श्री नारायण गुरु के आदर्श पूरी मानवता के लिए बहुत बड़ी पूंजी हैं: प्रधानमंत्री
भारत को ऐसे असाधारण संतों, ऋषियों और समाज सुधारकों का आशीर्वाद प्राप्त है, जो समाज में परिवर्तनकारी बदलाव लाए: प्रधानमंत्री
श्री नारायण गुरु ने सभी प्रकार के भेदभाव से मुक्त समाज की कल्पना की थी, आज परिपूर्णता का दृष्टिकोण अपनाकर देश भेदभाव की हर संभावना को खत्म करने के लिए काम कर रहा है: प्रधानमंत्री
स्किल इंडिया जैसे मिशन युवाओं को सशक्त बना रहे हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बना रहे हैं: प्रधानमंत्री
भारत को सशक्त बनाने के लिए हमें आर्थिक, सामाजिक और सैन्य हर मोर्चे पर आगे बढ़ना होगा। आज देश इसी राह पर आगे बढ़ रहा है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के दो महान आध्यात्मिक और नि:स्‍वार्थ भाव से सेवा करने वाले नेताओं श्री नारायण गुरु और महात्मा गांधी के बीच ऐतिहासिक बातचीत के शताब्दी समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सम्मानपूर्ण अभिवादन करते हुए कहा कि आज यह स्थल देश के इतिहास में एक अभूतपूर्व क्षण का साक्षी बन रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह एक ऐतिहासिक घटना थी जिसने हमारे स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी, स्वतंत्रता के उद्देश्यों को ठोस अर्थ दिया और एक स्वतंत्र भारत के सपने को साकार किया। प्रधानमंत्री ने कहा, “श्री नारायण गुरु और महात्मा गांधी के बीच 100 साल पहले हुई मुलाकात आज भी प्रेरणादायक और प्रासंगिक है और सामाजिक सद्भाव और विकसित भारत के सामूहिक लक्ष्यों के लिए ऊर्जा के एक शक्तिशाली स्रोत के रूप में काम कर रही है।” इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने श्री नारायण गुरु के चरणों में अपना प्रणाम किया और महात्मा गांधी को भी श्रद्धांजलि दी।

श्री मोदी ने कहा, “श्री नारायण गुरु के आदर्श मानवता के लिए एक बहुत बड़ी पूंजी है।” उन्होंने कहा कि देश और समाज की सेवा के लिए प्रतिबद्ध लोगों के लिए श्री नारायण गुरु एक मार्गदर्शक प्रकाश की तरह काम करते हैं। उन्होंने समाज के उत्पीड़ित, शोषित और वंचित वर्गों के साथ अपने लंबे समय से जुड़े संबंधों को साझा किया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आज भी, जब वे इन समुदायों की बेहतरी के लिए बड़े फैसले लेते हैं, तो वे गुरुदेव को याद करते हैं। औपनिवेशिक शासन की सदियों से चली आ रही विकृतियों से आकार लेने वाले 100 साल पहले के सामाजिक हालात पर विचार करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि उस समय लोग प्रचलित सामाजिक बुराइयों के खिलाफ बोलने से डरते थे। हालांकि, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि श्री नारायण गुरु विरोध से विचलित नहीं हुए और चुनौतियों से नहीं डरे। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री नारायण गुरु का विश्वास सत्य, सेवा और सद्भावना में दृढ़ विश्वास के साथ सद्भाव और समानता में निहित था। इस बात पर जोर देते हुए कि यही प्रेरणा हमें ‘सबका साथ, सबका विकास’ का मार्ग दिखाती है, श्री मोदी ने कहा कि यह विश्वास हमें एक ऐसे भारत का निर्माण करने की शक्ति देता है जहां अंतिम छोर पर खड़ा व्यक्ति हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इस बात पर जोर देते हुए कि शिवगिरी मठ से जुड़े लोग इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि उनकी संत श्री नारायण गुरु और मठ में गहरी और अटूट आस्था है, प्रधानमंत्री ने कहा कि वह भाग्‍यशाली हैं कि उन्हें मठ के पूज्य संतों का स्नेह हमेशा मिलता रहा है। उन्होंने केदारनाथ में 2013 में आई प्राकृतिक आपदा को याद किया, जिसमें शिवगिरी मठ के कई लोग फंस गए थे। मठ ने उन्हें, जो उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे, फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी सौंपी थी। श्री मोदी ने कहा कि संकट के समय सबसे पहले किसी का भी ध्यान ऐसे लोगों की तरफ जाता है जिन्हें वे अपना मानते हैं - जिनके प्रति वे अपनेपन और जिम्मेदारी का भाव रखते हैं। उन्होंने कहा कि शिवगिरी मठ के संतों द्वारा दिखाया गया अपनापन और विश्वास की भावना से बढ़कर उनके लिए कोई आध्यात्मिक संतुष्टि नहीं हो सकती।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उनका काशी से गहरा नाता है और उन्होंने कहा कि वर्कला को लंबे समय से दक्षिण की काशी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि काशी चाहे उत्तर में हो या दक्षिण में, उनके लिए हर काशी उनकी अपनी है।

