सरदार पटेल और बिरसा मुंडा ने राष्ट्रीय एकता का विजन साझा किया: पीएम मोदी
आइए, भारत को ग्लोबल एनीमेशन पावरहाउस बनाने का संकल्प लें: पीएम मोदी
आत्मनिर्भर भारत की ओर यात्रा एक जन-अभियान बन गई है: पीएम मोदी
स्टॉप, थिंक एंड एक्ट: डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड्स पर पीएम मोदी
देश भर में कई असाधारण लोग हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में मदद कर रहे हैं: पीएम मोदी
आज, दुनिया भर के लोग भारत के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं: पीएम मोदी
इस बात की खुशी है कि भारत में लोग फिटनेस के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं: पीएम मोदी

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | ‘मन की बात’ में आप सबका स्वागत है | अगर आप मुझसे पूछें कि मेरे जीवन के सबसे यादगार पल क्या रहे, तो कितने ही वाकये याद आते हैं, लेकिन, इसमें भी एक पल ऐसा है जो बहुत खास है, वो पल था, जब पिछले साल 15 नवंबर को मैं भगवान बिरसा मुंडा की जन्मजयंती पर उनकी जन्मस्थली झारखंड के उलिहातू गाँव गया था | इस यात्रा का मुझ पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा | मैं देश का पहला प्रधानमंत्री हूँ, जिसे इस पवित्र भूमि की मिट्टी को अपने मस्तक से लगाने का सौभाग्य मिला | उस क्षण, मुझे न सिर्फ स्वतंत्रता संग्राम की शक्ति महसूस हुई, बल्कि, इस धरती की शक्ति से जुड़ने का भी अवसर मिला | मुझे ये एहसास हुआ कि कैसे एक संकल्प को पूरा करने का साहस देश के करोड़ों लोगों का भाग्य बदल सकता है|

साथियो, भारत में हर युग में कुछ चुनौतियाँ आई और हर युग में ऐसे असाधारण भारतवासी जन्मे, जिन्होंने इन चुनौतियों का सामना किया | आज की ‘मन की बात’ में, मैं, साहस और दूरदृष्टि रखने वाले ऐसे ही दो महानायकों की चर्चा करूंगा | इनकी 150वीं जन्म जयंती को देश ने मनाने का निश्चय किया है | 31 अक्टूबर से सरदार पटेल का 150वीं जन्म जयंती का वर्ष शुरू होगा | इसके बाद 15 नवम्बर से भगवान बिरसा मुंडा का 150वाँ जन्मजयंती वर्ष शुरू होगा | इन दोनों महापुरुष ने अलग-अलग चुनौतियाँ देखी, लेकिन, दोनों का vision एक था ‘देश की एकता’ |

साथियो, बीते वर्षों में देश ने ऐसे महान नायक-नायिकाओं की जन्म जयंतियों को नई ऊर्जा से मनाकर, नई पीढ़ी को, नई प्रेरणा दी है | आपको याद होगा, जब हमने महात्मा गांधी जी की 150वीं जन्म जयंती मनाई थी तो कितना कुछ खास हुआ था | New York के Times Square से Africa के छोटे से गाँव तक, विश्व के लोगों ने भारत के सत्य और अहिंसा के संदेश को समझा, उसे फिर से जाना, उसे जिया | नौजवानों से बुजुर्गों तक, भारतीयों से विदेशियों तक, हर किसी ने गांधी जी के उपदेशों को नए संदर्भ में समझा, नई वैश्विक परिस्थितियों में उन्हें जाना | जब हमने स्वामी विवेकानंद जी की 150वीं जन्म जयंती मनाई तो देश के नौजवानों ने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति को नई परिभाषाओं में समझा | इन योजनाओं ने हमें ये एहसास दिलाया कि हमारे महापुरुष अतीत में खो नहीं जाते, बल्कि, उनका जीवन हमारे वर्तमान को भविष्य का रास्ता दिखाता है |

साथियो, सरकार ने भले ही इन महान विभूतियों की 150वीं जन्म जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का निर्णय लिया है, लेकिन आपकी सहभागिता ही इस अभियान में प्राण भरेगी, इसे जीवंत बनाएगी | मैं आप सभी से आग्रह करूंगा कि आप इस अभियान का हिस्सा बनें | लौह पुरुष सरदार पटेल से जुड़े अपने विचार और कार्य #Sardar150 के साथ साझा करें और धरती-आबा बिरसा मुंडा की प्रेरणाओं को #BirsaMunda150 के साथ दुनिया के सामने लाएँ | आईये, एक साथ मिलकर इस उत्सव को भारत की अनेकता में एकता का उत्सव बनाएँ, इसे विरासत से विकास का उत्सव बनाएँ |

मेरे प्यारे देशवासियो, आपको वो दिन जरूर याद होंगे जब “छोटा भीम” टीवी पर आना शुरू हुआ था | बच्चे तो इसे कभी भूल नहीं सकते, कितना excitement था ‘छोटा भीम’ को लेकर | आपको हैरानी होगी कि आज ‘ढोलकपुर का ढोल’, सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दूसरे देश के बच्चों को भी खूब attract करता है | इसी तरह, हमारे दूसरे animated serials, ‘कृष्णा’, ‘हनुमान’, ‘मोटू-पतलू’ के चाहने वाले भी दुनियाभर में हैं | भारत के animation characters यहाँ की animation movies, अपने content और creativity की वजह से दुनिया-भर में पसंद की जा रही हैं | आपने देखा होगा कि Smartphone से लेकर सिनेमा screen तक, gaming console से लेकर virtual reality तक, animation हर जगह मौजूद है | Animation की दुनिया में भारत नई क्रांति करने की राह पर है | भारत के Gaming Space का भी तेजी से विस्तार हो रहा है | Indian games भी इन दिनों दुनिया-भर में popular हो रहे हैं | कुछ महीने पहले मैंने भारत के leading gamers के साथ मुलाकात की थी, तब मुझे, Indian games की amazing creativity और quality को जानने-समझने का मौका मिला था | वाकई, देश में creative energy की एक लहर चल रही है | Animation की दुनिया में ‘Made in India’ और ‘Made by Indians’ छाया हुआ है | आपको ये जानकर खुशी होगी कि आज भारत के talent, विदेशी productions का भी अहम हिस्सा बन रहे हैं | अभी वाली Spider-Man हो या Transformers, इन दोनों movies में हरिनारायण राजीव के contribution को लोगों ने खूब सराहा है | भारत के Animation studios, Disney और Warner Brothers जैसी, दुनिया के जाने-माने production companies के साथ काम कर रहे हैं |

