प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री श्री रैला ओडिंगा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। श्री मोदी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी है "मेरे प्रिय मित्र और केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री श्री रैला ओडिंगा के निधन से मुझे गहरा दु:ख हुआ है। वह एक प्रखर राजनेता और भारत के प्रिय मित्र थे। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मुझे उन्हें करीब से जानने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और हमारा सहयोग वर्षों तक कायम रहा।" श्री मोदी ने यह भी कहा कि श्री रैला ओडिंगा का भारत की संस्कृति, मूल्यों और हमारे प्राचीन ज्ञान के प्रति विशेष लगाव था और यह भारत-केन्या सम्‍बंधों को मज़बूत करने के उनके प्रयासों में परिलक्षित होता था।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:

"मेरे प्रिय मित्र और केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री, श्री रैला ओडिंगा के निधन से मुझे गहरा दुःख हुआ है। वे एक प्रखर राजनेता और भारत के प्रिय मित्र थे। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मुझे उन्हें करीब से जानने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और हमारा सहयोग वर्षों तक कायम रहा। भारत की संस्कृति, मूल्यों और प्राचीन ज्ञान के प्रति उनका विशेष लगाव था। यह भारत-केन्या सम्‍बंधों को मज़बूत करने के उनके प्रयासों में परिलक्षित होता था। वे विशेष रूप से भारत की आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रशंसक थे, उन्होंने अपनी बेटी के स्वास्थ्य लाभ में इनके सकारात्मक प्रभाव को देखा था। इस दुःख की घड़ी में मैं उनके परिवार, मित्रों और केन्या के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।"

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प्रधानमंत्री ने पावन पृथ्‍वी को राष्ट्र की शक्ति के स्रोत के रूप में वर्णित करने वाले संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया
March 10, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने संस्कृत में रचित सुभाषितम् को साझा किया, जिसमें पावन पृथ्‍वी को राष्ट्र की शक्ति के स्रोत के रूप में वर्णित किया गया है।

“यार्णवेऽधि सलिलमग्र आसीद्यां मायाभिरन्वचरन्मनीषिणः।

यस्या हृदयं परमे व्योमन्त्सत्येनावृतममृतं पृथिव्याः।

सा नो भूमिस्त्विषिं बलं राष्ट्रे दधातूत्तमे॥”

सुभाषितम् का अर्थ है कि पृथ्वी, जो महासागरों के रूप में जल से परिपूर्ण है और बाहरी रूप से जल से घिरी है, जिसे विद्वानों ने अपने ज्ञान से जाना है और जिसका हृदय विशाल आकाश में शाश्वत सत्य से ओत-प्रोत है - वह पृथ्वी एक महान राष्ट्र के रूप में हमारी ऊर्जा और शक्ति को बनाए रखे।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर अपनी पोस्‍ट में लिखा;

“यार्णवेऽधि सलिलमग्र आसीद्यां मायाभिरन्वचरन्मनीषिणः।

यस्या हृदयं परमे व्योमन्त्सत्येनावृतममृतं पृथिव्याः।

सा नो भूमिस्त्विषिं बलं राष्ट्रे दधातूत्तमे॥”