आत्मनिर्भर भारत सेंटर फॉर डिज़ाइन (एबीसीडी) और समुन्नति - द स्टूडेंट बिनाले का उद्घाटन किया
कार्यक्रम के 7 विषयों पर आधारित 7 प्रकाशनों का अनावरण किया
स्मारक डाक टिकट जारी किया
"इंडिया आर्ट, आर्किटेक्चर एंड डिज़ाइन बिनाले, देश की विविध विरासत और जीवंत संस्कृति का उत्सव"
“किताबें दुनिया का विस्तृटत परिदृश्यब दिखाती हैं, कला मानव मन की महान यात्रा है"
"कला और संस्कृति मानव मन को अंतरात्मार से जोड़ने और उसकी क्षमता पहचानने के लिए आवश्यक हैं"
"आत्मनिर्भर भारत सेंटर फॉर डिज़ाइन भारत के अद्वितीय और दुर्लभ शिल्प को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करेगा"
"दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, अहमदाबाद और वाराणसी में बनाए जाने वाले सांस्कृतिक स्थल इन शहरों को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध करेंगे"
"भारत में कला, स्वाद और रंग जीवन के पर्याय माने जाते हैं"
"भारत दुनिया का सबसे विविधतापूर्ण देश है, इसकी विविधता हमें एकजुट करती है"
"कला प्रकृति-समर्थक, पर्यावरण-समर्थक और जलवायु-समर्थक है"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज लाल किले में आयोजित पहले भारतीय कला, वास्तुकला और डिजाइन बिनाले (आईएएडीबी) 2023 का उद्घाटन किया। कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने लाल किले में 'आत्मनिर्भर भारत सेंटर फॉर डिज़ाइन' और छात्र बिनाले-समुन्नति का उद्घाटन किया। उन्होंने एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया। श्री मोदी ने इस अवसर पर लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। भारतीय कला, वास्तुकला और डिजाइन बिनाले (आईएएडीबी) दिल्ली में सांस्कृतिक क्षेत्र के परिचय के रूप में काम करेगा।

एकत्र जनसमूह को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने विश्व धरोहर स्थल लाल किले में सभी का स्वागत किया और इसके प्रांगणों के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला, जो भारत की आजादी से पहले और बाद में अनेक पीढ़ियों के गुजर जाने के बावजूद अटूट और अमिट हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रत्येक राष्ट्र अपने स्वयं की वांछनीय शक्ति से संपन्न होता है जो दुनिया को देश के अतीत और उसकी जड़ों से परिचित कराते हैं। उन्होंने इन शक्तियों के साथ संबंध स्थापित करने में कला, संस्कृति और वास्तुकला की भूमिका पर जोर दिया। राजधानी दिल्ली को भारत की समृद्ध वास्तुकला विरासत की झलक दिखाने वाली शक्ति का खजाना बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दिल्ली में भारतीय कला, वास्तुकला और डिजाइन बिनाले (आईएएडीबी) का आयोजन इसे कई मायनों में विशेष बनाता है। उन्होंने प्रदर्शनी में रखे गए कार्यों की सराहना की और कहा कि यह रंग, रचनात्मकता, संस्कृति और सामुदायिक जुड़ाव का मिश्रण है। उन्होंने आईएएडीबीके सफल आयोजन पर संस्कृति मंत्रालय, उसके अधिकारियों, भाग लेने वाले देशों और सभी को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने कहा, “किताबें दुनिया का विस्‍तृत परिदृश्‍य दिखाती हैं, कला मानव मन की महान यात्रा है”।

भारत के गौरवशाली अतीत को याद करते हुए जब इसकी आर्थिक समृद्धि की चर्चा दुनिया भर में होती थी, प्रधानमंत्री ने कहा कि इसकी संस्कृति और विरासत आज भी दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करती है। उन्होंने अपनी विरासत पर गर्व करते हुए आगे बढ़ने के विश्वास को दोहराया क्योंकि उन्होंने कला और वास्तुकला के क्षेत्रों से संबंधित किसी भी कार्य में आत्म-गौरव की भावना पैदा होने का उल्लेख किया। श्री मोदी ने केदारनाथ और काशी के सांस्कृतिक केन्द्रों के विकास और महाकाल लोक के पुनर्विकास का उदाहरण दिया और राष्ट्रीय विरासत और संस्कृति की दिशा में आजादी के अमृत काल में नए विस्‍तार करने के सरकार के प्रयासों पर जोर दिया। इस बात पर जोर देते हुए कि आईएएडीबीइस दिशा में एक नया कदम साबित हो रहा है, प्रधानमंत्री ने भारत में आधुनिक प्रणालियों के साथ वैश्विक सांस्कृतिक पहल को संस्थागत बनाने के उद्देश्य से मई 2023 में अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय एक्सपो और अगस्त 2023 में पुस्तकालय महोत्सव के आयोजन पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री मोदी ने वेनिस, साओ पालो, सिंगापुर, सिडनी और शारजाह बिनाले के साथ-साथ दुबई और लंदन कला मेलों जैसी वैश्विक पहलों के साथ-साथ आईएएडीबीजैसी भारतीय सांस्कृतिक पहलों को नाम देने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने ऐसे संगठनों की आवश्यकता पर बल दिया क्योंकि यह कला और संस्कृति ही है जो अत्यधिक प्रौद्योगिकी पर निर्भर समाज के उतार-चढ़ाव के बीच जीवन जीने का एक तरीका विकसित करती है। प्रधानमंत्री ने टिप्पणी की, "मानव मन को अंतरात्‍मा से जोड़ने और उसकी क्षमता को पहचानने के लिए कला और संस्कृति आवश्यक हैं।"

