प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के साणंद में सीजी सेमी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओएसएटी) सुविधा का उद्घाटन किया। इस अवसर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने इस उद्घाटन को अपने लक्ष्यों के प्रति राष्ट्र की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि देश बिना किसी हिचकिचाहट के अपने दृढ़ संकल्पों को निरंतर धरातल पर उतारता है। श्री मोदी ने कहा, "आज का यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि भारत जो भी संकल्प लेता है, उसे पूरी दृढ़ता के साथ पूरा करता है।"
लगभग पाँच वर्ष पूर्व आरंभ की गई रणनीतिक परिकल्पना का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने देश को उन्नत प्रौद्योगिकी के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने के मूल उद्देश्य को स्मरण किया। स्वदेशी डिजाइन और स्थानीय विनिर्माण की व्यापक रणनीतियों से प्रेरित इस तीसरी प्रमुख सुविधा में वाणिज्यिक चिप पैकेजिंग के आधिकारिक शुभारंभ पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की। श्री मोदी ने कहा, "हम 'डिज़ाइन इन इंडिया' और 'मेक इन इंडिया' के मूल मंत्र के साथ सफलतापूर्वक आगे बढ़े हैं।"
परियोजना की तीव्र विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने स्मरण कराया कि उन्होंने वर्ष 2024 में इसकी आधारशिला रखी थी तथा अगस्त 2025 तक चिप परीक्षण का कार्य शीघ्र प्रारंभ होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने परिकल्पना से लेकर पूर्ण क्षमता पर उत्पादन तक की इस अत्यंत तीव्र यात्रा का श्रेय परियोजना से जुड़े अनेक सहयोगियों के सतत् समर्पण तथा एकाग्रता को दिया। श्री मोदी ने कहा, "आधारशिला से उत्पादन तक की यह उल्लेखनीय यात्रा निश्चित रूप से अनेक साथियों की अथक मेहनत का परिणाम है।"

सभा को संबोधित करने से कुछ समय पहले हुई अपनी व्यक्तिगत बातचीत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने सुविधा केंद्र पर कार्यरत समर्पित कार्यबल के साथ अपने अनुभव साझा किए। प्रदर्शनी के अवलोकन के दौरान अनेक युवा पेशेवरों से प्रत्यक्ष संवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने उनके उत्साह, आशावाद और सकारात्मक दृष्टिकोण की सराहना की। श्री मोदी ने कहा, "आज जिन भी युवा साथियों से मेरी बातचीत हुई, वे सभी पूरी तरह आत्मविश्वास से भरे हुए थे।"
नवनिर्मित सुविधा को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के एक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करते हुए प्रधानमंत्री ने भारत, जापान और थाईलैंड के औद्योगिक साझेदारों के संयुक्त प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपक्रम केवल एक सामान्य व्यावसायिक उद्यम नहीं है, बल्कि प्रौद्योगिकीय विश्वास तथा सीमापार साझेदारी का एक सशक्त मॉडल है। श्री मोदी ने कहा, "यह समेकित साझेदारी भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा को पूरी तरह नई गति प्रदान करने जा रही है।"
पिछले सवा दो वर्षों में प्राप्त उल्लेखनीय विस्तार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने प्रतिवर्ष 20 करोड़ इकाइयों के उत्पादन की क्षमता के साथ सक्रिय वाणिज्यिक उत्पादन के प्रारंभ की सराहना की। टीम द्वारा प्रतिवर्ष 500 करोड़ इकाइयों के उत्पादन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रति पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने इस तीव्र प्रगति का श्रेय देशव्यापी प्रौद्योगिकी कार्यक्रम की तेज़ी से बढ़ती गति को दिया। श्री मोदी ने कहा, "मैं पूरी टीम, राज्य सरकार और पूरे देश को कदम-दर-कदम, ईंट-दर-ईंट और चिप-दर-चिप इस उपलब्धि का निर्माण करने के लिए बधाई देता हूँ।"

