प्रधानमंत्री ने ₹14,260 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया
छत्तीसगढ़ विकास के पथ पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है: प्रधानमंत्री
हमारी कोशिश यही है कि आदिवासी समुदाय के योगदान का हमेशा गौरवगान होता रहे: प्रधानमंत्री
वह दिन दूर नहीं जब हमारा छत्तीसगढ़ और हमारा देश माओवादी आतंकवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आज नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव को संबोधित किया। उन्होंने सड़क, उद्योग, स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ी 14,260 करोड़ रुपये से अधिक की विकास संबंधी और परिवर्तनकारी परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। इस अवसर पर, प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के लोगों का अभिवादन करते हुए कहा कि आज छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर, उन्होंने छत्तीसगढ़ के सभी लोगों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं।

श्री मोदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ के रजत जयंती समारोह में राज्य के लोगों के साथ भाग लेना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि एक पार्टी कार्यकर्ता के रूप में, उन्होंने राज्य के गठन से पहले का दौर देखा है और पिछले 25 वर्षों की इसकी यात्रा के भी साक्षी रहे हैं। इसलिए, इस गौरवशाली क्षण का हिस्सा बनना उनके लिए एक अत्यंत मार्मिक अनुभव है।

श्री मोदी ने कहा, "पच्चीस साल पहले, अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने इस संकल्प के साथ आपके सपनों का छत्तीसगढ़ आपको सौंपा था, कि राज्य विकास की नई ऊंचाइयां छुएगा।" उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों की यात्रा पर नज़र डालने से उन्हें गर्व होता है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि छत्तीसगढ़ के लोगों ने सामूहिक रूप से अनेक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, "पच्चीस साल पहले जो बीज बोया गया था, आज वो विकास का वटवृक्ष बन चुका है। छत्तीसगढ़ आज विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।" उन्होंने कहा कि आज राज्य को लोकतंत्र का एक नया मंदिर - एक नया विधानसभा भवन भी मिला है। कार्यक्रम स्थल पर पहुँचने से पहले, उन्हें जनजातीय संग्रहालय का उद्घाटन करने का अवसर मिला। इसी मंच से लगभग 14,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शुभारंभ किया गया। उन्होंने इन विकास पहलों के लिए सभी को बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2000 के बाद से एक पूरी पीढ़ी बदल गई है। आज युवाओं की एक नई पीढ़ी है जिसने वो पुराने दिन नहीं देखे जब गाँवों तक पहुँचना एक चुनौती थी और कई गाँवों में सड़कों का नामोनिशान तक नहीं था। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज छत्तीसगढ़ के गाँवों में सड़कों का जाल 40,000 किलोमीटर तक फैल चुका है। पिछले 11 वर्षों में, राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है और नए एक्सप्रेसवे छत्तीसगढ़ की प्रगति के प्रतीक बन रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि पहले रायपुर से बिलासपुर जाने में कई घंटे लगते थे, लेकिन अब यह समय आधा रह गया है। उन्होंने एक नए चार-लेन के राजमार्ग की आधारशिला रखने की भी घोषणा की, जो छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच संपर्क को और बेहतर बनाएगा।

छत्तीसगढ़ में रेल और हवाई संपर्क में सुधार के लिए किए गए व्यापक कार्यों पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने कहा कि वंदे भारत जैसी तेज़ गति वाली ट्रेनें अब राज्य में चल रही हैं और रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर जैसे शहर अब सीधी उड़ानों से जुड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, जो कभी मुख्य रूप से कच्चे माल के निर्यात के लिए जाना जाता था, अब एक औद्योगिक राज्य के रूप में एक नई भूमिका में उभर रहा है। प्रधानमंत्री ने पिछले 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों के लिए प्रत्येक मुख्यमंत्री और प्रत्येक सरकार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इसका एक बड़ा श्रेय डॉ. रमन सिंह को जाता है, जिन्होंने कठिन चुनौतियों के समय राज्य का नेतृत्व किया। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि डॉ. रमन सिंह अब विधानसभा अध्यक्ष के रूप में इसका मार्गदर्शन कर रहे हैं और श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार छत्तीसगढ़ के विकास को तीव्र गति से आगे बढ़ा रही है।