साथियो, आज हमारे युवा Original Indian Content, जिसमें हमारी संस्कृति की झलक होती है, वो, तैयार कर रहे हैं | इन्हें दुनिया-भर में देखा जा रहा है | Animation sector आज एक ऐसी industry का रूप ले चुका है कि जो दूसरी industries को ताकत दे रहा है, जैसे, इन दिनों VR Tourism बहुत famous हो रहा है | आप virtual tour के माध्यम से अजंता की गुफाओं को देख सकते हैं, कोणार्क मंदिर के corridor में टहल सकते हैं, या फिर, वाराणसी के घाटों का आनंद ले सकते हैं | ये सभी VR Animation भारत के creators ने तैयार किए हैं | VR के माध्यम से इन जगहों को देखने के बाद कई लोग वास्तविकता में इन पर्यटन स्थलों का दौरा करना चाहते हैं, यानि tourist destination का virtual tour, लोगों के मन में जिज्ञासा पैदा करने का माध्यम बन गया है | आज इस sector में animators के साथ ही story tellers, writers, voice-over experts, musicians, game developers, VR और AR experts उनकी भी मांग लगातार बढ़ती जा रही है | इसलिए, मैं भारत के युवाओं से कहूँगा - अपनी creativity को विस्तार दें | क्या पता दुनिया का अगला super hit animation आपके computer से निकले ! अगला viral game आपका creation हो सकता है! Educational animations में आपका innovation बड़ी सफलता हासिल कर सकता है | इसी 28 अक्टूबर को यानि कल ‘World Animation Day’ भी मनाया जाएगा | आइए, हम भारत को global animation power house बनाने का संकल्प लें |

मेरे प्यारे देशवासियो, स्वामी विवेकानंद ने एक बार सफलता का मंत्र दिया था, उनका मंत्र था- ‘कोई एक idea लीजिए, उस एक idea को अपनी जिंदगी बनाइए, उसे सोचिए, उसका सपना देखिए, उसे जीना शुरू करिए |’ आज, आत्मनिर्भर भारत अभियान भी सफलता के इसी मंत्र पर चल रहा है | ये अभियान हमारी सामूहिक चेतना का हिस्सा बन गया है | लगातार, पग-पग पर हमारी प्रेरणा बन गया है | आत्मनिर्भरता हमारी policy ही नहीं, हमारा passion बन गया है | बहुत साल नहीं हुए, सिर्फ 10 साल पहले की बात है, तब अगर कोई कहता था कि किसी complex technology को भारत में विकसित करना है तो कई लोगों को विश्वास नहीं होता था, तो कई उपहास उड़ाते थे - लेकिन आज वही लोग, देश की सफलता को देखकर अचंभे में रहते हैं | आत्मनिर्भर हो रहा भारत, हर sector में कमाल कर रहा है | आप सोचिए, एक जमाने में mobile phone import करने वाला भारत, आज, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा manufacturer बन गया है | कभी दुनिया में सबसे ज्यादा defence equipment खरीदने वाला भारत, आज, 85 देशों को export भी कर रहा है | Space technology में भारत, आज, चंद्रमा के South Pole पर पहुँचने वाला पहला देश बना है, और एक बात तो मुझे सबसे ज्यादा अच्छी लगती है, वो ये है कि, आत्मनिर्भरता का ये अभियान, अब सिर्फ सरकारी अभियान नहीं है, अब आत्मनिर्भर भारत अभियान, एक जन अभियान बन रहा है - हर क्षेत्र में उपलब्धियाँ हासिल कर रहे हैं | जैसे इसी महीने लद्दाख के हानले में हमने एशिया की सबसे बड़ी ‘Imaging Telescope MACE’ का भी उद्घाटन किया है | ये 4300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है | जानते हैं इसकी भी खास बात क्या है! ये ‘Made in India’ है | सोचिए, जिस स्थान पर minus 30 degree की ठंड पड़ती हो, जहाँ, Oxygen तक का अभाव हो, वहाँ हमारे वैज्ञानिकों और Local industry ने वो कर दिखाया है, जो एशिया के किसी देश ने नहीं किया | हानले का telescope भले ही दूर की दुनिया देख रहा हो, लेकिन ये हमें एक चीज और भी दिखा रहा है और ये चीज है - आत्मनिर्भर भारत का सामर्थ्य |

साथियो, मैं चाहता हूँ आप भी एक काम जरूर करें | आत्मनिर्भर होते भारत के ज्यादा-से-ज्यादा उदाहरण, ऐसे प्रयासों को, share करिए | आपने, अपने पड़ोस में कौन सा नया Innovation देखा, किस Local start-up ने आपको सबसे ज्यादा Impress किया, #AatmanirbharInnovation के साथ social media पर ये जानकारियाँ लिखिए और आत्मनिर्भर भारत का उत्सव मनाइए | त्योहारों के इस मौसम में तो हम सब आत्मनिर्भर भारत के इस अभियान को और मजबूत करते हैं | हम Vocal for Local के मंत्र के साथ अपनी खरीदारी करते हैं | ये नया भारत है जहां Impossible सिर्फ एक Challenge है, जहां Make in India अब Make for the world बन गया है, जहां हर नागरिक Innovator है, जहां हर challenge एक opportunity है | हमें न सिर्फ भारत को आत्मनिर्भर बनाना है, बल्कि, अपने देश को Innovation के global powerhouse के रूप में मजबूत भी करना है |

मेरे प्यारे देशवासियो, मैं आपको एक audio सुनाता हूँ

Fraud Caller 1: Hello

Victim : सर नमस्ते सर

Fraud Caller 1: नमस्ते

Victim : सर बोलिये सर

Fraud Caller 1: देखिये ये जो आपने FIR नंबर मुझे send किया है, इस नंबर के खिलाफ 17 complaints हैं हमारे पास, आप ये नंबर use कर रहे हैं?

Victim : मैं ये नहीं use करता हूँ सर

Fraud Caller 1: अभी कहाँ से बात कर रहे हो?

Victim : सर कर्नाटका सर, अभी घर में हूँ सर

Fraud Caller 1: Ok, चलिए आप अपने statement record कारवाईये ताकि ये नंबर block कर लिया जाए | future में आपको कोई problem न हो, Ok

Victim : Yes Sir

Fraud Caller 1: अभी मैं आपको connect कर रहा हूँ, ये आपका Investigation Officer है | आप अपनी statement record कारवाईये ताकि ये नंबर block कर दिया जाए, Ok

Victim : Yes Sir

Fraud Caller 1: हाँ जी बताइये, क्या मैं किसके साथ बात कर रहा हूँ? अपना आधार कार्ड मुझे show कीजिएगा, verify करने के लिए बताईये

Victim : सर मेरे पास अभी नहीं है सर आधार कार्ड सर, please sir

Fraud Caller 1: फोन, आपके फोन में है?

