"आपका बैच अगले 25 वर्ष के अमृतकाल में देश के विकास में अहम भूमिका निभाएगा"
"महामारी के बाद उभरती नई विश्व व्यवस्था में भारत को अपनी भूमिका बढ़ानी होगी और स्वयं को तेज गति से विकसित करना होगा"
"आत्मनिर्भर भारत और आधुनिक भारत 21वीं सदी में हमारे लिए सबसे बड़े लक्ष्य हैं, आपको इसका हमेशा ध्यान रखना चाहिए"
"आपकी सेवा के सभी वर्षों में, सेवा और कर्तव्य के कारक आपकी व्यक्तिगत और व्यावसायिक सफलता का पैमाना होना चाहिए"
"आपको नंबरों के लिए नहीं बल्कि लोगों के जीवन के लिए काम करना है"
"अमृतकाल के इस दौर में हमें रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म को अगले स्तर पर ले जाना है, इसलिए आज का भारत 'सबका प्रयास'  की भावना से आगे बढ़ रहा है"
"आपको कभी भी आसान काम न मिलने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए"
"आप जितना अधिक कम्फर्ट जोन में जाने की सोचेंगे, उतना ही आप अपनी प्रगति और देश की प्रगति को रोकेंगे"
 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में 96वें सामान्य बुनियादी पाठ्यक्रम के समापन समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने नए खेल परिसर का भी उद्घाटन किया और हैप्पी वैली परिसर राष्ट्र को समर्पित समर्पित किया।

अपने संबोधन की शुरुआत में, प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को पाठ्यक्रम पूरा करने पर बधाई दी और होली के पावन अवसर पर अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने निवर्तमान बैच की विशिष्टता का भी उल्लेख किया, क्योंकि यह बैच आज़ादी के अमृत महोत्सव वर्ष में सक्रिय सेवा के रूप में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि आपका बैच अगले 25 वर्ष के अमृतकाल में देश के विकास में अहम भूमिका निभाएगा।

प्रधानमंत्री ने महामारी के बाद की दुनिया में उभरती नई विश्व व्यवस्था को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के इस मोड़ पर दुनिया भारत की ओर देख रही है। उन्होंने कहा कि इस नई विश्व व्यवस्था में भारत को अपनी भूमिका बढ़ानी होगी और स्वयं को तेज गति से विकसित करना होगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि 21वीं सदी के सबसे बड़े लक्ष्य यानी आत्मनिर्भर भारत और आधुनिक भारत के लक्ष्य पर विशेष ध्यान देते हुए इस अवधि के महत्व को ध्यान में रखें। उन्होंने कहा कि हम इस अवसर को खोने का जोखिम नहीं उठा सकते ।

सिविल सेवाओं पर सरदार पटेल के विचारों का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि सेवा और कर्तव्य की भावना प्रशिक्षण का अभिन्न अंग रही है। उन्होंने कहा कि आपके संपूर्ण सेवा वर्षों में सेवा और कर्तव्य के ये कारक आपकी व्यक्तिगत और व्यावसायिक सफलता का पैमाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्तव्य और उद्देश्य की भावना से किया जाने वाला काम कभी बोझ नहीं होता। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे एक सकारात्मक उद्देश्य की भावना के साथ और समाज एवं देश के संदर्भ में सकारात्मक बदलाव का हिस्सा बनने के लिए सेवा में आए हैं।

