पश्चिम बंगाल के किसानों को पहली बार पीएम किसान योजना का लाभ मिलना शुरू हुआ है
एमएसपी पर गेहूं की खरीद ने इस साल नए रिकॉर्ड बनाए हैं
सरकार पूरी ताकत से कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पीएम-किसान) के तहत9,50,67,601लाभार्थी किसानों को 2,06,67,75,66,000 रूपये के वित्तीय लाभ की 8वीं किस्त जारी की।इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नेकिसान लाभार्थियों से बातचीत भी की।इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री भी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के लाभार्थियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बात की। उन्होंनेअपने क्षेत्र के युवा किसानों को जैविक खेती और नई कृषि तकनीकों की प्रशिक्षण प्रदान करने के लिएउत्तर प्रदेश स्थित उन्नाव केअरविन्द की सराहना की। इसके अलावा उन्होंने बड़े पैमाने पर जैविक खेती के लिए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह स्थित कार निकोबार के पैट्रिक की भी सराहना की। वहीं उन्होंने अपने क्षेत्र के 170 से अधिक आदिवासी किसानों का मार्गदर्शन करने के लिए आंध्र प्रदेश स्थित अनंतपुर की एन वेन्नुरामा के प्रयासों की प्रशंसा की।प्रधानमंत्री ने मेघालय के पहाड़ी इलाकों में मसालों जैसे; अदरक पाउडर, हल्दी और दालचीनी आदि मसालों के उत्पादन के लिएमेघालय के रेविस्टार की सराहना की। इसके अलावा उन्होंने जम्मू और कश्मीर स्थित श्रीनगर के खुर्शीद से भी बातचीत की, जो जैविक रूप से सब्जियों जैसे; शिमला मिर्च, हरी मिर्च और खीरे की खेती करते हैं।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पहली बार पश्चिम बंगाल के किसानों को इस योजना का लाभ मिलेगा।उन्होंने उन किसानों के प्रयासों की सराहना की जिन्होंने इस महामारी के दौरान कठिनाइयों के बीच खाद्यान्न और बागवानी में रिकॉर्ड उत्पादन किया है। उन्होंने कहा है कि सरकार प्रत्येक साल एमएसपी पर खरीद के नए रिकॉर्ड भीबना रही है। उन्होंने आगे बताया कि अब तक पिछले साल की तुलना में इस साल एमएसपी पर लगभग 10 प्रतिशत अधिक गेहूं की खरीद की गई है। अब तक गेहूं की खरीद के लिए लगभग 58,000 करोड़ रुपये सीधे किसानों के खाते में पहुंचे हैं।

प्रधानमंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि सरकार खेती में नए समाधान और नए विकल्प प्रदान करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। जैविक खेती को बढ़ावा देना भी इनमें से एक प्रयास है। जैविक खेती से अधिक लाभ पहुंचता है और अब युवा किसानों द्वारा पूरे देश में इसे अपनाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि अब गंगा के दोनों किनारों पर और इसके 5 किलोमीटर के दायरे में जैविक खेती की जा रही है, जिससे गंगा साफ रहे।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस महामारी के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड की समयसीमा बढ़ा दी गई है और किस्तों को अब 30 जून तक नवीनीकृत किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में 2 करोड़ से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सदी में एक बार आने वाली यह महामारी विश्व को चुनौती दे रही है, क्योंकि यह हमारे सामने एक अदृश्य दुश्मन है। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी पूरी ताकत से कोविड-19 से लड़ रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि राष्ट्र के दर्द को कम करने के लिए प्रत्येक सरकारी विभाग दिन-रात काम कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने इस बात का उल्लेख किया कि केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारें मिलकर तीव्र गति सेअधिक से अधिक देशवासियों का टीकाकरण करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि देश में अब तक लगभग 18 करोड़ टीके की खुराकें दी जा चुकी हैं। देशभर के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त टीकाकरण किया जा रहा है।प्रधानमंत्री ने सभी से आग्रह किया है कि जब उनकी बारी आए तो वे टीका के लिए पंजीकरण कराएं और हर वक्त कोविड उपयुक्त व्यवहार सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह टीका कोरोना से बचाव का एक महत्वपूर्ण साधन हैं और यह गंभीर बीमारी के जोखिम को कम करेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सशस्त्र बल इस कठिन समय में ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत से काम कर रहे हैं। रेलवे भी ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन कर रहा है।देश का दवा क्षेत्र बड़े पैमाने पर दवाओं का निर्माण और वितरण कर रहा है। उन्होंने राज्यों से दवाओं और चिकित्सा आपूर्तियों की कालाबाजारी से निपटने के लिए सख्त कानूनों को सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।

