होर्मुज स्ट्रेट में दुनिया के अनेक जहाज फंसे हैं, उनमें बहुत बड़ी संख्या में भारतीय क्रू मेंबर्स हैं। यह भी भारत के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है: प्रधानमंत्री
ऐसी चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील घड़ी में, यह अत्यंत आवश्यक है कि भारत की संसद के इस उच्च सदन से संपूर्ण विश्व के लिए शांति और संवाद का एक साझा एवं एकजुट स्वर गूँजे: प्रधानमंत्री
एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में निवास करते हैं और वहाँ कार्यरत हैं, उनके जीवन और जीविका की सुरक्षा भारत के लिए एक अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है : प्रधानमंत्री
पश्चिम एशिया में छिड़े इस युद्ध को तीन सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है और इस संघर्ष ने संपूर्ण विश्व के समक्ष एक गंभीर ऊर्जा संकट उत्पन्न कर दिया है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और होर्मुज़ स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में व्यवधान पूरी तरह से अस्वीकार्य है: प्रधानमंत्री
भारत ने नागरिकों, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर तथा ऊर्जा और परिवहन से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले हमलों की निंदा की है : प्रधानमंत्री
युद्ध की शुरुआत के बाद से अब तक, मैंने पश्चिम एशिया के अधिकांश देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर की टेलीफोन वार्ता की है : प्रधानमंत्री
हम सभी खाड़ी देशों के साथ निरंतर संपर्क में हैं, साथ ही, हम ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ भी लगातार संवाद बनाए हुए हैं: प्रधानमंत्री
हमारा लक्ष्य संवाद और कूटनीति के माध्यम से इस क्षेत्र में शांति बहाल करना है: प्रधानमंत्री
हमने संबंधित पक्षों के साथ क्षेत्रीय तनाव को कम करने और होर्मुज़ स्ट्रेट में आवाजाही पुनः बहाल करने पर भी चर्चा की है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा कि युद्ध के इस कठिन वातावरण में भी भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारत कूटनीतिक माध्यमों से निरंतर प्रयास कर रहा है
युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट मैं जहाजों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारी सरकार ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से रास्ता बनाने का प्रयास किया है: प्रधानमंत्री
हमारा निरंतर प्रयास है कि जहाँ से भी संभव हो, भारत को तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और देश ऐसे प्रत्येक प्रयास के सकारात्मक परिणामों का साक्षी बन रहा है: प्रधानमंत्री
पिछले कुछ दिनों में विश्व के कई देशों से कच्चे तेल और एलपीजी लेकर जहाज भारत पहुँचे हैं और इस दिशा में हमारे प्रयास आने वाले दिनों में भी निरंतर जारी रहेंगे : प्रधानमंत्री
हमारी अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और सरकार तेजी से बदलती परिस्थितियों पर पैनी नजर रख रही है : प्रधानमंत्री
सरकार वर्तमान परिस्थितियों के अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक प्रभावों के समाधान हेतु एक सुनियोजित रणनीति के साथ काम कर रही है: प्रधानमंत्री
सरकार ने उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ कर ली हैं : प्रधानमंत्री
सरकार निरंतर यह प्रयास कर रही है कि किसी भी संकट का बोझ हमारे किसानों पर न पड़े : प्रधानमंत्री
मैं देश के किसानों को एक बार फिर आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हर चुनौती के समाधान के लिए सरकार पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी है : प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज राज्यसभा को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उत्पन्न स्थिति पर सरकार का पक्ष प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी इस युद्ध ने एक गंभीर वैश्विक ऊर्जा संकट उत्पन्न कर दिया है, जिसका भारत पर चिंताजनक प्रभाव पड़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यह संघर्ष भारत के व्यापारिक मार्गों को बाधित कर रहा है और पेट्रोल, डीजल, गैस तथा उर्वरकों जैसी आवश्यक वस्तुओं की नियमित आपूर्ति को प्रभावित कर रहा है। खाड़ी देशों में रह रहे और वहां कार्यरत लगभग एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और जीविका का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे गहरी चिंता का विषय बताया। साथ ही, उन्होंने होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों पर फंसे बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल के सदस्यों की स्थिति की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। सदन को आश्वस्त करते हुए प्रधानमंत्री ने वैश्विक समुदाय को यह मजबूत संदेश देते हुए कहा कि ऐसी चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील परिस्थितियों में, यह अत्यंत आवश्यक है कि भारत की संसद के इस गरिमामय उच्च सदन से संपूर्ण विश्व के लिए शांति और संवाद का एक साझा एवं एकजुट स्वर गूँजे।

युद्ध की शुरुआत के बाद से भारत के सक्रिय कूटनीतिक प्रयासों का विवरण देते हुए प्रधानमंत्री ने सदन को सूचित किया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अधिकांश पश्चिम एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर की टेलीफोन वार्ता की है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत सभी खाड़ी देशों के साथ-साथ ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ भी निरंतर संपर्क में है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का मुख्य उद्देश्य संवाद और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति की बहाली है। इस दिशा में, तनाव कम करने और होर्मुज़ स्ट्रेट को पुनः खोलने के विषयों पर विशेष रूप से चर्चा की गई है। भारत के दृढ़ रुख पर बल देते हुए उन्होंने घोषणा की कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में गतिरोध उत्पन्न करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। भारत ने आम नागरिकों, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर तथा ऊर्जा और परिवहन से जुड़े संसाधनों पर होने वाले सभी हमलों का स्पष्ट रूप से विरोध किया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वैश्विक शांति का आह्वान करते हुए कहा, "इस युद्ध में मानवीय जीवन के लिए कोई भी खतरा मानवता के हितों के विरुद्ध है, इसीलिए भारत का निरंतर प्रयास है कि सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में प्रोत्साहित किया जाए।"

