प्रधानमंत्री ‘सिक्किम@50: जहां प्रगति उद्देश्य से मिलती है और प्रकृति विकास को पोषित करती है’ कार्यक्रम में भाग लेंगे
प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में अलीपुरद्वार और कूचबिहार जिलों में सिटी गैस वितरण परियोजना की आधारशिला रखेंगे
प्रधानमंत्री बिहार के काराकाट में 48,520 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे
प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में लगभग 20,900 करोड़ रुपए की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 29 और 30 मई को सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे।

प्रधानमंत्री 29 मई को सिक्किम का दौरा करेंगे जहां वे सुबह करीब 11 बजे ‘सिक्किम@50: जहां प्रगति उद्देश्य से मिलती है और प्रकृति विकास को बढ़ावा देती है’ कार्यक्रम में भाग लेंगे। वे सिक्किम में कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी करेंगे और इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करेंगे।

इसके बाद प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे जहां वे अलीपुरद्वार में दोपहर करीब 2:15 बजे अलीपुरद्वार और कूचबिहार जिलों में सिटी गैस वितरण परियोजना की आधारशिला रखेंगे।

प्रधानमंत्री बिहार का भी दौरा करेंगे और शाम लगभग 5:45 बजे पटना हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे।

बिहार के काराकाट में 30 मई को सुबह करीब 11 बजे प्रधानमंत्री 48,520 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। वह एक सार्वजनिक समारोह को भी संबोधित करेंगे।

इसके बाद प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे जहां वे दोपहर करीब 2:45 बजे कानपुर नगर में करीब 20,900 करोड़ रुपए की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। वे एक सार्वजनिक समारोह को भी संबोधित करेंगे।

सिक्किम में प्रधानमंत्री

राज्य के गौरवशाली 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री ‘सिक्किम@50: जहां प्रगति उद्देश्य से मिलती है और प्रकृति विकास को बढ़ावा देती है’ कार्यक्रम में भाग लेंगे। राज्‍य सरकार ने सिक्किम की सांस्कृतिक समृद्धि, परंपरा और प्राकृतिक वैभव का उत्‍सव मनाने के लिए "सुनौलो, समृद्ध एवं समर्थ सिक्किम" थीम के अंतर्गत साल भर चलने वाले कई कार्यक्रमों की योजना बनाई है।

प्रधानमंत्री सिक्किम में कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी करेंगे। इन परियोजनाओं में नामची जिले में 750 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से 500 बिस्तरों वाला नया जिला अस्पताल, ग्यालशिंग जिले के पेलिंग के सांगाचोलिंग में यात्री रोपवे, गंगटोक जिले के सांगखोला में अटल अमृत उद्यान में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा आदि शामिल हैं।

प्रधानमंत्री राज्य स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में स्मारक सिक्का, स्मारिका सिक्का और डाक टिकट भी जारी करेंगे।

पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री

भारत में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और कूच बिहार जिलों में सीजीडी परियोजना की आधारशिला रखेंगे। 1010 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य 2.5 लाख से अधिक घरों, 100 से अधिक वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों को पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) उपलब्ध कराना है। इसके अलावा सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम कार्य कार्यक्रम (एमडब्‍ल्‍यूपी) लक्ष्यों के अनुरूप लगभग 19 सीएनजी स्टेशन स्थापित करके वाहनों को सीएनजी उपलब्ध कराने का भी लक्ष्‍य है। यह सुविधाजनक, विश्वसनीय, पर्यावरण के अनुकूल और लागत प्रभावी ईंधन आपूर्ति प्रदान करेगा और क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करेगा।

बिहार में प्रधानमंत्री

29 अप्रैल को प्रधानमंत्री पटना एयरपोर्ट के नवनिर्मित यात्री टर्मिनल का उद्घाटन करेंगे। करीब 1200 करोड़ रुपए की लागत से बना यह नया टर्मिनल प्रति वर्ष 1 करोड़ यात्रियों को संभाल सकता है। प्रधानमंत्री 1410 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बिहटा एयरपोर्ट के नए सिविल एन्क्लेव की आधारशिला भी रखेंगे। बिहटा, पटना के पास एक शैक्षणिक केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है जिसमें आईआईटी पटना और प्रस्तावित एनआईटी पटना परिसर है।

30 मई को प्रधानमंत्री काराकाट में 48,520 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे।

क्षेत्र में बिजली के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री औरंगाबाद जिले में 29,930 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली नबीनगर सुपर थर्मल पावर परियोजना, चरण-II (3x800 मेगावाट) की आधारशिला रखेंगे, जिसका उद्देश्य बिहार और पूर्वी भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इससे औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र में सस्ती बिजली उपलब्ध होगी।