Victim : नहीं सर

Fraud Caller 1: फोन में आधार कार्ड की picture नहीं है आपके पास?

Victim : नहीं सर

Fraud Caller 1: नंबर याद है आपको?

Victim : सर नहीं है सर, नंबर भी याद नहीं है सर

Fraud Caller 1: हमने सिर्फ verify करना है, ok, verify करने के लिए

Victim : नहीं सर

Fraud Caller 1: आप डरिए न, डरिए न, अगर आपने कुछ नहीं किया है तो आप डरिए न

Victim : हाँ सर, हाँ सर

Fraud Caller 1: आपके पास आधार कार्ड है तो मुझे दिखा दीजिये verify करने के लिए

Victim : नहीं सर, नहीं सर, मैं गाँव पर आया था सर उधर घर में है सर

Fraud Caller 1: Ok

दूसरी आवाज May I come in sir

Fraud Caller 1: Come in

Fraud Caller 2: जय हिन्द

Fraud Caller 1: जय हिन्द

Fraud Caller 1: इस व्यक्ति की one sided video call record करो as per the protocol, ok.

ये audio सिर्फ जानकारी के लिए नहीं है, ये कोई मनोरंजन वाला audio नहीं है, एक गहरी चिंता को लेकर के audio आया है | आपने अभी जो बातचीत सुनी, वो digital arrest के फरेब की है | ये बातचीत एक पीड़ित और fraud करने वाले के बीच हुई है | Digital arrest के fraud में phone करने वाले, कभी पुलिस, कभी C.B.I, कभी Narcotics , कभी R.B.I, ऐसे भांति-भांति के label लगाकर बनावटी अधिकारी बनकर बात करते हैं और बड़े confidence के साथ करते हैं | मुझे ‘मन की बात’ के बहुत से श्रोताओं ने कहा कि इसकी चर्चा जरूर करनी चाहिए | आइए, मैं आपको बताता हूँ, ये fraud करने वाली गैंग काम कैसे करती है, ये खतरनाक खेल क्या है ? आपको भी समझना बहुत जरूरी है औरों को भी समझना उतना ही आवश्यक है | पहला दांव – आपकी व्यक्तिगत जानकारी, वो सब जुटा करके रखते हैं “आप पिछले महीने गोवा गए थे, है ना ? आपकी बेटी दिल्ली में पढ़ती है, है ना” ? वे आपके बारे में इतनी जानकारी जुटाकर रखते हैं कि आप दंग रह जाएंगे | दूसरा दांव – भय का माहौल पैदा करो, वर्दी, सरकारी दफ्तर का set-up, कानूनी धाराएं, वो आपको इतना डरा देंगे phone पर बातों - बातों में आप सोच भी नहीं पाएंगे | और फिर उनका तीसरा दांव, शुरू होता है, तीसरा दांव - समय का दबाव, ‘अभी फैसला करना होगा वर्ना आपको गिरफ्तार करना पड़ेगा”, - ये लोग पीड़ित पर इतना मनोवैज्ञानिक दवाब बना देते हैं कि वो सहम जाता है | Digital arrest के शिकार होने वालों में हर वर्ग, हर उम्र के लोग हैं | लोगों ने डर की वजह से अपनी मेहनत से कमाए हुए लाखों रुपए गवां दिए हैं | कभी भी आपको इस तरह का कोई call आए तो आपको डरना नहीं है | आप को पता होना चाहिए कोई भी जांच agency, Phone call या Video Call पर इस तरह पूछताछ कभी भी नहीं करती | मैं आपको Digital सुरक्षा के तीन चरण बताता हूँ | ये तीन चरण हैं – ‘रुको-सोचो-Action लो’ | Call आते ही, ‘रुको’ - घबराएं नहीं, शांत रहें, जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं, किसी को अपनी व्यक्तिगत जानकारी न दें, संभव हो तो screenshot लें और Recording जरूर करें | इसके बाद आता है, दूसरा चरण, पहला चरण था ‘रुको’, दूसरा चरण है ‘सोचो’ | कोई भी सरकारी Agency Phone पर ऐसे धमकी नहीं देती, न ही Video call पर पूछताछ करती है, न ही ऐसे पैसे की मांग करती है - अगर डर लगे तो समझिए कुछ गड़बड़ है | और पहला चरण, दूसरा चरण और अब मैं कहता हूँ तीसरा चरण | पहले चरण में मैंने कहा- ‘रुको’, दूसरे चरण में मैंने कहा- ‘सोचो’, और तीसरा चरण कहता हूँ - ‘एक्शन लो’ | राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 डायल करें, cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें, परिवार और पुलिस को सूचित करें, सबूत सुरक्षित रखें | ‘रुको’, बाद में ‘सोचो’, और फिर ‘एक्शन’ लो, ये तीन चरण आपकी डिजिटल सुरक्षा का रक्षक बनेंगे |

साथियो, मैं फिर कहूँगा digital arrest जैसी कोई व्यवस्था कानून में नहीं है, ये सिर्फ fraud है, फरेब है, झूठ है, बदमाशों का गिरोह है और जो लोग ऐसा कर रहे हैं, वो समाज के दुश्मन हैं | digital arrest के नाम पर जो फरेब चल रहा है, उससे निपटने के लिए तमाम जांच एजेंसियाँ, राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रही हैं | इन एजेंसियों में तालमेल बनाने के लिए National Cyber Co-ordination Centre की स्थापना की गई है | एजेंसियों की तरफ से ऐसे fraud करने वाली हजारों video calling ID को block किया गया है | लाखों sim card, mobile phone और bank accounts को भी block किया गया है | एजेंसियाँ अपना काम कर रही हैं, लेकिन digital arrest के नाम पर हो रहे scam से बचने के लिए बहुत जरूरी है – हर किसी की जागरूकता, हर नागरिक की जागरूकता | जो लोग भी इस तरह के cyber fraud का शिकार होते हैं, उन्हें ज्यादा-से-ज्यादा लोगों को इसके बारे में बताना चाहिए | आप जागरूकता के लिए #SafeDigitalIndia का प्रयोग कर सकते हैं | मैं स्कूलों और कॉलेजों को भी कहूँगा कि cyber scam के खिलाफ मुहिम में छात्रों को भी जोड़ें | समाज में सबके प्रयासों से ही हम इस चुनौती का मुकाबला कर सकते हैं |

