'मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' कार्यक्रम के तहत 4500 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखी और राष्ट्र को समर्पित किया
'विद्या समीक्षा केंद्र 2.0' और अन्य विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया
"हमारे लिए, गरीबों के घर मात्र एक आंकड़ा नहीं, बल्कि सम्मान के प्रतीक हैं"
"हमारा लक्ष्य जनजातीय क्षेत्रों के युवाओं को अवसर प्रदान करते हुए योग्यता को प्रोत्साहित करना है"
"मैं छोटा उदेपुर सहित पूरे जनजातीय क्षेत्र की माताओं-बहनों से कहने आया हूं कि आपका बेटा आपके अधिकारों को सुनिश्चित करने आया है"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के बोडेली, छोटा उदेपुर में 5200 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इसमें 'मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' कार्यक्रम के तहत 4500 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण, 'विद्या समीक्षा केंद्र 2.0' का शिलान्यास और अन्य विकास परियोजनाएं शामिल हैं।

सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र के साथ अपने लंबे समय के संबंधों को याद किया। उन्होंने आज शुरू की गई या जिनकी आधारशिला रखी गई, उन परियोजनाओं पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने एक कार्यकर्ता के रूप में अपने दिनों और क्षेत्र के गांवों में बिताए समय को याद किया। उन्होंने दर्शकों में से कई जाने-पहचाने चेहरों को देखकर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि वे क्षेत्र की परिस्थितियों और जनजातीय समुदाय के जीवन को बहुत करीब से जानते हैं। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को बताया कि जब उन्होंने आधिकारिक जिम्मेदारियां संभालीं, तो उन्होंने क्षेत्र और अन्य जनजातीय क्षेत्रों को विकसित करने का संकल्प लिया। अपने कार्यकाल के दौरान शुरू की गई विभिन्न योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव को देखकर उन्होंने संतोष व्यक्त किया। उन्होंने उन बच्चों को देखकर होने वाली खुशी के बारे में बात की, जिन्होंने पहली बार स्कूल देखा था और अब शिक्षक तथा इंजीनियर के रूप में जीवन में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

स्कूलों, सड़कों, आवास और पानी की उपलब्धता के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि ये समाज के गरीब वर्ग के लिए सम्मान के जीवन के मूल आधार हैं और इसके लिए मिशन मोड में काम करना उनकी प्राथमिकता रही हैं। उन्होंने बताया कि देश में गरीबों के लिए चार करोड़ से ज्यादा आवास निर्मित किए गए हैं। उन्होंने कहा, "हमारे लिए, गरीबों के घर सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि सम्मान का प्रतीक है।" उन्होंने कहा कि इन घरों के डिजाइन के बारे में निर्णय लेने का काम लाभार्थियों पर छोड़ दिया गया है। उन्होंने इस तथ्य का भी उल्लेख किया कि अधिकांश घर महिलाओं के नाम पर हैं। इसी तरह, हर घर को नल से जल की आपूर्ति की जा रही है, जिससे जीवन यापन में आसानी सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत नल से जल की आपूर्ति के लिए 10 करोड़ नये कनेक्शन दिये गये हैं। उन्होंने जन समुदाय से कहा कि राज्य में काम करने के दौरान मिला अनुभव, राष्ट्रीय स्तर पर भी सहायता प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा, "आप मेरे शिक्षक हैं।"

शैक्षिक क्षेत्र के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की परियोजनाएं गुजरात को शीर्ष पर लाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं और इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल की पूरी टीम को बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस और विद्या समीक्षा 2.0 का स्कूली शिक्षा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।" विद्या समीक्षा केंद्रों के बारे में विश्व बैंक के अध्यक्ष के साथ अपनी बातचीत को याद करते हुए, श्री मोदी ने बताया कि अध्यक्ष ने उनसे भारत के प्रत्येक जिले में विद्या समीक्षा केंद्र स्थापित करने का आग्रह किया और विश्व बैंक इस नेक काम का समर्थन करने के लिए तैयार है। उन्होंने रेखांकित किया कि इस तरह की पहल से प्रतिभाशाली छात्रों के साथ-साथ उन लोगों को भी बहुत फायदा होगा, जिनके पास संसाधनों की कमी है। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य जनजातीय क्षेत्रों के युवाओं को अवसर प्रदान करते हुए योग्यता को प्रोत्साहित करना है।"

