प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने क्रोध की विनाशकारी प्रकृति और व्यक्तिगत कल्याण एवं सामूहिक प्रगति के लिए आंतरिक संयम के महत्व का उल्‍लेख करते हुए एक गहन संदेश साझा किया।

प्रधानमंत्री ने एक प्राचीन संस्कृत श्लोक का उद्धरण देते हुए बताया कि क्रोध किस प्रकार से विवेक को कमजोर करता है, सामाजिक सद्भाव को बाधित करता है और मानवीय क्षमता को कम करता है।

एक्स पर अपनी पोस्ट में श्री मोदी ने कहा:

“क्रोधः प्राणहरः शत्रुः क्रोधो मित्रमुखो रिपुः।

क्रोधो ह्यसिर्महातीक्ष्णः सर्व क्रोधोऽपकर्षति॥”

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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम साझा करते हुए आदर्श और श्रेष्ठ व्यक्ति के गुणों पर प्रकाश डाला
July 22, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए व्यक्तिगत, सामाजिक तथा राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने में एक आदर्श तथा वास्तविक अर्थों में उत्कृष्ट व्यक्ति के गुणों पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स पर लिखा;

"परकार्येषु युक्तात्मा स्वकार्ये क्षिप्रसाधनम्।

सुहृत्कार्येषु निर्वृत्ती राजकार्येषु विक्रमः ।।"

जो व्यक्ति दूसरों के कार्यों में पूरी निष्ठा से लगा रहता है, अपने व्यक्तिगत कार्यों को शीघ्रता एवं कुशलता से पूरा करता है, मित्रों के कार्यों को नि:स्वार्थ भाव से संपन्न करता है और राष्ट्र के कर्तव्यों में अपना पूर्ण पराक्रम व शौर्य प्रदर्शित करता है, वही श्रेष्ठ है।