मध्य प्रदेश में सिंचाई, बिजली, सड़क, रेल, जलापूर्ति, कोयला और उद्योग के क्षेत्रों में लगभग 17,000 करोड़ रुपये की अनेक विकास परियोजनाओं का शिलान्‍यास और राष्ट्र को समर्पित किया
मध्य प्रदेश में साइबर तहसील परियोजना की शुरुआत की
"मध्यप्रदेश की डबल की इंजन सरकार जन-जन कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है"
"भारत तभी विकसित होगा, जब राज्य विकसित होंगे"
" जब भारत विकसित राष्ट्र बनने की राह पर है, तो उज्जैन में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी उस 'काल चक्र' की साक्षी बनेगी"
"डबल इंजन की सरकार दोगुनी गति से विकास कार्य कर रही है"
"सरकार गांवों को आत्मनिर्भर बनाने पर बहुत जोर दे रही है"
"सिंचाई क्षेत्र में हम मध्य प्रदेश में एक नई क्रांति होते देख रहे हैं"
"बीते10 वर्षों में पूरे विश्‍व में भारत की साख बहुत अधिक बढ़ी है"
'युवाओं के सपने मोदी का संकल्प हैं'

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज 'विकसित भारत, विकसित मध्य प्रदेश' कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश में लगभग 17,000 करोड़ रुपये की अनेक विकास परियोजनाओं का शिलान्‍यास और राष्ट्र को समर्पित किया। ये परियोजनाएं सिंचाई, बिजली, सड़क, रेल, जलापूर्ति, कोयला और उद्योग सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करती हैं। प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश में साइबर तहसील परियोजना की भी शुरुआत की।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत मध्य प्रदेश के डिंडोरी में सड़क दुर्घटना में हुई लोगों की मौत पर शोक व्‍यक्‍त करते हुए की और कहा कि दुर्घटना में घायल हुए लोगों के लिए सभी इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ''दुख की इस घड़ी में मैं मध्य प्रदेश की जनता के साथ हूं।''

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य की सभी लोकसभा और विधानसभा सीटों से लाखों नागरिक विकसित भारत के संकल्प के साथ इस आयोजन से जुड़े। उन्होंने हाल के दिनों में अन्य राज्यों द्वारा किए गए इसी तरह के संकल्पों को स्वीकार करते हुए कहा कि भारत तभी विकसित होगा जब राज्य विकसित होंगे।

मध्य प्रदेश में कल से शुरु हो रहे 9 दिवसीय विक्रमोत्सव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह वर्तमान में हो रहे विकास के साथ-साथ राज्य की गौरवशाली विरासत का भी उत्‍सव है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि उज्जैन में लगाई गई वैदिक घड़ी इस बात का प्रमाण है कि सरकार विरासत और विकास को साथ लेकर चलती है। प्रधानमंत्री ने दुख व्यक्त करते हुए कहा, ''बाबा महाकाल की नगरी किसी समय दुनिया के लिए काल गणना का केंद्र थी, लेकिन इसके महत्व को भुला दिया गया।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि इस उपेक्षा को दूर करने के लिए सरकार ने दुनिया की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को उज्जैन में फिर से स्थापित किया है और जब भारत विकसित राष्ट्र बनने की राह पर है तो यह उस 'काल चक्र' की साक्षी बनेगी।

आज के कार्यक्रम से संबद्ध पेयजल, सिंचाई, बिजली, सड़क, खेल परिसर और सामुदायिक हॉल से जुड़ी 17,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश के 30 स्टेशनों पर आधुनिकीकरण का कार्य शुरू होने की भी जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने कहा, ''डबल इंजन की सरकार दोगुनी गति से विकास कार्य कर रही है।''

प्रधानमंत्री ने मोदी की गारंटी पर भरोसा करने के लिए देश का आभार व्यक्त किया। विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने सरकार के तीसरे कार्यकाल में भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प सामने रखा।

