आईआईटी धारवाड़ राष्ट्र को समर्पित किया
दुनिया में सबसे लंबे रेलवे प्लेटफॉर्म श्री सिद्धारूढ़ा स्वामीजी हुबली स्टेशन का लोकार्पण किया
पुनर्विकसित होसपेटे स्टेशन का लोकार्पण किया गया, जो हम्पी स्मारकों के समान डिजाइन किया गया है
धारवाड़ बहु-ग्राम जलापूर्ति योजना की आधारशिला रखी गई
हुबली-धारवाड़ स्मार्ट सिटी की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया
"डबल इंजन सरकार प्रदेश के हर जिले, गांव, कस्बे के पूर्ण विकास के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयासरत है"
“धारवाड़ विशेष है। यह भारत की सांस्कृतिक जीवंतता का प्रतिबिंब है”
“धारवाड़ में आईआईटी का नया परिसर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुविधा प्रदान करेगा। यह बेहतर कल के लिए युवा प्रतिभाओं को तैयार करेगा”
“शिलान्यास से लेकर लोकार्पण तक, डबल इंजन की सरकार निरंतर तेजी से काम करती है”
“अच्छी शिक्षा हर जगह और सभी तक पहुंचनी चाहिए। बड़ी संख्या में गुणवत्तापूर्ण संस्थान अधिक लोगों तक अच्छी शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करेंगे”
"प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा और बेहतर शासन हुबली-धारवाड़ क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा"
"आज हम युवाओं को अगले 25 वर्षों में उनके संकल्पों को साकार करने के लिए सभी संसाधन दे रहे हैं"
"आज भारत सबसे शक्तिशाली डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में से एक है"
“भारत के लोकतंत्र की जड़ें हमारे सदियों पुराने इतिहास से जुड़ी हैं। दुनिया की कोई ताकत भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान नहीं पहुंचा सकती”
"कर्नाटक हाई-टेक इंडिया का इंजन है"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज हुबली-धारवाड़, कर्नाटक में प्रमुख विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में आईआईटी धारवाड़ को राष्ट्र को समर्पित किया जाना शामिल है, जिसका शिलान्यास प्रधानमंत्री ने फरवरी, 2019 में किया था। इसके अलावा 1507 मीटर लंबे सिद्धारूढ़ा स्वामीजी हुबली स्टेशन को भी समर्पित किया गया, जो दुनिया का सबसे लंबा रेलवे स्टेशन है और इसे हाल में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने भी मान्यता दी थी। साथ ही, क्षेत्र में संपर्क (कनेक्टिविटी) को बढ़ावा देने के लिए होसपेटे- हुबली- तीनाईघाट खंड के विद्युतीकरण और होसपेटे स्टेशन के उन्नयन कार्य का भी लोकार्पण किया गया। प्रधानमंत्री ने हुबली-धारवाड़ स्मार्ट सिटी की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। उन्होंने जयदेव हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, धारवाड़ बहु-ग्राम जलापूर्ति योजना और तुपरिहल्ला फ्लड डैमेज कंट्रोल प्रोजेक्ट की आधारशिला भी रखी।

 

उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस साल की शुरुआत में हुबली के दौरे के अवसर को याद किया और उनके स्वागत में आए लोगों से मिले आशीर्वाद के बारे में भी बात की। बीते कुछ साल के दौरान बेंगलुरु से बेलगावी, कलबुर्गी से शिवमोगा और मैसूरु से तुमकुरु तक अपनी कर्नाटक की यात्रा को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह कन्नड़िगा लोगों द्वारा दिखाए गए अत्यधिक प्यार और स्नेह के ऋणी हैं और उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सरकार लोगों के जीवन को आसान बनाकर उनकी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम करेगी, युवाओं के लिए रोजगार के कई अवसर पैदा करेगी, क्षेत्र की महिलाओं को सशक्त बनाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा, “कर्नाटक की डबल इंजन सरकार पूरी ईमानदारी के साथ राज्य के हर जिले, गांव और कस्बे के संपूर्ण विकास के लिए प्रयासरत है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि सदियों से धारवाड़, मलेनाडु और बयालु सीम क्षेत्रों के बीच एक प्रवेश द्वार रहा है जिसने सभी का खुले दिल से स्वागत किया है और सभी से सीखकर खुद को समृद्ध किया है। प्रधानमंत्री ने कहा, “इसीलिए, धारवाड़ सिर्फ प्रवेश द्वार नहीं रहा, बल्कि कर्नाटक और भारत की ऊर्जा के सम्मिलित रूप में सामने आया है।” धारवाड़ को कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जाना जाता है जो अपने साहित्य और संगीत के लिए चर्चित है। इस अवसर पर, प्रधानमंत्री ने धारवाड़ के सांस्कृतिक दिग्गजों को श्रद्धांजलि दी।

इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री ने अपनी मांड्या यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नया बेंगलुरु मैसूर एक्सप्रेसवे कर्नाटक के सॉफ्टवेयर हब की पहचान को और आगे ले जाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इसी तरह, प्रधानमंत्री ने कहा किबेलगावी में कई विकास परियोजनाओं को या तो समर्पित किया गया या उनकी आधारशिला रखी गई। उन्होंने शिवमोगा कुवेम्पु हवाई अड्डे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज की परियोजनाओं के साथ-साथ ये परियोजनाएं कर्नाटक के विकास की एक नई कहानी लिख रही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, “धारवाड़ में आईआईटी के नये परिसर से जहां गुणवत्तापर्ण शिक्षा सुगम होगी, वहीं बेहतर भविष्य के लिए युवा प्रतिभाएं तैयार होंगी।” उन्होंने कहा कि नया आईआईटी परिसर कर्नाटक की विकास यात्रा के इतिहास में एक नया अध्याय लिख रहा है। उन्होंने धारवाड़ आईआईटी परिसर की उच्च तकनीकी सुविधाओं का उल्लेख किया और कहा कि यह प्रेरणा के स्रोत के रूप में कार्य करेगा जो संस्थान को दुनिया के अन्य प्रमुख संस्थानों के समान ऊंचाइयों पर ले जाएगा। आईआईटी-धारवाड़ परिसर को वर्तमान सरकार की 'संकल्प से सिद्धि' (अर्थात संकल्पों द्वारा उपलब्धि) की भावना का एक प्रमुख उदाहरण बताते हुए प्रधानमंत्री ने फरवरी 2019 में इसकी आधारशिला रखने के अवसर को याद किया और इसके महज 4 साल की अवधि के भीतर पूरा होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। हालांकि, इस बीच कोरोनोवायरस महामारी के कारण रास्ते में कई बाधाएं भी आईं। प्रधानमंत्री ने कहा, “शिलान्यास से लेकर लोकार्पण तक, डबल इंजन की सरकार लगातार काम करती है। हम उन्हीं परियोजनाओं के उद्घाटन के संकल्प में विश्वास रखते हैं, जिनका शिलान्यास हमने किया हो।”

प्रधानमंत्री ने बीते वर्षों की उस सोच पर दुःख व्यक्त किया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संस्थानों के विस्तार से उनका ब्रांड कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि इस सोच से युवा पीढ़ी को भारी नुकसान हुआ है और नया भारत इस तरह की सोच को पीछे छोड़ रहा है। उन्होंने कहा, “अच्छी शिक्षा हर जगह और सभी तक पहुंचनी चाहिए। बड़ी संख्या में गुणवत्तापूर्ण संस्थान अधिक लोगों तक अच्छी शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करेंगे।” उन्होंने कहा, यही कारण है कि पिछले 9 वर्षों के दौरान भारत में गुणवत्तापूर्ण संस्थानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एम्स की संख्या तिगुनी हो गई है, आजादी के बाद के सात दशकों में 380 मेडिकल कॉलेजों की तुलना में सिर्फ पिछले 9 वर्षों में 250 मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं। इन 9 साल में कई नए आईआईएम और आईआईटी सामने आए हैं।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का भारत अपने शहरों को आधुनिक बनाकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हुबली-धारवाड़ को स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल किया गया और आज कई अच्छी परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया है। उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा और बेहतर शासन हुबली-धारवाड़ क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।”