प्रधानमंत्री ने पिछले दो दशकों में शिक्षा और कौशल विकास पर सरकार के विशेष ध्यान पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने पिछले दो दशकों से पहले, स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं की कमी की ओर इशारा किया, जिसके कारण बड़ी संख्या में छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते थे। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री का पद संभाला था, तो राज्य के जनजातीय क्षेत्र में एक भी विज्ञान का स्कूल नहीं था। श्री मोदी ने कहा, "सरकार ने स्थिति को पूरी तरह से बदल दिया है।" उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में दो लाख शिक्षकों की भर्ती की गई और 1.25 लाख से अधिक कक्षाएं निर्मित गईं। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में पिछले दो दशकों में विज्ञान, वाणिज्य और कला संस्थानों का एक नेटवर्क उभरा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने जनजातीय इलाकों में 25,000 कक्षाओं और 5 नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण किया है। उन्होंने गोविंद गुरु विश्वविद्यालय और बिरसा मुंडा विश्वविद्यालय का उदाहरण दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इन क्षेत्रों में कई कौशल विकास संस्थान भी खुले हैं।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा जनजातीय छात्रों के लिए नए अवसरों का सृजन करेगी और उन्हें सशक्त बनाएगी। उन्होंने 14 हजार से अधिक पीएम श्री स्कूलों और एकलव्य आवासीय विद्यालयों का भी उल्लेख किया, जो जनजातीय क्षेत्रों में जीवन को परिवर्तित कर रहे हैं। एससी/एसटी छात्रवृत्ति से विद्यार्थियों को मदद मिल रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में जनजातीय युवाओं को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। दूर-दराज के स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब जनजातीय छात्रों में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा कर रही है।

आज की दुनिया में कौशल के महत्व पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कौशल विकास केंद्रों और कौशल विकास योजना के तहत लाखों युवाओं के प्रशिक्षण का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री मोदी ने मुद्रा योजना के तहत गिरवी-मुक्त ऋण के बारे में भी बात की, जिससे करोड़ों की संख्या में पहली बार के उद्यमी तैयार हो रहे हैं। वनधन केंद्रों से राज्य के जनजातीय समुदाय के लाखों लोगों को भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने जनजातीय उत्पादों और हस्तशिल्प के लिए विशेष आउटलेट का भी जिक्र किया।

प्रधानमंत्री ने 17 सितंबर को शुरू की गई पीएम विश्वकर्मा योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नाई, दर्जी, धोबी, कुम्हार, लोहार, सुनार, सुतार, मालाकार, मोची, राजमिस्त्री जैसे लोगों को कम ब्याज पर ऋण, उपकरण और प्रशिक्षण प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि यह इन कौशलों और परंपराओं को जीवित रखने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा, ''योजना के तहत ऋण के लिए किसी गारंटी की जरूरत नहीं है, केवल एक ही गारंटी है- मोदी।''

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि दलित, पिछड़े वर्ग, जनजातीय और वंचित समुदाय के लोग सरकार द्वारा लागू की गई विभिन्न योजनाओं की मदद से आज विकास की ऊंचाइयों को छू रहे हैं। श्री मोदी ने आजादी के इतने दशकों के बाद जनजातियों के गौरव को श्रद्धांजलि देने का अवसर मिलने की बात कही और भगवान बिरसा मुंडा की जयंती का उल्लेख किया, जिसे अब जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने वर्तमान सरकार द्वारा जनजातीय समुदाय के लिए बजट में, पहले की तुलना में, पांच गुनी वृद्धि किए जाने की भी जानकारी दी।

प्रधानमंत्री ने नारीशक्ति वंदन अधिनियम के बारे में बात की, जो नए संसद भवन से पारित होने वाला पहला कानून बन गया है। उन्होंने पूछा कि जनजातियों और महिलाओं को इतने लंबे समय तक उनके अधिकारों से वंचित क्यों रखा गया। उन्होंने कहा,''मैं छोटा उदेपुर सहित पूरे जनजातीय क्षेत्र की माताओं-बहनों से कहने आया हूं कि आपका यह बेटा आपके अधिकारों को सुनिश्चित करने आया है।''