श्री मोदी ने कहा कि उन्हें भारत की आध्यात्मिक परंपराओं और उसके ऋषियों-मुनियों की विरासत को करीब से समझने और जीने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने इस बात को उजागर किया कि भारत की एक अनूठी ताकत यह है कि जब भी देश में उथल-पुथल होती है, तो देश के किसी कोने से कोई महान व्यक्ति समाज को नई राह दिखाने के लिए उभरता है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग समाज के आध्यात्मिक उत्थान की दिशा में काम करते हैं, जबकि अन्य सामाजिक सुधारों को गति देते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री नारायण गुरु ऐसे ही महान संतों में से एक थे। उन्होंने कहा कि ‘निवृत्ति पंचकम’ और ‘आत्मोपदेश शतकम’ जैसी उनकी रचनाएँ अद्वैत और आध्यात्मिक अध्ययन के किसी भी छात्र के लिए आवश्यक मार्गदर्शक के रूप में काम करती हैं।

श्री नारायण गुरु के मुख्य विषयों योग, वेदांत, आध्यात्मिक अभ्यास और मुक्ति को ध्यान में रखते हुए, श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि श्री नारायण गुरु समझते थे कि सामाजिक बुराइयों में फंसे समाज का आध्यात्मिक उत्थान केवल उसके सामाजिक उत्थान से ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि श्री नारायण गुरु ने आध्यात्मिकता को सामाजिक सुधार और जन कल्याण के माध्यम में बदल दिया। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने भी श्री नारायण गुरु के प्रयासों से प्रेरणा और मार्गदर्शन प्राप्त किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जैसे विद्वानों को भी श्री नारायण गुरु के साथ विचार-विमर्श से लाभ हुआ।

प्रधानमंत्री ने एक किस्सा साझा करते हुए बताया कि एक बार किसी ने रमण महर्षि को श्री नारायण गुरु का आत्मोपदेश शतकम सुनाया था। उन्होंने कहा कि इसे सुनकर रमण महर्षि ने कहा था कि "वे सब कुछ जानते हैं।" उन्होंने उस दौर को याद किया जब विदेशी विचारधाराओं ने भारत की सभ्यता, संस्कृति और दर्शन को कमजोर करने की कोशिश की थी, श्री नारायण गुरु ने हमें एहसास दिलाया कि दोष हमारी मूल परंपराओं में नहीं है, बल्कि हमें अपनी आध्यात्मिकता को वास्तव में आत्मसात करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हम ऐसे लोग हैं जो हर इंसान में नारायण और हर जीव में शिव को देखते हैं। उन्होंने कहा कि हम द्वैत में अद्वैत, विविधता में एकता और स्पष्ट मतभेदों में भी एकता को देखते हैं।

इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि हर कोई श्री नारायण गुरु के मंत्र से परिचित है - 'ओरु जाति, ओरु मथम, ओरु दैवम, मनुष्यम', जिसका अर्थ है 'एक जाति, एक धर्म, मानव जाति के लिए एक ईश्वर', जो पूरी मानवता और सभी जीवित प्राणियों की एकता को दर्शाता है, श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि यह दर्शन भारत के सभ्यतागत लोकाचार का आधार है। उन्होंने कहा कि आज भारत वैश्विक कल्याण की भावना के साथ इस दर्शन का विस्तार कर रहा है। हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन पर प्रकाश डालते हुए और उसका उल्लेख करते हुए कि इस वर्ष का विषय 'एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग' था, जो एक पृथ्‍वी और सार्वभौमिक कल्याण के दृष्टिकोण का प्रतीक है, प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे पहले, भारत ने मानवता के कल्याण के लिए 'एक विश्व, एक स्वास्थ्य' जैसी वैश्विक पहल भी शुरू की थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अब निरंतर विकास की दिशा में 'एक सूर्य, एक पृथ्वी, एक ग्रिड' जैसे वैश्विक आंदोलनों का नेतृत्व कर रहा है। यह स्मरण करते हुए कि 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन की भारत की अध्यक्षता के दौरान, विषय ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ था, प्रधानमंत्री ने पुष्टि की कि ये प्रयास ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना पर आधारित हैं और श्री नारायण गुरु जैसे संतों से प्रेरित हैं।