आत्मनिर्भर भारत सेंटर फॉर डिज़ाइन के उद्घाटन के बारे में, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कारीगरों और डिजाइनरों को एक साथ लाने के साथ-साथ भारत के अद्वितीय और दुर्लभ शिल्प को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करेगा ताकि उन्हें बाजार के अनुसार नवाचार करने में मदद मिल सके। प्रधानमंत्री ने कहा, “कारीगर डिजाइन विकास के बारे में ज्ञान प्राप्त करने के साथ-साथ डिजिटल मार्केटिंग में भी कुशल हो जाएंगे”, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक ज्ञान और संसाधनों के साथ, भारतीय शिल्पकार पूरी दुनिया पर अपनी अमिट छाप छोड़ सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर 5 शहरों अर्थात् दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, अहमदाबाद और वाराणसी में सांस्कृतिक स्थलों के निर्माण को एक ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि यह इन शहरों को सांस्कृतिक रूप से और समृद्ध करेगा। उन्होंने बताया कि ये केन्द्र स्थानीय कला को समृद्ध करने के लिए नवीन विचारों को भी सामने रखेंगे। अगले 7 दिनों के लिए 7 महत्वपूर्ण विषयों के बारे में, प्रधानमंत्री ने सभी से 'देशज भारत डिजाइन: स्वदेशी डिजाइन' और 'समत्व: शेपिंग द बिल्ट' जैसे विषयों को एक मिशन के रूप में आगे बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने युवाओं के लिए स्वदेशी डिजाइन को अध्ययन और अनुसंधान का हिस्सा बनाने के महत्व पर जोर दिया ताकि इसे और समृद्ध किया जा सके। यह देखते हुए कि समानता विषय वास्तुकला के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी की सराहना करता है, उन्होंने इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए महिलाओं की कल्पना और रचनात्मकता पर विश्वास व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री ने टिप्पणी की, "भारत में कला, स्वाद और रंग जीवन के पर्याय माने जाते हैं।" उन्होंने पूर्वजों के संदेश को दोहराया कि यह साहित्य, संगीत और कला ही है जो मनुष्य और जानवरों के बीच अंतर करता है। उन्होंने जोर देकर कहा, "कला, साहित्य और संगीत मानव जीवन में रस घोलते हैं और इसे विशेष बनाते हैं।" चतुष्ठ कला यानी 64 कलाओं से जुड़ी जीवन की विभिन्न आवश्यकताओं और जिम्मेदारियों पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने विशिष्‍ट कलाओं जैसे 'उदक वाद्यम' या संगीत वाद्ययंत्रों के अंतर्गत पानी की तरंगों पर आधारित वाद्ययंत्र, गीतों के लिए नृत्‍य और गायन की कला सुगंध या इत्र बनाने के लिए 'गंध युक्ति' की कला, मीनाकारी और नक्काशी के लिए 'तक्षकर्म' कला और कढ़ाई और बुनाई में 'सुचिवन करमानी' का उल्लेख किया। उन्होंने भारत में बने प्राचीन कपड़ों की निपुणता और शिल्प की भी चर्चा की और मलमल के कपड़े का उदाहरण दिया जो एक अंगूठी से होकर गुजर सकता है। उन्होंने तलवारों, ढालों और भालों जैसी युद्ध सामग्री पर अद्भुत कलाकृति की सर्वव्यापकता का भी उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने काशी की अविनाशी संस्कृति पर प्रकाश डाला और कहा कि यह शहर साहित्य, संगीत और कला के अमर प्रवाह की भूमि रही है। उन्होंने कहा, "काशी ने अपनी कला में भगवान शिव को स्थापित किया है, जिन्हें आध्यात्मिक रूप से कला का प्रवर्तक माना जाता है।" “कला, शिल्प और संस्कृति मानव सभ्यता के लिए ऊर्जा प्रवाह की तरह हैं और ऊर्जा अमर है, चेतना अविनाशी है। इसलिए काशी भी अविनाशी है।” प्रधानमंत्री ने हाल ही में शुरू किए गए गंगा विलास क्रूज पर प्रकाश डाला जो यात्रियों को काशी से असम तक गंगा के तट पर स्थित कई शहरों और क्षेत्रों का भ्रमण कराता है।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, “कला का कोई भी रूप हो, वह प्रकृति के निकट पैदा होती है। इसलिए, कला प्रकृति समर्थक, पर्यावरण समर्थक और जलवायु समर्थक है”। दुनिया के देशों में नदी तट की संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए श्री मोदी ने भारत में हजारों वर्षों से नदियों के किनारे घाटों की परंपरा की समानता की ओर ध्‍यान दिलाया। उन्होंने कहा कि भारत के कई त्योहार और उत्सव इन घाटों से जुड़े हुए हैं। इसी तरह, प्रधानमंत्री ने हमारे देश में कुओं, तालाबों और बावड़ियों की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डाला और गुजरात में रानी की वाव और राजस्थान और दिल्ली में कई अन्य स्थानों का उदाहरण दिया। प्रधानमंत्री ने भारत की इन बावड़ियों और किलों के डिजाइन और वास्तुकला की सराहना की। उन्होंने कुछ दिन पहले सिंधुदुर्ग किले की अपनी यात्रा को भी याद किया। श्री मोदी ने जैसलमेर में पटुओं की हवेली की चर्चा की, जो प्राकृतिक एयर कंडीशनिंग की तरह काम करने के लिए बनाई गई पांच हवेलियों का एक समूह है। श्री मोदी ने कहा, "यह सभी वास्तुकला न केवल लंबे समय तक चलने वाली थी, बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी टिकाऊ थी।" उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया को भारत की कला और संस्कृति से बहुत कुछ समझना और सीखना है।