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि अब सभी महिलाओं के लिए संसद और विधानसभा में भाग लेने के रास्ते खुल गए हैं। उन्होंने संविधान में एससी और एसटी समुदायों के लिए आरक्षण की व्यवस्था का भी उल्लेख किया। नए कानून में एससी/एसटी श्रेणियों की महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान है। प्रधानमंत्री ने इस सुयोग पर प्रकाश डाला कि भारत की पहली जनजातीय महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा इस कानून पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि अमृत काल के संकल्प पूरे होंगे, क्योंकि इसकी शुरुआत अद्भुत है।

इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र पटेल, संसद सदस्य श्री सी आर पाटिल, गुजरात सरकार के मंत्री सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

पूरे गुजरात में स्कूल की अवसंरचना को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिला है, क्योंकि प्रधानमंत्री ने 'मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' कार्यक्रम के तहत 4500 करोड़ रुपये से अधिक की कई परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया है। प्रधानमंत्री द्वारा गुजरात के स्कूलों में निर्मित हजारों नई कक्षाएं, स्मार्ट कक्षाएं, कंप्यूटर लैब, एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी इंजीनियरिंग और गणित) प्रयोगशालाएं और अन्य अवसंरचनाओं का लोकार्पण किया जाएगा। उन्होंने मिशन के तहत गुजरात के स्कूलों में हजारों कक्षाओं में सुधार और उन्नयन की आधारशिला भी रखी।

प्रधानमंत्री ने 'विद्या समीक्षा केंद्र 2.0' परियोजना की आधारशिला भी रखी। यह परियोजना 'विद्या समीक्षा केंद्र' की सफलता पर तैयार की जाएगी, जिससे गुजरात में स्कूलों की निरंतर निगरानी और छात्रों के सीखने के परिणामों में सुधार सुनिश्चित हुआ है। 'विद्या समीक्षा केंद्र 2.0' के तहत गुजरात के सभी जिलों और ब्लॉकों में विद्या समीक्षा केंद्रों की स्थापना की जाएगी।

कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया, जिनमें शामिल हैं- वडोदरा जिले के तालुका सिनोर में 'वडोदरा दाभोई-सिनोर-मालसर-आसा रोड' पर नर्मदा नदी पर निर्मित नया पुल, चाब तलाव पुनर्विकास परियोजना, दाहोद में जल आपूर्ति परियोजना, वडोदरा में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए लगभग 400 नवनिर्मित आवास, पूरे गुजरात के 7500 गांवों में ग्राम वाई-फाई परियोजना और दाहोद में नवनिर्मित जवाहर नवोदय विद्यालय।

प्रधानमंत्री ने कई परियोजनाओं का शिलान्यास किया, जिनमें शामिल हैं- छोटा उदेपुर में जलापूर्ति परियोजना; गोधरा, पंचमहल में एक फ्लाईओवर ब्रिज और दाहोद में एफएम रेडियो स्टूडियो, जिसे केंद्र सरकार की ' प्रसारण अवसंरचना और नेटवर्क विकास (बीआईएनडी)' योजना के तहत निर्मित किया जाएगा।

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मैं देश की हर नारी को विश्वास दिलाता हूं, हम महिला आरक्षण के रास्ते में आने वाली हर रुकावट को खत्म करके रहेंगे: पीएम मोदी
April 18, 2026

आज मैं एक बेहद महत्वपूर्ण विषय पर विशेष कर देश की माता बहनों और बेटियों से बात करने के लिए आया हूं! आज भारत का हर नागरिक देख रहा है कि कैसे भारत की नारी शक्ति की उड़ान को रोक दिया गया। उनके सपनों को बेरहमी से कुचल दिया गया है। हमारे भरसक प्रयास के बावजूद हम सफल नहीं हो पाए, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया! और मैं इसके लिए सभी माताओं-बहनों, उनसे मैं क्षमा प्रार्थी हूं।