प्रधानमंत्री ने कृषि, उद्योग और पर्यटन पर डबल इंजन सरकार द्वारा दिए जा रहे बल को रेखांकित किया और मां नर्मदा नदी पर तीन प्रमुख जल परियोजनाओं की आधारशिला रखने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल जनजातीय क्षेत्रों में सिंचाई से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि इससे पेय जलापूर्ति की समस्या भी सुलझेगी। प्रधानमंत्री ने कहा, "सिंचाई क्षेत्र में हम मध्य प्रदेश में एक नई क्रांति होते देख रहे हैं।" उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना से बुंदेलखण्ड क्षेत्र के लाखों परिवारों का जीवन बदलने वाला है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों के लिए सबसे बड़ी सेवा उनके खेतों तक पानी पहुंचाना है। आज के सिंचाई क्षेत्र की तुलना 2014 से पहले के 10 साल की अवधि से करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय देश में 40 लाख हेक्टेयर खेती को सूक्ष्म सिंचाई से जोड़ा गया था, जबकि आज 90 लाख हेक्टेयर को सूक्ष्‍म सिंचाई से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा, "यह वर्तमान सरकार की प्राथमिकताओं और प्रगति के पैमाने को दर्शाता है।"

छोटे किसानों की एक और गंभीर समस्या यानी भंडारण की कमी का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने हाल ही में शुरू की गई 'दुनिया की सबसे बड़ी भंडारण परियोजना' की चर्चा की। आने वाले दिनों में हजारों बड़े गोदामों का निर्माण होगा और देश में 700 लाख मीट्रिक टन की नई भंडारण क्षमता होगी। उन्होंने कहा, "सरकार इस पर 1.25 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।"

प्रधानमंत्री ने सहकारिता के माध्यम से गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के सरकार के संकल्प को भी दोहराया। उन्होंने बताया कि सहकारिता के लाभ किस प्रकार दूध और गन्ने के प्रामाणिक क्षेत्रों से अनाज, फल और सब्जियों तथा मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों विस्‍तारित हो रहे हैं। ग्रामीण आय बढ़ाने के उद्देश्य से लाखों गांवों में सहकारी संस्थाएं बनाई जा रही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पीएम स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीण संपत्ति विवादों का स्थायी समाधान खोजा जा रहा है। उन्होंने योजना के अच्छे कार्यान्वयन के लिए मध्य प्रदेश की सराहना की क्योंकि 100 प्रतिशत गांवों का ड्रोन द्वारा सर्वेक्षण किया गया है और अब तक 20 लाख से अधिक स्वामित्व कार्ड जारी किए जा चुके हैं।

मध्य प्रदेश के 55 जिलों में साइबर तहसील परियोजना की शुरुआत का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि यह नाम हस्तांतरण और रजिस्ट्री से संबंधित मुद्दों के लिए डिजिटल समाधान प्रदान करेगा, जिससे लोगों का समय और खर्च बचेगा।

मध्य प्रदेश को अग्रणी औद्योगिक राज्यों में से एक बनाने की युवाओं की इच्छा से सहमति व्‍यक्‍त करते हुए प्रधानमंत्री ने राज्य में पहली बार मताधिकार का उपयोग करने जा रहे मतदाताओं से दृढ़तापूर्वक कहा कि वर्तमान सरकार नए अवसरों का सृजन करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''युवाओं के सपने मोदी का संकल्प हैं।'' उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' का महत्वपूर्ण स्तंभ बनेगा। उन्होंने इस विजन को साकार करने की दिशा में उठाए गए कदमों के रूप में सीतापुर,मुरैना के मेगा लेदर और फुटवियर क्लस्टर, इंदौर के रेडीमेड परिधान उद्योग के लिए टेक्सटाइल पार्क, मंदसौर में औद्योगिक पार्क के विस्तार और धार औद्योगिक पार्क के विकास का उल्लेख किया। भारत में खिलौना विनिर्माण को बढ़ावा देने और खिलौना निर्यात में वृद्धि का सबब बने सरकार के प्रयासों का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में आज की विकास परियोजनाओं के कारण बुधनी में खिलौना बनाने वाले समुदाय के लिए अनेक अवसरों का सृजन होगा।

समाज के उपेक्षित वर्गों की देखभाल के लिए अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप प्रधानमंत्री ने पारंपरिक कारीगरों को प्रचारित किए जाने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह किस प्रकार नियमित रूप से हर मंच से इन कलाकारों का प्रचार करते हैं और इस बात का उल्‍लेख किया कि विदेशी गणमान्य हस्तियों को भेंट किए जाने वाले उनके उपहारों में हमेशा कुटीर उद्योग के उत्पाद शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि उनका 'वोकल से लोकल' का प्रचार भी स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को प्रचारित करता है।

