भारत विकसित बनने के लिए उत्सुक है, भारत आत्मनिर्भर बनने के लिए उत्सुक है: प्रधानमंत्री
भारत केवल एक उभरता हुआ बाजार नहीं है, बल्कि एक उभरता हुआ मॉडल भी है: प्रधानमंत्री
आज, दुनिया भारत के विकास मॉडल को आशा के एक मॉडल के रूप में देख रही है: प्रधानमंत्री
हम संतृप्ति के मिशन पर निरंतर काम कर रहे हैं; किसी भी योजना के लाभ से एक भी लाभार्थी वंचित नहीं रहना चाहिए: प्रधानमंत्री
हमारी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में, हमने स्थानीय भाषाओं में शिक्षा पर विशेष जोर दिया है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में इंडियन एक्सप्रेस द्वारा आयोजित छठा रामनाथ गोयनका व्याख्यान दिया। श्री मोदी ने कहा कि आज हम एक ऐसे विशिष्ट व्यक्तित्व को सम्मानित करने के लिए एकत्रित हुए हैं जिन्होंने भारत में लोकतंत्र, पत्रकारिता, अभिव्यक्ति और जन आंदोलनों की शक्ति को बढ़ाया। उन्होंने कहा कि एक दूरदर्शी, संस्था निर्माता, राष्ट्रवादी और मीडिया लीडर के रूप में श्री रामनाथ गोयनका ने इंडियन एक्सप्रेस समूह को न केवल एक समाचार पत्र के रूप में, बल्कि भारत के लोगों के बीच एक मिशन के रूप में स्थापित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके नेतृत्व में यह समूह भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय हितों की आवाज बन गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 21वीं सदी के इस युग में, जब भारत विकसित होने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, श्री रामनाथ गोयनका की प्रतिबद्धता, प्रयास और दूरदर्शिता प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत हैं। प्रधानमंत्री ने इस व्याख्यान के लिए उन्हें आमंत्रित करने हेतु इंडियन एक्सप्रेस समूह का आभार व्यक्त किया और उपस्थित सभी लोगों को अपनी शुभकामनाएं दीं।

श्री रामनाथ गोयनका के भगवद् गीता के एक श्लोक से गहरी प्रेरणा प्राप्त करने का उल्लेख करते हुए, उन्होंने बताया कि सुख-दुःख, लाभ-हानि, जय-पराजय के प्रति समभाव से अपना कर्तव्य निभाने की यह शिक्षा रामनाथ जी के जीवन और कार्य में गहराई से समाहित थी। श्री मोदी ने कहा कि श्री रामनाथ गोयनका ने जीवन भर इस सिद्धांत का पालन किया और कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। उन्होंने कहा कि रामनाथ जी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का समर्थन किया, बाद में जनता पार्टी का समर्थन किया और जनसंघ के टिकट पर चुनाव भी लड़ा। विचारधारा से परे, उन्होंने हमेशा राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक रामनाथ जी के साथ काम किया, वे अक्सर उनके द्वारा साझा किए गए कई किस्से सुनाते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे, स्वतंत्रता के बाद, जब हैदराबाद में रजाकारों द्वारा अत्याचार का मुद्दा उठा, तो रामनाथ जी ने सरदार पटेल की सहायता की। 1970 के दशक में, जब बिहार में छात्र आंदोलन को नेतृत्व की आवश्यकता थी, तो रामनाथ जी ने नानाजी देशमुख के साथ मिलकर श्री जयप्रकाश नारायण को आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए राजी किया। आपातकाल के दौरान, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री के एक करीबी मंत्री ने रामनाथ जी को बुलाकर कारावास की धमकी दी, तो उनकी साहसिक प्रतिक्रिया इतिहास के गुप्त अभिलेखों का हिस्सा बन गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि भले ही, इनमें से कुछ विवरण सार्वजनिक हैं और कुछ अभी भी गुप्त हैं, फिर भी ये सभी रामनाथ जी की सत्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता और कर्तव्य के प्रति उनकी अडिग निष्ठा को दर्शाते हैं, चाहे उनके सामने कितनी भी बड़ी ताकत रही हो।

