पांच राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकर्पण किया
103 किलोमीटर लंबी रायपुर-खरियार रोड रेल लाइन के दोहरीकरण और केवटी-अंतागढ़ को जोड़ने वाली 17 किलोमीटर लंबी नई रेलवे लाइन को समर्पित किया
कोरबा में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन बॉटलिंग प्लांट को समर्पित किया
वीडियो लिंक के माध्यम से अंतागढ़-रायपुर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई
आयुष्मान भारत के तहत लाभार्थियों को 75 लाख कार्डों का वितरण प्रारंभ किया
"आज की परियोजनाएं छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में विकास और सुविधा की एक नई यात्रा का प्रतीक हैं"
"सरकार उन विशिष्ट क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दे रही है जो विकास के मामले में पीछे रह गए हैं"
"आधुनिक बुनियादी ढांचे का संबंध सामाजिक न्याय से भी है"
"आज छत्तीसगढ़ दो आर्थिक गलियारों से जुड़ रहा है"
"सरकार प्राकृतिक संपदा के क्षेत्रों में नए अवसरों का सृजन करने और अधिक उद्योग स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है"
"मनरेगा के तहत पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने छत्तीसगढ़ को 25000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की है"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज छत्तीसगढ़ के रायपुर में लगभग 7500 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया और इन्हें राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने करीब 6,400 करोड़ रुपये की 5 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री ने 103 किलोमीटर लंबी रायपुर-खरियार रोड रेल लाइन के दोहरीकरण को भी राष्ट्र को समर्पित किया, इसका निर्माण 750 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। केवटी-अंतागढ़ को जोड़ने वाली 17 किलोमीटर लंबी नई रेलवे लाइन 290 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने कोरबा में 130 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित 60 हजार मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता वाले इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के बॉटलिंग प्लांट को राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने वीडियो लिंक के माध्यम से अंतागढ़-रायपुर ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाई। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री ने आयुष्मान भारत के तहत लाभार्थियों को 75 लाख कार्डों के वितरण का शुभारंभ किया।

 

इस अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का अवसर छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य को बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में 7000 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाएं मिल रही हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि आज की परियोजनाएं लोगों के जीवन को आसान बनाएंगी और राज्य में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मजबूत करेंगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, साथ ही छत्तीसगढ़ के धान किसानों, खनिज उद्योग और पर्यटन उद्योग को भी लाभ होगा। प्रधानमंत्री ने परियोजनाओं के लिए राज्य के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि आज की परियोजनाएं छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में विकास और सुविधा की एक नई यात्रा को चिह्नित करेंगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी क्षेत्र के विकास में देरी का सीधा संबंध बुनियादी ढांचे की कमी से है, इसलिए सरकार उन विशिष्ट क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दे रही है जो विकास के मामले में पीछे रह गए हैं। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे से अभिप्राय जीवन जीने में आसानी और व्यापार करने में आसानी से है। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे का अर्थ रोजगार के अवसरों और त्वरित गति से होने वाला विकास भी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास छत्तीसगढ़ में भी देखा जा सकता है, जहां पिछले 9 वर्षों में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत राज्य के हजारों जनजातीय गांवों तक सड़क संपर्क का विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार ने लगभग 3,500 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग की परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें से लगभग 3000 किलोमीटर का काम पूरा भी हो चुका है। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि आज रायपुर-कोडेबोड़ और बिलासपुर-पथरापाली राजमार्ग का उद्घाटन किया गया है। उन्होंने कहा कि चाहे रेल हो, सड़क हो, दूरसंचार हो, सरकार ने पिछले 9 वर्षों में छत्तीसगढ़ में सभी प्रकार की कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए अभूतपूर्व कार्य किया है।