श्री मोदी ने दोहराया, "कला, वास्तुकला और संस्कृति मानव सभ्यता के लिए विविधता और एकता दोनों के स्रोत रहे हैं।" उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे विविधतापूर्ण देश है और विविधता हमें एकजुट होना सिखाती है। तभी फलती-फूलती है जब समाज में विचारों की स्वतंत्रता हो और अपने तरीके से काम करने की स्वतंत्रता हो। “बहस और संवाद की इस परंपरा से विविधता अपने आप पनपती है। हम हर प्रकार की विविधता का स्वागत और समर्थन करते हैं”, प्रधानमंत्री ने दुनिया को यह विविधता दिखाने के लिए देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में जी-20 के आयोजन पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने बिना किसी भेदभाव के भारत के विश्वास को दोहराया क्योंकि यहां के लोग स्वयं के बजाय ब्रह्मांड के बारे में बात करते हैं। आज प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है, तो हर कोई इसमें अपने लिए बेहतर भविष्य देख सकता है। प्रधानमंत्री ने टिप्पणी की, "भारत की आर्थिक वृद्धि पूरी दुनिया की प्रगति से जुड़ी हुई है और 'आत्मनिर्भर भारत' की उसकी कल्‍पना नए अवसर लाती है।" इसी तरह, उन्होंने कहा कि कला और वास्तुकला के क्षेत्र में भारत का पुनरुद्धार भी देश के सांस्कृतिक उत्थान में योगदान देगा। श्री मोदी ने योग आयुर्वेद की विरासत को भी छुआ और भारत के सांस्कृतिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए एक स्थायी जीवन शैली के लिए मिशन लाइफ की नई पहल पर प्रकाश डाला।

संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने सभ्यताओं की समृद्धि के लिए बातचीत और सहयोग के महत्व पर जोर दिया और भाग लेने वाले देशों को उनकी साझेदारी के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि अधिक से अधिक देश एक साथ आएंगे और आईएएडीबीइस दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत साबित होगी।

इस अवसर पर अन्य लोगों के अलावा केन्द्रीय संस्कृति मंत्री, श्री जी किशन रेड्डी, संस्कृति राज्य मंत्री, श्री अर्जुन राम मेघवाल और श्रीमती मीनाक्षी लेखी और डायना केलॉग आर्किटेक्ट्स में प्रमुख वास्तुकार, सुश्री डायना केलॉग उपस्थित थीं।

पृष्ठभूमि

यह प्रधानमंत्री की ही कल्‍पना थी कि वेनिस, साओ पालो, सिंगापुर, सिडनी और शारजाह की तरह देश में भी अंतर्राष्ट्रीय बिनाले जैसी एक प्रमुख वैश्विक सांस्कृतिक पहल तैयार कर उसे संस्थागत बनाया जाए। इस कल्‍पना की तर्ज पर, संग्रहालयों में परिवर्तन कर उनमें नयापन लाने, उसमें बदलाव, पुनर्निर्माण और पुन: स्थापित करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया गया था। इसके अलावा, भारत के पांच शहरों कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और वाराणसी में सांस्कृतिक स्थलों के विकास की भी घोषणा की गई। भारतीय कला, वास्तुकला और डिजाइन बिनाले (आईएएडीबी) दिल्ली में सांस्कृतिक क्षेत्र के परिचय के रूप में काम करेगा।