श्री मोदी ने कहा कि उन्होंने गरीबी को करीब से देखा है और गरीबों की चिंताओं और लाचारी को समझते हैं। उन्होंने कहा कि जब देश ने उन्हें सेवा का अवसर दिया, तो उन्होंने वंचितों के कल्याण को प्राथमिकता दी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनकी सरकार ने गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवा, आय, शिक्षा और सिंचाई पर व्यापक रूप से ध्यान केन्द्रित किया है।

एक उदाहरण देते हुए, कि 25 साल पहले छत्तीसगढ़ में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, श्री मोदी ने कहा कि आज राज्य में 14 मेडिकल कॉलेज और रायपुर में एक एम्स है। उन्होंने याद दिलाया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित करने का राष्ट्रव्यापी अभियान छत्तीसगढ़ से ही शुरू हुआ था। वर्तमान में, राज्य में 5,500 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारी सरकार का प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक गरीब नागरिक सम्मान का जीवन जिए।" उन्होंने कहा कि झुग्गी-झोपड़ियों और अस्थायी आश्रयों में जीवन निराशा को और गहरा करता है और गरीबी से लड़ने के संकल्प को कमजोर करता है। इसलिए, हमारी सरकार ने प्रत्येक गरीब परिवार को स्थायी आवास प्रदान करने का संकल्प लिया है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछले 11 वर्षों में, चार करोड़ गरीब परिवारों को पक्के घर मिले हैं और अब सरकार तीन करोड़ नए घर बनाने के संकल्प के साथ काम कर रही है। अकेले आज ही के दिन, छत्तीसगढ़ में 3.5 लाख से अधिक परिवार अपने नए घरों में प्रवेश कर रहे हैं और लगभग तीन लाख परिवारों को ₹1,200 करोड़ का वितरण किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ में उनकी सरकार द्वारा गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के लिए की जा रही गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में ही वंचितों के लिए सात लाख पक्के घर बनाए गए हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ये सिर्फ़ आँकड़े नहीं हैं—हर घर एक परिवार के सपने और अपार खुशी का प्रतीक है। उन्होंने सभी लाभार्थी परिवारों को हार्दिक बधाई दी।

छत्तीसगढ़ के लोगों का जीवन आसान बनाने और उनकी कठिनाइयों को कम करने के लिए उनकी सरकार द्वारा निरंतर किए जा रहे प्रयासों पर ज़ोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अब राज्य के हर गाँव तक बिजली पहुँच गई है और जिन इलाकों में कभी बिजली नहीं थी, वहाँ भी अब इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है। श्री मोदी ने याद दिलाया कि एक समय था जब साधारण परिवारों के लिए एलपीजी कनेक्शन एक दूर का सपना हुआ करता था। आज, छत्तीसगढ़ के गरीबों, दलितों, पिछड़े वर्गों और जनजातीय समुदायों के गाँवों और घरों तक गैस कनेक्शन पहुँचाया जा चुका है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार अब सिलेंडरों के अलावा पाइपलाइन के ज़रिए भी सस्ती गैस उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने घोषणा की कि नागपुर-झारसुगुड़ा गैस पाइपलाइन आज राष्ट्र को समर्पित की गई है और इस परियोजना के लिए छत्तीसगढ़ के लोगों को बधाई दी।

इस बात का उल्लेख करते हुए, कि छत्तीसगढ़ में देश की सबसे बड़ी जनजातीय आबादी निवास करती है—एक ऐसा समुदाय जिसका गौरवशाली इतिहास है और जिसका भारत की विरासत और विकास में अपार योगदान है— श्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने का निरंतर प्रयास कर रही है कि पूरा देश और दुनिया जनजातीय समुदायों के योगदान को मान्यता दे और उसका सम्मान करे। चाहे देश भर में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित संग्रहालयों की स्थापना हो या भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस घोषित करना हो, सरकार का निरंतर प्रयास जनजातीय समाज की विरासत का सम्मान और गौरव करना है।

प्रधानमंत्री ने इस बात का ज़िक्र करते हुए कि आज शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय के उद्घाटन के साथ इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, इस बात पर ज़ोर दिया कि यह संग्रहालय आज़ादी से पहले के 150 वर्षों के जनजातीय इतिहास को प्रदर्शित करता है और विस्तार से बताता है कि कैसे आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