उपस्थित उद्योग विशेषज्ञों तथा युवाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने वैश्विक औद्योगिक इतिहास से महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करते हुए इस बात पर बल दिया कि वास्तविक विनिर्माण क्षमता केवल अलग-थलग कारखानों से विकसित नहीं होती। उन्होंने सिलिकॉन वैली, ह्सिनचू साइंस पार्क तथा त्सुकुबा साइंस सिटी जैसे विश्वप्रसिद्ध प्रौद्योगिकी केंद्रों का उल्लेख करते हुए व्यापक एवं एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र के विकास की अनिवार्यता पर जोर दिया। श्री मोदी ने कहा, "आज साणंद भी ऐसे ही सशक्त औद्योगिक क्लस्टरों की स्थापना की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है।"
मजबूत घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र के तीव्र विकास का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ ही महीनों में माइक्रोन, केयन्स तथा सीजी सेमी जैसी प्रमुख कंपनियों ने इस क्षेत्र में उत्पादन प्रारंभ किया है। विशेषज्ञ रसायन निर्माताओं, परीक्षण प्रयोगशालाओं, डिजाइन केंद्रों तथा नए स्टार्टअप्स के शीघ्र आगमन की परिकल्पना करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि किस प्रकार स्थानीय उद्योग व्यापक आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों में कई गुना वृद्धि करते हैं। श्री मोदी ने कहा, "यही किसी क्लस्टर की वास्तविक शक्ति है, जहाँ एक उद्योग दस नए उद्योगों को जन्म देता है और अंततः पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बदल देता है।"
इस क्षेत्र में आए अभूतपूर्व उछाल को लेकर देश और विश्वभर में व्याप्त व्यापक उत्साह का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने इस धारणा का खंडन किया कि यह तीव्र विकास कोई पृथक घटना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान विस्तार वास्तव में पिछले दस वर्षों के दौरान निर्धारित दीर्घकालिक प्रौद्योगिकी नीतियों के आधार पर नियोजित रूप से आगे बढ़ने का परिणाम है। श्री मोदी ने कहा, "यह पिछले एक दशक में भारत में आई इलेक्ट्रॉनिक्स क्रांति का स्वाभाविक अगला चरण है।"

स्थानीय विनिर्माण की इस सफलता की पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने अतीत में आयातित मोबाइल फोनों पर निर्भरता और वर्तमान में उत्पादन में आए उछाल के बीच तुलना की। उत्पादन में 33 गुना वृद्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि भारत अब मोबाइल क्षेत्र में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक बन चुका है। श्री मोदी ने कहा, "हमने अपनी यात्रा की शुरुआत सोच-समझकर मोबाइल फोन विनिर्माण से की थी, जिससे आगे चलकर इन उल्लेखनीय उपलब्धियों को प्राप्त किया जा सके।"
हाल के वर्षों में घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र की व्यापक सफलता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने पूरे क्षेत्र की उल्लेखनीय प्रगति के आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 की तुलना में कुल उत्पादन में लगभग सात गुना वृद्धि हुई है, जबकि कुल निर्यात में ग्यारह गुना की प्रभावशाली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। श्री मोदी ने कहा, "हमने संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को सफलतापूर्वक और व्यापक रूप से सुदृढ़ किया है।"
सरकार की रणनीतिक रूपरेखा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अंतिम उपभोक्ता उत्पादों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना ही अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि उनका आधार बनने वाले घटकों (कंपोनेंट्स) के निर्माण में भी आत्मनिर्भरता हासिल करना उद्देश्य है। विश्व की प्रौद्योगिकी को संचालित करने वाली चिप्स के देश में ही निर्माण की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए उन्होंने संपूर्ण - आरंभ से अंत तक की - घरेलू मूल्य श्रृंखला की रूपरेखा प्रस्तुत की। श्री मोदी ने कहा, "पहले प्रोडक्ट, फिर कंपोनेंट्स और अब सेमीकंडक्टर; यही मेक इन इंडिया का अगला चरण है।"

पारिस्थितिकी तंत्र के भावी चरणों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रधानमंत्री ने संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाने के लिए उच्च प्रौद्योगिकी सामग्रियों तथा महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर बल दिया। डिजाइन से लेकर पैकेजिंग तक फैले स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र की परिकल्पना प्रस्तुत करते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत का युवा इन्हीं स्वदेशी चिप्स का उपयोग करते हुए एआई तथा रोबोटिक्स के क्षेत्र में अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी क्रांति लेकर आएगा। श्री मोदी ने कहा, "हमारा युवा मेड इन इंडिया चिप्स का उपयोग करते हुए अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी क्रांति को गति देगा।"
युवाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि प्रत्येक बड़ी औद्योगिक क्रांति ने अभूतपूर्व रोजगार अवसरों का सृजन किया है। सूचना प्रौद्योगिकी तथा स्मार्टफोन विनिर्माण के विस्तार से उत्पन्न व्यापक अवसरों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रौद्योगिकी परिवर्तन भी इसी प्रकार नई संभावनाओं के विशाल द्वार खोलेगा। श्री मोदी ने कहा, "सेमीकंडक्टर तथा एआई क्रांति का यह दौर अनुसंधान और डिजाइन से लेकर आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन तक असंख्य अवसर लेकर आ रहा है।"
भावी कार्यबल से बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को निरंतर ढालते रहने का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के समय में प्रासंगिक बने रहने के लिए नई विशेषज्ञता अर्जित करते रहना तथा नवोन्मेषी सोच विकसित करना अनिवार्य है। एआई द्वारा सृजित नई संभावनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं से इन उभरते अवसरों का पूरे उत्साह के साथ लाभ उठाने का आग्रह किया। श्री मोदी ने कहा, "भारत के युवाओं को कुछ नया सीखने और उसे साकार करने का यह अद्भुत अवसर किसी भी स्थिति में नहीं गंवाना चाहिए।"

इन प्रौद्योगिकीय उपलब्धियों के समावेशी सामाजिक प्रभाव को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने नई सुविधा में कार्यरत जनजातीय समुदायों की युवा महिलाओं की प्रेरणादायी कहानियाँ साझा कीं। उन्होंने साधारण पृष्ठभूमि तथा आईटीआई की पढ़ाई से आगे बढ़ते हुए मलेशिया में उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने तक के उन युवतियों के सफ़र और अपने गृह क्षेत्रों से पहले कभी बाहर न जाने के बावजूद विश्व की अत्याधुनिक विनिर्माण प्रक्रियाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए उनकी सराहना। श्री मोदी ने कहा, "असाधारण सपने देखने वाली ये बेटियाँ आज मेड इन इंडिया चिप विनिर्माण प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा हैं।"
अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की तीव्र गति से हो रही प्रगति को दोहराया तथा कुछ ही महीने पहले घोषित अनेक विनिर्माण सुविधाओं के समयबद्ध तरीके से साकार होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने वैश्विक निवेशकों को नीतिगत स्थिरता, स्पष्ट निर्णय-प्रक्रिया तथा अद्वितीय क्रियान्वयन क्षमता का भरोसा दिलाते हुए कहा कि प्रणालीगत आर्थिक सुधारों की गति को और तेज किया जाएगा। श्री मोदी ने कहा, "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ 140 करोड़ भारतीय निश्चित रूप से वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाएंगे।"
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The Semicon India programme is gathering rapid momentum...
— PMO India (@PMOIndia) July 4, 2026
Step by step.
Brick by brick.
Chip by chip. pic.twitter.com/EaEfWPNT2F
The expansion of the semiconductor industry in India did not happen overnight.
— PMO India (@PMOIndia) July 4, 2026
It is the next step in the electronics revolution that has taken place in India over the past decade. pic.twitter.com/fxQkRpY4W2
First products, then components and now semiconductors... India is building the entire electronics value chain.
— PMO India (@PMOIndia) July 4, 2026
This is the roadmap to Viksit Bharat. This is the next phase of Make in India. pic.twitter.com/aw556v0pmP
Our goal is to build a complete semiconductor ecosystem in India, from chip design to fabrication and packaging. pic.twitter.com/7CiVSTi5oE
— PMO India (@PMOIndia) July 4, 2026
India's youth will power the AI, robotics and next-gen tech revolution with Made in India chips. pic.twitter.com/pM8YJ3fgOx
— PMO India (@PMOIndia) July 4, 2026