आईएएडीबी का आयोजन 9 से 15 दिसम्‍बर 2023 तक लाल किला, नई दिल्ली में किया जा रहा है। यह हाल ही में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय एक्सपो (मई 2023) और लाइब्रेरी फेस्टिवल (अगस्त 2023) जैसी प्रमुख पहलों का भी अनुसरण करता है। आईएएडीबी को सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करने के लिए कलाकारों, वास्तुकारों, डिजाइनरों, फोटोग्राफरों, संग्राहकों, कला पेशेवरों और जनता के बीच समग्र बातचीत शुरू करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह उभरती अर्थव्यवस्था के हिस्से के रूप में कला, वास्तुकला और डिजाइन के रचनाकारों के साथ विस्तार और सहयोग करने के रास्ते और अवसर भी प्रदान करेगा।

आईएएडीबी सप्ताह के प्रत्येक दिन विभिन्न विषय-आधारित प्रदर्शनियाँ प्रदर्शित करेगा:

दिन 1: प्रवेश –राइट ऑफ पैसेज: डोर्स ऑफ इंडिया

दिन 2: बाग ए बहार: गार्डन्‍स एैज़ यूनिवर्स: गार्डन्‍स ऑफ इंडिया

दिन 3: सम्प्रवाह: कन्‍फ्लूएंस ऑफ कम्‍युनीटीज़ :बावलीज ऑफ इंडिया

दिन 4: स्थापत्य: एंटी-फ्रैजाइल एल्गोरिथम: टेम्‍पल्‍स ऑफ इंडिया

दिन 5: विस्मय: क्रिएटिव क्रॉसओवर: आर्किटेक्‍चरल वंडर्स ऑफ इंडीपेंडेंट इंडिया

दिन 6: देशज भारत डिज़ाइन: स्वदेशी डिज़ाइन

दिन 7: समत्व: शेपिंग द बिल्‍ट: सेलिब्रेटिंग वुमेन इन आर्किटेक्‍चर

आईएएडीबी में उपरोक्त विषयों पर आधारित मंडप, पैनल चर्चा, कला कार्यशालाएं, कला बाजार, हेरिटेज वॉक और एक समानांतर छात्र बिनाले शामिल होंगे। ललित कला अकादमी में छात्र बिनाले (समुन्नति) छात्रों को अपना काम प्रदर्शित करने, साथियों और पेशेवरों के साथ बातचीत करने और डिजाइन प्रतियोगिताओं, विरासत के प्रदर्शन, स्थापना डिजाइन, कार्यशालाओं आदि के माध्यम से वास्तुकला समुदाय के भीतर मूल्यवान अनुभव प्राप्त करने का अवसर प्रदान करेगा। आईएएडीबी 23 देश के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण साबित होने वाला है क्योंकि यह भारत के बिनाले परिदृश्य में प्रवेश करने की सूचना देगा।

प्रधानमंत्री की 'वोकल फॉर लोकल' कल्‍पना के अनुरूप, लाल किले पर 'आत्मनिर्भर भारत सेंटर फॉर डिज़ाइन' स्थापित किया जा रहा है। यह भारत के अद्वितीय और स्वदेशी शिल्प का प्रदर्शन करेगा और कारीगरों और डिजाइनरों के बीच एक सहयोगी स्थान प्रदान करेगा। एक स्थायी सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था का मार्ग प्रशस्त करते हुए, यह कारीगर समुदायों को नए डिजाइन और नवाचारों के साथ सशक्त बनाएगा।

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प्रधानमंत्री मोदी का 'दैनिक जागरण' के साथ इंटरव्यू
April 18, 2024

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प में विकसित उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भागीदारी रहेगी। इसी के दृष्टिगत वहां के युवाओं के लिए अधिक से अधिक अवसरों का निर्माण किया जाएगा। साथ ही उद्योग, निवेश और इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया जाएगा। उत्तराखंड को पर्यटन व तीर्थाटन का हब बनाने की दिशा में प्रयासों को और अधिक गति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के लिए ये मोदी की गारंटी है।

देवभूमि उत्तराखंड से विशेष लगाव रखने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड से जुड़े विषयों पर दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में उक्त बातें कहीं। प्रधानमंत्री ने देवभूमि से अपने लगाव को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय वहां बिताया है। इस दौरान उन्होंने राज्यवासियों की आकांक्षाओं को करीब से जाना और समझा। हमारा प्रयास यही है कि देवभूमिवासियों की जो भी अपेक्षाएं हैं, उनसे एक कदम आगे बढ़कर दिखाएं। पिछले 10 वर्ष में इस दृष्टि से किए गए कार्यों से वहां के निवासियों के जीवन में परिवर्तन आया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दशक को उत्तराखंड का दशक बनाने के विजन को धरातल पर उतारने के लिए राज्य के प्रत्येक व्यक्ति का सामथ्र्य बढ़ाने में हम जुटे हुए हैं। उत्तराखंड में ढांचागत विकास की योजनाओं के दृष्टिगत आर्थिकी व पारिस्थितिकी में समन्वय के साथ काम किया जा रहा है। राज्य में संवेदनशील और संतुलित विकास का मार्ग अपनाया गया है। पहाड़ के कठिन क्षेत्र में रहने वाले लोगों के जीवन में बदलाव जरूरी है, साथ ही पर्यावरण का संरक्षण भी।

समान नागरिक संहिता की उत्तराखंड की पहल पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है। आज पूरे देश में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता महसूस हो रही है। खुशी की बात है कि उत्तराखंड ने इसकी पहल की। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सैन्य बहुल प्रदेश है। यहां के प्रत्येक परिवार से कोई न कोई सदस्य सेना का हिस्सा है। देवभूमि में सेना के प्रति श्रद्धा, त्याग व समर्पण है और ये बात पूरा देश जानता है। इसी धरती के सपूत देश के प्रथम सीडीएस जनरल बिपिन रावत के प्रति कांग्रेस की भद्दी टिप्पणी को देवभूमि के लोग हमेशा याद रखेंगे।

हमने अपने संकल्प पत्र में जल, जंगल, वायु और पर्यावरण को बचाने की गारंटी दी है। उत्तराखंड के विकास में हम अपनी इस गारंटी को लागू करेंगे। मुझे बहुत खुशी है कि उत्तराखंड ने पहल की और यूसीसी को लागू कर दिया। मुझे आशा है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्ष समान नागरिक संहिता का विरोध नहीं करेगा।

उत्तराखंड की गरिमा को चोट पहुंचाने वाली कांग्रेस की भद्दी टिप्पणी को देवभूमि के लोग हमेशा याद रखेंगे। लोगों को ये भी याद है कि ये वही कांग्रेस है जो बार-बार सेना के मनोबल पर सवाल उठाती है।

लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता में आने के लिए भाजपा ने इस बार राजग के लिए 400 पार का नारा दिया है। पांच संसदीय सीट वाले उत्तराखंड की भूमिका इसलिए अहम है क्योंकि इस लक्ष्य को साधने की असली शुरूआत यहीं से होनी है। यहां भाजपा लगातार दो बार से पांच की पांच सीट जीत रही है और यहां पहले चरण में ही मतदान खत्म हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उत्तराखंड से बड़ी आस लगाए बैठे हैं। उन्होंने उत्तराखंड से संबंधित विषयों पर दैनिक जागरण के सवालों का जवाब दिया।

 

Following is the transcript of PM's interview:

 

प्रश्न - प्रधानमंत्री महोदय, उत्तराखंड में पांचों सीटों पर लगातार तीसरी बार विजय के दावे का क्या आधार है?

