प्रधानमंत्री पांडुलिपि डिजिटलीकरण, संरक्षण और सार्वजनिक पहुंच में तेजी लाने से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म, ज्ञान भारतम पोर्टल का शुभारंभ करेंगे
सम्मेलन की विषय-वस्तु: पांडुलिपि विरासत के माध्यम से भारत के ज्ञान धरोहर की पुनःप्राप्ति
सम्मेलन का उद्देश्य है - भारत की अद्वितीय पांडुलिपि संपदा को पुनर्जीवित करना

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 12 सितंबर, 2025 को सायं लगभग 4:30 बजे नई दिल्ली के विज्ञान भवन में ज्ञान भारतम् पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेंगे। वे ज्ञान भारतम् पोर्टल का भी शुभारंभ करेंगे, जो पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, संरक्षण और सार्वजनिक पहुंच में तेज़ी लाने के लिए एक समर्पित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है। इस अवसर पर वह उपस्थित जनसमूह को भी संबोधित करेंगे।

यह सम्मेलन 11 से 13 सितंबर तक "पांडुलिपि विरासत के माध्यम से भारत के ज्ञान धरोहर की पुनःप्राप्ति" विषय-वस्तु पर आयोजित किया जाएगा। यह सम्मेलन भारत की अद्वितीय पाण्डुलिपि संपदा को पुनर्जीवित करने और इसे वैश्विक ज्ञान संवाद के केंद्र में रखने के उपायों पर विचार-विमर्श करने के लिए अग्रणी विद्वानों, संरक्षणवादियों, प्रौद्योगिकीविदों और नीति विशेषज्ञों को एक साथ लाएगा। इसमें दुर्लभ पांडुलिपियों की एक प्रदर्शनी और पांडुलिपि संरक्षण, डिजिटलीकरण प्रौद्योगिकियों, मेटाडेटा मानक, कानूनी संरचनाओं, सांस्कृतिक कूटनीति और प्राचीन लिपियों के अर्थ-निर्धारण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विद्वानों की प्रस्तुतियां भी शामिल होंगी।

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प्रधानमंत्री ने ज्ञान के सार को आत्मसात करने पर केंद्रित संस्कृत सुभाषित साझा किया
January 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जो ज्ञान की विशालता के बीच केवल उसके सार पर ध्यान केंद्रित करने की शाश्वत बुद्धिमत्ता पर जोर देता है।

संस्कृत श्लोक-

अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च।
यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥

यह सुभाषित इस भाव को व्यक्त करता है कि यद्यपि ज्ञान प्राप्ति के लिए असंख्य शास्त्र और विविध विद्याएँ उपलब्ध हैं, किंतु मानव जीवन समय की सीमाओं और अनेक बाधाओं से बंधा हुआ है। अतः, मनुष्य को उस हंस के समान बनना चाहिए जो दूध और पानी के मिश्रण में से केवल दूध को अलग करने की क्षमता रखता है अर्थात, हमें भी अनंत सूचनाओं के बीच से केवल उनके सार—उस परम सत्य को पहचानना और ग्रहण करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा:

“अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च।

यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥”