भारतीय सभ्यता का केंद्रीय मूल्य सेवा है: प्रधानमंत्री
'सेवो परमो धर्मः' वह लोकाचार है जिसने भारत को सदियों के बदलावों और चुनौतियों के बीच टिकाए रखा और हमारी सभ्यता को उसकी आंतरिक शक्ति प्रदान की: प्रधानमंत्री
श्री सत्य साईं बाबा ने सेवा को मानव जीवन के केंद्र में रखा: प्रधानमंत्री
श्री सत्य साईं बाबा ने आध्यात्मिकता को समाज सेवा और मानव कल्याण के लिए एक साधन में बदल दिया: प्रधानमंत्री
आइए हम ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को और मजबूत करने का संकल्प लें; हमें‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिएअपनी स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना होगा: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में भगवान श्री सत्य साईं बाबा के जन्म शताब्दी समारोह को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत "साईं राम" से की और कहा कि पुट्टपर्थी की पावन धरती पर आप सभी के बीच उपस्थित होना एक भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव है। उन्होंने बताया कि कुछ ही देर पहले ही उन्हें बाबा की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करने का अवसर मिला। श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि बाबा के चरणों में नमन करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना हमेशा हृदय को गहरी भावनाओं से भर देता है।

श्री सत्य साईं बाबा के जन्म शताब्दी वर्ष को इस पीढ़ी के लिए केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक दिव्य आशीर्वाद बताते हुए श्री मोदी ने कहा कि यद्यपि बाबा अब शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनकी शिक्षाएं, उनका प्रेम और उनकी सेवा की भावना दुनिया भर में करोड़ों लोगों का मार्गदर्शन कर रही है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 140 से अधिक देशों में अनगिनत लोग एक नई रोशनी, दिशा और संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि श्री सत्य साईं बाबा का जीवन ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के आदर्श का एक जीवंत रूप था, प्रधानमंत्री ने कहा, "इसलिए, यह जन्म शताब्दी वर्ष सार्वभौमिक प्रेम, शांति और सेवा का एक भव्य उत्सव बन गया है।" उन्होंने कहा कि यह सरकार का सौभाग्य है कि इस अवसर पर 100 रुपये का स्‍मृति सिक्का और डाक टिकट जारी किया गया है, जो बाबा की सेवा की विरासत को दर्शाते हैं। उन्होंने दुनिया भर में बाबा के भक्तों, स्वयंसेवकों और अनुयायियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री ने कहा, "भारतीय सभ्यता का केंद्रीय मूल्य सेवा है।" उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत की सभी विविध आध्यात्मिक और दार्शनिक परंपराएं अंततः इसी एक आदर्श की ओर ले जाती हैं। चाहे कोई भक्ति, ज्ञान या कर्म के मार्ग पर चले, प्रत्‍येक ‘सेवा’ से जुड़ा हुआ है। उन्होंने प्रश्न किया कि सभी प्राणियों में विद्यमान परमात्‍मा की सेवा के बिना भक्ति क्या है, अगर ज्ञान दूसरों के प्रति करुणा नहीं जगाता तो वो क्‍या है, और अगर कर्म समाज की सेवा के रूप में अर्पित करने की भावना नहीं है तो वो क्‍या है। श्री मोदी ने बल देते हुए कहा, "'सेवा परमो धर्मः' वह लोकाचार है जिसने भारत को सदियों के बदलावों और चुनौतियों के बीच टिकाए रखा है और हमारी सभ्यता को उसकी आंतरिक शक्ति प्रदान की है, यह देखते हुए कि कई महान संतों और सुधारकों ने इस कालातीत संदेश को अपने समय के अनुरूप तरीकों से आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि श्री सत्य साईं बाबा ने सेवा को मानव जीवन के केंद्र में रखा। उन्होंने बाबा के शब्दों, "सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो" को याद किया और पुष्टि की कि बाबा के लिए, ‘सेवा’ कर्म में प्रेम था। प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ग्रामीण विकास और कई अन्य क्षेत्रों में बाबा के संस्थान इस दर्शन के जीवंत प्रमाण के रूप में खड़े हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि ये संस्थान दर्शाते हैं कि आध्‍यात्मिकता और सेवा अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही सत्य की विभिन्न अभिव्यक्तियां हैं। श्री मोदी ने आगे कहा कि किसी की शारीरिक उपस्थिति के दौरान लोगों को प्रेरित करना असामान्‍य नहीं है, लेकिन संस्थानों की ‘सेवा’ गतिविधियां उनकी शारीरिक अनुपस्थिति के बावजूद दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि वास्‍तव में महान आत्माओं का प्रभाव समय के साथ कम नहीं होता - यह वास्‍तव में बढ़ता है।

इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि श्री सत्य साईं बाबा का संदेश कभी भी पुस्तकों, प्रवचनों या किसी आश्रम की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, श्री मोदी ने कहा कि बाबा की शिक्षाओं का प्रभाव लोगों के बीच स्पष्ट दिखाई देता है। शहरों से लेकर दूरदराज के गांवों तक, स्कूलों से लेकर जनजातीय बस्तियों तक, पूरे भारत में संस्कृति, शिक्षा और चिकित्सा सेवा का एक उल्लेखनीय प्रवाह है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि बाबा के लाखों अनुयायी निस्वार्थ भाव से इस कार्य में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि "मानव सेवा ही माधव सेवा" बाबा के भक्तों के लिए सर्वोच्च आदर्श है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि बाबा ने कई ऐसे विचार दिए जो करुणा, कर्तव्य, अनुशासन और जीवन दर्शन के सार को समाहित करते है। उन्होंने बाबा के मार्गदर्शक सिद्धांतों: "सदैव मदद करो, कभी चोट मत पहुंचाओ" और "कम बातें, अधिक काम" को याद किया और पुष्टि की कि श्री सत्य साईं बाबा के ऐसे जीवन मंत्र आज भी सभी के दिलों में गूंजते रहते हैं।

यह रेखांकित करते हुए कि श्री सत्य साईं बाबा ने आध्यात्मिकता का उपयोग समाज और जनकल्याण के लिए किया, प्रधानमंत्री ने इसे निस्वार्थ सेवा, चरित्र निर्माण और मूल्य-आधारित शिक्षा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि बाबा ने कोई सिद्धांत या विचारधारा नहीं थोपी, बल्कि गरीबों की मदद करने और उनके दुखों को कम करने के लिए काम किया। श्री मोदी ने याद किया कि गुजरात भूकंप के बाद बाबा का सेवा दल राहत कार्यों में सबसे आगे खड़ा था। उनके अनुयायियों ने कई दिनों तक पूरे समर्पण के साथ सेवा की और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने, आवश्यक आपूर्ति प्रदान करने और मनो-सामाजिक समर्थन प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब एक मुलाकात किसी का दिल पिघला सकती है या उसके जीवन की दिशा बदल सकती है, तो यह उस व्यक्ति की महानता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान कार्यक्रम में भी ऐसे कई व्यक्ति हैं जिनके जीवन में बाबा के संदेश ने गहरा परिवर्तन लाया है।

इस बात पर संतोष व्यक्त करते हुए कि श्री सत्य साईं बाबा से प्रेरित होकर श्री सत्य साईं सेंट्रल ट्रस्ट और उससे जुड़े संगठन संगठित, संस्थागत और दीर्घकालिक तरीके से सेवा को आगे बढ़ा रहे हैं, श्री मोदी ने कहा कि आज यह हमारे सामने एक व्यावहारिक मॉडल के रूप में खड़ा है। उन्होंने जल, आवास, स्वास्थ्य सेवा, पोषण, आपदा सहायता और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कई सेवा पहलों का विशेष उल्लेख किया: ट्रस्ट ने रायलसीमा में गंभीर पेयजल संकट को दूर करने के लिए 3,000 किलोमीटर से अधिक पाइपलाइन बिछाई; ओडिशा में बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए 1,000 घर बनाए; और ऐसे अस्पताल चलाए जहाँ गरीब परिवार यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि वहाँ कोई बिलिंग काउंटर ही नहीं है। उन्होंने कहा कि जहां इलाज मुफ़्त है, वहीं मरीज़ों और उनके परिवारों को किसी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता। प्रधानमंत्री ने आगे बताया कि आज बेटियों के नाम पर 20,000 से ज़्यादा ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ खाते खोले गए हैं, जिससे उनकी शिक्षा और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित हुआ है।

दस साल पहले केंद्र सरकार द्वारा लड़कियों की शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य पर केंद्रित ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ की शुरुआत का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह देश की उन कुछ योजनाओं में से एक है जो हमारी बेटियों को 8.2 प्रतिशत की उच्चतम ब्याज दर प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत पूरे भारत में लड़कियों के लिए 4 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं और इन खातों में अब तक 3.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक जमा किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री ने श्री सत्य साईं परिवार द्वारा पुट्टपर्थी में 20,000 सुकन्या समृद्धि खाते खोलने की नेक पहल की सराहना की। अपने निर्वाचन क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले साल फरवरी में वाराणसी में बेटियों के लिए 27,000 सुकन्या समृद्धि खाते खोले गए थे और प्रत्येक खाते में 300 रुपये हस्तांतरित किए गए थे। उन्होंने पुष्टि की कि ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ बेटियों की शिक्षा और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में भारत में अनेक योजनाएं शुरू की गई हैं जिनसे नागरिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा ढांचा काफ़ी मज़बूत हुआ है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि गरीबों और वंचितों को तेज़ी से सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जा रहा है। 2014 में केवल 25 करोड़ लोग ही इसके दायरे में थे, जबकि आज यह संख्या बढ़कर लगभग 100 करोड़ हो गई है। श्री मोदी ने आगे कहा कि भारत की कल्याणकारी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है।