श्री मोदी ने कहा, “श्री नारायण गुरु ने भेदभाव से मुक्त समाज की कल्पना की थी। आज देश परिपूर्णता का दृष्टिकोण अपनाकर भेदभाव की हर संभावना को खत्म कर रहा है।” उन्होंने लोगों से 10-11 साल पहले की स्थितियों को याद करने का आग्रह किया, जब दशकों की आजादी के बावजूद लाखों नागरिक बेहद कठिन परिस्थितियों में रहने को मजबूर थे। प्रधानमंत्री ने बताया कि लाखों परिवारों के पास आश्रय नहीं था, अनगिनत गांवों की स्वच्छ पेयजल तक पहुंच नहीं थी और स्वास्थ्य सेवा की कमी के कारण छोटी-मोटी बीमारियों का भी इलाज नहीं हो पाता था और गंभीर बीमारी के मामलों में जान बचाने का कोई तरीका नहीं था। उन्होंने कहा कि लाखों गरीब लोग-दलित, आदिवासी, महिलाएं-बुनियादी मान-मर्यादा से वंचित थी। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि ये कठिनाइयाँ पीढ़ियों से चली आ रही हैं, जिससे कई लोगों ने बेहतर जीवन की उम्मीद छोड़ दी है। उन्होंने सवाल किया कि जब इतनी बड़ी आबादी दर्द और निराशा में रहती है तो कोई देश कैसे प्रगति कर सकता है। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार ने करुणा को अपनी सोच का मुख्‍य हिस्सा बनाया और सेवा को अपना मिशन बना लिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाखों गरीब, दलित, व्‍यथित, उत्पीड़ित और वंचित परिवारों को पक्के घर मुहैया कराए गए हैं। उन्होंने हर गरीब नागरिक के लिए घर सुनिश्चित करने के सरकार के लक्ष्य को दोहराया और कहा कि ये घर सिर्फ ईंट-सीमेंट की संरचना नहीं हैं, बल्कि घर की पूरी संकल्‍पना को दर्शाते हैं, जो सभी आवश्यक सुविधाओं से सुसज्जित हैं। यही कारण है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए घरों में गैस, बिजली और स्वच्छता की सुविधाएं हैं। जल जीवन मिशन के बारे में बात करते हुए, जिसके तहत हर घर में स्वच्छ पानी पहुंचाया जा रहा है, प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आदिवासी क्षेत्रों में भी, जहां सरकारी सेवाएं कभी नहीं पहुंची थीं, अब विकास सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि उपेक्षित आदिवासी समुदायों के लिए, प्रधानमंत्री जनमन योजना शुरू की गई और इस पहल के कारण कई क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिल रहा है। श्री मोदी ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप, समाज के सबसे निचले पायदान पर रहने वाले लोगों को भी नई उम्मीद मिली है। उन्होंने कहा, "ये पहल न केवल उनके जीवन को बदल रही हैं, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री नारायण गुरु ने हमेशा महिला सशक्तिकरण के महत्व पर जोर दिया और सरकार महिलाओं के नेतृत्व में विकास के मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि आजादी के दशकों बाद भी भारत में कई ऐसे क्षेत्र थे जहां महिलाओं के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध था। उन्होंने पुष्टि की कि सरकार ने इन प्रतिबंधों को हटा दिया है, जिससे महिलाओं को नए क्षेत्रों में अधिकार प्राप्त करने में मदद मिली है। श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज खेल से लेकर अंतरिक्ष तक, महिलाएं हर क्षेत्र में देश को गौरवान्वित कर रही हैं। यह देखते हुए कि समाज का हर वर्ग और तबका अब नए आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत के सपने में योगदान दे रहा है, प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन, पर्यावरण अभियान, अमृत सरोवर का निर्माण और बाजरा जागरूकता अभियान जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये प्रयास 140 करोड़ भारतीयों की ताकत से संचालित जन भागीदारी की भावना से आगे बढ़ रहे हैं।

श्री नारायण गुरु की शाश्वत दूरदर्शिता पर प्रकाश डालते हुए, जिन्होंने: ‘शिक्षा के माध्यम से ज्ञान, संगठन के माध्यम से शक्ति और उद्योग के माध्यम से समृद्धि’ की घोषणा की, श्री मोदी ने कहा, ‘श्री नारायण गुरु ने न केवल इन भावों को व्यक्त किया, बल्कि इसे साकार करने के लिए प्रमुख संस्थानों की नींव भी रखी।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि यह शिवगिरी में ही था कि गुरुजी ने देवी सरस्वती को समर्पित शारदा मठ की स्थापना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह संस्था इस विश्वास का प्रतीक है कि शिक्षा को हाशिए पर पड़े लोगों के उत्थान और मुक्ति का साधन बनना चाहिए। श्री मोदी ने संतोष व्यक्त किया कि गुरुदेव द्वारा शुरू किए गए प्रयास आज भी जारी हैं, देश भर के कई शहरों में गुरुदेव केन्‍द्र और श्री नारायण सांस्कृतिक मिशन मानवता के कल्याण के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, "शिक्षा, संगठन और औद्योगिक प्रगति के माध्यम से समाज कल्याण की कल्‍पना देश की वर्तमान नीतियों और निर्णयों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है", उन्होंने इस बात को विशेष रूप से स्‍पष्‍ट किया कि कई दशकों के बाद नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है। यह नीति न केवल शिक्षा को आधुनिक और अधिक समावेशी बनाती है बल्कि मातृभाषा में सीखने को भी बढ़ावा देती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस पहल के सबसे बड़े लाभार्थी समाज के वंचित और हाशिए पर पड़े वर्ग हैं। श्री मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में देश भर में स्थापित नए आईआईटी, आईआईएम और एम्स की संख्या आजादी के बाद पहले 60 वर्षों में बनाए गए कुल से अधिक हो गई है। नतीजतन, गरीब और वंचित युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के नए अवसर खुले हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में आदिवासी क्षेत्रों में 400 से अधिक एकलव्य आवासीय विद्यालय खोले गए हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों के बच्चे, जो पीढ़ियों से शिक्षा से वंचित थे, अब आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा को सीधे कौशल और अवसरों से जोड़ा गया है। स्किल इंडिया जैसे मिशन युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए सशक्त बना रहे हैं। देश की औद्योगिक प्रगति पर जोर देते हुए श्री मोदी ने कहा कि निजी क्षेत्र में बड़े सुधार तथा मुद्रा योजना और स्टैंड-अप इंडिया जैसी योजनाएं दलितों, पिछड़े वर्गों और आदिवासी समुदायों को सबसे अधिक लाभ पहुंचा रही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, "श्री नारायण गुरु ने एक मजबूत और सशक्त भारत की कल्पना की थी और इस कल्पना को साकार करने के लिए भारत को आर्थिक, सामाजिक और सैन्य क्षेत्रों में सबसे आगे रहना चाहिए।" उन्होंने कहा कि देश इस मार्ग पर लगातार आगे बढ़ रहा है और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। श्री मोदी ने कहा कि दुनिया ने हाल ही में भारत की ताकत देखी है, उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर ने वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ और अडिग नीति को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया है। उन्होंने पुष्टि की कि भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय नागरिकों का खून बहाने वाले आतंकवादियों के लिए कोई भी पनाहगाह सुरक्षित नहीं है।

