इजरायल की यात्रा करने वाला पहला भारतीय प्रधानमंत्री बनना मेरे लिए गर्व की बात: प्रधानमंत्री मोदी
मेरी इजरायल यात्रा दोनों देशों के बीच सदियों पुराने मजबूत संबंध का प्रतीक: पीएम मोदी
हमारे युवा कुशल एवं प्रतिभाशाली हैं और देश को आगे ले जाने में उनकी अहम भूमिका: प्रधानमंत्री

देवियों और सज्जनों

शलोम। मुझे इजरायल आने की बेहद खुशी है। पहले भारतीय प्रधानमंत्री के रूप में इजरायल की ऐतहासिक यात्रा करना मेरे लिए सम्मान की बात है। मैं अपने मित्र प्रधानमंत्री नेतन्याहू का उनके निमंत्रण और गर्मजोशी से की गई अगवानी के लिए आभार प्रकट करता हूं। मेरी यह यात्रा दोनों देशों के समाज के बीच सदियों पुराने सशक्त संबंधों का जश्न बनाने का अवसर है। इन मजबूत संबंधों की बुनियाद पर ही दोंनों देशों के बीच पच्चीस वर्ष पहले बने पूर्ण राजनयिक संबंध लगातार प्रगति कर रहे हैं।

मित्रों

इजरायल के लोगों ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर राष्ट्र का निमार्ण किया है। यहां के लोंगों ने अपनी कड़ी मेहनत और नवाचार से देश को मजबूत बनाया है। आप लोंगों ने विषम परिस्थितियों में भी चुनौतियों को संभावनाओं में तब्दील किया है। भारत आपकी उपलब्धियों की सराहना करता है।

आज चार जुलाई है। आज से ठीक 41 वर्ष पहले आपरेशन एंटेबी को अंजाम दिया गया था। यह वह दिन था जब आपके प्रधानमंत्री और मेरे मित्र बीबी ने कई इजरायली बंधकों की जान बचाने के अभियान में अपने बड़े माई योनी को खोया था। आपके हीरो हमारी युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा हैं।     

मित्रों

भारत की सभ्यता पुरानी है लेकिन यह एक युवा देश है। यहां 80 करोड़ लोग 35 साल से कम उम्र के हैं। भारत के दक्ष और प्रतिभावान युवा देश की प्रेरक शक्ति भी हैं। वे भारत,उसके उद्योग, उसकी अर्थव्यवस्था और कारोबार करने के तौर तरीकों में बड़े बदलाव की मेरी सोच को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

मित्रों

ऊंची ग्रोथ और समग्र विकास के लिए भारत इजरायल को एक महत्वपूर्ण साझीदार मानता है। विकास की चुनौतियों से निबटने के लिए विज्ञान,प्रैाद्योगिकी,नवाचार और उच्चत तकनीकी शिक्षा पर निर्भरता हम दोंनों के लिए समान रुप से जरुरी है। ये ऐसे क्षेत्र हैं जो दोनों देशों के दक्ष और उद्यमी युवाओं को एक साथ जोड़ने का काम करते हैं। हम आर्थिक समृद्धि की साझेदारी बनाने के साथ साथ अपने समाज को आतंकवाद के खतरे से सुरक्षित रखने में भी सहयोग कर रहे हैं। 

प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ मेरी वार्ता इन सभी क्षेत्रों में प्रगतिशील साझेदारी की संभावनाओं की रुप रेखा तय करेगी। मैं इस अवसर पर इजरायल में रह रहे भारतीय समुदाय के साथ ही भारतीय मूल के उन यहूदियों से भी मिलना चाहूंगा जिन्होंने हमारे समाज को जोड़ने और समृद्ध बनाने का काम किया है। 

 

 

 

महामहिम और मित्रों 

मेरी यह यात्रा परस्पर संबधों का एक नया मार्ग प्रशस्त करने वाली है। यह एक ऐसी यात्रा है जिससे दोनों देशों के लोगों और समाज की भलाई का मार्ग निकलेगा। जैसे जैसे हम आगे बढ़ेंगे इजरायल के साथ एक मजबूत और अटूट साझेदारी मेरा मुख्य उद्देश्य होगा। गर्मजोशी के साथ किए गए इस स्वागत के लिए मैं आप सभी का एक बार फिर से आभार व्यक्त करता हूं।
धन्यवाद। बहुत बहुत धन्यवाद