प्रधानमंत्री ने श्री जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवास्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च पर कर्नाटक के लोगों के भरोसे का उल्लेख किया, जो बेंगलुरु, मैसूरु और कलबुर्गी में सेवाएं दे रहा है। अब इसकी तीसरी शाखा का आज हुबली में शिलान्यास किया गया।

धारवाड़ और इसके आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के मिलकर काम करने का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की एक योजना का शिलान्यास किया गया है, जहां रेणुका सागर जलाशय और मलप्रभा नदी का पानी नल के माध्यम से 1.25 लाख से अधिक घरों में पहुंचाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि धारवाड़ में नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार होने से पूरे जिले के लोगों को इसका लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री ने तुपरिहल्ला बाढ़ क्षति नियंत्रण परियोजना का भी जिक्र किया, जिसका शिलान्यास भी आज किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में बाढ़ से होने वाले नुकसान में कमी आएगी।

प्रधानमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि कर्नाटक ने कनेक्टिविटी के मामले में एक और मील का पत्थर हासिल कर लिया है क्योंकि सिद्धारूढ़ स्वामीजी स्टेशन अब दुनिया का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ एक प्लेटफॉर्म का रिकॉर्ड या विस्तार नहीं है बल्कि यह उस सोच को आगे बढ़ा रहा है जो बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता देती है। उन्होंने यह भी कहा कि होसपेटे-हुबली-तीनाईघाट खंड का विद्युतीकरण और होसपेटे स्टेशन का उन्नयन इस विजन पर जोर देता है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस मार्ग से बड़े पैमाने पर उद्योगों के लिए कोयले की ढुलाई होती है और इस लाइन के विद्युतीकरण के बाद डीजल पर निर्भरता कम होगी, जिससे इस प्रक्रिया में पर्यावरण का संरक्षण होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों से क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी और साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, “बेहतर और उन्नत बुनियादी ढांचा न सिर्फ देखने में अच्छा है, लेकिन लोगों के जीवन को भी आसान बनाता है।”बेहतर सड़कों और अस्पतालों की कमी के कारण सभी समुदायों और उम्र के लोगों के सामने आने वाली मुश्किलों पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का प्रत्येक नागरिक देश भर में विकसित हो रहे उन्नत बुनियादी ढांचे का लाभ उठा रहा है। उन्होंने छात्रों, किसानों और मध्यम वर्ग का उदाहरण दिया जो अपने गंतव्य-स्थल तक पहुंचने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी का उपयोग कर रहे हैं। पिछले 9 वर्षों में बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में किए गए कार्यों पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि पीएम सड़क योजना के माध्यम से गांवों में सड़कों का नेटवर्क दोगुना से ज्यादा हो गया है, और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में 55 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 9 सालों में देश में हवाईअड्डों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पहले इंटरनेट की दुनिया में इतना आगे नहीं था। आज भारत सबसे शक्तिशाली डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि सरकार ने सस्ता इंटरनेट उपलब्ध कराया और इसे गांवों तक पहुंचाया। उन्होंने बताया, “औसतन, बीते 9 साल के दौरान प्रति दिन 2.5 लाख ब्रॉडबैंड कनेक्शन दिए गए हैं।” उन्होंने कहा, “बुनियादी ढांचे के विकास में यह तेजी इसलिए आ रही है, क्योंकि आज देश की जरूरत के हिसाब से बुनियादी ढांचे का निर्माण हो रहा है। पहले राजनीतिक नफा-नुकसान तौलकर रेल और सड़क परियोजनाओं की घोषणा की जाती थी। हम पूरे देश के लिए पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान लेकर आए हैं, ताकि देश में जहां भी जरूरत हो वहां तेज गति से बुनियादी ढांचा तैयार किया जा सके।”