प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र से मिलने वाले अनुभव को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया क्योंकि फाइल के मुद्दों का वास्तविक अनुभव कार्यक्षेत्र से आता है। उन्होंने कहा कि फाइलों में सिर्फ आंकड़े ही नहीं होते, बल्कि उनमें लोगों का जीवन और उनकी आकांक्षाएं भी होती हैं। उन्होंने कहा कि आपको नंबर के लिए नहीं बल्कि लोगों की जिंदगी के लिए काम करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अधिकारियों को हमेशा समस्याओं के मूल कारण और नियमों के अनुसार स्थायी समाधान देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि अमृतकाल के इस दौर में हमें रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म को अगले स्तर पर ले जाना है, इसलिए आज का भारत 'सबका प्रयास' की भावना से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने महात्मा गांधी के इस मंत्र को भी याद किया कि प्रत्येक निर्णय का मूल्यांकन अंतिम पंक्ति में अंतिम व्यक्ति के कल्याण की कसौटी पर किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर अपने जिलों की 5-6 चुनौतियों की पहचान करने और उन मुद्दों पर काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि चुनौतियों की पहचान चुनौतियों के सुधार की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने गरीबों के लिए पक्के घर और बिजली कनेक्शन प्रदान करने की चुनौतियों को सरकार द्वारा पहचानने का उदाहरण दिया, जिन्हें पीएम आवास योजना, सौभाग्य योजना और महत्वाकांक्षी जिलों की योजनाओं के माध्यम से पूरा किया गया। उन्होंने इन योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए नए संकल्प के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान इसे काफी हद तक संबोधित करेगा।

प्रधानमंत्री ने सिविल सेवाओं के क्षेत्र में नए सुधारों अर्थात मिशन कर्मयोगी और आरंभ कार्यक्रम का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अधिकारियों को प्रार्थना करनी चाहिए कि उन्हें कभी भी आसान काम न मिले क्योंकि चुनौतीपूर्ण काम का अपना ही आनंद होता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जितना अधिक आप कम्फर्ट जोन में जाने की सोचेंगे, उतना ही आप अपनी प्रगति और देश की प्रगति को रोकेंगे।

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को सलाह दी कि वे अकादमी से प्रस्थान के समय अपनी आकांक्षाओं और योजनाओं को रिकॉर्ड करें और उपलब्धि के स्तर का मूल्यांकन करने के लिए 25 या 50 वर्षों के बाद उन्हें फिर से देखें। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से संबंधित पाठ्यक्रमों और संसाधनों को पाठ्यक्रम में शामिल करने का भी आह्वान किया, क्योंकि भविष्य की समस्याओं में डेटा विज्ञान का एक बड़ा महत्व होगा और उसमें डेटा के मूल्यांकन की भी क्षमता होगी।

96वां बुनियादी पाठ्यक्रम एलबीएसएनएए का पहला सामान्य बुनियादी पाठ्यक्रम है, जिसमें नई शिक्षा और पाठ्यक्रम प्रारूप मिशन कर्मयोगी के सिद्धांतों पर आधारित है। बैच में 16 सेवाओं के 488 अधिकारी प्रशिक्षु और 3 रॉयल भूटान सर्विसेज (प्रशासनिक, पुलिस और वन) शामिल हैं।

युवा वर्ग की साहसिक और अभिनव विचारधारा को मूर्त रूप प्रदान करने के लिए, मिशन कर्मयोगी के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित इस नए शिक्षाशास्त्र का प्रारूप तैयार किया गया था। "सबका प्रयास" की भावना में पद्म पुरस्कार विजेताओं के साथ वार्तालाप और ग्रामीण भारत के एक व्यापक अनुभव के लिए गांव के दौरे जैसी पहल के माध्यम से अधिकारी प्रशिक्षु को एक छात्र/नागरिक से एक लोक सेवक में परिवर्तित करने पर जोर दिया गया था। अधिकारी प्रशिक्षुओं ने इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने के लिए दूरस्थ/सीमावर्ती क्षेत्रों के गांवों का भी दौरा किया। पाठ्यचर्या के लिए मॉड्यूलर दृष्टिकोण को सतत श्रेणीबद्ध रूप से शिक्षण और स्व-निर्देशित शिक्षण के सिद्धांत के अनुरूप अपनाया गया था। स्वास्थ्य जांचों के अलावा, 'परीक्षा के बोझ से घिरे एक छात्र' को 'स्वस्थ युवा सिविल सेवक' के रूप में परिवर्तित करने की मुहिम का समर्थन करने के लिए स्वास्थ्य जांच भी की गईं। सभी 488 अधिकारी प्रशिक्षुओं को क्राव मागा और अन्य विभिन्न खेलों में प्राथमिक स्तर का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

 