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पीएम ने 53वीं प्रगति बैठक की अध्यक्षता की
August 25, 2026
प्रधानमंत्री कार्यालयपीएम ने रेलवे, सड़क और ऊर्जा क्षेत्र की छह अहम ढ़ांचागत परियोजनाओं की समीक्षा की
समीक्षा किए गए प्रोजेक्ट्स 9 राज्यों में फैले हैं और इनमें कुल ₹30,000 करोड़ से ज़्यादा का निवेश किया गया है
पीएम ने कहा, ढ़ांचागत परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों या पैकेज के बजाय एकीकृत प्रयास के तौर पर देखा जाना चाहिए
पीएम ने परियोजनाओं को लागू करने के सभी चरणों में लगातार सुधार और मंत्रालयों तथा राज्यों में सक्रियता से काम करने की संस्कृति पर ज़ोर दिया
पीएम ने कहा, रफ्तार के साथ-साथ गुणवत्ता भी ज़रूरी है
एग्रीस्टैक की समीक्षा करते हुए, पीएम ने कृषि डेटा से ज़्यादा फायदा उठाने के लिए एआई समेत नवीन डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया
साइबर फ्रॉड और 'डिजिटल अरेस्ट' के मामले में, पीएम ने प्रशिक्षण, जन-जागरूकता, साइबर-सुरक्षा से जुड़ी शिक्षा और आपसी तालमेल के साथ कार्रवाई करने पर ज़ोर दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सक्रिय शासन और समय पर काम पूरा करने के लिए बनाए गए आईसीटी-आधारित, मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म प्रगति की 53वीं बैठक की आज सेवा तीर्थ में अध्यक्षता की।

बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने रेलवे, सड़क और ऊर्जा क्षेत्रों से जुड़ी छह प्रमुख बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं और इनकी कुल लागत ₹30,000 करोड़ से अधिक है। संपर्क को मजबूत करने, औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के लिए महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा करते वक्त समय-सीमा का पालन, अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल, लंबित मुद्दों के समाधान और काम को तेजी से पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ढ़ांचागत परियोजनाओं में देरी से सिर्फ़ लागत ही नहीं बढ़ती, बल्कि नागरिकों, व्यवसायों और अर्थव्यवस्था को मिलने वाले लाभ भी टल जाते हैं। उन्होंने कहा कि ढ़ांचागत परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों, टुकड़ों या पैकेजों के बजाय एक एकीकृत इकाई के तौर पर देखा और उनकी निगरानी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पैकेजों में हो रही प्रगति का नतीजा आखिर में संपूर्ण परियोजना के वक्त पर पूरा होने और उसके चालू होने के रूप में निकलना चाहिए। इसलिए मंत्रालयों और राज्यों से कहा गया कि वे काम को शुरू से लेकर अंत तक पूरा करने का नज़रिया अपनाएं और उन अहम कमियों को दूर करें, जिनसे पूरे प्रोजेक्ट के चालू होने और फ़ायदे मिलने में देरी हो सकती है। उन्होंने मंत्रालयों और राज्य सरकारों में सक्रिय कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देने और परियोजनाओं को लागू करने के हर स्तर पर ज़्यादा ज़िम्मेदारी लेने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने खास तौर पर बड़े परिवहन और ढ़ांचागत परियोजनाओं की योजना बनाते समय, जहाँ भी संभव हो, ढ़ांचागत सेवाओं के लिए कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर की संभावना तलाशने पर ज़ोर दिया। उन्होंने मंत्रालयों और राज्यों से कहा कि वे योजना बनाने के चरण में ही ऐसी एकीकृत कार्यप्रणालियों पर विचार करें और उनकी तकनीकी व आर्थिक व्यवहार्यता को ध्यान में रखें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि काम को तेज़ी से पूरा करने के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मंत्रालयों, राज्यों और काम को लागू करने वाली एजेंसियों से आधुनिक तकनीकों को अपनाने और हर चरण पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने व निगरानी को मज़बूत करने का आह्वान किया।

डिजिटल कृषि मिशन के तहत एग्रीस्टैक की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कृषि डेटा से ज़्यादा फ़ायदा उठाने के लिए एआई जैसी नई डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल करने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इनपुट प्लानिंग से लेकर प्रोसेसिंग तक, पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला में डेटा इकोसिस्टम का असरदार ढंग से इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि बेहतर जानकारी के आधार पर कदम उठाए जा सकें, सही लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके और डेटा के आधार पर फ़ैसले लिए जा सकें। उन्होंने एग्रीस्टैक व्यवस्था बनाने में राज्यों और केंद्र सरकार की कोशिशों की तारीफ की और किसानों के लिए बेहतर नतीजे पाने के लिए इसके इस्तेमाल को और मज़बूत करने का आह्वान किया।

साइबर धोखाधड़ी के मामलों, जिनमें डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं भी शामिल हैं, की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण, जागरूकता और शिक्षा पर लगातार ध्यान देकर ऐसे मामलों की रोकथाम को मज़बूत किया जाना चाहिए। उन्होंने लगातार और खास तौर पर बुज़ुर्गों, युवाओं और कमज़ोर वर्गों के लिए जागरूकता अभियान चलाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, ताकि उन्हें धोखाधड़ी के आम तरीकों, चेतावनी के संकेतों और सुरक्षित डिजिटल तौर-तरीकों के बारे में जानकारी दी जा सके। उन्होंने इससे जुड़े कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए नियमित ट्रेनिंग की भी बात कही, ताकि साइबर धोखाधड़ी के नए तरीकों की पहचान की जा सके और उन पर तेज़ी से कार्रवाई की जा सके।