सामाजिक बुनियादी ढांचे पर अप्रत्याशित जोर दिए जाने का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने आवास, शौचालय, रसोई गैस, अस्पताल और पीने के पानी आदि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कमियों के दिनों को याद किया। उन्होंने विस्तार से बताया कि इन क्षेत्रों में कैसे सुधार किया गया है और ये सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा, “आज हम, युवाओं को अगले 25 साल में अपने संकल्पों को साकार करने के लिए सभी संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं।”

भगवान बसवेश्वर के योगदान पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने अनुभव मंडपम की स्थापना को कई योगदानों में सबसे महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इस लोकतांत्रिक व्यवस्था का अध्ययन पूरी दुनिया में किया जाता है। उन्होंने लंदन में भगवान बसवेश्वर की प्रतिमा के उद्घाटन के अवसर का स्मरण किया। हालांकि, प्रधानमंत्री ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लंदन में ही भारत के लोकतंत्र पर सवाल उठाया गया। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत के लोकतंत्र की जड़ें हमारे सदियों पुराने इतिहास से जुड़ी हैं। दुनिया की कोई भी ताकत भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान नहीं पहुंचा सकती है।” प्रधानमंत्री ने कहा, “इसके बावजूद कुछ लोग लगातार भारत के लोकतंत्र को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। ऐसे लोग भगवान बसवेश्वर और कर्नाटक एवं देश के लोगों का अपमान कर रहे हैं।”उन्होंने कर्नाटक के लोगों को ऐसे लोगों से सतर्क रहने की चेतावनी दी।

अपने संबोधन को समाप्त करते हुए, प्रधानमंत्री ने कर्नाटक की पहचान भारत के तकनीक के भविष्य को और आगे ले जाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, “कर्नाटक हाईटेक भारत का इंजन है।” उन्होंने राज्य में इस हाईटेक इंजन को ताकत देने के लिए डबल इंजन की सरकार की जरूरत पर जोर दिया। इस अवसर पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री श्री बसवराज बोम्मई, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी और कर्नाटक सरकार के मंत्री के साथ-साथ अन्य लोग उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने आईआईटी-धारवाड़ को राष्ट्र को समर्पित किया। फरवरी 2019 में प्रधानमंत्री द्वारा संस्थान की आधारशिला रखी गई थी। 850 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया। यह संस्थान वर्तमान में 4 वर्षीय बीटेक कार्यक्रम, 5 वर्षीय बीएस-एमएस कार्यक्रम, एमटेक, और पीएचडी कार्यक्रमों की पेशकश करता है।

प्रधानमंत्री ने श्री सिद्धारूढ़ स्वामीजी हुबली स्टेशन पर दुनिया के सबसे लंबे रेलवे प्लेटफॉर्म को भी राष्ट्र को समर्पित किया। इस रिकॉर्ड को हाल ही में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने मान्यता दी है। करीब 1507 मीटर लंबे इस प्लेटफॉर्म को करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है।

प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए होसपेटे- हुबली- तीनाईघाट खंड के विद्युतीकरण और होसपेटे स्टेशन के उन्नयन को समर्पित किया। 530 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित, विद्युतीकरण परियोजना विद्युत खंड पर निर्बाध ट्रेन संचालन सुनिश्चित करती है। पुनर्विकसित होसपेटे स्टेशन यात्रियों को सुविधाजनक और आधुनिक सुविधाएं प्रदान करेगा। इसे हम्पी स्मारकों के समान डिजाइन किया गया है।

प्रधानमंत्री ने हुबली-धारवाड़ स्मार्ट सिटी की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत लगभग 520 करोड़ रुपये है। इन प्रयासों से स्वच्छ, सुरक्षित और कार्यात्मक सार्वजनिक स्थल तैयार होंगे और शहरों को भविष्य के शहरी केंद्रों में बदलकर जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकेगा।

