आज हम जिस शासन के मूल सिद्धांत का पालन कर रहे हैं, वह है 'नागरिक देवो भव,' जिसका उद्देश्य सार्वजनिक सेवाओं को अधिक सक्षम और नागरिकों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाना है: प्रधानमंत्री
आज का भारत आकांक्षी है, प्रत्येक नागरिक के सपने और लक्ष्य हैं और हम सभी पर उन्हें पूरा करने के लिए अधिकतम सहयोग प्रदान करने की जिम्मेदारी है: प्रधानमंत्री
प्रत्येक निर्णय से पहले, जब हम अपने कर्तव्य के बारे में सोचते हैं तो हमारे निर्णयों का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है : प्रधानमंत्री
हमें अपने प्रयासों को भविष्य के संदर्भ में देखना चाहिए, यह समझना चाहिए कि हमारे एक निर्णय से कितने नागरिकों का जीवन बदल सकता है और हमारा व्यक्तिगत परिवर्तन कैसे संस्थागत बदलाव बन सकता है: प्रधानमंत्री
एक बेहतर प्रशासक, एक बेहतर लोक सेवक वह होगा जिसके पास प्रौद्योगिकी और डेटा की गहरी समझ हो, यही निर्णय लेने का आधार बनेगा: प्रधानमंत्री
हमें विभागों के बीच संवादहीनता खत्म कर समन्वय स्थापित करना होगा और बेहतर तालमेल, साझा समझ और समग्र सरकारी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना होगा, तभी प्रत्येक मिशन सफल होगा : प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज कर्मयोगी साधना सप्ताह को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया और सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। यह कार्यक्रम क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया।

प्रधानमंत्री ने तेजी से बदलते वैश्विक परिवेश के साथ सार्वजनिक सेवाओं के तालमेल की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारत तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्थाओं के बीच तेजी से प्रगति कर रहा है और उसे अपनी शासन प्रणाली को निरंतर अपडेट करते रहना होगा। श्री मोदी ने कहा, "कर्मयोगी साधना सप्ताह, यह सुनिश्चित करने के प्रयास में एक महत्वपूर्ण कड़ी है कि हमारी सार्वजनिक सेवा 21वीं सदी में प्रासंगिक और उत्तरदायी बनी रहे।"

प्रधानमंत्री ने आज के शासन के मार्गदर्शक सिद्धांत पर विस्तार से बताते हुए कहा कि प्रशासन का मूल मंत्र "नागरिक देवो भव" है, जिसका अर्थ है नागरिक को सर्वोपरि मानना। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोक सेवा को अधिक सक्षम और नागरिकों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने के लिए पुनर्परिभाषित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "शासन को सही मायने में नागरिक-केंद्रित बनाकर उसे एक नई पहचान दी जा रही है।"

प्रधानमंत्री ने क्षमता निर्माण आयोग की स्थापना पर विचार करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद से अनेक संस्थाएं विभिन्न उद्देश्यों के साथ कार्य कर रही थीं, फिर भी प्रत्येक सरकारी कर्मचारी की क्षमता बढ़ाने के लिए एक समर्पित निकाय की स्पष्ट आवश्यकता थी। उन्होंने कहा, "इसी सोच ने क्षमता निर्माण आयोग को जन्म दिया, जिसका उद्देश्य व्यवस्था में प्रत्येक कर्मयोगी को सशक्त बनाना है।" सीबीसी को उसके स्थापना दिवस पर बधाई देते हुए और आईजीओटी मिशन कर्मयोगी की सफल भूमिका को स्वीकार करते हुए श्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से आधुनिक, सक्षम, समर्पित और संवेदनशील कर्मयोगियों की एक टीम का निर्माण होगा।