श्री मोदी ने कहा, "आज का भारत केवल राष्ट्रीय हित के लिए सही निर्णय लेता है", उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सैन्य जरूरतों के लिए देश की विदेशी देशों पर निर्भरता लगातार कम हो रही है। उन्होंने इस बात को स्‍पष्‍ट किया कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह बदलाव स्पष्ट रूप से देखा गया था, जहां भारतीय सेना ने घरेलू स्तर पर निर्मित हथियारों का उपयोग करके 22 मिनट के भीतर दुश्मन को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर दिया था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में, मेड-इन-इंडिया हथियारों को वैश्विक मान्यता और वाहवाही मिलेगी।

इस बात पर जोर देते हुए कि राष्ट्र की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए श्री नारायण गुरु की शिक्षाओं को प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाना आवश्यक है, प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। उन्होंने स्‍पष्‍ट किया कि श्री नारायण गुरु के जीवन से जुड़े तीर्थ स्थलों को जोड़ने के लिए शिवगिरी सर्किट का विकास किया जा रहा है। श्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि श्री नारायण गुरु के आशीर्वाद और शिक्षाएं अमृत काल के माध्यम से राष्ट्र की अपनी यात्रा पर उसका मार्गदर्शन करती रहेंगी। उन्होंने पुष्टि की कि भारत के लोग मिलकर एक विकसित राष्ट्र के सपने को साकार करेंगे। अपने भाषण के समापन पर, प्रधानमंत्री ने एक बार फिर शिवगिरी मठ के सभी संतों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और कामना की कि श्री नारायण गुरु का आशीर्वाद सभी पर बना रहे।

इस कार्यक्रम में केन्‍द्रीय अल्पसंख्यक कार्य और मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन, श्री नारायण धर्म संघम ट्रस्ट के पूज्य संत तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्‍ठभूमि

भारत के दो महान आध्यात्मिक और सदाचारी नेताओं श्री नारायण गुरु और महात्मा गांधी के बीच ऐतिहासिक बातचीत 12 मार्च 1925 को शिवगिरी मठ में महात्मा गांधी की यात्रा के दौरान हुई थी और यह बातचीत वायकोम सत्याग्रह, धार्मिक रूपांतरण, अहिंसा, अस्पृश्यता उन्मूलन, मोक्ष की प्राप्ति, दलितों के उत्थान आदि पर केन्‍द्रित थी।

श्री नारायण धर्म संघम ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस समारोह में आध्यात्मिक नेता और अन्य सदस्य एक साथ आएंगे और भारत के सामाजिक और नैतिक ताने-बाने को आकार देने वाले दूरदर्शी संवाद पर विचार करेंगे और उसे याद करेंगे। यह श्री नारायण गुरु और महात्मा गांधी दोनों द्वारा समर्थित सामाजिक न्याय, एकता और आध्यात्मिक सद्भाव के साझा दृष्टिकोण के प्रति आभार व्‍यक्‍त करना है।

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21वीं सदी के इस दशक में भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है: ET Now ग्लोबल बिजनेस समिट में पीएम मोदी
February 13, 2026
Amid numerous disruptions, this decade has been one of unprecedented development for India, marked by strong delivery and by efforts that have strengthened our democracy: PM
In this decade of the 21st century, India is riding the Reform Express: PM
We have made the Budget not only outlay-focused but also outcome-centric: PM
Over the past decade, we have regarded technology and innovation as the core drivers of growth: PM
Today, we are entering into trade deals with the world because today's India is confident and ready to compete globally: PM

आप सभी का इस ग्लोबल बिजनेस समिट में, आप सबका मैं अभिनंदन करता हूं। हम यहां A Decade Of Disruption, A Century Of Change, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। विनीत जी का भाषण सुनने के बाद मुझे लगता है कि मेरा काम बहुत सरल हो गया है। लेकिन एक छोटी request करूं, इतना सारा आपको पता है, तो कभी ET में तो दिखना चाहिए।

साथियों,

21वीं सदी का बीता दशक अभूतपूर्व डिसरप्शन का रहा है। ग्लोबल Pandemic, ग्लोब के अलग-अलग हिस्सों में तनाव, युद्ध और ग्लोब के संतुलन को हिला देने वाले Supply Chain Breakdowns, दुनिया ने एक दशक के भीतर काफी कुछ देख लिया। लेकिन साथियों, कहते हैं, संकट के समय ही किसी देश के सामर्थ्य पता चलता है और मुझे बहुत गर्व है, अनेक Disruptions के बीच भी भारत के लिए यह दशक, अभूतपूर्व डेवलपमेंट का रहा है, शानदार डिलीवरी का रहा है और डेमोक्रेसी को मजबूत करने वाला रहा है। जब पिछला दशक शुरू हुआ था, तो भारत ग्यारहवें नंबर की अर्थव्यवस्था था। इतनी उथल-पुथल में पूरी आशंका थी कि भारत और नीचे चला जाएगा, लेकिन आज भारत, बहुत तेजी के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने जा रहा है। और आप जिस Century Of Change की बात कर रहे हैं, उसका बहुत बड़ा आधार और यह मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं, इसका बहुत बड़ा आधार भारत ही होने जा रहा है। आज भारत, दुनिया की ग्रोथ में 16 परसेंट से ज्यादा योगदान दे रहा है। और मुझे विश्वास है, इस सेंचुरी के हर आने वाले साल में हमारा योगदान और भी बढ़ता रहेगा, निरंतर बढ़ता रहेगा। मैं वह मदान की तरह astrologer के रूप में नहीं आया हूं। भारत, दुनिया की ग्रोथ को ड्राइव करेगा, दुनिया की ग्रोथ का नया इंजन बनेगा।