प्रधानमंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत एक ऐसा राष्ट्र नहीं है जो कठिन समय में उम्मीद खो देता है और उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि मजबूती और समर्पण से इस चुनौती को दूर किया जा सकता है। उन्होंने ग्रामीण इलाकों में भी कोविड-19 के फैलने को लेकर चेतावनी दी और ग्राम पंचायतों से अपने-अपने संबंधित क्षेत्रों में पर्याप्त जागरूकता और स्वच्छता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।  

 

पूरा भाषण पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India records highest-ever startup surge with 55,200 recognised in FY26

Media Coverage

India records highest-ever startup surge with 55,200 recognised in FY26
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में ₹24,815 करोड़ की दो रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी
April 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय आर्थिक मामलों की समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 24,815 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली दो परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

परियोजना का नाम

मार्ग की लंबाई (किमी में)

ट्रैक की लंबाई (किमी में)

पूर्ण होने की लागत (रुपये करोड़ में )

गाजियाबाद – सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन

403

859

14,926

राजमुंदरी (निदादावोलु) - विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) तीसरी और चौथी लाइन

 

198

 

458

 

9,889

कुल

601

1,317

24,815

 

इस बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। ये मल्‍टीट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करेंगे और भीड़भाड़ को कम करेंगे। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के नए भारत की परिकल्‍पना के अनुरूप हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मुख्‍य योजना के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश राज्यों के 15 जिलों को कवर करने वाली ये 02 (दो) परियोजनाएं भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 601 किलोमीटर तक बढ़ाएंगी।

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा, जिनमें दूधेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट, दरगाह शाह विलायत जामा मस्जिद (अमरोहा), नैमिषारण्य (सीतापुर), अन्नवरम, अंतर्वेदी, द्रक्षरामम आदि शामिल हैं।

प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, अनाज, सीमेंट, पीओएल, लोहा और इस्पात, कंटेनर, उर्वरक, चीनी, रासायनिक लवण, चूना पत्थर आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन का साधन होने के नाते, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की रसद लागत को कम करने में मदद करेगा, जिससे कार्बन डाइऑक्‍साइड के उत्सर्जन (180.31 करोड़ किलोग्राम) में कमी आएगी, जो 7.33 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।

गाजियाबाद – सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन (403 किमी)

  • गाजियाबाद-सीतापुर एक मौजूदा दोहरी लाइन खंड है जो दिल्ली-गुवाहाटी उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन 4) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • यह परियोजना देश के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों के बीच संपर्क सुधारने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • इस खंड की मौजूदा लाइन क्षमता का 168% तक उपयोग हो रहा है और परियोजना शुरू न होने की स्थिति में इसके 207% तक होने का अनुमान है।
  • उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, हापुड, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर जिलों से होकर गुजरती है।
  • परियोजना का मार्ग गाजियाबाद (मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स), मुरादाबाद (पीतल के बर्तन और हस्तशिल्प), बरेली (फर्नीचर, वस्त्र, इंजीनियरिंग), शाहजहांपुर (कालीन और सीमेंट से संबंधित उद्योग) और रोजा (तापीय विद्युत संयंत्र) जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से होकर गुजरता है।
  • सुगम परिवहन के लिए, परियोजना की रूपरेखा हापुड़, सिंभाओली, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर और सीतापुर के भीड़भाड़ वाले स्टेशनों को बाईपास करने के लिए बनाई गई है और तदनुसार, बाईपास खंडों पर छह नए स्टेशन प्रस्तावित हैं।
  • परियोजना खंड के पास/पास प्रमुख पर्यटक/धार्मिक स्थान दूधेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट, दरगाह शाह विलायत जामा मस्जिद (अमरोहा), और नैमिषारण्य (सीतापुर) हैं।
  • इस परियोजना से कोयला, खाद्यान्न, रासायनिक खाद, तैयार इस्पात आदि के 35.72 मीट्रिक टन प्रति वर्ष के अतिरिक्त माल परिवहन का अनुमान है।
  • अनुमानित लागत: लगभग 14,926 करोड़ रुपये।
  • रोजगार सृजन: 274 लाख मानव दिन।
  • कार्बन डाइऑक्‍साइड उत्सर्जन में लगभग 128.77 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्‍साइड की कमी। यह 5.15 करोड़ पेड़ों के बराबर है।