साथियों,

हमारे लिए देश हित सर्वोपरि है, लेकिन जब कुछ लोगों के लिए दल हित सब कुछ हो जाता है, दल हित, देश हित से बड़ा हो जाता है, तो नारी शक्ति को, देश हित को, इसका खामियाजा उठना पड़ता है। इस बार भी यही हुआ है। कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश के नारी शक्ति को उठाना पड़ा है।

साथियों,

कल देश की करोड़ों महिलाओं की नजर संसद पर थी, देश की नारी शक्ति देख रही थी, मुझे भी यह देखकर बहुत दुख हुआ, कि जब ये नारी हित का प्रस्ताव गिरा, तो कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, सपा, जैसी परिवारवादी पार्टियां, खुशी से तालियां बजा रही थीं। महिलाओं से उनके अधिकार छिनकर ये लोग मेजें थपथपा रहे थे। उन्होंने जो किया वो केवल टेबल पर थाप नहीं थी, वो नारी के स्वाभिमान पर उसके आत्मसम्मान पर चोट थी और नारी सब भूल जाती है, अपना अपमान कभी नहीं भूलती, इसलिए संसद में कांग्रेस और उसके सहयोग के उन सबके व्यवहार की कसक हर नारी के मन में हमेशा रहेगी। देश की नारी जब भी अपने क्षेत्र में इन नेताओं को देखेगी, तो वो याद करेगी कि इन्हीं लोगों ने, इन्हीं लोगों ने, संसद में महिला आरक्षण को रोकने का जश्न मनाया था, खुशियां मनाई थीं। कल संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन का जिन दलों ने विरोध किया है, उनसे मैं दो टूक कहूंगा, ये लोग नारी शक्ति को फॉर ग्रांटेड ले रहे हैं, वो ये भूल रहे हैं, कि 21वीं सदी की नारी देश की हर घटना पर नजर रख रही है, वो उनकी की मंशा भाप रही है और सच्चाई भी भली भांति जान चुकी है। इसलिए महिला आरक्षण विरोध करके जो पाप विपक्ष ने किया है, इसकी उन्हें सजा जरूर मिलेगी। इन दलों ने संविधान निर्माताओं की भावनाओं का भी अपमान किया है और जनता द्वारा इसकी सजा से भी वो बच नहीं पाएंगे।

साथियों,

सदन में नारी शक्ति वंदन संशोधन किसी से भी कुछ छिनने का नहीं था। नारी शक्ति वंदन संशोधन हर किसी को कुछ ना कुछ देने का था, देने के लिए संशोधन का था। ये 40 साल से लटके हुए नारी के हक को, 2029 के अगले लोकसभा चुनाव से उसका हक देने का संशोधन था।

नारी शक्ति वंदन संशोधन 21वीं सदी के भारत की नारी को नए अवसर देने, नई उड़ान देने, उसके सामने से बाधाएं हटाने का महायज्ञन था। देश की 50% यानी आधी आबादी को उसका अधिकार देने का साफ नियत के साथ, ईमानदारी के साथ किया गया एक पवित्र प्रयास था। नारी को भारत की विकास यात्रा में सहयात्री बनाने और सबको जोड़ने का प्रयास था। नारी शक्ति वंदन संशोधन समय की मांग है। नारी शक्ति वंदन संशोधन उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम, सभी राज्यों की हर राज्य की शक्ति में समान वृद्धि का प्रयास था। ये संसद में सभी राज्यों की आवाज को अधिक शक्ति देने का प्रयास था। राज्य छोटा हो, राज्य बड़ा हो, राज्य की आबादी कम हो या राज्य की आबादी ज्यादा हो। सब की समान अनुपात में शक्ति बढ़ाने की कोशिश थी। लेकिन इस ईमानदार प्रयास की कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने सदन में पूरे देश के सामने भ्रूण हत्या कर दी है, भ्रूण हत्या कर दी है। ये कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, टीएमके जैसे दल, इस भ्रूण हत्या के गुनहगार हैं। ये देश के संविधान के अपराधी हैं, ये देश की नारी शक्ति के अपराधी हैं।

