सूरत खाद्य सुरक्षा संतृप्ति अभियान कार्यक्रम भारत के खाद्य और पोषण सुरक्षा मिशन में उल्लेखनीय कदम है: प्रधानमंत्री
सूरत में शुरू किया गया खाद्य सुरक्षा संतृप्ति अभियान देश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा: प्रधानमंत्री
हमारी सरकार सदैव गरीबों के साथ उनके साथी के रूप में खड़ी है: प्रधानमंत्री
विकसित भारत की यात्रा में पौष्टिक भोजन की बड़ी भूमिका है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सूरत के लिंबायत में सूरत खाद्य सुरक्षा संतृप्ति अभियान कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री ने 2.3 लाख से अधिक लाभार्थियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभ भी वितरित किए। सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सूरत शहर की अनूठी भावना पर बल दिया, तथा काम और दान की इसकी मजबूत नींव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शहर के सार को भुलाया नहीं जा सकता, क्योंकि इसकी पहचान सामूहिक समर्थन और सभी के विकास का उत्सव मनाने से होती है।

श्री मोदी ने कहा कि सूरत आपसी सहयोग और प्रगति की संस्कृति के लिए जाना जाता है, जहां लोग सबके लाभ के लिए मिलकर काम करते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह भावना सूरत के हर कोने में दिखाई देती है। प्रधानमंत्री ने बताया कि आज के कार्यक्रम का उद्देश्य इस भावना को और बढ़ावा देना तथा मजबूत करना है, जिससे शहर में सभी के लिए एकता और विकास को बढ़ावा मिले। श्री मोदी ने कहा, "सूरत गुजरात और भारत का अग्रणी शहर है और अब गरीबों और हाशिए पर विद्यमान लोगों के लिए खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। शहर का खाद्य सुरक्षा संतृप्ति अभियान देश भर के अन्य जिलों के लिए प्रेरणा का काम करेगा।"

श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि यह अभियान सुनिश्चित करता है कि कोई भी छूट न जाए, किसी के साथ धोखा न हो और कोई भेदभाव न हो। यह तुष्टिकरण से आगे बढ़कर सभी के लिए संतुष्टि की महान भावना पर ध्यान केंद्रित करता है। श्री मोदी ने कहा, "जब सरकार लाभार्थी के दरवाजे पर पहुंचती है, तो कोई भी वंचित नहीं रह जाता। सभी को लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता के साथ, सिस्टम का शोषण करने की कोशिश करने वालों को दूर रखा जाता है।"

प्रधानमंत्री ने इस बात की जानकारी दी कि खाद्य सुरक्षा संतृप्ति दृष्टिकोण के तहत, सूरत प्रशासन ने 2.5 लाख से अधिक नए लाभार्थियों की पहचान की है। इनमें कई बुजुर्ग महिलाएं, बुजुर्ग पुरुष, विधवा महिलाएं और दिव्यांग व्यक्ति शामिल हैं। परिवार के इन नए सदस्यों को अब मुफ्त राशन और पौष्टिक भोजन मिलेगा। प्रधानमंत्री ने सभी नए लाभार्थियों को इस महत्वपूर्ण पहल में शामिल होने के लिए बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि भोजन के लिए परेशान गरीबों का दर्द कुछ ऐसा नहीं है जिसे उन्हें किताबों से सीखने की जरूरत है, बल्कि ऐसा कुछ है जिसे वे अनुभव कर सकते हैं। श्री मोदी ने कहा, “और यही कारण है कि पिछले वर्षों में, सरकार ने जरूरतमंद लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करके इस चिंता को दूर करने पर ध्यान केंद्रित किया है। सरकार गरीबों के साथ सच्चे साथी और सेवक के रूप में खड़ी है।” कोविड-19 महामारी के दौरान, जब देश को सहायता की सबसे ज्यादा जरूरत थी, गरीबों की रसोई को चालू रखने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना शुरू की गई थी। दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अनूठी योजनाओं में से एक यह योजना अब भी जारी है। उन्होंने इस बात पर भी खुशी ज़ाहिर की कि गुजरात सरकार ने अधिक लाभार्थियों को लाभान्वित करने के लिए आय सीमा बढ़ाकर योजना का विस्तार किया। गरीबों की रसोई रोशन रहे, यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार सालाना लगभग 2.25 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रही है।