प्रधानमंत्री ने जयदेव हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर का शिलान्यास भी किया। अस्पताल को लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा और क्षेत्र के लोगों को हृदय संबंधी देखभाल प्रदान करेगा। इस क्षेत्र में जल आपूर्ति को और बढ़ाने के लिए, प्रधानमंत्री ने धारवाड़ मल्टी विलेज वाटर सप्लाई स्कीम की आधारशिला रखी जिसे 1040 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया जाएगा। वह तुपरिहल्ला फ्लड डैमेज कंट्रोल प्रोजेक्ट की आधारशिला भी रखेंगे, जिसे लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करना है और इसमें दीवारों और तटबंधों को बनाए रखने का निर्माण शामिल है।

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August 01, 2026

एल्लरिगू नन्ना नमस्कारगलु।

रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशनबेलूर मठ के अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी गौतमानंद जी महाराज, श्री रामकृष्ण आश्रम, मैसुरू के अध्यक्ष पूज्य स्वामी मुक्तिदानंद जी, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के ट्रस्टी पूज्य स्वामी यादवेंद्रानंद जी, राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत जी, मुख्यमंत्री श्री डी.के. शिवकुमार जी, सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार जी, विधायक विजयेंद्र येदियुरप्पा जी, के. हरीश गौड़ा जी, अन्य महानुभाव, पूज्य संतगण और भाईयों और बहनों।

सर्वप्रथम मैं मैसूरू की अधिष्ठात्री देवी मां चामुंडेश्वरी को प्रणाम करता हूं। अभी दो दिन पहले ही हम सभी ने गुरू पूर्णिमा भी मनाई है। आप सब जानते हैं, मेरी यात्रा जहां से शुरू हुई और आज मैं जहां हूं, इसमें राम कृष्ण मिशन का बहुत अहम योगदान है। मैं तीन महीने पहले हावड़ा में बेलूर मठ गया था। सभी पूज्य संतों से सतसंग करने का अवसर मिला था। मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे फिर मैसूरू में श्री रामकृष्ण आश्रम से जुड़े संतों से, मेरे गुरू बंधुओं से मिलने का, उनसे आशीर्वाद लेने का अवसर मिला है। आप सभी की उपस्थिति की वजह से, आज मैसूरू की इस पवित्र भूमि पर मुझे एक अलग ही ऊर्जा अनुभव हो रही है। मैं आप सभी संतों के चरणों में सादर प्रणाम करता हूं।

साथियों,

मैसूरू भारत की अनादि सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रहा है। यहां के मंदिर, यहां की परंपराएं और उत्सव, मैसूरू का दशहरा, यहां के भव्य महल, इसका संगीत और साहित्य, भारत की विरासत इस शहर के कण-कण में रची बसी है। और यह देखकर बहुत संतोष मिलता है। इस शहर ने इस विरासत को उसी कुशलता से सहेजा भी है, संवारा भी है। श्री रामकृष्ण आश्रम और स्वामी विवेकानंद जी की स्मृतियां भी मैसुरू की विरासत का ही एक समृद्ध हिस्सा हैं। कुछ देर पहले मैं उस ऐतिहासिक भवन में भी गया था, जहां स्वामी विवेकानंद जी ने अपने प्रवास के दौरान कुछ समय बिताया था। कर्नाटका के कितने ही विद्वान और मनीषी इस स्थान से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रकवि कुवेम्पु जैसे महापुरुष जब मैसुरू में थे, उनका भी श्रीरामकृष्ण आश्रम से गहरा जुड़ाव था। आज स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर, यानी विवेका स्मारका के उद्घाटन के जरिए, हम इस मिशन को नया विस्तार दे रहे हैं। इसके लिए मैं श्रीरामकृष्ण आश्रम और इससे जुड़े सभी विद्वानों को हार्दिक बधाई देता हूं।

साथियों,

व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता। इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएँ देनी होती हैं। साधना करनी होती है, तप करना होता है, खुद को तपाना पड़ता है, खपाना पड़ता है। ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है। लेकिन, तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता। जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है।