श्री मोदी ने कहा कि श्री रामनाथ गोयनका को अक्सर - नकारात्मक अर्थ में नहीं, बल्कि सकारात्मक अर्थ में - अधीर कहा जाता था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यही अधीरता बदलाव के लिए सर्वोच्च स्तर के प्रयासों को प्रेरित करती है, यही अधीरता स्थिर जल को भी गति प्रदान करती है। प्रधानमंत्री ने एक समानता स्थापित करते हुए कहा, "आज का भारत भी अधीर है—विकसित होने के लिए अधीर, आत्मनिर्भर बनने के लिए अधीर"। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के पहले पच्चीस साल तेजी से बीत गए, एक के बाद एक चुनौतियां आईं, फिर भी कोई भी भारत की गति को रोक नहीं सका।

पिछले चार-पांच वर्षों को वैश्विक चुनौतियों से भरा बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि 2020 में, कोविड-19 महामारी ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को अस्त-व्यस्त कर दिया और व्यापक अनिश्चितता पैदा कर दी। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई और दुनिया निराशा की ओर बढ़ने लगी। जैसे-जैसे स्थितियां स्थिर होने लगीं, पड़ोसी देशों में उथल-पुथल मचने लगी। इन संकटों के बीच, भारत की अर्थव्यवस्था ने ऊंची विकास दर हासिल करके लचीलेपन का प्रदर्शन किया। श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 2022 में, यूरोपीय संकट ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और ऊर्जा बाजारों को प्रभावित किया, जिसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ा। इसके बावजूद, भारत की आर्थिक वृद्धि 2022-23 तक मजबूती से जारी रही। 2023 में, पश्चिम एशिया में हालात बिगड़ने के बावजूद, भारत की विकास दर मजबूत बनी रही। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस वर्ष भी, वैश्विक अस्थिरता के बावजूद, भारत की विकास दर सात प्रतिशत के आसपास बनी हुई है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "ऐसे समय में जब दुनिया व्यवधानों से भयभीत है, भारत आत्मविश्वास के साथ उज्ज्वल भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।" उन्होंने जोर देकर कहा, "भारत न केवल एक उभरता हुआ बाज़ार है, बल्कि एक उभरता हुआ मॉडल भी है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज दुनिया भारतीय विकास मॉडल को आशा के मॉडल के रूप में देख रही है।

इस बात पर जोर देते हुए कि एक मजबूत लोकतंत्र कई मानदंडों पर परखा जाता है, जिनमें से एक सबसे महत्वपूर्ण मानदंड जनभागीदारी है, श्री मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों का विश्वास और आशावाद चुनावों के दौरान सबसे ज्यादा दिखाई देता है। 14 नवंबर को घोषित परिणामों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये ऐतिहासिक थे, और इनके साथ ही एक महत्वपूर्ण पहलू भी उभर कर आया—कोई भी लोकतंत्र अपने नागरिकों की बढ़ती भागीदारी को नजरअंदाज नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि इस बार बिहार में इतिहास का सबसे ज्यादा मतदान हुआ, जहां महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से लगभग नौ प्रतिशत ज्यादा रहा। उन्होंने कहा कि यह भी लोकतंत्र की जीत है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि बिहार के नतीजे एक बार फिर भारत के लोगों की ऊंची आकांक्षाओं को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि आज, नागरिक उन राजनीतिक दलों पर भरोसा करते हैं जो उन आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए ईमानदारी से काम करते हैं और विकास को प्राथमिकता देते हैं। प्रधानमंत्री ने हर राज्य सरकार से-चाहे वह किसी भी विचारधारा की हो, वामपंथी, दक्षिणपंथी या केंद्र की- बिहार के नतीजों से सीख लेने का आदरपूर्वक आग्रह किया और कहा कि आज दिया गया शासन आने वाले वर्षों में राजनीतिक दलों का भविष्य तय करेगा। उन्होंने बताया कि बिहार की जनता ने विपक्ष को 15 साल दिए थे और जबकि उनके पास राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने का अवसर था, उन्होंने जंगल राज का रास्ता चुना। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि बिहार की जनता इस विश्वासघात को कभी नहीं भूलेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि चाहे केंद्र सरकार हो या राज्यों में विभिन्न दलों के नेतृत्व वाली सरकारें, सर्वोच्च प्राथमिकता विकास होनी चाहिए यानि विकास और केवल विकास। श्री मोदी ने सभी राज्य सरकारों से बेहतर निवेश वातावरण बनाने, व्यापार सुगमता में सुधार लाने और विकास के मानकों को आगे बढ़ाने में प्रतिस्पर्धा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से लोगों का विश्वास अर्जित होगा।