श्री मोदी ने साझा किया कि आज के दिन उन्हें ‘गौ दान’ कार्यक्रम में भी शामिल होने का अवसर मिला, जहां ट्रस्ट गरीब किसान परिवारों को 100 गायें दान कर रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारतीय परंपरा में गाय को जीवन, समृद्धि और करुणा का प्रतीक माना जाता है। ये गायें प्राप्तकर्ता परिवारों की आर्थिक, पोषण संबंधी और सामाजिक स्थिरता को सहारा देंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि गाय संरक्षण के माध्यम से समृद्धि का संदेश दुनिया भर में दिखाई देता है। उन्होंने याद दिलाया कि ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ के तहत कुछ वर्ष पहले वाराणसी में 480 से अधिक गिर गायें वितरित की गई थीं और आज वहां गिर गायों और बछड़ों की संख्या बढ़कर लगभग 1,700 हो गई है। उन्होंने बताया कि वाराणसी में एक नई परंपरा शुरू की गई है, जहां वितरित गाय से पैदा हुई बछिया को अन्य क्षेत्रों के किसानों को मुफ्त में दिया जाता है, जिससे गायों की संख्या में वृद्धि होती है। श्री मोदी ने यह भी याद दिलाया कि 7-8 वर्ष पहले अफ्रीका के रवांडा की अपनी यात्रा के दौरान भारत ने 200 गिर गायें उपहार में दी थीं। उन्होंने बताया कि रवांडा में भी ऐसी ही एक परंपरा है जिसे "गिरिंका" कहा जाता है, जिसका अर्थ है "आपको एक गाय मिले", जहां पैदा होने वाली पहली बछिया पड़ोसी परिवार को दे दी जाती है। इस प्रथा ने रवांडा में पोषण, दूध उत्पादन, आय और सामाजिक एकता को बढ़ाया है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ब्राज़ील ने भारत की गिर और कांकरेज मवेशी नस्लों को अपनाया है और आधुनिक प्रौद्योगिकी व वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से उन्हें उन्नत बनाया है, जिससे वे बेहतर डेयरी प्रदर्शन का स्रोत बन गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण दर्शाते हैं कि कैसे परंपरा, करुणा और वैज्ञानिक सोच मिलकर गाय को आस्था, सशक्तिकरण, पोषण और आर्थिक प्रगति का प्रतीक बनाती है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस परंपरा को नेक इरादे से आगे बढ़ाया जा रहा है।

इस बात को रेखांकित करते हुए कि राष्ट्र "कर्तव्य काल" की भावना के साथ एक विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सक्रिय नागरिक भागीदारी आवश्यक है, श्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि श्री सत्य साईं बाबा का जन्म शताब्दी वर्ष इस यात्रा में प्रेरणा का एक प्रमुख स्रोत है। उन्होंने सभी से इस विशेष वर्ष के दौरान "वोकल फ़ॉर लोकल" के मंत्र को मज़बूत करने का आग्रह किया और कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि स्थानीय उत्पादों की ख़रीद सीधे तौर पर एक परिवार, एक छोटे उद्यम और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त बनाती है, जिससे एक ‘आत्मनिर्भर भारत’ का मार्ग प्रशस्त होता है।

यह स्वीकार करते हुए कि उपस्थित सभी लोग श्री सत्य साईं बाबा से प्रेरित होकर राष्ट्र निर्माण में निरंतर योगदान दे रहे हैं, श्री मोदी ने कहा कि इस पवित्र भूमि में सचमुच एक अनूठी ऊर्जा है—जहां प्रत्येक आगंतुक की वाणी में करुणा, विचारों में शांति और कार्यो में सेवा परिलक्षित होती है। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जहां कहीं भी अभाव या पीड़ा होगी, वहां भक्त आशा और प्रकाश के एक प्रतीक के रूप में खड़े रहेंगे। इसी भावना के साथ उन्होंने प्रेम, शांति और सेवा के इस पवित्र मिशन को आगे बढ़ाने के लिए दुनिया भर के सत्य साईं परिवार, संस्थाओं, स्वयंसेवकों और भक्तों को हार्दिक बधाई देते हुए अपने संबोधन का समापन किया।

इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय मंत्री श्री के राममोहन नायडू, श्री जी. किशन रेड्डी और श्री भूपति राजू श्रीनिवास वर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में भगवान श्री सत्य साईं बाबा के पवित्र मंदिर और महासमाधि गए और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। भगवान श्री सत्य साईं बाबा के शताब्दी समारोह में भाग लेते हुए श्री मोदी ने भगवान श्री सत्य साईं बाबा के जीवन, शिक्षाओं और स्थायी विरासत का सम्मान करते हुए एक स्‍मृति सिक्का और डाक टिकटों का एक सेट जारी किया।

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