क्षेत्र में सड़क अवसंरचना और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री एनएच-119ए के पटना-आरा-सासाराम खंड को चार लेन का बनाने, वाराणसी-रांची-कोलकाता राजमार्ग (एनएच-319बी) और रामनगर-कच्ची दरगाह खंड (एनएच-119डी) को छह लेन का बनाने और बक्सर और भरौली के बीच एक नए गंगा पुल के निर्माण सहित विभिन्न सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इन परियोजनाओं से राज्य में निर्बाध हाई-स्पीड कॉरिडोर का निर्माण होगा और साथ ही व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री करीब 5,520 करोड़ रुपए लागत वाले एनएच-22 के पटना-गया-डोभी खंड के चार लेन के निर्माण कार्य का उद्घाटन करेंगे और एनएच-27 पर गोपालगंज टाउन में एलिवेटेड हाईवे के चार लेन के निर्माण और ग्रेड सुधार का भी उद्घाटन करेंगे।

देश भर में रेल अवसंरचना में सुधार लाने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, प्रधानमंत्री अन्य परियोजनाओं के अलावा 1330 करोड़ रुपए की लागत वाली सोन नगर-मोहम्मद गंज के बीच तीसरी रेल लाइन राष्ट्र को समर्पित करेंगे।

उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री

क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, प्रधानमंत्री कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। वह 2,120 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के चुन्नीगंज मेट्रो स्टेशन से कानपुर सेंट्रल मेट्रो स्टेशन खंड का उद्घाटन करेंगे। इसमें 14 नियोजित स्टेशन शामिल होंगे जिनमें पांच नए भूमिगत स्टेशन शामिल होंगे जो शहर के प्रमुख स्थलों और वाणिज्यिक केंद्रों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेंगे। इसके अतिरिक्त, वह जीटी रोड के सड़क चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य का भी उद्घाटन करेंगे।

क्षेत्र में बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ावा देने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। प्रधानमंत्री क्षेत्र की बढ़ती ऊर्जा मांगों की पूर्ति के लिए गौतम बुद्ध नगर के यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (वाईईआईडीए) के सेक्टर 28 में 220 केवी सबस्टेशन की आधारशिला रखेंगे। वह ग्रेटर नोएडा के इकोटेक-8 और इकोटेक-10 में 320 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले 132 केवी सबस्टेशन का उद्घाटन भी करेंगे।

प्रधानमंत्री कानपुर में 8,300 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली 660 मेगावाट की पनकी थर्मल पावर एक्सटेंशन परियोजना का उद्घाटन करेंगे जिससे उत्तर प्रदेश की ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी। वे घाटमपुर थर्मल पावर परियोजना की 9,330 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली तीन 660 मेगावाट की इकाइयों का भी उद्घाटन करेंगे जिससे बिजली आपूर्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

प्रधानमंत्री कानपुर के कल्याणपुर पनकी मंदिर में पनकी रोड पर पनकी पावर हाउस रेलवे क्रॉसिंग और पनकी धाम क्रॉसिंग पर रेल ओवर ब्रिज का भी उद्घाटन करेंगे। इससे पनकी थर्मल पावर एक्सटेंशन प्रोजेक्ट के लॉजिस्टिक्स को कोयला और तेल परिवहन की सुविधा मिलेगी तथा यातायात की भीड़भाड़ भी कम होगी।

प्रधानमंत्री कानपुर के बिंगवान में 290 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले 40 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) उपचार संयंत्र का उद्घाटन करेंगे। इससे उपचारित सीवेज जल का पुनः उपयोग संभव होगा जिससे क्षेत्र में जल संरक्षण और सतत संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा।

क्षेत्र में सड़क बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए, प्रधानमंत्री कानपुर नगर जिले में औद्योगिक विकास के लिए गौरिया पाली मार्ग के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण की आधारशिला रखेंगे और कानपुर नगर जिले में रक्षा गलियारे के अंतर्गत प्रयागराज राजमार्ग पर नरवाल मोड (एएच-1) को कानपुर रक्षा नोड (4 लेन) से जोड़ने के लिए सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का भी शिलान्यास करेंगे। इससे रक्षा गलियारे के लिए कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होगा।

प्रधानमंत्री इस अवसर पर प्रधानमंत्री आयुष्मान वय वंदना योजना, राष्ट्रीय आजीविका मिशन और प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र और चेक भी वितरित करेंगे।

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प्रधानमंत्री ने PRAGATI की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की
May 27, 2026
प्रधानमंत्री ने रेलवे, बिजली और सड़क क्षेत्रों से जुड़ी सात अहम बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की
समीक्षा में शामिल कुल 30,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली परियोजनाएं 9 राज्यों में फैली हुई हैं
प्रधानमंत्री ने केन-बेतवा लिंक परियोजना और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की भी समीक्षा की
प्रधानमंत्री ने कहा-केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को दूसरे राज्यों के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करना चाहिए, ताकि वे राज्यों के बीच पानी से जुड़े मुद्दों को आपसी सहमति से सुलझा सकें
प्रधानमंत्री ने राज्यों से ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा, जिसमें अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र और गोबरधन संयंत्र शामिल हैं
प्रधानमंत्री ने शहरी इलाकों में मिशन-मोड पर रूफटॉप सोलर कवरेज बढ़ाने का आह्वान किया
प्रधानमंत्री की सलाह पर अमल करते हुए, राज्य स्तर पर सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की मासिक समीक्षा की व्यवस्था शुरू की गई है, जिसकी शुरुआत स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा से हुई है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों को सहज रूप से एकीकृत करके 'सक्रिय शासन और समय पर कार्यान्वयन' को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज सुबह 'सेवा तीर्थ' में प्रगति (PRAGATI) की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की। प्रगति एक आईसीटी-सक्षम, मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म है।

बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने कुल लगभग ₹30,000 करोड़ की लागत वाली रेलवे, बिजली और सड़क क्षेत्रों से जुड़े सात महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं। आर्थिक विकास और जन कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा समय-सीमा, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और मुद्दों के समय पर समाधान पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए की गई। प्रधानमंत्री ने 'केन-बेतवा लिंक परियोजना' और 'स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0' की भी समीक्षा की।

बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने शहरी क्षेत्रों में रूफटॉप सोलर को अपनाने की गति तेज करने की जरूरत पर जोर दिया, जिसमें शहरों, आवासीय समूहों और सार्वजनिक संस्थानों पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिजली की लागत कम करने, ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाने और घरों व समुदायों के स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए रूफटॉप सोलर को मिशन मोड में चलाया जाना चाहिए।

सड़क और बंदरगाह कनेक्टिविटी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए, इस बात पर जोर दिया गया कि वधावन बंदरगाह को 'बंदरगाह-आधारित, बहु-माध्यम विकास' के एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जहां एक भविष्य के लिए तैयार लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम बनाने के उद्देश्य से परिवहन के हर प्रमुख माध्यम को इस तरह से जोड़ा जाए। इस परियोजना को केवल एक बंदरगाह के रूप में नहीं, बल्कि एक 'राष्ट्रीय प्रवेश द्वार' के रूप में देखा जाना चाहिए, जो तटीय नौवहन, अंतर्देशीय जलमार्गों, समर्पित माल ढुलाई गलियारों, हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी, राजमार्गों और हवाई अड्डों से जुड़ा हो।

प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया और इस बात को रेखांकित किया कि इस मिशन को केवल बुनियादी ढांचा तैयार करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नियमित निगरानी, ​​नागरिकों की भागीदारी और विभिन्न हितधारकों के बीच तालमेल के माध्यम से इसके ठोस परिणाम भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए। उन्होंने राज्यों से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित बुनियादी ढांचे, जिसमें अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र और 'गोबर-धन' (GOBARdhan) संयंत्र शामिल हैं, के निर्माण कार्य में तेजी लाने को कहा।

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि केन-बेतवा परियोजना को अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श के रूप में काम करना चाहिए, ताकि वे भी आपसी सहयोग, समय पर मंज़ूरी, प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी और 'मिशन-मोड' में काम करके राज्यों के बीच जल-संबंधी विवादों को सुलझा सकें। राज्यों को ऐसे ही अन्य अवसरों की पहचान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जहां नदी जोड़ो, जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और कुशल सिंचाई जैसे कार्यों को एक एकीकृत तरीके से अपनाया जा सके, ताकि भविष्य के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि सार्वजनिक परियोजनाओं को लागू करने में देरी से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि नागरिकों को जरूरी सुविधाओं और विकास के लाभों तक समय पर पहुंचने से भी वंचित होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हर देरी का लोगों के जीवन, क्षेत्रीय विकास और सार्वजनिक संसाधनों पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मंत्रालयों, विभागों और राज्यों को लंबित मुद्दों को सुलझाने, रुकावटों को दूर करने और काम को तेजी से पूरा करने के लिए ज्यादा सक्रिय और समय-सीमा के भीतर काम करने का तरीका अपनाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि नहर नेटवर्क का नए तरीकों से इस्तेमाल करने के तरीकों पर विचार किया जाना चाहिए, जिसमें साफ बिजली बनाने के लिए नहरों के किनारे और उनके ऊपर सोलर पैनल लगाना भी शामिल है। इससे जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने, वाष्पीकरण से होने वाले नुकसान को कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा बनाने और जल बुनियादी ढांचे से अतिरिक्त आर्थिक लाभ पैदा करने में मदद मिलेगी।

बैठक की शुरुआत में कैबिनेट सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देशों के अनुसार, राज्य स्तर पर सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की मासिक समीक्षा की एक प्रणाली भी शुरू कर दी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य राज्य और जिला स्तरों पर नियमित निगरानी, ​​कार्यान्वयन संबंधी मुद्दों का त्वरित समाधान और अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस पहल के एक हिस्से के रूप में, सबसे पहले राज्य स्तर पर समीक्षा के लिए 'स्वच्छ भारत मिशन' को चुना गया है।