साथियों,

दुनिया में सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद एक नई वैश्विक व्यवस्था बनी थी, एक नए वर्ल्ड ऑर्डर ने आकार लिया था। लेकिन सात दशक के बाद, वो व्यवस्था टूट रही है। दुनिया आज एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ बढ़ रही है। आखिर यह क्यों हो रहा है? ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि तब जो व्यवस्था बनी थी, उसकी नींव One Size Fits All, इसी सोच पर टिकी थी। तब ये माना गया कि World Economy Core में होगी, Supply Chains मजबूत और विश्वसनीय हो जाएगी। इस व्यवस्था में नेशन्स को केवल कंट्रीब्यूटर्स के रूप में ही देखा गया। लेकिन आज, इस मॉडल को चुनौती मिल रही है। यह अपनी प्रासंगिकता खोता जा रहा है। आज हर देश को यह पता चल रहा है कि उसे अपनी रज़ीलियन्स खुद बनानी होगी।

साथियों,

आज दुनिया जिसकी चर्चा कर रही है। उसको भारत ने 2015 में, आज से 10 साल से पहले, 2015 में ही अपनी नीति का हिस्सा बना लिया था। दस साल पहले जब नीति आयोग बना, तो उसके फाउंडिंग डॉक्यूमेंट में ही भारत ने अपना विजन क्लीयर कर दिया था और विजन यह कि भारत किसी दूसरे देश से कोई सिंगल डेवलपमेंट मॉडल इंपोर्ट नहीं करेगा। हम भारत के विकास के लिए भारतीय अप्रोच को लेकर ही चलेंगे। इस नीति ने भारत को अपने हिसाब से, अपनी रिक्वायरमेंट के हिसाब से, अपने हित में फैसले लेने का आत्मविश्वास दिया और यह एक बड़ा कारण है कि डिसरप्शन के दशक में भी भारत की इकोनॉमी कमजोर नहीं पड़ी, निरंतर मजबूत होती गई।

साथियों,

आज 21वीं सदी के इस दशक में भारत Reform Express पर सवार है और इस Reform Express की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हम इसे compulsion में नहीं, बल्कि conviction के साथ, Reform के कमिटमेंट के साथ गति दे रहे हैं। यहां तो बहुत बड़ी-बड़ी संख्या में बड़े-बड़े expert बैठे हैं, अर्थजगत के दिग्गज बैठे हैं। आपने भी 2014 से पहले का दौर देखा है। जब तक हालात मजबूर न कर दें, जब तक कोई संकट न आ जाए, जब कोई और रास्ता न बचे, तब मजबूरन रिफॉर्म्स किए जाते थे। आप याद करिए, 1991 का रिफॉर्म्स भी तब हुआ, जब देश पर दिवालिया होने का खतरा आ गया था। जब देश को सोना गिरवी रखना पड़ा था। पहले की सरकारों का यही तरीका था, वो reforms compulsion में ही किया करती थीं। जब 26/11 का आतंकी हमला हुआ, कांग्रेस सरकार की कलई खुल गई, तो NIA का गठन किया गया। जब पावर सेक्टर बर्बाद हो गया, ग्रिड फेल होने लगे, तब मजबूरी में कांग्रेस को पावर सेक्टर में याद आई।

साथियों,

ऐसी एक लंबी सूची है, जो याद दिलाती है कि जब compulsion में, मजबूरी में reform होता है, तो न सही नतीजे मिलते हैं, न देश को सही परिणाम मिलते हैं।

साथियों,

आज मुझे गर्व है कि बीते 11 वर्षों में हमने पूरे conviction के साथ रिफॉर्म किए हैं और यह रिफॉर्म Policy में हुए हैं, Process में हुए, Delivery में हुए और इतना ही नहीं, Mindset में भी reform हुआ है। क्योंकि साथियों, अगर पॉलिसी बदले, लेकिन प्रोसेस वही रहे, माइंडसेट वही रहे, डिलीवरी ठीक से ना हो, तो रिफॉर्म्स सिर्फ और सिर्फ कागज का टुकड़ा बनकर रह जाता है। इसलिए हमने पूरे सिस्टम को बदलने के लिए ईमानदारी से कोशिश की है।

साथियों,

मैं प्रोसेस की बात करूं, तो एक साधारण लेकिन बहुत जरूरी प्रोसेस है, कैबिनेट नोट्स का। यहां कई लोगों को अंदाजा होगा कि पहले की सरकारों में एक कैबिनेट नोट बनने में ही कुछ महीने लग जाते थे, महीने। अब इस स्पीड से देश का विकास कैसे होता? इसलिए हमने इस process को बदला। हमने डिसीजन मेकिंग को time-bound और technology-driven बनाया। हमने यह तय कर दिया कि इस अफसर की टेबल पर यह कैबिनेट नोट इतने घंटे से ज्यादा रहेगा ही नहीं। या तो रिजेक्ट करो या निर्णय लो और इसका नतीजा आज देश देख रहा है।