इस बात पर ज़ोर देते हुए कि उनकी सरकार जनजातीय विरासत के संरक्षण और जनजातीय विकास एवं कल्याण को बढ़ावा देने का काम साथ-साथ कर रही है, श्री मोदी ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का हवाला दिया, जो देश भर के हज़ारों आदिवासी गाँवों में विकास की नई रोशनी फैला रहा है। उन्होंने कहा कि यह 80,000 करोड़ रुपये की पहल है - स्वतंत्र भारत में जनजातीय क्षेत्रों के लिए अभूतपूर्व पैमाने पर। उन्होंने कहा कि पहली बार, सबसे कमज़ोर आदिवासी समूहों के विकास के लिए एक राष्ट्रीय योजना तैयार की गई है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत्‍, इन समुदायों की हज़ारों बस्तियों में विकास कार्य किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जनजातीय समुदाय पीढ़ियों से वनोपज संग्रहण करते आ रहे हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वर्तमान सरकार ने ही वन धन केन्‍द्रों के माध्यम से अधिक आय के अवसर पैदा किए हैं। उन्होंने कहा कि तेंदू पत्ता संग्रहण की बेहतर व्यवस्था के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ में तेंदू पत्ता संग्रहणकर्ताओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

छत्तीसगढ़ के नक्सलवाद और माओवादी आतंकवाद की बेड़ियों से मुक्त होने पर संतोष व्यक्त करते हुए, श्री मोदी ने नक्सलवाद के कारण 50-55 वर्षों तक लोगों द्वारा झेले गए कष्टदायक अनुभवों को स्वीकार किया। उन्होंने संविधान की रक्षा का ढोंग रचने वालों और सामाजिक न्याय के नाम पर घड़ियाली आँसू बहाने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक लाभ के लिए दशकों तक जनता के साथ अन्याय किया। उन्होंने कहा कि माओवादी आतंकवाद के कारण छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्र लंबे समय तक सड़कों से वंचित रहे। बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते थे, बीमारों को अस्पताल नहीं मिल पाते थे और दशकों तक देश पर राज करने वालों ने सुख-सुविधाओं का आनंद लेते हुए लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया।

इस बात पर जोर देते हुए कि वह अपने आदिवासी भाइयों और बहनों को हिंसा के चक्र में बर्बाद नहीं होने दे सकते, न ही वह अनगिनत माताओं को अपने बच्चों के लिए रोते हुए देख सकते हैं, श्री मोदी ने कहा कि जब राष्ट्र ने उन्हें 2014 में सेवा करने का अवसर दिया, तो उनकी सरकार ने भारत को माओवादी आतंकवाद से मुक्त करने का संकल्प लिया। इस संकल्प के परिणाम अब पूरे देश को दिखाई दे रहे हैं, इस बात पर ज़ोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्यारह साल पहले, 125 से ज़्यादा जिले माओवादी आतंक से प्रभावित थे; आज, केवल तीन जिले ही ऐसे बचे हैं जहाँ माओवादी गतिविधि के निशान मौजूद हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, "वह दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ और हमारा देश माओवादी आतंकवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।"

प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि छत्तीसगढ़ में कई लोग, जिन्होंने कभी हिंसा का रास्ता अपनाया था, अब तेज़ी से आत्मसमर्पण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ ही दिन पहले, कांकेर में बीस से ज़्यादा नक्सली मुख्यधारा में लौट आए, और उससे पहले, 17 अक्टूबर को बस्तर में 200 से ज़्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। उन्होंने आगे कहा कि हाल के महीनों में, देश भर में माओवादी आतंक से जुड़े दर्जनों लोगों ने हथियार डाले हैं, जिनमें से कई पर लाखों-करोड़ों रुपये का इनाम था। इन लोगों ने अब भारत के संविधान को स्वीकार कर लिया है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि माओवादी आतंकवाद के खात्मे ने असंभव को संभव बना दिया है। उन्होंने कहा कि कभी बम और बंदूकों के खौफ से घिरे इलाके अब बदल चुके हैं। बीजापुर के चिलकापल्ली गाँव में सात दशकों में पहली बार बिजली पहुँची है। अबूझमाड़ के रेकावाया गाँव में आज़ादी के बाद पहली बार स्कूल का निर्माण शुरू हुआ है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कभी आतंक का गढ़ माने जाने वाला पुवर्ती गाँव अब विकास की लहर देख रहा है। लाल झंडे की जगह अब राष्ट्रीय तिरंगे ने ले ली है। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्र अब उत्सवों से भरे हुए हैं और बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों की मेजबानी कर रहे हैं।