प्रधानमंत्री ने इस पहल को विकसित भारत की व्यापक परिकल्पना से जोड़ते हुए सेवा तीर्थ के उद्घाटन के अवसर पर दिए गए अपने हाल के भाषण का उल्लेख किया और तीव्र आर्थिक विकास, आधुनिक अवसंरचना, प्रौद्योगिकी को अपनाने और कुशल कार्यबल की प्रचुरता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सार्वजनिक संस्थानों और लोक सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। श्री मोदी ने कहा, "आज का भारत आकांक्षी है, प्रत्येक नागरिक के सपने और लक्ष्य हैं और हम सभी का यह दायित्व है कि हम उन्हें पूरा करने के लिए अधिकतम सहयोग प्रदान करें।"

प्रधानमंत्री ने नागरिकों के जीवन की सुगमता और गुणवत्ता में सुधार के लिए शासन व्यवस्था को मानदंड बनाना आवश्यक बताते हुए लोक सेवकों से प्रतिदिन कुछ नया सीखने और कर्मयोगी की सच्ची भावना को अपनाने का आग्रह किया। श्री मोदी ने कहा, "हमारी शासन व्यवस्था को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में दिन-प्रतिदिन सुधार हो, यही हमारा सच्चा मानदंड है।"

प्रशासनिक संस्कृति में मूलभूत बदलाव का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पुरानी व्यवस्था में 'अधिकारी' होने पर अत्यधिक जोर दिया जाता था, जबकि आज देश का पूरा ध्यान कर्तव्यनिष्ठा पर केंद्रित है। उन्होंने याद दिलाया कि संविधान स्वयं कर्तव्यों के निर्वाह के माध्यम से अधिकार प्रदान करता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "प्रत्येक निर्णय लेने से पहले, जब आप अपने कर्तव्य की मांग पर विचार करते हैं, तो आपके निर्णयों का प्रभाव स्वतः ही कई गुना बढ़ जाता है।"

प्रधानमंत्री ने लोक सेवकों से अपने वर्तमान कार्य को भविष्य के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने का आग्रह करते हुए उनसे निरंतर इस बात पर विचार करने को कहा कि उनके व्यक्तिगत निर्णय लाखों लोगों के जीवन को कैसे बदल सकते हैं और व्यक्तिगत परिवर्तन संस्थागत परिवर्तन का मार्ग कैसे प्रशस्त कर सकता है। अपने व्यक्तिगत अनुभव से उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे परिवर्तनकारी कार्यों के लिए अपार ऊर्जा की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा, "यह ऊर्जा केवल और केवल निस्वार्थ सेवा की भावना से ही प्राप्त हो सकती है।"

प्रधानमंत्री ने प्रौद्योगिकी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पिछले ग्यारह वर्षों में शासन, सेवा वितरण और अर्थव्यवस्था सहित सरकारी कामकाज में प्रौद्योगिकी के गहन एकीकरण की ओर इंगित किया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के आगमन से ये परिवर्तन और भी तेजी से आगे बढ़ेंगे। श्री मोदी ने कहा, "एक बेहतर प्रशासक, एक बेहतर लोक सेवक वही होगा जिसे प्रौद्योगिकी और डेटा की अच्छी समझ हो; यही निर्णय लेने का आधार बनेगा।" उन्होंने आशा व्यक्त की कि साधना सप्ताह के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता में क्षमता निर्माण और निरंतर सीखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने भारत की संघीय संरचना की ओर ध्यान दिलाते हुए इस बात पर बल दिया कि देश की सफलता उसके सभी राज्यों की सामूहिक सफलता है। उन्होंने कहा कि अगड़े राज्य, पिछड़े राज्य, बीमारू राज्य जैसी दशकों पुरानी श्रेणियां समाप्त की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच की खाई को एकसमान प्रयास से पाटना होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, "हमें संवादहीनता को खत्म कर बेहतर समन्वय, साझा समझ और समग्र सरकारी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना होगा, तभी हर मिशन सफल होगा।"