बीते 10 वर्षों में भारत की बढ़ती प्रोफ़ाइल पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री ने निवेश और पर्यटन के प्रत्यक्ष लाभों को रेखांकित किया। उन्होंने हाल में मध्य प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में हुई प्रगति पर गौर करते हुए ओंकारेश्वर और ममलेश्वर में आने वाले भक्तों की बढ़ती संख्या का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य की स्मृति में ओंकारेश्वर में बनने वाला एकात्म धाम और 2028 में होने वाला उज्जैन सिंहस्थ पर्यटन विकास का उत्प्रेरक है। उन्होंने कहा, ''इच्छापुर से इंदौर के ओंकारेश्वर तक 4-लेन सड़क बनने से श्रद्धालुओं को और सुविधा मिलेगी। आज लोकार्पित रेल परियोजनाओं से मध्य प्रदेश की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। जब कनेक्टिविटी बेहतर होती है,तो चाहे कृषि हो, पर्यटन हो या उद्योग, तीनों को लाभ होता है।”

प्रधानमंत्री ने बीते 10 वर्षों में महिलाओं के विकास को अवरुद्ध करने वाले सभी मुद्दों से निपटने की दिशा में सरकार के प्रयासों की ओर ध्यान आकर्षित किया और इस बात पर जोर दिया कि अगले 5 वर्ष हमारी बहनों और बेटियों के अभूतपूर्व सशक्तिकरण के साक्षी बनेंगे। उन्होंने कहा कि हर गांव में लखपति दीदियां होंगी और ड्रोन दीदियां नई कृषि क्रांति लाएंगी। उन्होंने अगले 5 वर्षों में महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के बारे में चर्चा करते हुए एक रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें उनके कल्याण के लिए किए गए कार्यों के कारण बीते 10 वर्षों में गांवों के परिवारों की आय में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, "रिपोर्ट के मुताबिक, शहरों की तुलना में गांवों में आय तेजी से बढ़ रही है।" अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 10 साल में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आये हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मध्य प्रदेश इसी प्रकार नई ऊंचाइयों को छूता रहेगा।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश में 5500 करोड़ रुपये से ज्यादा की सिंचाई परियोजनाओं का शिलान्यास किया।इन परियोजनाओं में अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसनिया बहुउद्देशीय परियोजना शामिल हैं। इन परियोजनाओं से डिंडोरी, अनुपपुर और मंडला जिलों में 75,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सिंचित किया जा सकेगा और क्षेत्र में बिजली आपूर्ति और पेयजल में वृद्धि होगी। प्रधानमंत्री ने राज्य में 800 करोड़ से अधिक की दो सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं भी राष्ट्र को समर्पित कीं। इनमें पारसडोह सूक्ष्म सिंचाई परियोजना और औलिया सूक्ष्म सिंचाई परियोजना शामिल हैं। ये सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं बैतूल और खंडवा जिलों में 26,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई की जरूरतों को पूरा करेंगी।

प्रधानमंत्री ने 2200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित तीन रेलवे परियोजनाएं भी राष्ट्र को समर्पित कीं। इन परियोजनाओं में वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी - जखलौन एवं धौरा - आगासोड मार्ग पर तीसरी लाइन की परियोजना; न्यू सुमावली-जोरा अलापुर रेलवे लाइन में गॉज परिवर्तन परियोजना; और पोवारखेड़ा-जुझारपुर रेल लाइन फ्लाईओवर की परियोजना शामिल हैं। ये परियोजनाएं रेल कनेक्टिविटी में सुधार करेंगी और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देंगी।

राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए प्रधानमंत्री ने पूरे मध्य प्रदेश में लगभग 1000 करोड़ रुपये की अनेक औद्योगिक परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इन परियोजनाओं में मुरैना जिले के सीतापुर में मेगा चमड़ा, जूते एवं सहायक उपकरण केंद्र; इंदौर में परिधान उद्योग के लिए प्लग एंड प्ले पार्क; औद्योगिक पार्क मंदसौर (जग्गाखेड़ी चरण-2); और धार जिले में औद्योगिक पार्क पीथमपुर का उन्नयन परियोजना शामिल हैं।