संकट के समय देश और विदेश में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को सरकार की अटल प्राथमिकता बताते हुए प्रधानमंत्री ने साझा किया कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3,75,000 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित देश वापस लाया जा चुका है। इसमें केवल ईरान से लाए गए 1,000 से अधिक भारतीय शामिल हैं, जिनमें 700 से अधिक युवा मेडिकल छात्र हैं। प्रधानमंत्री ने हमलों में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की। उन्होंने बताया कि भले ही सभी देशों ने सुरक्षा का आश्वासन दिया है, लेकिन युद्ध की विभीषिका में हमारे नागरिकों का हताहत होना अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सरकार संकट की इस घड़ी में पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "प्रभावित परिवारों को हर संभव आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है और घायलों के लिए सर्वोत्तम चिकित्सा उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।"

होर्मुज़ स्ट्रेट के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कच्चे तेल, गैस और उर्वरकों के परिवहन के लिए दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक मार्गों में से एक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से इस मार्ग से जहाजों का आवागमन अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालांकि, इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, सरकार ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से वैकल्पिक मार्ग खोजने का प्रयास किया है जिसका एकमात्र लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जहाँ से भी संभव हो, भारत को तेल और गैस की आपूर्ति निर्बाध रूप से प्राप्त हो सके। प्रधानमंत्री ने इन प्रयासों की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा, "देश इन प्रयासों के परिणाम देख रहा है। पिछले कुछ दिनों में दुनिया के विभिन्न देशों से कच्चे तेल और एलपीजी से लदे जहाज भारत पहुँचे हैं। इस दिशा में हमारे प्रयास आने वाले दिनों में भी निरंतर जारी रहेंगे।"

दीर्घकालिक जोखिमों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए, प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि यद्यपि भारत का निरंतर प्रयास तेल, गैस या उर्वरक जैसी हर आवश्यक वस्तु को ले जाने वाले जहाजों की सुरक्षित आवक सुनिश्चित करना है, लेकिन इस युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक व्यवधानों का लंबे समय तक बने रहना अनिवार्य रूप से गंभीर परिणामों की ओर ले जाएगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश की आंतरिक शक्ति और तैयारियों पर बल देते हुए कहा,"इसीलिए, भारत उन सभी रेजिलिएंस-बिल्डिंग उपायों में तेज़ी ला रहा है, जो पिछले वर्षों के दौरान देश की आत्मनिर्भरता और मजबूती के लिए शुरू किए गए थे।"

भारत की दशक भर की रणनीतिक तैयारियों पर बोलते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि हर संकट किसी भी राष्ट्र के संकल्प और उसके प्रयासों की परीक्षा लेता है। उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले ग्यारह वर्षों के दौरान निरंतर और दूरदर्शी निर्णय लिए गए हैं ताकि देश ऐसी चुनौतियों का डटकर सामना कर सके। ऊर्जा आयात के दायरे में विस्तार का विवरण देते हुए उन्होंने सदन को सूचित किया कि भारत अब कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी के लिए 27 के बजाय 41 देशों से अपनी आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने ठीक ऐसे ही संकट के समय के लिए कच्चे तेल के भंडार बनाने को प्राथमिकता दी है और तेल कंपनियों के पास पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। पिछले ग्यारह वर्षों में 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक की आपातकालीन तेल भंडारण क्षमता विकसित की गई है। साथ ही, 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक की अतिरिक्त क्षमता स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है और भारत की रिफाइनिंग क्षमता में भी महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को आश्वस्त करते हुए कहा, "मैं इस सदन और पूरे देश को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडारण है और निरंतर तथा निर्बाध आपूर्ति के लिए हमारे पास अत्यंत पुख्ता व्यवस्था है।"

किसी एक ईंधन स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने की सरकार की रणनीति का विस्तार से विवरण देते हुए, प्रधानमंत्री ने घरेलू गैस आपूर्ति के लिए एलपीजी के साथ-साथ पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) पर दिए जा रहे जोर को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में पीएनजी कनेक्शनों पर अभूतपूर्व कार्य किया गया है और हाल के दिनों में इस प्रयास को और अधिक गति प्रदान की गई है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ऊर्जा सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा, "इसके साथ ही, देश के भीतर एलपीजी के घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि करने के लिए भी बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे हैं।"

भारत की आत्मनिर्भरता की दृष्टि का समर्थन करते हुए, प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि पिछले कई वर्षों से सरकार का निरंतर प्रयास हर क्षेत्र में दूसरे देशों पर निर्भरता को न्यूनतमकरना रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि वर्तमान में भारत का 90 प्रतिशत से अधिक तेल विदेशी झंडे वाले जहाजों द्वारा लाया जाता है, जो किसी भी वैश्विक संकट के समय देश की संवेदनशीलता को बढ़ा देता है। इस चुनौती से निपटने के लिए, सरकार ने मेड-इन-इंडिया जहाज बनाने के लिए लगभग ₹70,000 करोड़ का एक मिशन शुरू किया है। इसके साथ ही जहाज निर्माण, जहाज तोड़ने (शिप ब्रेकिंग) और उनके रखरखाव एवं मरम्मत (ओवरहॉलिंग) की क्षमताओं का तेजी से विकास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने आगे बताया कि भारत के रक्षा क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाया गया है। अब देश अपनी अधिकांश सैन्य आवश्यकताओं और हथियारों का निर्माण घरेलू स्तर पर ही कर रहा है। इसके अतिरिक्त, जीवन रक्षक दवाओं के लिए घरेलू एपीआई इकोसिस्टम बनाने और 'रेयर अर्थ मिनरल्स' के आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भविष्य का मार्ग प्रशस्त करते हुए कहा, "हर महत्वपूर्ण क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता ही आगे बढ़ने का एकमात्र मार्ग है और इन सभी मोर्चों पर बड़े कदम उठाए जा रहे हैं।"