श्री मोदी ने कहा कि बिहार चुनाव में जीत के बाद, कुछ लोगों-जिनमें उनके प्रति सहानुभूति रखने वाले कुछ मीडियाकर्मी भी शामिल हैं-ने एक बार फिर दावा किया है कि उनकी पार्टी और वह खुद चौबीसों घंटे चुनावी मोड में रहते हैं। उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए चुनावी मोड में रहने की जरूरत नहीं, बल्कि चौबीसों घंटे भावनात्मक मोड में रहने की जरूरत होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब एक मिनट भी बर्बाद न करने, गरीबों की मुश्किलें कम करने, रोजगार उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने और मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं को पूरा करने की आंतरिक बेचैनी हो, तो निरंतर कड़ी मेहनत ही प्रेरक शक्ति बन जाती है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब इसी भावना और प्रतिबद्धता के साथ शासन चलाया जाता है, तो चुनाव के दिन परिणाम दिखाई देते हैं-जैसा कि हाल ही में बिहार में देखने को मिला।

श्री रामनाथ गोयनका को विदिशा से जनसंघ का टिकट मिलने का एक किस्सा सुनाते हुए, श्री मोदी ने कहा कि उस समय रामनाथ जी और नानाजी देशमुख के बीच इस बात पर चर्चा हुई थी कि संगठन ज्यादा महत्वपूर्ण है या चेहरा। नानाजी देशमुख ने रामनाथ जी से कहा कि उन्हें बस नामांकन दाखिल करने और बाद में विजय प्रमाण पत्र लेने आना है। इसके बाद नानाजी ने पार्टी कार्यकर्ताओं के माध्यम से प्रचार अभियान का नेतृत्व किया और रामनाथ जी की जीत सुनिश्चित की। श्री मोदी ने स्पष्ट किया कि इस कहानी को साझा करने का उनका उद्देश्य यह नहीं था कि उम्मीदवारों को केवल नामांकन दाखिल करना चाहिए, बल्कि पार्टी के अनगिनत कार्यकर्ताओं के समर्पण को उजागर करना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि लाखों कार्यकर्ताओं ने अपने पसीने से पार्टी की जड़ों को सींचा है और आज भी कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि केरल, पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने पार्टी के लिए अपना खून तक बहाया है। श्री मोदी ने कहा कि ऐसे समर्पित कार्यकर्ताओं वाली पार्टी का लक्ष्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि निरंतर सेवा के माध्यम से लोगों का दिल जीतना होता है।

राष्ट्रीय विकास के लिए इसका लाभ सभी तक पहुंचने पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब सरकारी योजनाएं दलितों, उत्पीड़ितों, शोषितों और वंचितों तक पहुंचती हैं, तो सच्चा सामाजिक न्याय सुनिश्चित होता है। उन्होंने कहा कि पिछले दशकों में, सामाजिक न्याय की आड़ में कुछ दलों और परिवारों ने अपने स्वार्थ साधे।

श्री मोदी ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि आज देश सामाजिक न्याय को वास्तविकता में बदलते हुए देख रहा है। उन्होंने सच्चे सामाजिक न्याय के अर्थ को विस्तार से समझाया और 12 करोड़ शौचालयों के निर्माण का उदाहरण दिया, जिससे खुले में शौच करने को मजबूर लोगों को सम्मान मिला। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि 57 करोड़ जन-धन बैंक खातों ने उन लोगों के लिए वित्तीय समावेशन को सक्षम बनाया, जिन्हें पिछली सरकारें बैंक खाते के लायक भी नहीं समझती थीं। उन्होंने आगे कहा कि 4 करोड़ पक्के घरों ने गरीबों को नए सपने देखने के लिए सशक्त बनाया है और जोखिम उठाने की उनकी क्षमता को बढ़ाया है।