प्रधानमंत्री कोयला क्षेत्र की 1000 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं देश को समर्पित कीं। इनमें जयंत ओसीपी सीएचपी साइलो, एनसीएल सिंगरौली; और दुधिचुआ ओसीपी सीएचपी-साइलो शामिल हैं।

मध्य प्रदेश में बिजली क्षेत्र को मजबूती प्रदान करते हुए प्रधानमंत्री ने पन्ना, रायसेन, छिंदवाड़ा और नर्मदापुरम जिलों में स्थित छह सबस्टेशनों की आधारशिला रखी। इन सबस्टेशनों से प्रदेश के ग्यारह जिलों भोपाल, पन्ना, रायसेन, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, विदिशा, सागर, दमोह, छतरपुर, हरदा और सीहोर के लोगों को लाभ मिलेगा। इस सबस्टेशनों से मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों को भी लाभ होगा।

प्रधानमंत्री ने अमृत 2.0 के तहत लगभग 880 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं और राज्य के कई जिलों में जलापूर्ति प्रणालियों के संवर्धन और सुदृढ़ीकरण के लिए अन्य योजनाओं की आधारशिला रखी। प्रधानमंत्री ने खरगोन में जलापूर्ति बढ़ाने की परियोजना भी राष्ट्र को समर्पित की।

सरकारी सेवाओं की प्रदायगी में सुधार लाने की दिशा में कदम उठाते हुए मध्य प्रदेश में साइबर तहसील परियोजना संपूर्ण खसरे की बिक्री-खरीद का दाखिल खारिज (या म्‍यूटेशन) आदि से अंत तक कागत रहित और फेसलेस ऑनलाइन निपटान और राजस्व रिकॉर्ड में सुधार सुनिश्चित करेगी। यह परियोजना, जो राज्य के सभी 55 जिलों में लागू की गई है, पूरे मध्‍य प्रदेश के लिए एक एकल राजस्व न्यायालय भी प्रदान करेगी। इसमें आवेदक को अंतिम आदेश की प्रमाणित प्रति भेजने के लिए ईमेल/व्हाट्सएप का भी उपयोग किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने अन्य परियोजनाओं के अलावा मध्य प्रदेश में कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं का शुभारंभ मध्य प्रदेश में बुनियादी ढांचे, सामाजिक आर्थिक विकास और जीवन में सुगमता को बढ़ावा देने के प्रधानमंत्री के विजन को रेखांकित करता है।

पूरा भाषण पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India's strong growth outlook intact despite global volatility: Govt

Media Coverage

India's strong growth outlook intact despite global volatility: Govt
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM’s remarks in the Rajya Sabha
April 17, 2026

आदरणीय सभापति जी,

सदन की ओर से, मेरी तरफ से, मैं श्रीमान हरिवंश जी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं और शुभकामनाएं भी देता हूं। राज्यसभा उपसभापति के रूप में लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना, यह अपने आप में इस सदन का आपके प्रति जो गहरा विश्वास है और बीते हुए कालखंड में आपके अनुभव का जो सदन को लाभ मिला है, सबको साथ लेकर चलने का आपका जो प्रयास रहा है, उसको एक प्रकार से सदन ने आज एक मोहर लगा दी है और यह अपने आप में यह एक अनुभव का सम्मान है, एक सहज कार्य शैली का सम्मान है और एक सहज कार्य शैली की स्वीकृति भी है। हमने सबने हरिवंश जी के नेतृत्व में सदन की शक्ति को और अधिक प्रभावी होते हुए भी देखा है और मैं कह सकता हूं कि केवल सदन की कार्यवाही का संचालन ही नहीं, वह अपने जीवन के जो भूतकाल के अनुभव हैं, उसको भी बहुत ही सटीक तरीके से सदन को समृद्ध करने में उपयोग लाते हैं। उनका यह अनुभव पूरी कार्यवाही को, संचालन को और सदन के माहौल को और अधिक परिपक्व को बनाता है। मुझे विश्वास है, उपसभापति जी का नया कार्यकाल उसी भावना, संतुलन और समर्पण के साथ आगे बढ़ेगा और हम सबके प्रयासों से सदन की गरिमा को नई ऊंचाई प्राप्त होगी।