उत्तर - देवभूमि उत्तराखंड से मेरा आत्मीय लगाव है, मैंने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण समय यहां पर बिताया है। यहां रहने के दौरान मुझे उत्तराखंड निवासियों की आकांक्षाओं को जानने-समझने का अवसर मिला। पिछले 10 वर्षों में, हमने उत्तराखंड में जो काम किए हैं, उससे यहां के लोगों के जीवन में ऐसे बदलाव हुए हैं, जिनकी प्रतीक्षा वो पिछले कई वर्षों से कर रहे थे। जो लोग आज यहां विकास को जमीन पर उतरते हुए देख रहे हैं, या जिन्हें हमारी योजनाओं का लाभ मिला है, वही उत्तरांखड में भाजपा की जीत का दावा कर रहे हैं। पूरा उत्तराखंड फिर एक बार, मोदी सरकार के नारे लगा रहा है। पिछले 10 वर्षों में हमारा यही प्रयास रहा है कि देवभूमि के लोगों की हमसे जो भी अपेक्षाएं हैं, हम उससे एक कदम आगे बढ़कर दिखाएं। उत्तराखंड गंगा यमुना जैसी अनेक नदियों का उद्गम स्थल है, इसलिए हमने इन नदियों को स्वच्छ रखने पर बल दिया है। हमारी सरकार ने नमामि गंगे योजना के तहत घाट निर्माण, एसटीपी निर्माण और नदी की सफाई से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण कार्यों को गति दी। यहां के तीर्थस्थलों के विकास को हमने अपनी प्राथमिकता बनाई है। आल वेदर चार धाम रोड प्रोजेक्ट, सड़कों के चौड़ीकरण, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन और हेलीकाप्टर सुविधाओं के माध्यम से हमने लोगों के लिए उत्तराखंड पहुंचना सुविधाजनक बनाया। केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण और बद्रीनाथ धाम के विकास प्रोजेक्ट से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। हेमकुंड साहिब, यमुनोत्री, पूर्णागिरी मंदिर के लिए रोप वे की सुविधा पर तेजी से काम हो रहा है। यात्रियों की बढ़ती हुई संख्या ने पर्यटन के क्षेत्र में नए अवसर तैयार किए हैं। हल्द्वानी और नैनीताल के लिए सिटी डेवलपमेंट योजना, जमरानी बांध, सौंग बांध, ऊधम सिंह नगर में एम्स के सैटेलाइट सेंटर की स्थापना, जैसे विकास के कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। मैंने कई अवसरों पर कहा है कि ये दशक उत्तराखंड का दशक है। इस विजन को जमीन पर उतारने के लिए हम उत्तराखंड के हर व्यक्ति का सामर्थ्य बढ़ाने में जुटे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंदर यहां लगभग 85 लाख घर बनकर तैयार हुए हैं। जल जीवन मिशन का कवरेज नौ फीसद से बढ़कर 92 फीसद पहुंच चुका है। उत्तराखंड के सभी गांव और शहर खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं। उज्ज्वला योजना के अंतर्गत पांच लाख से अधिक एलपीजी गैस कनेक्शन दिए गए हैं। सौभाग्य योजना के तहत उत्तराखंड के 21 लाख घरों को बिजली कनेक्शन दिया गया है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत उत्तराखंड के साढ़े 9 लाख किसानों को 2000 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है। यहां की 3 लाख से ज्यादा बहनों को पीएम मातृ वंदना योजना का लाभ मिला है। विकास की इस गति ने उत्तराखंड के लोगों को एक नए विश्वास से भर दिया है। इसी विश्वास की वजह से हमने विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार जीतने का रिकार्ड बनाया था, और 2024 में हम तीसरी बार सभी सीटें जीतने का रिकार्ड बनाएंगे।

प्रश्न- आपने राज्य में कई ढांचागत विकास की बड़ी योजनाएं शुरू की हैं, इससे मतदाता प्रभावित भी दिख रहा है, लेकिन एक वर्ग में इसे पर्यावरण विरोधी कार्य भी करार दिया जा रहा है और इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश भी हो रही है। इस पर आपकी सरकार की क्या सोच है?

उत्तर- हम इकोनामी और इकोलाजी को साथ लेकर काम करते हैं। उत्तराखंड में हमने संवेदनशील और संतुलित विकास का रास्ता पकड़ा है। पिछली सरकारों के समय यहां निर्माण कार्यों में पर्यावरण से जुड़ी सावधानियां नहीं रखी गईं। जिसके घातक परिणाम हम सबने देखे हैं। देखिए, भारत सरकार के किसी भी प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले वन एवं पर्यावरण संबंधी सारी अनुमति ली जाती है। विभिन्न स्तरों पर प्रोजेक्ट का मूल्यांकन होता है, और वो किस प्रकार पर्यावरण को प्रभावित करेगा इसका विस्तृत अध्ययन किया जाता है। इन प्रोजेक्ट्स में स्थानीय लोगों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाती है और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों को भी सुलझाया जाता है। पहाड़ी क्षेत्रों में हमारी सरकार का हमेशा से ये प्रयास रहा है कि जो भी विकास कार्य हो वो पर्यावरण को ध्यान में रखकर किए जाएं। पहाड़ के मुश्किल क्षेत्र में रहने वाले लोगों के जीवन में बदलाव जरूरी है, साथ ही पर्यावरण का संरक्षण भी जरूरी हैI उत्तराखंड की भाजपा सरकार यहां की प्राकृतिक सुंदरता और संवेदनशीलता से छेड़छाड़ किए बगैर इज आफ लिविंग को बढ़ावा दे रही है। देवभूमि में लोगों के लिए सड़कें और अस्पताल बनें, शिक्षा के लिए अच्छे कालेज हों, युवाओं के लिए नए अवसर हों, ये सब बहुत जरूरी है। एक समय में इन सुविधाओं की कमी उत्तराखंड से पलायन की बड़ी वजह रही है। अब हमारी सरकार का इन सब पर निरंतर फोकस है, जिससे बहुत हद तक पलायन रुका है।

प्रश्न- यूसीसी देने के बावजूद उत्तराखंड में यह चुनावी मुद्दा नहीं बना, विपक्ष भी कहीं इसे मुद्दा नहीं बनाता नहीं दिख रहा। क्या माना जाए की आम जन ने इसे स्वीकार कर लिया है और इसलिए विपक्ष भी मजबूर है?