वर्तमान संकट के आर्थिक प्रभाव का आकलन करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संघर्ष ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को झकझोर दिया है और पश्चिम एशिया में हुई क्षति से उबरने में काफी समय लगेगा। उन्होंने कहा कि भारत पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें देश की सुदृढ़ आर्थिक बुनियाद और सरकार द्वारा उभरती स्थिति की निरंतर निगरानी एक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य कर रही है। सदन को तैयारियों की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया गया है, जो आयात-निर्यात से संबंधित चुनौतियों का आकलन करने के लिए नियमित रूप से बैठकें करता है। इसके अतिरिक्त, कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाए गए मॉडल की तर्ज पर सात नए 'एम्पॉवर्ड ग्रुप्स' (अधिकार प्राप्त समूह) का गठन किया गया है। ये समूह आपूर्ति श्रृंखला, पेट्रोल-डीजल, उर्वरक, गैस और मुद्रास्फीति जैसे क्षेत्रों में त्वरित और दूरगामी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। प्रधानमंत्री ने इस सामूहिक दृष्टिकोण पर अपना अटूट विश्वास व्यक्त करते हुए कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि इन साझा और समन्वित प्रयासों के माध्यम से, हम इन परिस्थितियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम होंगे।"

कृषि क्षेत्र पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने राष्ट्र को आश्वस्त किया कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है कि आगामी बुवाई के मौसम के दौरान किसानों को उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में सभी आवश्यक तैयारियाँ पहले ही पूरी कर ली गई हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश के अन्नदाताओं को अटूट विश्वास दिलाते हुए कहा, "मैं एक बार फिर देश के किसानों को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हर चुनौती का समाधान खोजने में सरकार मजबूती से उनके साथ खड़ी है। हमारा यह अडिग संकल्प है कि किसी भी वैश्विक संकट का बोझ हमारे किसानों के कंधों पर न आने पाए।"

राज्यसभा में देश के सभी राज्यों के प्रतिनिधित्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाला समय राष्ट्र के लिए एक बड़ी परीक्षा है। उन्होंने जोर दिया कि इस संकट से निपटने के लिए राज्यों का सहयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ लाभार्थियों तक समय पर पहुँचता रहे, क्योंकि किसी भी संकट का सबसे अधिक प्रभाव गरीबों, मजदूरों और प्रवासी श्रमिकों पर पड़ता है। प्रवासी श्रमिकों के सामने आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए सक्रिय कदम उठाने और राज्य सरकारों द्वारा विशेष निगरानी तंत्र विकसित करने का आह्वान करते हुए, उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे समय में कालाबाजारी करने वाले और जमाखोर अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि जहाँ भी ऐसी शिकायतें मिलें, वहाँ त्वरित कार्रवाई की जाए। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सभी राज्यों से अपील करते हुए कहा, "आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति हर राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मेरा सभी राज्य सरकारों से सविनय आग्रह है कि वे इसे सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं लागू करें।"

केंद्र और राज्यों के बीच मिलकर काम करने की भावना का आह्वान करते हुए, प्रधानमंत्री ने सभी राज्य सरकारों से अपील की कि संकट चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, भारत की आर्थिक तरक्की की रफ्तार कम नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि हर जरूरी कदम और सुधार पूरी गति के साथ लागू किए जाने चाहिए। कोविड-19 महामारी के दौरान दिखाई गई 'टीम इंडिया' की शानदार भावना को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय केंद्र और राज्यों ने अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारें होने के बावजूद—टेस्टिंग, टीकाकरण और जरूरी सामानों की सप्लाई के लिए मिलकर और तालमेल के साथ काम किया था। उन्होंने कहा कि आज भी देश को उसी भावना के साथ आगे बढ़ना होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अटूट विश्वास के साथ कहा, "सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के साझा प्रयासों से ही देश इस गंभीर वैश्विक संकट का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर पाएगा। हमें उसी 'टीम इंडिया' की भावना को आगे बढ़ाना होगा।"

इस संकट की अलग और नई तरह की प्रकृति को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संकट एक अलग प्रकार का है और इसके लिए समाधान भी उतने ही अलग और विशेष होने चाहिए। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश का मनोबल बढ़ाते हुए कहा, "हमें हर चुनौती का सामना धैर्य, संयम और शांत मन के साथ करना चाहिए।"

अपने संबोधन का समापन एक मजबूत संकल्प के साथ करते हुए, प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि स्थितियाँ हर पल बदल रही हैं। उन्होंने भारत के नागरिकों से हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने आगाह किया कि इस युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की पूरी संभावना है, लेकिन साथ ही उन्होंने राष्ट्र को एक ठोस आश्वासन देते हुए कहा, "सरकार पूरी तरह सतर्क है, तैयार है और अपनी रणनीति तैयार करते हुए हर फैसला पूरी गंभीरता के साथ ले रही है। इस देश के लोगों का कल्याण हमारे लिए सर्वोपरि है, यही हमारी पहचान है और यही हमारी ताकत है।"

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स्वर साधना, मनोकामना, आराधना। एक बहुत ही शुभ शुरुआत के बाद। अच्छा होता आप ही का कार्यक्रम चलता। आप सबको नमस्कार।

रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के सभी दर्शक और अब तो बहुत सारी भाषाओं में भी है, तो उन सबको भी मेरा प्रणाम! मैं इस समिट में हिस्सा लेने आए सभी साथियों का भी अभिनंदन करता हूं। 24 घंटे चलने वाले चैनलों में ब्रेकिंग न्यूज इसका बहुत बड़ा महत्व होता है। और आजकल तो दुनिया में ही, पूरी दुनिया में कहीं पर भी नजर डालो, पूरी दुनिया ब्रेकिंग न्यूज के मोड पर ही है, और इतनी भागदौड़ में आप सभी, इस समिट को होस्ट कर रहे हैं, इसका हिस्सा बने हैं। और इसलिए आप विशेष बधाई के पात्र हैं। और इस बार आपकी चर्चा का विषय भी उतना ही अहम है...Great Power India: Nation First...