आदरणीय सभापति जी,

हरिवंश जी का जन्म यूपी के गांव में हुआ और सहज रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण उन्हें अपने गांव के विकास में विद्यार्थी काल से भी कुछ ना कुछ करते रहे। उनकी शिक्षा-दीक्षा काशी में हुई और इन सारे विषयों पर मुझे भूतकाल में बोलने का अवसर मिला, तो मैं काफी कुछ कह चुका हूं। इसलिए मैं आज इसको दोहराता नहीं हूं। एक बात का उल्लेख आज जरूर मैं करूंगा, आज 17 अप्रैल है और 17 अप्रैल 1927, हमारे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी की जन्म जयंती भी है और विशेषता यह है कि आज 17 अप्रैल को आप जब तीसरी बार इस दायित्व को संभालने जा रहे हैं और वह भी चंद्रशेखर जी की जन्म जयंती पर और चंद्रशेखर जी के साथ आपका जुड़ाव, उनके प्रति आपका लगाव और एक प्रकार से आप उनके सहयात्री रहे, उनके पूरे कार्यकाल में, तो यह एक अपने आप में एक बहुत ही बड़ा सुयोग है। अपने चंद्रशेखर जी के जीवन पर किताबें भी लिखी हैं और चंद्रशेखर जी के एक वृहद जीवन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक बहुत बड़ा काम भी आपने किया है और इसलिए आपके लिए एक बहुत बड़ा विशेष अवसर बन जाता है कि चंद्रशेखर जी की जन्म जयंती पर आपके तीसरा कार्यकाल का प्रारंभ हो रहा है। हरिवंश जी का सार्वजनिक जीवन केवल संसदीय कामों तक सीमित नहीं रहा है। पत्रकारिता के उच्च मानदंड, यह आज भी आदर्श के रूप में रेखांकित किए जाते हैं। लंबा जीवन पत्रकारिता का रहा है, लेकिन पत्रकारिता में भी उन्होंने उच्च मानदंड को हमेशा आधार माना। हम सब जानते हैं, उनके लेखनी में धार है, लेकिन उनकी वाणी में और व्यवहार में सौम्‍यता और शिष्‍टता भरी-भरी रहती है, यह अपने आप में और मैं जब गुजरात में था, तब भी मैं उनकी लेखों को पढ़ने की मेरी आदत रही थी और मैं देखता था कि वह अपना पक्ष बड़ी दृढ़ता के साथ रखते थे और मैं अनुभव करता था कि उसमें काफी अध्ययन के बाद उसका निचोड़ उसमें प्रकट होता था। पत्रकारिता में भी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का उनका निरंतर प्रयास रहा और एक सफल प्रयास भी रहा और हम देखते हैं, सदन में भी चाहे पॉलिसी हो या प्रोसेस हो, उन बातों का कहीं ना कहीं छाया हमें हमेशा नजर आती है और यह हम सबके लिए सुखद अनुभव है। वह समाज की वास्तविकताओं के साथ गहरे जुड़ाव के साथ काम करने वाले व्यक्ति रहे हैं। मैं तो कहूंगा, जो चाहे लोकसभा हो या राज्यसभा हो, जो नए सांसद आते हैं, जो हरिवंश जी से बहुत कुछ सीख सकते हैं, बहुत कुछ बातें करके उनसे जान सकते हैं, क्योंकि जब वह पत्रकारिता में थे, तो उनकी कॉलम चलती थी, हमारा सांसद कैसा हो, हमारा पार्लियामेंट मेंबर कैसा हो, तब उनको शायद पता नहीं होगा, कभी उनको ही बैठना पड़ेगा। लेकिन वह लिखते थे और वह बातों में बहुत व्यापकता रहती थी। सदन की गरिमा और बैठने वाले सदस्य का दायित्व, अब उसके आचार विचार को लेकर भी बहुत गहरा उनका अध्ययन रहता था और उन बातों का उपयोग आज हमारे सदन के साथी, उनके साथ बैठकर के बहुत कुछ जान सकते हैं, सीख सकते हैं। समय की पाबंदी एक डिसिप्लिन लाइफ में और अपने कर्तव्‍यों के प्रति गंभीरता, यह आपकी विशेषता रही है और शायद इसी के कारण आप सर्व स्वीकृत व्‍यक्‍तित्‍व आपका विकसित हुआ है। हमने देखा होगा जब से वह राज्यसभा के सदस्य बने हैं, मैं कह सकता हूं कि पूर्ण समय वह सदन में होते हैं। सभापति जी की अनुपस्थिति में सदन को संभालने का काम तो करते ही हैं, लेकिन बाकी समय भी यहां कमेटी का कोई भी व्यक्ति बैठा हो, तो भी वह सदन में हमेशा अपनी मौजूदगी रहती है। हर बात को सुनते हैं, उस समय सदन का जो संचालन करते हैं, उनके कार्य को भी देखते हैं और यह इसके पीछे उनको अपना जो दायित्व है, उसके प्रति उनकी जो प्रतिबद्धता है, उसके कारण यह संभव होता है और यह हम सबके लिए सीखने जैसा है और मैंने देखा है कि वह पूरा समय इन चीजों के लिए वह खपा देते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