पिछले 11 वर्षों में सामाजिक सुरक्षा पर किए गए उल्लेखनीय कार्यों को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज लगभग 94 करोड़ भारतीय सामाजिक सुरक्षा के दायरे में हैं, जबकि एक दशक पहले यह संख्या केवल 25 करोड़ थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पहले केवल 25 करोड़ लोग ही सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से लाभान्वित होते थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 94 करोड़ हो गई है - उन्होंने कहा, यही सच्चा सामाजिक न्याय है। श्री मोदी ने आगे कहा कि सरकार ने न केवल सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार किया है, बल्कि यह सुनिश्चित करते हुए एक पूर्ण मिशन के साथ काम कर रही है कि कोई भी पात्र लाभार्थी छूट न जाए। उन्होंने कहा कि जब कोई सरकार प्रत्येक लाभार्थी तक पहुंचने के लक्ष्य के साथ काम करती है, तो वह भेदभाव की किसी भी गुंजाइश को समाप्त कर देती है। ऐसे प्रयासों के परिणामस्वरूप, पिछले 11 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से उबर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि आज दुनिया यह स्वीकार करती है कि 'लोकतंत्र परिणाम देता है'।

प्रधानमंत्री ने आकांक्षी जिला कार्यक्रम का भी उदाहरण दिया। उन्होंने लोगों से इस पहल का अध्ययन करने का आग्रह किया और बताया कि देश के 100 से ज़्यादा जिलों को पहले पिछड़ा घोषित किया गया था और फिर पिछली सरकारों ने उनकी उपेक्षा की। इन जिलों को विकास के लिए बहुत कठिन माना जाता था और वहां तैनात अधिकारियों को अक्सर दंडित किया जाता था। उन्होंने बताया कि इन पिछड़े जिलों में 25 करोड़ से ज़्यादा नागरिक रहते हैं, जो समावेशी विकास के पैमाने और महत्व को रेखांकित करता है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि अगर ये पिछड़े जिले अविकसित रह जाते, तो भारत अगले सौ सालों में भी विकास नहीं कर पाता। उन्होंने कहा कि इसीलिए सरकार ने एक नई रणनीति अपनाई, राज्य सरकारों को शामिल किया और यह पता लगाने के लिए विस्तृत अध्ययन किए कि कौन सा जिला विशिष्ट विकास मानदंडों पर कितना पिछड़ा है। इन जानकारियों के आधार पर, प्रत्येक जिले के लिए विशिष्ट रणनीतियां तैयार की गईं। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि देश के सर्वश्रेष्ठ अधिकारी-तेजस्वी और नवोन्मेषी दिमाग-इन क्षेत्रों में तैनात किए गए। इन जिलों को अब पिछड़ा नहीं बल्कि आकांक्षी ज़िलों के रूप में पुनर्परिभाषित किया गया। आज, इनमें से कई जिले विकास के कई मानदंडों पर अपने-अपने राज्यों के अन्य जिलों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के बस्तर का एक उल्लेखनीय उदाहरण देते हुए, श्री मोदी ने याद दिलाया कि कैसे पत्रकारों को उस क्षेत्र में जाने के लिए प्रशासन से ज्यादा गैर-सरकारी संस्थाओं से अनुमति लेनी पड़ती थी। आज वही बस्तर विकास के पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें ठीक से पता नहीं है कि इंडियन एक्सप्रेस ने बस्तर ओलंपिक को कितना कवरेज दिया था, लेकिन उन्होंने कहा कि श्री रामनाथ गोयनका को यह देखकर बहुत खुशी होती कि कैसे बस्तर के युवा अब बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों का आयोजन कर रहे हैं।