साथियों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है...यतो धर्मस्ततो जयः ! यानि जय का, शक्ति का, मूल धर्म है। और धर्म यानि ड्यूटी, धर्म यानि जस्टिस, धर्म यानि समभाव, धर्म यानि संवाद, धर्म यानि संवेदना और यही तो नेशन फर्स्ट की भावना में भी समाहित है। भारत, अपनी पावर को इसी लैंस से देखता है, इसी तराज़ू पर तौलता है।

साथियों,

भारत की एक और विशेषता है और अब तो दुनिया ने भी मान लिया है। हम किसी क्षणिक घटना पर उतावले होने वाले देश नहीं है, हम वो हैं जिसने विकास और विनाश, देखा भी झेला भी है। हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमरी चिप लगी हुई है, हम युगों की मेमरी चिप वाले नेशन हैं। और इसलिए भारत आज जो कर रहा है, और ये मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ, भारत जो कर रहा है वो आने वाले एक हज़ार वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है। और यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है। भारत, Fast-Growing Economy भी है। एक Credible Economy भी है। और भारत, rising power के साथ-साथ और अभी आप तो ढेर सारी डिक्शनरी लेकर बैठ गए थे, सुपर पावर तक ले गए। लेकिन मैं इतना जरूर कहूँगा कि भारत Reliable power है। मैं अभी दो-तीन दिन पहले G7 समिट से लौटा हूं और दुनिया का हर नेता हर देश इस बात को भली-भांति समझता है कि आज के भारत के लिए नेशन फर्स्ट ही सबसे बड़ा मंत्र है, सबसे बड़ा सिद्धांत है।

साथियों,

कुछ दिन पहले ही, हमारी सरकार को 12 साल पूरे हो चुके हैं। उसके लिए भी अर्नब ने आपको तालियाँ बजाने के लिए मजबूर कर दिया। पिछले बारह वर्षों की जो भी सिद्धियां देश की रही हैं, उनके मूल में अगर आप तराजू से तौलोगे, हर निर्णय, हर कदम, हर प्रयास उनके मूल में राष्ट्र प्रथम की भावना ही केंद्र में है। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर मेक इन इंडिया खादी खरीदने पर जोर स्थानीय वस्तुएं खरीदने पर जोर ये सारे Initiative इसलिए सफल हुए क्योंकि देश की जनता ने देश को सबसे ऊपर रखते हुए अपना कर्तव्य निभाया। देश के नागरिकों को मैं सलाम करता हूँ।

साथियों,

यहां हमारे साथी श्रीधर वेंबु जी बैठे हैं। जब हमारे उद्यमी नेशन फर्स्ट की भावना के साथ चलते हैं, जब वो देश की आवश्यकताओं को समझते हुए अपने लक्ष्य बनाते हैं तो संस्थाएं भी बनती हैं और देश भी समृद्ध होता है। श्रीधर वेंबु जी ने क्या काम किया है, शायद यहाँ बातों में कितना निकला होगा मुझे मालूम नहीं, लेकिन अभी मैं फ़्रांस में vivatech में गया था, करीब डेढ़ 2 लाख नौजवान वहाँ होंगे, चलने के लिए भी मैं और फ्रांस के राष्ट्रपति अलग अलग स्टॉल पर जा रहे थे, देखने के लिए भई नौजवानों ने क्या काम किया है। तो हम जोहो के स्टॉल पर गए, मैं हैरान था जी, और गर्व होता था कि जोहो के स्टाल पर यूरोप के नौजवानों की जो भीड़ लगी थी और वो समझना चाहते है कि क्या है ये दुनिया में नई चीज, भारत में शायद उतनी चर्चा नहीं होगी, जितनी मैंने वहाँ फ्रांस में देखी, बधाई हो आपको।

साथियों,

सरकार की नीति और निर्णयों में नेशन फर्स्ट का क्या प्रभाव होता है, इसका एक उदाहरण हमारा आदिवासी क्षेत्र है। मैं आज कोई फिलोस्फी झाड़ने वाला नहीं हूँ, कुछ बातें जो हुई है वो हल्की फुल्की बता दूंगा और उससे आप अंदाज लगा लेंगे कि काम कैसे होता है। मैं आदिवासी क्षेत्र की बात करता हूँ। भारत के 10 करोड़ से अधिक आबादी की चर्चा, मतलब कि आदिवासी समाज की चर्चा और हम सबको पता है कि दशकों से माओवादी आतंक वहाँ अपने डेरा तंबू डालकर बैठ हुआ था। जहां 21वीं सदी में भी इन आतंकियों ने एक भी सुविधा पहुंचने नहीं दी, सरकारी एक वेहिकल नहीं गुजर सकता था वहाँ से। गोलियों से भून दिया जाता था। अनेक सरकारें आई-गईं, कई पीढ़ियां आई-गईं, लगता था कि हिंसा का ये दुर्भाग्य ऐसे ही रहेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, 2004 से 2014 के बीच, मैं उस दस साल का हिसाब बताता हूँ, 2004 से 2014 के बीच माओवादी आंतक के कारण, 17 हज़ार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थीं। और करीब-करीब 7 हज़ार से ज्यादा जानें गईं थी।