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प्रधानमंत्री 27 अगस्त को 'खेलो इंडिया डायलॉग' में युवाओं को संबोधित करेंगे
August 26, 2026
'खेलो इंडिया डायलॉग' एक ऐसा साझा मंच होगा, जहां खेल, युवा नेतृत्व, नागरिक कर्तव्य, स्वयंसेवा, फिटनेस और राष्ट्र निर्माण का एक साथ संगम देखने को मिलेगा 
खेलो इंडिया डायलॉग के तहत 'युवा संवाद' में पांच मुख्य थीमों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा: खेल, ओलंपिक आकांक्षाएं, युवा नेतृत्व, विकसित भारत और नशामुक्त युवा

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 27 अगस्त को सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 'खेलो इंडिया डायलॉग' को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को भारत की खेल यात्रा से जोड़ना, उनकी आकांक्षाओं को साझा करना और युवा-नेतृत्व वाले विकसित भारत के निर्माण के लिए उनके विचारों का योगदान प्राप्त करना है।

राष्ट्रीय खेल दिवस 2026 के उत्सव के एक हिस्से के रूप में 'मेरा युवा भारत' (MY भारत) द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम देश भर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रत्येक जिले से दो-दो कॉलेजों के युवाओं की भागीदारी के साथ आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है, जिसमें युवाओं की आकांक्षाओं को राष्ट्रीय विकास के एजेंडे के केंद्र में रखते हुए एक फिट, अनुशासित और खेल-समर्पित राष्ट्र का निर्माण करना शामिल है।

राष्ट्रव्यापी 'खेलो इंडिया डायलॉग' खेल, युवा नेतृत्व, नागरिक जिम्मेदारी, स्वयंसेवा, फिटनेस और राष्ट्र निर्माण को एक साझा मंच पर एक साथ लाएगा। यह युवाओं को देश की खेल संबंधी आकांक्षाओं से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा, साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि उनके विचार और दृष्टिकोण भारत के युवा व खेल इकोसिस्टम पर चल रही निरंतर चर्चा का हिस्सा बनें।

राष्ट्रीय कार्यक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर संवाद आयोजित किए जाएंगे, जिनमें युवा प्रतिभागी, MY भारत के स्वयंसेवक, स्थानीय खिलाड़ी और जन प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस पहल की एक प्रमुख विशेषता खेल में रुचि रखने वाले युवाओं और भारत के अग्रणी एथलीटों व पदक विजेताओं के बीच सीधा संवाद होगी। इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र 'युवा संवाद' होगा, जहां युवा प्रतिभागियों को अपने विचारों, दृष्टिकोणों और आकांक्षाओं को व्यक्त करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। यह संवाद पांच थीम पर आधारित होगा:

  • बेहतर सुविधाओं, कोचिंग, खेल विज्ञान और समावेशी भागीदारी के माध्यम से भारत के खेल इकोसिस्टम में सुधार करना;
  • वैज्ञानिक तरीकों से प्रतिभा की पहचान, पारदर्शी चयन प्रक्रिया और एथलीटों के लंबे समय तक विकास के जरिए 2036 ओलंपिक के लिए नए खिलाड़ियों को तैयार करना;
  • गवर्नेंस प्लेटफ़ॉर्म और 'मेरा युवा भारत' (MY भारत) के वॉलंटियरिंग अभियानों के ज़रिए नए युवा लीडर्स तैयार करना;
  • नागरिक कर्तव्य भाव, भविष्य के लिए उपयोगी कौशल और व्यवस्थित स्वयंसेवा के माध्यम से विकसित भारत के लिए युवाओं को सशक्त बनाना;
  • 'नशा मुक्त युवा' अभियान को बढ़ावा देने के लिए खेल और साथियों के नेटवर्क का उपयोग किया जा रहा है, ताकि मादक पदार्थों के व्यसन के खिलाफ एक मजबूत लड़ाई लड़ी जा सके। इस पहल को 2 अगस्त 2026 को शुरू किए गए प्रधानमंत्री के 100-सप्ताह के राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत आयोजित साप्ताहिक 'जन भागीदारी' कार्यक्रमों से और अधिक बल मिल रहा है।