मेरे प्यारे देशवासियो, हमारे बहुत सारे स्कूली बच्चे calligraphy यानि सुलेख में काफी दिलचस्पी रखते हैं | इसके जरिए हमारी लिखावट साफ, सुंदर और आकर्षक बनी रहती है | आज जम्मू-कश्मीर में इसका उपयोग local culture को लोकप्रिय बनाने के लिए किया जा रहा है | यहाँ के अनंतनाग की फ़िरदौसा बशीर जी उनको calligraphy में महारत हासिल है, इसके जरिए वे स्थानीय संस्कृति के कई पहलुओं को सामने ला रही हैं | फ़िरदौसा जी की calligraphy ने स्थानीय लोगों, विशेषकर युवाओं को, अपनी ओर आकर्षित किया है | ऐसा ही एक प्रयास उधमपुर के गोरीनाथ जी भी कर रहे हैं | एक सदी से भी अधिक पुरानी सारंगी के जरिए वे डोगरा संस्कृति और विरासत के विभिन्न रूपों को सहेजने में जुटे हैं | सारंगी की धुनों के साथ वे अपनी संस्कृति से जुड़ी प्राचीन कहानियां और ऐतिहासिक घटनाओं को दिलचस्प तरीके से बताते हैं | देश के अलग-अलग हिस्सों में भी आपको ऐसे कई असाधारण लोग मिल जाएंगे जो सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए आगे आए हैं | डी. वैयकुन्ठम करीब 50 साल से चेरियाल फोक आर्ट (Folk Art )को लोकप्रिय बनाने में जुटे हुए हैं | तेलंगाना से जुड़ी इस कला को आगे बढ़ाने का उनका यह प्रयास अद्भुत है | चेरियाल पेंटिंग्स (Paintings) को तैयार करने की प्रक्रिया बहुत ही unique है | ये एक scroll के स्वरूप में ‘कहानियों’ को सामने लाती है | इसमें हमारी History और Mythology की पूरी झलक मिलती है | छत्तीसगढ़ में नारायणपुर के बुटलूराम माथरा जी अबूझमाड़िया जनजाति की लोक कला को संरक्षित करने में जुटे हुए हैं | पिछले चार दशकों से वे अपने इस mission में लगे हुए हैं | उनकी ये कला ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और ‘स्वच्छ भारत’ जैसे अभियान से लोगों को जोड़ने में भी बहुत कारगर रही है |

साथियो, अभी हम बात कर रहे थे कैसे कश्मीर की वादियों से लेकर छत्तीसगढ़ के जंगलों तक, हमारी कला और संस्कृति नए-नए रंग बिखेर रही है, लेकिन यह बात यहीं खत्म नहीं होती | हमारी इन कलाओं की खुशबू दूर-दूर तक फैल रही है | दुनिया के अलग-अलग देशों में लोग भारतीय कला और संस्कृति से मंत्रमुग्ध हो रहे हैं | जब मैं आपको उधमपुर में गूँजती सारंगी की बात बता रहा था, तब मुझे याद आया कि कैसे हजारों मील दूर, रूस के शहर याकूत्स्क में भी भारतीय कला की मधुर धुन गूंज रही है | कल्पना कीजिए, सर्दी का एक-आध दिन, minus 65 डिग्री तापमान, चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर और वहाँ एक theatre में दर्शक मंत्रमुग्ध होकर देख रहे हैं - कालिदास की “अभिज्ञान शाकुंतलम” | क्या आप सोच सकते हैं दुनिया के सबसे ठंडे शहर याकूत्स्क में, भारतीय साहित्य की गर्मजोशी ! ये कल्पना नहीं सच है - हम सबको गर्व और आनंद से भर देने वाला सच |

साथियो, कुछ हफ्ते पहले, मैं Laos भी गया था | वो नवरात्रि का समय था और वहाँ मैंने कुछ अद्भुत देखा | स्थानीय कलाकार “फलक फलम” प्रस्तुत कर रहे थे – ‘Laos की रामायण’ | उनकी आँखों में वही भक्ति, उनके स्वर में वही समर्पण, जो रामायण के प्रति हमारे मन में है | इसी तरह, कुवैत में श्री अब्दुल्ला अल-बारुन ने रामायण और महाभारत का अरबी में अनुवाद किया है | यह कार्य मात्र अनुवाद नहीं, बल्कि दो महान संस्कृतियों के बीच एक सेतु है | उनका यह प्रयास अरब जगत में भारतीय साहित्य की नई समझ विकसित कर रहा है | पेरू से एक और प्रेरक उदाहरण है - एरलिंदा गार्सिआ (Erlinda Garcia) वहाँ के युवाओं को भरतनाट्यम सिखा रही हैं और मारिया वालदेस (Maria Valdez) ओडिसी नृत्य का प्रशिक्षण दे रही हैं | इन कलाओं से प्रभावित होकर, दक्षिण अमेरिका के कई देशों में ‘भारतीय शास्त्रीय नृत्य’ की धूम मची हुई है |

साथियो, विदेशी धरती पर भारत के ये उदाहरण दर्शाते हैं कि भारतीय संस्कृति की शक्ति कितनी अद्भुत है | ये लगातार विश्व को अपनी ओर आकर्षित कर रही है |

“जहां-जहां कला है, वहां-वहां भारत है”

“जहां-जहां संस्कृति है, वहां-वहां भारत है”

आज दुनिया भर के लोग भारत को जानना चाहते हैं, भारत के लोगों को जानना चाहते हैं | इसलिए आप सभी से एक अनुरोध भी है, अपने आस-पास ऐसी सांस्कृतिक पहल को #CulturalBridges के साथ साझा कीजिए | ‘मन की बात’ में हम ऐसे उदाहरण पर आगे भी चर्चा करेंगे |