साथियों,

आज आपके लिए वन लाइन न्यूज होगा या टीवी पर आधे घंटे डिबेट होगी कि माओवाद आतंकवाद खत्म हो गया, चीजें ऐसी नहीं होती। उसके लिए खपना पड़ता है और इसलिए मैं बताना चाहता हूँ। और इसलिए मैं बताना चाहता हूं और आजकल जो लोग, कुछ लोग संविधान दिखाते रहते हैं, लेकिन जब ये लोग सरकार में थे और नक्सल प्रभावित इलाकों में संविधान का नाम लेने पर गोली मार दी जाती थी और तब ये लोग चुप बैठे थे, तब उनके हाथो में संविधान नहीं दिखता था, कांप रहे थे उनके हाथ। उस दर्दनाक स्थिति से कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ता था।

साथियों,

2014 के बाद, हालात को बदलने के लिए हम राष्ट्र प्रथम के भाव से आगे बढ़े, हम निकल पड़े। बोलते नहीं थे, बताते भी नहीं थे, करते जरूर थे। हमने संकल्प लिया कि नक्सलवाद-माओवाद को जड़ से उखाड़ फेकेंगे और आज पूरा देश नतीजा देख रहा है, आज देश में माओवादी आतंक, अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

और साथियों,

कई बार अंतिम परिणाम इतना बड़ा और व्यापक होता है कि उसके पीछे की मेहनत पर ध्यान नहीं जाता। रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को मैं खासतौर पर इसके बारे में बताना चाहता हूं।

साथियों,

जिन नक्सल प्रभावित इलाकों में दिन में जाने से भी, यानी सामान्य मानवी डरा रहता था, उसको लगता था कहीं अपहरण हो जाएगा तो, कभी वसूली का डर रहता था, कभी साथ में जो कुछ भी है वो लूट लेने का डर रहता था। और जहां पर विकास की बात बोल तक नहीं सकते थे आप, लेकर के जा नहीं सकते थे, सब नामुमकिन था, ऐसे क्षेत्रों में हम हम विकास का संकल्प लेकर आगे बढ़े। वहां बीते 12 वर्षों में हमारी सरकार ने 12 हज़ार किलोमीटर से अधिक की सड़कें बनाईं। और कई बार तो हमने देखा, कई बार तो हमने देखा कि सड़क बनाने के जो हमारा साजो सामान होता है उसको जला दिया जाता था। कांट्रेक्टर को भगा दिया जाता था। अगर 25 लोग रोड पर काम करते तो 200 लोग पुलिस सुरक्षा रखते थे ताकि काम चले। यह सब इसलिए करते थे- तय किया था।

साथियों,

साढ़े 9 हज़ार से अधिक मोबाइल टावर बनाए। एक टावर नहीं लगने और लगा हुआ टावर तोड़ देते थे। क्योंकि उनको हमेशा वहां आक्रोश पैदा करना था। करीब 45,000 गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई। नक्सल प्रभावित जिलों में 1800 से अधिक बैंक ब्रांच खोली गई। करीब 75,000 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और 6000 से अधिक नए पोस्ट ऑफिस बनाए गए। सिर्फ बम, बंदूक और गोली के सहारे काम नहीं किया है साथियों, हमने दिलों को जीतने के लिए, ईश्वर ने जो भी शक्ति दी थी उसको खपाया था।

साथियों,

हम बुलंद इरादों के साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में जनसामान्य की आशा, आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए जा रहे थे। आप हैरान हो जाएंगे एक मशहूर नक्सली, करोड़ों रुपए का इनाम थे उसके, उसकी मां के पास हम पहली बार राशन कार्ड लेकर गए। बेटा अपनी मां को राशन कार्ड लेने नहीं देता था, आतंकवाद अपना चलाने के लिए। इतनी घटनाएं हैं, मैं हैरान था। और सरकार चुप बैठी थी, उनको संविधान उस समय तो दिखता नहीं था। लेकिन इन सारे प्रयासों का परिणाम यह आया कि जन सामान्य में एक विश्वास का नया दौर आया। आज आप देखिए बस्तर जैसे इलाकों में बम बंदूक नहीं बस्तर ओलंपिक्स की धूम है। और अब तक इस ओलंपिक के दो एडिशन हो चुके हैं। पहली बार डेढ़ लाख से अधिक युवाओं ने और दूसरी बार करीब 4 लाख युवाओं ने बस्तर ओलंपिक्स में हिस्सा लिया। यानी जहां कभी टेरर था, वहां टैलेंट को अवसर मिल रहा है, वहां स्पोर्ट्स फल-फूल रहा है।

साथियों,

12 वर्षों के इस सेवाकाल की एक और बड़ी सिद्धि रही है, यह सिद्धि है, निराशा से निकलकर आशा-आकांक्षा सबसे भरे भारत का निर्माण।

साथियों,

नक्सल कहीं और होगा लेकिन घटनाओं की पीड़ा हिंदुस्तान के हर कोने में होती थी और जिस समय नक्सल खत्म होने की बातें आने लगी तो विश्वास सिर्फ नक्सली इलाके का नहीं, हिंदुस्तान के कोने-कोने में जगने लगा। 2014 से पहले के 10 वर्षों में जो कांग्रेस सरकार चली, उससे नाराजगी केवल गवर्नेंस की नहीं थी। तब देश की निराशा इससे कहीं अधिक थी, देश उम्मीद खो चुका था, लोगों को लगता था कि कुछ हो ही नहीं सकता, कुछ बदल ही नहीं सकता।

