राष्ट्र को एकजुट करने में सरदार पटेल के अमूल्य योगदान का राष्ट्रीय एकता दिवस सम्मान करता है, यह दिन हमारे समाज में एकता के बंधन को मजबूत करे: प्रधानमंत्री
भारत उनके दृष्टिकोण और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से प्रेरित है, उनके प्रयास एक मजबूत राष्ट्र की दिशा में काम करने के लिए हमें प्रेरित करते रहते हैं: श्री नरेन्द्र मोदी
आज से शुरू हुए सरदार पटेल की 150वीं जयंती वर्ष को अगले 2 वर्षों तक पूरे देश में एक उत्सव के रूप में मनाया जाएगा, इससे ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का हमारा संकल्प और मजबूत होगा: प्रधानमंत्री
महाराष्ट्र के ऐतिहासिक रायगढ़ किले की छवि केवड़िया के एकता नगर में भी दिखाई देती है, जो सामाजिक न्याय, देशभक्ति और राष्ट्र प्रथम के मूल्यों की पावन भूमि रही है: श्री नरेन्द्र मोदी
एक सच्चे भारतीय होने के नाते हम सभी देशवासियों का यह कर्तव्य है कि हम जोश और उत्साह के साथ देश की एकता के लिए हर संभव प्रयास करें : प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में देश में सुशासन के नए मॉडल ने भेदभाव की हर गुंजाइश को खत्म कर दिया है
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ‘विविधता में एकता’ के साथ जीने के हर प्रयास में सफलता पाई है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश का हर नागरिक खुश है कि आजादी के सात दशक बाद एक देश, एक संविधान का संकल्प पूरा हुआ है
पिछले 10 वर्षों में हमने कई ऐसे मुद्दों का समाधान किया है जो राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा थे: श्री नरेन्द्र मोदी
हमारे अथक प्रयासों से हमारे आदिवासी भाई-बहनों को विकास के साथ-साथ बेहतर भविष्य का विश्वास भी मिला है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हमारे सामने एक ऐसा भारत है जिसके पास दृष्टि, दिशा और दृढ़ संकल्प है
हमें कुछ लोगों से सावधान रहना होगा जो भारत की बढ़ती ताकत और एकता की भावना से परेशान हैं, जो देश को तोड़ना चाहते हैं और समाज को बांटना चाहते हैं: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के केवड़िया में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में हिस्सा लिया और सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने एकता दिवस की शपथ भी दिलाई और राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर एकता दिवस परेड भी देखी। राष्ट्रीय एकता दिवस हर साल 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “सरदार साहब के ओजस्वी शब्द...स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास यह कार्यक्रम...एकता नगर का यह मनोरम दृश्य...यहां आयोजित अद्भुत प्रदर्शन...मिनी इंडिया की यह झलक...सब कुछ इतना अद्भुत है...यह प्रेरित करने वाला है।” प्रधानमंत्री ने सभी देशवासियों को राष्ट्रीय एकता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 15 अगस्त और 26 जनवरी की तरह ही 31 अक्टूबर को यह आयोजन पूरे देश को नई ऊर्जा से भर देता है।

प्रधानमंत्री ने दीपावली के मौके पर देश और दुनिया में रहने वाले सभी भारतीयों को अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस बार राष्ट्रीय एकता दिवस, दीपावली के साथ-साथ एकता के इस उत्सव को मनाने का अद्भुत संयोग लेकर आया है। उन्होंने कहा, “दीपावली, दीपों के माध्यम से पूरे देश को जोड़ती है, पूरे देश को प्रकाशित करती है और अब दीपावली का उत्सव भारत को दुनिया से भी जोड़ रहा है।”

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि इस वर्ष का एकता दिवस और भी विशेष है क्योंकि आज से सरदार पटेल की 150वीं जयंती का वर्ष शुरू हो रहा है। अगले 2 वर्षों तक देश सरदार पटेल की 150वीं जयंती मनाएगा। यह भारत के लिए उनके असाधारण योगदान के प्रति देश की श्रद्धांजलि है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दो वर्षों का यह उत्सव एक भारत, श्रेष्ठ भारत के हमारे संकल्प को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि यह अवसर हमें सिखाएगा, जो कार्य असंभव लगते हैं कड़ी मेहनत और लगन से वे संभव किए जा सकते हैं।

श्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात को रेखांकित किया कि कैसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने आक्रमणकारियों को खदेड़ने के लिए सभी को एकजुट किया। महाराष्ट्र का रायगढ़ किला आज भी वह कहानी कहता है। उन्होंने कहा कि रायगढ़ किला सामाजिक न्याय, देशभक्ति और राष्ट्र प्रथम के मूल्यों की पावन भूमि रही है। प्रधानमंत्री ने कहा, "छत्रपति शिवाजी महाराज ने रायगढ़ किले में राष्ट्र के विभिन्न विचारों को एक उद्देश्य के लिए एकजुट किया था। आज यहां एकता नगर में, हम रायगढ़ के उस ऐतिहासिक किले की छवि देख रहे हैं... आज इस पृष्ठभूमि में हम एक विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि के लिए यहां एकजुट हुए हैं।"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दोहराया कि पिछले एक दशक में भारत ने एकता और अखंडता को मजबूत करने में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। यह प्रतिबद्धता विभिन्न सरकारी प्रयासों में स्पष्ट है, जिसका उदाहरण एकता नगर और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी है। यह स्मारक न केवल नाम से बल्कि अपने निर्माण में भी एकता का प्रतीक है क्योंकि इसे देश भर के गांवों से एकत्र किए गए लोहे और मिट्टी से बनाया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एकता नगर में एकता नर्सरी, हर महाद्वीप की वनस्पतियों वाला विश्व वन, देशभर के स्वस्थ खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने वाला चिल्ड्रन न्यूट्रिशन पार्क, विभिन्न क्षेत्रों से आयुर्वेद को उजागर करने वाला आरोग्य वन और एकता मॉल है, जहां देश भर के हस्तशिल्प को एक साथ प्रदर्शित किया जाता है।