उत्तर - हम बहुत पहले से यूनिफार्म सिविल कोड के बारे में बात करते आए हैं। चुनाव हों या ना हों, यूसीसी को लेकर हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है। समान नागरिक संहिता की आवश्यकता आज पूरे देश में महसूस की जा रही है। मुझे बहुत खुशी है कि उत्तराखंड ने पहल की और यूसीसी को लागू कर दिया। इस मुद्दे पर आजादी के पहले से विचार विमर्श चल रहा है। देश की आजादी के बाद हमारे पास ये अवसर था कि हम समान नागरिक संहिता की तरफ कदम बढ़ाते, लेकिन उस वक्त की कुछ राजनीतिक ताकतों ने अपने स्वार्थ के लिए अलग-अलग वर्गों के लिए अलग-अलग कानून की पैरवी की। मैं पूरे देश को एक परिवार मानता हूं और मैं समझता हूं कि एक परिवार में सभी लोगों पर एक जैसा कानून लागू होना चाहिए। आप ही बताइए परिवार के अलग-अलग सदस्यों के लिए अलग-अलग कानून कहां तक उचित है? बाबा साहेब आंबेडकर ने कहा था कि हमें स्वतंत्रता इसलिए मिली है ताकि हमारी सामाजिक व्यवस्था में जहां हमारे मौलिक अधिकारों के साथ विरोध है, वहां सुधार कर सकें। हमने अपने संकल्प पत्र में भी कहा है कि भाजपा देशभर में यूसीसी लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। आम जनता हमेशा से ही ये चाहती थी कि देश में प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक समान कानून बने। कानूनी प्रावधानों के आधार पर लोगों में भेदभाव ना हो। आज विपक्ष के नेता भी ये जानते हैं कि उत्तराखंड समेत पूरे भारत में लोग यूसीसी का समर्थन कर रहे हैं, इसलिए विपक्ष इसका विरोध नहीं कर पा रहा। मुझे आशा है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्ष समान नागरिक संहिता का विरोध नहीं करेगा।

प्रश्न- काफी पहले कांग्रेस के एक नेता ने तत्कालीन सीडीएस जनरल विपिन रावत के बारे में अपशब्द कहे थे। उसे आज भी मुद्दा बनाना उचित है क्या?

उत्तर- देखिए, ये सिर्फ एक घटना या एक बयान नहीं था। इसमें कांग्रेस की सोच और नीयत दिखती है। देश के पहले चीफ आफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के लिए कांग्रेस द्वारा जिन अपशब्दों का प्रयोग किया गया, उसे एक छोटा मुद्दा मान लेना ठीक नहीं है। जनरल बिपिन रावत ने पूरे उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के पहले सीडीएस का कार्यभार ग्रहण किया था। उन्होंने देश की सशस्त्र सेनाओं में काफी रिफार्म्स किए और उनकी सोच डिफेंस सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने की थी। उत्तराखंड जैसा राज्य जहां के प्रत्येक परिवार से कोई न कोई बच्चा सशस्त्र सेना का हिस्सा है, उस राज्य के सपूत जनरल बिपिन रावत के बारे में ऐसी बातें करना हमारी तो सोच से परे है। उत्तराखंड राज्य में हमारी सेनाओं के लिए कितनी श्रद्धा है, कितना त्याग और समर्पण है, ये बात पूरा देश जानता है। उनके बारे में जो अपशब्द कांग्रेस ने इस्तेमाल किये हैं, वो पूरे उत्तराखंड की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उत्तराखंड की गरिमा को चोट पहुंचाने वाली कांग्रेस की भद्दी टिप्पणी को देवभूमि के लोग हमेशा याद रखेंगे। लोगों को ये भी याद है कि ये वही कांग्रेस है जो बार-बार सेना के मनोबल पर सवाल उठाती है। सेना की कार्रवाई का सबूत मांगती है। कांग्रेस ने अपने समय में हमारी सेनाओं को आवश्यक उपकरण, हथियार, सैनिकों के लिए यूनिफार्म, ठंडे क्षेत्रों में ड्यूटी करने के लिए आवश्यक कपड़े भी उपलब्ध नहीं कराए थे, और उसका खामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ा। आज भारत डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। हम अपनी सेना को हर प्रकार की सुविधा मुहैया करवा रहे हैं। जनरल बिपिन रावत भी इसी सोच के पक्षधर थे। जनरल बिपिन रावत के बारे में जो टिप्पणी कांग्रेस ने की है, उसके लिए उत्तराखंड कभी भी ऐसी पार्टी को माफ नहीं करेगा।

प्रश्न- आपका मेनिफेस्टो हाल में आया है। इसमें उत्तराखंड के लिए क्या है?