साथियों,

पिछले 12 वर्षों में भारत ने उसी निराशा को आशा में बदला है और मुझे इस बात का सबसे ज्यादा संतोष है। आज हर किसी को यह लगता है कि थोड़ी और मेहनत करेंगे, तो यह हो सकता है। वो दिन चले गए जब एक ही बात सुनाई देती थी, कतई नहीं हो सकता, कतई नहीं हो सकता, वो जमाना चला गया, आज ये होकर रहेगा। ये जो भाव आया है यही भारत की असली सिद्धि है, और यही रियल पावर है। चुनौतियां तो आज भी बहुत है और हमेशा रहेगी और चुनौतियां बहुरूपिया होती है, वो नए-नए अवतार में सामने आती रहती है, अरे आएगी, जिस रूप में आएगी, जंग उससे भी लड़ लेंगे जी और जीत भी लेंगे। लेकिन यह हो सकता है और हम यह करके रहेंगे, जब इस भाव से देश आगे बढ़ता है, तब सपने पूरे होते हैं।

साथियों,

मैं यहां भारत के 100 से ज्यादा जिलों और 500 से ज्यादा ब्लॉक्स की चर्चा करना चाहूंगा। यह विकास के हर पैरामीटर पर पीछे छूट गए थे और पहले की सरकार ने इन पर पिछड़ा होने का ठप्पा लगा दिया था, यह तो बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट है, ये तो बैकवर्ड इलाका है। हमने देश के इस बहुत बड़े क्षेत्र को पिछड़ेपन की निराशा से बाहर निकालकर डेवलपमेंट की एस्पिरेशन जगाई। सबसे पहले तो हमने पहचान ही बदल दी, हमने कहा ये एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट है, ये एस्पिरेशनल ब्लॉक है, हमने एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट का प्रोग्राम बनाया, एस्पिरेशनल ब्लॉक का प्रोग्राम बनाया और सरकार ने विकास के हर पैरामीटर पर बहुत बारीकी से काम शुरू किया। इस डिस्ट्रिक्ट में ये तीन पहलू है, पहले उसमें से बाहर निकलो। यहां छह पहलू है, पहले इसमें से बाहर निकलो। बड़ा फोकस वे में काम शुरू किया। आज यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट और ब्लॉक्स राज्य की ओवरऑल ग्रोथ को आगे बढ़ाने का काम करने लगे हैं। जो पहले ग्रोथ को पीछे खींचते थे, इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में बहुत बड़ी आबादी गरीब थी, अभाव में थी। बीते वर्षों में 25 करोड़ गरीबों ने गरीबी को परास्त किया है। तो इसमें इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट की एक बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

हम देखते हैं कि जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो सिर्फ घर का वो व्यक्ति ठीक होता है ऐसा नहीं है। जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो पूरा परिवार ठीक हो जाता है। ऐसे ही, जब घर का कोई एक बेटा-बेटी कुछ अचीव करता है, तो सिर्फ वो व्यक्ति अचीव करके नहीं आता, वो पूरा परिवार, पूरा परिवार अचीवमेंट से भर जाता है, विश्वास बदल जाता है। ऐसे ही, जब कोई गरीबी से बाहर आता है, तो सम्पूर्ण समाज का फायदा होता है, देश का फायदा होता है। 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, निओ मिडिल क्लास में आए हैं, तो इसका फायदा केवल उन परिवारों तक नहीं रहता, बल्कि मिडिल क्लास का भी इसमें फायदा होता है। क्योंकि यह नया कंज्यूमर है, जो इकोनॉमी को ड्राइव करता है, उससे अल्टीमेटली मिडिल क्लास के लिए अवसर बनते हैं। यानी गरीबी कम होना केवल वेलफेयर का ही विषय नहीं है, यह अवसरों के विस्तार की गाथा है, नई एस्पिरेशंस की प्रेरणा है।

साथियों,

पिछले 12 वर्ष में जो इतना विशाल मिडिल क्लास देश में तैयार हुआ है, वो सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। मिडिल क्लास की Ease of Living के लिए सरकार ने हर स्तर पर काम किया है। अब जैसे अपने घर का सपना है। हर मिडिल क्लास परिवार की एक इच्छा रहती है कि भई खुद का घर हो, हर किसी को पूछोगे एक मन में रहता है मेरा अपना घर हो। 2014 में अगर किसी परिवार को अपना घर खरीदना होता था, तो होम लोन डबल डिजिट के इंटरेस्ट रेट पर मिलता था। लेकिन आज किसी भी बैंक से होम लोन 7-8 परसेंट के रेट पर मिल जाता है। पहले लोन लेना भी किसी युद्ध जीतने जैसा था, युद्ध जीतने में जितनी ताकत लगती थी, उतनी लोन लेने में लगती थी। आज यह घर बैठे ही संभव हो पा रहा है। मैं यहीं की बात बताता हूं, यह दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोग जानते हैं कि कैसे शहरी मिडिल क्लास के हजारों घर अधूरे अटके हुए थे। पैसे दे दिए थे, पूरे जिंदगी भर की कमाई बिल्डर को दे दी थी। उसने भी बढ़िया-बढ़िया पम्पलेट दिखाए, सपने दिखाए। अभी किराए पर घर में रहते हैं, तो किराया भी देना है, घर जल्दी मिलेगा। उधर किराया रहता है, घर मिल नहीं रहा, घर बन नहीं रहा, यह बहुत बुरा हाल था। इन अधूरे घरों को पूरा करने के लिए हमने 25 हजार करोड़ रुपए का स्पेशल फंड बनाया। और आपको जानकर खुशी होगी कि देश में बरसों से अटके करीब 60 हजार घरों को डिलीवरी किया जा चुका है।

साथियों,

एक और चीज है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। यह जरूरत है, कनेक्टिविटी की, ट्रांसपोर्ट की। आज आप सोशल मीडिया में देखिए, दुनियाभर से जो भी टूरिस्ट आता है, भारत आता है, वो हमारे मेट्रो सिस्टम को देखकर हैरान रह जाता है।

