प्रधानमंत्री ने भारत में 300 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने की राजकुमारी एस्ट्रिड की पहल की भरपूर सराहना की
प्रधानमंत्री ने भारत के साथ बेल्जियम के शाही परिवार के सकारात्मक जुड़ाव को याद किया
दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, नवाचार, रक्षा, कृषि, जीवन विज्ञान, अंतरिक्ष, कौशल सहित अन्य क्षेत्रों में बेल्जियम के साथ नई परस्पर लाभकारी साझेदारी के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज बेल्जियम की राजकुमारी एस्ट्रिड से मुलाकात की। वे 1-8 मार्च 2025 तक भारत में उच्च स्तरीय बेल्जियम आर्थिक मिशन का नेतृत्व कर रही हैं।

प्रधानमंत्री ने भारत में राजकुमारी एस्ट्रिड का स्वागत किया। उन्होंने प्रमुख व्यापारिक प्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित 300 से अधिक सदस्यों के बड़े प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व की राजकुमारी की पहल की भरपूर सराहना की।

यह दूसरी बार है जब राजकुमारी एस्ट्रिड भारत में किसी आर्थिक मिशन का नेतृत्व कर रही हैं। यह दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंधों के महत्व को रेखांकित करता है, जो उत्तरोत्तर बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री और राजकुमारी एस्ट्रिड ने व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, कृषि, कौशल, शैक्षणिक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक तथा लोगों से लोगों के संबंधों सहित कई क्षेत्रों पर चर्चा की।

दोनों पक्ष उभरते और उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खोजने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए। यह आर्थिक लचीलेपन को मजबूत करेगा, नवाचार के नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देगा और दोनों देशों के लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए द्विपक्षीय सहयोग को प्रगाढ़ करेगा।

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प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य, दीर्घायु और राष्ट्र सेवा के आशीर्वाद की प्रार्थना करते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया
February 06, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए एक प्रार्थना का संदर्भ दिया, जो राष्ट्र की स्वास्थ्य, दीर्घायु और सेवा के प्रति समर्पण की सामूहिक आकांक्षा को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत की उस भावना को दर्शाता करता है, जिसमें धरती के प्रति आदर, लोक कल्याण के प्रति समर्पण और सेवा का भाव राष्ट्रीय विकास के मूल स्तंभ बने हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने प्राचीन संस्कृत श्लोक का हवाला देते हुए लिखा:

“उपस्थास्ते अनमीवा अयक्ष्मा अस्मभ्यं सन्तु पृथिवि प्रसूताः।

दीर्घं न आयुः प्रतिबुध्यमाना वयं तुभ्यं बलिहृतः स्याम॥”