आत्मनिर्भर और नवप्रवर्तन आधारित भारत के लिए प्रधानमंत्री के भविष्य दृष्टि अनुरूप सम्मेलन में नवाचार आधारित प्रमुख परियोजनाओं पर पहल आरंभ की जाएंगी
सम्मेलन का उद्देश्य भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में व्यापक स्तर पर निजी निवेश को बढ़ावा देना है
सम्मेलन में डीप टेक स्टार्टअप शोकेस में देशभर से अत्याधुनिक नवाचार प्रदर्शित किए जाएंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 29 अप्रैल को सुबह 11 बजे नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में युग्म सम्मेलन में भाग लेंगे और इसे संबोधित करेंगे।

युग्म (संस्कृत में अर्थ है “संगम”) अपनी तरह का पहला महत्वपूर्ण नीतिगत सम्मेलन है जिसमें सरकार, शैक्षणिक क्षेत्र, उद्योग जगत और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र से संबंधित दिग्गज शामिल होंगे। वाधवानी फाउंडेशन और सरकार के प्रतिष्ठानों के संयुक्त निवेश से लगभग 1,400 करोड़ रुपये की सहयोगी परियोजना द्वारा संचालित यह आयोजन भारत की नवाचार यात्रा में उल्लेखनीय भूमिका निभाएगा।

प्रधानमंत्री श्री मोदी के आत्मनिर्भर और नवप्रवर्तन आधारित भारत की भविष्य दृष्टि के अनुरूप सम्मेलन में नवाचार आधारित कई प्रमुख परियोजना पहल आरंभ की जाएंगी। इनमें आईआईटी कानपुर (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटेलिजेंट सिस्टम) और आईआईटी बॉम्बे (जैव विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और चिकित्सा) में सुपरहब स्थापित करना शामिल हैं। अनुसंधान व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए शीर्ष शोध संस्थानों में वाधवानी इनोवेशन नेटवर्क (डब्ल्यूआईएन) केंद्र और अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) के साथ साझेदारी भी शामिल है।

सम्मेलन में अधिकारियों, उद्योग जगत के शीर्ष दिग्गजों और शैक्षणिक क्षेत्र के प्रणेताओं की भागीदारी में उच्च स्तरीय गोलमेज बैठकें और पैनल परिचर्चाएं, अनुसंधान को उपयोग में लाने की त्वरित सक्षमता पर कार्यशीलता उन्मुख संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। डीप टेक स्टार्टअप शोकेस में देशभर से अत्याधुनिक नवाचार प्रदर्शित किए जाएंगे तथा सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में विशेष नेटवर्किंग (विशेष संपर्क) के अवसर भी सम्मेलन में मिलेंगे।

सम्मेलन का उद्देश्य भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में व्यापक निजी निवेश को उत्प्रेरित करना; उन्नत तकनीक में अनुसंधान से लेकर इसके व्यावसायीकरण तक में तेजी लाना; शिक्षा-उद्योग जगत और सरकार की साझेदारी को सुदृढ़ करना; एएनआरएफ (अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन) और एआईसीटीई (अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद) जैसे राष्ट्रीय पहल को आगे बढ़ाना; संस्थानों में नवाचार की पहुंच को व्यापक बनाना तथा विकसित भारत@2047 की दिशा में राष्ट्रीय नवाचार संरेखण को बढ़ावा देना है।

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प्रधानमंत्री ने राष्ट्र और मानवता की सेवा में सर्वस्व समर्पण को दर्शाते हुए संस्कृत सुभाषित साझा किया
February 11, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र और मानवता की सेवा में सर्वस्व समर्पण को दर्शाने वाला एक संस्कृत सुभाषित साझा किया:

"यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः।

यस्येमाः प्रदिशो यस्य बाहू कस्मै देवाय हविषा विधेम॥"

इसमें कहा गया है कि जिस राष्ट्र की महिमा का वर्णन स्वयं हिमालय करता है, जिसकी कीर्ति नदियों के साथ समुद्र तक प्रवाहित होती है और जिसकी भुजाओं के समान दिशाएं उसे नमन करती हैं, उस राष्ट्र को हम अपना सर्वस्व समर्पित करते हैं।

श्री मोदी ने कहा कि अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भी इसी भावना के साथ अपना संपूर्ण जीवन देश के हर नागरिक को सशक्त बनाने के लिए समर्पित किया था।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा:

“सर्वस्व समर्पण उस चेतना की अभिव्यक्ति है, जिसमें राष्ट्र और मानवता सर्वोपरि होती है। अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भी इसी भावना से देश के जन-जन को सशक्त बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः।

यस्येमाः प्रदिशो यस्य बाहू कस्मै देवाय हविषा विधेम॥"