प्रधानमंत्री ने आह्वान किया कि एक सच्चे भारतीय होने के नाते हम सभी का यह कर्तव्य है कि हम देश की एकता की दिशा में किए गए हर प्रयास का जश्न मनाएं। उन्होंने रेखांकित किया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मराठी, बंगाली, असमिया, पाली और प्राकृत को शास्त्रीय दर्जा देने का सभी ने स्वागत किया है और यह राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है। भाषा के साथ-साथ, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में रेल नेटवर्क का विस्तार, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार तक हाई-स्पीड इंटरनेट की पहुंच और पहाड़ी क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क जैसी कनेक्टिविटी परियोजनाएं ग्रामीण और शहरी विभाजन को पाट रही हैं। यह आधुनिक बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करता है कि कोई भी क्षेत्र पीछे न छूटे, जिससे पूरे भारत में एकता की भावना मजबूत हो।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, “पूज्य बापू कहा करते थे कि विविधता में एकता के साथ रहने की हमारी क्षमता को लगातार कसौटी पर परखा जाएगा और हमें हर कीमत पर इस परीक्षा में सफल होना है।” श्री मोदी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत विविधता में एकता के साथ रहने के हर प्रयास में सफल रहा है। सरकार ने अपनी नीतियों और निर्णयों में एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को लगातार मजबूत किया है। प्रधानमंत्री ने आधार कार्ड के माध्यम से “एक राष्ट्र, एक पहचान” और जीएसटी और राष्ट्रीय राशन कार्ड जैसे “एक राष्ट्र” मॉडल स्थापित करने के अतिरिक्त प्रयासों सहित अन्य सरकारी प्रयासों की सराहना की, जिससे एक अधिक एकीकृत प्रणाली बनाई गई है, जो सभी राज्यों को एक ही ढांचे के तहत जोड़ती है एकता के हमारे प्रयासों के हिस्से के रूप में, हम अब एक राष्ट्र, एक चुनाव, एक राष्ट्र, एक नागरिक संहिता, यानी धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता पर काम कर रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने दस वर्षों के सुशासन पर विचार करते हुए जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा, “पहली बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने भारतीय संविधान के तहत शपथ ली,” जो भारत की एकता के लिए एक प्रमुख उपलब्धि है। उन्होंने अलगाववाद और आतंकवाद को नकारने और भारत के संविधान और लोकतंत्र के साथ खड़े होने के लिए जम्मू-कश्मीर के लोगों की देशभक्ति की भावना की प्रशंसा की।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव से जुड़े अन्य मुद्दों के समाधान के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी और पूर्वोत्तर में लंबे समय से जारी संघर्ष को सुलझाने में हासिल की गई प्रगति का उल्लेख किया। श्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि किस प्रकार बोडो समझौते ने असम में 50 साल के संघर्ष को समाप्त कर दिया है। उन्होंने नक्सलवाद के असर को कम करने में मिली सफलता का उल्लेख करते हुए कहा, "भारत की एकता और अखंडता के लिए एक बड़ी चुनौती" के रूप में उभरा नक्सवाद सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण अंतिम सांस ले रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के भारत के पास दूरदृष्टि, दिशा और दृढ़ संकल्प है। यह एक ऐसा भारत जो मजबूत, समावेशी, संवेदनशील, सतर्क, विनम्र और विकास के पथ पर भी अग्रसर है। यह शक्ति और शांति दोनों के महत्व को समझता है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक अशांति के बीच भारत के तेजी से विकास की सराहना की, जिसने भारत को सामर्थ्यवान बनाए रखते हुए शांति के प्रतीक के रूप में स्थापित किया। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों को लेकर उन्होंने कहा, "भारत एक वैश्विक मित्र के रूप में उभर रहा है।" उन्होंने एकता और सतर्कता के महत्व को भी रेखांकित करते हुए कहा कि कुछ ताकतें भारत की प्रगति से परेशान हैं और भारत के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाने और विभाजन के बीज बोने का लक्ष्य रखती हैं। उन्होंने भारतीयों से इन विभाजनकारी तत्वों को पहचानने और राष्ट्रीय एकता की रक्षा करने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की समाप्ति में सरदार पटेल को उद्धृत करते हुए देशवासियों से एकता के लिए प्रतिबद्ध रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, " हमें यह याद रखना है कि भारत विविधता का देश है और विविधता को बनाए रखते हुए एकता की भावना को मजबूत किया जा सकता है। एकता के दृष्टिकोण से अगले 25 वर्ष काफी महत्वपूर्ण हैं और इसलिए हमें एकता के अपने इस मंत्र को कमजोर नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह तीव्र आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। यह सामाजिक सद्भाव के लिए आवश्यक है। यह सच्चे सामाजिक न्याय, नौकरियों और निवेश के लिए आवश्यक है।" प्रधानमंत्री ने प्रत्येक नागरिक से भारत के सामाजिक सद्भाव, आर्थिक विकास और एकता के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करने में शामिल होने का आह्वान किया।

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February 27, 2026

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।