साथियों,

मैं आपको रेलवे ओवर ब्रिज के अप्रूवल का भी उदाहरण दूंगा। पहले R.O.B का एक डिजाइन अप्रूव कराने के लिए कई वर्ष लग जाते थे, कई सारी क्लीयरेंस की ज़रूरत थीं, कई जगह चिट्ठियां लिखनी पड़ती थीं और यह मैं प्राइवेट के लिए नहीं कह रहा हूं, सरकार को। हमने इसको भी बदला और आज देखिए कितनी तेजी से रोड और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। विनीत जी ने बहुत विस्तार से इस बात को बताया।

साथियों,

एक बड़ा Interesting उदाहरण बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर का है। अब बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर देश की security से जुड़ा हुआ होता है। आप कल्पना कर सकते हैं, एक समय था, जब बॉर्डर एरियाज़ में एक साधारण सी सड़क बनाने के लिए भी कुछ परमिशन दिल्ली से लेनी पड़ती थी। जिला स्तर पर निर्णय लेने के यानी इसके सामने एक प्रकार से उसका कोई अधिकारी ही नहीं थे, दीवार ही दीवार थीं, वो निर्णय नहीं कर सकता था और इसलिए तो दशकों बाद भी हमारे देश में बॉर्डर इंफ्रा इतना बेहाल रहा। 2014 के बाद हमने इस प्रोसेस में भी रिफॉर्म किया, हमने स्थानीय प्रशासन को Empower किया और आज हम देश के बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से डेवलप होते देख रहे हैं।

साथियों,

बीते दशक में भारत के जिस Reform ने दुनिया में हलचल मचा दी है, वो है UPI, भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम। यह सिर्फ एक App नहीं है, यह policy, process और delivery के एक शानदार कन्वर्जेंस का प्रमाण है। जो लोग कभी बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़े बेनिफिट्स के बारे में सोच भी नहीं सकते थे, UPI देश के ऐसे नागरिकों को सर्व कर रहा है। यह जो डिजिटल इंडिया है, डिजिटल पेमेंट सिस्टम है, जनधन आधार मोबाइल की ट्रिनिटी है, यह रिफॉर्म किसी compulsion से नहीं हुआ, यह हमारा कन्विक्शन था। और कन्विक्शन यह था कि जिन लोगों तक पहले की सरकारें कभी नहीं पहुंची, हमें ऐसे नागरिकों का इंक्लूजन करना है। जिसे कोई नहीं पूछता, उसे मोदी पूजता है। और इसलिए यह रिफॉर्म्स किए गए हैं और आज भी हमारी सरकार इसी सोच के साथ चल रही है।

साथियों,

भारत का यह जो नया मिज़ाज है, वो हमारे बजट में भी रिफ्लेक्ट होता है। पहले जब बजट की चर्चा होती थी, तो फोकस सिर्फ Outlay पर होता था। कितना पैसा आवंटित हुआ, क्या सस्ता हुआ, क्या महंगा हुआ और उस दिन टीवी देखेंगे, तो पूरी टीवी एक ही यानी इनके लिए, बजट मतलब इंकम टैक्‍स ऊपर गया कि नीचे गया, इसके आगे उनको देश दिखता ही नहीं है। और होता क्‍या था, कितनी नई ट्रेनें घोषित हुईं, यही चलता रहता था, उन घोषणाओं का बाद में क्या हुआ, कोई पूछने वाला ही नहीं था। और इसलिए हमने बजट को Outlay के साथ-साथ Outcome सेंट्रिक बनाया।

साथियों,

बजट में एक और बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले Off-Budget Borrowing पर बहुत अधिक चर्चा होती थी। लेकिन अब Off-Budget Reforms की चर्चा होती है। बजट से बाहर, नेक्स्ट जनरेशन GST रिफॉर्म्स हुए, प्लानिंग कमीशन की जगह नीति आयोग बनाया, आर्टिकल 370 की दीवार गिरा दी, तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया, नारी शक्ति वंदन अधिनियम बनाया।

साथियों,

बजट में घोषित हों, या बजट से बाहर, रिफॉर्म एक्सप्रेस लगातार गति पकड़ रही है। अगर मैं पिछले एक साल की ही बात करूं तो हमने Ports & Maritime सेक्टर में Reform किया, शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के लिए अनेक Initiative लिए, जन-विश्वास एक्ट के तहत रिफॉर्म्स को और आगे बढ़ाया, Energy Security के लिए Shanti Act बनाया, लेबर कानूनों से जुड़े रिफॉर्म्स को लागू किया, भारतीय न्याय संहिता लेकर आए, वक्फ कानून में Reform किया गया है, गांव में रोजगार के लिए नया G RAM G कानून बनाया, ऐसे अनेक Reforms साल भर होते रहे हैं।

साथियों,

इस साल के बजट ने रिफॉर्म एक्सप्रेस को और आगे बढ़ाया है। वैसे तो बजट के बहुत सारे आयाम हैं, लेकिन मैं दो Important फैक्टर्स की बात करूंगा। Capex और Technology, बीते वर्षों की भांति इस बजट में भी, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को बढ़ाकर करीब 17 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। और आप जानते हैं कि कैपेक्स का मल्टीप्लायर effect कितना बड़ा होता है। इससे देश की कैपेसिटी और प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। अनेकों सेक्टर्स में बहुत बड़ी संख्या में जॉब क्रिएशन भी होती है। पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप का निर्माण, देश के टीयर-2, टीयर-3 शहरों के लिए सिटी इकोनॉमिक रीजन्स का निर्माण और सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, ऐसे बजट अनाउंसमेंट्स, सही मायने में युवाओं पर, देश के फ्यूचर पर, यह इन्वेस्टमेंट हैं।

