प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रगति के पथ पर मार्गदर्शन करने वाले शुभ विचारों पर जोर देते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया:
“आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरितस उद्भिदः।
देवा नो यथा सदमिद् वृद्धे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवे दिवे॥”
यह सुभाषितम संदेश देता है कि, सभी दिशाओं से शुभ और प्रेरक विचार हमारे पास आएं - ऐसे विचार जो हमें उत्साह, ऊर्जा और आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करें। वे विचार दृढ़, अजेय और प्रगति का मार्ग खोलने में समर्थ हों। दिव्य शक्तियां हमारे जीवन में नित प्रति दिन विकास, उन्नति और नए उत्साह का संचार करें और दिन-प्रति-दिन हमारी रक्षा करते हुए हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;
“आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरितस उद्भिदः।
देवा नो यथा सदमिद् वृद्धे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवे दिवे॥”
आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः।
— Narendra Modi (@narendramodi) March 13, 2026
देवा नो यथा सदमिद् वृधे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवे दिवे॥ pic.twitter.com/o0CLGr32qi


