इस वर्ष के केंद्रीय बजट ने प्रौद्योगिकी, सुधारों और वित्त द्वारा प्रेरित विकसित भारत का खाका प्रस्तुत किया: प्रधानमंत्री
हमने प्रक्रियाओं को सरल बनाया, व्यापार करने में सुगमता बढ़ाई, प्रौद्योगिकी आधारित शासन का विस्तार किया और संस्थानों को मजबूत किया; और आज भी देश 'सुधार एक्सप्रेस' पर सवार है: प्रधानमंत्री
पिछले दशक में हमने अवसंरचना पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित किया है: प्रधानमंत्री
पिछले दशक में हमने बुनियादी ढांचे पर बहुत अधिक फोकस करना जारी रखा है: प्रधानमंत्री
हमने यह सचेत निर्णय लिया है कि भारत का विकास केवल राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों, डिजिटल नेटवर्क और विद्युत प्रणालियों जैसी ठोस परिसंपत्तियों के निर्माण से ही अर्जित होगा: प्रधानमंत्री
ये परिसंपत्तियां आने वाले कई दशकों तक उत्पादकता सृजित करती रहेंगी, इसी कारण सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में लगातार वृद्धि की जा रही है: प्रधानमंत्री
जब सरकार, उद्योग और ज्ञान भागीदार एक साथ आगे बढ़ते हैं, तभी सुधार परिणामों में परिवर्तित होते हैं, तभी घोषणाएं जमीनी स्तर पर उपलब्धियां बन पाती हैं: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज 2026-27 के बजट के बाद आयोजित वेबिनार श्रृंखला के पहले वेबिनार को संबोधित किया, जिसका विषय था "विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी सुधार और वित्त"। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राष्ट्रीय बजट एक नीतिगत रूपरेखा है, न कि अल्पकालिक व्यापारिक दस्तावेज। उन्‍होंने 2047 तक एक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए सामूहिक प्रयास की अपील की।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि बजट की प्रभावशीलता का आकलन ठोस मापदंडों-जैसे कि बुनियादी ढांचे का विस्तार, ऋण प्रवाह को आसान बनाने, व्यापार करने में सुगमता में सुधार और शासन में पारदर्शिता बढ़ाने, साथ ही नागरिकों के जीवन को सरल बनाने और उनके लिए नए अवसर सृजित करने के आधार पर किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा, "इन पहलुओं से संबंधित बजट निर्णय अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती प्रदान करते हैं।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बजट को किसी एकल कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि राष्ट्र निर्माण एक सतत प्रक्रिया है। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, "प्रत्येक बजट एक बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ने का एक चरण है और वह बड़ा लक्ष्य 2047 तक एक विकसित भारत का निर्माण करना है। इसलिए, प्रत्येक सुधार, प्रत्येक आवंटन और प्रत्येक परिवर्तन को इस लंबी यात्रा का अभिन्न अंग माना जाना चाहिए।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये वार्षिक बजट-पश्चात वेबिनार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ये सत्र केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि एक प्रभावी विचार-मंथन सत्र बनने चाहिए। श्री मोदी ने कहा, “हितधारकों के अनुभव और व्यावहारिक चुनौतियों पर आधारित सुझाव आर्थिक रणनीतियों को और परिष्कृत करने तथा समाधान खोजने में निश्चित रूप से सहायक होंगे।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब उद्योग, शिक्षाविद, विश्लेषक और नीति निर्माता एक साथ मिलकर विचार करते हैं, तो योजनाओं का कार्यान्वयन बेहतर होता है और परिणाम अधिक सटीक होते हैं, जो इस वेबिनार श्रृंखला का मूल आधार है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्‍सा बीत चुका है, जो सेवारत लोगों के जीवन में एक महत्वपूर्ण दौर है। उन्होंने कहा कि देश अब अपने विकास के एक महत्वपूर्ण चरण में है, जहां अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। पिछले दशकों में भारत की असाधारण गतिशीलता को रेखांकित करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि यह प्रगति संयोगवश नहीं हुई है, बल्कि दृढ़ विश्वास से प्रेरित सुधारों का परिणाम है। श्री मोदी ने कहा, “सरकार ने प्रक्रियाओं को सरल बनाया है, व्यापार करने में सुगमता को बढ़ाया है, प्रौद्योगिकी आधारित शासन का विस्तार किया है और संस्थानों को सुदृढ़ किया है, जिससे यह साबित होता है कि देश आज भी सुधार की राह पर अग्रसर है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि नीतिगत अभिप्राय महत्वपूर्ण है, लेकिन भारत के विकास के वर्तमान चरण में उत्कृष्ट कार्यान्वयन पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। श्री मोदी ने कहा, “सुधारों का मूल्यांकन उनकी घोषणा के आधार पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उनके प्रभाव के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक सेवा वितरण में जवाबदेही, गति और पारदर्शिता लाने के लिए एआई, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स को एकीकृत करने का आग्रह किया।” उन्होंने यह भी कहा कि शिकायत निवारण प्रणालियों के माध्यम से प्रभाव की निगरानी की जानी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने दीर्घकालिक उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में हुई उल्लेखनीय वृद्धि की ओर इंगित किया। श्री मोदी ने कहा, “पिछले 11 वर्षों में, यह प्रावधान लगभग 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर चालू बजट में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। यह निवेश निजी क्षेत्र को अवसंरचना और नवाचार में अधिक भागीदारी करने का स्पष्ट संकेत देता है।”