साथियों,

बीते दशक में हमने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को ग्रोथ का कोर ड्राइवर माना है। इसी सोच के साथ, देश में स्टार्टअप कल्चर, हैकाथॉन कल्चर, उसको हमने प्रमोट किया। आज देश में, दो लाख से अधिक स्टार्टअप, रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स हैं और यह डायवर्स सेक्टर्स में काम कर रहे हैं। हमने युवाओं को प्रोत्साहित किया, देश में रिस्क टेकिंग कल्चर को पुरस्कृत करने का भाव जगाया और परिणाम हमारे सामने है। इस साल का बजट, हमारी इसी प्राथमिकता को और मजबूत करता है। विशेष तौर पर बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर और AI जैसे सेक्टर के लिए, इस बजट में महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।

साथियों,

आज जब देश की आर्थिक ताकत बढ़ी है, तो हम राज्यों को भी उतना ही ज्यादा सशक्त कर रहे हैं। मैं एक और आंकड़ा आपको देना चाहता हूं। 2004 से 2014, 10 साल, इस दरमियान राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के तौर पर 18 लाख करोड़ रुपए के आसपास ही मिले थे, 2004 से 2014 तक। जबकि 2014 से लेकर 2025 तक, राज्यों को 84 लाख करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। अगर मैं इस साल बजट में प्रस्तावित लगभग 14 लाख करोड़ का आंकड़ा और जोड़ दूं, तो हमारी सरकार में राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के करीब-करीब 100 लाख करोड़ रुपए मिलने तय हुए हैं। यह राशि केंद्र सरकार की तरफ से अलग-अलग राज्य सरकारों को मिली है, ताकि वो अपने यहां विकास के कार्यों को आगे बढ़ा सकें।

साथियों,

आजकल आप लोग भारत के FTA’s यानि फ्री ट्रेड डील्स पर काफी चर्चा कर रहे हैं और मैं यहां enter हुआ, वहीं से शुरू हो गए लोग। दुनियाभर में इसका एनालिसिस हो रहा है। लेकिन मैं आज इसका एक और इंटरेस्टिंग एंगल आपको बताता हूं, मीडिया को जो चाहिए, वो तो इसमें नहीं होगा शायद, लेकिन हो सकता है कि कुछ काम में आ जाए। और मैं पक्का मानता हूं, जो बात मैं कहने जा रहा हूं, आपने भी इसके बारे में विचार नहीं किया होगा। क्या आपने कभी सोचा है कि आज इतने सारे विकसित देशों के साथ फ्री-फ्री ट्रेड डील्स हो रहे हैं, क्या यही काम 2014 से पहले क्यों नहीं हो पाए? देश वही, युवा शक्ति वही, सरकारी सिस्टम वही, तो बदला क्या? बदलाव, सरकार के विजन में आया है, नीति और नीयत में बदलाव आया है, भारत के सामर्थ्य में बदलाव आया है।

साथियों,

आप ज़रा सोचिए, फ्रेजाइल फाइव इकोनॉमी जब थी, तब कौन हमारे साथ डील करता? गांव में भी गरीब की बेटी को कोई रईस के परिवार वाला शादी करता है क्या? वो उसको छोटा मानता है, हमारा भी यही हाल था भाई दुनिया में। जब देश पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा था, चारों तरफ घोटाले और घपले थे, तब कौन भारत पर भरोसा कर पाता? 2014 से पहले भारत में मैन्युफैक्चरिंग का बेस बहुत कमजोर था और जिसके कारण, पहले की सरकारें भी डरती थी, एक तो कोई आता नहीं था और जरा सा भी कोई कोशिश करें, तो यह लोग भी डरते थे और डर यह था कि अगर विकसित देशों के साथ डील हो गई, तो वो हमारे बाजार पर कब्जा कर लेंगे, वो यहां अपने प्रोडक्ट डंप करने लगेंगे, हताशा-निराशा के उस माहौल में 2014 से पहले यूपीए सरकार सिर्फ चार देशों के साथ ही कॉम्प्रिहेंसिव ट्रेड एग्रीमेंट कर पाई थी। जबकि, बीते दशक में भारत ने जो ट्रेड डील्स की हैं, उनमें दुनिया के 38 कंट्री कवर होते हैं, 38 कंट्री। और यह दुनिया के अलग-अलग रीजन्स में हैं। आज हम इसलिए दुनिया के साथ ट्रेड डील्स कर रहे हैं क्योंकि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। आज का भारत, दुनिया के साथ कंपीट करने के लिए तैयार है। बीते 11 वर्षों में भारत ने मैन्युफैक्चरिंग का एक मजबूत इकोसिस्टम देश में विकसित किया है। इसलिए, आज भारत समर्थ है, सशक्त है और इसलिए दुनिया भी हम पर भरोसा करती है। यही बदलाव हमारी Trade Policy में आए Paradigm Shift का आधार बने और यही Paradigm Shift विकसित भारत की हमारी यात्रा का अनिवार्य स्तंभ बना है।

