर्चा की सराहना की और इस बात पर जोर दिया कि शिखर सम्मेलन से निकले कार्यान्वयन योग्य और समय-सीमा वाले कार्य बिंदुओं की समीक्षा और सीखने की निरंतर प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यह शिखर सम्मेलन केवल एक बार की गतिविधि बनकर नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने इसकी समीक्षा व फॉलो अप की निरंतर प्रक्रिया का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने शहरीकरण से जुड़ी चुनौतियों, जैसे आबादी का बढ़ना और भविष्य में पानी की ज़रूरतों के बारे में शहरी स्थानीय निकायों को जागरूक करने पर ज़ोर दिया और उनके लिए भी ऐसे ही चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने पानी बचाने वाली तकनीकों को ज़्यादा अपनाने की बात कही। उन्होंने भारतीय निर्माताओं और संबंधित लोगों को असरदार समाधान विकसित करने और उन्हें बड़े पैमाने पर लागू करने में मदद करने के लिए खास प्रदर्शनियों और कार्यशालाएं, जिनमें दुनिया भर के बेहतरीन तरीकों की जानकारी भी शामिल हो, आयोजित करने का सुझाव भी दिया।

जन भागीदारी पर ज़ोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने लोगों में ज़्यादा जागरूकता लाने के लिए "जल उत्सव" को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने गाद निकालने के काम को एक नियमित कार्यक्रम बनाने और इसके लिए साफ नियम और मानक संचालन प्रक्रिया बनाने को कहा। बांध की सुरक्षा के मामले में, उन्होंने हर मॉनसून से पहले पूरी तैयारी रखने, तय सावधानियों का पालन करने और स्कूली छात्रों में जागरूकता पैदा करने पर ज़ोर दिया, जिसमें शिक्षा के पाठ्यक्रम में इसे सही ढंग से शामिल करना भी शामिल है।

प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में भी जल प्रबंधन और शासन के बारे में जानकारी और क्षमता बढ़ाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों के बीच व्यवस्थित अंतर-राज्यीय अध्ययन-दौरे आयोजित किए जाएं, ताकि व्यावहारिक सीख मिल सके और सफल उपायों को दूसरी जगहों पर भी अपनाया जा सके।

प्रधानमंत्री ने मज़बूत जल डेटा गवर्नेंस की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, जिसमें जल-क्षेत्र से जुड़े डेटा को एक साथ लाया जाए, उसे व्यवस्थित रूप से प्रबंधित किया जाए और उसका विश्लेषण तथा प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए। उन्होंने एक समान प्रारूप के माध्यम से डेटा एकत्र करने और विश्लेषण करने के लिए एआई के उपयोग की भी सिफारिश की। उन्होंने कृषि और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए उपचारित पानी के उचित उपयोग के ज़रिए पानी की कमी की समस्या से निपटने के लिए पहले से तैयारी और एकीकृत योजना बनाने पर भी ज़ोर दिया।

गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर अपने अनुभव का ज़िक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि सही योजना, पक्के इरादे, ज़रूरी संसाधन तथा काबिल अधिकारियों को लगाकर पानी की कमी की समस्या को एक अवसर में बदला जा सकता है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने सम्मेलन के चार मुख्य नतीजों पर ज़ोर दिया: पानी से जुड़ी ढ़ांचागत परियोजनाओं को तेज़ी से पूरा करना, जल संरक्षण को लोगों के एक लगातार चलने वाले आंदोलन के तौर पर मज़बूत करना, पीने योग्य पानी के स्रोतों की लंबे समय तक उपलब्धता सुनिश्चित करना और गांवों में पीने के पानी की योजनाओं के असरदार संचालन और रखरखाव को संस्थागत रूप देना।