"जनजातीय समुदायों का कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और हमने जहां भी सरकार बनाई है, हमने जनजातीय कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है"
"जनजातीय बच्चों को आगे बढ़ने के नए अवसर मिले हैं"
"जनजातीय कल्याण बजट पिछले 7-8 वर्षों में तीन गुने से अधिक हो गया है"
"सबका प्रयास’ से हम एक विकसित गुजरात और एक विकसित भारत का निर्माण करेंगे।"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने व्यारा, तापी में 1970 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास पहलों की आधारशिला रखी। इन परियोजनाओं में सापुतारा से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक सड़क के सुधार के साथ-साथ छूटे हुए संपर्क सडकों का निर्माण तथा तापी और नर्मदा जिलों में 300 करोड़ रुपये से अधिक की जलापूर्ति परियोजनाएं शामिल हैं।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों के उत्साह और स्नेह को स्वीकार करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि दो दशकों से उनके स्नेह को प्राप्त करते हुए वे धन्य महसूस करते हैं। उन्होंने कहा, “आप सभी दूर-दूर से यहां आए हैं। आपकी ऊर्जा, आपके उत्साह को देखकर मन प्रसन्न हो जाता है और मेरी ऊर्जा का स्तर बढ़ जाता है।" उन्होंने कहा, "मैं कोशिश कर रहा हूं कि पूरे दिल से विकास के लिए काम करके आपके इस कर्ज को चुका सकूँ।“ आज भी तापी और नर्मदा समेत इस पूरे जनजातीय क्षेत्र के विकास से जुड़ी सैकड़ों करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने जनजातीय हितों और जनजातीय समुदायों के कल्याण को लेकर दो तरह की राजनीति देखी है। एक तरफ ऐसी पार्टियां हैं, जो जनजातीय हितों की परवाह नहीं करती हैं और लम्बे समय से जनजातीय समुदायों से झूठे वादे करतीं रहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ भाजपा जैसी पार्टी है, जिसने हमेशा जनजातीय कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा, "पहले की सरकारों ने जनजातीय परंपराओं का मजाक उड़ाया, वहीं दूसरी ओर हम जनजातीय परंपराओं का सम्मान करते हैं।" उन्होंने कहा, "जनजातीय समुदायों का कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और हमने जहां भी सरकार बनाई है, हमने जनजातीय कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।"

जनजातीय समुदायों के कल्याण के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा, "मेरे जनजातीय भाइयों और बहनों के पास बिजली, गैस कनेक्शन, शौचालय, घर तक पहुंचने वाली सड़क, निकट में एक चिकित्सा केंद्र, आस-पास के क्षेत्र में आय के साधन और बच्चों के लिए एक स्कूल के साथ अपना पक्का घर होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि गुजरात ने अभूतपूर्व विकास देखा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि आज गुजरात के हर गांव में 24 घंटे बिजली उपलब्ध है, लेकिन पहला स्थान, जहां हर गांव बिजली की सुविधा से जुड़ा, वह है, जनजातीय जिला - डांग। प्रधानमंत्री ने कहा, “करीब डेढ़ दशक पूर्व ज्योतिग्राम योजना के तहत डांग जिले के 300 से अधिक गांवों में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल किया गया था। जब आपने मुझे प्रधानमंत्री के रूप में दिल्ली भेजा, तो डांग जिले की इस प्रेरणा ने हमें देश के सभी गांवों का विद्युतीकरण करने के लिए प्रेरित किया।“

प्रधानमंत्री ने जनजातीय क्षेत्रों में कृषि को नया जीवन देने के लिए शुरू की गई वाडी योजना को रेखांकित किया। श्री मोदी ने पहले की स्थिति को याद किया, जब जनजातीय क्षेत्रों में बाजरा-मक्का उगाना और खरीदना मुश्किल था। प्रधानमंत्री ने कहा, "आज जनजातीय क्षेत्रों में आम, अमरूद और नींबू जैसे फलों के साथ काजू की खेती की जाती है।" उन्होंने इस सकारात्मक बदलाव का श्रेय वाडी योजना को दिया और बताया कि इस योजना के माध्यम से जनजातीय किसानों को बंजर भूमि पर फल, सागौन और बांस की खेती में सहायता प्रदान की गई। उन्होंने कहा, "आज यह कार्यक्रम गुजरात के कई जिलों में चल रहा है।“ प्रधानमंत्री ने याद किया कि राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम इसे देखने वलसाड जिले आए थे और उन्होंने इस परियोजना की बहुत प्रशंसा भी की थी।

श्री मोदी ने गुजरात में पानी की बदली हुई स्थिति के बारे में भी बात की। गुजरात में बिजली के ग्रिड की तर्ज पर वाटर ग्रिड बनाए गए। तापी सहित पूरे गुजरात में एक नहर और लिफ्ट सिंचाई नेटवर्क का निर्माण किया गया। डाबा कांठा नहर से पानी लिया गया, तो तापी जिले में पानी की सुविधा बढ़ गई। उन्होंने बताया कि सैकड़ों करोड़ रुपये के निवेश से उकाई योजना का निर्माण किया जा रहा है और आज जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई है, उनसे पानी की सुविधा में और सुधार होगा। प्रधानमंत्री ने कहा, “एक समय था जब गुजरात में केवल एक चौथाई घरों में ही पानी का कनेक्शन था। आज गुजरात में 100 प्रतिशत घरों में नल से पेयजल उपलब्ध है।“