मेरे प्यारे देशवासियो, देश के बड़े हिस्से में ठंड का मौसम शुरू हो गया है, लेकिन Fitness का passion, Fit India की spirit - इसे किसी भी मौसम से फर्क नहीं पड़ता | जिसे Fit रहने की आदत होती है, वो सर्दी, गर्मी, बरसात कुछ भी नहीं देखता | मुझे खुशी है कि भारत में अब लोग Fitness को लेकर बहुत ज्यादा जागरूक हो रहे हैं | आप भी देख रहे होंगे कि आपके आसपास के पार्कों में लोगों की संख्या बढ़ रही है | पार्क में टहलते बुजुर्गों, नौजवानों, और योग करते परिवारों को देखकर, मुझे, अच्छा लगता है | मुझे याद है, जब मैं योग दिवस पर श्रीनगर में था, बारिश के बावजूद भी, कितने ही लोग ‘योग’ के लिए जुटे थे | अभी कुछ दिन पहले श्रीनगर में जो marathon हुई उसमें भी मुझे fit रहने का यही उत्साह दिखाई दिया | Fit India की ये भावना, अब एक mass movement बन रही है |

साथियो, मुझे ये देखकर भी अच्छा लगता है कि हमारे schools, बच्चों की fitness पर अब और ज्यादा ध्यान दे रहे हैं | Fit India School Hours भी एक अनोखी पहल है | Schools अपने first period का इस्तेमाल अलग-अलग fitness activities के लिए कर रहे हैं | कितने ही स्कूलों में, किसी दिन बच्चों को योग करवाया जाता है, कभी किसी दिन aerobics के session होते है, तो एक दिन sports skills पर काम किया जाता है, किसी दिन खो-खो और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेल खिलाए जा रहे हैं, और इसका असर भी बहुत शानदार है | Attendance अच्छी हो रही है, बच्चों का concentration बढ़ रहा है और बच्चों को मजा भी आ रहा है |

साथियो, मैं Wellness की ये ऊर्जा हर जगह देख रहा हूं | ‘मन की बात’ के भी बहुत से श्रोताओं ने मुझे अपने अनुभव भेजे हैं | कुछ लोग तो बहुत ही रोचक प्रयोग कर रहे हैं | जैसे एक उदाहरण है, Family Fitness Hour का, यानि एक परिवार, हर weekend एक घंटा Family Fitness Activity के लिए दे रहा है | एक और उदाहरण Indigenous Games Revival का है, यानि कुछ परिवार अपने बच्चों को traditional games सिखा रहे हैं, खिला रहें हैं | आप भी अपनी Fitness Routine के experience #fitIndia के नाम Social Media पर जरूर share कीजिए | मैं देश के लोगों को एक जरूरी जानकारी भी देना चाहता हूं | इस बार 31 अक्टूबर को सरदार पटेल जी की जयंती के दिन ही दीपावली का पर्व भी है | हम हर साल 31 अक्टूबर को “राष्ट्रीय एकता दिवस” पर ‘Run for Unity’ का आयोजन करते हैं | दीपावली की वजह से इस बार 29 अक्टूबर यानि मंगलवार को ‘Run for Unity’ का आयोजन किया जाएगा | मेरा आग्रह है, ज्यादा से ज्यादा संख्या में इसमें हिस्सा लीजिए - देश की एकता के मंत्र के साथ ही Fitness के मंत्र को भी हर तरफ फैलाईये |

मेरे प्यारे देशवासियो, ‘मन की बात’ में इस बार इतना ही | आप अपने Feedback जरूर भेजते रहें | ये त्योहारों का समय है | ‘मन की बात’ के श्रोताओं को धनतेरस, दीवाली, छठ पूजा, गुरु नानक जयंती और सभी पर्वों की बहुत-बहुत शुभकामनाएं | आप सभी पूरे उत्साह के साथ त्योहार मनाएं - Vocal for Local का मंत्र याद रखें, कोशिश करें कि त्योहारों के दौरान आपके घर में स्थानीय दुकानदारों से खरीदा गया सामान जरूर आए | एक बार फिर, आप सभी को, आने वाले पर्वों की बहुत बहुत बधाई | धन्यवाद |

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दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल देगा: उत्तराखंड में पीएम मोदी
April 14, 2026
The Delhi-Dehradun Economic Corridor, being inaugurated today, is a world-class infrastructure project that will deepen connectivity, boost the economy and tourism: PM
With the completion of 25 years since its formation, Uttarakhand has now entered its 26th year; Today, with the inauguration of the Delhi-Dehradun Expressway, another major milestone has been added: PM
The Dehradun-Delhi Economic Corridor will transform the entire region: PM
The Corridor will save time, travel will become cheaper and faster, people will spend less on petrol and diesel, and fares and freight costs will decrease;it will also facilitate employment: PM
Our mountains, these forest areas, this heritage of Devbhoomi, these are very, very sacred places; It is our duty to keep such places clean: PM
Plastic bottles, heaps of garbage in these areas hurt the sanctity of Devbhoomi ; it is very essential that we keep these sites of Devbhoomi, our pilgrimage sites, clean and beautiful: PM

 

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह जी, यहां के लोकप्रिय और कर्मठ युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी नितिन गड़करी जी, अजय टमटा जी, टेक्नॉलोजी के माध्यम से जुड़े उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, गर्वनर आनंदी बेन, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी, मंच पर उपस्थित प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट जी, पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी जी, पूर्व मुख्यमंत्री भाई रमेश पोखरियाल, विजय बहुगुना जी, तीरथ सिंह रावत जी, त्रिवेंद्र सिंह रावत जी, उत्तराखंड सरकार के सभी मंत्रीगण, सांसद और विधायकगण और विशाल संख्या में पधारे मेरे प्यारे भाईयों बहनों।

देवभूमि उत्तराखंड़ की इस पावन धरती पर आप सभी को मेरा प्रणाम। बहुत बडी संख्या में आए हुए पूज्य संतगण को भी प्रणाम। उत्तराखंड का प्यारा भुलों-भैबंदों, बौड़ी-भूलियों, स्याणा-बुजुर्गों, आप सबु तैं नमस्कार! मेरो प्यारो दाजी भाई, दीदी-बैनी, आमा-बाबा सबई लाई मेरो तरफ़ देखी ढोग दिनछू।