साथियों,

वर्ष 2014 में करीब 28 लाख लोग, हर रोज मेट्रो से सफर करते थे। आज करीब एक करोड़ अठाइस लाख लोग हर रोज मेट्रो से सफर कर रहे हैं। अब वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेन्स देश को कनेक्ट कर रही हैं। अच्छी सड़कों, अच्छे हाईवे से, समय तो बच ही रहा है, गाड़ियों की मैंटेनेंस पर होने वाला खर्चा भी कम हुआ है। बीते वर्षों में एयरपोर्ट्स की संख्या डबल हुई है। इससे कई छोटे-छोटे शहरों में भी मिडिल क्लास को हवाई यात्रा की सुविधा पहली बार मिली है।

साथियों,

पिछले 12 साल, मिडिल क्लास के लिए कमाई के साथ-साथ बचत के भी रहे हैं। 2013-14 में, लगभग 2 लाख रुपए तक की आय होने पर टैक्स लगता था, आप सबको वो नसीब रहा होगा। और यह टैक्स मिडिल क्लास देता रहता था। आज 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। यानी टैक्स फ्री इनकम कई गुणा बढ़ गई है।

साथियों,

GST रिफॉर्म्स के कारण भी मिडिल क्लास को बहुत सुविधा हुई है। टैक्स फाइलिंग का समय और खर्चा भी बच गया है। क्योंकि यह बहुत ही आसान हो गया है। घर बैठे ही ITR फाइल हो रहे हैं, अगर कोई सेटलमेंट का इश्यू है, तो वो फेसलेस हो रहा है।

साथियों,

मिडिल क्लास परिवारों में एक बड़ा खर्चा डायबिटीज या ऐसी लाइफस्टाइल से जुड़े इलाज का भी रहता है। जन औषधि केंद्रों पर 80 परसेंट डिस्काउंट पर ऐसी दवाएं मिल रही हैं। अगर आपका पहले हजार रुपया खर्चा होता था, तो आज 200 रुपये में काम हो जाता है, 800 रुपये बच रहा है और इससे बीते वर्षों में करीब 40 हज़ार करोड़ रुपए की बचत देश के अनेक परिवारों की हुई है। मिडिल क्लास के बजट का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्गों के इलाज पर भी जाता है। आज 70 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक के लिए 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध है।

साथियों,

एक सामान्य स्वभाव है कि जब कोई सुविधा लगातार मिलती है, तो इंसान पहले की परेशानी भूल जाता है। अब 2 लाख रुपये पर आप टैक्स देते थे, अब 12 लाख तक नहीं देना पड़ रहा, लेकिन जब मैं कहूं, तब ताली बजती है। और बस में, ट्रेन में थोड़ी देर भी अगर कुछ मुसीबत आ गई, तो ढेर सारी गालियां देना शुरू हो जाते हैं और यही क्‍लास सबसे ज्यादा बोलता है।

साथियों,

मैंने जैसा कहा ना कि भई पुरानी तकलीफे भूल जाता है आदमी। आप लोगों को आज ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियां बिल्कुल याद नहीं होंगी। पहले ड्राइविंग लाइसेंस लेना होता था, तो कितनी दिक्कत होती थीं, पासपोर्ट लेना होता था, तो क्‍या-क्‍या कुछ नहीं करना पड़ता था, कितने पापड़ बेलने पड़ते थे। आज ड्राइविंग लाइसेंस लेना भी आसान हुआ है और तत्काल पासपोर्ट भी औसतन 3 दिन में ही मिल जाता है।

साथियों,

मैं जानता हूं, हमारी सरकार जिस तरह काम कर रही है, उसने देश के लोगों की एस्पिरेशन बहुत बढ़ा दी है। एक काम हुआ, तो लोगों की डिमांड वहीं खत्म नहीं हो जाती है। वो उससे भी बेहतर काम चाहते है, उससे भी अपग्रेड सुविधा चाहते हैं। अगर पहले डिमांड नई सड़क की थी, तो सड़क बनने के बाद लोग पूछते हैं, मेट्रो कब आएगी? पहले अपेक्षा होती थी कि ट्रेन समय पर पहुंच जाए, ट्रेन में बैठने की साफ-सुथरी जगह मिल जाए। आज डिमांड है कि हमारे रूट पर वंदे भारत क्यों नहीं चल रही है?

साथियों,

कुछ लोगों को ये असंतोष लगता है, यह एस्पिरेशन है, हमारे देश में एक फौज ऐसी है, उसको लगता है कि यह सब मामला कुछ गड़बड़ है। लेकिन लोग आखिरकार यह अपेक्षाएं किसके पास करेंगे भई, जो करता है, उससे ही करेंगे ना! सामान्‍य लोग हीनहीं, पूरी कांग्रेस पार्टी कहती है कि जरा मोदी जी, यह हो जाना चाहिए, यह होना चाहिए, कहते रहते हैं ना! उनको भरोसा है, करेगा तो ये ही करेगा!

साथियों,

एस्पिरेशंस वहीं होती है, जहां लोगों को लगता है कि सपने पूरे हो सकते हैं। और भारत के युवाओं की, भारत के गरीब और मिडिल क्लास की यही एस्पिरेशन है। आज भाजपा-एनडीए सरकारों की ऊर्जा बनी हुई है।