भारत की विकास यात्रा में पौष्टिक भोजन की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए, श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश के प्रत्येक परिवार को पर्याप्त पोषण प्रदान करना है ताकि कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं को समाप्त किया जा सके। श्री मोदी ने कहा, “पीएम पोषण योजना के तहत, लगभग 12 करोड़ स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। सक्षम आंगनवाड़ी कार्यक्रम छोटे बच्चों, माताओं और गर्भवती महिलाओं के पोषण पर केंद्रित है। इसके अतिरिक्त, पीएम मातृ वंदना योजना के तहत, गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक भोजन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।”

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि पोषण केवल भोजन से कहीं अधिक है, जिसमें स्वच्छता आवश्यक पहलू है। उन्होंने स्वच्छता बनाए रखने के प्रयासों के लिए सूरत की प्रशंसा की। श्री मोदी ने कहा, “सरकार का निरंतर प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि देश का प्रत्येक शहर और गाँव गंदगी को खत्म करने की दिशा में काम करे। वैश्विक संगठनों ने स्वीकार किया है कि स्वच्छ भारत अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारियों को कम करने में मदद की है।” उन्होंने श्री सी.आर. पाटिल के नेतृत्व में चलाए जा रहे "हर घर जल" अभियान के महत्व पर भी बल दिया, जिसका उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाना है। इससे विभिन्न बीमारियों में कमी आएगी।

श्री नरेन्द्र मोदी ने सरकार की मुफ्त राशन योजना के महत्वपूर्ण प्रभाव को स्वीकार किया, जिसने लाखों लोगों के जीवन को आसान बना दिया है। उन्होंने कहा कि आज, सही लाभार्थियों को उनके हिस्से का पूरा राशन मिल रहा है, जो 10 साल पहले उपलब्ध नहीं था। उन्होंने बताया कि सरकार ने 5 करोड़ से अधिक फर्जी राशन कार्डधारकों को हटा दिया है और पूरी राशन वितरण प्रणाली को आधार कार्ड से जोड़ दिया है। प्रधानमंत्री ने सूरत में प्रवासी श्रमिकों के सामने आने वाली समस्या का समाधान किया, जो पहले दूसरे राज्यों में अपने राशन कार्ड का उपयोग नहीं कर सकते थे। श्री मोदी ने कहा, "एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड" योजना यह सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई कि कोई भी व्यक्ति चाहे किसी भी शहर का राशन कार्ड क्यों न रखता हो, वह देश भर के किसी भी शहर में इसका लाभ उठा सकता है। सूरत में कई श्रमिक अब इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। यह दर्शाता है कि जब नीतियां सच्चे इरादे से बनाई जाती हैं, तो उनका लाभ गरीबों को मिलता है।"

प्रधानमंत्री ने मिशन-मोड दृष्टिकोण के माध्यम से गरीबों को सशक्त बनाने के लिए पिछले एक दशक के दौरान सरकार के प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने गरीबों के चारों ओर एक सुरक्षा जाल बनाने पर बल दिया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें कभी भी मदद के लिए भीख न मांगनी पड़े। पक्के घर, शौचालय, गैस कनेक्शन और नल के पानी के कनेक्शन प्रदान करने से गरीबों में नया आत्मविश्वास पैदा हुआ है। सरकार ने गरीब परिवारों के लिए बीमा योजनाएँ भी शुरू कीं, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि लगभग 60 करोड़ भारतीयों को 5 लाख रुपये तक के मुफ्त चिकित्सा उपचार की सुविधा मिले। श्री मोदी ने कहा, “जीवन और दुर्घटना बीमा, जो पहले गरीब परिवारों की पहुँच से बाहर थे, अब वास्तविकता है। आज, 36 करोड़ से अधिक लोग सरकारी बीमा योजनाओं में नामांकित हैं। गरीब परिवारों को 16,000 करोड़ रुपये से अधिक के दावों का भुगतान किया गया है, जिससे उन्हें कठिन समय में मदद मिली है।”