बस्तर पर चर्चा करते समय, नक्सलवाद या माओवादी आतंकवाद के मुद्दे पर भी ध्यान देना जरूरी बताते हुए, श्री मोदी ने कहा कि देश भर में नक्सलवाद का प्रभाव कम हो रहा है, लेकिन विपक्षी दलों के भीतर इसकी सक्रियता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच दशकों से, भारत का लगभग हर बड़ा राज्य माओवादी उग्रवाद से प्रभावित रहा है। प्रधानमंत्री ने खेद व्यक्त किया कि विपक्ष माओवादी आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है, जो भारतीय संविधान को नकारता है। उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष ने न केवल सुदूर वन क्षेत्रों में नक्सलवाद का समर्थन किया, बल्कि शहरी केंद्रों, यहां तक कि प्रमुख संस्थानों में भी इसकी जड़ें जमाने में मदद की।

उन्होंने कहा कि 10-15 साल पहले, शहरी नक्सली विपक्ष के भीतर ही अपनी जड़ें जमा चुके थे, और आज, उन्होंने पार्टी को "मुस्लिम लीग-माओवादी कांग्रेस" (एमएमसी) में बदल दिया है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस एमएमसी ने अपने स्वार्थों के लिए राष्ट्रीय हितों को त्याग दिया है और यह देश की एकता के लिए लगातार खतरा बनता जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे भारत एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में एक नई यात्रा पर अग्रसर हो रहा है, श्री रामनाथ गोयनका की विरासत और भी प्रासंगिक हो जाती है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे रामनाथ जी ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन का कड़ा विरोध किया था, और प्रधानमंत्री ने उनके संपादकीय कथन का हवाला दिया जिसमें उन्होंने लिखा था: "मैं ब्रिटिश आदेशों का पालन करने के बजाय अखबार बंद कर देना पसंद करूंगा।" श्री मोदी ने कहा कि आपातकाल के दौरान, जब देश को गुलाम बनाने का एक और प्रयास किया गया, तो रामनाथ जी एक बार फिर अडिग रहे। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस वर्ष आपातकाल के पचास वर्ष पूरे हो रहे हैं और इंडियन एक्सप्रेस ने तब यह दिखा दिया था कि कोरे संपादकीय भी उस मानसिकता को चुनौती दे सकते हैं जो लोगों को गुलाम बनाने की कोशिश करती है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि वह भारत को गुलामी की मानसिकता से मुक्त कराने के विषय पर विस्तार से बोलेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए 190 साल पीछे, 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से भी पहले, 1835 में जाना होगा, जब ब्रिटिश सांसद थॉमस बैबिंगटन मैकाले ने भारत को उसकी सांस्कृतिक जड़ों से उखाड़ फेंकने का एक बड़ा अभियान चलाया था। मैकाले ने ऐसे भारतीयों का निर्माण करने का इरादा जाहिर किया था जो दिखने में तो भारतीय हों, लेकिन सोचने में अंग्रेजों जैसे हों। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, उन्होंने भारत की शिक्षा व्यवस्था में सिर्फ़ सुधार ही नहीं किया-बल्कि उसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया। प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी का हवाला दिया, जिन्होंने कहा था कि भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था एक सुंदर वृक्ष थी जिसे जड़ से उखाड़कर नष्ट कर दिया गया।

भारत की पारंपरिक शिक्षा प्रणाली के अपनी संस्कृति पर गर्व का भाव जगाने और सीखने व कौशल विकास, दोनों पर समान जोर देने का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि यही कारण था कि मैकाले ने इसे ख़त्म करने की कोशिश की-और इसमें सफल भी रहा। मैकाले ने यह सुनिश्चित किया कि उस दौर में ब्रिटिश भाषा और विचारों को ज्यादा मान्यता मिले और भारत को आने वाली सदियों में इसकी कीमत चुकानी पड़ी। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैकाले ने भारत का आत्मविश्वास तोड़ा और हीनता का भाव पैदा किया। एक ही झटके में, उसने भारत के हज़ारों सालों के ज्ञान, विज्ञान, कला, संस्कृति और पूरी जीवन शैली को नकार दिया।

