प्रधानमंत्री ने महिला सशक्तिकरण को सरकारी योजनाओं और पहलों की मुख्य प्राथमिकता बताया
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की नारी शक्ति की उपलब्धियां और आकांक्षाएं विकसित भारत की ओर राष्ट्र की यात्रा का मार्ग प्रशस्त करती रहेंगी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर देशवासियों को बधाई दी और भारत की नारी शक्ति के सामर्थ्य, दृढ़ संकल्प और उपलब्धियों को नमन किया।

प्रधानमंत्री ने देश की महिलाओं को बधाई दी और भारत की प्रगति को आकार देने में उनकी बढ़ती भूमिका को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में महिलाएं दृढ़ संकल्प, रचनात्मकता और अद्वितीय उत्साह के साथ योगदान दे रही हैं और उनकी उपलब्धियां राष्ट्र को प्रेरित करने के साथ-साथ विकसित भारत के निर्माण के सामूहिक संकल्प को सशक्त करती हैं।

महिला नेतृत्व वाले विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण सरकार की कई योजनाओं और पहलों के केंद्र में है। उन्होंने दोहराया कि सरकार ऐसे अवसर पैदा करने के लिए प्रतिबद्ध है जो प्रत्येक महिला को अपनी पूर्ण क्षमता प्राप्त करने और भारत की विकास यात्रा में योगदान देने में सक्षम बनाते हैं।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारत की नारी शक्ति की उपलब्धियां राष्ट्र के लिए गर्व की बात है और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं द्वारा निभाई गई परिवर्तनकारी भूमिका की एक सशक्त याद दिलाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ रहा है, महिलाओं की आकांक्षाएं और योगदान एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र की ओर देश की सामूहिक यात्रा का मार्गदर्शन करना जारी रखेंगे।

श्री मोदी ने पिछले एक दशक में जमीनी स्तर पर महिलाओं के जीवन में आए बदलावों की एक झलक भी साझा की और देशभर में महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई पहलों के प्रभाव पर प्रकाश डाला।

एक्स पर पोस्ट की एक श्रृंखला के माध्यम से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा:

"अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, मैं हमारी समस्त नारी शक्ति को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ।

आज हर क्षेत्र में महिलाएँ अपने अटूट संकल्प, रचनात्मकता और अद्वितीय उत्साह के साथ भारत की प्रगति को नया आकार दे रही हैं। उनकी उपलब्धियाँ हमारे राष्ट्र को प्रेरित करती हैं और एक विकसित भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करती हैं।

महिला सशक्तिकरण हमारी विभिन्न योजनाओं और पहलों के मूल आधार में है। हम ऐसे अवसर बनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध हैं, जो प्रत्येक महिला को अपनी पूर्ण क्षमता को पहचानने और भारत की विकास यात्रा में अपना योगदान देने में सक्षम बना सके।

#NayeBharatKiNariShakti”

"भारत की नारी शक्ति की उपलब्धियां हमारे लिए गर्व का विषय है और राष्ट्र निर्माण में उनकी परिवर्तनकारी भूमिका का एक सशक्त प्रमाण हैं। जैसे-जैसे भारत प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है, महिलाओं की आकांक्षाएं और उनका योगदान एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र की ओर हमारी सामूहिक यात्रा का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

#NayeBharatKiNariShakti”

"पिछले एक दशक के दौरान जमीनी स्तर पर महिलाओं के जीवन में आए क्रांतिकारी बदलावों की एक झलक...

#NayeBharatKiNariShakti”

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प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के अपमान और संथाल संस्कृति के अनादर की निंदा की
March 07, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा राष्ट्रपति जी के अपमान और संथाल संस्कृति के साथ किए गए लापरवाही भरे व्यवहार की कड़ी निंदा की है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह घटना शर्मनाक है और ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जो भी लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास करता है, वो इस घटना से बहुत निराश है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति जी खुद आदिवासी समुदाय से हैं, और उन्होंने जो दर्द और पीड़ा व्यक्त की है उसने भारत के लोगों को बहुत दुःखी किया है।

श्री मोदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं और राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन जिम्मेदार है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय के साथ पश्चिम बंगाल सरकार इतना लापरवाही भरा व्यवहार कर रही है।

राष्ट्रपति के कार्यालय को राजनीति से ऊपर बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कार्यालय की पवित्रता का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की कि पश्चिम बंगाल सरकार और टीएमसी को सद्बुद्धि आएगी।

प्रधानमंत्री ने X पर लिखा;

“यह शर्मनाक और अभूतपूर्व है। जो भी लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास करता है, वो निराश है।

राष्ट्रपति जी खुद आदिवासी समुदाय से हैं, उन्होंने जो दर्द और पीड़ा ज़ाहिर की है, उससे भारत के लोग बहुत दुःखी हैं।

पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने सच में सारी हदें पार कर दी हैं। राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन ज़िम्मेदार है।

यह भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय के साथ पश्चिम बंगाल सरकार इतनी लापरवाही से पेश आती है।

राष्ट्रपति का कार्यालय राजनीति से ऊपर है और इस कार्यालय की पवित्रता का सदैव सम्मान किया जाना चाहिए। आशा है कि पश्चिम बंगाल सरकार और टीएमसी को सद्बुद्धि आएगी।”