महोत्सव में युवाओं के नेतृत्व में विकास तथा उभरते मुद्दों और चुनौतियों का समाधान करने के लिये उन्हें प्रेरित करने सम्बंधी विषयों पर चर्चा होगी
ओलंपियनों और पैरालंपियनों के साथ खुली चर्चा भी होगी
प्रधानमंत्री “मेरे सपनों का भारत” और “अनसंग हिरोज़ ऑफ इंडियन फ्रीडम मूवमेन्ट” पर चुने हुये निबंधों का अनावरण करेंगे
प्रधानमंत्री एमएसएमई प्रौद्योगिकी केंद्र और ओपन एयर थियेटर युक्त एक प्रेक्षागृह पेरुनथलैवर कामराजर मनीमण्डपम का भी उद्घाटन करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 12 जनवरी 2022 को 11 बजे पूर्वाह्न पुदुच्चेरी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 25वें राष्ट्रीय युवा महोत्सव का उद्घाटन करेंगे। उल्लेखनीय है कि इसी दिन स्वामी विवेकानन्द की जयंती होती है, जिसे राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

महोत्सव का उद्देश्य है भारत के युवा मन को दिशा देना और उन्हें राष्ट्र निर्माण के लिये शक्ति के रूप में एकजुट करना। यह सामाजिक जुड़ाव तथा बौद्धिक और सांस्कृतिक एकता के सबसे बड़े प्रयासों में शामिल है। इसका लक्ष्य है भारत की विविधतापूर्ण संस्कृतियों को साथ लाना और उन्हें ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के एकता के सूत्र में पिरोना।

इस वर्ष कोविड की वर्तमान परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुये महोत्सव को वर्चुअल माध्यम से 12-13 जनवरी, 2022 को आयोजित किया जायेगा। उद्घाटन के बाद राष्ट्रीय युवा शिखर सम्मेलन होगा, जिसमें चार विशेष विषयों पर पैनल चर्चा होगी। युवाओं के नेतृत्व में विकास तथा उभरते मुद्दों और चुनौतियों का समाधान करने के लिये युवाओं को प्रेरित करने सम्बंधी प्रयासों के क्रम में पर्यावरण, जलवायु और सतत विकास लक्ष्य आधारित वृद्धि, प्रौद्योगिकी, उद्यमशीलता और नवोन्मेष, स्वदेशी और प्राचीन ज्ञान, राष्ट्रीय चरित्र, राष्ट्र निर्माण तथा स्थानीय और क्षेत्रीय उद्यमों को बढ़ावा जैसे विषयों को शामिल किया गया है। पुदुच्चेरी, ऑरोविले, प्रौद्योगिकी द्वारा शहरों के दैनिक जीवन को उन्नत बनाने, स्वदेशी खेल और लोकनृत्यों आदि के बारे में रिकॉर्डेड वीडियो कैप्सूल भी महोत्सव के दौरान प्रतिभागियों को दिखाये जायेंगे। ओलंपियनों और पैरालंपियनों के साथ भी खुली चर्चा होगी तथा उसके बाद सांयकाल प्रत्यक्ष कला प्रदर्शन होगा। प्रातःकाल वर्चुअल योग सत्र का भी आयोजन किया जायेगा।

आयोजन के दौरान प्रधानमंत्री “मेरे सपनों का भारत” और “अनसंग हीरोज़ ऑफ इंडियन फ्रीडम मूवमेन्ट” (भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के गुमनाम महानायक) पर चयनित निबंधों का अनावरण करेंगे। एक लाख से अधिक युवाओं ने इन दो विषयों पर निबंध लिखे थे, जिनमें से कुछ निबंधों को चुना गया है।

प्रधानमंत्री सूक्षम, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के एक प्रौद्योगिकी केंद्र का भी उद्घाटन करेंगे। इसे लगभग 122 करोड़ रुपये के निवेश से पुदुच्चेरी में स्थापित किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स प्रणाली प्रारूप और विनिर्माण (ईएसडीएम) सेक्टर को ध्यान में रखते हुये इस प्रौद्योगिकी केंद्र को आधुनिकतम प्रौद्योगिकी से लैस किया जायेगा। यह युवाओं को कुशल बनाने में योगदान करेगा तथा हर वर्ष लगभग 6400 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित करने में सक्षम होगा।

प्रधानमंत्री ओपन एयर थियेटर युक्त एक प्रेक्षागृह पेरुनथलैवर कामराजर मनीमण्डपम का भी उद्घाटन करेंगे, जिसे लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से पुदुच्चेरी सरकार ने निर्मित किया है। इसे मुख्य रूप से शैक्षिक उद्देश्य के लिये इस्तेमाल किया जायेगा। यहां एक हजार से अधिक व्यक्तियों के बैठने की क्षमता है।

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प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के लोगों को 'बस्तर पंडुम' त्योहार के विशेष आयोजन पर बधाई दी
February 10, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ में 7 से 9 फरवरी तक मनाए गए 'बस्तर पंडुम' उत्सव के लिए छत्तीसगढ़वासियों को हार्दिक बधाई दी है। इस उत्सव के दौरान बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और आदिवासी विरासत का भव्य प्रदर्शन किया गया। श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

श्री मोदी ने कहा, “पहले जब भी बस्तर का नाम लिया जाता था तब माओवाद, हिंसा और विकास में पिछड़ेपन की छवि मन में आती थी। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। आज बस्तर न केवल अपने विकास के लिए बल्कि यहां के लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास के लिए भी जाना जाता है। मेरी यही कामना है कि आने वाला समय इस क्षेत्र के लिए शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव की भावना से परिपूर्ण हो।” 

केंद्रीय मंत्री श्री अमित शाह की ओर से X पर किए गए एक पोस्ट के उत्तर में श्री मोदी ने कहा: 

"7 से 9 फरवरी के बीच छत्तीसगढ़ में ‘बस्तर पंडुम’ का विशेष आयोजन किया गया। इस उत्सव के दौरान बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जनजातीय विरासत का भव्य रूप दिखा। इस प्रयास से जुड़े अपने सभी परिवारजनों को मेरी हार्दिक बधाई। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

पहले जब बस्तर का नाम लिया जाता था तो माओवाद, हिंसा और विकास में पिछड़ेपन की छवि उभरती थी। लेकिन अब हालात बिल्कुल बदल चुके हैं। आज बस्तर विकास के साथ-साथ स्थानीय लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास के लिए जाना जाता है। मेरी यही कामना है कि यहां का आने वाला समय शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव की भावना से परिपूर्ण हो।"