श्री नरेंद्र मोदी ने याद किया कि कैसे अतीत में गरीबों को अपना व्यवसाय शुरू करने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था, बैंक बिना गारंटी के ऋण देने से इनकार कर देते थे। श्री मोदी ने बताया कि कैसे उन्होंने व्यक्तिगत रूप से गरीबों के लिए ऋण की गारंटी देने की जिम्मेदारी ली और मुद्रा योजना शुरू की। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, "मुद्रा योजना के तहत बिना किसी गारंटी के लगभग 32 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया गया है, जिसका सीधा लाभ गरीबों को मिल रहा है। इस पहल से लाखों लोगों को मदद मिली है, जबकि विपक्ष को इस राशि की अहमियत के बारे में समझ नहीं थी।"

श्री नरेन्द्र मोदी ने स्ट्रीट वेंडर्स और श्रमिकों के संघर्षों का जिक्र किया, जिनके पास पहले कोई वित्तीय सहायता नहीं थी। उन्‍होंने कहा कि इन व्यक्तियों को अक्सर साहूकारों से पैसे उधार लेने पड़ते थे, केवल उधार की तुलना में अधिक चुकाने पड़ते थे। सरकार की पीएम स्वनिधि योजना ने इन विक्रेताओं को बैंक ऋण तक पहुँच प्रदान करके उनकी मदद की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष के बजट में ऐसे श्रमिकों के लिए विशेष क्रेडिट कार्ड शुरू करने की भी घोषणा की गई। श्री मोदी ने कहा, “पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की गई, जो पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और उनके कौशल को सुधारने और विस्तार करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करके उनका समर्थन करती है। ये प्रयास समावेशी विकास के माध्यम से देश के विकास में योगदान करते हैं, पिछले एक दशक में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।”

प्रधानमंत्री ने देश के विकास में मध्यम वर्ग के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार किया, खासकर सूरत में, जहाँ बड़ी संख्या में मध्यम वर्ग के परिवार रहते हैं। उन्होंने पिछले एक दशक में मध्यम वर्ग को सशक्त बनाने के लिए सरकार के प्रयासों का जिक्र किया, जिनमें इस वर्ष के बजट में प्रदान की गई राहत भी शामिल है। प्रधानमंत्री ने कहा, "कर राहत दी गई, खास तौर पर 12 लाख रुपये तक की आय पर शून्य कर, ऐसा कदम है जिसकी कई लोगों ने कभी उम्मीद नहीं की थी। इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों को अब 12.87 लाख रुपये तक की आय पर करों से छूट मिलेगी। सभी करदाताओं को लाभ पहुंचाने के लिए नए कर स्लैब भी पेश किए गए हैं। इससे सूरत, गुजरात और पूरे देश में मध्यम वर्ग के परिवारों को अपनी कमाई का ज़्यादा हिस्सा रखने की अनुमति मिलेगी, जिसे वे अपनी ज़रूरतों और अपने बच्चों के भविष्य में निवेश कर सकते हैं।"

प्रधानमंत्री ने सूरत को उद्यमिता का केंद्र बताया, जहां बड़ी संख्या में लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) हैं, जो लाखों लोगों को रोजगार देते हैं। उन्होंने एमएसएमई को पर्याप्त सहायता देकर स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के सरकार के प्रयासों की जानकारी दी। श्री मोदी ने कहा, “बजट में एससी/एसटी, दलित, आदिवासी और महिला उद्यमियों के लिए 2 करोड़ रुपये तक के ऋण की घोषणा की गई है, जिससे उन्हें एमएसएमई क्षेत्र में आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी। सूरत और गुजरात के युवाओं को इन अवसरों का लाभ उठाना चाहिए और सरकार उनका समर्थन करने के लिए तैयार है।”