उत्तर- भाजपा के संकल्प-पत्र से उत्तराखंड के भविष्य के रोडमैप को लेकर बहुत कुछ स्पष्ट हो जाता है। हमने ऐसे सभी उपायों पर फोकस किया है, जिससे पहाड़ का पानी और जवानी दोनों पहाड़ के काम आए। हमने अपने संकल्प पत्र में गरीब, किसान, नारीशक्ति और युवाशक्ति को प्राथमिकता दी है। हमने अगले 5 वर्षों तक जरूरतमंदों को मुफ्त राशन जारी रखने की गारंटी दी है। आयुष्मान कार्ड धारकों को 5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज मिलता रहेगा। उत्तराखंड में 55 लाख लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड बने हैं और यहां के 270 अस्पताल पैनल में शामिल हैं। सोचिए, ये उत्तराखंड के लोगों के लिए कितनी बड़ी राहत की बात है। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में एक और बड़ी घोषणा की है। हमने 70 वर्ष से ऊपर के हर बुजुर्ग को आयुष्मान भारत योजना का लाभ पहुंचाने का संकल्प लिया है। इसका फायदा पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले उन सभी बुजुर्गों को होगा, जो अस्वस्थ रहते हैं। भाजपा का संकल्प है कि गरीबों के लिए और 3 करोड़ पक्के मकान बनाए जाएंगे। पानी, बिजली, गैस कनेक्शन जैसी सुविधाएं देश के हर गरीब तक पहुंचाई जाएंगी। उत्तराखंड में महिलाओं को आर्थिक मजबूती देने वाली मुद्रा योजना का विस्तार किया जा रहा है। भाजपा ने इस योजना के तहत लोन की सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का संकल्प लिया है। मैंने 3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाने की गारंटी दी है। स्वनिधि योजना का विस्तार छोटे कस्बों और गांव-देहात तक करने की तैयारी है। इन योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में उत्तराखंड के लोगों को भी मिलेगा। हम अपने धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों को संवारने का अभियान और तेज करेंगे। हमने अपने संकल्प पत्र में सीमावर्ती गांवों से जुड़े थीम आधारित सर्किट के विकास का लक्ष्य रखा है। इसी तरह नदियों से जुड़े पर्यटन को विकसित करने की योजना बनाई गई है। दवा निर्माण के क्षेत्र में हम भारत को ‘विश्व की फार्मेसी’ के रूप में विकसित करने की योजना बना रहे हैं। इसमें बड़ा योगदान उत्तराखंड का होगा। यहां मैं ये भी बता दूं कि हमने संकल्प पत्र में जो बातें रखी हैं, उनके मुताबिक पहाड़ी क्षेत्रों के संतुलित विकास के लिए हम एक विशेष मास्टर प्लान तैयार करने वाले हैं। इस कदम का भी उत्तराखंड को विशेष लाभ मिलने वाला है।

प्रश्न- आपकी उत्तराखंड के लिए क्या गारंटी है?

उत्तर- हमने भाजपा के संकल्प पत्र को मोदी की गारंटी के रूप में देश के समक्ष रखा है। पिछले 10 वर्षों में सरकार ने कई बड़े फैसले करके करोड़ों लोगों के जीवन को बेहतर बनाया है। हमने उन मुद्दों का भी समाधान किया है, जिन्हें दशकों से लटकाया जा रहा था। अयोध्या में राम मंदिर, आर्टिकल 370, तीन तलाक जैसे विषयों पर हमने देशहित को महत्व दिया और कड़े फैसले लिए। यही वजह है कि आज भाजपा के हर संकल्प को लोग गारंटी के रूप में देखते हैं। देवभूमि के लिए मोदी की गारंटी है कि यहां के युवाओं के लिए अधिक से अधिक अवसरों का निर्माण होगा, ताकि विकसित भारत के संकल्प में विकसित उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित हो। हमने अपने संकल्प पत्र में भंडारण के लिए नए कलस्टर बनाने का एलान किया है। हमने किसानों के हित के लिए कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन शुरू करने की गारंटी दी है। इसमें सिंचाई, स्टोरेज से लेकर फूड प्रोसेसिंग तक की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसका बहुत बड़ा फायदा उत्तराखंड के किसानों को मिलेगा। हमारी गारंटी है कि राज्य में उद्योग, निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर का और विस्तार होगा। हम हर उस योजना को प्राथमिकता देंगे, जिससे यहां के लोगों को पलायन कर कहीं और ना जाना पड़े। उत्तराखंड को पर्यटन और तीर्थाटन का हब बनाने की दिशा में हम अपने प्रयासों को और गति देंगे। हमने अपने संकल्प पत्र में जल, जंगल, वायु और पर्यावरण को बचाने की गारंटी दी है। उत्तराखंड के विकास में हम अपनी इस गारंटी को लागू करेंगे।