भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है: प्रधानमंत्री
भारत की ग्रोथ से जुड़ी फैक्ट शीट रिफॉर्म-परफॉर्म-ट्रांसफॉर्म मंत्र की सफलता की गाथा है: प्रधानमंत्री
ऐसे समय में जब दुनिया भारी अनिश्चितता के दौर में है, भारत अद्भुत निश्चितता के साथ आगे बढ़ रहा है: प्रधानमंत्री
इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ, इंडस्ट्री की जरूरतों के लिए तैयार वर्कफोर्स आज की सबसे बड़ी जरूरत है: प्रधानमंत्री
आज का भारत विकसित राष्ट्र बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है, इस लक्ष्य को हासिल करने में रिफॉर्म एक्सप्रेस एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के राजकोट में कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया। इस अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि 2026 की शुरुआत के बाद गुजरात की यह उनकी पहली यात्रा है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज सुबह उन्होंने भगवान सोमनाथ के दिव्य दर्शन किए और अब वे राजकोट के इस भव्य कार्यक्रम में सहभागिता कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज हर तरफ "विकास भी, विरासत भी" का मंत्र गूंज रहा है। प्रधानमंत्री ने देश और दुनिया भर से वाइब्रेंट गुजरात रीजनल समिट में भाग लेने आए सभी सहयोगियों का स्वागत किया और उन्हें शुभकामनाएं दीं।

वाइब्रेंट गुजरात समिट के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जब भी इस सम्मेलन का मंच सजता है, तो वे इसे केवल एक कार्यक्रम के तौर पर नहीं देखते। उनके लिए यह 21वीं सदी के आधुनिक भारत की वह गौरवशाली यात्रा है, जो एक सपने के साथ शुरू हुई थी और आज अटल विश्वास के शिखर पर पहुँच चुकी है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पिछले दो दशकों में वाइब्रेंट गुजरात की यह यात्रा एक वैश्विक मानक बन गई है। उन्होंने कहा कि अब तक आयोजित इसके दस संस्करणों ने न केवल इस शिखर सम्मेलन की पहचान को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है, बल्कि वैश्विक पटल पर इसकी भूमिका को भी निरंतर सशक्त किया है।