साथियों,

कांग्रेस महिला आरक्षण के विषय से ही नफरत करती है, उसने हमेशा से ही महिला आरक्षण को रोकने के लिए षड्यंत्र किए हैं। इस दिशा में पहले जितनी बार भी प्रयास हुए, हर बार कांग्रेस ने इसमें रो़ड़े अटकाए हैं। इस बार भी कांग्रेस और उसके साथियों ने महिला आरक्षण को रोकने के लिए एक के बाद एक नए झूठ का सहारा लिया। कभी संख्या को लेकर, कभी किसी और तरीके से, कांग्रेस और उसके साथियों ने देश को गुमराह करने की कोशिश की। ऐसा करके इन दलों ने भारत के नारी शक्ति के सामने अपना असली चेहरा सामने ला दिया है। अपना मुखौटा उतर दिया है।

साथियों,

मुझे व्यक्तिगत तौर पर आशा थी कि कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी गलती सुधारेंगी। कांग्रेस अपने पापों का प्रायश्चित करेगी, लेकिन कांग्रेस ने इतिहास रचने का, महिलाओं के पक्ष में खड़े होने का, अवसर खो दिया। कांग्रेस खुद देश के अधिकांश हिस्सों में अपना वजूद खो चुकी है। कांग्रेस परजीवी की तरह क्षेत्रीय दलों के पीठ पर सवार होकर खुद को जिंदा रखे हुए है। लेकिन कांग्रेस, ये भी नहीं चाहती कि क्षेत्रीय दलों की ताकत बढ़े, इसलिए कांग्रेस ने इस संशोधन का विरोध करवारकर अनेक क्षेत्रीय दलों के भविष्य को अंधकार में धकेलना का राजनीतिक षड्यंत्र किया है।

साथियों,

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, टीएमसी और दूसरी पार्टियां, इतने वर्षों से हर बार वही बहाने, वही कुतर्क गढ़ते आए हैं, बनाते आए हैं, कोई ना कोई टेक्निकल पेंच फंसाकर, ये महिलाओं के अधिकारों पर डाका डालते रहे हैं। देश राजनीति का यह भद्दा पैटर्न बराबर समझ चुका है, और उसके पीछे की वजह भी जान चुका है।

भाइयों बहनों,

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध की एक बड़ी वजह है, इन परिवारवादी पार्टियों का डर। इन्हें डर है, अगर महिलाएं सशक्त हो गईं, तो इन परिवारवादी पार्टियों का नेतृत्व खतरे में पड़ जाएगा। ये कभी नहीं चाहेंगे कि उनके परिवार के बाहर की महिलाएं आगे बढ़ें। आज पंचायतों में, लोकल बॉडीज में, जिन हजारों लाखों महिलाओं ने अपनी क्षमता को साबित किया है, जब आगे बढ़कर लोकसभा और विधानसभाओं में आना चाहती हैं, देश की सेवा करना चाहती हैं, परिवारवादियों के भीतर उनसे असुरक्षा की भावना बैठी हुई है। परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए कहीं ज्यादा सीटें होंगी, महिलाओं का कद बढ़ेगा, इसीलिए, इन लोगों ने नारी शक्ति वंदन संशोधन का विरोध किया है। देश की नारीशक्ति कांग्रेस और उसके सहयोगियों को इस पाप के लिए कभी माफ नहीं करेगी।

मेरे प्रिय देशवासियों,

कांग्रेस और उसके साथी दल, डिलिमिटेशन पर लगातार, लगातार झूठ बोल रहे हैं। ये इस बहाने विभाजन की आग को सुलगाना चाहते हैं। क्योंकि, बांटो और राज करो, काँग्रेस ये पॉलिटिक्स अंग्रेजों से विरासत में सीखकर आई है। और, कांग्रेस आज भी उसी के सहारे चल रही है। कांग्रेस ने हमेशा देश में दरार पैदा करने वाली भावनाओं को हवा दी है। इसलिए, ये झूठ फैलाया गया कि डिलिमिटेशन यानी परिसीमन से कुछ राज्यों को नुकसान होगा! जबकि, सरकार ने पहले दिन से स्पष्ट किया है, कि न किसी

राज्य की भागीदारी का अनुपात बदलेगा, न किसी का representation कम होगा। बल्कि,सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में ही बढ़ेंगी। फिर भी काँग्रेस,DMK,TMC और समाजवादी पार्टी जैसे दल इसे मानने को तैयार नहीं हुए।