इसलिए भाइयों बहनों,

स्वामी विवेकानंद के जीवन में मैसुरू का इतना अहम योगदान था। करीब 130 वर्ष पहले, स्वामी जी, एक युवा संन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए मैसुरू आए थे। तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी। लेकिन, विचार उतने ही ऊंचे थे। उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना, जो उनके साथ जुड़े, उनमें से एक प्रमुख नाम मैसुरू के तत्कालीन महाराजा का भी था। जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका में थे, तो उन्होंने वहाँ से मैसुरू के तत्कालीन महाराजा को एक पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था। उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था जो कहते हैं- “परं परोपकारार्थं यो जीवति स जीवति”। अर्थात्, वास्तव में वही जीता है जो दूसरों के लिए जीता है। इसी मंत्र पर चलते हुए, मैसुरू के इस श्री रामकृष्ण आश्रम ने पिछले वर्ष अपने सौ साल पूरे किए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएँ हों, या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की विरासत को जीवंत रखा है। मुझे विश्वास है विवेका स्मारका साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक उत्थान का तीर्थ बनेगा। स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा थी- ‘शिव ज्ञाने जीव सेवा’। यानी जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। हमें इस विवेका स्मारक में इसलिए, ऐसे युवाओं को गढ़ना है, जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित, गरीब-वंचित के दुःख, अपने सुख-दुःख से ऊपर हों। जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो, मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी युवाओँ की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने स्वयं ये देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था। भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरों में जक़ड़े हुए थे। उस दौर से लेकर अब तक, भारत के युवा ने एक लंबी यात्रा तय की है। भारत का जो युवा कभी जंजीरों में था, आज वो युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है।

· आज भारत की अर्थव्यवस्था, सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँके सामर्थ्य से।

· आज भारत में दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँ के सामर्थ्य से।

· आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत से बने Digital Solutions, दुनिया के अनेक देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की नई यात्रा पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत AI, Deep Tech, Space Technology और Innovation के नए अध्याय लिख रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

अभी कुछ दिन पहले ही हमने देखा है, भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में कमाल कर दिया है। पहली बार युवाओं का बनाया हुआ एक प्राइवेट कंपनी का रॉकेट, अंतरिक्ष तक पहुंचा है। आज कोई भी सेक्टर हो, भारत युवा अपना दम-खम दिखा रहा है। हम सभी अपने आसपास देख रहे हैं, आज छोटे से छोटे व्यवसाय में लगा युवा, भारत की डिजिटल इकॉनमी को आगे बढ़ा रहा है। वो मुद्रा लोन के जरिए नई शुरुआत कर रहा है। वो देश की स्टार्टअप revolutionको लीड कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत का अभियान हो, मेक इन इंडिया का अभियान हो, इसकी सफलता के पीछे भारत के युवाओं की ही ताकत है।

साथियों,

किसी भी देश में, युवाओं का सामर्थ्य तभी उस राष्ट्र की शक्ति बनता है, जब उसे सही अवसर मिले, जब उसे सही दिशा मिले, और जब उसे अपनी ही धरती पर बड़े सपने देखने, उन्हें पूरा करने का भरोसा मिले। और इसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारे शिक्षा संस्थानों की होती है। मुझे खुशी है कि आज भारत में शिक्षण संस्थाओँ की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 12 वर्षों में, 650 से ज्यादा नई यूनिवर्सिटीज बनी हैं। पिछले 12 वर्षों में करीब 14 हजार नए कॉलेज बने हैं। 4 हजार से ज्यादा नई ITI बनाई गई हैं। 9 नए आई.आई.एम, 7 नई आई.आई.टी, और13 नए एम्स भी स्थापित किए गए हैं। आज देश में MBBS की सीटें करीब 1 लाख 40 हजार हो चुकी हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 823 हो गई है।

साथियों,

एक ओर हम एजुकेशन इनफ्रास्ट्रक्चर को modernize कर रहे हैं। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक जरूरतों के हिसाब से ढाला जा रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, भारत के युवाओँ को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार करने का माध्यम बन रही है।