उपसभापति के तौर पर सदन को कैसे चलाया, सदन में सदस्य के तौर पर क्या योगदान दिया, इस बारे में हम स्वाभाविक रूप से एक सकारात्मक चर्चा करते रहते हैं। लेकिन सदन के बाहर, जनता के बीच वह कैसे अपने लोकतांत्रिक और सामाजिक दायित्‍वों को निभाते हैं, यह भी हम सार्वजनिक जीवन में जो लोग हैं, उनके लिए सचमुच में ध्यान आकर्षित करने वाले विषय हैं और हमें उसको देखना चाहिए। मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं कि काम सराहनीय तो है ही हैं, अनुकरणीय भी हैं। हमारा देश युवा देश है और मैंने देखा है कि हरिवंश जी ने अपने समय का उपयोग सबसे ज्यादा युवाओं के बीच में बिताना पसंद किया है। युवाओं में लगातार गंभीर विषयों पर जागरूकता बने, एक प्रकार से लोक शिक्षा का काम निरंतर चलता रहे, यह अपने आप में वह लगातार करते रहते हैं, तो देश भर में उनका भ्रमण रहता है। वह मीडिया की नजरों में बहुत ज्यादा रहने का उनका शौक नहीं है, लेकिन भ्रमण और कार्यक्रमों की संख्या उनकी लगातार चलती रहती है। 2018 में, जब उन्होंने राज्यसभा के उपसभापति की भूमिका निभानी शुरू की, उसके बाद जो मेरी जानकारी है, कॉलेजेस और यूनिवर्सिटीज में 350 कार्यक्रम किए हैं। यह एक बहुत बड़ा काम है। देश की यूनिवर्सिटीज और कॉलेजेस में 350 से अधिक कार्यक्रम, जाना-आना, उनके साथ बैठना, बातें करना, उसके लिए विषयों की तैयारी करना, यह अपने आप में बहुत बड़ा, एक प्रकार से आपने बृहतस्य के रूप में इस काम को किया है और युवाओं से ही जुड़ने के लक्ष्य को आपने जरा भी ओझल नहीं होने दिया है। और विकसित भारत का सपना युवाओं के लिए भी क्यों होना चाहिए, इस मूल विषय को अलग-अलग तरीके से जिस प्रकार से विद्यार्थियों का मूड हों, वह बताते रहते हैं। विद्यार्थियों में, युवा पीढ़ी में एक आत्मविश्वास कैसे पैदा हो, निराशा से वह हमेशा-हमेशा बाहर रहें, इन सारे विषयों की चर्चा वह करते हैं। उनके कुछ ऐतिहासिक रेफरेंस के साथ बात करते हैं कि हम ऐसे क्या कारण हैं कि हम जितनी तेजी से जाना चाहिए था, आगे नहीं जा पाए, अब अवसर क्या आया है, सारी बातें हो और देश इतनी बड़ी छलांग लगा सकता है, उसका आत्मविश्वास भरने का काम उनके द्वारा होता है। आजकल देश में लिटरेचर फेस्टिवल, एक बड़ा सिलसिला चला है और अब तो वह टीयर-2, टीयर-3 सिटीज़ तक भी वह सिलसिला चला है। लिटरेचर फेस्टिवल्स में भी हरिवंश जी का अक्सर जाना होता है और उस समाज का, उस तबके को भी वह अपने विचारों से प्रभावित करते रहते हैं, प्रेरित करते रहते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