प्रधानमंत्री ने उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक बुनियादी ढांचा सामाजिक न्याय से भी संबंधित है और आज की परियोजनाएं जिनमें सड़कें और रेलवे लाइनें शामिल हैं यह गरीबों, दलितों, पिछड़ों और जनजातियों की बस्तियों को जोड़ रही हैं और इससे मरीजों और महिलाओं के लिए अस्पतालों तक कनेक्टिविटी में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि नौ साल पहले, छत्तीसगढ़ के 20 प्रतिशत से अधिक गांवों में किसी भी प्रकार की मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं थी, जबकि आज यह संख्या घटकर लगभग 6 प्रतिशत रह गई है और क्षेत्र के किसान और मजदूर इसके सबसे बड़े लाभार्थी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इनमें से अधिकतर जनजातीय गांव जहां कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है, वे गांव कभी नक्सली हिंसा से प्रभावित थे। प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार बेहतर 4जी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए 700 से अधिक मोबाइल टावर लगा रही है। उन्होंने कहा कि लगभग 300 टावर पहले ही काम करना शुरू कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जो जनजातीय गांव कभी मोबाइल कनेक्टविटी की सुविधाओं से वंचित थे, वे अब रिंगटोन की गूंज सुन सकते हैं। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि मोबाइल कनेक्टिविटी के आगमन से गांव के लोगों को बहुत से कार्यों में सहायता मिली है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सामाजिक न्याय है और यह सबका साथ, सबका विकास है ।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ दो आर्थिक गलियारों से जुड़ रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि रायपुर-धनबाद आर्थिक गलियारा और रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक गलियारा पूरे क्षेत्र की किस्मत बदलने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक गलियारे उन आकांक्षी जिलों से होकर गुजर रहे हैं जिन्हें कभी पिछड़ा कहा जाता था और जहां कभी हिंसा और अराजकता हावी थी। उन्होंने कहा कि आज जिस रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक गलियारा का शिलान्यास किया गया है, वह इस क्षेत्र की नई जीवन रेखा बनेगा क्योंकि रायपुर और विशाखापत्तनम के बीच का सफर आधा हो जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि 6-लेन सड़क धमतरी के धान बेल्ट, कांकेर के बॉक्साइट बेल्ट और कोंडागांव के हस्तशिल्प की समृद्धि को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ेगी। प्रधानमंत्री ने वन्यजीवों की सुविधा के लिए सुरंगों और पशु मार्गों के निर्माण की भी सराहना की क्योंकि यह सड़क वन्यजीव क्षेत्र से होकर गुजरेगी। श्री मोदी ने कहा कि दल्ली राजहरा से जगदलपुर तक रेल लाइन और अंतागढ़ से रायपुर तक सीधी ट्रेन सेवा से दूर-दराज के इलाकों तक यात्रा करना आसान हो जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार नए अवसरों का सृजन करने और प्राकृतिक संपदा के क्षेत्रों में अधिक उद्योग स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पिछले 9 वर्षों में इस दिशा में किए गए प्रयासों का उल्लेख किया, जिसने छत्तीसगढ़ में औद्योगीकरण को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने बताया कि सरकार की नीतियों के कारण छत्तीसगढ़ में राजस्व के रूप में धनराशि में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि खासकर खान और खनिज अधिनियम में बदलाव के बाद छत्तीसगढ़ को रॉयल्टी के रूप में अधिक धन मिलना शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 से पहले के चार वर्षों में छत्तीसगढ़ को रॉयल्टी के रूप में 1300 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि 2015-16 से 2020-21 के बीच राज्य को लगभग 2800 करोड़ रुपये मिले। उन्होंने कहा कि डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड में बढ़ोतरी से खनिज संपदा वाले जिलों में विकास के काम में तेजी आयी है। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए स्कूल हों, लाइब्रेरी हों, सड़कें हों, पानी की व्यवस्था हो, अब ऐसे अनेक विकास कार्यों में डिस्ट्रिक्ट मिनरल निधि की धनराशि खर्च की जा रही है।

 

छत्तीसगढ़ में खोले गए 1 करोड़ 60 लाख से अधिक जन धन बैंक खातों में आज 6000 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि के जमा हैं, इसका उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उन गरीब परिवारों, किसानों और मजदूरों की धनराशि है जो कभी इसे कहीं और रखने के लिए मजबूर थे। उन्होंने कहा कि जन धन खाते गरीबों को सरकार से सीधी मदद प्राप्त करने में सहायता कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों का सृजन करने की दिशा में लगातार काम कर रही है और मुद्रा योजना के तहत छत्तीसगढ़ के बड़ी संख्या में जनजातीय युवाओं और गरीब परिवारों के युवकों को 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की मदद दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कोरोना काल में देश के छोटे उद्योगों की मदद के लिए लाखों करोड़ रुपये की विशेष योजना शुरू की है, जिसमें छत्तीसगढ़ के लगभग 2 लाख उद्यमों को लगभग 5000 करोड़ रुपये की मदद मिली है।