इस कार्यक्रम से टेक्नोलॉजी के जरिये भी दिल्ली, यूपी से अनेक लोग जुड़े हैं, मैं सभी का अभिनन्दन करता हूं। सबसे पहले तो मैं आप सबकी क्षमा चाहता हूं, उत्तरप्रदेश और दिल्ली के कार्यक्रम में जुड़े हुए लोगों की भी क्षमा मांगता हूं, कि मुझे यहां पहुंचने में एक घंटे से भी ज्यादा देर हो गई, सब स्थान पर लंबे समय तक आप सबको इंतजार करना पड़ा, और कारण यही था, मैं निकला तो समय पर था, लेकिन करीब-करीब 12 किलोमीटर का रोड शो, काली मंदिर से लेकर के यहां तक, इतना उत्साह इतना उमंग, कि मेरे लिए तेज गति से गाड़ी चलाना बड़ा मुश्किल हो गया। तो धीरे-धीरे लोगों को प्रणाम करते-करते, जनता जनार्दन के आशीर्वाद लेते लेते यहां पहुंचने में मुझे एक घंटे से भी ज्यादा देरी हो गई, और इसके लिए मैं आपकी क्षमा मांगता हूं, और ऐसी धूप में 12 किलोमीटर ये जन सैलाब, ये उत्तराखंड़ का प्यार, माताओं-बहनों का आशीर्वाद, मैं आज उत्तराखंड़ से एक नई ऊर्जा लेकर के जाऊंगा, नई प्रेरणा लेकर के जाऊंगा और मैं इसके लिए हर किसी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

आज देश में पर्व त्योहार की उमंग है। विभिन्न हिस्सों में नववर्ष का आगमन हुआ है। मैं देशवासियों को बैसाखी, बोहाग बीहू और पुथांडु की शुभकामनाएं देता हूं!

साथियों,

अगले कुछ ही दिनों में, यमुनोत्री, गंगोत्री, बाबा केदारनाथ, बद्रीनाथ धाम की यात्रा भी शुरू होने जा रही है। इस पवित्र समय का, देश के कोटि-कोटि आस्थावान, श्रद्धाभाव से इंतज़ार करते हैं। मैं पंच बद्री, पंच केदार, पंच प्रयाग और यहां के आराध्य देवों को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूं। मैं संतला माता को भी नमन करता हूं। यहां आने से पहले मुझे, मां डाट काली के दर्शन करने का सौभाग्य मिला है। देहरादून शहर पर, मां डाट काली की बड़ी कृपा है। दिल्ली-देहरादून इकनॉमिक कॉरिडोर के इतने बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने में, माता डाट काली का आशीर्वाद बहुत बड़ी शक्ति रहा है।

साथियों,

उत्तराखंड राज्य अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरा करने के साथ ही छब्बीसवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। आज दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के साथ इस प्रगति में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ी है। आपको याद होगा, बाबा केदार के दर्शन के बाद मेरे मुंह से अनायास निकला था, कि इस शताब्दी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा। मुझे बहुत खुशी है कि डबल इंजन सरकार की नीतियों, और उत्तराखंड के लोगों के परिश्रम से, ये युवा राज्य, विकास के नए आयाम जोड़ रहा है। ये प्रोजेक्ट भी, उत्तराखंड के विकास को नई गति देगा। इस एक्सप्रेसवे का बहुत बड़ा हिस्सा यूपी से होकर गुजरता है। इससे गाजियाबाद, बागपत, बड़ौत, शामली और सहारनपुर जैसे अनेक शहरों को भी बहुत फायदा होगा। टूरिज्म के लिहाज से ये प्रोजेक्ट बहुत अहम है। मैं पूरे देश को इस प्रोजेक्ट की बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर की जयंती भी है। मैं बाबा साहेब को कोटि-कोटि देशवासियों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। बीते दशक में हमारी सरकार ने जो नीतियां बनाईं, जो निर्णय लिए, वो संविधान की गरिमा को पुनर्स्थापित करने वाले रहे हैं। आर्टिकल 370 हटने के बाद आज पूरे देश में भारत का संविधान लागू है। जिन दर्जनों जिलों में माओवाद-नक्सलवाद खत्म हुआ है, वहां भी अब संविधान की भावना के अनुरूप काम हो रहा है। देश में समान नागरिक संहिता लागू हो, ये हमारे संविधान की अपेक्षा है। उत्तराखंड ने संविधान की इस भावना को आगे बढ़कर और उस भावना को आगे बढ़ाकर पूरे देश को राह दिखाई है।

साथियों,

बाबा साहेब का जीवन, गरीबों को, वंचितों को, शोषितों को न्यायपूर्ण व्यवस्था देने के लिए समर्पित था। हमारी सरकार आज उसी भावना के साथ, हर गरीब, हर वंचित को सच्चा सामाजिक न्याय देने में जुटी है। और सामाजिक न्याय का एक बहुत बड़ा माध्यम, देश का संतुलित विकास है, सबको सुविधा है, सबकी समृद्धि है। इसलिए ही बाबा साहेब आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की, औद्योगीकरण की भरपूर वकालत करते थे।

साथियों,

भविष्य की दशा और दिशा क्या होगी, अक्सर लोग, इसके लिए हाथ की रेखाओं को देखते हैं, दिखाते हैं। जो भविष्य वक्ता होते हैं ना, वो हस्त रेखाएं देखते हैं, और हर व्यक्ति के भविष्य के विषय में बताते हैं। मैं इस विज्ञान को तो नहीं जानता हूं, लेकिन कहते हैं कि ये भी एक शास्त्र है। अब ये तो हो गई व्यक्ति के भाग्य की जो उसके हाथ में रेखाएं हैं उसकी बात, लेकिन मैं अगर इसी संदर्भ मे बात को, इसी संदर्भ को राष्ट्र-जीवन से जोड़कर के देखूं, तो राष्ट्र की भाग्य रेखाएं कौन सी होती हैं? राष्ट्र की भाग्य रेखाएं ये हमारी ये सड़कें होती हैं, हमारे हाईवे होते हैं, हमारे एक्सप्रेसवे होते हैं, एयरवे, रेलवे, वॉटरवे, ये हमारे राष्ट्र की भाग्य रेखाएं होती हैं। और बीते एक दशक से हमारा देश, विकसित भारत बनाने के लिए विकास की ऐसी ही भाग्य रेखाओं के निर्माण में जुटा हुआ है। ये विकास रेखाएं सिर्फ आज की सुविधाएं नहीं हैं, ये आने वाली पीढ़ियों की समृद्धि की गारंटी हैं और ये मोदी की भी गारंटी है। बीते दशक से हमारी सरकार राष्ट्र की इन विकास-रेखाओं पर अभूतपूर्व निवेश कर रही है। मैं आपको एक आंकड़ा देता हूं। अभी नितिन जी ने बहुत सारे आंकड़ें सिर्फ उत्तराखंड़ से संबंधित बताए हैं आपको। देखिए साल 2014 तक ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए साल में, पूरे देश में, 2 लाख करोड़ रुपए भी खर्च नहीं होते थे। ये मैं पूरे हिन्दुस्तान की बात बताता हूं, 2 लाख करोड़ भी नहीं होते थे, आज ये छह गुना अधिक, 12 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा हो चुका है। यहां उत्तराखंड में ही, सवा दो लाख करोड़ रुपए से अधिक के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। 2014 के पहले पूरे देश के लिए 2 लाख करोड़, आज अकेले उत्तराखंड़ के लिए सवा दो लाख करोड़ रूपया। कभी उत्तराखंड के गांवों में सड़क के इंतज़ार में पीढ़ियां बदल जाती थीं। आज डबल इंजन सरकार के प्रयासों से, अब सड़क गांव तक पहुंच रही है, जो गांव पहले वीरान पड़ गए थे, वो फिर से जीवंत हो रहे हैं। चारधाम महामार्ग परियोजना हो, रेल परियोजनाओं का विस्तार हो, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे हो, विकास की ये रेखाएं, इस क्षेत्र के कोने-कोने में जीवन की भी भाग्य रेखाएं बन रही हैं।