  • लॉजिस्टिक लागत में बचत: सड़क परिवहन की तुलना में प्रति वर्ष 2,877.46 करोड़ रुपये की बचत।

गाजियाबाद – सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन (403 किमी)

 

राजमुंदरी (निदादावोलु) - विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) तीसरी और चौथी लाइन (198 किमी)

 

  • राजमुंदरी (निदादावोलु) - विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) खंड हावड़ा - चेन्नई उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन) का हिस्सा है।
  • प्रस्तावित परियोजना हावड़ा-चेन्नई उच्‍च घनत्‍व नेटवर्क (एचडीएन) मार्ग के चौगुने विस्तार की पहल का हिस्सा है।
  • यह परियोजना आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी, कोनासीमा, काकीनाडा, अनाकापल्ले और विशाखापत्तनम जिलों से होकर गुजरती है।
  • विशाखापत्तनम को आकांक्षी जिला कार्यक्रम में एक आकांक्षी जिला माना गया है।
  • यह पूर्वी तट पर स्थित विशाखापत्तनम, गंगावरम, मछलीपटनम और काकीनाडा जैसे प्रमुख पत्तनों को जोड़ती है।
  • परियोजना का मार्ग पूर्वी तटरेखा के साथ-साथ चलता है और यह पूर्वी तटीय रेल गलियारे के सबसे व्यस्त, मुख्य रूप से माल ढुलाई के खंडों में से एक है।
  • इस खंड की लाइन क्षमता का उपयोग पहले ही 130% तक पहुंच चुका है, जिसके कारण बार-बार जाम और परिचालन में देरी हो रही है। क्षेत्र में पत्तनों और उद्योगों के प्रस्तावित विस्तार के कारण लाइन की क्षमता में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
  • परियोजना के इस खंड में गोदावरी नदी पर 4.3 किमी लंबा रेल पुल, 2.67 किमी लंबा वायडक्ट, 3 बाईपास शामिल हैं और नया मार्ग मौजूदा मार्ग से लगभग 8 किमी छोटा है, जिससे संपर्क और परिचालन दक्षता में सुधार होगा।
  • प्रस्तावित खंड अन्नवरम, अंतर्वेदी और द्रक्षरामम आदि जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुंच में सुधार करके पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
  • कोयला, सीमेंट, रासायनिक खाद, लोहा और इस्पात, खाद्यान्न, कंटेनर, बॉक्साइट, जिप्सम, चूना पत्थर आदि सहित 29.04 मीट्रिक टन प्रति वर्ष के अतिरिक्त माल परिवहन का अनुमान है।
  • अनुमानित लागत: लगभग 9,889 करोड़ रुपये।
  • रोजगार सृजन: 135 लाख मानव दिन।
  • कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 51.49 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड की कमी। यह 2.06 करोड़ पेड़ों के बराबर है।

  • लॉजिस्टिक लागत में बचत: सड़क परिवहन की तुलना में प्रति वर्ष 1,150.56 करोड़ रुपये की बचत।

 

आर्थिक सशक्तिकरण:

आकांक्षी जिले - विशाखापत्तनम जिले को बेहतर संपर्क मिलेगा।

पर्यटन और उद्योगों के माध्यम से इस क्षेत्र में अतिरिक्त आर्थिक अवसर उपलब्ध होंगे।

रेल संपर्क में सुधार के कारण नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा प्राप्त होगी।

राजमुंदरी (निदादावोलु) - विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) तीसरी और चौथी लाइन (198 किलोमीटर)

 

प्रधानमंत्री का ध्यान रेलवे पर:

  • वित्त वर्ष 26-27 के लिए रिकॉर्ड 2,65,000 करोड़ रुपये का बजट आबंटन।
  • 1600 से अधिक लोकोमोटिव का निर्माण करके, इसने लोकोमोटिव उत्पादन में अमेरिका और यूरोप को पीछे छोड़ दिया।
  • वित्त वर्ष 2026 में, भारतीय रेल के वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन मालवाहकों में शामिल होने की उम्मीद है, जो 1.6 बिलियन टन माल का परिवहन करेगा।

  • भारत ने ऑस्ट्रेलिया को मेट्रो कोच और यूनाइटेड किंगडम, सऊदी अरब, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया को बोगियां निर्यात करना शुरू कर दिया है।