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के समापन में लोक सेवकों को याद दिलाया कि आम नागरिक के लिए स्थानीय सरकारी कार्यालय ही पूरी सरकार का चेहरा होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अधिकारियों की कार्यशैली और व्यवहार सीधे तौर पर लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को प्रभावित करते हैं। श्री मोदी ने कहा, "हम जो भी करें, जिस भी स्तर पर करें, हमें उस विश्वास की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि यही हमारे लोकतंत्र की नींव है।" उन्होंने क्षमता निर्माण आयोग को एक बार फिर बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि कर्मयोगी साधना सप्ताह भारत के विकसित भारत बनने की यात्रा में एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित होगा।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी को भारत का सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर दुनिया भर के नेताओं ने बधाई दी
June 09, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी को सबसे लंबे समय तक भारत का निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर दुनिया भर के नेताओं ने गर्मजोशी भरी बधाई दी है। विश्‍व भर के नेताओं ने प्रधानमंत्री के बदलाव लाने वाले शासन, 'ग्लोबल साउथ' की वकालत और एक समावेशी व आर्थिक रूप से गतिशील भारत की उनकी कल्‍पना की सराहना की।

श्रीलंका के राष्ट्रपति महामहिम अनुरा कुमारा दिसानायके ने 8 जून 2026 को प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में श्रीलंका की सरकार और वहां के लोगों की ओर से उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा: "यह उपलब्धि न केवल आपके कार्यकाल की अवधि को दर्शाती है, बल्कि उस भरोसे और विश्वास का भी प्रमाण है जो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की जनता ने बार-बार आपके नेतृत्व में जताया है।" राष्ट्रपति ने भारत के उल्लेखनीय आर्थिक और सामाजिक बदलाव का भी ज़िक्र किया और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के विज़न ने भारत की सीमाओं से परे, श्रीलंका सहित कई देशों के लोगों को प्रेरित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने 4-6 अप्रैल 2025 के दौरान श्रीलंका का दौरा किया था। यह इस द्वीप देश की उनकी चौथी यात्रा थी, जिसके दौरान उन्हें 'मित्र विभूषण' से सम्मानित किया गया - यह श्रीलंका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है जो किसी विदेशी गणमान्य व्यक्ति को दिया जाता है। इस यात्रा ने भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) नीति को और मज़बूत किया; श्रीलंका भारत की अटूट साझेदारी से सबसे ज़्यादा लाभ उठाने वाले देशों में से एक है, जिसमें 2022 में श्रीलंका की आर्थिक मुश्किलों के दौरान भारत का अहम सहयोग भी शामिल है।

पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने एक व्‍यक्तिगत वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी को "एक रोल मॉडल और लीडरशिप की मिसाल" बताया। उन्होंने कहा - "आज 20 करोड़ से ज़्यादा लोगों को गरीबी से निकालकर बेहतर ज़िंदगी देना एक अद्भुत उपलब्धि है।" प्रधानमंत्री मारापे ने पापुआ न्यू गिनी की स्‍नेहपूर्ण दोस्ती और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मज़बूत करने की इच्छा ज़ाहिर की। मई 2023 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पापुआ न्यू गिनी की ऐतिहासिक यात्रा भारत–प्रशांत द्वीपीय देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण क्षण था। किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस देश की यह पहली यात्रा थी। यह यात्रा भारत–प्रशांत द्वीप सहयोग मंच (एफआईपीआईसी) के तीसरे शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए की गई थी। इस यात्रा ने 'ग्लोबल साउथ' के एक प्रतिबद्ध साथी के तौर पर भारत की भूमिका पर जोर दिया।

त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर ने इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी और कहा कि "प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्‍व में भारत वैश्विक मामलों में एक प्रमुख आवाज़ बनकर उभरा है।" उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की साधारण शुरुआत से लेकर तीन कार्यकाल तक 1.4 अरब लोगों वाले देश का नेतृत्व करने तक के सफ़र पर प्रकाश डाला और विदेश नीति, आर्थिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक-आर्थिक विकास में भारत की अहम उपलब्धियों पर बल दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने 3-4 जुलाई 2025 को त्रिनिदाद और टोबैगो की एक ऐतिहासिक यात्रा की - जो 26 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी - और यह यात्रा त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय प्रवासियों के आगमन की 180वीं वर्षगांठ के मौके पर हुई।