सभी से यह कल्पना करने का आग्रह करते हुए कि नक्सलवाद की चुनौती के बावजूद छत्तीसगढ़ ने पिछले 25 वर्षों में कितनी प्रगति की है और इस चुनौती पर पूरी तरह से विजय प्राप्त होने के बाद यह गति कितनी तेज़ होगी, श्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि आने वाले वर्ष छत्तीसगढ़ के लिए महत्वपूर्ण हैं। एक विकसित भारत के निर्माण के लिए, छत्तीसगढ़ का विकसित होना आवश्यक है। राज्य के युवाओं को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उनका समय है और ऐसा कोई लक्ष्य नहीं है जिसे वे प्राप्त न कर सकें। उन्होंने उन्हें विश्वास दिलाया कि उनकी सरकार हर कदम पर और हर संकल्प के साथ उनके साथ खड़ी है। प्रधानमंत्री ने यह कहते हुए समापन किया कि हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ और देश को आगे बढ़ाएँगे। उन्होंने छत्तीसगढ़ के प्रत्येक भाई-बहन को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।

इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमन डेका, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, केन्द्रीय मंत्री श्री जुएल ओराम, श्री दुर्गा दास उइके, श्री टोकन साहू सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव में भाग लिया। उन्होंने सड़क, उद्योग, स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों को शामिल करने वाली ₹14,260 करोड़ से अधिक की विकास से जुड़ी और परिवर्तनकारी परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।

ग्रामीण आजीविका को मज़बूत करने के लिए, प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के नौ ज़िलों में 12 नए स्टार्ट-अप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम (एसवीईपी) ब्लॉकों का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने 3.51 लाख पूर्ण हो चुके घरों के गृह प्रवेश में भाग लिया और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत 3 लाख लाभार्थियों को किश्तों के रूप में ₹1200 करोड़ जारी किए, जिससे राज्य भर के ग्रामीण परिवारों के लिए सम्मानजनक आवास और सुरक्षा सुनिश्चित हुई।

कनेक्टिविटी को बढ़ावा देते हुए, प्रधानमंत्री ने पत्थलगांव-कुनकुरी से छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा तक चार लेन वाले ग्रीनफील्ड हाईवे की आधारशिला रखी। इसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा भारतमाला परियोजना के तहत लगभग ₹3,150 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है। यह रणनीतिक गलियारा कोरबा, रायगढ़, जशपुर, रांची और जमशेदपुर में प्रमुख कोयला खदानों, औद्योगिक क्षेत्रों और इस्पात संयंत्रों को जोड़ेगा, जो एक प्रमुख आर्थिक मार्ग के रूप में कार्य करेगा और क्षेत्रीय व्यापार संबंधों को मजबूत करेगा तथा मध्य भारत को पूर्वी क्षेत्र से जोड़ेगा।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने बस्तर और नारायणपुर जिलों में कई खंडों में फैले राष्ट्रीय राजमार्ग-130डी (नारायणपुर-कस्तूरमेटा-कुतुल-नीलांगुर-महाराष्ट्र सीमा) के निर्माण और उन्नयन की आधारशिला रखी। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राजमार्ग-130सी (मदंगमुडा-देवभोग-ओडिशा सीमा) को पक्की सतह वाले दो-लेन के राजमार्ग में उन्नत करने का भी उद्घाटन करेंगे। इससे आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों में सड़क संपर्क में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और बाज़ारों तक पहुँच में सुधार होगा और दूरदराज के क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

विद्युत क्षेत्र में, प्रधानमंत्री ने अंतर-क्षेत्रीय ईआर-डब्ल्यूआर इंटरकनेक्शन परियोजना का उद्घाटन किया, जिससे पूर्वी और पश्चिमी ग्रिडों के बीच अंतर-क्षेत्रीय विद्युत हस्तांतरण क्षमता में 1,600 मेगावाट की वृद्धि होगी, ग्रिड विश्वसनीयता में सुधार होगा और पूरे क्षेत्र में स्थिर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने ₹3,750 करोड़ से अधिक लागत की कई ऊर्जा क्षेत्र परियोजनाओं का लोकार्पण, उद्घाटन और शिलान्यास किया, जिनका उद्देश्य छत्तीसगढ़ के बिजली बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, आपूर्ति विश्वसनीयता में सुधार करना और पारेषण क्षमता को बढ़ाना है।

पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत, प्रधानमंत्री द्वारा लगभग ₹1,860 करोड़ के कार्यों को समर्पित किया जाएगा, जिसमें नई बिजली लाइनों का निर्माण, फीडर को दो भागों में बांटना, ट्रांसफार्मर की स्थापना, कंडक्टरों का रूपांतरण और ग्रामीण और कृषि बिजली आपूर्ति में सुधार के लिए निम्न-दाब नेटवर्क को मजबूत करना शामिल है। प्रधानमंत्री रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बेमेतरा, गरियाबंद और बस्तर जैसे जिलों में लगभग ₹480 करोड़ की लागत से निर्मित नौ नए बिजली सबस्टेशनों का भी उद्घाटन करेंगे। इसके अतिरिक्त, राज्य में बिजली की पहुंच और गुणवत्ता को और बढ़ाने के लिए कई जिलों में नए आरडीएसएस कार्यों के साथ-साथ कांकेर और बलौदाबाजार-भाटापाड़ा में प्रमुख सुविधाओं सहित ₹1,415 करोड़ से अधिक की लागत के नए सबस्टेशनों और ट्रांसमिशन परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस क्षेत्र में, प्रधानमंत्री रायपुर में एचपीसीएल के अत्याधुनिक पेट्रोलियम तेल डिपो का उद्घाटन करेंगे, जिसका निर्माण ₹460 करोड़ से अधिक की लागत से हुआ है और इसकी पेट्रोल, डीजल और इथेनॉल भंडारण क्षमता 54,000 किलोलीटर (केएल) है। यह सुविधा एक प्रमुख ईंधन केन्‍द्र के रूप में काम करेगी, जो छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। 10,000 केएल इथेनॉल भंडारण के साथ, डिपो इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम में भी सहयोग कर रहा है, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम कर रहा है और स्वच्छ ऊर्जा विकास को बढ़ावा दे रहा है।

प्रधानमंत्री लगभग ₹1,950 करोड़ की लागत से निर्मित 489 किलोमीटर लंबी नागपुर-झारसुगुड़ा प्राकृतिक गैस पाइपलाइन भी समर्पित करेंगे। यह परियोजना भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत तक बढ़ाने और “एक राष्ट्र, एक गैस ग्रिड” के स्‍वप्‍न को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह पाइपलाइन छत्तीसगढ़ के 11 जिलों को राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जोड़ेगी, जिससे औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र को स्वच्छ एवं किफायती ईंधन उपलब्ध होगा।

औद्योगिक विकास और रोज़गार को बढ़ावा देने के लिए, प्रधानमंत्री दो स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्रों की आधारशिला रखेंगे—एक जांजगीर-चांपा ज़िले के सिलादेही-गतवा-बिर्रा में और दूसरा राजनांदगांव ज़िले के बिजलेटला में। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-22 में एक फार्मास्युटिकल पार्क की आधारशिला रखेंगे। यह पार्क दवा और स्वास्थ्य सेवा निर्माण के लिए एक समर्पित क्षेत्र के रूप में काम करेगा। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए, प्रधानमंत्री पाँच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों—मनेन्‍द्रगढ़, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा और गीदम (दंतेवाड़ा) में, और बिलासपुर में सरकारी आयुर्वेद कॉलेज और अस्पताल की आधारशिला रखेंगे। ये परियोजनाएँ चिकित्सा शिक्षा को मज़बूत करेंगी, स्वास्थ्य सेवा की पहुँच का विस्तार करेंगी और पूरे छत्तीसगढ़ में पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देंगी।

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Prime Minister shares Sanskrit Subhashitam highlighting the importance of grasping the essence of knowledge
January 20, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi today shared a profound Sanskrit Subhashitam that underscores the timeless wisdom of focusing on the essence amid vast knowledge and limited time.

The sanskrit verse-
अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च।
यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥

conveys that while there are innumerable scriptures and diverse branches of knowledge for attaining wisdom, human life is constrained by limited time and numerous obstacles. Therefore, one should emulate the swan, which is believed to separate milk from water, by discerning and grasping only the essence- the ultimate truth.

Shri Modi posted on X;

“अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च।

यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥”