भारत ने विविधता को अपने लोकतंत्र की ताकत बना लिया है: प्रधानमंत्री
भारत ने दिखाया है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं लोकतंत्र को स्थायित्व, गति और व्यापकता प्रदान करती हैं: प्रधानमंत्री
भारत में लोकतंत्र का अर्थ है अंतिम व्यक्ति तक सेवाएं पहुंचाना: प्रधानमंत्री
हमारा लोकतंत्र एक विशाल वृक्ष की तरह है जिसकी जड़ें गहरी हैं; हमारे यहां वाद-विवाद, संवाद और सामूहिक निर्णय लेने की लंबी परंपरा है: प्रधानमंत्री
भारत हर वैश्विक मंच पर ग्लोबल साउथ के मुद्दों को उठाता रहा है और अपनी G20 अध्यक्षता के दौरान वैश्विक एजेंडे के केंद्र में उनकी प्राथमिकताओं को रखा है: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर में संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रमंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर श्री मोदी ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में अध्यक्ष की भूमिका अद्वितीय होती है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष को बोलने का अधिक अवसर नहीं मिलता, लेकिन उनकी जिम्मेदारी दूसरों की बात सुनने और यह सुनिश्चित करने में निहित है कि सभी को अपनी बात कहने का मौका मिले। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि धैर्य अध्यक्षों का सबसे आम गुण है, जो शोर मचाने वाले और अति उत्साही सांसदों को भी मुस्कुराते हुए संभाल लेते हैं।

इस विशेष अवसर पर अतिथियों का हार्दिक स्वागत करते हुए श्री मोदी ने उनकी उपस्थिति पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आप जिस स्थान पर बैठे हैं, वह भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने याद दिलाया कि औपनिवेशिक शासन के अंतिम वर्षों में, जब भारत की स्वतंत्रता निश्चित थी, संविधान सभा ने इसी केंद्रीय कक्ष में संविधान का मसौदा तैयार किया था। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि स्वतंत्रता के बाद 75 वर्षों तक, यह भवन भारत की संसद के रूप में कार्य करता रहा, जहां राष्ट्र के भविष्य को आकार देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णय और चर्चाएं हुईं। श्री मोदी ने बताया कि देश ने अब इस ऐतिहासिक स्थल को संविधान सदन नाम देकर लोकतंत्र को समर्पित कर दिया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में देश ने अपने संविधान के कार्यान्वयन के 75 वर्ष पूरे किए हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संविधान सदन में सभी विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति भारत के लोकतंत्र के लिए एक अत्यंत विशेष क्षण है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का यह सम्मेलन चौथी बार भारत में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने इस सम्मेलन के मुख्य विषय 'संसदीय लोकतंत्र का प्रभावी क्रियान्वयन' पर प्रकाश डाला। श्री मोदी ने याद दिलाया कि जब भारत को आजादी मिली थी, तब यह आशंका व्यक्त की गई थी कि इतनी विविधता वाले देश में लोकतंत्र टिक नहीं पाएगा। उन्होंने कहा कि भारत ने इसी विविधता को अपने लोकतंत्र की ताकत बना लिया है। उन्होंने आगे कहा कि एक और बड़ी चिंता यह थी कि यदि किसी तरह भारत में लोकतंत्र कायम भी रह जाए, तो विकास संभव नहीं होगा। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा, "भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं लोकतंत्र को स्थायित्व, गति और व्यापकता प्रदान करती हैं।" उन्होंने बताया कि आज भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, भारत में यूपीआई के माध्यम से विश्व की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली है, भारत सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक, दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक, तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप परितंत्र, तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार, चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क, सबसे बड़ा दूध उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है।

श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा, “भारत में लोकतंत्र का अर्थ है अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना।” उन्होंने आगे कहा कि भारत जन कल्याण की भावना से काम करता है और यह सुनिश्चित करता है कि लाभ बिना किसी भेदभाव के हर व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि इसी कल्याणकारी भावना के कारण हाल के वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने कहा, “भारत में लोकतंत्र सफल रहा है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में लोकतंत्र इसलिए सफल है क्योंकि यहां जनता सर्वोपरि है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत में जनता की आकांक्षाओं और सपनों को प्राथमिकता दी गई है, और यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनके रास्ते में कोई बाधा न आए, प्रक्रियाओं से लेकर प्रौद्योगिकी तक हर चीज का लोकतंत्रीकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक भावना भारत की रगों और मन में बसी है। श्री मोदी ने कोविड-19 महामारी का उदाहरण दिया, जब पूरी दुनिया इस महामारी से जूझ रही थी। उन्होंने कहा कि देश के भीतर चुनौतियों के बावजूद, भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाएं और टीके उपलब्ध कराए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जनता के हितों, कल्याण और खुशहाली के लिए काम करना भारत का मूलमंत्र है, और इस मूलमंत्र को भारत के लोकतंत्र ने पोषित किया है।

श्री मोदी ने कहा कि दुनिया भर में कई लोग भारत को सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में जानते हैं लेकिन भारत के लोकतंत्र का पैमाना वास्तव में असाधारण है। 2024 में हुए आम चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव था। लगभग 98 करोड़ नागरिकों ने मतदान के लिए पंजीकरण कराया था, जो कुछ महाद्वीपों की जनसंख्या से भी अधिक है। उन्होंने बताया कि 8,000 से अधिक उम्मीदवार और 700 से अधिक राजनीतिक दल चुनाव लड़ रहे थे और इन चुनावों में महिला मतदाताओं की रिकॉर्ड भागीदारी भी देखी गई। प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि आज भारतीय महिलाएं मतदान में न केवल भाग ले रही हैं बल्कि नेतृत्व भी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि भारत की राष्ट्रपति, जो देश की सर्वोच्च नागरिक हैं, एक महिला हैं और दिल्ली की मुख्यमंत्री भी एक महिला हैं, जहां यह सम्मेलन आयोजित हो रहा है। उन्होंने आगे बताया कि ग्रामीण और स्थानीय सरकारी निकायों में भारत में लगभग 15 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं, यह जमीनी स्तर के नेताओं का लगभग 50 प्रतिशत है, जो विश्व स्तर पर अद्वितीय है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र विविधता से समृद्ध है। उन्होंने बताया कि यहां सैकड़ों भाषाएं बोली जाती हैं, विभिन्न भाषाओं में 900 से अधिक टेलीविजन चैनल हैं और हजारों समाचार पत्र और पत्रिकाएं प्रकाशित होती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बहुत कम समाज इतनी व्यापक विविधता का प्रबंधन कर पाते हैं लेकिन भारत इस विविधता का जश्न मनाता है क्योंकि यहां के लोकतंत्र की नींव मजबूत है। भारत के लोकतंत्र की तुलना गहरी जड़ों वाले एक विशाल वृक्ष से करते हुए, श्री मोदी ने भारत की वाद-विवाद, संवाद और सामूहिक निर्णय लेने की लंबी परंपरा पर बल दिया और याद दिलाया कि भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत के 5,000 वर्ष से अधिक पुराने पवित्र ग्रंथों और वेदों में उन सभाओं का उल्लेख है जहां लोग मुद्दों पर चर्चा करने और विचार-विमर्श एवं सहमति के बाद निर्णय लेने के लिए एकत्रित होते थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भगवान बुद्ध की भूमि है, जहां बौद्ध संघ खुली और सुनियोजित चर्चाएं करता था और सर्वसम्मति या मतदान के माध्यम से निर्णय लिए जाते थे। उन्होंने तमिलनाडु के एक 10वीं शताब्दी के शिलालेख का भी उल्लेख किया जिसमें एक ग्राम सभा का वर्णन है जो लोकतांत्रिक मूल्यों पर काम करती थी, जिसमें जवाबदेही और निर्णय लेने के लिए स्पष्ट नियम थे। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा, "समय-समय पर भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को कसौटी पर परखा गया है, विविधता ने इन्हें सहारा दिया है और पीढ़ी दर पीढ़ी ये मजबूत होते गए हैं।"

श्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रमंडल की कुल जनसंख्या का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा भारत में रहता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने सभी देशों के विकास में यथासंभव योगदान देने का निरंतर प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल के सतत विकास लक्ष्यों में, चाहे वह स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विकास या नवाचार के क्षेत्र हों, भारत पूरी जिम्मेदारी के साथ अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर रहा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत अपने सहयोगी देशों से सीखने के लिए निरंतर प्रयासरत है और यह भी सुनिश्चित करता है कि भारत के अनुभव अन्य राष्ट्रमंडल देशों के लिए लाभकारी हों।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया अभूतपूर्व बदलाव से गुजर रही है, यह विकासशील देशों के लिए नए रास्ते तलाशने का भी सही समय है। उन्होंने कहा कि भारत हर वैश्विक मंच पर विकासशील देशों की चिंताओं को मजबूती से उठा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि जी20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने वैश्विक एजेंडा के केंद्र में विकासशील देशों की चिंताओं को रखा था। श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत लगातार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि नवाचारों से पूरे विकासशील देशों और राष्ट्रमंडल देशों को लाभ मिले। उन्होंने कहा कि भारत ओपन-सोर्स प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म भी विकसित कर रहा है ताकि विकासशील देशों के भागीदार देश (अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के विकासशील देश) भारत में स्थापित प्रणालियों के समान प्रणालियां विकसित कर सकें।

श्री मोदी ने बताया कि इस सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र के ज्ञान और समझ को बढ़ावा देने के विभिन्न तरीकों का पता लगाना है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस प्रयास में अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारियों दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि इससे लोग अपने देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से अधिक निकटता से जुड़ पाते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संसद पहले से ही इस तरह की पहल कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अध्ययन यात्राओं, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों और इंटर्नशिप के माध्यम से नागरिकों को संसद को अधिक गहराई से समझने के अवसर दिए गए हैं। उन्होंने आगे बताया कि भारत ने बहसों और सदन की कार्यवाही का क्षेत्रीय भाषाओं में तत्क्षण अनुवाद करने के लिए एआई का उपयोग शुरू कर दिया है। श्री मोदी ने कहा कि एआई की सहायता से संसद से संबंधित संसाधनों को भी लोगों के अनुकूल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे युवा पीढ़ी को संसद के कामकाज को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिल रहा है।

श्री मोदी ने राष्ट्रमंडल से जुड़े 20 से अधिक देशों का दौरा करने के अवसर का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्हें कई संसदों को संबोधित करने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि वे जहां भी गए, बहुत कुछ सीखा। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें जो भी सर्वोत्तम अभ्यास देखने को मिलता है, उसे वे लोकसभा अध्यक्ष के साथ-साथ राज्यसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के साथ साझा करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन सीखने और साझा करने की प्रक्रिया को और समृद्ध करेगा। अपने संबोधन के समापन में उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।

इस कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश, अंतर संसदीय संघ के अध्यक्ष डॉ. तुलिया एकसन, राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के अध्यक्ष डॉ. क्रिस्टोफर कलीला सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

28वीं सीएसपीओसी की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला कर रहे हैं। इसमें दुनिया के विभिन्न हिस्सों से 42 राष्ट्रमंडल देशों और 4 अर्ध-स्वायत्त संसदों के 61 अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी भाग ले रहे हैं।

इस सम्मेलन में समकालीन संसदीय मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला पर विचार-विमर्श होगा, जिसमें मजबूत लोकतांत्रिक संस्थानों को बनाए रखने में अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों की भूमिका, संसदीय कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का उपयोग, सांसदों पर सोशल मीडिया का प्रभाव, संसद की सार्वजनिक समझ को बढ़ाने के लिए अभिनव रणनीतियां और मतदान से परे नागरिक भागीदारी आदि शामिल हैं।

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