संवाद का विषय - आत्मनिर्भरता और संरचनात्मक परिवर्तन: विकसित भारत का एजेंडा
वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना जन आकांक्षा बन गया है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने दीर्घकालिक विकास को बनाए रखने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में मिशन-आधारित सुधारों का आह्वान किया
अर्थशास्त्रियों ने वर्ष 2025 में अभूतपूर्व अंतर-क्षेत्रीय सुधारों पर चर्चा की और सभी क्षेत्रों में उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए अपने विचार साझा किए

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सवेरे नीति आयोग में प्रख्यात अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के एक समूह के साथ बातचीत की। इस बातचीत का विषय 'आत्मनिर्भरता और संरचनात्मक परिवर्तन: विकसित भारत का एजेंडा' था।

प्रधानमंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए वर्ष 2047 तक भारत की यात्रा के मूल स्तंभों का उल्लेख किया। श्री मोदी ने विकसित भारत को एक राष्ट्रीय आकांक्षा बताते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक एक विकसित भारत का सपना सरकारी नीति से परे जाकर एक वास्तविक जन आकांक्षा बन गया है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव शिक्षा, उपभोग और वैश्विक गतिशीलता के बदलते स्वरूपों में स्पष्ट है, जिसके लिए तेजी से महत्वाकांक्षी होते समाज की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संस्थागत क्षमता में वृद्धि और सक्रिय अवसंरचना नियोजन की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री ने वैश्विक क्षमता निर्माण और वैश्विक एकीकरण प्राप्त करने के लिए मिशन-आधारित सुधारों की आवश्यकता पर भी बल दिया। श्री मोदी ने दीर्घकालिक विकास को बनाए रखने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में मिशन-आधारित सुधारों का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की नीति निर्माण और बजट निर्धारण वर्ष 2047 के दृष्टिकोण से जुड़ा होना चाहिए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता के बारे में भी बात की कि देश वैश्विक कार्यबल और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बना रहे।

अर्थशास्त्रियों ने इस संवाद के दौरान, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण विचारों का आदान-प्रदान किया। चर्चा का मुख्य केंद्र घरेलू बचत में वृद्धि, मजबूत अवसंरचना विकास और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने के माध्यम से संरचनात्मक परिवर्तन को गति देना था। समूह ने अंतर-क्षेत्रीय उत्पादकता को बढ़ावा देने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका का पता लगाया और भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के निरंतर विस्तार पर भी चर्चा की।

प्रतिभागियों ने कहा कि वर्ष 2025 में अभूतपूर्व अंतर-क्षेत्रीय सुधारों की गति और आने वाले वर्ष में उनके और सुदृढ़ीकरण से यह सुनिश्चित होगा कि भारत अपनी नींव को मजबूत करके और नए अवसरों को खोलकर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में अपना पथ प्रशस्त करता रहना चाहिए।

चर्चा में कई प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और विशेषज्ञ शामिल थे, जिनमें श्री शंकर आचार्य, श्री अशोक के भट्टाचार्य, श्री एन आर भानुमूर्ति, सुश्री अमिता बत्रा, श्री जन्मेजय सिन्हा, श्री अमित चंद्रा, सुश्री रजनी सिन्हा, श्री दिनेश कनाबार, श्री बसंत प्रधान, श्री मदन सबनवीस, सुश्री आशिमा गोयल, श्री धर्मकीर्ति जोशी, श्री उमाकांत दाश, श्री पिनाकी चक्रवर्ती, श्री इंद्रनील सेन गुप्ता, श्री समीरन चक्रवर्ती, श्री अभिमान दास, श्री राहुल बाजोरिया, सुश्री मोनिका हालन और श्री सिद्धार्थ सान्याल शामिल थे।

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Prime Minister praises efforts by Acharya Shri Kailasasagarsuri Gyanmandir towards preserving manuscripts
March 31, 2026

Prime Minister Shri Narendra Modi, appreciated the work being done by Acharya Shri Kailasasagarsuri Gyanmandir towards preserving manuscripts. “I am proud that our nation has many such passionate teams that are at the forefront of this, ensuring that the coming generations remain connected to our rich history”, Shri Modi remarked.

The Prime Minister posted on X;

“Saw a glimpse of the work being done by Acharya Shri Kailasasagarsuri Gyanmandir towards preserving manuscripts. I am proud that our nation has many such passionate teams that are at the forefront of this, ensuring that the coming generations remain connected to our rich history.”