साथियों,

21वीं सदी का भारत आज जिस स्पीड और जिस स्केल पर काम कर रहा है, उसकी पूरी दुनिया चर्चा कर रही है। मैं आपको उत्तराखंड, पश्चिमी यूपी और दिल्ली का ही उदाहरण देता हूं। कुछ सप्ताह पहले ही, दिल्ली मेट्रो का विस्तार हुआ, मेरठ में मेट्रो-सेवा की शुरुआत हुई, दिल्ली-मेरठ नमो-भारत रेल देश को समर्पित की गई, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की शुरुआत हुई, हवाई जहाजों के लिए MRO फेसिलिटी पर काम शुरू हुआ, और आज, देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे शुरु हो रहा है।

साथियों,

इतने छोटे से रीजन में ये सब इतने कम समय में हो रहा है। कल्पना कीजिए, देश में कितने बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। और इसलिए ही मैं कहता हूं - 21वीं सदी का भारत, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जिस नए युग में प्रवेश कर रहा है, वो अभूतपूर्व है, अकल्पनीय है।

साथियों,

आज भारत के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने वाले, अनेक इकोनॉमिक कॉरिडोर्स, उस पर काम चल रहा है। जैसे दिल्ली-मुबंई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, बेंगलुरू-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, ईस्ट कोस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर, अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, ऐसे बहुत से इकोनॉमिक कॉरिडोर देश में बनाए जा रहे हैं। ये इकोनॉमिक कॉरिडोर, प्रगति के नए द्वार हैं, गेटवे हैं, डोर हैं। और इनसे उम्मीदों की डोर भी जुड़ी हुई है। ये इकोनॉमिक कॉरिडोर, सड़क के अलावा नए-नए व्यापार-कारोबार का मार्ग बनाते हैं। फैक्ट्रियों के लिए, गोदामों के लिए पूरा नेटवर्क, उसका आधार तैयार करते हैं।

साथियों,

देहरादून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर से भी इस पूरे क्षेत्र का कायाकल्प होने जा रहा है। पहला फायदा तो ये है कि इससे समय बचेगा, आना-जाना सस्ता और तेज होगा, लोगों का पेट्रोल-डीजल कम खर्च होगा, किराया-भाड़ा कम होगा, और दूसरा बड़ा फायदा रोजगार का होगा। अभी इसके निर्माण में 12 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए, तो हज़ारों श्रमिकों को काम मिला है। साथ ही, जो इंजीनियर हैं, अन्य स्किल्ड वर्कफोर्स हैं, ट्रांसपोर्ट से, उससे जुड़े साथी हैं, उनको भी बहुत बड़ी मात्रा में काम मिला है। किसानों और पशुपालकों की उपज भी, अब तेज़ गति से, बड़ी मंडियों और बड़े बाज़ारों तक पहुंचेगी।

साथियों,

इस शानदार एक्सप्रेस-वे से उत्तराखंड के टूरिज्म को बहुत ही बड़ा फायदा होगा। देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी और चारधाम यात्रा के लिए ये सबसे प्रमुख मार्ग बनेगा। और हम सभी जानते हैं, जब टूरिज्म का विकास होता है, तो हर कोई कुछ न कुछ कमाता है। होटल हो, ढाबे वाले हो, टैक्सी हो, ऑटो हो, होम स्टे हो, सबको इसका फायदा होता है।

साथियों,

मुझे खुशी है कि आज उत्तराखंड, विंटर टूरिज्म, विंटर स्पोर्टस और wed in india, शादी के लिए, बहुत बेहतरीन डेस्टिनेशन बनता जा रहा है।

साथियों,

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए बारहमासी पर्यटन बहुत जरूरी है। इसलिए मेरा सर्दियों में होने वाली धार्मिक यात्राओं को लेकर बहुत आग्रह रहा है। और मुझे खुशी है कि हर साल इन यात्राओं में लोगों की संख्या बढ़ रही है। आपको याद होगा, मैं 2023 में आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा पर गया था। पहले बहुत जाता था, बीच में बिल्कुल जा नहीं पाया, कई वर्षों के बाद मैं गया, और मुझे मुख्यमंत्री जी बता रहे थे, गर्वनर साहब बीच मे आए, वो भी बता रहे थे कि 2023 में वहां गया और उसके बाद, बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां जा रहे हैं। पहले वहां कुछ सौ लोग ही सर्दियों में यात्रा के लिए जाते थे। साल 2025 में, करीब-करीब 40 हजार से अधिक लोगों ने इन पवित्र स्थानों की यात्रा की है। कभी एक हजार नहीं होते थे, अगर चालीस हजार पहुंचते हैं तो यहां के लोगों की रोजी-रोटी की कितनी बड़ी ताकत आ जाती है। इसी तरह साल 2024 में शीतकालीन चारधाम यात्रा में, करीब अस्सी हज़ार श्रद्धालु आए थे। 2025 में ये संख्या डेढ़ लाख पार कर चुकी है।

साथियों,

हम ऐसा विकसित भारत बनाने में जुटे हैं, जहां प्रगति भी हो, प्रकृति भी हो और संस्कृति भी हो। और इसलिए, आज होने वाले हर निर्माण को, इन्हीं त्रिवेणी, प्रगति, प्रकृति और सांस्कृति की त्रिवेणी, इन्हीं मूल्यों के आधार पर विकसित किया जा रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर से इंसानों को भी सुविधा हो, और वहां रहने वाले वन्यजीवों को भी असुविधा न हो, ये हमारा प्रयास है। और इसलिए ही इस एक्सप्रेसवे पर, करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर भी बनाया गया है। हाथियों को भी असुविधा न हो, इसका भी ध्यान रखा गया है।