मैंने उनके जीवन का एक प्रसंग जो सुना है, शायद हो सकता है, सार्वजनिक तौर में मेरी जानकारी सटीक ना भी हो। मैंने सुना है कि 1994 में हरिवंश जी पहली बार विदेश यात्रा की और वह अमेरिका गए। जब अमेरिका गए, तो अपने सारे कार्यक्रमों के अलावा उनसे पूछा गया कि आप कहीं और जाना चाहते हैं, कुछ करना चाहते हैं। तो उन्होंने आग्रह से कहा कि मैं जरूर यह विकसित देश है, तो मैं उसकी यूनिवर्सिटी को देखना-समझना चाहता हूं और वहाँ की ऐसी कौन सी शिक्षा और कल्चर है, जिसके कारण यह देश इतना आगे बढ़ रहा है और उन्होंने काफी समय अपने निर्धारित कार्यक्रमों के सिवाय वह पहली अमेरिका की यात्रा में सिर्फ और सिर्फ यूनिवर्सिटीज में बिताया, उसका अध्ययन करने का काम किया। यानी यह जो ललक थी उनके मन में, यह अगर यह विकसित देश की यूनिवर्सिटी से जो निकलता है, तो हिंदुस्तान की यूनिवर्सिटीज़ भी ऐसी हों, ताकि विकसित भारत का सपना वहीं से रेखांकित किया जा सके।

आदरणीय सभापति जी,

MPs को MPLAD फंड के संबंध में तो काफी चर्चा रहती है और एक बड़ा प्रसंगी का विषय भी रहता है MPs में और कभी-कभी तो यह भी संघर्ष रहता है कि MPLAD फंड इतना है और वहां उधर एमएलए फंड ज्यादा है, उसकी चर्चा रहती है। लेकिन एमपी फंड का उपयोग कैसे हो, MPLAD जो फंड की बातें हैं, उसमें हरिवंश जी के विचारों को तो मैंने स्वयं भी सुना है, मैं प्रभावित हूं इससे, लेकिन हमारी भी कुछ मजबूरी रही है। शायद हम उनकी अपेक्षा के अनुसार उसको कर नहीं पाए हैं, क्योंकि सबको ऐसे विषय में साथ लेना जरा कठिन होता है। लेकिन उन्होंने खुद की उस जिम्मेदारी को कैसे निभाया है, मैं समझता हूं वह भी हम लोगों ने, उन्होंने यह MPLAD फंड था, जो अपने जो विचार हैं, उसके विचार को भी नीचे धरातल पर उतारने के लिए उपयोग किया, शिक्षा क्षेत्र और युवा पीढ़ी, यह उसके सारे केंद्र में रहा, MPLAD फंड उन्होंने इस्तेमाल करने के लिए एक मिसाल पेश की है। उन्होंने विश्वविद्यालय, शिक्षण संस्थानों में ऐसे अध्ययन केंद्र स्थापित किया और उसका प्रभाव लंबे अरसे तक रहने वाला है और उसमें भी उन्होंने प्रोजेक्ट ओरिएंटेड, समस्या के समाधान को केंद्र में रखा। जैसे लुप्त होती जा रही भारतीय भाषाओं, उनके संरक्षण के लिए उन्होंने आईआईटी पटना में एक अध्ययन केंद्र के लिए MPLAD फंड का उपयोग किया, तो उस काम को वह लगातार वहां हो रहा है। एक और उन्होंने काम किया, जो बिहार में कुछ क्षेत्र हैं, जहां भयावह भूकंप की घटनाएं रोज घटती रहती हैं, नेपाल में भी एक छोटा सा भूकंप आ जाए, तो भी उस क्षेत्र का प्रभावित करता है। इस काम को ध्यान में रखते हुए उन्होंने MPLAD फंड से सेंटर फॉर अर्थक्वेक इंजीनियरिंग के रूप में एक स्टडी सेंटर रिसर्च के लिए खुलवाया है। यानी वह स्टडी का काम करना, रिसर्च करना, उस पर लगातार काम कर रहा है। हम जानते हैं कि जैसा मैंने कहा है, जय प्रकाश जी का गांव सिताब दियारा हरिवंश जी वहीं हैं और वहां गंगा और घाघरा दो नदी के बीच में एक गांव है, तो हमेशा ही जल के कारण जो कटाव की समस्या रहती है, वो गांव परेशान रहता है और नदी धारा भी बदलती रहती है, तो विनाश भी बहुत होता रहता है। उसको भी ध्यान में रखते हुए उन्होंने MPLAD फंड से इसके वैज्ञानिक अध्ययन के लिए उन्होंने पटना की आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी में एक नदी अध्ययन केंद्र खुलवाया है। पटना के ही चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्था में वो बिजनेस इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर बनवा रहे हैं। एआई के इस दौर में मगध विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर बनाया है। यानी MPLAD फंड का एक निर्धारित दिशा में काम कैसे किया जा सकता है, इसका एक उदाहरण आपने प्रस्तुत किया है।

