प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एशियाई तीरंदाजी चैंपियनशिप 2025 में भारतीय तीरंदाजी टीम को उसके अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए बधाई दी है।

श्री मोदी ने कहा कि टीम ने चैंपियनशिप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 6 स्वर्ण सहित कुल 10 पदक जीते हैं। उन्होंने 18 वर्षों के अंतराल के बाद हासिल किए गए ऐतिहासिक रिकर्व पुरुष स्वर्ण पदक का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत स्पर्धाओं में मजबूत प्रदर्शन और कंपाउंड खिताब की सफलतापूर्वक रक्षा की भी प्रशंसा की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उल्लेखनीय उपलब्धि देश भर के कई महत्वाकांक्षी एथलीटों को प्रेरित करेगी।

सोशल मीडिया एक्स पर प्रधानमंत्री ने कहा;

"एशियाई तीरंदाजी चैंपियनशिप 2025 में हमारी तीरंदाजी टीम को उसके अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए बधाई। भारतीय तीरंदाज़ी टीम ने 6 स्वर्ण सहित 10 पदक जीते हैं। इनमें से उल्लेखनीय 18 वर्षों के बाद ऐतिहासिक रिकर्व पुरुष स्वर्ण पदक था। साथ ही, व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भी मजबूत प्रदर्शन और कंपाउंड खिताब की सफलतापूर्वक रक्षा भी हुई। यह वास्तव में एक बहुत ही विशेष उपलब्धि है, जो कई उभरते एथलीटों को प्रेरित करेगी।"

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प्रधानमंत्री ने सम्मान और सराहना के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
June 17, 2026

प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि स्नेहपूर्ण सम्मान और स्वीकृति व्यक्ति को मूल्यवान, गौरवान्वित और संतुष्ट महसूस कराती है। उन्होंने उल्लेख किया कि ऐसी पहचान न केवल आत्मविश्वास को बढ़ाती है, बल्कि व्यक्ति में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार भी करती है।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित साझा किया-

“त्वत्सम्भावितमात्मानं बहु मन्यामहे वयम्‌ ।

प्रायः प्रत्ययमाधत्ते स्वगुणेषूत्तमादरः।।”

यह सुभाषित संदेश देता है कि जब हमें किसी व्यक्ति द्वारा सम्मान के साथ स्वीकार किया जाता है, तो हम अत्यंत गर्व और सौभाग्य का अनुभव करते हैं। यह पूर्णतः सत्य है कि महान व्यक्तियों द्वारा दिया गया सम्मान किसी व्यक्ति के भीतर उसके स्वयं के गुणों के प्रति आत्मविश्वास को गहराई से जगाता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“स्नेहपूर्ण सम्मान और स्वीकार्यता व्यक्ति को गर्व और संतोष का अनुभव कराती है। इससे जहां आत्मविश्वास बढ़ता है, वहीं एक नई ऊर्जा और उत्साह का भी संचार होता है।

त्वत्सम्भावितमात्मानं बहु मन्यामहे वयम्‌।

प्रायः प्रत्ययमाधत्ते स्वगुणेषूत्तमादरः।।”