वाइब्रेंट गुजरात समिट के साथ अपने पहले दिन से जुड़ाव को याद करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इसके बदलते स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में इसका लक्ष्य दुनिया को गुजरात की क्षमताओं से परिचित कराना था, ताकि लोग यहाँ आएँ, निवेश करें और इससे भारत के साथ-साथ वैश्विक निवेशकों को भी लाभ हो। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आज यह सम्मेलन केवल निवेश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक विकास, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी का एक सशक्त मंच बन चुका है। उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले वर्षों में वैश्विक भागीदारों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है, जो इस सम्मेलन के समावेशी स्वरूप का एक बड़ा प्रमाण है। श्री मोदी ने कहा कि आज इस मंच पर कॉर्पोरेट समूह, सहकारी संस्थाएं, एमएसएमई, स्टार्टअप्स, मल्टीलेटरल और बाइलेटरल संगठन तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान—सभी एक साथ आते हैं। वे यहाँ न केवल संवाद और चर्चा करते हैं, बल्कि गुजरात की विकास यात्रा में कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पिछले दो दशकों में वाइब्रेंट गुजरात समिट ने लगातार कुछ नया और विशेष पेश करने की परंपरा कायम रखी है। उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में वाइब्रेंट गुजरात रीजनल समिट इस परंपरा का एक और उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस क्षेत्रीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गुजरात के विभिन्न हिस्सों में छिपी हुई अप्रयुक्त क्षमताओं को परफॉर्मेंस में बदलना है। श्री मोदी ने रेखांकित किया कि गुजरात के हर क्षेत्र की अपनी विशिष्ट ताकत है। कहीं विशाल कोस्टल लाइन की शक्ति है, तो कहीं एक लंबी ट्राइबल बेल्ट का विस्तार है। कहीं औद्योगिक क्लस्टरों का एक बड़ा इकोसिस्टम है, तो कहीं खेती और पशुपालन की समृद्ध परंपरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुजरात का प्रत्येक क्षेत्र अपनी अलग विशिष्टता रखता है और यह रीजनल समिट इन्हीं स्थानीय संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश की आर्थिक प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है और हाल के वर्षों में भारत ने जो तीव्र प्रगति की है, उसमें गुजरात और यहाँ की जनता की बहुत बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि भारत आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है और आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि भारत से वैश्विक उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। श्री मोदी ने रेखांकित किया कि भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने देश की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि आज महंगाई पूरी तरह नियंत्रण में है और कृषि उत्पादन के नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ बताया कि भारत आज दूध उत्पादन में दुनिया में नंबर वन है। इसके साथ ही, जेनेरिक दवाओं के उत्पादन में भी भारत पहले स्थान पर है और दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक देश बनकर उभरा है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा, "भारत की ग्रोथ फैक्ट शीट दरअसल 'रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म' के मंत्र की सफलता की कहानी है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछले 11 वर्षों में भारत दुनिया में मोबाइल डेटा का सबसे बड़ा उपभोक्ता बन गया है, और यूपीआई वैश्विक स्तर पर नंबर वन रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन प्लेटफॉर्म के रूप में उभरा है। पुरानी स्थिति को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि पहले दस में से नौ मोबाइल फोन आयात किए जाते थे, लेकिन आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता देश है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि अब भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है, सोलर पावर जनरेशन में टॉप तीन देशों में शामिल है, तीसरा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट है, और दुनिया के टॉप तीन मेट्रो नेटवर्क में से एक है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आज दुनिया का हर विशेषज्ञ और संस्थान भारत को लेकर बेहद उत्साहित है। उन्होंने कहा कि आईएमएफ भारत को वैश्विक विकास का इंजन मान रहा है, एसएंडपी ने अठारह वर्षों के बाद भारत की रेटिंग अपग्रेड की है और फिच रेटिंग्स ने भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता व राजकोषीय विश्वसनीयता की सराहना की है। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि भारत पर यह वैश्विक भरोसा इसलिए है क्योंकि भारी वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में, भारत अभूतपूर्व निश्चितता के युग से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में राजनीतिक स्थिरता है, नीतियों में निरंतरता है और एक उभरता हुआ नया मिडिल क्लास है जिसकी क्रय शक्ति लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि आज भारत असीमित संभावनाओं का देश बन गया है। लाल किले की प्राचीर से कहे अपने शब्दों "यही समय है, सही समय है" को याद करते हुए श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि देश और दुनिया के हर निवेशक के लिए भारत की संभावनाओं का लाभ उठाने का यह वास्तव में सही समय है। उन्होंने आगे कहा कि वाइब्रेंट गुजरात रीजनल समिट भी सभी निवेशकों को यही संदेश दे रहा है—कि सौराष्ट्र और कच्छ में निवेश करने के लिए "यही समय है, सही समय है।"

प्रधानमंत्री ने सौराष्ट्र और कच्छ की जुझारू शक्ति की सराहना करते हुए कहा कि गुजरात के ये क्षेत्र हमें सिखाते हैं कि चुनौती चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, यदि ईमानदारी और कड़ी मेहनत से प्रयास किया जाए, तो सफलता निश्चित है। अतीत के संघर्षों को याद करते हुए श्री मोदी ने कहा कि यह वही कच्छ है जिसने इस सदी की शुरुआत में एक विनाशकारी भूकंप का सामना किया था। यह वही सौराष्ट्र है जो वर्षों तक भीषण सूखे की मार झेलता रहा, जहाँ माताओं और बहनों को पीने के पानी के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था, बिजली अनिश्चित थी और हर तरफ कठिनाइयां ही कठिनाइयां थीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के 20-25 साल के युवाओं ने उस दौर की केवल कहानियाँ ही सुनी हैं, जब लोग कच्छ या सौराष्ट्र में लंबे समय तक रुकने से कतराते थे और ऐसा लगता था कि ये परिस्थितियाँ कभी नहीं बदलेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इतिहास गवाह है कि समय बदलता है और वाकई बदला है। सौराष्ट्र और कच्छ के लोगों ने अपने कठिन परिश्रम और पुरुषार्थ से अपनी नियति को बदल कर रख दिया है।

प्रधानमंत्री ने सौराष्ट्र और कच्छ की औद्योगिक ताकत की सराहना करते हुए कहा कि आज ये क्षेत्र केवल अवसरों के क्षेत्र नहीं रह गए हैं, बल्कि भारत की विकास यात्रा के मुख्य आधार बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने वाले प्रमुख केंद्र बन रहे हैं और भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह विकास पूरी तरह से मार्केट-ड्रिवन है, जो निवेशकों में एक नया आत्मविश्वास पैदा करता है। प्रधानमंत्री ने राजकोट की औद्योगिक विविधता का उल्लेख करते हुए बताया कि अकेले राजकोट में 2.5 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम हैं। यहाँ के विभिन्न औद्योगिक क्लस्टरों में स्क्रूड्राइवर से लेकर ऑटो पार्ट्स, मशीन टूल्स और लग्जरी कारों के लाइनर्स तक बनाए जाते हैं। इतना ही नहीं, अब यहाँ हवाई जहाज, लड़ाकू विमान और रॉकेट के पुर्जे भी निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि यह क्षेत्र कम लागत वाली मैन्युफैक्चरिंग से लेकर हाई-प्रिसिजन और हाई-टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग तक की पूरी वैल्यू चेन को सपोर्ट करता है। साथ ही, यहाँ का आभूषण उद्योग दुनिया भर में प्रसिद्ध है, जो स्केल, स्किल और ग्लोबल लिंकेज का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है।