साथियों,

आज हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ देश के हर नागरिक को विकास में सहभागी बनाते हुए कार्य कर रही है। जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गया, हम उसके विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। पहले की सरकारों ने दिव्यांग जनों के लिए सिर्फ घोषणाएं कीं, हम भी उसी रास्ते को जारी रख सकते थे, लेकिन ये सरकार की संवेदनशीलता का उदाहरण है। आप में से शायद जो बातें मैं बता रहा हूं, आप जिस लेवल के लोग हैं, शायद उसमें फिट नहीं बैठती होगी। हमारे दिव्यांग जनों के लिए जैसे हमारे यहां Language में बिखराव है ना, Sign Language का भी वही हाल था जी। तमिलनाडु में जाओ तो एक Sign Language, उत्तर प्रदेश में जाओ तो दूसरी, गुजरात में जाओ तो तीसरी, असम में जाओ तो चौथी, अगर यहां का दिव्‍यांग असम गया, तो बेचारा समझ ही नहीं पाता था। अब यह कोई बड़ा काम तो नहीं था। अगर संवेदनशील सरकार होती है ना, तो उसको यह काम छोटा नहीं लगता है। और देश ने पहली बार Indian Sign Language को institutionalise किया, common किया, व्यवस्था बनाई है। ऐसे ही, देश की Transgender community कब से अपने अधिकारों के लिए लड़ रही थी। हमने उनके लिए भी कानून बनाकर उन्हें सम्मान से जीने का कवच दिया है। बीते दशक में ही देश की करोड़ों बहनों को तीन-तलाक की कुरीति से मुक्ति मिली, लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण पक्का हुआ।

साथियों,

आज सरकारी मशीनरी की सोच भी बदली है, उसमें संवेदनशीलता आई है। सोच का अंतर क्या होता है, यह हम जरूरतमंदों को मुफ्त अनाज देने वाली स्कीम में भी देखते हैं। विपक्ष के कुछ लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं और कुछ अखबारों में जरा छपता भी ज्यादा है। कोई मजाक उड़ाता है कि जब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल ही गए हैं, तो उनको मुफ्त राशन क्यों मिलता है? अजीबोगरीब सवाल है। अगर आप बीमार हैं, अस्पताल में गए और अस्पताल से आपको छुट्टी मिली, तो भी डॉक्टर कहता है कि सात दिन तक यह-यह संभालना, पंद्रह दिन तक यह-यह संभालना, कहता है कि नहीं कहता है? गरीबी से बाहर निकले हैं, लेकिन यह सवाल पूछ रहे हैं कि निकले हैं, तो फिर अनाज क्यों देते हो? ऐसी संकीर्ण मानसिकता वाले लोग, यह नहीं सोचते कि सिर्फ गरीबी से बाहर निकालना काफी नहीं होता, बल्कि जो व्यक्ति नियो मिडिल क्लास में आया है, वो फिर गरीबी के चंगुल में न फंस जाए, यह भी सुनिश्चित करना पड़ता है। इसलिए उसे आज अनाज मुफ्त की सुविधा मिल रही है, यह आवश्यक है। बीते वर्षों में केंद्र सरकार ने इस योजना पर लाखों करोड़ रुपए खर्च किए हैं, इससे गरीब और नियो मिडिल क्लास को बहुत बड़ा संबल मिला है।

साथियों,

सोच का एक और फर्क हम अपने आसपास भी देखते हैं। कुछ लोग हैं, जो कहते हैं कि ये मोदी 2047 की बात क्यों करता है? 2047 में विकसित भारत बनेगा, नहीं बनेगा, किसने देखा? हम रहें या ना रहें, उससे हमारा लेना देना क्या है? अब देखिए, यह सोच है और यह बड़े-बड़े लोगों की सोच है, यह कोई मैं अपने शब्द नहीं बता रहा हूं।

साथियों,

जिन लोगों ने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, लाठियां खाईं, कालापानी की सज़ाएं पड़ी, फांसी के तख्त पर चढ़ गए, अगर वो भी यही सोचते कि आजादी पता नहीं कब मिले, हम क्यों आज आजादी के लिए लाठी खाएं, तो सोचिए, क्या उस सोच के साथ देश कभी आजाद हो पाता क्या? जब राष्ट्र प्रथम का भाव हो, जब देश हित सर्वोपरि हो, तो हर निर्णय देश के लिए होता है, हर नीति देश के लिए बनती है। हमारी सोच स्पष्ट है, विजन साफ है, हमें देश को विकसित बनाने के लिए निरंतर काम करना है। 2047 तक हम रहें न रहें, लेकिन यह देश रहेगा, इस देश की संतानें रहेंगी। इसलिए हमें और इसलिए हमें अपना आज खपाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों का कल सुरक्षित रहे, उज्ज्वल रहे। मैं आज अपनी आज बो रहा हूं क्योंकि कल की पीढ़ी को फल खाने को मौका मिले।

साथियों,

दुनिया को अब डिसरप्शन के साथ जीने के लिए तैयार रहना होगा। समय के साथ इनके नेचर में बदलाव आएगा, लेकिन यह तय है कि अब व्यवस्थाएं बहुत तेजी से बदलेंगी। AI से जो Disruption हो रहे हैं, वो तो आप देख ही रहे हैं। आने वाले समय में AI और भी क्रांतिकारी बदलाव लेकर आने वाली है, भारत इसके लिए भी तैयार है। कुछ ही दिनों में भारत में ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट होने जा रही है। दुनिया के अनेक देश, दुनियाभर के टेक लीडर्स, इस समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। सभी के साथ मिलकर, हम एक बेहतर विश्व बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। इसी भरोसे के साथ, एक बार फिर इस Summit के लिए आप सभी को बहुत सारी मेरी शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

वंदे मातरम!