वनबंधु कल्याण योजना के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि इसकी परिकल्पना और कार्यान्वयन, गुजरात में जनजातीय समाज की हर बुनियादी जरूरत और आकांक्षा को पूरा करने के लिए किया गया था। उन्होंने कहा, “आज हम देख रहे हैं कि तापी और आसपास के जनजातीय जिलों की बेटियां यहां स्कूल और कॉलेज जा रही हैं। अब जनजातीय समाज के कई बेटे-बेटियां विज्ञान की पढ़ाई कर डॉक्टर और इंजीनियर बन रहे हैं। प्रधानमंत्री ने याद किया कि जब 20-25 साल पहले इन युवाओं का जन्म हुआ था, तो उमरगाम से लेकर अंबाजी तक पूरे जनजातीय क्षेत्र में बहुत कम स्कूल थे और विज्ञान की पढ़ाई के लिए मुश्किल से ही पर्याप्त सुविधाएं मौजूद थीं। प्रधानमंत्री ने बताया कि गुजरात में कल उद्घाटन किए गए मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के तहत जनजातीय क्षेत्रों के लगभग 4,000 स्कूलों का आधुनिकीकरण किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दो दशकों में जनजातीय क्षेत्रों में 10 हजार से अधिक स्कूल निर्मित किये गए हैं, एकलव्य मॉडल स्कूल और बेटियों के लिए विशेष आवासीय विद्यालय स्थापित किए गए हैं। नर्मदा का बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय और गोधरा का श्री गोविंद गुरु विश्वविद्यालय जनजातीय युवाओं को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान कर रहे हैं। जनजातीय बच्चों के लिए छात्रवृत्ति का बजट, अब दोगुने से अधिक कर दिया गया है। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया, "एकलव्य स्कूलों की संख्या भी कई गुना बढ़ गई है।" अपने जनजातीय बच्चों के लिए हमने शिक्षा की विशेष व्यवस्था की और विदेश में पढ़ने के लिए आर्थिक मदद भी दी। प्रधानमंत्री ने खेलो इंडिया जैसे अभियानों के माध्यम से खेलों में पारदर्शिता लाने और जनजातीय बच्चों को अपनी क्षमता विकसित करने और आगे बढ़ने के लिए नए अवसर प्रदान करने से जुड़े लाभों को भी दोहराया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात सरकार ने वनबंधु कल्याण योजना पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। अब इस योजना के दूसरे चरण में गुजरात सरकार फिर से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने जा रही है। इससे जनजातीय बच्चों के लिए कई नए स्कूल, कई छात्रावास, नए मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज भी बनेंगे। उन्होंने कहा, “इस योजना के तहत सरकार जनजाति समुदायों के लिए ढाई लाख से अधिक घर बनाने की भी तैयारी कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में जनजाति क्षेत्रों में लगभग एक लाख जनजाति परिवारों को छह लाख से अधिक मकान और जमीन के पट्टे दिए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारा संकल्प जनजातीय समाज को कुपोषण की समस्याओं से पूरी तरह मुक्त करना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा 'पोषण अभियान' शुरू किया है जिसके माध्यम से गर्भावस्था के दौरान माताओं को पौष्टिक भोजन के लिए हजारों रुपये दिए जा रहे हैं।" माताओं और बच्चों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए मिशन इंद्रधनुष के तहत एक बड़ा अभियान चल रहा है। अब ढाई साल से ज्यादा का समय हो गया है, जब से पूरे देश में गरीबों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। केंद्र सरकार इस पर 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर रही है। धुएं से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए देश में हमारी मां-बहनों को करीब 10 करोड़ गैस कनेक्शन निःशुल्क दिए जा चुके हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत लाखों जनजातीय परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक के निःशुल्क इलाज की सुविधा मिली है।

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में जनजातीय समुदाय की विस्मृत विरासत को याद करने के सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि जनजातीय समुदाय की विरासत बहुत समृद्ध है। उन्होंने कहा, "अब देश पहली बार 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती, जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मना रहा है।" उन्होंने कहा कि जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को देश भर के संग्रहालयों के माध्यम से संरक्षित और प्रदर्शित किया जा रहा है। उस समय को याद करते हुए जब जनजातीय मंत्रालय मौजूद नहीं था, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अटल जी की सरकार थी, जिसने पहली बार जनजातीय मंत्रालय का गठन किया था। “ग्राम सड़क योजना अटल जी की सरकार के दौरान शुरू की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप जनजातीय क्षेत्रों को कई लाभ हुए। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार ने जनजातीय समुदायों के साथ हो रहे अन्याय को खत्म करने का काम किया है।" प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 8 वर्षों में जनजातीय कल्याण से संबंधित बजट में भी तीन गुनी से अधिक की वृद्धि की गई है, जिससे हमारे जनजातीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, "विकास की इस साझेदारी को लगातार मजबूत किया जाना चाहिए।" उन्होंने सभी से जनजातीय युवाओं की क्षमता को बढ़ाने के लिए डबल इंजन सरकार के प्रयासों में शामिल होने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने निष्कर्ष के तौर पर कहा, "सबका प्रयास’ के साथ, हम एक विकसित गुजरात और एक विकसित भारत का निर्माण करेंगे।"

इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल, मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री मंगूभाई पटेल, संसद सदस्य श्री सी आर पाटिल, श्री केसी पटेल, श्री मनसुख वसावा और श्री प्रभुभाई वसावा तथा गुजरात सरकार के मंत्री श्री रुशिकेश पटेल, श्री नरेशभाई पटेल, श्री मुकेशभाई पटेल, श्री जगदीश पांचाल, श्री जीतूभाई चौधरी आदि उपस्थित थे।

 

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February 27, 2026

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।