साथियों,

ये संशोधन बिल सभी दलों, और सभी राज्यों के लिए एक मौका था, एक अवसर था। ये बिल पास होता तो तमिलनाडु, बंगाल, यूपी, केरलम, हर राज्य की सीटें बढ़तीं। लेकिन अपनी स्वार्थी राजनीति की वजह से इन दलों ने, अपने राज्य के लोगों को भी धोखा दे दिया। जैसे कि, DMK के पास मौका था कि वो और ज्यादा तमिल लोगों को सांसद, विधायक बना सकती थी, तमिलनाडु की आवाज़ और मजबूत कर सकती थी! लेकिन, उसने वो मौका खो दिया। TMC के पास भी बंगाल के लोगों को आगे बढ़ाने का मौका था। लेकिन TMC ने भी ये मौका गवां दिया। समाजवादी पार्टी के पास भी मौका था कि वो महिला विरोधी छवि होने के दाग को कुछ कम कर सके। लेकिन सपा भी इसमें चूक गई। समाजवादी पार्टी लोहिया जी को तो पहले ही भूल चुकी है। सपा ने नारीशक्ति वंदन संशोधन का विरोध करके, लोहिया जी के सारे सपनों को पैरों तले रौंद दिया है। सपा महिला आरक्षण विरोधी है, ये यूपी की और देश की महिलाएं कभी नहीं भूलेंगी।

साथियों,

महिलाओं के आरक्षण का विरोध करके, कांग्रेस ने फिर एक बात सिद्ध कर दी है। कांग्रेस, एक एंटी रिफॉर्म पार्टी है। 21वीं सदी के विकसित भारत के लिए, जो भी निर्णय, जो भी रिफॉर्म्स ज़रूरी हैं, जो भी निर्णय देश ले रहा है, कांग्रेस उन सबका विरोध करती है, उसे खारिज कर देती है, उस काम के अंदर खलल डालती है। यही कांग्रेस का इतिहास है और यही कांग्रेस की नेगेटिव पॉलिटिक्स है।

साथियों,

ये वही कांग्रेस है, जिसने जनधन-आधार-मोबाइल की त्रिशक्ति का विरोध किया। कांग्रेस ने, डिजिटल पेमेंट्स का विरोध किया, कांग्रेस ने, GST का विरोध किया, कांग्रेस ने, सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण का विरोध किया, कांग्रेस ने, ट्रिपल तलाक के विरुद्ध कानून का विरोध किया। कांग्रेस ने, आर्टिकल 370 हटाने का विरोध किया। हमारा संविधान, हमारे कोर्ट, जिस यूनिफॉर्म सिविल कोड, समान नागरिक आचार संहिता को, यूसीसी को ज़रूरी बताते हैं, कांग्रेस उसका भी विरोध करती है। Reform का नाम सुनते ही कांग्रेस, विरोध की तख्ती लेकर दौड़ पड़ती है। ऐसा कोई भी काम जिससे देश मजबूत होता है, कांग्रेस उसमें बाधाएं खड़ी करने के लिए पूरी शक्ति लगा देती है। कांग्रेस, वन नेशन वन इलेक्शन का विरोध करती है, कांग्रेस, देश से घुसपैठियों को भगाने का विरोध करती है, कांग्रेस, मतदाता सूची के शुद्धिकरण, SIR का विरोध करती है, कांग्रेस, वक्फ बोर्ड में Reform का विरोध करती है।

साथियों,

कांग्रेस ने, शरणार्थियों को सुरक्षा देने वाले CAA कानून तक का विरोध किया। इस पर झूठ बोलकर-अफवाहें फैलाकर देश में बवंडर खड़ा कर दिया। कांग्रेस, माओवादी-नक्सली हिंसा को समाप्त करने के देश के प्रयासों में भी रुकावटें डालती है। कांग्रेस का एक ही पैटर्न रहा है, कोई भी Reform आए तो झूठ बोलो, भ्रम फैलाओ। इतिहास साक्षी है, कांग्रेस ने हमेशा यही नेगेटिव रास्ता चुना है।