प्रधानमंत्री ने पीएम स्वनिधि योजना का भी उल्लेख किया जो रेहड़ी-पटरी वालों को बिना गारंटी के ऋण प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि इसके 60 हजार से अधिक लाभार्थी छत्तीसगढ़ से हैं। उन्होंने बताया कि गांवों में मनरेगा के तहत पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने छत्तीसगढ़ को 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध करायी है।

75 लाख लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड के वितरण का शुभारंभ किए जाने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि गरीब और जनजातीय परिवारों के लिए राज्य के 1500 से अधिक बड़े अस्पतालों में हर साल 5 लाख रुपये तक के निःशुल्क इलाज की गारंटी मिल रही है। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि आयुष्मान योजना गरीब, जनजातीय, पिछड़े और दलित परिवारों के जीवन में काम आ रही है। अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के हर परिवार की इसी सेवा भावना से निरंतर सेवा करते रहने का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री विश्वभूषण हरिचंदन, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, छत्तीसगढ़ के उप-मुख्यमंत्री श्री टी एस सिंह देव, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के साथ-साथ संसद सदस्य और अन्य गणमान्य भी उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री ने आज लगभग 6,400 करोड़ रुपये की पांच राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। राष्ट्र को समर्पित की जाने वाली परियोजनाओं में जबलपुर-जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रायपुर से कोडेबोड़ खंड की 33 किमी लंबा 4 लेन मार्ग शामिल है। पर्यटन को बढ़ावा देने के अलावा, यह खंड जगदलपुर के पास इस्पात संयंत्रों के कच्चे माल, तैयार उत्पादों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है और लौह अयस्क-समृद्ध क्षेत्रों को कनेक्टिविटी प्रदान करता है। प्रधानमंत्री ने एनएच-130 के बिलासपुर से अंबिकापुर खंड के 53 किलोमीटर लंबे 4-लेन बिलासपुर-पथरापाली खंड को भी राष्ट्र को समर्पित किया। यह उत्तर प्रदेश के साथ छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में मदद करेगा और आसपास के क्षेत्रों में कोयला खदानों को कनेक्टिविटी प्रदान करके कोयले की आवाजाही को बढ़ावा देगा।

प्रधानमंत्री ने 6-लेन ग्रीनफील्ड रायपुर-विशाखापत्तनम कॉरिडोर के छत्तीसगढ़ खंड के लिए 3 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इनमें एनएच 130 सीडी पर 43 किलोमीटर लंबे छह लेन वाले झांकी-सरगी खंड का विकास शामिल है; एनएच 130 सीडी पर 57 किलोमीटर लंबा छह लेन वाला सरगी-बसनवाही खंड; और एनएच-130 सीडी का 25 किमी लंबा छह लेन वाला बसनवाही-मारंगपुरी खंड शामिल है। इसके अलावा इस परियोजना एक प्रमुख घटक 2.8 किमी लंबी 6-लेन सुरंग है जिसमें उदंती वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में अप्रतिबंधित वन्यजीव अभ्यारण्य क्षेत्र के लिए 27 पशुओं के निकासी मार्ग और बंदरों के लिए 17 छतरियां शामिल हैं। इन परियोजनाओं से धमतरी में चावल मिलों और कांकेर में बॉक्साइट समृद्ध क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और कोंडागांव में हस्तशिल्प उद्योग को भी लाभ होगा। कुल मिलाकर ये परियोजनाएं क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को प्रमुखता देंगी।

प्रधानमंत्री ने 750 करोड़ रुपये की लागत से पूरी हुई 103 किलोमीटर लंबी रायपुर-खरियार रोड रेल लाइन के दोहरीकरण को भी राष्ट्र को समर्पित किया। इससे छत्तीसगढ़ में उद्योगों के लिए बंदरगाहों से कोयला, इस्पात, उर्वरक और अन्य वस्तुओं का परिवहन आसान हो जाएगा। उन्होंने 290 करोड़ रुपये की लागत से विकसित केवटी-अंतागढ़ को जोड़ने वाली 17 किमी लंबी नई रेलवे लाइन भी राष्ट्र को समर्पित की। नई रेलवे लाइन भिलाई इस्पात संयंत्र को दल्ली-राजहरा और रावघाट क्षेत्रों की लौह अयस्क खदानों से कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और घने जंगलों से गुजरते हुए दक्षिणी छत्तीसगढ़ के दूरदराज के इलाकों को जोड़ेगी।