प्रधानमंत्री ने गुजरात की औद्योगिक शक्ति का जिक्र करते हुए अलंग का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अलंग में दुनिया का सबसे बड़ा शिप-ब्रेकिंग यार्ड है, जहाँ दुनिया के एक-तिहाई जहाजों की रीसाइक्लिंग की जाती है। यह सर्कुलर इकोनॉमी के क्षेत्र में भारत के वैश्विक नेतृत्व का एक बड़ा प्रमाण है। प्रधानमंत्री ने टाइल्स उत्पादन के क्षेत्र में भारत की स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े टाइल्स उत्पादकों में से एक है, जिसमें मोरबी जिले का सबसे बड़ा योगदान है। यहाँ मैन्युफैक्चरिंग न केवल लागत के मामले में प्रतिस्पर्धी है, बल्कि इसके मानक भी वैश्विक स्तर के हैं। अपने एक पुराने विजन को याद करते हुए श्री मोदी ने कहा, मैंने एक बार कहा था कि मैं वह समय देख पा रहा हूँ जब मोरबी, जामनगर और राजकोट मिलकर एक ऐसा त्रिकोण बनाएंगे जो "मिनी जापान" कहलाएगा। उन्होंने आगे कहा कि उस समय कई लोगों ने मेरे इस बयान का मजाक उड़ाया था, लेकिन आज मैं अपनी आँखों के सामने उस विजन को हकीकत में बदलते देख रहा हूँ।

प्रधानमंत्री ने धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह क्षेत्र आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन सुविधा धोलेरा में स्थापित की जा रही है, जो इस क्षेत्र को भविष्य की तकनीकों के मामले में दुनिया से एक कदम आगे रखेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में निवेश के लिए जमीन पूरी तरह तैयार है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि यहाँ न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है, बल्कि हमारी नीतियां भी स्थिर और अनुमानित हैं और हमारा विजन दीर्घकालिक है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र अब भारत की ग्रीन ग्रोथ, ग्रीन मोबिलिटी और ऊर्जा सुरक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि कच्छ में 30 गीगावाट क्षमता का रिन्यूएबल एनर्जी पार्क विकसित किया जा रहा है, जो दुनिया का सबसे बड़ा हाइब्रिड ऊर्जा पार्क होगा। उन्होंने इसकी विशालता को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह पार्क पेरिस शहर से पांच गुना बड़ा होगा। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा केवल एक प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि एक कमर्शियल लेवल की वास्तविकता बन चुकी है। श्री मोदी ने बताया कि कच्छ और जामनगर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के बड़े केंद्र बन रहे हैं। इसके साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा के साथ-साथ ग्रिड की स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कच्छ में एक विशाल बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी स्थापित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने सौराष्ट्र और कच्छ की एक और बड़ी ताकत के रूप में यहाँ के वर्ल्ड-क्लास पोर्ट्स का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत के निर्यात का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं बंदरगाहों के माध्यम से दुनिया भर में पहुँचता है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से बताया कि पीपावाव और मुंद्रा पोर्ट अब ऑटोमोबाइल निर्यात के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि पिछले वर्ष गुजरात के बंदरगाहों से लगभग 1.75 लाख वाहनों का निर्यात किया गया है। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि यहाँ केवल लॉजिस्टिक्स ही नहीं, बल्कि बंदरगाह आधारित विकास के हर पहलू में निवेश के अनंत अवसर मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री ने बताया कि गुजरात सरकार मत्स्य पालन क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जा रहा है और सीफूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में निवेशकों के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया गया है।