प्रधानमंत्री ने उद्योग और वित्तीय संस्थानों से नई ऊर्जा के साथ आगे आने का आह्वान किया और अवसंरचना में अधिक भागीदारी, वित्तपोषण मॉडल में अधिक नवाचार और उभरते क्षेत्रों में मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि लागत-लाभ विश्लेषण और जीवन-चक्र लागत को सर्वोपरि रखते हुए परियोजना स्वीकृति पद्धति और मूल्यांकन गुणवत्ता को सुदृढ किया जाना चाहिए ताकि अपव्यय और विलंब को समाप्त किया जा सके।

प्रधानमंत्री ने वित्तीय संरचना पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार विदेशी निवेश ढांचे को और सरल बना रही है ताकि यह प्रणाली अधिक पूर्वानुमानित और निवेशक-अनुकूल बन सके। उन्होंने बांड बाजारों को अधिक सक्रिय बनाने और बांडों की खरीद-बिक्री को सरल बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर प्रकाश डाला और इन सुधारों को दीर्घकालिक विकास के लिए आवश्यक कारक बताया। श्री मोदी ने कहा, "पूर्वानुमान सुनिश्चित करना, तरलता बढ़ाना और जोखिम को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने तथा निरंतर विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए नए इंस्‍ट्रूमेंट प्रस्‍तुत करना आवश्यक है।" श्री मोदी ने हितधारकों से बांड बाजार और विदेशी निवेश ढांचे को मजबूत करने में मदद के लिए वैश्विक सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों से सीखने का भी आग्रह किया।

विदेशी पूंजी को निरंतर आकर्षित करने और दीर्घकालिक वित्तपोषण में सुधार लाने के लिए, प्रधानमंत्री ने विदेशी निवेश ढांचे में और सरलीकरण की घोषणा की। इस कार्यनीति में अधिक सक्रिय बांड बाजारों का विकास करना, बांड व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाना और कठोर लागत-लाभ विश्लेषण और जीवन-चक्र लागत के माध्यम से परियोजना स्वीकृति पद्धतियों को मजबूत करना शामिल है। श्री मोदी ने कहा, "इन कदमों का उद्देश्य जोखिम का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करते हुए प्रणाली को अधिक पूर्वानुमानित और निवेशक-अनुकूल बनाना है।"

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी नीति एक ढांचा तैयार कर सकती है, लेकिन उसकी अंतिम सफलता सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। उन्होंने उद्योग जगत से नए निवेश और नवाचार के साथ आगे आने का आह्वान किया, साथ ही वित्तीय संस्थानों और विश्लेषकों से व्यावहारिक समाधान तैयार करने और बाजार के विश्वास को मजबूत करने में सहायता करने का आग्रह किया। श्री मोदी ने कहा, "जब सरकार, उद्योग और ज्ञान साझेदार एकजुट होकर आगे बढ़ते हैं, तभी सुधार सफलतापूर्वक परिणामों में परिवर्तित होते हैं। बजट घोषणाएं केवल इस सामूहिक समन्‍वय के माध्यम से ही जमीनी स्तर पर ठोस परिणामों में परिवर्तित होती हैं।"

प्रधानमंत्री ने सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और शिक्षा जगत के बीच एक साझा संकल्प के रूप में "सुधार साझेदारी चार्टर" विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बजट के बाद आयोजित वेबिनारों का उद्देश्य अब बजट के कंटेन्‍ट पर चर्चा करना नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर इसके त्वरित और सरल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना है।

प्रधानमंत्री ने वित्तीय संस्थानों, बाजारों, उद्योग, पेशेवरों और नवप्रवर्तकों सहित सभी हितधारकों से इस बजट द्वारा प्रदान किए गए नए अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने उन्हें इन संभावनाओं से गहराई से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि उनकी सक्रिय भागीदारी से योजनाओं के कार्यान्वयन में सुधार होगा, जबकि उनके फीडबैक और सहयोग से बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे। उन्होंने सभी से मिलकर सुधार और विकास करने की अपील की ताकि एक ऐसे भविष्य का निर्माण हो सके जहां विकसित भारत का सपना जल्द से जल्द साकार हो सके।

प्रधानमंत्री ने आज के विचार-विमर्शों पर पूरा भरोसा जताते हुए इस बात पर बल दिया कि प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर ही ध्यान केंद्रित रहना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बजट को परिष्कृत करने के लिए उससे पहले परामर्श आयोजित किए जाते हैं, जबकि बजट के बाद आयोजित होने वाले वेबिनार विशेष रूप से बजट को यथासंभव सरलतम माध्यमों से "शीघ्रातिशीघ्र" लागू करने के लिए तैयार किए गए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने यह कहते हुए अपने संबोधन का समापन किया कि यदि हितधारक सामूहिक हित को ध्यान में रखते हुए विचार-विमर्श करें, तो ये वेबिनार वास्तव में एक जीवंत अर्थव्यवस्था के द्वार खोल देंगे।

पूरा भाषण पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Engineering goods exports up 10.4% in January,2026, crosses $100 billion mark in April-January Period of FY26

Media Coverage

Engineering goods exports up 10.4% in January,2026, crosses $100 billion mark in April-January Period of FY26
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM’s address at the News18 Rising Bharat Summit
February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।