श्री मोदी ने भारत के विकास में खासकर कपड़ा, रसायन और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में सूरत की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। उन्होंने शहर में इन उद्योगों के विस्तार के लिए सरकार के प्रयासों की जानकारी दी। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “सूरत हवाई अड्डे पर नई एकीकृत टर्मिनल बिल्डिंग, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और आगामी बुलेट ट्रेन, सूरत मेट्रो परियोजना, शहर की कनेक्टिविटी को और बढ़ाएगी, जिससे यह देश के सबसे अच्छी तरह से जुड़े शहरों में से एक बन जाएगा। ये पहल सूरत के निवासियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला रही हैं और उनका जीवन आसान बना रही हैं।”

 

श्री नरेन्द्र मोदी ने देश भर की महिलाओं से नमो ऐप पर अपनी प्रेरक कहानियाँ साझा करने का आग्रह किया। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि वे इनमें से कुछ प्रेरणादायक महिलाओं को अपने सोशल मीडिया अकाउंट सौंपेंगे जिन्होंने देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों, विशेष रूप से गुजरात में महिलाओं की भूमिका की जानकारी दी और इस बात पर बल दिया कि यह दिन महिलाओं की उपलब्धियों का उत्‍सव मनाने का अवसर है। उन्होंने यह भी कहा कि वे नवसारी में महिला सशक्तिकरण को समर्पित प्रमुख कार्यक्रम में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री ने सूरत में कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं के शामिल होने की सराहना की और कहा कि उन्हें वर्तमान कार्यक्रम से बहुत लाभ होगा।

प्रधानमंत्री ने सूरत को लघु भारत और वैश्विक मंच पर उल्लेखनीय शहर के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की। श्री मोदी ने कहा, "सूरत में रहने वाले जीवंत और गतिशील लोगों के लिए, सब कुछ असाधारण होना चाहिए। मैं वर्तमान में जारी पहलों के सभी लाभार्थियों को बधाई देता हूं और उनकी निरंतर सफलता और प्रगति की कामना करता हूं।"

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने सूरत के लिंबायत में सूरत खाद्य सुरक्षा संतृप्ति अभियान कार्यक्रम का शुभारंभ किया और 2.3 लाख से अधिक लाभार्थियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभ वितरित किए।

महिला सशक्तिकरण सरकार द्वारा किए गए कार्यों का आधार रहा है। प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण से निर्देशित, सरकार उनके सर्वांगीण विकास की दिशा में कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।

सूरत खाद्य सुरक्षा संतृप्ति अभियान कार्यक्रम खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए भारत के मिशन में उल्‍लेखनीय कदम है।

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April 14, 2026
PM to inaugurate Sri Guru Bhairavaikya Mandira at Sri Kshetra Adichunchanagiri in Mandya
Sri Guru Bhairavaikya Mandira is a memorial dedicated to Sri Sri Sri Dr. Balagangadharanatha Mahaswamiji, the 71st Pontiff of Sri Adichunchanagiri Mahasamsthana Math
PM to also jointly release the book titled “Saundarya Lahari and Shiva Mahimna Stotram” along with former Prime Minister Shri H. D. Deve Gowda ji

Prime Minister, Shri Narendra Modi will visit Karnataka on 15th April 2026. At around 11 AM, Prime Minister will inaugurate the Sri Guru Bhairavaikya Mandira at Sri Kshetra Adichunchanagiri in Mandya district. He will also address the gathering on the occasion.

During the visit, Prime Minister will also jointly release the book titled “Saundarya Lahari and Shiva Mahimna Stotram” along with former Prime Minister Shri H. D. Deve Gowda ji.

Sri Guru Bhairavaikya Mandira is a memorial dedicated to the revered seer, Sri Sri Sri Dr. Balagangadharanatha Mahaswamiji, the 71st Pontiff of Sri Adichunchanagiri Mahasamsthana Math. Constructed in the traditional Dravidian architectural style, the Mandira stands as a tribute to the life and legacy of the late seer. The Mandira is envisioned not only as a place of reverence but also as a source of inspiration for future generations.

Sri Sri Sri Dr. Balagangadharanatha Mahaswamiji was widely respected for his lifelong commitment to social service, having established numerous educational institutions and healthcare facilities. He firmly believed that service to society is the highest form of worship, and his teachings transcended barriers of caste, creed, and region, inspiring millions.