प्रधानमंत्री ने कौशल विकास पर जोर देते हुए कहा, "इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ, आज की सबसे बड़ी जरूरत इंडस्ट्री-रेडी वर्कफोर्स है।" उन्होंने निवेशकों को आश्वस्त किया कि गुजरात इस मोर्चे पर पूरी निश्चितता प्रदान करता है, क्योंकि यहाँ शिक्षा और कौशल विकास के लिए एक बेहतरीन अंतरराष्ट्रीय इकोसिस्टम मौजूद है। प्रधानमंत्री ने बताया कि कौशल्य स्किल यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर के विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रही है। उन्होंने देश की पहली नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी और गतिशक्ति यूनिवर्सिटी का भी जिक्र किया, जो सड़क, रेलवे, हवाई मार्ग, जलमार्ग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों के लिए कुशल जनशक्ति तैयार कर रही हैं। श्री मोदी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि गुजरात में निवेश करने का मतलब है—टैलेंट पाइपलाइन की गारंटी मिलना। उन्होंने कहा कि आज कई विदेशी विश्वविद्यालय भारत में अवसर देख रहे हैं और गुजरात उनकी पहली पसंद बन गया है। ऑस्ट्रेलिया के दो प्रमुख विश्वविद्यालय पहले ही राज्य में अपने कैंपस शुरू कर चुके हैं और आने वाले समय में कई और प्रतिष्ठित संस्थानों के आने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री ने गुजरात की पर्यटन क्षमता पर चर्चा करते हुए कहा कि राज्य प्रकृति, एडवेंचर, संस्कृति और विरासत का एक अनूठा संगम है, जो पर्यटकों को एक पूर्ण अनुभव प्रदान करता है। उन्होंने भारत की 4,500 साल पुरानी समुद्री विरासत के प्रतीक लोथल का उल्लेख करते हुए बताया कि यहाँ दुनिया का सबसे पुराना मानव निर्मित डॉकयार्ड स्थित है, जहाँ अब नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स विकसित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कच्छ के रण उत्सव का जिक्र करते हुए कहा कि वहाँ की टेंट सिटी दुनिया भर के पर्यटकों को एक अद्भुत अनुभव दे रही है। वन्यजीव प्रेमियों के लिए उन्होंने गीर के जंगलों की विशेषता बताई, जहाँ एशियाई शेरों को देखने के लिए हर साल नौ लाख से अधिक पर्यटक आते हैं। समुद्र तट पर्यटन पर चर्चा करते हुए श्री मोदी ने कहा कि शिवराजपुर बीच, जो ब्लू फ्लैग सर्टिफाइड है, के साथ-साथ मांडवी, सोमनाथ और द्वारका में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पास ही स्थित दीव अब वाटर स्पोर्ट्स और बीच गेम्स के लिए एक प्रमुख वैश्विक गंतव्य के रूप में उभर रहा है।

प्रधानमंत्री ने सौराष्ट्र और कच्छ को अपार शक्ति और संभावनाओं वाला क्षेत्र बताते हुए दुनिया भर के निवेशकों से इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सौराष्ट्र और कच्छ में किया गया प्रत्येक निवेश न केवल गुजरात के विकास को गति देगा, बल्कि राष्ट्र की समग्र प्रगति में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारत विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर तीव्र गति से अग्रसर है और इस यात्रा में "रिफॉर्म एक्सप्रेस" एक बड़ी भूमिका निभा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिफॉर्म एक्सप्रेस का अर्थ हर क्षेत्र में नेक्स्ट-जेनरेशन सुधारों को लागू करना है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में लागू किए गए जीएसटी सुधारों का उदाहरण देते हुए कहा कि इनका सकारात्मक प्रभाव सभी क्षेत्रों पर पड़ा है, विशेष रूप से हमारे एमएसएमई को इससे बहुत लाभ हुआ है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत ने बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति देकर एक बड़ा सुधार किया है, जिससे देश के हर नागरिक को यूनिवर्सल इंश्योरेंस कवरेज प्रदान करने के अभियान में तेजी आएगी। श्री मोदी ने बताया कि लगभग छह दशकों के बाद आयकर कानून का आधुनिकीकरण किया गया है, जिससे करोड़ों करदाताओं को बड़ी राहत और सुविधा मिली है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने ऐतिहासिक श्रम सुधारों पर जोर देते हुए कहा कि अब वेतन, सामाजिक सुरक्षा और उद्योग को एक एकीकृत ढांचे के भीतर लाया गया है। इन सुधारों से श्रमिकों के कल्याण और उद्योगों की प्रगति, दोनों के बीच एक बेहतर संतुलन स्थापित हुआ है।