साथियों,

स्कूली शिक्षा में भी बड़े स्तर पर काम हुआ है। देशभर में 14 हजार से ज्यादा पीएम श्री स्कूल विकसित किए गए हैं। शिक्षा केवल किताबी न रहे, बच्चों में इनोवेशन और साइंटिफिक टेंपरामेंट विकसित हो, इसके लिए,10 हजार से ज्यादा अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित हुई हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी, राष्ट्र उत्थान के लिए शिक्षा के साथ-साथ समानता को भी उतना ही अहम मानते थे। शिक्षा में भेदभाव न हो, अवसरों में भेदभाव न हो, आज ये देश का विज़न बन गया है। आज बेटियाँ भी सैनिक स्कूलों में एड्मिशन ले रहीं हैं। एनडीए में बेटियां राष्ट्र के लिए योगदान दे रही हैं। आज मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी पढ़ाई मातृभाषा में करने की सुविधा हो गई है। इससे, भाषा के आधार पर अवसरों में होने वाले भेदभाव पर लगाम लग रही है।

साथियों,

युवा शक्ति का स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना उतना ही जरूरी है। जो देश खेलों को महत्व देते हैं, वहां के युवाओं में इन तीनों गुणों का तेजी से विकास होता है। इसलिए आज खेलों को राष्ट्र निर्माण की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, पैरा गेम्स और विंटर गेम्स जैसे आयोजनों ने देशभर के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। आज देशभर में आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, खेलो इंडिया सेंटर के माध्यम से सुविधाएं बढ़ रही हैं, गांवों से लेकर छोटे शहरों तक नई प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है।

और साथियों,

आज इस अभियान के परिणाम भी साफ - साफ दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन बेहतर होता जा रहा है। हमारे खिलाड़ी नए-नए कीर्तिमान बना रहे हैं, हमारी बेटियां देश का गौरव बढ़ा रही हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी की तरह, हमें विवेका स्मारका, बड़े उद्देश्य के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। ऐसे स्थान पर मैं हमारे युवाओं से कुछ आग्रह करना चाहता हूं।

साथियों,

मैसुरू को अक्सर भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में स्थान मिला है। मैं इसके लिए यहां के लोगों को हृदय से बधाई देता हूं। क्या इस अवसर पर हम ये संकल्प ले सकते हैं, कि भविष्य में स्वच्छता के संकल्प को निरंतर मजबूत करते रहेंगे। हमें यहाँ की प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करना चाहिए। हमें पर्यावरण से जुड़े संकल्प लेने चाहिए। हमें पानी की हर बूंद बचाने के लिए मिशन मोड में काम करना होगा।

साथियों,

आज ही यहां ‘वाल्मीकि रामायण’ के कन्नड़ा अनुवाद का विमोचन भी हुआ है। मैं कन्नड़ा भाषा से जुड़ी एक अपील भी करना चाहता हूं। कर्नाटका महान लेखकों और कवियों की धरती है। कन्नड़ा भाषी लोग हमेशा से पढ़ने की संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। स्मार्टफोन के इस युग में इस स्वभाव को और बढ़ावा मिलना चाहिए। क्या हम युवा पीढ़ी को कन्नड़ा साहित्य से गहराई से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

साथियों,

मैसुरू अपने सिल्क, चंदन और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। जब भी हम किसी को उपहार दें, तो क्या हम ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि वो किसी भारतीय के हाथों और पसीने से बनी चीज हो? इससे हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही, एक और परिवार को आर्थिक सहायता भी मिलेगी।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने जिस तरह के भारत का सपना देखा था, उसे पूरा करने का दायित्व आज की पीढ़ी पर है। मुझे विश्वास है, विवेका स्मारका इसके लिए एक ऊर्जा स्रोत का काम करेगा। मैं एक बार फिर, यहां एकत्र पूज्य संतजनों गुरू बंधुओं और मैसुरू के लोगों को नमन करते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।