इस बात पर जोर देते हुए कि यही वह क्षण था जब इस विश्वास के बीज बोए गए थे कि प्रगति और महानता केवल विदेशी तरीकों से ही प्राप्त की जा सकती है, श्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद यह मानसिकता और भी मजबूत हो गई। भारत की शिक्षा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक आकांक्षाएं तेजी से विदेशी मॉडलों के साथ जुड़ती गईं। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वदेशी व्यवस्थाओं पर गर्व कम होता गया और महात्मा गांधी द्वारा रखी गई स्वदेशी नींव को काफ़ी हद तक भुला दिया गया। शासन के मॉडल विदेशों में तलाशे जाने लगे और नवाचार की तलाश विदेशी धरती पर की जाने लगी। उन्होंने कहा कि इस मानसिकता के कारण आयातित विचारों, वस्तुओं और सेवाओं को श्रेष्ठ मानने की सामाजिक प्रवृत्ति विकसित हुई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब कोई राष्ट्र स्वयं का सम्मान करने में विफल रहता है, तो वह अपने स्वदेशी पारिस्थितिकी तंत्र को, जिसमें मेड इन इंडिया विनिर्माण ढांचा भी शामिल है, अस्वीकार कर देता है। उन्होंने पर्यटन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन देशों में पर्यटन फल-फूल रहा है, वहां के लोग अपनी ऐतिहासिक विरासत पर गर्व करते हैं। इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत में अपनी ही विरासत को नकारने के प्रयास हुए। विरासत पर गर्व के बिना, उसके संरक्षण की कोई प्रेरणा नहीं होती और संरक्षण के बिना, ऐसी विरासत केवल ईंट-पत्थर के खंडहर बनकर रह जाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अपनी विरासत पर गर्व पर्यटन के विकास के लिए एक पूर्व निर्धारित शर्त है।

स्थानीय भाषाओं के मुद्दे पर आगे बोलते हुए, प्रधानमंत्री ने सवाल किया कि कौन सा देश अपनी भाषाओं का अनादर करता है। उन्होंने बताया कि जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने कई पश्चिमी प्रथाओं को अपनाया, लेकिन अपनी मूल भाषाओं से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति स्थानीय भाषाओं में शिक्षा पर विशेष जोर देती है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार अंग्रेजी भाषा के विरोध में नहीं है, बल्कि भारतीय भाषाओं का दृढ़ता से समर्थन करती है।

यह टिप्पणी करते हुए कि मैकाले द्वारा भारत की सांस्कृतिक और शैक्षिक नींव के विरुद्ध किए गए अपराध को 2035 में 200 वर्ष पूरे हो जाएंगे, श्री मोदी ने राष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई का आह्वान किया और नागरिकों से अगले दस वर्षों में मैकाले द्वारा स्थापित गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाने का संकल्प लेने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मैकाले द्वारा शुरू की गई बुराइयों और सामाजिक कुरीतियों को आने वाले दशक में जड़ से मिटाना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई और उन्होंने कहा कि वे श्रोताओं का अधिक समय नहीं लेंगे। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस समूह को देश के हर परिवर्तन और विकास की कहानी का साक्षी बताया। जैसे-जैसे भारत एक विकसित देश बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, उन्होंने इस यात्रा में समूह की निरंतर भागीदारी की सराहना की। उन्होंने श्री रामनाथ गोयनका के आदर्शों को संरक्षित करने में उनके समर्पित प्रयासों के लिए इंडियन एक्सप्रेस टीम को बधाई दी और कार्यक्रम की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं देकर समापन किया।

पूरा भाषण पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Cabinet approves Rs 4,415 crore upgrade of 233 km NH-347B in Madhya Pradesh

Media Coverage

Cabinet approves Rs 4,415 crore upgrade of 233 km NH-347B in Madhya Pradesh
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
UK Foreign Secretary meets Prime Minister
June 04, 2026

UK Foreign Secretary Yvette Cooper today met Prime Minister Shri Narendra Modi.

The Prime Minister expressed his pleasure upon the meeting and appreciated the deepening of the India-UK partnership in recent times which has unlocked unprecedented growth opportunities for both countries.

The Prime Minister affirmed that the India-UK Vision 2035 will continue to guide the partnership and strengthen joint efforts for the global good.

The Prime Minister posted on X:

"Pleased to meet UK Foreign Secretary Yvette Cooper. Appreciated the deepening of the India-UK partnership in recent times that has unlocked unprecedented growth opportunities for both our countries.

India-UK Vision 2035 will continue to guide our partnership and strengthen our joint efforts for global good.@YvetteCooperMP"