प्रधानमंत्री देश भर में शैक्षणिक संस्थानों को 100 '5जी यूज़ केस लैब्स' प्रदान करेंगे
'100 5जी लैब पहल' का उद्देश्य सामाजिक आर्थिक क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 5जी अनुप्रयोगों को विकसित करना है और यह देश में 6जी इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है
आईएमसी 2023 का लक्ष्य अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकासकर्ता, निर्माता और निर्यातक के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करना है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 27 अक्टूबर, 2023 को सुबह 9:45 बजे भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में 7वें भारतीय मोबाइल कांग्रेस 2023 का उद्घाटन करेंगे। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री देशभर में शैक्षणिक संस्थानों को 100 '5जी यूज केस लैब्स' प्रदान करेंगे। इन प्रयोगशालाओं को '100 5जी लैब्स पहल' के तहत विकसित किया जा रहा है।

'100 5जी लैब पहल', 5जी अनुप्रयोगों के विकास को प्रोत्साहित करके 5जी तकनीक से जुड़े अवसरों को साकार करने का एक प्रयास है, जो भारत की विशिष्ट जरूरतों के साथ-साथ वैश्विक मांगों को भी पूरा करेगा। यह अनूठी पहल शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, बिजली, परिवहन जैसे विभिन्न सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देगी और देश को 5जी तकनीक के उपयोग में आगे ले जाएगी। यह पहल देश में 6जी-तैयार शैक्षणिक और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के निर्माण के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल स्वदेशी दूरसंचार प्रौद्योगिकी के विकास की दिशा में एक कदम है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

भारतीय मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) एशिया का सबसे बड़ा दूरसंचार, मीडिया और प्रौद्योगिकी मंच है जो 27 से 29 अक्टूबर, 2023 तक आयोजित होगा। यह आयोजन दूरसंचार और प्रौद्योगिकी में भारत की अविश्वसनीय प्रगति को रेखांकित करने, महत्वपूर्ण घोषणाएँ करने तथा स्टार्ट-अप को अपने नवीन उत्पादों और समाधानों को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करेगा।

'वैश्विक डिजिटल नवाचार' थीम के साथ, आईएमसी 2023 का लक्ष्य अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकासकर्ता, निर्माता और निर्यातक के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करना है। तीन दिवसीय कांग्रेस में 5जी, 6जी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी प्रौद्योगिकियों पर प्रकाश डाला जाएगा और सेमीकंडक्टर उद्योग, हरित प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा आदि से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

इस वर्ष, आईएमसी एक स्टार्टअप कार्यक्रम - 'एस्पायर' शुरू कर रहा है। यह कार्यक्रम नई उद्यमिता पहल और सहयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्टार्टअप, निवेशकों और स्थापित व्यवसायों के बीच आपसी संबंधों को बढ़ावा देगा।

आईएमसी 2023 में लगभग 22 देशों के एक लाख से अधिक प्रतिभागी भाग लेंगे, जिनमें लगभग 5000 सीईओ स्तर के प्रतिनिधि, 230 प्रस्तुतिकर्ता, 400 स्टार्टअप और अन्य हितधारक शामिल होंगे।

 

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पीएम ने 53वीं प्रगति बैठक की अध्यक्षता की
August 25, 2026
प्रधानमंत्री कार्यालयपीएम ने रेलवे, सड़क और ऊर्जा क्षेत्र की छह अहम ढ़ांचागत परियोजनाओं की समीक्षा की
समीक्षा किए गए प्रोजेक्ट्स 9 राज्यों में फैले हैं और इनमें कुल ₹30,000 करोड़ से ज़्यादा का निवेश किया गया है
पीएम ने कहा, ढ़ांचागत परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों या पैकेज के बजाय एकीकृत प्रयास के तौर पर देखा जाना चाहिए
पीएम ने परियोजनाओं को लागू करने के सभी चरणों में लगातार सुधार और मंत्रालयों तथा राज्यों में सक्रियता से काम करने की संस्कृति पर ज़ोर दिया
पीएम ने कहा, रफ्तार के साथ-साथ गुणवत्ता भी ज़रूरी है
एग्रीस्टैक की समीक्षा करते हुए, पीएम ने कृषि डेटा से ज़्यादा फायदा उठाने के लिए एआई समेत नवीन डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया
साइबर फ्रॉड और 'डिजिटल अरेस्ट' के मामले में, पीएम ने प्रशिक्षण, जन-जागरूकता, साइबर-सुरक्षा से जुड़ी शिक्षा और आपसी तालमेल के साथ कार्रवाई करने पर ज़ोर दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सक्रिय शासन और समय पर काम पूरा करने के लिए बनाए गए आईसीटी-आधारित, मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म प्रगति की 53वीं बैठक की आज सेवा तीर्थ में अध्यक्षता की।

बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने रेलवे, सड़क और ऊर्जा क्षेत्रों से जुड़ी छह प्रमुख बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं और इनकी कुल लागत ₹30,000 करोड़ से अधिक है। संपर्क को मजबूत करने, औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के लिए महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा करते वक्त समय-सीमा का पालन, अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल, लंबित मुद्दों के समाधान और काम को तेजी से पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ढ़ांचागत परियोजनाओं में देरी से सिर्फ़ लागत ही नहीं बढ़ती, बल्कि नागरिकों, व्यवसायों और अर्थव्यवस्था को मिलने वाले लाभ भी टल जाते हैं। उन्होंने कहा कि ढ़ांचागत परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों, टुकड़ों या पैकेजों के बजाय एक एकीकृत इकाई के तौर पर देखा और उनकी निगरानी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पैकेजों में हो रही प्रगति का नतीजा आखिर में संपूर्ण परियोजना के वक्त पर पूरा होने और उसके चालू होने के रूप में निकलना चाहिए। इसलिए मंत्रालयों और राज्यों से कहा गया कि वे काम को शुरू से लेकर अंत तक पूरा करने का नज़रिया अपनाएं और उन अहम कमियों को दूर करें, जिनसे पूरे प्रोजेक्ट के चालू होने और फ़ायदे मिलने में देरी हो सकती है। उन्होंने मंत्रालयों और राज्य सरकारों में सक्रिय कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देने और परियोजनाओं को लागू करने के हर स्तर पर ज़्यादा ज़िम्मेदारी लेने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने खास तौर पर बड़े परिवहन और ढ़ांचागत परियोजनाओं की योजना बनाते समय, जहाँ भी संभव हो, ढ़ांचागत सेवाओं के लिए कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर की संभावना तलाशने पर ज़ोर दिया। उन्होंने मंत्रालयों और राज्यों से कहा कि वे योजना बनाने के चरण में ही ऐसी एकीकृत कार्यप्रणालियों पर विचार करें और उनकी तकनीकी व आर्थिक व्यवहार्यता को ध्यान में रखें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि काम को तेज़ी से पूरा करने के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मंत्रालयों, राज्यों और काम को लागू करने वाली एजेंसियों से आधुनिक तकनीकों को अपनाने और हर चरण पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने व निगरानी को मज़बूत करने का आह्वान किया।

डिजिटल कृषि मिशन के तहत एग्रीस्टैक की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कृषि डेटा से ज़्यादा फ़ायदा उठाने के लिए एआई जैसी नई डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल करने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इनपुट प्लानिंग से लेकर प्रोसेसिंग तक, पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला में डेटा इकोसिस्टम का असरदार ढंग से इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि बेहतर जानकारी के आधार पर कदम उठाए जा सकें, सही लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके और डेटा के आधार पर फ़ैसले लिए जा सकें। उन्होंने एग्रीस्टैक व्यवस्था बनाने में राज्यों और केंद्र सरकार की कोशिशों की तारीफ की और किसानों के लिए बेहतर नतीजे पाने के लिए इसके इस्तेमाल को और मज़बूत करने का आह्वान किया।

साइबर धोखाधड़ी के मामलों, जिनमें डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं भी शामिल हैं, की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण, जागरूकता और शिक्षा पर लगातार ध्यान देकर ऐसे मामलों की रोकथाम को मज़बूत किया जाना चाहिए। उन्होंने लगातार और खास तौर पर बुज़ुर्गों, युवाओं और कमज़ोर वर्गों के लिए जागरूकता अभियान चलाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, ताकि उन्हें धोखाधड़ी के आम तरीकों, चेतावनी के संकेतों और सुरक्षित डिजिटल तौर-तरीकों के बारे में जानकारी दी जा सके। उन्होंने इससे जुड़े कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए नियमित ट्रेनिंग की भी बात कही, ताकि साइबर धोखाधड़ी के नए तरीकों की पहचान की जा सके और उन पर तेज़ी से कार्रवाई की जा सके।