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि भारत आज डेटा-ड्रिवन इनोवेशन, एआई अनुसंधान और सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए एक ग्लोबल हब के रूप में उभर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जैसे-जैसे भारत की ऊर्जा मांग बढ़ रही है, निश्चित ऊर्जा आपूर्ति देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए न्यूक्लियर पावर एक प्रमुख माध्यम है। प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि न्यूक्लियर पावर क्षेत्र में भी अगली पीढ़ी के सुधारों की शुरुआत की गई है। उन्होंने विशेष रूप से 'शांति एक्ट' का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोल दिया गया है। श्री मोदी ने कहा कि यह ऐतिहासिक कदम निवेशकों के लिए इस क्षेत्र में बड़े और महत्वपूर्ण अवसर पैदा करेगा।

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी निवेशकों को विश्वास दिलाते हुए कहा कि भारत की रिफॉर्म एक्सप्रेस अब थमने वाली नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की सुधारों की यात्रा अब संस्थागत परिवर्तन की ओर बढ़ चुकी है, जो विकास को एक स्थायी और मजबूत आधार प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री ने निवेशकों से संवाद करते हुए कहा कि यहाँ उपस्थित प्रतिभागी केवल एक एमओयू के लिए नहीं आए हैं, बल्कि वे सौराष्ट्र-कच्छ के विकास और यहाँ की समृद्ध विरासत के साथ जुड़ने आए हैं। श्री मोदी ने निवेशकों को पूर्ण भरोसा देते हुए कहा कि यहाँ निवेश किया गया आपका एक-एक रुपया बेहतरीन रिटर्न देगा। उन्होंने सभी निवेशकों को अपनी शुभकामनाएं दीं और इस शिखर सम्मेलन का हिस्सा बनने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

राजकोट के प्रतिष्ठित उद्योगपति और ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, श्री पराक्रमसिंह जी जडेजा ने कार्यक्रम में अपने विचार साझा किए। अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के असाधारण विजन और नेतृत्व की सराहना करते हुए बताया कि कैसे वाइब्रेंट गुजरात पहल के माध्यम से उन्होंने गुजरात को भारत के ग्रोथ इंजन के रूप में परिवर्तित कर दिया है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में भारत ने वैश्विक 'VUCA' वातावरण— वोलैटिलिटी (अस्थिरता), अनसर्टेनिटी (अनिश्चितता), कॉम्प्लेक्सिटी (जटिलता) और अम्बिगुटी (अस्पष्टता)— को विजन (अंतर्दृष्टि), अंडरस्टैंडिंग (समझ), क्लेरिटी (स्पष्टता) और एजिलिटी (सक्रियता) में बदल दिया है, जिससे मुश्किल वैश्विक हालातों के बीच भी देश में स्थिरता सुनिश्चित हुई है। श्री जडेजा ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अगले पांच वर्षों में ज्योति सीएनसी विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास और कौशल विकास के क्षेत्र में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी। उन्होंने भारत को विनिर्माण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में लाने का श्रेय प्रधानमंत्री के नवाचार और कौशल विकास पर केंद्रित नेतृत्व को दिया। साथ ही, उन्होंने आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के विजन को सरकार, उद्योग, संस्थानों और समाज की एक साझा जिम्मेदारी बताया। उनके संबोधन ने इस विश्वास को पुनः मजबूत किया कि श्री मोदी की नीतियों और सुधारों ने बड़े पैमाने पर निवेश, तकनीकी प्रगति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार किया है, जो राष्ट्रीय प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

अडानी पोर्ट्स और एसईजेड के प्रबंध निदेशक श्री करण अडानी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के परिवर्तनकारी नेतृत्व को रेखांकित किया, जिसने भारत के पैमाने और मानसिकता को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने कहा कि श्री मोदी ने राष्ट्र को दीर्घकालिक सोच रखने, संस्थानों का निर्माण करने और विकास को एक ऐसे सभ्यतागत मिशन के रूप में देखने की सीख दी है, जहाँ विजन और क्रियान्वयन का सटीक मेल होता है। श्री मोदी के मार्गदर्शन में गुजरात भारत के सबसे औद्योगिक रूप से उन्नत और वैश्विक स्तर पर जुड़े राज्यों में से एक बन गया है, जो देश की जीडीपी, औद्योगिक उत्पादन, कार्गो हैंडलिंग और नवीकरणीय ऊर्जा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। श्री अडानी ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री के रूप में श्री मोदी ने "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस" के राष्ट्रीय अवधारणा बनने से बहुत पहले ही यह सिद्ध कर दिया था कि सुशासन और कार्यान्वयन की गति किसी राज्य की कायाकल्प कर सकती है। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने इस दर्शन को पूरे भारत में विस्तारित किया है, जिससे सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद के माध्यम से राज्यों को विकास का इंजन बनाया गया है, साथ ही नीतिगत स्थिरता और बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण सुनिश्चित हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत एक बिखरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच एक ब्राइट स्पॉटके रूप में उभरा है, जो 8 प्रतिशत के करीब विकास दर के साथ अपने विनिर्माण आधार का विस्तार कर रहा है और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था व दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। श्री अडानी ने कच्छ और मुंद्रा को इसके शक्तिशाली उदाहरणों के रूप में उद्धृत किया, जहाँ खावड़ा में 37 गीगावाट का नवीकरणीय ऊर्जा पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। उन्होंने अगले पांच वर्षों में कच्छ में 1.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की, जो रोजगार सृजन, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता, स्थिरता की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है। उन्होंने विकसित भारत 2047 की ओर भारत की यात्रा में गुजरात की महत्वपूर्ण भूमिका की भी पुष्टि की।

अपने विचार साझा करते हुए वेलस्पन ग्रुप के चेयरमैन श्री बी.के. गोयनका ने गुजरात, विशेषकर कच्छ और सौराष्ट्र के कायाकल्प में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र कभी अभाव और आपदाओं के लिए जाने जाते थे, आज वे विश्व स्तरीय रिफाइनरियों, बंदरगाहों, कपड़ा उद्योग और नवीकरणीय ऊर्जा के प्रतीक बन चुके हैं। उन्होंने इस परिवर्तन का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प को दिया, जिसने गुजरात को एक नई पहचान दी है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 2003 में पहले वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन के दौरान, श्री मोदी ने वेलस्पन को भूकंप प्रभावित कच्छ में अपना विस्तार संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया था और आश्वासन दिया था कि यहाँ निवेश किया गया एक-एक रुपया कई गुना रिटर्न देगा। उसी दूरदर्शिता ने वेलस्पन की गुजरात इकाई को दुनिया की अग्रणी होम टेक्सटाइल कंपनी बना दिया, जो आज एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार दे रही है और अमेरिका व ब्रिटेन में 25 प्रतिशत से अधिक बाजार हिस्सेदारी रखती है, यहाँ तक कि कंपनी के उत्पाद विंबलडन तक पहुँच रहे हैं। श्री गोयनका ने वेलस्पन के पाइपलाइन व्यवसाय का उल्लेख करते हुए बताया कि कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी निर्माता बनने के लिए ₹5,000 करोड़ का निवेश कर रही है। उन्होंने श्री मोदी के उस संकल्प की प्रशंसा की जिसमें उन्होंने कहा था— "आपका सपना जितना बड़ा होगा, मेरी प्रतिबद्धता भी उतनी ही बड़ी होगी।" उन्होंने नए सपनों, नए संकल्पों और निरंतर उपलब्धियों के प्रधानमंत्री के आह्वान को दोहराते हुए अपनी बात समाप्त की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आज हम सबके सामने चुनौती न केवल भारत को आत्मनिर्भर बनाने की है, बल्कि 2047 तक इसे एक विकसित राष्ट्र में परिवर्तित करने की भी है।

अपने विचार साझा करते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन श्री मुकेश अंबानी ने कहा कि वाइब्रेंट गुजरात रीजनल समिट प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और दृष्टिकोण का उत्सव है। उन्होंने भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास को पुनर्जीवित करने और देश में अभूतपूर्व विश्वास एवं जीवंतता के युग की शुरुआत करने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को दिया। श्री अंबानी ने इस बात पर जोर दिया कि इतिहास मोदी युग को उस समय के रूप में याद रखेगा जब भारत क्षमता से प्रदर्शन, आकांक्षा से कार्यान्वयन और एक अनुगामी से वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ा। उन्होंने रिलायंस के लिए गुजरात के विशेष स्थान को रेखांकित करते हुए इसे कंपनी का शरीर, हृदय और आत्मा बताया। इसी के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप पाँच मजबूत प्रतिबद्धताओं की भी घोषणा की।

