प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रमुख पोलिश इंडोलॉजिस्टों के एक समूह से मुलाकात की। इस समूह में शामिल थे:

प्रोफेसर मारिया क्रिस्टोफर बायरस्की, एक प्रतिष्ठित पोलिश संस्कृत विद्वान और वारसॉ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमेरिटस हैं। प्रोफेसर बायरस्की ने 1993 से 1996 के दौरान भारत में पोलैंड के राजदूत के रूप में कार्य किया था और उन्हें मार्च 2022 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

प्रोफेसर मोनिका ब्रोवार्स्की, एक प्रसिद्ध पोलिश हिंदी विद्वान और एडम मिकीविक्ज़ विश्वविद्यालय (एएमयू), पॉज्नान में एशियाई अध्ययन विभाग की प्रमुख हैं। प्रोफेसर ब्रोवार्स्की को फरवरी 2023 में फिजी में 12वें विश्व हिंदी सम्मेलन के दौरान विश्व हिंदी सम्मान से सम्मानित किया गया था।

प्रोफेसर हलीना मार्लेविक, भारतीय दर्शनशास्त्र की एक प्रमुख पोलिश विद्वान और जगियेलोनियन यूनिवर्सिटी (जेयू), क्राको में इंस्टीट्यूट ऑफ ओरिएंटल स्टडीज की प्रमुख हैं।

प्रोफेसर दानुता स्टैसिक, एक प्रमुख पोलिश इंडोलॉजिस्ट और वारसॉ विश्वविद्यालय में दक्षिण एशिया अध्ययन विभाग के पूर्व प्रमुख हैं।

प्रोफेसर प्रेजेमिस्लाव सुरेक, प्रसिद्ध पोलिश इंडोलॉजिस्ट और व्रोकला विश्वविद्यालय में भारतीय अध्ययन के प्रमुख हैं।

प्रधानमंत्री ने भारतीय विषयों में इन विद्वानों की गहरी रुचि की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके कार्य एवं अकादमिक शोध ने भारत-पोलैंड सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने और आपसी समझ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पोलैंड में 19वीं सदी से ही इंडोलॉजी में गहरी रुचि रही है।

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प्रधानमंत्री ने मातृभूमि की पवित्र विरासत और विश्व कल्याण की प्रार्थना पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
May 21, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत में एक सुभाषितम् साझा करते हुए कहा कि हमारी मातृभूमि आध्यात्मिक साधना और उपासना के साथ-साथ साहस, शक्ति और सर्वकल्याण की पवित्र भूमि रही है। श्री मोदी ने कामना की कि महान विरासत और प्राचीन संस्कृति की यह पवित्र भूमि सदा सभी को सुख और समृद्धि से परिपूर्ण रखे।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया:

"हमारी मातृभूमि साधना और उपासना के साथ-साथ साहस, शक्ति और सर्व-कल्याण की पुण्यभूमि रही है। महान विरासत और प्राचीन संस्कृति की यह पावन धरती हर किसी को सदैव सुख-समृद्धि से परिपूर्ण रखे, यही कामना है।

यस्यां पूर्वे पूर्वजना विचक्रिरे यस्यां देवा असुरानभ्यवर्तयन्।

गवामश्वानां वयसश्च विष्ठा भगं वर्चः पृथिवी नो दधातु।।"

जिस भूमि पर हमारे पूर्वजों ने महान और कल्याणकारी कार्य किए और जिस भूमि पर देवताओं ने अन्यायपूर्ण शक्तियों को पराजित किया, वह पशुधन और शक्ति से परिपूर्ण मातृभूमि हमें विशाल स्थान और समृद्धि प्रदान करे।