प्रधानमंत्री ने कोरबा में 130 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित 60 हजार मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता वाले इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के बॉटलिंग प्लांट को भी राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने वीडियो लिंक के माध्यम से अंतागढ़-रायपुर ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाई। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने आयुष्मान भारत के तहत लाभार्थियों को 75 लाख कार्डों के वितरण का शुभारंभ किया।

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PM Modi chairs 51st PRAGATI Meeting
May 27, 2026
PM reviews seven critical infrastructure projects across the Railways, Power and Road sectors
Projects reviewed span across 9 States with cumulative investment of around ₹30,000 crore
PM also reviews Ken Betwa Link Project and Swachh Bharat Mission-Urban 2.0
PM says Ken-Betwa River Inter-linking Project should serve as a model for other States to resolve inter-State water issues amicably
PM asks States to expedite the completion of solid waste management-related infrastructure, including waste processing plants and GOBARdhan plants
PM calls for mission-mode rooftop solar coverage in urban areas
Acting upon the advice of PM, system of monthly review of social sector schemes at State level operationalised, starting with review of Swachh Bharat Mission

Prime Minister Shri Narendra Modi chaired the 51st meeting of PRAGATI, the ICT-enabled, multi-modal platform aimed at fostering Pro-Active Governance and Timely Implementation, by seamlessly integrating efforts of the Central and State governments, at Seva Teerth, earlier today.

During the meeting, the Prime Minister reviewed seven critical infrastructure projects across the Railways, Power and Road sectors covering nine States worth around ₹30,000 crore. These projects, pivotal to economic growth and public welfare, were reviewed with a focus on timelines, inter-agency coordination, and timely issue resolution. Prime Minister also reviewed Ken Betwa Link Project and Swachh Bharat Mission-Urban 2.0.

While reviewing power sector projects, Prime Minister emphasized the need to accelerate rooftop solar adoption across urban areas, with a special focus on cities, residential clusters and public institutions. He underlined that rooftop solar should be taken up in mission mode to reduce electricity costs, improve energy security and promote clean energy at the household and community level.

While reviewing road and port connectivity projects, it was emphasised that Vadhavan Port should be developed as a model of port-led, multi-modal development, where every major mode of transport is seamlessly integrated to create a future-ready logistics ecosystem. The project should not be seen merely as a port, but as a national gateway connected through coastal shipping, inland waterways, dedicated freight corridors, high-speed rail connectivity, highways and airport linkages.

Prime Minister emphasised the need for effective implementation of Swachh Bharat Mission 2.0 and underlined that the mission should move beyond infrastructure creation and ensure measurable outcomes through regular monitoring, citizen participation and convergence between various stakeholders. He asked States to expedite the completion of solid waste management-related infrastructure, including waste processing plants and GOBARdhan plants.

While reviewing Ken-Betwa River Inter-linking Project, Prime Minister observed that Ken-Betwa project should serve as a model for other States to resolve inter-State water issues through cooperation, timely clearances, technology-based monitoring and mission-mode execution. States were encouraged to identify similar opportunities where river-linking, water conservation, groundwater recharge and efficient irrigation can be taken up in an integrated manner to ensure long-term water security.

Prime Minister also underlined that the delay in the implementation of public projects leads not only to cost escalation but also deprives citizens of timely access to essential facilities and development benefits. He observed that every delay has a direct impact on people’s lives, regional growth and public resources. He stressed that Ministries, Departments and States must adopt a more proactive and time-bound approach to resolve pending issues, remove bottlenecks and ensure faster execution.

Prime Minister also emphasized that innovative use of canal networks should be explored, including installation of solar panels along canals and over canals for clean electricity generation. This would help optimize land use, reduce evaporation losses, generate renewable energy and create additional economic value from water infrastructure.

At the beginning of the meeting, the Cabinet Secretary informed that, in pursuance of the directions of the Prime Minister, a system of monthly review of social sector schemes at the State level has also been operationalised. This mechanism aims to ensure regular monitoring, faster resolution of implementation issues and greater accountability at the State and district levels. As part of this initiative, Swachh Bharat Mission has been taken up for review at the State level in the first instance.