साथियों,

एक तरफ, देश का बहुत बड़ा वर्ग एस्पिरेशनल है, तो दूसरी तरफ, राजनीति की एक टोली है, जिसका जीवन मंत्र बन गया है- ऑलवेज अगेंस्ट! यह टोली, क्रॉनिक डिससैटिस्फैक्शन यानी स्थाई असंतोष से भरी हुई है। आज मैं रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को जरा इस टोली के लक्षण बताने जा रहा हूं। Symptoms पता चलेगा, तो आपको समझ आ जाएगा कि मैं क्या कह रहा हूं। आप आसानी से पहचान लेंगे। जैसे मैं उदाहरण देता हूं, आप समझ जाएंगे। इनको आप अक्सर कहते सुनेंगे, अरे फलां जगह तो चौबीस घंटे बिजली आती है, यहां क्यों नहीं? और अगले ही दिन ये लोग डैम्स का, सोलर पार्क का, थर्मल का, न्यूक्लियर प्लांट का विरोध करने के लिए ढपली लेकर के आ जाएंगे। यानी पहले दिन बिजली क्‍यों नहीं और दूसरे दिन तुम हाइड्रो पावर का डैम क्यों बना रहे हो, यह जमात ऐसी है। यह वो लोग हैं, जो खनिजों के खनन का विरोध करते थे, लेकिन आज पूछते हैं कि भारत का रेयर अर्थ मिनरल्स भंडार कहां है, सप्लाई चेन कहां है? और भारत में फलाने देश की तरह, इलेक्ट्रिक व्हीकल का इकोसिस्टम क्यों नहीं है? यह वही लोग हैं, जो कभी डेटा या आटा, इसकी डिबेट चलाते थे। पहले डाटा कि आटा, डाटा कि आटा, बड़ा मजा आता था। आज यही लोग पूछते हैं कि बताओ मोदी जी, AI में क्या काम हुआ? हद देखिए, एक सांस में कहते हैं, एक ही सांस में कहते हैं कि AI में यह होना चाहिए था, वो होना चाहिए था, हुआ क्यों नहीं? लेकिन दूसरी सांस में वही लोग कहते मिलेंगे, अरे यह डेटा सेंटर क्यों बना रहे हो? यह सेमीकंडक्टर प्लांट क्यों लगा रहे हो? और फिर यह लोग उसके 100 नुकसान गिनाने के लिए घंटे-घंटे भर सोशल मीडिया के स्‍क्रीन पर दिखेंगे, टीवी डिबेट पर दिखेंगे, अखबारों में भरे रहेंगे।

साथियों,

यह लोग करप्शन को लेकर दुनियाभर के इंडेक्स उठाकर लाते हैं, भारत को कटघरे में खड़ा करते हैं, इनके इकोसिस्टम का मीडिया भी 24-24 घंटे उछालता रहता है, लेकिन जब करप्शन के विरुद्ध एक्शन होता है, जब कार्रवाई होती है, तो यही लोग चिल्लाते हैं, सबसे पहले हल्ला मचाने का काम कौन करते हैं, यही गलत हो रहा है, फलाना गया ढीकना गया, रेड कर दी, जांच कर दी, harass कर दिया। सवाल उठाए जाते हैं, कार्रवाई ऐसे क्यों हो रही है, वैसे क्यों नहीं, अब क्यों हो रही है, तब क्यों नहीं, A पर क्यों हो रही है, B पर क्यों नहीं हो रही है, यही उनका खेल है।

साथियों,

इन लोगों का कैरेक्टर समझना देश के लिए बहुत जरूरी है। खासतौर पर मेरे देश के युवाओं को इनको पहचानने की जरूरत है और हमारी जेन जी को तो बहुत जल्दी समझना चाहिए, जल्दी समझो वरना अब सूर्यवंशी आया है, वो तेज गति से समझाता है।

साथियों,

यह लोग एक तरफ कहेंगे कि देश की सेनाओं को छूट नहीं है, हथियार नहीं मिल रहे हैं, लेकिन जब सरकार कोई डिफेंस डील करेगी, कोई आधुनिक हथियार खरीदती है, तो सबसे पहले आकर कहते हैं कि यह क्यों खरीदा? यह दुनिया भर में भारत की कूटनीति पर सवाल करेंगे, लेकिन जब भारत कूटनीति के लिए, सुरक्षा के लिए कहीं कोई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाने लगेगा, तो यह लोग ढोल-ढपली लेकर हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं।

साथियों,

आज भारत जिस अहम कालखंड में है, इसमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा, उनके कुतर्क को समझना होगा और उनसे सतर्क रहना बहुत जरूरी होगा। और आज दुर्भाग्य से, आज देश के मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस पर, ऐसे ही लोगों का कब्जा हो गया है। कांग्रेस कभी नेशन फर्स्ट की बात करेगी, यह सोचना भी अब झूठे सपने जैसा हो गया है। कल्पना ही नहीं कर सकते क्या कभी कांग्रेस में यह फिर से आएगी बात, जो गांधी जी के जमाने में थी।

साथियों,

आज दुनिया पुरानी धाराओं को चैलेंज कर रही है, डिसरप्शन्स की स्केल बहुत बड़ी हो गई है, लेकिन इसका एक और पक्ष है। यह चुनौतियां, नए अवसर भी ला रही है। भारत के हर युवा, हर उद्यमी, हर इनोवेटर, हर स्टार्टअप को, इन्हीं अवसरों पर फोकस करना है और इसमें सरकार, नेशन फर्स्ट की भावना के साथ पूरी तरह देश के लोगों के साथ है। भारत आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है। यह गति आगे और तेज होगी, मैं रिपब्लिक टीवी के इस मंच से देशवासियों से फिर कहूंगा कि हमारा सपना जितना बड़ा है, हमारे प्रयास भी उतने ही विराट होंगे और 140 करोड़ देशवासियों का यही साझा प्रयास, विकसित भारत बनाकर रहेगा। और आप सब लोग, मैं विश्वास से कहता हूं, अपनी आंखों से विकसित भारत देखने वाले हैं। आने वाली पीढ़ियों तक इंतजार करना पड़े, इस प्रकार से मैं काम नहीं करता, आप खुद अपनी आंखों से देखकर के जाएंगे। इसी विश्वास के साथ, मैं फिर एक बार रिपब्लिक टीवी को, उसके दर्शकों को और आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं! बहुत-बहुत धन्यवाद!