पहली प्रतिबद्धता में रिलायंस अगले पाँच वर्षों में गुजरात में अपने निवेश को दोगुना कर ₹7 लाख करोड़ तक ले जाएगी, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार और समृद्धि का सृजन होगा। दूसरी जामनगर में कंपनी दुनिया का सबसे बड़ा एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा इकोसिस्टम बना रही है, जिसमें सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन, उर्वरक, टिकाऊ ईंधन और उन्नत सामग्री का उत्पादन शामिल होगा। तीसरी, रिलायंस भारत का सबसे बड़ा एआई-रेडी डेटा सेंटर विकसित कर रही है, ताकि प्रत्येक नागरिक के लिए सस्ती एआई सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें, जिसकी शुरुआत गुजरात से होगी। चौथी, रिलायंस फाउंडेशन भारत की ओलंपिक महत्वाकांक्षाओं को सहयोग देगा और गुजरात सरकार के साथ साझेदारी में वीर सावरकर मल्टी-स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का प्रबंधन करते हुए भविष्य के चैंपियनों को प्रशिक्षित करेगा। पाँचवीं, रिलायंस राज्य में स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का विस्तार करेगी, जिसमें जामनगर में एक विश्व स्तरीय अस्पताल की स्थापना भी शामिल है।

श्री अंबानी ने अपने संबोधन का समापन करते हुए इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, श्री मोदी के नेतृत्व में भारत सुरक्षित है। उन्होंने प्रधानमंत्री को राष्ट्र की "अजेय सुरक्षा दीवार" के रूप में वर्णित किया। उन्होंने घोषणा की कि यह भारत के लिए एक निर्णायक दशक है, जिसमें श्री मोदी न केवल देश को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं, बल्कि सक्रिय रूप से इसे आकार भी दे रहे हैं। अंत में, उन्होंने गुजरात और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के प्रति रिलायंस की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया।

इस अवसर पर बोलते हुए, भारत में रवांडा की उच्चायुक्त महामहिम सुश्री जैकलिन मुकांगिरा ने वाइब्रेंट गुजरात रीजनल समिट में रवांडा को कंट्री पार्टनर के रूप में आमंत्रित करने के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में बोलने का अवसर मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इस सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए गुजरात सरकार को बधाई दी और रवांडा एवं भारत के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री मोदी की रवांडा की ऐतिहासिक यात्रा को याद किया, जिसके दौरान छह समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए थे और जरूरतमंद परिवारों को 200 गायें दान की गई थीं। उन्होंने इस मानवीय कार्य की प्रशंसा करते हुए इसे उनकी उदारता और नेतृत्व का एक अनुपम उदाहरण बताया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रपति पॉल कगामे ने पांच बार भारत की यात्रा की है, जिसमें 2017 में वाइब्रेंट गुजरात समिट में उनकी भागीदारी भी शामिल है। सुश्री मुकांगिरा ने जोर देकर कहा कि दोनों नेताओं के साझा प्रयासों ने रवांडा-भारत संबंधों को एक सामरिक स्तर पर पहुँचा दिया है।

सुश्री मुकांगिरा ने रवांडा का वर्णन एक तेजी से विकसित हो रहे और स्थिर राष्ट्र के रूप में किया, जहाँ भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाती है। उन्होंने बताया कि रवांडा गवर्नेंस की पारदर्शिता और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में अफ्रीका में प्रथम स्थान पर है और वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में देश ने 11.8 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर दर्ज की है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत, रवांडा का दूसरा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक और व्यापारिक भागीदार है। उन्होंने भारतीय निवेशकों को मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, आईसीटी, कृषि, खनन, पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया और बेहतर प्रोत्साहन देने का आश्वासन दिया। अपने संबोधन के समापन पर, उन्होंने प्रतिनिधियों को रवांडा आने का निमंत्रण दिया, जो प्रसिद्ध माउंटेन गोरिल्ला और बिग फाइव जानवरों का घर है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करने की रवांडा की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।

भारत में यूक्रेन के राजदूत महामहिम डॉ. ओलेक्जेंडर पॉलिशचुक ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की हृदय से सराहना की। उन्होंने श्री मोदी की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि एक क्षेत्रीय नेता से राष्ट्रीय व्यक्तित्व और अब एक वैश्विक राजनेता के रूप में उनकी यात्रा अद्वितीय है, जिसमें शांति स्थापित करने के उनके वैश्विक प्रयास भी शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि श्री मोदी के विजन के तहत गुजरात अपने विकास मॉडल के लिए वैश्विक स्तर पर पहचाना गया है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल अब पूरे भारत में विस्तृत हो चुका है और राष्ट्र को एक वैश्विक शक्ति बनाने तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में मार्गदर्शन कर रहा है।

उन्होंने गुजरात सरकार और मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के प्रति उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा, संस्थागत साझेदारी और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को रेखांकित किया, जो दोनों देशों के बीच जन-संपर्क और ज्ञान-आधारित संबंधों को मजबूत करते हैं। डॉ. पॉलिशचुक ने याद दिलाया कि यूक्रेन ने वाइब्रेंट गुजरात समिट 2023 में एक साझेदार देश के रूप में गर्व के साथ हिस्सा लिया था और वह इसे आर्थिक सहयोग को गहरा करने के एक रणनीतिक अवसर के रूप में देखता है। उन्होंने बताया कि यूक्रेनी उद्योग वर्तमान में कृषि, इंजीनियरिंग, आईटी, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पहले ही $4 बिलियन तक पहुँच चुका है।

डॉ. पोलिशचुक ने भारतीय कंपनियों को पोलैंड में आगामी यूक्रेन रिकवरी कॉन्फ्रेंस में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने औद्योगिक और तकनीकी सहयोग के विस्तार की संभावनाओं पर जोर दिया, जिसमें मेक इन इंडिया फ्रेमवर्क के तहत रक्षा क्षेत्र में साझेदारी भी शामिल है। उन्होंने उल्लेख किया कि युद्ध काल के दौरान वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की यूक्रेन की ऐतिहासिक यात्रा ने राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की के साथ द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाने के संकल्प को पुनः पुख्ता किया है।

उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि यूक्रेन में स्थायी शांति की स्थापना से भारत-यूक्रेन संबंधों में और अधिक प्रगाढ़ता आएगी, जिसमें गुजरात के साथ साझेदारी भी शामिल है। अंत में, उन्होंने सार्थक चर्चाओं और मजबूत नई साझेदारियों को बढ़ावा देने के लिए वाइब्रेंट गुजरात समिट की सफलता की कामना की।

इस आयोजन में अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल भी उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने 14 ग्रीनफील्ड स्मार्ट गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जीआईडीसी) एस्टेट्स विकसित करने की घोषणा की और राजकोट में जीआईडीसी के मेडिकल डिवाइस पार्क का उद्घाटन भी किया।

वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन 11 और 12 जनवरी 2026 को किया जा रहा है, जो विशेष रूप से कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्रों के 12 जिलों पर केंद्रित है। विशेष रूप से इन्हीं क्षेत्रों के लिए समर्पित यह सम्मेलन, पश्चिमी गुजरात में निवेश और औद्योगिक विकास को एक नई गति देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन के मुख्य फोकस क्षेत्रों में सिरेमिक, इंजीनियरिंग, पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स, मत्स्य पालन, पेट्रोकेमिकल्स, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, खनिज, ग्रीन एनर्जी इकोसिस्टम, कौशल विकास, स्टार्टअप, एमएसएमई, पर्यटन और संस्कृति आदि शामिल हैं। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में जापान, दक्षिण कोरिया, रवांडा और यूक्रेन साझेदार देशों के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

वाइब्रेंट गुजरात के सफल मॉडल की पहुंच और प्रभाव को और अधिक व्यापक बनाने के लिए, पूरे राज्य में चार वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। इस रीजनल कॉन्फ्रेंस का पहला संस्करण 9-10 अक्टूबर 2025 को मेहसाणा में उत्तर गुजरात क्षेत्र के लिए आयोजित किया गया था। वर्तमान संस्करण कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए आयोजित किया जा रहा है। इसके बाद, दक्षिण गुजरात के लिए क्षेत्रीय सम्मेलन 9-10 अप्रैल 2026 को सूरत में और मध्य गुजरात क्षेत्र के लिए 10-11 जून 2026 को वडोदरा में आयोजित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री के विकसित भारत @2047 के विजन के अनुरूप और वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट की सफलता और विरासत को आगे बढ़ाते हुए, इन रीजनल कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना, विभिन्न क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना और वैश्विक जुड़ाव को बढ़ाना है। वाइब्रेंट गुजरात के मंच को सीधे क्षेत्रों तक ले जाने की यह पहल विकेंद्रीकृत विकास, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, नवाचार-आधारित विकास और स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करने पर प्रधानमंत्री के जोर को दर्शाती है।

ये रीजनल कॉन्फ्रेंस न केवल क्षेत्रीय उपलब्धियों को प्रदर्शित करने और नई पहलों की घोषणा करने के लिए एक प्लेटफ़ॉर्म के रूप में कार्य करेंगी, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को सशक्त बनाकर, नवाचार को बढ़ावा देकर और राज्य के हर हिस्से में रणनीतिक निवेश को सुगम बनाकर गुजरात की विकास गाथा को मिलकर लिखने के साधन के रूप में भी काम करेंगे। इन रीजनल कॉन्फ्रेंस की उपलब्धियों को जनवरी 2027 में आयोजित होने वाले वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के अगले संस्करण के दौरान प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा।

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