वैसे साथियों,

मैं आज देशभर के सभी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों से भी एक आग्रह करना चाहता हूं। हमारे पहाड़, ये वन क्षेत्र, ये देवभूमि की धरोहर, ये बहुत ही बहुत पवित्र स्थान हैं। ऐसे स्थानों को साफ-सुथरा रखना, ये हम सभी का कर्तव्य है। यहां रहने वालों का भी और यात्री के रूप में आने वालों का भी। इन इलाकों में प्लास्टिक की बोतलें, कूड़े-कचरे का ढेर, ये देवभूमि की पवित्रता को ठेस पहुंचाता है। इसलिए बहुत आवश्यक है कि हम देवभूमि के इन स्थलों को, हमारे इन तीर्थ स्थलों को स्वच्छ रखें, सुंदर रखें।

साथियों,

अगले वर्ष हरिद्वार में कुंभ का भी आयोजन होना है। हमें आस्था के इस संगम को दिव्य-भव्य और स्वच्छ बनाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़नी है।

साथियों,

उत्तराखंड में नंदा देवी राजजात यात्रा भी होती है। ये आस्था का उत्सव तो है ही, ये हमारी सांस्कृतिक चेतना का भी जीवंत उदाहरण है। जहां मां नंदा को बेटी मानकर पूरे सम्मान के साथ विदा किया जाता है। इस यात्रा में बहनों-बेटियों की भागीदारी, इसे विशेष बनाती है। मैं मां नंदा को प्रणाम करते हुए, देशभर की बहनों-बेटियों को भी विशेष संदेश देना चाहता हूं। विकसित भारत के निर्माण में आपकी बहुत बड़ी भूमिका है। इस देश की बेटियों की, इस देश की माताओं की, बहनों की बहुत बड़ी भूमिका मैं देख रहा हूं। और बहनों-बेटियों की सुविधा, सुरक्षा और लोकतंत्र में भागीदारी, ये डबल इंजन सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता है। आप अभी देख रही हैं, कि दुनिया में कितना बड़ा संकट आया है। इससे दुनिया के विकसित देशों में भी कितना हाहाकार मचा है। ऐसे मुश्किल हालात में भी, सरकार का निरंतर प्रयास है कि हमारी बहनों को कम से कम परेशानी हो।

साथियों,

बहनों-बेटियों की भागीदारी का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव अब देश के सामने है। 4 दशकों के इंतज़ार के बाद संसद ने, नारीशक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। इससे विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं के लिए तैंतीस प्रतिशत आरक्षण तय हो गया। सभी दलों ने आगे आकर इस महत्वपूर्ण कानून को समर्थन दिया। अब महिलाओं को ये जो हक मिला है ना, इस हक को लागू करने में देर नहीं होनी चाहिए। अब ये लागू होना चाहिए। अब जो 2029 में लोकसभा के चुनाव होंगे, अब तब से लेकर विधान सभा के भी चुनाव आते रहेंगे, जो भी चुनाव आते रहेंगे, 2029 से ही ये लागू हो जाना चाहिए। ये देश की भावना है, ये देश की हर बहन-बेटी की इच्छा है। मातृशक्ति की इसी इच्छा को नमन करते हुए, 16 अप्रैल से संसद में विशेष चर्चा तय की गई है। देश की बहनों-बेटियों के हक से जुड़े इस काम को, सभी राजनीतिक दल मिलकर के सर्वसम्मति से आगे बढ़ाएं, उसको पूरा करे। और मैंने आज देश की सभी बहनों के नाम एक खुला पत्र लिखा है, सोशल मीडिया में शायद ये मेरा पत्र आप तक पहुंचा होगा, हो सकता है टीवी और अखबार वाले भी इस पत्र का जिक्र करते होंगे। मैंने बड़े आग्रह के साथ देश की माताओं-बहनों को इस कार्य में भागीदार बनने के लिए निमंत्रित किया है। मुझे पक्का विश्वास है कि पत्र मेरे देश की माताएं-बहनें जरूर पढ़ेंगी। एक एक शब्द पर मनन करेंगी, और इतना बड़ा पवित्र कार्य करने के लिए 16-17-18 को संसद में आने वाले सभी सांसदों को उनके आशीर्वाद भी मिलेंगे। मैं आज देवभूमि से देश के सभी दलों से फिर अपील करूंगा कि नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का जरूर समर्थन करें। 2029 में हमारे देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या हमारी माताएं-बहनें, हमारी बेटियां, उनको उनका हक हम देकर रहें।

साथियों,

मैं उत्तराखंड आउं और फौज की बात ना हो, तो बात अधूरी ही रहती है। ये गढ़ी कैंट, ये सभा स्थल, ये उत्तराखंड की महान सैन्य परंपरा का प्रमाण है। यहां पास ही देश की रक्षा सुरक्षा से जुड़े कई संस्थान हैं, 1962 की लड़ाई में, शहीद जसवंत सिंह रावत जी के शौर्य को देश कभी भुला नहीं सकता।

साथियों,

सेना के सामर्थ्य को सशक्त करना हो, या हमारे सैनिक परिवारों की सुविधा और सम्मान हो, हमारी सरकार इसके लिए निरंतर प्रयासरत है। वन रैंक वन पेंशन के माध्यम से हमारी सरकार ने, अब तक करीब सवा लाख करोड़ रुपए पूर्व फौजियों को उनके खाते में जमा कर दिए हैं। उत्तराखंड के भी हजारों परिवारों को इसका लाभ मिला है। इसके अलावा, इस वर्ष पूर्व फौजियों के लिए health scheme का बजट भी छत्तीस प्रतिशत बढ़ाया गया है। 70 वर्ष और इससे अधिक के ex-servicemen के लिए, दवाईयों की door step home delivery भी शुरू की गई है। पूर्व फौजियों के बच्चों की एजुकेशन ग्रांट भी डबल की गई है। और बेटियों के विवाह के लिए जो सहायता मिलती है, उसको भी 50 हज़ार से बढ़ाकर एक लाख रुपए किया गया है।

साथियों,

देशभक्ति, देवभक्ति और प्रगति, ऐसे हर आयाम को जोड़ते हुए, हमें देश को विकसित बनाना है। एक बार फिर दिल्ली-वासियों को, उत्तर प्रदेश वासियों को, और एक प्रकार से देशवासियों को, इस शानदार एक्सप्रेसवे की मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

मेरे साथ बोलिये-

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

बहुत-बहुत धन्यवाद !