साथियों,

जो भी कार्य देश के लिए जरूरी फैसला होता है, कांग्रेस इसको कार्पेट के नीचे डाल देती है। कांग्रेस के इसी रवैये की वजह से भारत विकास की उस ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाया, जिसका भारत हकदार है। आजादी के समय, उस दौर में हमारे साथ और भी कई देश आजाद हुए थे। ज्यादातर देश हमसे बहुत आगे निकल गए, और इसकी वजह थी, कि कांग्रेस हर Reform को रोककर बैठी रही। लटकाना-भटकाना- अटकाना यही कांग्रेस का सिद्धांत रहा है, यही कांग्रेस का वर्क कल्चर रहा है। कांग्रेस ने पड़ोसी देशों के साथ सीमा-विवादों को लटकाया, कांग्रेस ने पाकिस्तान के साथ पानी के बंटवारे से जुड़े विवादों को लटकाया, कांग्रेस ने ओबीसी आरक्षण के निर्णय को 40 साल तक लटकाए रखा। कांग्रेस ने सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन को 40 साल तक रोके रखा।

साथियों,

कांग्रेस के इस रवैये ने हमेशा देश का बहुत बड़ा नुकसान किया है। कांग्रेस के हर विरोध, हर अनिर्णय, हर छल-प्रपंच का खामियाजा देश ने भुगता है, देश की पीढ़ियों ने भुगता है। आज देश के सामने जितनी भी बड़ी चुनौतियां हैं, वो कांग्रेस के इसी रवैये से उपजी हुई हैं। इसलिए, ये लड़ाई सिर्फ एक कानून की नहीं है, ये लड़ाई, कांग्रेस की उस एंटी-रिफॉर्म मानसिकता के साथ है, जिसमें सिर्फ नेगेटिविटी है, नकारात्मकता है। और मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है, कि देश की सभी बहनें-बेटियां, कांग्रेस की इस मानसकिता को करारा जवाब देकर रहेगी।

साथियों,

कुछ लोग देश की महिलाओं के सपने टूटने को सरकार की नाकामी बता रहे हैं। लेकिन, ये विषय कामयाबी या नाकामयाबी क्रेडिट का था ही नहीं। मैंने संसद में भी कहा था, आधी आबादी को उनका हक मिल जाने दीजिये, मैं इसका क्रेडिट, विज्ञापन छपवाकर विपक्ष के सभी लोगों को दे दूँगा। लेकिन, महिलाओं को दक़ियानूसी सोच से देखने वाले फिर भी अपने झूठ पर अड़े रहे, कायम रहे!

साथियों,

नारीशक्ति को भागीदारी दिलाने की लड़ाई दशकों से चल रही है। वर्षों से मैं भी इसके लिए प्रयास करने वालों में से एक हूं। कितनी ही महिलाएं ये विषय मेरे सामने उठाती रही हैं। कितनी ही बहनों ने पत्र के द्वारा मुझे सारी बातें बताई हैं। मेरे देश की माताएं-बहनें-बेटियां, मैं जानता हूं, आज आप सब दुखी हैं। मैं भी आपके इस दुःख में दुःखी हूँ। आज भले ही, बिल पास कराने के लिए जरूरी 66 परसेंट वोट हमें नहीं मिला हो, लेकिन मैं जानता हूं, देश की 100 परसेंट नारीशक्ति का आशीर्वाद हमारे साथ है। मैं देश की हर नारी को विश्वास दिलाता हूं, हम महिला आरक्षण के रास्ते में आने वाले हर रुकावट को खत्म करके रहेंगे, हटाकर के रहेंगे। हमारा हौसला भी बुलंद है, हमारी हिम्मत भी अटूट है और हमारा इरादा भी अडिग है। महिला आरक्षण का विरोध करने वाली पार्टियां, ये देश की नारी शक्ति को संसद और विधानसभाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने से कभी भी रोक नहीं पाएंगे, सिर्फ वक्त का इंतजार है। नारी शक्ति के सशक्तीकरण का बीजेपी-एनडीए का संकल्प अक्षुण्ण है। कल हमारे पास संख्याबल नहीं था, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हम हार गए। हमारा आत्मबल अजेय है। हमारा प्रयास रुकेगा नहीं, हमारा प्रयास थमेगा नहीं। हमारे पास आगे अभी और मौके आएंगे, हमें आधी आबादी के सपनों के लिए, देश के भविष्य के लिए, इस संकल्प को पूरा करना ही है। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।