आदरणीय सभापति जी,

हम सभी ने अनुभव किया है कि लोग जब अपने गांव से स्थानांतरण करते हैं, एक दूसरे शहर में जाते हैं, तो जीवन में एक प्रकार से गांव से कट जाते हैं। हरिवंश जी का जीवन आज भी गांव से जुड़ा रहता है, अपने गांव से जुड़ा रहता है। वह लगातार वहां के सुख दुख के साथी बन करके वह अपना जो भी कंट्रीब्यूशन कर सकते हैं, वह करते रहते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

जिस संसद की नई इमारत में बैठे हैं, उसका जब निर्माण कार्य चल रहा था, तब मुझे उनके साथ निकट से काम करने का अवसर आया। और मैं अनुभव कर रहा था कि जो विचार मेरे मन में आते थे, मैं हरिवंश जी से कहता था, हम ऐसा करें तो कैसा होगा, दो दिन में वो बराबर परफेक्ट उसको लेकर आते थे, कहीं नामकरण करना है, उसके पहचान इस सदन की कैसे बने, तो काफी कुछ कंट्रीब्यूशन सदन के निर्माण में, उसकी आर्ट गैलरी में, विभिन्न द्वार के नाम रखने हों, यानी हर प्रकार से मेरे एक साथी के रूप में हम दोनों को और मुझे बड़ा आनंददायक रहा वो अनुभव काम का।

आदरणीय सभापति जी,

हरिवंश जी के सदन को चलाने की कुशलता को तो हम भली भांति देखे हैं, लेकिन साथ-साथ उन्होंने राज्यों की विधानसभाएं, विधान परिषदें और वहां जो प्रीसाइडिंग ऑफिसर्स हैं, उनको भी कैसे मदद रूप होना, उनके लिए किस प्रकार से आवश्यक उनके ट्रेनिंग के लिए काम किया जाना, उसके लिए भी काफी समय दिया और उन्होंने लगातार उनके लिए समय दिखाया। कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन में भी उन्होंने भारत की डेमोक्रेटिक व्यवस्था की छाप छोड़ने में बहुत बड़ी सक्रिय भूमिका निभाई है। मुझे पूरा विश्वास है कि 21वीं सदी का यह दूसरा क्वार्टर यह सदन को बहुत कुछ कंट्रीब्यूट करना है। देश को प्रगति के पथ पर ले जाने में, विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में, मुझे विश्वास है कि सदन के द्वारा बहुत कुछ होगा और उसके कारण पीठाधीश सबका दायित्व बहुत बड़ा होता है। हम सबका बड़े विश्वास से मैं कह सकता हूं कि सभी साथी आप जो चाहते होंगे, उसको पूरा करने के लिए सहयोग करते रहेंगे और आपके काम को कठिनाइयों में ना परिवर्तित करें इसके लिए ताकि आप ज्यादा आउटकम दे सकते हैं और मुझे विश्वास है सब लोग इसको करेंगे और मैंने पहले भी कहा था कि हरि कृपा पर है सब कुछ और हरि तो यहां के भी है, हरि वहां के भी है और हरि यही बैठेंगे। तो हरि कृपा बनी रहे। इसी एक अपेक्षा के साथ मेरी आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!